साधन-तर्कसंगतता बनाम मूल्य-तर्कसंगतता
RAS मुख्य परीक्षा, पत्र II, इकाई I, बिंदु 8: नैतिक निर्णय का आधार (सामाजिक न्याय, मानवीय सरोकार, जवाबदेही); साधन-तर्कसंगतता बनाम मूल्य-तर्कसंगतता
- जनवरी 2026 के पाठ्यक्रम के अनुसार अद्यतन
- पढ़ने का समय: लगभग 14 मिनट
परीक्षा-भार (हमारी गिनती, RAS पत्र II इकाई I, 2018, 2021, 2023, 2024)
52 में से सीधा प्रश्न 0 (नया विषय)। निकटतम पुराने प्रश्न: 2023 भाग ग प्र.12 (कर्तव्यवाद और परिणामवाद), 2021 भाग ग प्र.11 (साधन और साध्य, गांधी), 2024 भाग ग प्र.13 (मानव संसाधन और साध्य के रूप में मानवता)
30 सेकंड का सार
याद रखें
- मैक्स वेबर (Economy and Society, जर्मन मूल 1922) ने मानवीय कर्म के चार प्रकार बताए। यहाँ दो काम के हैं: साधन-तर्कसंगत (zweckrational): दिए हुए लक्ष्य के लिए गणना से सर्वोत्तम साधन चुनना; और मूल्य-तर्कसंगत (wertrational): किसी कर्म को उसके अपने मूल्य में सचेत आस्था के कारण करना, सफलता की संभावना चाहे जो हो।
- प्रशासन को दोनों चाहिए। साधन-तर्क से काम होता है (लागत, समय, परिणाम)। मूल्य-तर्क से वैधता मिलती है (गरिमा, न्याय, अधिकार)।
- मूल्यों के बिना कुशलता क्रूर बन सकती है: 1976-77 का जबरन नसबंदी अभियान, रोबोडेट और डच बाल-लाभ घोटाले। गणना के बिना मूल्य-निष्ठा नेक इरादा बनी रह सकती है, काम नहीं करती।
- काम का सूत्र (हमारा संश्लेषण): मूल्य मंज़िल और सीमा तय करें; गणना उस सीमा के भीतर सबसे अच्छा रास्ता चुने। गांधी: साधन बीज की तरह हैं, साध्य वृक्ष की तरह।
- विषय 7.6 से कड़ी: AI शुद्धतम साधन-तर्कसंगतता है, क्योंकि वह दिए गए लक्ष्य को अधिकतम करता है। मूल्यों का पक्ष इंसान को ही जोड़ना होगा।
भाग क बॉक्स (लिखने के लिए तैयार, 15 शब्द)
याद रखें
- साधन-तर्कसंगतता: दिए गए लक्ष्य के लिए सबसे कुशल साधन चुनना, जिसकी कसौटी परिणाम हैं।
- मूल्य-तर्कसंगतता: किसी मूल्य को उसी के लिए मानकर, परिणाम की परवाह किए बिना, कर्म करना।
- वेबर (1922): zweckrational यानी साधन-साध्य गणना; wertrational यानी कर्म के अपने मूल्य पर आस्था।
स्रोत: वेबर के सामाजिक कर्म के चार प्रकार
स्रोत: मैक्स वेबर, Economy and Society (Wirtschaft und Gesellschaft, 1922, उनकी मृत्यु के बाद प्रकाशित)। वे कहते हैं कि सामाजिक कर्म चार ढंग से प्रेरित हो सकता है: (1) साधन-तर्कसंगत (zweckrational), (2) मूल्य-तर्कसंगत (wertrational), (3) भावात्मक (affectual, भावना से प्रेरित), (4) परंपरागत (traditional, आदत और रीति से प्रेरित)।
दो परिभाषाएँ, रोथ और विटिश (Roth and Wittich) के अंग्रेज़ी अनुवाद (University of California Press, 1978) के रूप में, जैसा मानक संदर्भों में उद्धृत है (शब्दशः लिखने से पहले मुद्रित पृष्ठ में सटीक शब्द मिला लें):
Zweckrational: "determined by expectations as to the behavior of objects in the environment and of other human beings; these expectations are used as 'conditions' or 'means' for the attainment of the actor's own rationally pursued and calculated ends"। भाव: परिवेश और दूसरे लोगों के व्यवहार की अपेक्षाओं को अपने सोचे-समझे, गणना किए लक्ष्य की प्राप्ति के "साधन" बनाना।
Wertrational: "determined by a conscious belief in the value for its own sake of some ethical, aesthetic, religious, or other form of behavior, independently of its prospects of success"। भाव: किसी नैतिक, सौंदर्यगत, धार्मिक या अन्य आचरण के अपने मूल्य में सचेत आस्था के कारण कर्म करना, सफलता की संभावना से स्वतंत्र।
जर्मन Zweck का अर्थ लक्ष्य या प्रयोजन है; Wert का अर्थ मूल्य है। दोनों में "तर्कसंगत" का मतलब "सुसंगत और सोचा-समझा" है, "अच्छा" नहीं।
दोनों सरल शब्दों में
| साधन-तर्क (Instrumental) | मूल्य-तर्क (Value) | |
|---|---|---|
