अहिंसा (अहिंसा परमो धर्म) और उसका जैन संबंध
RAS मुख्य परीक्षा, पत्र II, इकाई I, बिंदु 5: "Gandhian ethics" (गांधीवादी नीतिशास्त्र); जैन पक्ष बिंदु 6 (भारत के नैतिक चिंतक) को भी छूता है
- जनवरी 2026 के पाठ्यक्रम के अनुसार अद्यतन
- पढ़ने का समय: लगभग 10 मिनट
परीक्षा-भार (2018-2024 के प्रश्नों के आधार पर)
2 प्रश्न, दोनों भाग क के, 2-2 अंक के: 2018 का Q3 ("Why is non-violence or ahimsa core value of Gandhian Ethics?") और 2023 का Q4 ("What is meant by Ahimsa Parmo Dharma?")। 2023 का प्रश्न जैन नीतिशास्त्र (पृष्ठ 6.10) के साथ साझा है। अहिंसा पर अब तक भाग ख या ग में प्रश्न नहीं आया, इसलिए लंबा प्रश्न संभव है।
30 सेकंड का सार
याद रखें
- अहिंसा का शाब्दिक अर्थ है किसी को न दुखाना। गांधी के लिए यह "न मारने" से कहीं बड़ी है: हर बुरा विचार, झूठ या घृणा इसे चोट पहुँचाते हैं। यह प्रेम और साहस की सक्रिय शक्ति है, निष्क्रियता नहीं।
- गांधीवादी नीतिशास्त्र में अहिंसा केंद्र में इसलिए है कि वही सत्य तक पहुँचने का एकमात्र साधन है ("अहिंसा साधन है, सत्य साध्य"), और क्योंकि सारा जीवन एक है।
- "अहिंसा परमो धर्मः" (अहिंसा सर्वोच्च धर्म या कर्तव्य है) महाभारत (अनुशासन पर्व) में मिलने वाली आधी पंक्ति है, और जैन परंपरा का सुप्रसिद्ध नारा भी।
- जैन संबंध गहरा है: अहिंसा जैन धर्म का पहला व्रत है, और तत्त्वार्थ सूत्र हिंसा को राग-द्वेष से हुई हानि बताता है, यानी वह मन से शुरू होती है। गांधी गुजरात के जैन-प्रभाव वाले वातावरण में पले, पर उन्होंने अहिंसा को सामाजिक और राजनीतिक पद्धति बनाया।
- प्रशासक के लिए इसका अर्थ है नीति में करुणा, नागरिक से शिष्ट व्यवहार, और व्यवस्था बहाल करने में न्यूनतम बल।
भाग क के लिए छोटे उत्तर (15 शब्द तक)
याद रखें
- प्रश्न (असली PYQ, 2018, भाग क, 2 अंक): Why is non-violence or ahimsa core value of Gandhian Ethics?
- उत्तर: अहिंसा सत्य का एकमात्र साधन है, और गांधी के लिए साध्य साधन पर निर्भर।
- 2023 भाग क (2 अंक), "What is meant by Ahimsa Parmo Dharma?" के लिए तैयार पंक्ति: अहिंसा परमो धर्म: मन, वचन, कर्म से किसी को न सताना ही सर्वोच्च कर्तव्य। (14 शब्द)
- जैन मत: राग-द्वेष से हुआ प्राण-घात हिंसा है; इसलिए बुरा विचार भी अहिंसा तोड़ता है।
1. अर्थ
शाब्दिक। अहिंसा का अर्थ "किसी को न दुखाना, अहिंसा" है (आत्मकथा में अनुवादक की टिप्पणी)। यह अ + हिंसा है।
गांधी का व्यापक अर्थ। "Not to hurt any living things is no doubt a part of Ahimsa. But it is its least expression. The principle of Ahimsa is hurt by every evil thought, by undue haste, by lying, by hatred, by wishing ill to anybody" (यरवदा मंदिर, अध्याय II)। भाव: किसी जीव को न दुखाना अहिंसा का सबसे छोटा रूप है; हर बुरा विचार, जल्दबाज़ी, झूठ, घृणा और किसी का बुरा चाहना भी उसे चोट पहुँचाते हैं।
तीन स्तर (हमारी व्यवस्था): शरीर, वाणी और मन में; तथा निजी जीवन, समाज और राजनीति में।
2. अहिंसा गांधीवादी नीतिशास्त्र का केंद्र क्यों है
यह सत्य का साधन है। "Ahimsa and Truth are so intertwined that it is practically impossible to disentangle and separate them... Ahimsa is the means; Truth is the end... If we take care of the means, we are bound to reach the end sooner or later" (यरवदा मंदिर, अध्याय II)। आत्मकथा के अंतिम अध्याय में: सत्य की प्राप्ति का "एकमात्र साधन अहिंसा है"।
