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राष्ट्रीय · राजव्यवस्था

अनुच्छेद 224A के तहत तदर्थ (एड-हॉक) न्यायाधीश

5 फरवरी 2026 · Raj Study संपादकीय टीम

याद रखें · एक पंक्ति में

अनुच्छेद 224A — उच्च न्यायालय में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को तदर्थ न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने का प्रावधान।

क्या हुआ

अनुच्छेद 224A के तहत तदर्थ (ad hoc) न्यायाधीशों की चर्चा हुई। अनुच्छेद 224A किसी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को, राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से, सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को उस उच्च न्यायालय में तदर्थ न्यायाधीश के रूप में बैठने हेतु अनुरोध करने की शक्ति देता है। इसका उद्देश्य उच्च न्यायालयों में लंबित मामलों के विशाल बैकलॉग व न्यायाधीशों की रिक्तियों से निपटना है। सर्वोच्च न्यायालय ने इसके उपयोग हेतु दिशानिर्देश दिए हैं (लोक प्रहरी वाद)। यह न्याय में देरी, न्यायपालिका की क्षमता व न्याय तक पहुँच से जुड़ा है। (SC के लिए समकक्ष प्रावधान अनुच्छेद 128 है।)

मुख्य तथ्य

  1. 1अनुच्छेद 224A — तदर्थ न्यायाधीश।
  2. 2HC में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को बैठने का अनुरोध।
  3. 3CJ द्वारा, राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से।
  4. 4उद्देश्य — मामलों का बैकलॉग व रिक्तियाँ।
  5. 5SC समकक्ष — अनुच्छेद 128; लोक प्रहरी वाद।

परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है

अनुच्छेद 224A, तदर्थ न्यायाधीश व मामलों का बैकलॉग राजव्यवस्था में महत्वपूर्ण हैं।

स्थायी GK: अनुच्छेद 224A — HC में सेवानिवृत्त न्यायाधीश (तदर्थ)। CJ + राष्ट्रपति सहमति। बैकलॉग/रिक्तियाँ। अनुच्छेद 128 — SC समकक्ष।

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