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राष्ट्रीय · राजव्यवस्था

संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 की हार

18 अप्रैल 2026 · Raj Study संपादकीय टीम

याद रखें · एक पंक्ति में

विधेयक विशेष बहुमत (अनुच्छेद 368) से चूका (528 में से 298 मत, 352 आवश्यक); 106वां संशोधन (2023) 16 अप्रैल 2026 से लागू।

क्या हुआ

संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक, 2026 की संसद में पराजय चर्चा में रही। संविधान संशोधन अनुच्छेद 368 के तहत होते हैं, जिनके लिए प्रायः विशेष बहुमत आवश्यक है — प्रत्येक सदन में उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई तथा सदन की कुल सदस्यता का बहुमत; कुछ संशोधनों हेतु आधे राज्यों का अनुसमर्थन भी चाहिए। किसी संशोधन विधेयक का पराजित होना दर्शाता है कि उसे आवश्यक विशेष बहुमत प्राप्त नहीं हुआ। यह संविधान की कठोरता व लचीलेपन के संतुलन तथा संसदीय प्रक्रिया की गंभीरता को रेखांकित करता है।

मुख्य तथ्य

  1. 1संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक, 2026 की पराजय।
  2. 2संशोधन — अनुच्छेद 368; विशेष बहुमत आवश्यक।
  3. 32/3 उपस्थित व मतदान + कुल सदस्यता का बहुमत।
  4. 4कुछ संशोधनों हेतु आधे राज्यों का अनुसमर्थन।
  5. 5मूल ढाँचा सिद्धांत — केशवानंद भारती वाद।

परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है

नारी शक्ति वंदन अधिनियम, अनुच्छेद 368, परिसीमन व विशेष बहुमत राजव्यवस्था में अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं।

स्थायी GK: संविधान संशोधन — अनुच्छेद 368। विशेष बहुमत — 2/3 उपस्थित व मतदान + कुल सदस्यता का बहुमत। कुछ हेतु आधे राज्यों का अनुसमर्थन। केशवानंद भारती — मूल ढाँचा।

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