| पूछा गया प्रश्न | "यह नतीजा पाने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?" | "क्या यह कर्म अपने-आप में उचित है?" |
| कसौटी | परिणाम, लागत, समय, संभावना | सिद्धांत, कर्तव्य, गरिमा, अंतरात्मा |
| ताकत | काम पूरा होना, कुशलता, योजना | ईमानदारी, वैधता, साहस |
| खतरा | "साध्य साधन को सही ठहराता है" वाली सोच; कमज़ोर की अनदेखी | परिणामों की अनदेखी; नेक इरादा पर काम नहीं |
| पश्चिमी प्रतिध्वनि (हमारी व्याख्या) | परिणामवाद, उपयोगितावादी सोच | कर्तव्यवाद, कांट का कर्तव्य |
सावधानी: वेबर के दोनों प्रकार बताते हैं कि व्यक्ति कैसे कर्म करता है; कर्तव्यवाद और परिणामवाद सिद्धांत हैं कि क्या उचित है। इनमें साम्य है, पर ये एक नहीं हैं। "के समान" लिखिए, "के बराबर" नहीं।
जिला कार्यालय की भाषा में
| स्थिति | साधन-तर्क का दृष्टिकोण | मूल्य-तर्क का दृष्टिकोण |
|---|---|---|
| अतिक्रमण हटाना | सबसे तेज़ और सस्ती सफ़ाई | नोटिस, सुनवाई, पुनर्वास |
| लाभार्थी सूची की सफ़ाई | संदिग्ध नाम काटकर पैसा बचाना | किसी असली निर्धन का नाम न कटे |
| योजना का लक्ष्य | तारीख तक आँकड़ा पूरा | सही लोगों तक, उनकी सहमति से |
| धोखाधड़ी पकड़ने में AI | प्रति रुपया अधिकतम धोखाधड़ी पकड़ना | हर समूह के साथ निष्पक्षता; इंसान चुनौती दे सके |
औपचारिक और सारभूत तर्कसंगतता
वेबर ने नौकरशाही को प्रशासन का सबसे तर्कसंगत रूप माना: नियम, पदानुक्रम, अभिलेख, निर्वैयक्तिक प्रक्रिया। यह औपचारिक तर्कसंगतता है, यानी तरीके में तर्कसंगत। सारभूत तर्कसंगतता पूछती है कि परिणाम न्याय और कल्याण जैसे मूल्यों की सेवा करता है या नहीं। वेबर की चेतावनी है "लोहे का पिंजरा" (iron cage): नियमों में जकड़ी व्यवस्थाएँ इंसान को बाँध लेती हैं और प्रयोजन भूल जाती हैं। (लोहे के पिंजरे की उपमा The Protestant Ethic (1904-05) से आती है; मानक संदर्भ।) अच्छा प्रशासन औपचारिक कुशलता रखता है पर सारभूत मूल्यों के प्रति उत्तरदायी रहता है।
वेबर की दूसरी जोड़ी: दृढ़ विश्वास और उत्तरदायित्व
"Politics as a Vocation" व्याख्यान (28 जनवरी 1919, प्रकाशन 1919) में वेबर ने दृढ़ विश्वास की नैतिकता (Gesinnungsethik: सिद्धांत पर चलना) और उत्तरदायित्व की नैतिकता (Verantwortungsethik: पूर्वानुमेय परिणामों का उत्तर देना) में भेद किया। प्रचलित पाठ यह है कि ये परस्पर पूर्ण विरोधी नहीं हैं; परिपक्व लोकसेवक को दोनों चाहिए (मानक व्याख्या)। प्रशासक के असली चुनावों से जोड़ने के लिए यह सबसे अच्छा पुल है।
अन्य पाठ्यक्रम-विचारों से कड़ियाँ (हमारी व्याख्या)
कांट (Groundwork, 1785): बिना शर्त शुभ केवल शुभ-संकल्प है; कर्तव्य कर्तव्य के लिए किया जाता है। मूल्य-तर्कसंगतता के निकट।
उपयोगितावादी और परिणामवादी विचार: परिणाम से परखना। साधन-तर्कसंगतता के निकट। (RAS 2023 में प्रशासक के लिए कर्तव्यवाद बनाम परिणामवाद पूछा गया।)
गीता 2.47 ("कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन"): अधिकार कर्म पर है, फल पर नहीं। निष्काम कर्म का अर्थ "परिणाम की अनदेखी" नहीं है; यह कर्तव्य-भाव से कर्म और फल की चिंताभरी आसक्ति से मुक्ति है। इसे शुद्ध मूल्य-तर्कसंगतता न कहें; "मूल्य-केंद्रित" कहें।
गांधी, हिंद स्वराज, अध्याय 16: "The means may be likened to a seed, the end to a tree; and there is just the same inviolable connection between the means and the end as there is between the seed and the tree." अर्थात् साधन बीज है, साध्य वृक्ष, और दोनों में अटूट संबंध है। यह "साध्य साधन को उचित ठहराता है" को नकारती और दोनों पक्षों को जोड़ती है।
गांधी का तावीज़ (उनके नाम से प्रचलित): हर कदम को सबसे निर्धन व्यक्ति पर उसके असर से परखिए: गणना पर मूल्य की जाँच।
जब दोनों खिंचें: तीन प्रश्नों की कसौटी (हमारा औज़ार)
1. क्या साध्य उचित है? (क्या वह न्याय, कल्याण, अधिकार की सेवा करता है?)
