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पृष्ठ 7.6

प्रशासनिक निर्णय में AI बनाम अंतरात्मा

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RAS मुख्य परीक्षा, पत्र II, इकाई I, बिंदु 7: नैतिक चिंताएँ, दुविधाएँ और चुनौतियाँ; AI बनाम अंतरात्मा

  • जनवरी 2026 के पाठ्यक्रम के अनुसार अद्यतन
  • पढ़ने का समय: लगभग 15 मिनट
2 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

परीक्षा-भार (हमारी गिनती, RAS पत्र II इकाई I, 2018, 2021, 2023, 2024)

52 में से सीधा प्रश्न 0 (नया विषय)। निकटतम पुराने प्रश्न: 2021 भाग ग प्र.12 (नैतिक निर्णय बनाम प्रशासनिक निर्णय) और 2023 भाग ग प्र.13 (नैतिक दुविधा)। संबंधित UPSC प्रश्न: GS पत्र 4, 2024 (AI) और 2023 (अंतरात्मा)

30 सेकंड का सार

याद रखें

  • AI यहाँ वह सॉफ़्टवेयर है जो पुराने आँकड़ों से पैटर्न सीखकर अंक देता, चिह्नित करता, अनुमान लगाता या सुझाव देता है। अंतरात्मा (विवेक) वह भीतरी नैतिक बोध है जो बताता है क्या उचित है और चुनाव के लिए व्यक्ति को जवाबदेह बनाता है।
  • मशीन गणना कर सकती है, ज़िम्मेदारी नहीं उठा सकती। AI से गति, पैमाना और एकरूपता मिलती है, पर वह न गलती का बोझ महसूस करता है, न आँकड़े के पीछे खड़े इंसान को देखता है।
  • विफलताएँ प्रलेखित हैं: डच बाल-लाभ घोटाला (सरकार का इस्तीफ़ा, जनवरी 2021), ऑस्ट्रेलिया का रोबोडेट (2019 में अवैध ठहराया गया), हरियाणा की परिवार पहचान पत्र (PPP) पेंशन-त्रुटियाँ (रिपोर्टों के अनुसार), डेट्रॉयट में चेहरा-पहचान से गलत गिरफ़्तारी (जनवरी 2020)।
  • उत्तर "AI या अंतरात्मा" नहीं है। उत्तर है: AI सुझाए, ज़िम्मेदार इंसान तय करे, और छह रक्षोपाय रहें: पारदर्शिता, व्याख्येयता, जवाबदेही, मानव-समीक्षा, निष्पक्षता, निजता।
  • परीक्षा के लिए एक पंक्ति: "AI निर्णय में मदद कर सकता है; निर्णय का स्वामी केवल इंसान हो सकता है।"

भाग क बॉक्स (लिखने के लिए तैयार, 15 शब्द)

याद रखें

  • एल्गोरिदमिक पूर्वाग्रह: AI के परिणामों में व्यवस्थित अन्याय, जो प्रायः पक्षपाती डेटा से आता है।
  • ह्यूमन-इन-द-लूप: नागरिक पर असर से पहले प्रशिक्षित अधिकारी AI-निर्णय जाँचे और बदल सके।
  • अंतरात्मा (विवेक) वह भीतरी नैतिक बोध है, जो सही-गलत बताकर व्यक्ति को जवाबदेह बनाता है।

मुख्य शब्द (हिंदी और अंग्रेज़ी)

