मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने 27 अधिकारियों के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति प्रदान की
24 अक्टूबर 2026 · Raj Study संपादकीय टीम · सरकारी स्रोत से तथ्य मिलाए गए
याद रखें · एक पंक्ति में
मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध शून्य सहनशीलता नीति के तहत 21 मामलों में 27 अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति दी।
क्या हुआ
मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध शून्य सहनशीलता नीति के तहत 21 मामलों में 27 अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति दी। इनमें एक उपखंड अधिकारी (एसडीएम) शामिल है जिसने कृषि भूमि को गैर-कृषि उद्देश्यों के लिए अनियमित रूपांतरण और भूमि उपयोग परिवर्तन के माध्यम से राज्य सरकार को वित्तीय नुकसान पहुंचाया। एक अन्य एसडीएम को नियमों के विरुद्ध काश्तकारी भूमि दावों को मंजूरी देने और अवैध धन स्वीकार करने के लिए अभियोजन की मंजूरी दी गई। एक पूर्व उप पुलिस अधीक्षक को भ्रष्ट गतिविधियों, अवैध धन प्राप्त करने और ज्ञात आय स्रोतों के अनुपात में अधिक संपत्ति जमा करने के लिए अभियोजन स्वीकृति दी गई। विभिन्न विभागों में कृषि एवं उद्यान विभाग से 5, लोक निर्माण विभाग से 3, वाणिज्यिक कर विभाग से 2, और चिकित्सा, पशु चिकित्सा, देवस्थान, इंदिरा गांधी नहर परियोजना तथा सहकारिता विभाग से 1-1 मामले में स्वीकृति दी गई। राजस्थान लेखा सेवा के एक अधिकारी और एक खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) के विरुद्ध भी अभियोजन स्वीकृति प्रदान की गई।
मुख्य तथ्य
- 1मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने 21 मामलों में 27 अधिकारियों के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति दी (23 अक्टूबर 2026)
- 2कृषि एवं उद्यान विभाग से 5 मामलों में अभियोजन स्वीकृति प्रदान की गई
- 3लोक निर्माण विभाग से 3 और वाणिज्यिक कर विभाग से 2 मामलों में स्वीकृति दी गई
- 4एक एसडीएम को कृषि भूमि के अनियमित रूपांतरण के माध्यम से राज्य को वित्तीय नुकसान पहुंचाने के लिए अभियोजन स्वीकृति दी गई
- 5एक पूर्व उप पुलिस अधीक्षक को भ्रष्ट गतिविधियों और आय से अधिक संपत्ति जमा करने के लिए अभियोजन स्वीकृति दी गई
परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है
1. मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने कितने मामलों में अभियोजन स्वीकृति प्रदान की? (21 मामलों में) 2. कृषि एवं उद्यान विभाग से कितने मामलों में अभियोजन स्वीकृति दी गई? (5 मामलों में)
स्थायी GK: राजस्थान में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत सरकारी अधिकारियों के विरुद्ध अभियोजन के लिए सक्षम प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होती है।