2. क्या साधन उचित हैं? (सहमति, गरिमा, कानून, निष्पक्ष प्रक्रिया; किसी इंसान को केवल औज़ार न बनाना।)
3. क्या यह चलेगा, और सबसे कमज़ोर पर क्या बीतेगी? (लागत, समय, प्रभावशीलता, दुष्प्रभाव, वैकल्पिक योजना।)
प्रश्न 1 या 2 का उत्तर "नहीं" हो तो रुककर पुनर्रचना कीजिए। 1 और 2 "हाँ" हों तो गणना खुलकर कीजिए।
कानून पहले से दोनों को मिलाता है। पुट्टस्वामी (24 अगस्त 2017) की वैधानिकता, आवश्यकता और आनुपातिकता की कसौटी एक गणना है (क्या साधन आवश्यक और आनुपातिक है?) जो एक मूल्य (मौलिक अधिकार) के भीतर रखी गई है। मेनका गांधी (1978) कहता है कि प्रक्रिया न्यायसंगत, निष्पक्ष और युक्तियुक्त हो: प्रशासनिक तरीके पर मूल्य की सीमा। (इन्हें इस प्रकार जोड़ना हमारी व्याख्या है।)
AI से कड़ी (विषय 7.6)
AI को जो लक्ष्य दिया जाए, वह उसी को अधिकतम करता है: कोड में बैठी साधन-तर्कसंगतता। लक्ष्य उचित है या नहीं, यह वह तय नहीं कर सकता। डच बाल-लाभ और रोबोडेट में लक्ष्य संकरा दिखता है: "धोखाधड़ी पकड़ो और वसूलो"। भेदभाव-निषेध, उचित प्रक्रिया और सद्भाव की धारणा जैसे मूल्य प्रणाली के संचालन में प्रभावी नहीं दिखे (हमारी व्याख्या; दोनों मामलों में कानून का उल्लंघन भी पाया गया, इसलिए इन्हें केवल "साधन-तर्क की अति" न कहें)। इसलिए मूल्य लिखकर डालने होंगे: उस इंसान द्वारा जो लक्ष्य तय करता, निष्पक्षता जाँचता और परिणाम का स्वामित्व लेता है।
उत्तर में प्रयोग
शुद्ध गणना की विफलता का एक उदाहरण (1976-77 का नसबंदी अभियान या रोबोडेट) और मूल्य-साधन के मेल का एक उदाहरण (MKSS) जोड़िए। फिर तीन प्रश्नों की कसौटी दीजिए।
विचारक और उद्धरण बॉक्स
| नाम | विचार | एक प्रयोग योग्य पंक्ति |
|---|---|---|
| मैक्स वेबर, Economy and Society (1922) | कर्म साधन-तर्कसंगत हो सकता है | "...rationally pursued and calculated ends" |
| मैक्स वेबर, Economy and Society (1922) | कर्म मूल्य-तर्कसंगत हो सकता है | "...a conscious belief in the value for its own sake of some ethical, aesthetic, religious, or other form of behavior, independently of its prospects of success" |
| मैक्स वेबर, "Politics as a Vocation" (1919) | दृढ़ विश्वास और उत्तरदायित्व | दृढ़ विश्वास की नैतिकता (Gesinnungsethik) और उत्तरदायित्व की नैतिकता (Verantwortungsethik) |
| एम. के. गांधी, हिंद स्वराज, अध्याय 16 | साधन और साध्य अभिन्न हैं | "The means may be likened to a seed, the end to a tree." |
| भगवद्गीता 2.47 | कर्तव्य, फल की चिंताभरी आसक्ति के बिना | "कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन" |
| गांधी का तावीज़ (उनके नाम से प्रचलित; प्रायः 1947 का बताया जाता है; मूल स्रोत नहीं मिला; शब्द संस्करण-भेद से बदलते हैं) | कदम को सबसे कमज़ोर पर असर से परखें | "recall the face of the poorest and the weakest man ... and ask yourself, if the step you contemplate is going to be of any use to him" |