यह खोज का आधार है। "This ahimsa is the basis of the search for truth... It is quite proper to resist and attack a system, but to resist and attack its author is tantamount to resisting and attacking oneself" (आत्मकथा, भाग IV, अध्याय 9)। यानी व्यवस्था का विरोध ठीक है, पर व्यवस्था चलाने वाले व्यक्ति से घृणा अपने ही विरुद्ध खड़ा होना है।
सारा जीवन एक है। "because underlying ahimsa is the unity of all life, the error of one cannot but affect all" (आत्मकथा, भाग IV, अध्याय 39)।
यह सबसे बड़ी शक्ति है। "Non-violence is the greatest force at the disposal of mankind. It is mightier than the mightiest weapon of destruction devised by the ingenuity of man" (हरिजन, 20 जुलाई 1935)। "Non-violence is an active force of the highest order. It is soul-force" (हरिजन, 12 नवंबर 1938)।
3. अहिंसा कायरता या निष्क्रियता नहीं
"I do believe that, where there is only a choice between cowardice and violence, I would advise violence." उसी लेख में: "I believe that non-violence is infinitely superior to violence, forgiveness is more manly than punishment... But abstinence is forgiveness only when there is the power to punish" (यंग इंडिया, 11 अगस्त 1920)। यानी अहिंसा साहसी के लिए है; क्षमा तभी क्षमा है जब दंड देने की शक्ति हो।
4. पूर्ण अहिंसा असंभव है, इसलिए करुणा कसौटी है
"Man cannot for a moment live without consciously or unconsciously committing outward himsa... A votary of ahimsa therefore remains true to his faith if the spring of all his actions is compassion" (आत्मकथा, भाग IV, अध्याय 39)। "Life itself involves some kind of violence and we have to choose the path of least violence" (हरिजन, 28 सितंबर 1934)। अधिकारी के लिए यह काम का नियम है: जहाँ हानि टल नहीं सकती, वहाँ कम से कम हानि वाला रास्ता चुनें।
5. "अहिंसा परमो धर्म": पंक्ति कहाँ से आई
महाभारत। अनुशासन पर्व में युधिष्ठिर भीष्म से कहते हैं: "अहिंसा परमो धर्म इत्युक्तं बहुशस्त्वया" (आपने कई बार कहा है कि अहिंसा परम धर्म है; समीक्षित संस्करण 13.116.1)। आगे भीष्म अहिंसा को परम धर्म, परम संयम, परम दान और परम तप बताते हैं (13.117.37, "अहिंसा परमो धर्मस्तथाहिंसा परो दमः")। यह अर्धपंक्ति महाकाव्य के अन्य पर्वों में भी दोहराई गई है (द्वितीयक टिप्पणी)।
लोकप्रिय पूरी पंक्ति से सावधान। दूसरा अर्ध "धर्महिंसा तथैव च" अनुशासन पर्व के भंडारकर संस्थान के समीक्षित संस्करण के पाठ में नहीं मिलता। इसे महाकाव्य का पाठ बताकर न लिखें।
अर्थ। अहिंसा सर्वोच्च धर्म या कर्तव्य है। यह प्राथमिकता का कथन है, राजा या सैनिक के वैध कर्तव्य पर रोक नहीं; गीता का संदर्भ पृष्ठ 4.5 में है।
जैन प्रयोग। यह पंक्ति जैन परंपरा का आम नारा है, जो जैन मंदिरों की दीवारों पर अक्सर लिखी मिलती है (द्वितीयक स्रोत)। इसलिए उत्तर में लिखें: "महाभारत में मिलती है और जैन नीतिशास्त्र में केंद्रीय है"।
6. जैन संबंध
पहला व्रत। जैन धर्म में अहिंसा पाँच व्रतों में पहला है: साधु-साध्वियों के लिए महाव्रत और गृहस्थों के लिए अणुव्रत। महावीर, 24वें तीर्थंकर (परंपरागत गणना में छठी शताब्दी ई.पू.), इसके सबसे बड़े प्रवक्ता हैं।
