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📚 भारतीय संविधान, राजनीतिक व्यवस्था एवं शासन

भारतीय संघवाद: केंद्र-राज्य संबंध, 7वीं अनुसूची | RAS

Indian Federalism: Centre-State Relations | RAS

⏱ 12 मिनटintermediate✓ अपडेटेड: मार्च 2026· Indian Constitution, Political System & Governance

परिचय एवं परीक्षा प्रासंगिकता

संघवाद भारतीय संविधान की एक मौलिक विशेषता है जो भारत के राजनीतिक ढांचे को परिभाषित करती है। RPSC RAS परीक्षा में संघवाद एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है क्योंकि यह केंद्र-राज्य संबंधों, शक्तियों के विभाजन और भारतीय लोकतंत्र की बुनियाद को समझने के लिए आवश्यक है। पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों में इस विषय से नियमित रूप से प्रश्न आए हैं।

मुख्य अवधारणाएं

1. संघवाद की परिभाषा और विशेषताएं

संघवाद एक राजनीतिक व्यवस्था है जिसमें सत्ता केंद्रीय सरकार और राज्य सरकारों के बीच विभाजित होती है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 1 में भारत को "राज्यों का संघ" (Union of States) कहा गया है। संघवादी व्यवस्था की प्रमुख विशेषताएं हैं - लिखित संविधान, कानूनी सर्वोच्चता, शक्तियों का विभाजन, स्वतंत्र न्यायपालिका, और दो स्तरीय सरकार। भारतीय संघ अखंडनीय है, जिसका अर्थ है कि राज्य संघ से अलग नहीं हो सकते; संसद राज्यों की सीमाएं और नाम बदल सकती है। इसीलिए डॉ. अंबेडकर ने इसे "अखंडनीय संघ, पर विखंडनीय राज्य" कहा।

2. शक्तियों का विभाजन - तीन सूचियां

भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची में शक्तियों का विभाजन तीन सूचियों में किया गया है। संघ सूची (केंद्रीय सूची) में वर्तमान में 98 विषय हैं जैसे विदेश नीति, रक्षा, मुद्रा और डाक सेवा। राज्य सूची में 59 विषय हैं जैसे पुलिस, सार्वजनिक व्यवस्था, स्वास्थ्य और कृषि। समवर्ती सूची में 52 विषय हैं जहां केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं, जैसे शिक्षा, विवाह, विद्युत और आपराधिक कानून। टकराव की स्थिति में समवर्ती सूची में केंद्र के कानून को प्रधानता दी गई है (अनुच्छेद 254)। 42वें संशोधन (1976) द्वारा शिक्षा सहित पांच विषय राज्य सूची से समवर्ती सूची में लाए गए।

सूचीविषय संख्याउदाहरणकानून बनाने का अधिकार
संघ सूची98विदेश नीति, रक्षा, मुद्रा, डाक सेवाकेवल संसद
राज्य सूची59पुलिस, सार्वजनिक व्यवस्था, स्वास्थ्य, कृषिराज्य विधानमंडल
समवर्ती सूची52शिक्षा, विवाह, विद्युत, आपराधिक कानूनसंसद और राज्य दोनों; टकराव पर संसद का कानून मान्य
42वें संशोधन (1976) से राज्य सूची से समवर्ती सूची में गए 5 विषय
शिक्षा
वन
वन्य पशुओं और पक्षियों का संरक्षण
नाप-तोल
न्याय प्रशासन (उच्चतम व उच्च न्यायालय को छोड़कर अन्य न्यायालयों का गठन व संगठन)

3. केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 268-293 में केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संबंधों का वर्णन है। कर संग्रह को दो श्रेणियों में बांटा गया है - संघीय कर (जो केंद्र एकत्र करता है) और राज्य कर (जो राज्य एकत्र करते हैं)। राजस्व साझाकरण व्यवस्था के तहत केंद्र को राज्यों को वित्तीय सहायता प्रदान करनी होती है। वित्त आयोग, जो हर पांच साल बाद गठित होता है, केंद्र और राज्यों के बीच राजस्व के वितरण की सिफारिश करता है। वर्तमान में 16वां वित्त आयोग (2026-2031) कार्य करेगा।