| इमैनुएल कांट, Groundwork (1785) | केवल शुभ-संकल्प बिना शर्त शुभ है | केवल भावार्थ; इसे सीधा उद्धरण बनाकर न लिखें |
चित्र: 2x2 ग्रिड
मूल्यों के प्रति निष्ठा: कम से अधिक
क्षैतिज अक्ष (बाएँ से दाएँ)
साधनों और परिणामों की गणना: कम से अधिक
ऊर्ध्वाधर अक्ष (नीचे से ऊपर)
ठंडा तकनीकशाह। गणना अधिक, मूल्य कम। लक्ष्य पूरे, पर लोग आहत। उदाहरण: 1976-77 का नसबंदी अभियान
ऊपर-बायाँ खाना (धूसर)
उत्तरदायी प्रशासक। गणना भी, मूल्य भी। मूल्य लक्ष्य और सीमा तय करते हैं; गणना रास्ता चुनती है। उदाहरण: अभिलेख पढ़कर सुनाने वाली जन सुनवाइयाँ (MKSS)
ऊपर-दायाँ खाना (हरा, उभरा हुआ)
बहाव। दोनों नहीं। आदत या आवेग से कर्म (वेबर के परंपरागत और भावात्मक प्रकार)
नीचे-बायाँ खाना (सफ़ेद)
सिद्धांतनिष्ठ आदर्शवादी। मूल्य अधिक, गणना कम। साहसी, पर काम न कर पाए। उदाहरण: बाढ़ वाले केस का कठोर नियम
नीचे-दायाँ खाना (नारंगी)
लक्ष्य ऊपर-दायाँ खाना है। वेबर के प्रकार बताते हैं कि लोग कैसे कर्म करते हैं, कौन अच्छा या बुरा है यह नहीं।
पाद-पट्टी
यह अवधारणा पहले कैसे पूछी गई: RPSC के निकटतम प्रश्न सब भाग ग (10 अंक) में हैं: कर्तव्यवाद और परिणामवाद (2023), साधन और साध्य (2021), मानव संसाधन और साध्य के रूप में मानवता (2024)। इसलिए तर्कसंगतता पर भाग ग संभव है, और प्रवेश-रूप में हर शब्द की भाग क परिभाषा।
हमारा अनुमान (RPSC की जानकारी नहीं)
| भाग | संभावित रूप |
|---|---|
| क (2 अंक) | "साधन-तर्कसंगतता क्या है?" / "मूल्य-तर्कसंगतता क्या है?" / "zweckrational और wertrational शब्द किसने दिए?" |
| ख (5 अंक) | "साधन-तर्कसंगतता और मूल्य-तर्कसंगतता का अंतर उदाहरण सहित बताइए।" / "कुशलता ही अच्छे निर्णय की एकमात्र कसौटी नहीं है। विवेचना कीजिए।" / "क्या कर्तव्यवाद और परिणामवाद वही हैं जो मूल्य-तर्कसंगतता और साधन-तर्कसंगतता?" |
| ग (10 अंक) | "एक योजना कुशल है पर आदिवासी समुदाय को हानि पहुँचाती है। दोनों तर्कसंगतताओं से विश्लेषण कीजिए।" / "प्रशासन में साधन और साध्य: गांधी के विचार को वेबर की दो तर्कसंगतताओं से जोड़िए।" / लागत या लक्ष्य के दबाव और समुदाय के अधिकारों के टकराव का छोटा काल्पनिक केस। |
आम गलतियाँ
याद रखें
- मूल्य-तर्कसंगतता को "अच्छी" और साधन-तर्कसंगतता को "बुरी" लिख देना। वेबर के शब्द कर्म का ढंग बताते हैं। दोनों चाहिए, और दोनों का अपना खतरा है।
- "गीता कहती है परिणाम की चिंता मत करो" लिख देना। निष्काम कर्म का अर्थ फल की चिंताभरी आसक्ति के बिना कर्तव्य है, परिणामों के प्रति लापरवाही नहीं।
- वेबर के शब्द स्रोत और वर्ष के बिना लिखना। "मैक्स वेबर, Economy and Society, 1922" लिखिए, फिर दोनों परिभाषाएँ।
स्व-परीक्षण (5 स्मरण प्रश्न)
याद रखें
- वेबर के सामाजिक कर्म के चार प्रकार बताइए।
- wertrational को एक पंक्ति में परिभाषित कीजिए, "prospects of success" वाले अंश सहित।
- ऐसा एक वास्तविक उदाहरण दीजिए जहाँ गणना ने मूल्यों को कुचला, वर्ष सहित।
- औपचारिक और सारभूत तर्कसंगतता में क्या अंतर है?