शब्दसरल अर्थ
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence)पुराने आँकड़ों से सीखकर अनुमान, वर्गीकरण या सुझाव देने वाला सॉफ़्टवेयर
एल्गोरिदम (Algorithm)आँकड़ों को अंक या निर्णय में बदलने वाले चरणबद्ध नियम या मॉडल
स्वचालित निर्णय (Automated decision-making)ऐसा निर्णय जो मुख्यतः सॉफ़्टवेयर से निकले, बीच में इंसान का विचार बहुत कम या बिल्कुल नहीं
निर्णय-सहायता बनाम निर्णय-निर्माणसहायता में AI सामग्री देता है, निर्णय इंसान का रहता है। निर्माण में AI का परिणाम ही निर्णय बन जाता है। पूरा विषय इसी फ़र्क पर टिका है
एल्गोरिदमिक पूर्वाग्रह (Algorithmic bias)परिणामों में बार-बार दिखने वाला अन्यायपूर्ण झुकाव, जो प्रायः प्रशिक्षण-डेटा या डिज़ाइन में छिपे पुराने पक्षपात या कमी से आता है
स्वचालन-पूर्वाग्रह (Automation bias)अपने विवेक से ज़्यादा मशीन के उत्तर पर भरोसा करने की आदत
ब्लैक बॉक्सऐसी प्रणाली जिसके कारण देखे या समझाए न जा सकें, प्रयोग करने वाले को भी नहीं
अंतरात्मा / विवेक (Conscience)अपने कर्मों को परखने वाला भीतरी नैतिक बोध, जो व्यक्ति को जवाबदेह बनाता है

प्रशासन AI की ओर क्यों जाता है (इस पक्ष को भी न्याय दें)

गति और पैमाना: लाखों आवेदनों की छँटाई घंटों में।

एकरूपता: सब पर एक ही नियम लगे, तो पक्षपात और मनमर्ज़ी घट सकती है।

पैटर्न पकड़ना: दोहरे लाभार्थी, जालसाज़ी के गिरोह और जोखिम वाले इलाके आँख से पकड़ना कठिन है।

बेहतर लक्ष्यीकरण: सीमित धन सही लोगों तक जल्दी पहुँचे।

अच्छा उत्तर पहले यह पक्ष मानता है, फिर सीमाएँ बताता है। AI को सीधे नकार देना भोला लगता है।

AI अंतरात्मा की जगह क्यों नहीं ले सकता

1. नैतिक कर्ता नहीं। मॉडल को पछतावा नहीं होता, उसे दंड नहीं दिया जा सकता, उससे "तुमने ऐसा क्यों किया?" नहीं पूछा जा सकता। ज़िम्मेदारी इंसान पर ही रहनी चाहिए।

2. जैसा डेटा, वैसा नतीजा। पुराना डेटा झुका हो तो मॉडल वही झुकाव सीखकर हज़ारों पर एक साथ लगा देता है।

3. अपारदर्शिता। कारण समझाया न जा सके तो नागरिक चुनौती नहीं दे सकता और अधिकारी बचाव नहीं कर सकता।

4. संदर्भ की अनदेखी। अंक नहीं जानता कि विधवा का नाम दो जगह अलग वर्तनी में दर्ज है या परिवार का कमाने वाला अभी गुज़रा है।

5. बड़े पैमाने की भूल। एक अधिकारी की गलती एक फ़ाइल बिगाड़ती है, मॉडल की गलती किसी के देखने से पहले पूरे जिले को।

6. स्वचालन-पूर्वाग्रह और कौशल-क्षय। अधिकारी बिना सोचे हस्ताक्षर करने लगते हैं। तब इंसान "लूप में" केवल कागज़ पर रहता है।

7. निजता और निगरानी। जितना ज़्यादा डेटा, नागरिक पर उतनी ज़्यादा सत्ता।

अकेली अंतरात्मा भी पर्याप्त क्यों नहीं

अंतरात्मा गलत, स्वार्थी या असंगत भी हो सकती है: दो ईमानदार अधिकारी एक ही मामले में अलग निर्णय ले सकते हैं। नियम, अभिलेख और औज़ार पूर्वानुमेयता देते हैं और व्यक्तिगत मनमानी पर अंकुश रखते हैं। संतुलित उत्तर यह है: अंतरात्मा सीमा तय करती है और निर्णय का स्वामित्व लेती है; नियम पूर्वानुमेयता देते हैं; AI साक्ष्य जुटाता है। (यह संतुलित पाठ हमारी व्याख्या है और भाग ग के उत्तर को इसी की ज़रूरत है।)

