शासन में जवाबदेही
RAS मुख्य परीक्षा, पत्र II, इकाई I, बिंदु 8: "Basis of ethical decision making: social justice, humanitarian concerns, accountability in governance; instrumental rationality versus value rationality" (नैतिक निर्णय का आधार: सामाजिक न्याय, मानवीय सरोकार, शासन में जवाबदेही)
- जनवरी 2026 के पाठ्यक्रम के अनुसार अद्यतन
- पढ़ने का समय: लगभग 15 मिनट
परीक्षा-भार (2018-2024 के प्रश्नों के आधार पर)
"जवाबदेही" नाम से कोई प्रश्न नहीं आया (पाठ्यक्रम बिंदु 8 में नाम है, पर पूछा नहीं गया)। निकट विषय: 2018 भाग ख Q10 (राजनीतिक तटस्थता) और 2024 भाग ख Q8 (प्रशासनिक निर्णय और राजनीतिक पूर्वाग्रह)। पत्र III में CAG, लोकपाल, लोकायुक्त, सामाजिक अंकेक्षण और RTI अधिनियम (धाराएँ 1 से 20) अलग से पाठ्यक्रम में हैं, इसलिए यह पृष्ठ दोनों पत्रों में काम आता है।
30 सेकंड का सार
याद रखें
- जवाबदेही का अर्थ है अपने निर्णयों और कार्यों के लिए उत्तर देना और विफलता के परिणाम भुगतने को तैयार रहना। ज़िम्मेदारी (कर्तव्य) और जवाबदेही (उसका हिसाब देना) अलग हैं।
- चार प्रकार: राजनीतिक (मंत्रिपरिषद विधायिका के प्रति; अनुच्छेद 75(3), 164(2)), प्रशासनिक (पदानुक्रम और सेवा-नियम), कानूनी (न्यायालय, लोकायुक्त), सामाजिक (नागरिक: RTI, सामाजिक अंकेक्षण, नागरिक घोषणा-पत्र)।
- औज़ार: RTI अधिनियम, 2005; सामाजिक अंकेक्षण (खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की धारा 28); लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013; CAG (अनुच्छेद 148 से 151); नागरिक घोषणा-पत्र; राजस्थान लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, 2011।
- नोलन सिद्धांत: पदधारी "जनता के प्रति अपने निर्णयों और कार्यों के लिए जवाबदेह हैं और उन्हें आवश्यक जाँच के लिए स्वयं को प्रस्तुत करना होगा।" सर्वोच्च न्यायालय (टी.एस.आर. सुब्रमण्यम, 2013) ने कहा कि निर्देशों को दर्ज करना जवाबदेही तय करने के लिए ज़रूरी है।
- संतुलन: जवाबदेही ईमानदार निर्णय की सुरक्षा के साथ चले; वरना अधिकारी जोखिम से बचकर फ़ाइलें घुमाते हैं।
भाग क के लिए छोटे उत्तर (15 शब्द तक)
याद रखें
- प्रश्न: शासन में जवाबदेही क्या है?