- कुशलता और मूल्यों के खिंचने पर निर्णय के लिए तीन प्रश्नों की कसौटी बताइए।
उत्तर-कुंजी
(1) साधन-तर्कसंगत, मूल्य-तर्कसंगत, भावात्मक, परंपरागत; (2) कर्म के अपने मूल्य में सचेत आस्था के कारण कर्म, सफलता की संभावना से स्वतंत्र; (3) जबरन नसबंदी अभियान, 1976-77 (1976-77 में लगभग 62 लाख नसबंदियाँ), या रोबोडेट, 2019 में अवैध; (4) औपचारिक: तरीके में तर्कसंगत (नियम, गणनीयता); सारभूत: न्याय और कल्याण जैसे मूल्यों की सेवा में तर्कसंगत; (5) क्या साध्य उचित है, क्या साधन उचित हैं, क्या चलेगा और सबसे कमज़ोर पर क्या बीतेगी।
उदाहरण (वास्तविक, प्रलेखित) और उत्तर में प्रयोग
केस स्टडीजबरन नसबंदी अभियान, भारत, 1976-77
आपातकाल के दौरान: Ideas for India में सार-संक्षिप्त शोध के अनुसार 1975-76 में लगभग 15 लाख के मुकाबले 1976-77 में लगभग 62 लाख नसबंदियाँ हुईं। दबाव में पदोन्नति और भुगतान रोके गए, राशन कार्ड, आवास और स्वास्थ्य जैसी सेवाओं के लिए नसबंदी प्रमाणपत्र माँगे गए; शिक्षकों से अभिभावकों को मनाने को कहा गया
सीख
लक्ष्य पूरा, सहमति और गरिमा खोई: मूल्य-सीमा के बिना साधन-तर्क
केस स्टडीरोबोडेट (ऑस्ट्रेलिया)
औसत-आय पर आधारित कर्ज़-नोटिस; संघीय न्यायालय, नवंबर 2019, ने विधि को अवैध माना (सरकार ने ऐसे कर्ज़ रोकना मान लिया); रॉयल कमीशन रिपोर्ट, 7 जुलाई 2023
सीख
सस्ती वसूली की ऐसी विधि जिसने वैधता और निष्पक्ष प्रक्रिया को अनदेखा किया
केस स्टडीखेजड़ली, राजस्थान (1730)
प्रचलित विवरणों के अनुसार सितंबर 1730 में (संभवतः 11 सितंबर) अमृता देवी के नेतृत्व में बिश्नोई ग्रामीणों ने मारवाड़ के महाराजा अभय सिंह के आदेश से खेजड़ी के पेड़ काटे जाने का विरोध किया; 363 ग्रामीणों के मारे जाने की बात कही जाती है। कहा जाता है कि महाराजा ने क्षमा माँगी और आदेश दिया कि गाँव से फिर लकड़ी नहीं ली जाएगी। विवरणों में स्रोत-भेद है
सीख
मूल्य-तर्कसंगत कर्म: सफलता की गारंटी के बिना मूल्य के लिए बलिदान (हमारा वर्गीकरण)। यह नैतिक शक्ति दिखाता है, पर रोज़ के प्रशासन का तरीका नहीं
केस स्टडीMKSS की जन सुनवाइयाँ, राजस्थान (1990 का दशक)
मज़दूर किसान शक्ति संगठन (1990 में देवडूंगरी में स्थापित) ने सरकारी खर्च के अभिलेख सार्वजनिक सुनवाइयों में पढ़कर सुनाए; अप्रैल 1996 में ब्यावर में 40 दिन का धरना; राजस्थान सूचना का अधिकार अधिनियम, 2000 (लागू 26 जनवरी 2001)
सीख
व्यावहारिक तरीका (मस्टर रोल ज़ोर से पढ़ना) एक मूल्य (पारदर्शिता) की सेवा में: दोनों साथ
केस स्टडीडच बाल-लाभ घोटाला (नीदरलैंड)
लगभग 26,000 अभिभावकों पर गलत आरोप (2005-2019); (दोहरी) राष्ट्रीयता जोखिम-संकेतक बनी; 27.5 लाख यूरो का जुर्माना (दिसंबर 2021); सरकार का इस्तीफ़ा 15 जनवरी 2021
सीख
"धोखाधड़ी पकड़ो" के संकरे लक्ष्य ने न्याय और समानता को हरा दिया
लघु केस अध्ययन (काल्पनिक केस / Hypothetical case)
उदाहरण (काल्पनिक)केस 1: सड़क और बस्ती (काल्पनिक केस / Hypothetical case)
राजस्थान के एक जिला मुख्यालय में नाली-और-सड़क परियोजना 31 मार्च से पहले पूरी न हुई तो उसकी कुछ राशि लैप्स हो जाएगी। अभियंता कहते हैं कि सबसे सस्ता संरेखण तकनीकी रूप से सर्वोत्तम है, पर वह 60 परिवारों की उस बस्ती से गुज़रता है जहाँ लोग लगभग 25 वर्ष से बिना पट्टे के रह रहे हैं। नया संरेखण लगभग 18 प्रतिशत महँगा पड़ेगा और चार महीने ज़्यादा लेगा, यानी नई स्वीकृति और राशि लैप्स होने की आशंका। निवासी कलेक्टर कार्यालय पर इकट्ठा होने लगे हैं।