प्रशासन में AI के छह सिद्धांत

सिद्धांतअधिकारी के लिए अर्थभारतीय आधार
पारदर्शिताप्रणाली कैसे चलती है, यह दर्ज रहे; जहाँ संभव हो बाहरी जाँच हो सकेनीति आयोग का Responsible AI दस्तावेज़ (फ़रवरी 2021): पारदर्शिता का सिद्धांत; MeitY की India AI Governance Guidelines (5 नवंबर 2025): "Understandable by Design"
व्याख्येयतानागरिक को सरल शब्दों में कारण बताया जा सकेवही दो दस्तावेज़
जवाबदेहीहर परिणाम के लिए नामित व्यक्ति या निकाय उत्तर देनीति आयोग का जवाबदेही सिद्धांत; MeitY: विकासकर्ता और प्रयोगकर्ता "दृश्यमान और जवाबदेह" रहें
मानव-समीक्षा (human in the loop)प्रशिक्षित इंसान जाँच और पलट सके, खासकर नुकसान से पहलेMeitY का "People First" सूत्र (जहाँ तक संभव हो मानवीय निगरानी और नियंत्रण); केरल उच्च न्यायालय की नीति (जिला न्यायपालिका के लिए), 19 जुलाई 2025: AI औज़ार से किसी भी स्थिति में निष्कर्ष, राहत, आदेश या निर्णय निकालना वर्जित (न्यायिक नियम; प्रशासन के लिए हम इसे सादृश्य के रूप में लेते हैं)
निष्पक्षतासमूह-वार त्रुटि की जाँच; भेदभाव नहींनीति आयोग: समानता, समावेशन और अभेदभाव; MeitY: "Fairness and Equity"
निजताकेवल आवश्यक और विधिसम्मत डेटापुट्टस्वामी (24 अगस्त 2017); डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 (स्वीकृति 11 अगस्त 2023; नियम नवंबर 2025 में अधिसूचित)

कानून और नीति के आधार

पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ (24 अगस्त 2017): नौ न्यायाधीश, सर्वसम्मति: निजता अनुच्छेद 21 में संरक्षित है। हर हस्तक्षेप को वैधानिकता, आवश्यकता और आनुपातिकता की कसौटी पर खरा उतरना होगा।

आधार निर्णय (26 सितंबर 2018): 4:1 बहुमत ने आधार अधिनियम को शर्तों के साथ वैध माना; धारा 57 (निजी संस्थाओं द्वारा आधार माँगना) रद्द हुई। उपयोग: वैध प्रणाली को भी सीमा में रहना पड़ता है।

मेनका गांधी बनाम भारत संघ (1978): राज्य की प्रक्रिया न्यायसंगत, निष्पक्ष और युक्तियुक्त होनी चाहिए; अनुच्छेद 14, 19 और 21 साथ काम करते हैं। बिना कारण बताए अंक के सहारे लाभ रद्द करना इस कसौटी पर कठिनाई में पड़ता है (यह हमारा अनुप्रयोग है)।

नीति आयोग, "Towards Responsible AI for All: Approach Document for India, Part 1, Principles for Responsible AI" (फ़रवरी 2021): सात सिद्धांत: सुरक्षा और विश्वसनीयता; समानता; समावेशन और अभेदभाव; निजता और सुरक्षा; पारदर्शिता; जवाबदेही; सकारात्मक मानवीय मूल्यों का संरक्षण और संवर्धन। साथ ही शिकायत-निवारण तंत्र और, जहाँ हानि की आशंका अधिक हो, इंसान के हस्तक्षेप की व्यवस्था की माँग।

IndiaAI मिशन: केंद्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति, मार्च 2024, पाँच वर्ष के लिए लगभग 10,372 करोड़ रुपये का परिव्यय।

