राजस्थान कृषि विभाग और ब्रह्माकुमारी संस्थान के बीच प्राकृतिक खेती के लिए समझौता
26 अक्टूबर 2026 · Raj Study संपादकीय टीम · सरकारी स्रोत से तथ्य मिलाए गए
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राजस्थान कृषि विभाग और ब्रह्माकुमारी संस्थान के बीच प्राकृतिक एवं योगिक खेती को बढ़ावा देने के लिए तीन वर्षीय समझौता हुआ।
क्या हुआ
25 अक्टूबर को आबूरोड स्थित ब्रह्माकुमारी संस्थान के शांतिवन परिसर में आयोजित ग्लोबल समिट में राजस्थान कृषि विभाग और ब्रह्माकुमारी संस्थान की राजयोग एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन के कृषि एवं ग्रामीण विकास प्रभाग के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने राजस्थान सरकार की ओर से तथा बीके सरला के प्रतिनिधित्व में ब्रह्माकुमारी संस्थान की ओर से समझौता किया। यह तीन वर्ष के लिए प्रभावी रहेगा। समझौते के तहत किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण, कृषि अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए राजयोग, तनाव प्रबंधन और क्षमता संवर्धन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आबूरोड स्थित तपोवन को योगिक प्राकृतिक खेती के उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने की सैद्धांतिक सहमति बनी। प्रदेशभर में प्रशिक्षण शिविर, कार्यशालाएं, प्रदर्शनियां और जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।
पृष्ठभूमि
मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीना पूर्व में ब्रह्माकुमारी संस्थान के प्राकृतिक खेती मॉडल का अवलोकन कर इसकी सराहना कर चुके हैं। राज्य सरकार प्राकृतिक खेती को जन-आंदोलन बनाने की दिशा में प्रयासरत है।
मुख्य तथ्य
- 125 अक्टूबर को आबूरोड के शांतिवन परिसर में ग्लोबल समिट में समझौता ज्ञापन हुआ।
- 2कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने राजस्थान सरकार की ओर से समझौते पर हस्ताक्षर किए।
- 3समझौता प्रारंभिक रूप से तीन वर्ष के लिए प्रभावी रहेगा।
- 4तपोवन (आबूरोड) को योगिक प्राकृतिक खेती के उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने की सैद्धांतिक सहमति बनी।
- 5किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण और कृषि कार्मिकों को राजयोग एवं तनाव प्रबंधन प्रशिक्षण दिया जाएगा।
परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है
1. राजस्थान कृषि विभाग और ब्रह्माकुमारी संस्थान के बीच प्राकृतिक खेती के लिए समझौता कब हुआ? (25 अक्टूबर 2026) 2. योगिक प्राकृतिक खेती के उत्कृष्टता केंद्र के रूप में किस स्थान को विकसित करने की सैद्धांतिक सहमति बनी? (तपोवन, आबूरोड)