- हितधारक
- 60 परिवार (बच्चे, बुज़ुर्ग, दिहाड़ी कमाने वाले); अभियंता और ठेकेदार; व्यापारी और राहगीर; राज्य सरकार (राशि); कलेक्टर; जलभराव से प्रभावित आसपास के निवासी।
- मुद्दा और टकराते मूल्य
- कुशलता, लागत और राशि की सुरक्षा (साधन-तर्क) बनाम आश्रय, आजीविका, गरिमा और निष्पक्ष प्रक्रिया (मूल्य)। साथ ही: सार्वजनिक लाभ (जल-निकासी) बनाम कुछ लोगों पर केंद्रित हानि।
- तीन विकल्प
- क. नोटिस देकर मूल संरेखण पर आगे बढ़ें. लाभ: सबसे सस्ता और तेज़; राशि सुरक्षित. हानि: परिवारों के घर जाएँगे; विरोध और मुकदमे की संभावना; भावना में अन्याय. ख. योजना छोड़कर पूरा नया डिज़ाइन बनाएँ. लाभ: परिवार सुरक्षित. हानि: 18 प्रतिशत अधिक लागत; चार महीने की देरी; राशि लैप्स का खतरा; जलभराव जारी. ग. मिला-जुला: अभियंताओं से न्यूनतम-विस्थापन वाला बदलाव माँगें; सार्वजनिक सुनवाई; केवल अपरिहार्य घरों को लिखित नोटिस, पास में पुनर्वास और तोड़ने से पहले सहायता-भुगतान; संशोधित लागत के लिए लिखित स्वीकृति या विस्तार माँगें; जिन हिस्सों पर विवाद नहीं, उनका काम अभी शुरू करें. लाभ: कुशलता और न्याय का संतुलन; हानि सीमित; लिखित में बचाव योग्य. हानि: अतिरिक्त प्रयास और वार्ता; कुछ देरी और लागत; सफलता राज्य के उत्तर पर निर्भर.
- सर्वश्रेष्ठ विकल्प: ग
- समर्थक मूल्य: निष्पक्ष और युक्तियुक्त प्रक्रिया (मेनका गांधी, 1978); सबसे कम हानिकर साधन चुनने का विचार (आनुपातिकता की अवधारणा, पुट्टस्वामी 2017 से सामान्य कसौटी के रूप में उधार ली गई); गांधी का तावीज़ (सबसे निर्धन और कमज़ोर व्यक्ति); उत्तरदायित्व की नैतिकता (वेबर, 1919): केवल नियम का नहीं, परिणामों का भी उत्तर दीजिए।
सीख
कार्रवाई: अल्पकालिक: एक सप्ताह में परिवारों का सर्वे और सार्वजनिक सुनवाई; अभियंताओं से न्यूनतम-विस्थापन का नोट लें; संशोधित योजना की लागत और समय के साथ राज्य को लिखें और विस्तार माँगें; जिन हिस्सों से किसी पर असर नहीं, उनका काम शुरू करें। दीर्घकालिक: संरेखण पक्का करने से पहले पुनर्वास और सामाजिक प्रभाव की मानक जाँच-सूची; परियोजना-कैलेंडर में समय का बफ़र; परियोजना शिकायत प्रकोष्ठ; "लागत और समय" के साथ "प्रभावित परिवार" भी दर्ज करें।
उदाहरण (काल्पनिक)केस 2: बाढ़ में निकासी और सहमति (काल्पनिक केस / Hypothetical case)
ऊपरी इलाके में भारी वर्षा से पश्चिमी राजस्थान के एक जिले की मौसमी नदी लगभग छह घंटे में चढ़ने वाली है। नदी के रास्ते में निचले इलाके की 40 घरों की ढाणी है। उपखंड अधिकारी का निजी नियम है: "मैं बिना लिखित सहमति के किसी को नहीं हटाता और बल प्रयोग कभी नहीं करता।" बारह घर जाने से मना कर रहे हैं: उन्हें पशुओं, सामान और एक स्थानीय देवस्थान की चिंता है। बचाव दल इंतज़ार में है।
- हितधारक
- 40 घर (विशेषकर बच्चे, बुज़ुर्ग, बीमार); इनकार करने वाले 12 घर; अधिकारी; बचाव दल; पड़ोसी गाँव; जिला प्रशासन।
- मुद्दा और टकराते मूल्य
- मूल्य-तर्कसंगत रुख (सहमति और बल-प्रयोग न करना, सिद्धांत के रूप में) बनाम जीवन-रक्षा का कर्तव्य, जो परिणामों का प्रश्न है। अधिकारी का नियम कठोरता से पकड़ने पर छह घंटे की समय-सीमा को अनदेखा करता है: उत्तरदायित्व के बिना दृढ़ विश्वास।