केंद्र-राज्य संबंध — तीन आयाम
  1. विधायी संबंधअनुच्छेद 245-255
  2. प्रशासनिक संबंधअनुच्छेद 256-263
  3. वित्तीय संबंधअनुच्छेद 268-293

4. राष्ट्रीय और आपातकालीन प्रावधान

भारतीय संविधान राष्ट्रीय हित में संघवादी व्यवस्था को लचीला बनाता है। राष्ट्रपति को तीन प्रकार की आपातकालीन शक्तियां दी गई हैं - अनुच्छेद 352 (राष्ट्रीय आपातकाल), अनुच्छेद 356 (राज्य आपातकाल) और अनुच्छेद 360 (वित्तीय आपातकाल)। राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा के दौरान केंद्र को राज्य सूची के विषयों पर भी कानून बनाने की शक्ति दी जा सकती है। अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति किसी राज्य की सरकार को बर्खास्त कर सकता है यदि उसे लगता है कि राज्य की सरकार संविधान के अनुसार कार्य नहीं कर रही है।

5. अंतर-राज्य परिषद और सहकारी संघवाद

अनुच्छेद 263 के तहत राष्ट्रपति अंतर-राज्य परिषद (Inter-State Council) का गठन कर सकता है; यह परिषद 1990 में गठित हुई। राष्ट्रीय विकास परिषद (1952) संवैधानिक निकाय नहीं थी और योजना आयोग के साथ 2015 में समाप्त हो गई। सहकारी संघवाद की अवधारणा केंद्र और राज्यों को एक-दूसरे के साथ सहयोगात्मक तरीके से काम करने के लिए प्रोत्साहित करती है। नीति आयोग इसी सहकारी संघवाद को मजबूत करने के लिए 2015 में योजना आयोग की जगह स्थापित किया गया। राज्य सरकारें और केंद्र सरकार विभिन्न संयुक्त समितियों और सम्मेलनों के माध्यम से सहयोग करती हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

• अनुच्छेद 1: भारत को "राज्यों का संघ" (Union of States) के रूप में परिभाषित करता है।

• अनुच्छेद 73 और 162: क्रमशः संघ और राज्य की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार बताते हैं; विधायी शक्तियों का विभाजन अनुच्छेद 245-255 में है।

• सातवीं अनुसूची: संघ, राज्य और समवर्ती सूचियों में विषयों का विभाजन करती है।

• सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका: संघीय विवादों का निर्णय करता है और संविधान की व्याख्या करता है।

• संवैधानिक संशोधन: अनुच्छेद 368 के तहत अधिकांश संशोधन केवल संसद के विशेष बहुमत से होते हैं; संघीय विषयों से जुड़े संशोधनों के लिए आधे राज्यों के विधानमंडलों की सहमति भी आवश्यक है।

• राज्यों की संख्या: वर्तमान में भारत में 28 राज्य और 8 केंद्रशासित प्रदेश हैं।

राजस्थान विशेष

संघवाद के संदर्भ में राजस्थान की भूमिका समझना उपयोगी है। राजस्थान भारत में संघवाद के एक जीवंत उदाहरण के रूप में कार्य करता है। राजस्थान का एकीकरण 18 मार्च 1948 से 1 नवंबर 1956 तक सात चरणों में पूरा हुआ। 30 मार्च 1949 को वृहत् राजस्थान बना (इसी दिन राजस्थान दिवस मनाया जाता है) और 1 नवंबर 1956 को अजमेर-मेरवाड़ा आदि के मिलने से राज्य का वर्तमान स्वरूप बना। राजस्थान की अपनी राज्य सरकार है जो केंद्रीय सरकार के साथ संघीय संबंध बनाए रखती है।