MeitY, India AI Governance Guidelines (5 नवंबर 2025 को जारी): सात सूत्र: Trust is the Foundation; People First; Innovation over Restraint; Fairness and Equity; Accountability; Understandable by Design; Safety, Resilience and Sustainability। दस्तावेज़ के अनुसार अभी अलग AI कानून की ज़रूरत नहीं, मौजूदा कानून लागू हों। "People First" के अनुसार जहाँ तक संभव हो मनुष्य के पास AI प्रणालियों पर अंतिम नियंत्रण रहे और मानवीय निगरानी जवाबदेही के लिए आवश्यक है।

DPDP अधिनियम, 2023: डेटा-संरक्षण कानून। अधिनियम के पाठ (अधिनियम संख्या 22, 2023) में यूरोपीय संघ जैसा "केवल स्वचालित निर्णय के विरुद्ध अधिकार" नहीं है। जो मिलता है: धारा 8(3): जिस व्यक्तिगत डेटा से नागरिक को प्रभावित करने वाला निर्णय लिया जाना संभावित हो, उसकी पूर्णता, सटीकता और संगतता सुनिश्चित करना; धाराएँ 11 से 13: जानकारी, सुधार और मिटाने, तथा शिकायत-निवारण के अधिकार। धारा 7(ख) राज्य को सब्सिडी या लाभ देने के लिए कुछ डेटा बिना नई सहमति के प्रयोग करने देती है। इसलिए AI-निर्णय की निष्पक्षता मुख्यतः संविधान, प्रशासनिक कानून और नीति पर टिकती है।

वैश्विक संदर्भ (मूल्य-वृद्धि के लिए): यूरोपीय संघ का GDPR अनुच्छेद 22(1): केवल स्वचालित प्रसंस्करण पर आधारित, कानूनी या वैसे ही गंभीर प्रभाव वाले निर्णय के अधीन न होने का अधिकार। अनुच्छेद 22(3): कम से कम मानवीय हस्तक्षेप, अपनी बात रखने और निर्णय को चुनौती देने का अधिकार। EU AI Act: 1 अगस्त 2024 से प्रभावी; उच्च-जोखिम प्रणालियों पर मानवीय निगरानी और पारदर्शिता के दायित्व। UNESCO की AI-नैतिकता सिफ़ारिश: नवंबर 2021, 193 सदस्य देशों द्वारा स्वीकृत।

भारतीय परंपरा में अंतरात्मा (केवल स्रोत-सहित उद्धरण)

गांधी: "The 'still small voice' within you must always be the final arbiter when there is a conflict of duty." (यंग इंडिया, 4 अगस्त 1920)। भाव: कर्तव्यों के टकराव में भीतर की धीमी आवाज़ ही अंतिम निर्णायक है। और: "For me the Voice of God, of Conscience, of Truth, or the Inner Voice or 'the Still Small Voice' mean one and the same thing." (हरिजन, 8 जुलाई 1933)।

गीता 18.63: "विमृश्यैतदशेषेण यथेच्छसि तथा कुरु", अर्थात् इस पर पूरी तरह विचार करो, फिर जैसा चाहो वैसा करो। इसे प्रायः इस रूप में पढ़ा जाता है कि अर्जुन से अंधानुसरण नहीं, सोचकर चुनने को कहा गया (यह व्याख्या है; आगे 18.66 में शरणागति का उपदेश भी आता है, इसलिए यह न लिखें कि गीता असीमित निजी चुनाव सिखाती है)। गीता में विवेक-शक्ति के लिए मूल शब्द बुद्धि है (अध्याय 2 का बुद्धि-योग); विवेक (सत्-असत्, उचित-अनुचित का भेद) परवर्ती वेदांत का शब्द है, जो इसी भीतरी विवेचना के लिए प्रचलित है।

हाना आरेन्ट, Eichmann in Jerusalem (1963): उन्होंने बड़े अनर्थ की जड़ "विचारहीनता" (thoughtlessness) में खोजी और इसे "the fearsome, word-and-thought-defying banality of evil" कहा।

न्यूरेम्बर्ग सिद्धांत IV (अंतरराष्ट्रीय विधि आयोग, 1950): ऊपर के आदेश पर काम करने से व्यक्ति ज़िम्मेदारी से मुक्त नहीं होता, "provided a moral choice was in fact possible to him", यानी जब नैतिक चुनाव संभव था।