मन से शुरू होने वाली परिभाषा। दोनों जैन परंपराओं में मान्य तत्त्वार्थ सूत्र सूत्र 7.13 (दिगंबर क्रमांक) में हिंसा की परिभाषा देता है: "प्रमत्तयोगात् प्राणव्यपरोपणं हिंसा"। अर्थात प्रमाद या कषाय (राग-द्वेष) से युक्त आत्मा की क्रिया द्वारा प्राणों का वियोग हिंसा है। टीका जोड़ती है कि किसी की मृत्यु न हो, तब भी केवल कषाययुक्त भाव हिंसा है। इसीलिए असावधानी और दुर्भावना भी गिनी जाती हैं।
गांधी का जैन परिवेश। "Jainism was strong in Gujarat, and its influence was felt everywhere"; जैन साधु उनके पिता के पास आया करते थे; जैन साधु बेचरजी स्वामी ने इंग्लैंड जाने से पहले गांधी को तीन व्रत दिलाए (आत्मकथा, भाग I)। फिर 1891 में इंग्लैंड से लौटने पर उनकी भेंट गुजराती जौहरी-कवि रायचंदभाई से हुई, जिन्हें वे उन "तीन आधुनिकों" में गिनते हैं जिन्होंने उन पर गहरी छाप छोड़ी (भाग II, अध्याय 1)। प्रचलित जीवनियाँ रायचंदभाई को जैन बताती हैं, पर आत्मकथा स्वयं यह शब्द नहीं लिखती।
गांधी जैन तपस्वी-मार्ग से कहाँ भिन्न हैं (हमारी तुलना):
| कसौटी | जैन अहिंसा | गांधीवादी अहिंसा |
|---|---|---|
| मुख्य लक्ष्य | आत्मा की शुद्धि, मोक्ष | सेवा और सामाजिक परिवर्तन के द्वारा सत्य का साक्षात्कार |
| आदर्श कौन | तपस्वी (महाव्रत); गृहस्थ के लिए अणुव्रत | सामान्य नागरिक और राजनीतिक कर्ता |
| टकराव से व्यवहार | हानि से हटना | सक्रिय अहिंसक प्रतिरोध (सत्याग्रह) |
| कसौटी की बात | हर जीव को हानि से बचाना | करुणा "सब कर्मों का स्रोत", कम से कम हिंसा |
7. प्रशासक की अहिंसा
(हमारा अनुप्रयोग)
न्यूनतम बल। ग़ैर-कानूनी जमावड़े को हटाना पड़े तो कानून चरणों में अनुमति देता है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 में (धाराएँ 148 और 149 पत्र III की विधि-पाठ्यचर्या में हैं) कार्यकारी मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारी पहले जमावड़े को तितर-बितर होने का आदेश देता है; सशस्त्र बल की ज़रूरत पड़े तो धारा 149(3) कहती है कि वे "as little force, and do as little injury to person and property, as may be consistent with dispersing the assembly" (जमावड़ा हटाने के अनुरूप कम से कम बल और कम से कम क्षति) का प्रयोग करें (शब्द एक प्रकाशित टीका में दिए रूप में हैं; शब्दशः लिखने से पहले India Code पर पुष्टि कर लें)।
शिष्टता और करुणा। आचरण नियम 3(1)(xi) "जनता के साथ शिष्टता और अच्छे व्यवहार" और 3(1)(x) "विशेषकर कमज़ोर वर्ग" के प्रति संवेदनशीलता माँगता है (केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1964, 31.12.2014 तक संशोधित)।
कार्यालय के भीतर बदले की भावना नहीं। अनुशासनात्मक कार्रवाई निष्पक्ष और अनुपातिक हो, और अधीनस्थों से बोलचाल में कटुता न हो।
नीति। बेदखली, बंदी या कार्रवाई से पहले पूछें: वैध लक्ष्य तक पहुँचने का सबसे कम नुकसान वाला रास्ता कौन-सा है?
वास्तविक उदाहरण
चंपारण, 1917.
किसानों से मिलने के बाद गांधी ने लिखा: "in this meeting with the peasants I was face to face with God, Ahimsa and Truth" (किसानों से इस भेंट में मैं ईश्वर, अहिंसा और सत्य के आमने-सामने था), और जाँच को "सत्य और अहिंसा का साहसिक प्रयोग" कहा (आत्मकथा, भाग V, अध्याय 14 और 16)। उन्होंने बागान मालिकों के प्रति घृणा के बिना, पृष्ठ 5.1 में बताए खुले अभिलेख के साथ जाँच की।
स्रोत: आत्मकथा; PIB लेख, 7 अप्रैल 2017।
खेजड़ली, राजस्थान, 1730.