राजस्थान की विधानसभा में 200 सदस्य हैं और राज्य सभा में 10 सदस्य हैं। राजस्थान कृषि, खनिज संसाधन, पर्यटन और पशुपालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है; इनमें कृषि और पशुपालन राज्य सूची के विषय हैं। राजस्थान के वित्तीय संबंध में केंद्र से मिलने वाली अनुदान राशि और राजस्व साझाकरण महत्वपूर्ण हैं। राजस्थान के मुख्य राजस्व स्रोत राज्य GST (SGST), राज्य उत्पाद शुल्क, स्टाम्प-पंजीकरण शुल्क, खनन रॉयल्टी और केंद्रीय करों में हिस्सेदारी हैं।

परीक्षा पैटर्न

प्रिलिम्स परीक्षा में: संघवाद से वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाते हैं। ये प्रश्न शक्तियों के विभाजन, सूचियों, महत्वपूर्ण अनुच्छेद और संघवाद की विशेषताओं पर केंद्रित होते हैं। उत्तर एक-पंक्ति के होते हैं और सटीकता महत्वपूर्ण है।

मेन्स परीक्षा में: संघवाद से विश्लेषणात्मक प्रश्न पूछे जा सकते हैं। ये प्रश्न होते हैं जैसे "भारतीय संघवाद की विशेषताओं की व्याख्या करें" या "केंद्र-राज्य संबंधों में सहकारी संघवाद की भूमिका पर चर्चा करें।" उत्तर संरचित, तार्किक और उदाहरण सहित होने चाहिए।

स्मरण युक्तियां

• सूचियों को याद रखने के लिए: संघ सूची = 98 (केंद्र की सर्वाधिक शक्ति), राज्य सूची = 59 (राज्य का क्षेत्र), समवर्ती = 52 (दोनों मिलकर)।

• तीन आपातकालीन स्थितियां: अनुच्छेद 352 (राष्ट्रीय), 356 (राज्य), 360 (वित्तीय) - याद रखने के लिए इसे "राष्ट्रीय-राज्य-वित्त" क्रम में सोचें।

• वित्त आयोग: हर 5 साल बाद गठित होता है। 15वें आयोग की अवधि 2021-26 थी; अब 16वां आयोग (2026-31) लागू है।

• राजस्थान दिवस: 30 मार्च (1949, वृहत् राजस्थान); 1 नवंबर 1956 को राज्य का अंतिम स्वरूप बना।

• महत्वपूर्ण अनुच्छेद: अनुच्छेद 1, 73, 162, 263, 352, 356, 360, 368 को विशेष महत्व दें।

• केस स्टडी: राष्ट्रीय आपातकाल (1975-1977) और अनुच्छेद 356 के विभिन्न उपयोग को समझें क्योंकि परीक्षा में व्यावहारिक उदाहरण पूछे जा सकते हैं।

⚡ त्वरित रिवीजन — One-Liners

  • •अनुच्छेद 32 को डॉ. अंबेडकर ने 'संविधान की आत्मा' कहा था।
  • •DPSP भाग IV में हैं; ये वाद योग्य नहीं हैं किन्तु शासन में मूलभूत हैं।
  • •भारतीय संसद की राज्यसभा में अधिकतम 250 सदस्य हो सकते हैं; 12 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत।
  • •73वें संविधान संशोधन (1992) द्वारा पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा मिला।
  • •सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना 28 जनवरी 1950 को हुई; इसके पास मूल, अपील और सलाहकार क्षेत्राधिकार है।
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✍️ 5 सवाल हल करें

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5 में से 0 हल किए
1

संसद में 'प्रश्नकाल' सामान्यतः होता है:

2

राज्य पुनर्गठन के लिए किस आयोग की अध्यक्षता फज़ल अली ने की?