हमारी कड़ी: "एल्गोरिदम ने कहा था" आज का "ऊपर से आदेश था" है। बिना सोचे हस्ताक्षर करने वाले ने न चुनकर भी चुनाव किया है।

परीक्षा के लिए सावधानी: अंतरात्मा सनक नहीं है। उसे सत्य, अहिंसा और संविधान की कसौटी पर परखिए; सेवा में पहले आपत्ति लिखित में उठाइए और ऊपर बढ़ाइए, चुपके से आदेश की अवहेलना मत कीजिए। (यह उत्तर-लेखन की सलाह है, किसी नियम का हवाला नहीं।)

उत्तर में प्रयोग

एक उदाहरण, एक पंक्ति की सीख, एक सिद्धांत। जैसे: "डच बाल-लाभ मामले (जनवरी 2021 में सरकार का इस्तीफ़ा) में पक्षपाती जोखिम-मॉडल ने हज़ारों परिवारों के साथ अन्याय किया; इसलिए व्याख्येयता और मानवीय समीक्षा वैकल्पिक नहीं हैं।"

विचारक और उद्धरण बॉक्स

नामविचारएक प्रयोग योग्य पंक्ति
महात्मा गांधीकर्तव्यों के टकराव में भीतरी आवाज़ अंतिम मार्गदर्शक"The 'still small voice' within you must always be the final arbiter when there is a conflict of duty." (यंग इंडिया, 4 अगस्त 1920)
भगवद्गीता 18.63पूरा सोचो, फिर चुनो"विमृश्यैतदशेषेण यथेच्छसि तथा कुरु"
हाना आरेन्ट (1963)विचारहीनता अनर्थ को संभव बनाती है"the fearsome, word-and-thought-defying banality of evil"
न्यूरेम्बर्ग सिद्धांत IV (1950)आदेश पूरा बचाव नहीं"provided a moral choice was in fact possible to him"
आयुक्त होम्स, रोबोडेट रिपोर्ट (7 जुलाई 2023)चेतावनियाँ अनसुनी, स्वचालित नुकसान"venality, incompetence and cowardice"
गांधी का तावीज़ (उनके नाम से प्रचलित; प्रायः 1947 का बताया जाता है; मूल स्रोत नहीं मिला; शब्द संस्करण-भेद से बदलते हैं)हर कदम को सबसे कमज़ोर पर असर से परखें"recall the face of the poorest and the weakest man ... and ask yourself, if the step you contemplate is going to be of any use to him"

चित्र: प्रवाह-चित्र: मानव-समीक्षा वाला निर्णय

  1. नागरिक का मामला आता है (आवेदन, लाभ, शिकायत)

    नोड (धूसर)

  2. AI छँटाई और अंक देता है। परिणाम केवल सुझाव है

    नीचे तीर। नोड (नीला)

  3. क्या परिणाम प्रतिकूल है (इनकार, रद्दीकरण, दंड), असामान्य है या दाँव ऊँचा है?

    नीचे तीर। हीरा (नारंगी)

  4. हाँ

    दाईं ओर तीर, लेबल । नोड (नारंगी)

  5. प्रशिक्षित अधिकारी कारण और नागरिक का पक्ष पढ़ता है; पलट सकता है। लिखित कारण सहित निर्णय

  6. नहीं (नियमित, अनुकूल)

    हीरे से नीचे तीर, लेबल । नोड (हरा)

  7. नियमित स्वीकृति। बेतरतीब नमूने की मानवीय जाँच

  8. नागरिक को कारण और अपील का रास्ता बताया जाता है

    दोनों नोड मिलकर: नोड (धूसर)

  9. अपील या शिकायत अधिकारी समीक्षा करता है

    नीचे तीर। नोड (गहरा नीला)

  10. पूर्वाग्रह और त्रुटि की जाँच, फिर प्रणाली और नियमों में सुधार

    नीचे तीर। नोड (गहरा नीला)