- तीन विकल्प
- क. नियम पर डटे रहें: केवल सहमत लोगों को हटाएँ. लाभ: स्वायत्तता का सम्मान; बल नहीं. हानि: जीवन खतरे में; पूर्वानुमेय हानि का उत्तर अधिकारी को देना होगा. ख. पुलिस से सबको तुरंत हटवाएँ. लाभ: अधिकतम सुरक्षा. हानि: गरिमा की अनदेखी; भरोसा टूटता है; ज़रूरत से ज़्यादा बल संभव. ग. पहले स्थानीय विश्वसनीय लोगों से अधिकतम समझाइश; पशुओं की सुरक्षा की गारंटी (पशु ऊँची जगह, सामान और देवस्थान पर पहरा); आश्रय और भोजन तैयार; जहाँ जीवन पर स्पष्ट और तात्कालिक खतरा हो, वहाँ जिला प्राधिकरण की वैध आपात शक्तियों का प्रयोग, जितना ज़रूरी हो उतना ही और मुख्यतः उनके लिए जो स्वयं निर्णय नहीं ले सकते (बच्चे, बीमार, बुज़ुर्ग); हर कदम का अभिलेख. लाभ: जीवन भी बचता है, गरिमा भी; इनकार करने वालों का असली डर दूर होता है; आनुपातिक. हानि: गति और बहुत से हाथ चाहिए; कुछ घर फिर भी असंतुष्ट रह सकते हैं.
- सर्वश्रेष्ठ विकल्प: ग
- समर्थक मूल्य: जीवन की रक्षा (अनुच्छेद 21); गरिमा और आनुपातिकता; दृढ़ विश्वास के साथ उत्तरदायित्व की नैतिकता (वेबर, 1919)। मूल्य-तर्कसंगतता बनी रहती है, क्योंकि पहले समझाइश है और बल अंतिम उपाय, पर उसे परिणामों पर हावी नहीं होने दिया गया।
सीख
कार्रवाई: अल्पकालिक: सम्मानित स्थानीय लोगों को अभी भेजें; पशुओं को हटाएँ; भोजन-पानी सहित शिविर लगाएँ; पहले बच्चों और बीमारों को निकालें; क्या प्रस्ताव दिया और क्या कहा गया, इसका लिखित अभिलेख रखें। दीर्घकालिक: मानसून से पहले गाँव-स्तर की निकासी योजना और अभ्यास; राहत शिविरों के पास पशु-आश्रय; स्पष्ट पूर्व-चेतावनी; घटना के बाद सामुदायिक बैठक में सीख।
अभ्यास प्रश्न
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
मूल्य-तर्कसंगतता क्या है?
आदर्श उत्तर
कर्तव्य जैसे किसी मूल्य को स्वयं में मूल्यवान मानकर, परिणाम की परवाह बिना, कर्म करना।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
साधन-तर्कसंगतता और मूल्य-तर्कसंगतता का अंतर उदाहरण सहित बताइए।
आदर्श उत्तर
वेबर के अनुसार साधन-तर्कसंगतता दिए गए लक्ष्य के लिए परिणामों की गणना से श्रेष्ठ साधन चुनती है; मूल्य-तर्कसंगतता परिणाम की परवाह बिना मूल्य को उसके अपने महत्त्व से मानती है। बस्ती के बीच से सबसे सस्ती सड़क निकालना पहला है; पुनर्वास बिना घर न तोड़ने का आग्रह दूसरा। प्रशासन को दोनों चाहिए।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
एक योजना कुशल है पर आदिवासी समुदाय को हानि पहुँचाती है। साधन-तर्कसंगतता और मूल्य-तर्कसंगतता के आधार पर विश्लेषण कीजिए।
आदर्श उत्तर
मैक्स वेबर ने साधन-तर्कसंगतता, जो गणना से लक्ष्य के अनुरूप साधन चुनती है, और मूल्य-तर्कसंगतता, जो मूल्य को उसी के लिए मानती है, में भेद किया। योजना कम लागत और गति से पहली कसौटी पर खरी है, पर समुदाय की गरिमा, सहमति और न्याय की दूसरी कसौटी पर नहीं। मूल्यहीन कुशलता क्रूर हो सकती है, जैसे 1976-77 की जबरन नसबंदी। गणना-रहित मूल्य-निष्ठा कभी-कभी इरादे तक सीमित रह जाती है। अतः प्रशासक मूल्यों से लक्ष्य और सीमा तय करे, समुदाय से परामर्श करे, फिर उस सीमा में श्रेष्ठ साधन खोजे। गांधी: साधन बीज है, साध्य वृक्ष।