- उत्तर: अपने निर्णयों और कार्यों का उत्तर देना और उनके परिणामों का दायित्व लेना।
- जवाबदेही के चार प्रकार हैं: राजनीतिक, प्रशासनिक, कानूनी और सामाजिक।
- RTI अधिनियम, 2005 में सूचना का उत्तर तीस दिन में देना आवश्यक है।
1. अर्थ: उत्तरदायित्व, जवाबदेही और दंड
ज़िम्मेदारी (responsibility): काम करने का कर्तव्य।
जवाबदेही (accountability): काम का स्पष्टीकरण देना, कारण बताना और परिणाम (प्रशंसा या कार्रवाई) स्वीकार करना।
दायित्व (liability): विधि के अनुसार दंड या क्षतिपूर्ति।
जवाबदेही के बिना शक्ति निरंकुश हो जाती है। फ़ेडरलिस्ट नं. 51 (1788): "If men were angels, no government would be necessary"; सरकार को पहले शासितों पर नियंत्रण देना होगा और फिर उसे "स्वयं पर नियंत्रण" के लिए बाध्य करना होगा।
2. चार प्रकार की जवाबदेही
| प्रकार | किसके प्रति | साधन | संवैधानिक या कानूनी आधार |
|---|---|---|---|
| राजनीतिक | मतदाता और विधायिका | प्रश्नकाल, अविश्वास प्रस्ताव, समितियाँ, चुनाव | अनुच्छेद 75(3): मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी; अनुच्छेद 164(2): राज्य में विधानसभा के प्रति |
| प्रशासनिक | वरिष्ठ अधिकारी, विभाग | सेवा-नियम, आचरण नियम, प्रदर्शन-मूल्यांकन, विभागीय जाँच, सतर्कता | अनुच्छेद 311(2): जाँच में आरोप बताए जाएँ और सुनवाई का अवसर मिले |
| कानूनी | न्यायालय, भ्रष्टाचार-रोधी संस्थाएँ | न्यायिक पुनरावलोकन, रिट, आपराधिक और दीवानी दायित्व, लोकायुक्त | लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 |
| सामाजिक | नागरिक, मीडिया, नागरिक संगठन | RTI, सामाजिक अंकेक्षण, जन सुनवाई, नागरिक घोषणा-पत्र | RTI अधिनियम, 2005; खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की धारा 28 |
(पाठ्यक्रम का "प्रशासन पर नियंत्रण: विधायी, कार्यकारी, न्यायिक" वर्गीकरण पत्र III इकाई II में है; यह तालिका उससे मेल खाती है और नैतिकता-उत्तर के लिए सामाजिक रूप जोड़ती है।)
(क) सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005
(2005 का अधिनियम 22; अधिनियमित 15 जून 2005; शेष उपबंध 120वें दिन से लागू, यानी अक्तूबर 2005)
धारा 3: सभी नागरिकों को सूचना का अधिकार।
धारा 4: प्राधिकरण स्वयं सूचना प्रकाशित करें (स्वतः प्रकटीकरण), ताकि लोगों को माँगना न पड़े।
धारा 7(1): अनुरोध का उत्तर अधिकतम 30 दिन में; जीवन या स्वतंत्रता से जुड़ी सूचना 48 घंटे में।
धारा 20: बिना उचित कारण सूचना न देने पर लोक सूचना अधिकारी पर प्रति दिन 250 रुपये का दंड, कुल 25,000 रुपये तक।
नैतिकता से संबंध: पारदर्शिता (पृष्ठ 3.5) जवाबदेही की पहली शर्त है।
(ख) सामाजिक अंकेक्षण (social audit)
अर्थ: लाभार्थी और समाज स्वयं रिकॉर्ड को ज़मीनी हकीकत से मिलाकर सार्वजनिक सभा में जाँचें। यह आधिकारिक वित्तीय अंकेक्षण का पूरक है।
खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013, धारा 28: स्थानीय प्राधिकरण उचित मूल्य की दुकानों, लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली और अन्य कल्याण योजनाओं का नियतकालिक सामाजिक अंकेक्षण करें, निष्कर्ष प्रकाशित करें और आवश्यक कार्रवाई करें; धारा 29 में सतर्कता समितियाँ (राज्य, जिला, खंड और उचित मूल्य की दुकान के स्तर पर)।
ग्रामीण रोज़गार कानून: विकसित भारत-जी राम जी (VB-G RAM G) अधिनियम, 2025 (2025 का अधिनियम 36; स्वीकृति 20 दिसंबर 2025; PIB के अनुसार 1 जुलाई 2026 से लागू, और उसी तिथि से मनरेगा, 2005 निरस्त)। धारा 20: ग्राम सभा सभी कार्यों का नियमित सामाजिक अंकेक्षण करेगी; अधिनियम की अनुसूची में सभी कार्य, व्यय और गारंटियाँ कम से कम छह माह में एक बार सामाजिक अंकेक्षण के अधीन हैं (अधिनियम का पाठ देखा)।
राजस्थान की जड़: मज़दूर किसान शक्ति संगठन (MKSS) की जन सुनवाइयाँ (1990 के दशक) जिनमें खर्च के सरकारी रिकॉर्ड जनता के सामने पढ़े गए; अप्रैल 1996 का ब्यावर धरना; राजस्थान सूचना का अधिकार अधिनियम, 2000 (लागू 26 जनवरी 2001) (देखें पृष्ठ 8.4)।
(ग) लोकपाल और लोकायुक्त
लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013: राष्ट्रपति की स्वीकृति 1 जनवरी 2014; धारा 63: हर राज्य इस अधिनियम के प्रारंभ से एक वर्ष के भीतर लोकायुक्त स्थापित करेगा।
राजस्थान: राजस्थान लोकायुक्त और उप-लोकायुक्त अधिनियम, 1973 (1973 का अधिनियम 9; अधिनियम का पाठ देखा); राज्य ने यह कानून 2013 के केंद्रीय कानून से चार दशक पहले बना लिया था।
(घ) नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG)
अनुच्छेद 148: CAG की नियुक्ति राष्ट्रपति वारंट से करते हैं और उसे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की भाँति ही हटाया जा सकता है।
अनुच्छेद 149: कर्तव्य और शक्तियाँ संसद की विधि से तय होती हैं।
अनुच्छेद 151: संघ के लेखों पर CAG के प्रतिवेदन राष्ट्रपति को दिए जाते हैं, जो उन्हें संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाते हैं; राज्य के लेखों पर राज्यपाल को, जो उन्हें विधानमंडल के समक्ष रखवाते हैं।
संसद की लोक लेखा समिति इन पर विचार करती है (मानक तथ्य)।
(ङ) नागरिक घोषणा-पत्र (Citizen's Charter)
उत्पत्ति: ब्रिटेन में 1991; भारत में मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन (24 मई 1997, नई दिल्ली) के बाद, जिसमें "प्रभावी और संवेदनशील सरकार के लिए कार्य-योजना" अपनाई गई; समन्वय प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) करता है (एक द्वितीयक स्रोत का सार)।
छह सिद्धांत (उसी सार के अनुसार): प्रकाशित मानक, खुलापन और सूचना, चयन और परामर्श, शिष्टता और सहायता, शिकायत निवारण, धन का मूल्य।
सीमा (हमारा आकलन): घोषणा-पत्र वादा है, कानून नहीं; इसलिए सेवा-गारंटी कानूनों की ज़रूरत पड़ी।
(च) राजस्थान लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, 2011
