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📚 भारतीय संविधान, राजनीतिक व्यवस्था एवं शासन

भारतीय संविधान की 12 अनुसूचियाँ (Schedules) - RAS नोट्स

12 Schedules of the Indian Constitution - RAS Notes

⏱ 12 मिनटintermediate✓ अपडेटेड: मार्च 2026· Indian Constitution, Political System & Governance

परिचय एवं परीक्षा प्रासंगिकता

भारतीय संविधान की अनुसूचियां (Schedules) संविधान के सबसे महत्वपूर्ण भाग हैं जो विभिन्न संवैधानिक प्रावधानों को व्यावहारिक रूप देती हैं। RPSC RAS परीक्षा में भारतीय संविधान से संबंधित प्रश्न अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं और अनुसूचियां इसका केंद्रबिंदु हैं। प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) में इस विषय से नियमित रूप से प्रश्न आए हैं और मुख्य परीक्षा (Mains) में विस्तृत प्रश्न पूछे जाते हैं।

अनुसूचियां संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों (जैसे प्रथम अनुसूची — अनुच्छेद 1 व 4) से जुड़ी विभिन्न संवैधानिक विषयों की विस्तृत सूचियां होती हैं। ये संविधान के कार्यान्वयन के लिए आवश्यक विवरण प्रदान करती हैं। राजस्थान के भाग-ख राज्य से पूर्ण राज्य बनने की प्रक्रिया में प्रथम अनुसूची की विशेष भूमिका रही है।

मुख्य अवधारणाएं

1. अनुसूचियों का अर्थ एवं परिभाषा

संविधान की अनुसूचियां ऐसी तालिकाएं होती हैं जिनमें विभिन्न संवैधानिक प्रावधानों के विस्तृत विवरण दिए गए हैं। भारतीय संविधान में कुल 12 अनुसूचियां हैं। ये अनुसूचियां संविधान के विभिन्न भागों से जुड़ी होती हैं और राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, सीमाओं, भाषाओं आदि की जानकारी प्रदान करती हैं। प्रत्येक अनुसूची का अपना विशेष महत्व और उद्देश्य है।

क्रमविषयसंबंधित अनुच्छेदकब जुड़ी
प्रथमराज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के नाम व क्षेत्रअनु. 1, 4मूल संविधान, 1950
द्वितीयराष्ट्रपति, राज्यपाल, स्पीकर, सभापति, न्यायाधीश, CAG आदि का वेतन-भत्ताअनु. 59, 65, 75, 97, 125, 148, 158, 164, 186, 221मूल संविधान, 1950
तृतीयशपथ व प्रतिज्ञान के प्रारूपअनु. 75, 99, 124, 148, 164, 188, 219मूल संविधान, 1950
चतुर्थराज्यसभा में सीटों का आवंटनअनु. 4, 80मूल संविधान, 1950
पंचमअनुसूचित क्षेत्रों व अनुसूचित जनजातियों का प्रशासनअनु. 244(1)मूल संविधान, 1950
षष्ठअसम, मेघालय, त्रिपुरा, मिज़ोरम के जनजातीय क्षेत्रों का प्रशासनअनु. 244(2), 275(1)मूल संविधान, 1950
सप्तमसंघ सूची, राज्य सूची, समवर्ती सूची (शक्ति-विभाजन)अनु. 246मूल संविधान, 1950
अष्टम22 आधिकारिक भाषाएंअनु. 344(1), 351मूल संविधान, 1950 (मूलतः 14 भाषाएं; बाद के संशोधनों से 22)
नवमभूमि सुधार व अन्य कानूनों की न्यायिक समीक्षा से सुरक्षाअनु. 31Bप्रथम संशोधन, 1951
दशमदल-बदल विरोधी कानूनअनु. 102(2), 191(2)52वाँ संशोधन, 1985
एकादशपंचायतों के 29 विषय/अधिकारअनु. 243G73वाँ संशोधन, 1992
द्वादशनगरपालिकाओं के 18 विषय/अधिकारअनु. 243W74वाँ संशोधन, 1992

2. पहली अनुसूची (First Schedule)

प्रथम अनुसूची भारतीय संविधान का सबसे महत्वपूर्ण भाग है। इसमें भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सूची दी गई है। वर्तमान में भारत में 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश हैं। इसमें प्रत्येक राज्य के नाम, उनके गठन का तरीका और सीमाओं का विवरण मिलता है। राजस्थान को पहली अनुसूची में शामिल करने का इतिहास बहुत महत्वपूर्ण है।