3

भारत सरकार का सर्वोच्च विधि अधिकारी है:

4

शिक्षा को समवर्ती सूची में क्यों रखा गया?

5

इंटर-स्टेट काउंसिल किसके अंडर है:

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संबंधित गाइड

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इस टॉपिक से जुड़े पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQ)

आधिकारिक प्रश्नपत्रों के असली प्रश्न, उत्तर सहित।

  1. RAS 2023

    राज्य सभा (राज्यों की परिषद) के संबंध में असत्य कथन की पहचान कीजिए।

    1. (A) डॉ. एस. राधाकृष्णन लगातार दो कार्यकालों के लिए राज्य सभा के एकमात्र सभापति हैं।
    2. (B) प्रथम संविधान संशोधन के लिए राज्य सभा का अनुसमर्थन नहीं लिया गया था।
    3. (C) वर्तमान में संघ राज्य क्षेत्रों से राज्य सभा के लिए आठ सदस्य निर्वाचित होते हैं।
    4. (D) तीन अवसर ऐसे रहे हैं जब राज्य सभा और लोक सभा का संयुक्त अधिवेशन आयोजित हुआ।

    उत्तर: (A) डॉ. एस. राधाकृष्णन लगातार दो कार्यकालों के लिए राज्य सभा के एकमात्र सभापति हैं।

  2. RAS 2021

    राज्य विधान परिषद के उन्मूलन के लिए भारत के संविधान के अनुच्छेद 169 के अंतर्गत किसी राज्य विधान सभा द्वारा पारित संकल्प के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

    1. (A) यह राज्यपाल पर संकल्प को राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित करने का दायित्व आरोपित करता है।
    2. (B) यह संघ सरकार पर संसद में विधायन प्रारंभ करने हेतु कार्रवाई करने का दायित्व आरोपित नहीं करता है।
    3. (C) यह राज्यपाल पर संकल्प को राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित करने का दायित्व आरोपित नहीं करता है।
    4. (D) यह संघ सरकार पर संसद में विधायन प्रारंभ करने हेतु कार्रवाई करने का दायित्व आरोपित करता है।

    उत्तर: (B) यह संघ सरकार पर संसद में विधायन प्रारंभ करने हेतु कार्रवाई करने का दायित्व आरोपित नहीं करता है।

  3. RAS 2015

    सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए और नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर पहचानिए : सूची-I (संवैधानिक प्रावधान) (a) मौलिक अधिकार (b) राज्य नीति के निदेशक तत्व (c) मंत्रिमंडलीय शासन (d) संघ-राज्य संबंध सूची-II (स्रोत) (I) ब्रिटिश संविधान (II) कनाडा का संविधान (III) आयरलैंड का संविधान (IV) अमेरिकी बिल ऑफ़ राइट्स

    1. (A) a-IV, b-II, c-III, d-I
    2. (B) a-IV, b-I, c-III, d-II
    3. (C) a-IV, b-III, c-I, d-II
    4. (D) a-IV, b-III, c-II, d-I

    उत्तर: (C) a-IV, b-III, c-I, d-II

  4. RAS 2013

    संविधान के अनुच्छेद 356 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: - (i) राज्यों में संवैधानिक तंत्र की विफलता एक वस्तुनिष्ठ वास्तविकता है। - (ii) इस अनुच्छेद के अंतर्गत की गई उद्घोषणा की समीक्षा उच्चतम न्यायालय द्वारा की जा सकती है। - (iii) इस उद्घोषणा के साथ राज्य विधानसभा को भंग किया जा सकता है। - (iv) इस उद्घोषणा का संसद के प्रत्येक सदन द्वारा दो माह के भीतर अनुमोदन किया जाना होता है। उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

    1. (A) केवल (i), (ii) और (iv)
    2. (B) केवल (i), (ii) और (iii)
    3. (C) केवल (iii) और (iv)
    4. (D) (ii), (iii) और (iv)

    उत्तर: (A) केवल (i), (ii) और (iv)

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