सितंबर 1730 में जोधपुर के पास खेजड़ली गाँव के बिश्नोई समुदाय के लोगों ने मारवाड़ के महाराजा के आदेश से कट रहे खेजड़ी के पेड़ों से लिपटकर उन्हें बचाने का प्रयास किया; माना जाता है कि 363 बिश्नोई मारे गए (परंपरागत आँकड़ा) और कटाई रुक गई (द्वितीयक स्रोत: विकिपीडिया, "Khejarli massacre"; उसके उद्धृत स्रोत आधुनिक हैं, समकालीन अभिलेख नहीं)। यह गांधीवादी घटना नहीं है, पर वही पद्धति दिखाती है: दूसरों को हानि पहुँचाने के बजाय स्वयं कष्ट सहना। इसे केवल राजस्थान के दृष्टांत के रूप में लगाएँ।
उत्तर में कैसे लगाएँ
भाग क में परिभाषा और एक कारण (सत्य का साधन)। लंबे उत्तर में अर्थ, पंक्ति और जैन संबंध, गांधी की सक्रिय अहिंसा, फिर चंपारण या चौरी चौरा।
विचारक और उद्धरण
| नाम | विचार | प्रयोग-योग्य पंक्ति |
|---|---|---|
| महात्मा गांधी | अहिंसा और सत्य | "Ahimsa is the means; Truth is the end" (From Yeravda Mandir, अध्याय II) |
| महात्मा गांधी | अहिंसा कमज़ोरी नहीं | "non-violence is infinitely superior to violence, forgiveness is more manly than punishment" (यंग इंडिया, 11 अगस्त 1920) |
| महात्मा गांधी | सबसे बड़ी शक्ति | "Non-violence is the greatest force at the disposal of mankind" (हरिजन, 20 जुलाई 1935) |
| महाभारत (अनुशासन पर्व) | सर्वोच्च धर्म | "अहिंसा परमो धर्मस्तथाहिंसा परो दमः" (13.117.37, समीक्षित संस्करण) |
| तत्त्वार्थ सूत्र (7.13) | हिंसा राग-द्वेष से शुरू | "प्रमत्तयोगात् प्राणव्यपरोपणं हिंसा" (प्रमाद या राग-द्वेष से प्राणों का वियोग हिंसा है) |
चित्र: जड़ें और घेरे
महाभारत: अहिंसा परमो धर्मः (13.116.1, 13.117.37)
बायीं जड़
जैन नीतिशास्त्र: पहला व्रत; हिंसा = राग-द्वेष से हानि (तत्त्वार्थ सूत्र 7.13)
दायीं जड़
गांधी: सक्रिय अहिंसा = प्रेम + साहस + कम से कम हिंसा
दोनों से तीर बीच के ब्लॉक की ओर
मन (दुर्भाव नहीं)
बीच के चारों ओर घेरे, भीतर से बाहर
वाणी (झूठ नहीं, चोट नहीं)
शरीर (हानि नहीं)
समाज और राज्य (सत्याग्रह, न्यूनतम बल)
अहिंसा = साधन, सत्य = साध्य
नीचे लेबल
पहले यह कैसे पूछा गया: अहिंसा दो बार आई, दोनों बार भाग क में 2 अंक के प्रश्न के रूप में (2018 और 2023), इसलिए छोटी सटीक परिभाषाओं से अंक मिलते हैं (इकाई I के सभी 52 प्रश्नों के आधार पर)।
आम गलतियाँ
याद रखें
- अहिंसा को केवल "न मारना" लिखना; गांधी की अहिंसा विचार और वाणी तक जाती है और सक्रिय प्रेम है।
- अहिंसा को निष्क्रियता बताना; कायरता बनाम हिंसा वाली पंक्ति (यंग इंडिया, 1920) उद्धृत करें और लिखें कि वह साहसी के लिए है।
- "अहिंसा परमो धर्मः धर्महिंसा तथैव च" को महाभारत का एक श्लोक बताना, या पंक्ति को केवल जैन कहना; लिखें कि वह महाभारत में है और जैन नारा भी है।
आत्म-जाँच (5 प्रश्न)
याद रखें
- अहिंसा का शाब्दिक अर्थ क्या है?