राजस्थान अधिनियम सं. 23 (वर्ष 2011); सेवाओं को समय-सीमा में देने की वैधानिक गारंटी। 14 नवंबर 2011 से लागू।
अपील: धारा 6: पहला अपील अधिकारी (अस्वीकृति या समय-सीमा बीतने के 30 दिन में अपील) और दूसरा अपीलीय प्राधिकारी (निर्णय के 60 दिन में); धारा 7: अधिकारी पर 500 से 5,000 रुपये का दंड, या देरी पर 250 रुपये प्रति दिन (अधिकतम 5,000 रुपये), और दूसरा अपीलीय प्राधिकारी इसी दंड में से आवेदक को मुआवज़ा दिला सकता है (Indian Kanoon पर अधिनियम और नियमों का पाठ; कानून की स्थिति बदलती रहती है: India Code पर नवीनतम पाठ देख लें)।
2013 का संशोधन (2013 का अधिनियम 36): सेवा-गारंटी आयोग (मुख्य आयुक्त और आयुक्त) की स्थापना और दूसरे अपीलीय प्राधिकारी के आदेश के विरुद्ध 60 दिन में पुनरीक्षण आवेदन का प्रावधान।
4. जवाबदेही और स्वायत्तता का संतुलन
हद से अधिक जाँच "रक्षात्मक निर्णय" (defensive decision-making) बनाती है: अधिकारी जोखिम से बचते हैं और फ़ाइलें घुमाते हैं।
समाधान: ईमानदार (bona fide) निर्णय और बेईमान निर्णय में अंतर करना, स्पष्ट दिशा-निर्देश देना और कारण दर्ज करना (हमारा आकलन)।
5. निर्देशों का रिकॉर्ड: जवाबदेही का व्यावहारिक आधार
अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 का नियम 3(3)(ii)-(iii): वरिष्ठ का निर्देश सामान्यतः लिखित होगा; अपरिहार्य मौखिक निर्देश तुरंत लिखित में पुष्ट होगा; मौखिक निर्देश पाने वाला अधिकारी लिखित पुष्टि माँगेगा।
टी.एस.आर. सुब्रमण्यम बनाम भारत संघ (31 अक्तूबर 2013) में सर्वोच्च न्यायालय ने सभी राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों को तीन महीने में ऐसे ही निर्देश जारी करने को कहा। न्यायालय ने कहा कि निर्देशों को दर्ज करना "ज़िम्मेदारी तय करने और जवाबदेही सुनिश्चित करने" के लिए ज़रूरी है (निर्णय का पाठ, इंडियन कानून वेबसाइट पर; नीचे अंग्रेज़ी पंक्ति)।
6. अधिकारी की "चार R" जाँच-सूची
(हमारा व्यावहारिक ढाँचा)
1. Record (दर्ज करो): निर्णय, निर्देश और कारण फ़ाइल में।
2. Reason (कारण दो): हर निर्णय का तर्क लिखित और समझने योग्य।
3. Report (स्वयं बताओ): स्वतः प्रकटीकरण (RTI धारा 4), जन सुनवाई, कार्रवाई-रिपोर्ट।
4. Respond (उत्तर दो): शिकायत और अपील का समय पर निपटारा।
7. नए संदर्भ
AI से लिए निर्णयों में जवाबदेही मनुष्य पर टिकती है (पृष्ठ 7.6 और 7.7)। व्हिसलब्लोअर की सुरक्षा भी जवाबदेही का हिस्सा है (पृष्ठ 7.4)।
MKSS की जन सुनवाइयाँ, राजस्थान, 1990 का दशक.
(देखें पृष्ठ 8.4): रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से पढ़े गए; यह सामाजिक अंकेक्षण का आरंभिक रूप है और RTI कानून की माँग तक पहुँचा।
राजस्थान लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, 2011 (संशोधन 2013)
राज्य-स्तर पर सेवा-वितरण में समय-सीमा, अपील और दंड का मॉडल।
