केंद्र ने बांसवाड़ा के मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देने से इनकार किया
6 अगस्त 2026 · Raj Study संपादकीय टीम
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आधुनिक निर्माण से पुरातात्विक अखंडता प्रभावित होने के कारण मानगढ़ धाम (बांसवाड़ा) को राष्ट्रीय महत्व के स्मारक का दर्जा नहीं मिला।
क्या हुआ
RLP सांसद हनुमान बेनीवाल के प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि मानगढ़ धाम को संरक्षित करने के अनुरोध पहले भी मिले थे। स्थल निरीक्षण में वहाँ बड़े पैमाने पर आधुनिक निर्माण और विकास कार्य पाए गए, इसलिए स्थल में प्राचीन संस्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष (AMASR) अधिनियम, 1958 के तहत घोषणा के लिए आवश्यक पुरातात्विक स्वरूप, प्रामाणिकता और अखंडता नहीं बची है। मंत्री ने कहा कि ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। राजस्थान-गुजरात सीमा पर स्थित यह पहाड़ी 1913 में भील आदिवासियों पर अंग्रेज़ों की गोलीबारी की स्मृति से जुड़ी है।
मुख्य तथ्य
- 1लोकसभा में मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का सांसद हनुमान बेनीवाल को लिखित उत्तर
- 2कारण: स्थल निरीक्षण में व्यापक आधुनिक निर्माण पाया गया
- 3कानून: AMASR अधिनियम, 1958
- 4स्थान: बांसवाड़ा ज़िला, राजस्थान-गुजरात सीमा
परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है
प्रश्न मानगढ़ धाम के ज़िले (बांसवाड़ा), 1913 के नरसंहार या राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों से जुड़े कानून (AMASR अधिनियम, 1958) पर आ सकता है।
स्थायी GK: 17 नवंबर 1913 को मानगढ़ पहाड़ी पर एकत्र भील आदिवासियों पर अंग्रेज़ी सेना की गोलीबारी में लगभग 1,500 लोग मारे गए थे, इसलिए इसे 'राजस्थान का जलियांवाला बाग' कहा जाता है। तरुण विजय के नेतृत्व में राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण ने पहले इस पहाड़ी को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित करने की सिफ़ारिश की थी।