3. दूसरी अनुसूची (Second Schedule)

द्वितीय अनुसूची भारतीय संविधान के अनुच्छेद 59, 65, 75, 97, 125, 148, 158, 164, 186 व 221 से संबंधित है। इसमें भारत के राष्ट्रपति, राज्यपाल, लोकसभा अध्यक्ष, राज्यसभा के सभापति, राज्य विधानसभा अध्यक्ष, सर्वोच्च न्यायालय व उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों तथा CAG को दिए जाने वाले वेतन, भत्ते और पेंशन का विवरण दिया गया है — प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री का वेतन इस अनुसूची में शामिल नहीं है। ये आंकड़े समय-समय पर संसद द्वारा संशोधित किए जाते हैं।

4. तीसरी अनुसूची (Third Schedule)

तृतीय अनुसूची में संविधान के विभिन्न उच्च पदाधिकारियों द्वारा ली जाने वाली शपथ और प्रतिज्ञा का विवरण दिया गया है। इसमें राष्ट्रपति, मंत्रियों, संसद सदस्यों, न्यायाधीशों आदि द्वारा दी जाने वाली शपथ का उल्लेख है। ये शपथें संवैधानिक मूल्यों और भारत की संप्रभुता के प्रति आस्था प्रदर्शित करती हैं।

5. चौथी अनुसूची (Fourth Schedule)

चतुर्थ अनुसूची राज्यसभा में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधित्व के बारे में जानकारी देती है। इसमें प्रत्येक राज्य के लिए राज्यसभा में आवंटित सीटों की संख्या का विवरण दिया गया है। राजस्थान को राज्यसभा में 10 सीटें आवंटित हैं जो इस अनुसूची में दर्ज हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

कुल अनुसूचियों की संख्या: भारतीय संविधान में वर्तमान में 12 अनुसूचियां हैं। 73वें और 74वें संवैधानिक संशोधन के बाद 11वीं और 12वीं अनुसूचियां जोड़ी गईं।

पांचवीं अनुसूची: इसमें अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन और नियंत्रण संबंधी प्रावधान हैं। राजस्थान के भी कुछ क्षेत्रों को अनुसूचित क्षेत्र के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

छठी अनुसूची: यह असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन के लिए विशेष प्रावधान देती है। राजस्थान पर इसका सीधा प्रभाव नहीं है परंतु देश की संघीय संरचना को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

सातवीं अनुसूची: यह केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन करती है। इसमें संघ सूची (Union List), राज्य सूची (State List) और समवर्ती सूची (Concurrent List) दी गई है। राजस्थान की विधायिका के अधिकार इसी अनुसूची पर आधारित हैं।

सूचीविषयों की संख्याउदाहरण
संघ सूची (Union List)98 (मूलतः 97)रक्षा, विदेश मामले, रेलवे, मुद्रा
राज्य सूची (State List)59 (मूलतः 66)पुलिस, लोक व्यवस्था, कृषि, स्थानीय शासन
समवर्ती सूची (Concurrent List)52 (मूलतः 47)शिक्षा, वन, जनसंख्या नियंत्रण, विवाह-तलाक

आठवीं अनुसूची: इसमें भारत की 22 भाषाएं सूचीबद्ध हैं — ध्यान दें, अंग्रेज़ी इस सूची में शामिल नहीं है। मूल संविधान (1950) में 14 भाषाएं थीं; बाद के संशोधनों से यह संख्या बढ़कर 22 हुई। राजस्थान में बोली जाने वाली राजस्थानी/मारवाड़ी भाषा अभी इस सूची में शामिल नहीं है (इसे शामिल करने की मांग लंबित है)।

आठवीं अनुसूची — 14 से 22 भाषाओं तक
  1. 1950मूल संविधान में 14 भाषाएं शामिल
  2. 1967 (21वाँ संशोधन)सिंधी जोड़ी गई — कुल 15
  3. 1992 (71वाँ संशोधन)कोंकणी, मणिपुरी, नेपाली जोड़ी गईं — कुल 18
  4. 2003 (92वाँ संशोधन)बोडो, डोगरी, मैथिली, संथाली जोड़ी गईं — कुल 22