उत्तर में कैसे लगाएँ
पहले जवाबदेही की परिभाषा और चार प्रकार; फिर दो या तीन औज़ार (RTI, सामाजिक अंकेक्षण, लोकायुक्त या CAG); फिर संतुलन (रक्षात्मक निर्णय); अंत में एक उदाहरण (सुब्रमण्यम 2013 या MKSS) और नोलन का सिद्धांत।
विचारक और उद्धरण
| नाम | विचार | प्रयोग-योग्य पंक्ति |
|---|---|---|
| नोलन सिद्धांत (UK) | जवाबदेही | "Holders of public office are accountable to the public for their decisions and actions and must submit themselves to the scrutiny necessary to ensure this." (gov.uk, सात सिद्धांत) |
| द फ़ेडरलिस्ट नं. 51 (8 फ़रवरी 1788; सामान्यतः मैडिसन को श्रेय) | शासन पर नियंत्रण | "If men were angels, no government would be necessary." (येल की एवलॉन परियोजना का पाठ) |
| संविधान, अनुच्छेद 75(3) | सामूहिक उत्तरदायित्व | "The Council of Ministers shall be collectively responsible to the House of the People." (constitutionofindia.net) |
| सर्वोच्च न्यायालय, टी.एस.आर. सुब्रमण्यम (2013) | निर्देश दर्ज हों | "Recording of instructions, directions is, therefore, necessary for fixing responsibility and ensure accountability in the functioning of civil servants and to uphold institutional integrity." (निर्णय का पाठ) |
चित्र: जाल: चार दिशाओं से जवाबदेही
अधिकारी: निर्णय + कारण + रिकॉर्ड
बीच में
राजनीतिक: विधायिका, मंत्री, मतदाता (अनुच्छेद 75(3), 164(2))
ऊपर तीर
प्रशासनिक: वरिष्ठ, सेवा-नियम, जाँच (अनुच्छेद 311)
बाएँ तीर
कानूनी: न्यायालय, लोकायुक्त, CAG की रिपोर्ट (अनुच्छेद 148 से 151)
दाएँ तीर
सामाजिक: नागरिक, RTI, सामाजिक अंकेक्षण, घोषणा-पत्र, राजस्थान सेवा-गारंटी अधिनियम
नीचे तीर
उत्तर देना (answerability) → परिणाम (enforceability) → सुधार (learning)
अंतिम पंक्ति
सीधा प्रश्न: "जवाबदेही" नाम से पत्र II की इकाई I में 2018, 2021, 2023, 2024 में कोई प्रश्न नहीं मिला।
संभावित रूप (हमारा अनुमान, RPSC की सूचना नहीं): "जवाबदेही के औज़ारों का मूल्यांकन" या "जवाबदेही और स्वायत्तता में संतुलन" जैसे भाग ग के प्रश्न।
आम गलतियाँ
याद रखें
- जवाबदेही को केवल "दंड" समझना; उसमें उत्तर देना, कारण बताना और सीखना भी शामिल हैं।
- औज़ारों की सूची लिख देना, पर उनकी सीमाएँ (देरी, क्रियान्वयन, रक्षात्मक निर्णय) न बताना।
- राजस्थान के कानून या किसी अधिनियम की धारा संख्या बिना पुष्टि लिखना; जो पुष्ट नहीं, वह न लिखें या "मोटे तौर पर" कहकर लिखें।
आत्म-जाँच (5 प्रश्न)
याद रखें
- जवाबदेही के चार प्रकार लिखिए।
- RTI अधिनियम की धारा 7(1) में समय-सीमा क्या है?
- CAG के प्रतिवेदन किस अनुच्छेद के अनुसार विधायिका के सामने रखे जाते हैं?
- सुब्रमण्यम (2013) में न्यायालय ने मौखिक निर्देशों पर क्या कहा?
- नागरिक घोषणा-पत्र की सीमा क्या है और राजस्थान ने इसके लिए क्या किया?