  11. हमारा सूत्र: AI स्वीकृति में मदद कर सकता है; हर इनकार का स्वामी इंसान हो।

    पाद-पट्टी

निर्णय कौन लेगा? मानव-समीक्षा का प्रवाह

यह अवधारणा पहले कैसे पूछी गई: RPSC ने "नैतिक निर्णय बनाम प्रशासनिक निर्णय" (2021) और "व्यक्तिगत बनाम व्यावसायिक नैतिकता" (2023) 10 अंक में, तथा "नैतिक दुविधा" 2 अंक में (2021) पूछी है। दुविधा 2021 से 2023 के बीच 2 अंक से 10 अंक पर पहुँची। नए AI और अंतरात्मा वाले शब्दों के लिए भी यही राह अपेक्षित है: पहले परिभाषा, फिर भाग ग में विवेचना।

हमारा अनुमान (RPSC की जानकारी नहीं)

भागसंभावित रूप
क (2 अंक)"एल्गोरिदमिक पूर्वाग्रह से क्या आशय है?" / "अंतरात्मा को परिभाषित कीजिए।" / "ह्यूमन-इन-द-लूप से क्या आशय है?" / "AI शासन में व्याख्येयता क्या है?"
ख (5 अंक)"क्या प्रशासनिक निर्णय AI पर भरोसे से लिए जा सकते हैं? दो नैतिक जोखिम बताइए।" / "क्या नियमों की तुलना में अंतरात्मा अधिक विश्वसनीय मार्गदर्शक है?" / "AI-सहायित निर्णयों के लिए प्रशासक को जवाबदेह क्यों रहना चाहिए?"
ग (10 अंक)"AI तेज़ निर्णय ले सकता है पर महसूस नहीं कर सकता। क्या प्रशासक को निर्णय AI पर छोड़ना चाहिए? उदाहरण सहित विवेचना कीजिए।" / "प्रशासक अंतरात्मा बचाकर भी AI का उपयोग कैसे कर सकता है?" / छोटा काल्पनिक केस: AI औज़ार लाभ रद्द करने का सुझाव देता है, अधिकारी को शक है।

आम गलतियाँ

याद रखें

  • केवल "AI खतरनाक है" लिख देना। अच्छा उत्तर पहले AI के असली लाभ बताता है, फिर सीमाएँ।
  • "ह्यूमन-इन-द-लूप" को जादुई शब्द मान लेना। इंसान आँख मूँदकर हस्ताक्षर करे तो लूप खोखला है (डच मामला)।
  • मामलों के आँकड़े बिना स्रोत या वर्ष के लिख देना। केवल वही लिखिए जिसका पक्का पता हो, और मीडिया-रिपोर्ट वाले आँकड़ों के साथ "रिपोर्टों के अनुसार" जोड़िए।

स्व-परीक्षण (5 स्मरण प्रश्न)

याद रखें

  • प्रशासन में AI के छह सिद्धांतों में से कोई चार बताइए।
  • डच बाल-लाभ मामले में डेटा संरक्षण प्राधिकरण ने क्या पाया और सरकार ने इस्तीफ़ा कब दिया?
  • निर्णय-सहायता और निर्णय-निर्माण में क्या फ़र्क है?
  • "still small voice" पर गांधी की पंक्ति और उसका स्रोत-वर्ष बताइए।
  • पुट्टस्वामी की आनुपातिकता कसौटी के तीन अंग कौन-से हैं?

उत्तर-कुंजी

(1) पारदर्शिता, व्याख्येयता, जवाबदेही, मानव-समीक्षा, निष्पक्षता, निजता; (2) राष्ट्रीयता को जोखिम-संकेतक बनाया गया, जो अवैध और भेदभावपूर्ण था; सरकार का इस्तीफ़ा 15 जनवरी 2021; (3) सहायता में इंसान तय करता है, निर्माण में AI का परिणाम ही निर्णय है; (4) "final arbiter when there is a conflict of duty", यंग इंडिया 1920; (5) वैधानिकता, आवश्यकता (वैध उद्देश्य), आनुपातिकता।