राजस्थान विशेष

राजस्थान की स्थापना के संदर्भ में प्रथम अनुसूची की विशेष भूमिका रही है। 30 मार्च 1949 को जयपुर, जोधपुर, बीकानेर व जैसलमेर जैसी रियासतों के विलय से वृहद राजस्थान (Greater Rajasthan) बना; राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के अंतर्गत 1 नवंबर 1956 को राजस्थान भाग-ख राज्य (Part B State) से पूर्ण राज्य बना और तभी से यह प्रथम अनुसूची में वर्तमान स्वरूप में सूचीबद्ध है।

राजस्थान विधान सभा में 200 सीटें हैं जिनमें से कुछ सीटें अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित हैं — यह आरक्षण अनुच्छेद 332 (लोकसभा में अनुच्छेद 330) के अंतर्गत है, पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत नहीं (पांचवीं अनुसूची अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन से संबंधित है)। राजस्थान में कई अनुसूचित जनजातियां हैं जैसे भील, गरासिया, सहरिया आदि।

राजस्थान राज्यसभा में 10 सीटें पाता है जो चौथी अनुसूची में दर्ज हैं। लोकसभा में राजस्थान के 25 प्रतिनिधि हैं जिनमें से कुछ आरक्षित सीटें हैं।

परीक्षा पैटर्न

प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): इस परीक्षा में अनुसूचियों से प्रश्न बहुविकल्पीय (MCQ) रूप में पूछे जाते हैं। सामान्यतः निम्नलिखित विषय पूछे जाते हैं:

  • अनुसूचियों की कुल संख्या और उनका वर्गीकरण
  • विभिन्न अनुसूचियों से संबंधित विशिष्ट जानकारी
  • राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सूची
  • राज्यसभा और लोकसभा में प्रतिनिधित्व
  • भाषाओं की आधिकारिक सूची
  • केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन

मुख्य परीक्षा (Mains): इस परीक्षा में निबंध और विस्तृत उत्तर वाले प्रश्न पूछे जाते हैं। उदाहरण के लिए:

  • "भारतीय संविधान की अनुसूचियों का महत्व और उनकी संरचना पर विस्तृत चर्चा करें।"
  • "सातवीं अनुसूची में दिया गया शक्तियों का विभाजन भारतीय संघवाद को कैसे प्रभावित करता है?"
  • "राजस्थान की संवैधानिक स्थिति और अनुसूचियों से उसका संबंध समझाएं।"

स्मरण युक्तियां

12 अनुसूचियों को याद रखने की विधि:

अनुसूचियों को याद रखने के लिए निम्नलिखित क्रम का उपयोग करें:

  1. प्रथम - राज्य और केंद्र शासित प्रदेश
  2. द्वितीय - पदाधिकारियों के वेतन-भत्ते
  3. तृतीय - शपथ और प्रतिज्ञा
  4. चतुर्थ - राज्यसभा प्रतिनिधित्व
  5. पंचम - अनुसूचित क्षेत्र
  6. षष्ठ - जनजातीय क्षेत्र
  7. सप्तम - शक्तियों का विभाजन
  8. अष्टम - आधिकारिक भाषाएं
  9. नवम - भूमि सुधार कानूनों की न्यायिक समीक्षा से सुरक्षा (प्रथम संशोधन, 1951)
  10. दशम - दल-बदल विरोधी कानून (52वाँ संशोधन, 1985)
  11. एकादश - पंचायतें (73वाँ संशोधन, 1992)
  12. द्वादश - नगर निकाय (74वाँ संशोधन, 1992)

राजस्थान से संबंधित प्रमुख तथ्य:

  • राजस्थान 1 नवंबर 1956 को भाग-ख राज्य से पूर्ण राज्य बना और प्रथम अनुसूची में वर्तमान स्वरूप में सूचीबद्ध हुआ
  • राजस्थान राज्यसभा में 10 सीटें रखता है (चौथी अनुसूची)
  • लोकसभा में राजस्थान के 25 प्रतिनिधि हैं
  • विधान सभा में 200 सीटें हैं
  • SC/ST आरक्षित सीटें अनुच्छेद 332 (विधानसभा)/330 (लोकसभा) के अंतर्गत आवंटित हैं, पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत नहीं
  • हिंदी राजस्थान की प्रमुख भाषा है; राजस्थानी/मारवाड़ी आठवीं अनुसूची में अभी शामिल नहीं है

परीक्षा में सफलता के लिए सुझाव:

संविधान की अनुसूचियों को समझने के लिए केवल रटना पर्याप्त नहीं है। प्रत्येक अनुसूची के उद्देश्य और महत्व को समझें। विभिन्न संवैधानिक संशोधनों को भी ध्यान में रखें क्योंकि कई अनुसूचियां इनके कारण संशोधित हुई हैं। राजस्थान के संदर्भ में विशेष जानकारी रखें क्योंकि RPSC परीक्षा राजस्थान-केंद्रित होती है।

⚡ त्वरित रिवीजन — One-Liners

  • •अनुच्छेद 32 को डॉ. अंबेडकर ने 'संविधान की आत्मा' कहा था।
  • •DPSP भाग IV में हैं; ये वाद योग्य नहीं हैं किन्तु शासन में मूलभूत हैं।
  • •भारतीय संसद की राज्यसभा में अधिकतम 250 सदस्य हो सकते हैं; 12 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत।
  • •73वें संविधान संशोधन (1992) द्वारा पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा मिला।
  • •सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना 28 जनवरी 1950 को हुई; इसके पास मूल, अपील और सलाहकार क्षेत्राधिकार है।
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  1. RAS 2024

    भारत के संविधान में किस वर्ष यह जोड़ा गया कि राज्य आर्थिक या अन्य अक्षमताओं के कारण किसी भी नागरिक को निःशुल्क विधिक सहायता सुनिश्चित करेगा ?

    1. (A) 1978
    2. (B) 1976
    3. (C) 1975
    4. (D) 1979

    उत्तर: (B) 1976

  2. RAS 2023

    भारत के संविधान की निम्नलिखित में से कौन-सी अनुसूची प्रथम संविधान संशोधन द्वारा संविधान में जोड़ी गई थी?

    1. (A) छठी
    2. (B) दसवीं
    3. (C) नौवीं
    4. (D) सातवीं

    उत्तर: (C) नौवीं

  3. RAS 2021

    राज्य विधान परिषद के उन्मूलन के लिए भारत के संविधान के अनुच्छेद 169 के अंतर्गत किसी राज्य विधान सभा द्वारा पारित संकल्प के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

    1. (A) यह राज्यपाल पर संकल्प को राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित करने का दायित्व आरोपित करता है।
    2. (B) यह संघ सरकार पर संसद में विधायन प्रारंभ करने हेतु कार्रवाई करने का दायित्व आरोपित नहीं करता है।
    3. (C) यह राज्यपाल पर संकल्प को राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित करने का दायित्व आरोपित नहीं करता है।
    4. (D) यह संघ सरकार पर संसद में विधायन प्रारंभ करने हेतु कार्रवाई करने का दायित्व आरोपित करता है।

    उत्तर: (B) यह संघ सरकार पर संसद में विधायन प्रारंभ करने हेतु कार्रवाई करने का दायित्व आरोपित नहीं करता है।

  4. RAS 2021

    अभिकथन (a) : नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक का कर्तव्य केवल व्यय की वैधता सुनिश्चित करना ही नहीं, बल्कि उसका औचित्य भी सुनिश्चित करना है। कारण (r) : उसे वित्तीय प्रशासन के क्षेत्र में संविधान और संसद की विधियों को बनाए रखना होता है।

    1. (A) (a) असत्य है किंतु (r) सत्य है
    2. (B) (a) और (r) दोनों सत्य हैं तथा (r), (a) की सही व्याख्या है
    3. (C) (a) सत्य है किंतु (r) असत्य है
    4. (D) (a) और (r) दोनों सत्य हैं किंतु (r), (a) की सही व्याख्या नहीं है

    उत्तर: (B) (a) और (r) दोनों सत्य हैं तथा (r), (a) की सही व्याख्या है

  5. RAS 2021

    भारत के संविधान के अनुच्छेद 103 के अंतर्गत, राष्ट्रपति लोक सभा के सदस्यों की निरर्हता संबंधी किसी प्रश्न पर कोई निर्णय देने से पहले निम्नलिखित में से किस प्राधिकारी की राय प्राप्त करेगा?

    1. (A) लोक सभा अध्यक्ष
    2. (B) निर्वाचन आयोग
    3. (C) उच्चतम न्यायालय
    4. (D) महान्यायवादी (अटॉर्नी जनरल)

    उत्तर: (B) निर्वाचन आयोग

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