वास्तविक उदाहरण
केस स्टडीटी.एस.आर. सुब्रमण्यम बनाम भारत संघ, सर्वोच्च न्यायालय, 31 अक्तूबर 2013
(रिट याचिका 82 (वर्ष 2011); पीठ: न्यायमूर्ति के. एस. राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष): पूर्व सिविल सेवकों की याचिका। न्यायालय ने कहा कि मौखिक निर्देशों पर काम करने से जवाबदेही और RTI के उद्देश्य दोनों कमज़ोर होते हैं, और राज्यों को आचरण नियम 3(3) जैसे निर्देश तीन महीने में जारी करने को कहा (पैरा 34 और 35)।
सीख
जवाबदेही के लिए लिखित रिकॉर्ड।
केस स्टडीखाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013, धारा 28 और 29
कानून में ही सामाजिक अंकेक्षण और सतर्कता समितियाँ (ऊपर)।
सीख
अधिकार के साथ निगरानी का तंत्र।
काल्पनिक केस
उदाहरण (काल्पनिक)काल्पनिक केस (Hypothetical case)
खंड विकास अधिकारी अरुण (काल्पनिक) के ब्लॉक की रामपुरा ग्राम पंचायत (काल्पनिक) में सामाजिक अंकेक्षण की जन सुनवाई में सामने आता है कि एक कार्य में 18 मज़दूरों के नाम पर हाज़िरी भरी गई, जबकि गाँव के लोग कहते हैं कि वे कभी आए ही नहीं। सरपंच प्रभावशाली है। कलेक्टर फ़ोन पर कहते हैं, "बात संभाल लो, मामला बढ़ाओ मत।" अरुण पर शिकायतकर्ता ग्रामीणों का भरोसा भी टिका है।
- हितधारक
- अरुण, सरपंच और पंचायत सचिव, शिकायतकर्ता ग्रामीण और असली मज़दूर, कलेक्टर, विभाग, सामाजिक अंकेक्षण दल।
- मुद्दा और टकराते मूल्य
- जवाबदेही, पारदर्शिता, निष्पक्षता और सत्यनिष्ठा बनाम ऊपर से "मामला दबाने" का दबाव और स्थानीय राजनीतिक संबंध। यह भी देखना कि आरोप साबित होने से पहले हर किसी को सुनवाई का अवसर चाहिए।
- तीन विकल्प
- (क) चुपचाप राशि वसूल कर मामला निपटा देना। लाभ: विवाद नहीं। हानि: भ्रष्टाचार का पुरस्कार, जनविश्वास टूटना, अरुण पर साझेदारी का आरोप, भविष्य में दोहराव। (ख) बिना जाँच-प्रक्रिया के तत्काल सबके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की घोषणा करना। लाभ: कठोर संदेश। हानि: प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन, कार्रवाई कानूनी रूप से टिक नहीं पाएगी, निर्दोष भी फँस सकते हैं। (ग) अंकेक्षण के निष्कर्ष लिखित दर्ज करना, नामित व्यक्तियों को नोटिस देकर सुनवाई देना, रिकॉर्ड और बैंक-भुगतान की जाँच कराना, दोष सिद्ध होने पर राशि वसूल कर सक्षम प्राधिकारी को अनुशासनात्मक और आवश्यक होने पर कानूनी कार्रवाई की सिफ़ारिश भेजना, कार्रवाई-रिपोर्ट ग्राम सभा में पढ़कर सुनाना, और कलेक्टर को लिखित में पूरा ब्योरा देना (मौखिक निर्देश के स्थान पर लिखित निर्देश माँगना)। लाभ: निष्पक्षता, पारदर्शिता, जवाबदेही; ग्रामीणों का भरोसा। हानि: समय, स्थानीय असंतोष और ऊपर से नाराज़गी का जोखिम।
- सर्वोत्तम विकल्प और समर्थक मूल्य
- विकल्प (ग)। समर्थक मूल्य: जवाबदेही, पारदर्शिता, निष्पक्षता; प्रक्रिया का सम्मान (सुनवाई); नोलन का "जवाबदेही" सिद्धांत; सुब्रमण्यम (2013) की सीख कि निर्देश दर्ज हों।
सीख