इस सटीक विषय पर RPSC का वास्तविक PYQ: अभी कोई नहीं। यह विषय जनवरी 2026 के पाठ्यक्रम में नया है। सबसे निकट के वास्तविक प्रश्न (पत्र II, इकाई I)
2023भाग ग10 अंक
State the features of Deontology and Consequentialism. Which one of the two approaches is more suitable for an administrator? Why? सबसे निकट का पुराना रिश्तेदार: कर्तव्य-आधारित बनाम परिणाम-आधारित सोच।
2021भाग ग10 अंक
Necessarily related, means cannot be separated from ends. Therefore, both must be auspicious for real and lasting success. गांधीवादी नैतिकता के संदर्भ में समझाइए।
2024भाग ग10 अंक
How is the idea of 'Human Resource' consistent with the idea of 'Humanity as an End'? Analyse in the perspective of Welfare State. व्यक्ति की कार्यकुशलता-दृष्टि बनाम गरिमा-दृष्टि।
2021भाग ग10 अंक
Explain the factors essential in 'Ethical decision' making. In case of ethical decision being against to administrative decision, how will you harmonise them? Explain with examples.
संबंधित UPSC प्रश्न (RPSC के नहीं; शब्द और प्रश्न-क्रमांक मूल पेपर में देख लें)
2024UPSC सिविल सेवा मुख्य परीक्षाGS पत्र 4, प्र.4(ख)10 अंक
Mindless addiction to Form, ignoring the Substance of the matter, results in rendering of injustice... (Examine)। रूप बनाम सार, वेबर की औपचारिक बनाम सारभूत तर्कसंगतता का दूसरा रूप है।
यह उत्तर कैसे लिखें
भूमिका
वेबर (1922): तर्कसंगत कर्म के दो प्रकार, एक-एक पंक्ति में।
मुख्य भाग
- (1) प्रत्येक क्या पूछता और किस पर परखता है; (2) प्रत्येक की ताकत और खतरा; (3) शुद्ध गणना की विफलता का एक उदाहरण और दोनों के साथ चलने का एक उदाहरण; (4) तीन प्रश्नों की कसौटी।
निष्कर्ष
मूल्य मंज़िल और सीमा तय करें; गणना रास्ता चुने।
अतिरिक्त मूल्य
- गांधी का बीज और वृक्ष; दृढ़ विश्वास और उत्तरदायित्व की नैतिकता (1919); पुट्टस्वामी-शैली की आनुपातिकता; AI से कड़ी।
एक पेज में दोहराव
- स्रोत: मैक्स वेबर, Economy and Society (1922): चार प्रकार: zweckrational, wertrational, भावात्मक, परंपरागत।
- साधन-तर्कसंगत (zweckrational): दिए गए लक्ष्य के लिए श्रेष्ठ साधन; कसौटी परिणाम, लागत, समय।
- मूल्य-तर्कसंगत (wertrational): कर्म के अपने मूल्य में सचेत आस्था, सफलता की संभावना से स्वतंत्र।
- ताकत और खतरा: साधन-तर्क: काम पूरा, पर असीमित हो तो क्रूरता। मूल्य-तर्क: ईमानदारी, पर काम न भी हो।
- औपचारिक बनाम सारभूत: नियम और गणना बनाम न्याय और कल्याण; लोहे का पिंजरा (1904-05)।
- 1919 की जोड़ी: दृढ़ विश्वास की नैतिकता और उत्तरदायित्व की नैतिकता; लोकसेवक को दोनों चाहिए।
- कड़ियाँ: परिणामवाद बनाम कर्तव्यवाद (RAS 2023); कांट 1785; गीता 2.47; गांधी का बीज और वृक्ष (हिंद स्वराज, अध्याय 16); तावीज़।
- उदाहरण: नसबंदी अभियान 1976-77; रोबोडेट (2019, 2023); डच बाल-लाभ (2021); खेजड़ली 1730 (मूल्य); MKSS (दोनों)।
- कानून एक मेल के रूप में: पुट्टस्वामी 2017 (वैधानिकता, आवश्यकता, आनुपातिकता); मेनका गांधी 1978।
- तीन प्रश्नों की कसौटी: साध्य उचित? साधन उचित? चलेगा और किस पर बीतेगी?
- AI से कड़ी: AI दिए गए लक्ष्य को अधिकतम करता है; मूल्य इंसान से आने चाहिए।
- अंतिम पंक्ति: मूल्य मंज़िल और सीमा तय करें; गणना रास्ता चुने।