- अहिंसा के गांधीवादी नीतिशास्त्र का केंद्र होने के दो कारण बताइए।
- "अहिंसा परमो धर्मः" महाभारत में कहाँ आता है, और लोकप्रिय पंक्ति का कौन-सा अर्ध समीक्षित संस्करण के पाठ में नहीं मिलता?
- तत्त्वार्थ सूत्र हिंसा को कैसे परिभाषित करता है?
- गांधी की अहिंसा जैन तपस्वी-मार्ग से किस एक बिंदु पर भिन्न है?
केस स्टडीचौरी चौरा, 1922
4 फ़रवरी 1922 को गोरखपुर जिले के चौरी चौरा में भीड़ ने थाने में आग लगा दी और 22 पुलिसकर्मी मारे गए (कुछ वृत्तांतों में 23)। गांधी ने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया और प्रायश्चित के रूप में पाँच दिन उपवास किया (द्वितीयक स्रोत: विकिपीडिया, "Chauri Chaura incident"; पाँच दिन के उपवास का उल्लेख South African History Online की गांधी-कालरेखा में भी है)।
सीख
अहिंसा अभियान की शर्त है, वैकल्पिक अलंकार नहीं।
काल्पनिक केस
उदाहरण (काल्पनिक)काल्पनिक केस (Hypothetical case)
राधिका ज़िला कलेक्टर है। राजमार्ग के लिए ज़मीन अधिग्रहण से प्रभावित धनपुर गाँव के लोगों ने मुआवज़े के लिखित आश्वासन की माँग पर दो दिन से सड़क रोक रखी है। तीन ज़िलों का यातायात ठप है। कुछ युवक पत्थर फेंकने लगे हैं। पुलिस अधीक्षक तुरंत लाठीचार्ज कर सड़क खाली कराना चाहते हैं।
- हितधारक
- राधिका, ग्रामीण (बुज़ुर्ग, महिलाएँ, युवा), पुलिस, फँसे यात्री और मरीज़, राजमार्ग विभाग, राज्य सरकार।
- मुद्दा और टकराते मूल्य
- लोक व्यवस्था और बल का वैध प्रयोग बनाम करुणा, अहिंसा और ग्रामीणों का अपनी बात सुनाने का हक। व्यवस्था बहाल करना कर्तव्य है; कम से कम हानि पहुँचाना भी।
- तीन विकल्प
- (क) तुरंत बल प्रयोग से सड़क खाली कराना। लाभ: सड़क जल्द खुले। हानि: चोटें, आक्रोश, भरोसा टूटना, कानूनी कार्रवाई और लंबा विवाद। (ख) घेराव को ज्यों का त्यों छोड़कर प्रतीक्षा करना। लाभ: टकराव नहीं। हानि: मरीज़ और यात्री पीड़ित, पत्थरबाज़ बेरोक, कानून का इकबाल कमज़ोर। (ग) बुज़ुर्गों से तुरंत बातचीत, नामित अधिकारी के साथ मुआवज़े पर समयबद्ध लिखित आश्वासन, एम्बुलेंस के लिए गलियारा, पत्थर फेंकने वालों को चेतावनी और पुलिस द्वारा अलग किया जाना, और कानून में दिए चरणों से तितर-बितर करना (पहले आदेश, हिंसा जारी रहे तभी न्यूनतम बल)। लाभ: व्यवस्था और गरिमा दोनों सुरक्षित। हानि: समय, धैर्य और कुछ जोखिम चाहिए।
- सर्वोत्तम विकल्प और समर्थक मूल्य
- विकल्प (ग)। समर्थक मूल्य: करुणा के रूप में अहिंसा और कम से कम हिंसा का मार्ग, निष्पक्ष कर्तव्य, जवाबदेही। यह कमज़ोरी नहीं: हिंसा पर दृढ़ता, शिकायत पर नरमी।
सीख
कदम: अल्पकालिक: बुज़ुर्गों से बात, लिखित आश्वासन, एम्बुलेंस-गलियारा, तितर-बितर होने का आदेश और ज़रूरत हो तो पत्थरबाज़ों पर न्यूनतम बल, घटना की मजिस्ट्रेटी जाँच। दीर्घकालिक: अधिग्रहण से पहले गाँव में शिकायत-शिविर, मुआवज़े की सूची सार्वजनिक करना, और पुलिस व मजिस्ट्रेटों को भीड़-प्रबंधन और तनाव-शमन का प्रशिक्षण।