कदम: अल्पकालिक: निष्कर्ष लिखित, नोटिस, सत्यापन, वसूली और सिफ़ारिश, ग्राम सभा में कार्रवाई-रिपोर्ट, कलेक्टर को पत्र, शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा। दीर्घकालिक: हाज़िरी का बायोमेट्रिक या मोबाइल सत्यापन, नियमित सामाजिक अंकेक्षण, भुगतान-रिकॉर्ड का स्वतः प्रकटीकरण, पंचायत सचिवों का प्रशिक्षण।
अभ्यास प्रश्न
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
राजनीतिक जवाबदेही और प्रशासनिक जवाबदेही में अंतर कीजिए।
आदर्श उत्तर
राजनीतिक जवाबदेही में मंत्रिपरिषद विधायिका और मतदाता के प्रति उत्तरदायी होती है (अनुच्छेद 75(3), 164(2)); साधन हैं प्रश्नकाल, अविश्वास प्रस्ताव और चुनाव। प्रशासनिक जवाबदेही में अधिकारी अपने वरिष्ठ और सेवा-नियमों के प्रति उत्तरदायी होता है; साधन हैं आचरण नियम, प्रदर्शन-मूल्यांकन और विभागीय जाँच (अनुच्छेद 311)। पहली जनादेश से, दूसरी नियमों से बँधी है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
शासन को उत्तरदायी बनाने में RTI, सामाजिक अंकेक्षण, लोकायुक्त, CAG और नागरिक घोषणा-पत्र जैसे औज़ारों का मूल्यांकन कीजिए।
आदर्श उत्तर
RTI अधिनियम, 2005 पारदर्शिता देता है: तीस दिन में उत्तर और स्वतः प्रकटीकरण। सामाजिक अंकेक्षण, जैसे खाद्य सुरक्षा अधिनियम की धारा 28, नागरिकों को रिकॉर्ड परखने देता है। लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 (धारा 63) हर राज्य से लोकायुक्त बनवाता है, जो भ्रष्टाचार की शिकायतें सुनता है, और CAG की रिपोर्ट अनुच्छेद 151 से विधायिका के सामने आती है। घोषणा-पत्र सेवा-मानक बताते हैं, पर कानून नहीं हैं, इसलिए राजस्थान ने 2011 में सेवा-गारंटी अधिनियम बनाया। सीमा: कमज़ोर क्रियान्वयन, देरी और रक्षात्मक निर्णय। इसलिए औज़ारों के साथ मूल्य, प्रशिक्षण और ईमानदार निर्णय की सुरक्षा चाहिए; कसौटी यह है कि नागरिक को समय पर उत्तर मिला या नहीं।
पिछले असली प्रश्न
2024निकट संबंधीपत्र II, भाग ख Q85 अंक
Do you think that administrative decisions are free of political bias? (पृष्ठ 3.4 के साथ जवाबदेही का पक्ष जोड़ें)।
2018निकट संबंधीपत्र II, भाग ख Q105 अंक
Political neutrality brings better administration. Discuss. (पृष्ठ 3.4)।
यह उत्तर कैसे लिखें
भूमिका
जवाबदेही और उसके प्रकार
मुख्य भाग
- औज़ार: ताकत और सीमा; एक उदाहरण
निष्कर्ष
औज़ार + मूल्य + संतुलन
अतिरिक्त मूल्य
- नोलन का सिद्धांत, मैडिसन
एक पेज में दोहराव
- जवाबदेही = उत्तर + कारण + परिणाम
- चार प्रकार: राजनीतिक (75(3), 164(2)), प्रशासनिक (311), कानूनी, सामाजिक
- RTI 2005: ध. 3, 4, 7(1) 30 दिन/48 घंटे, ध. 20 (250 रुपये प्रति दिन, अधिकतम 25,000)
- सामाजिक अंकेक्षण: NFSA 2013 ध. 28-29; MKSS
- लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम 2013 (1.1.2014; ध. 63); राजस्थान लोकायुक्त अधिनियम 1973
- CAG: अनुच्छेद 148, 149, 151
- नागरिक घोषणा-पत्र: 1991 UK, 24.5.1997 भारत, DARPG
- राजस्थान सेवा-गारंटी अधिनियम 2011 (संशोधन 2013, आयोग)
- सुब्रमण्यम 31.10.2013, आचरण नियम 3(3)(ii)-(iii)
- नोलन: जवाबदेही
- चार R: Record, Reason, Report, Respond
- संतुलन: रक्षात्मक निर्णय
- काल्पनिक केस: BDO अरुण, रामपुरा पंचायत, सामाजिक अंकेक्षण।