अभ्यास प्रश्न
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
अहिंसा कमज़ोरी नहीं है। गांधीवादी अर्थ में स्पष्ट कीजिए।
आदर्श उत्तर
गांधी ने अहिंसा को हिंसा से "असीम श्रेष्ठ" और प्रेम की सक्रिय शक्ति कहा। वे कायरता से हिंसा को बेहतर मानते थे, क्योंकि क्षमा का मूल्य वहीं है जहाँ दंड की सामर्थ्य हो। अहिंसा साहस, करुणा और कम से कम बल का मार्ग माँगती है, और घृणा से भी आहत होती है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
लोक प्रशासन के मूल्य के रूप में अहिंसा की परीक्षा कीजिए, उसकी जैन और गांधीवादी जड़ों को जोड़ते हुए।
आदर्श उत्तर
जैन धर्म ने अहिंसा को पहला व्रत बनाया और हिंसा को राग-द्वेष से हुई हानि कहा (तत्त्वार्थ सूत्र 7.13), इसलिए वह मन से शुरू होती है। गुजरात के जैन-प्रभाव में पले गांधी ने उसे सक्रिय सामाजिक शक्ति बनाया: विरोधी से प्रेम, साहस और कम से कम हिंसा का मार्ग। प्रशासक के लिए इसका अर्थ है नीति में करुणा, नागरिकों से शिष्टता (आचरण नियम 3(1)(xi)) और व्यवस्था बहाल करते समय न्यूनतम बल (BNSS धाराएँ 148-149)। चंपारण (1917) सेवा के रूप में अहिंसा दिखाता है; चौरी चौरा (1922) उसकी सीमा, क्योंकि हिंसा से अभियान रुका। राजस्थान का खेजड़ली (1730) दूसरों के लिए स्वयं कष्ट सहना दिखाता है।
पिछले असली प्रश्न
2018पत्र II, भाग क2 अंक
Why is non-violence or ahimsa core value of Gandhian Ethics? उत्तर-सूत्र: वह सत्य का एकमात्र साधन है, और गांधी के लिए साध्य साधन पर निर्भर है (पृष्ठ 5.3 देखें)।
2023पत्र II, भाग क2 अंक
What is meant by Ahimsa Parmo Dharma? (परचे में "Parmo" छपा है; सामान्य वर्तनी "Paramo" है)। उत्तर-सूत्र: अहिंसा सर्वोच्च कर्तव्य है; पंक्ति महाभारत की है और जैन नीतिशास्त्र में केंद्रीय है। यही प्रश्न पृष्ठ 6.10 (महावीर और जैन नीतिशास्त्र) का भी है।
यह उत्तर कैसे लिखें
भूमिका
अर्थ, महाभारत की पंक्ति
मुख्य भाग
- जैन परिभाषा, गांधी की सक्रिय अहिंसा, एक नियम के साथ प्रशासक का प्रयोग
निष्कर्ष
साहस और करुणा का मेल
अतिरिक्त मूल्य
- चंपारण 1917, चौरी चौरा 1922, "अहिंसा साधन है, सत्य साध्य"
एक पेज में दोहराव
- अहिंसा = न दुखाना
- "न मारना" से बड़ी: विचार, वचन, कर्म
- सत्य का साधन ("अहिंसा साधन है, सत्य साध्य", यरवदा मंदिर अध्याय II)
- जीवन की एकता (आत्मकथा IV.39)
- कायरता नहीं (YI 11.8.1920)
- कम से कम हिंसा का मार्ग (हरिजन 28.9.1934)
- सबसे बड़ी शक्ति (हरिजन 20.7.1935)
- महाभारत 13.116.1 और 13.117.37
- दूसरा अर्ध "धर्महिंसा तथैव च" जाँचे पाठ में नहीं
- जैन: पाँच व्रत, महाव्रत-अणुव्रत, तत्त्वार्थ सूत्र 7.13, महावीर
- गांधी का जैन परिवेश (आत्मकथा I; रायचंदभाई II.1)
- BNSS 148-149 न्यूनतम बल; आचरण नियम 3(1)(x), (xi)
- चंपारण 1917
- चौरी चौरा 4 फ़रवरी 1922
- खेजड़ली 1730 (द्वितीयक)
- केस: कलेक्टर राधिका, राजमार्ग घेराव, बातचीत + न्यूनतम बल।