मानवीय सरोकार
RAS मुख्य परीक्षा, पत्र II, इकाई I, बिंदु 8: "Basis of ethical decision making: social justice, humanitarian concerns, accountability in governance; instrumental rationality versus value rationality" (नैतिक निर्णय का आधार: सामाजिक न्याय, मानवीय सरोकार, शासन में जवाबदेही)
- जनवरी 2026 के पाठ्यक्रम के अनुसार अद्यतन
- पढ़ने का समय: लगभग 14 मिनट
परीक्षा-भार (2018-2024 के प्रश्नों के आधार पर)
"मानवीय सरोकार" नाम से कोई प्रश्न नहीं आया। सबसे निकट: 2021 भाग ख का Q9 (न्यूनतम बुनियादी ज़रूरतें और प्रशासक की ज़िम्मेदारी, 5 अंक) और 2024 भाग ग का Q13 (मानव संसाधन, मानवता साध्य के रूप में, कल्याणकारी राज्य, 10 अंक); दोनों का हल पृष्ठ 8.7 में है।
30 सेकंड का सार
याद रखें
- मानवीय सरोकार का अर्थ है मानव पीड़ा और गरिमा की चिंता, जो कर्म में दिखे। करुणा (compassion) के साथ कुशलता (competence) चाहिए; अकेली दया या अकेली दक्षता अधूरी है।
- संविधान का आधार अनुच्छेद 21 है। फ्रांसिस कोरैली मुलिन (13 जनवरी 1981) में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि जीवन के अधिकार में गरिमा के साथ जीने का अधिकार शामिल है, यानी "पर्याप्त पोषण, वस्त्र और आश्रय" जैसी बुनियादी ज़रूरतें।
- आपदा में प्रशासन की भूमिका कानून से तय है: आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 में जिला स्तर के प्राधिकरण का अध्यक्ष कलेक्टर या जिला मजिस्ट्रेट होता है (धारा 25), और राहत के न्यूनतम मानकों (आश्रय, भोजन, पेयजल, चिकित्सा, स्वच्छता) की सिफ़ारिश राष्ट्रीय प्राधिकरण का काम है (धारा 6(2)(w); 2025 के संशोधन से पहले यह धारा 12 में था)।
- कमज़ोर वर्गों (महिलाएँ, बच्चे, बुज़ुर्ग, दिव्यांग, ट्रांसजेंडर, बेघर, प्रवासी) के लिए विशेष सावधानी चाहिए; यही मानवीय सरोकार की कसौटी है।
- टकराव में रास्ता: पहले जीवन और गरिमा; फिर कानून के भीतर की लचक और सक्षम प्राधिकारी की लिखित अनुमति; और अंत में दस्तावेज़ बनाकर नियमित करना। दया की आड़ में पक्षपात नहीं।
भाग क के लिए छोटे उत्तर (15 शब्द तक)
याद रखें
- प्रश्न: मानवीय सरोकार क्या है?
- उत्तर: मानव पीड़ा और गरिमा की चिंता, जो वैध और समय पर कर्म में दिखे।
- अनुच्छेद 21 में गरिमा से जीना शामिल है: पर्याप्त पोषण, वस्त्र और आश्रय (1981)।
- आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 में जिला आपदा प्राधिकरण का अध्यक्ष कलेक्टर होता है।
1. मानवीय सरोकार का अर्थ और प्रशासन में करुणा
सहानुभूति (दूसरे का दुख महसूस करना) जब कर्म में बदलती है तो करुणा बनती है। प्रशासन में करुणा का अर्थ है: सुनना, गरिमा से पेश आना, समय पर काम करना, और कानून के भीतर राहत देने के लिए विवेक का प्रयोग।
यह दान नहीं, कर्तव्य है; यह रिश्वत या पक्षपात भी नहीं। चार कसौटियाँ (हमारा व्यावहारिक ढाँचा): देखो (पीड़ा पहचानो), परवाह करो, वैध ढंग से करो, गरिमा बनाए रखो (निजता, सम्मान, फोटो-प्रचार नहीं)।
2. भारतीय और पश्चिमी जड़ें
गीता 12.13: "अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च" (सब प्राणियों से द्वेष-रहित, मित्र और करुण; देखें पृष्ठ 4.3)। गीता 6.32: "आत्मौपम्येन सर्वत्र समं पश्यति" (दूसरों के सुख-दुख को अपने जैसा देखना)।
बुद्ध की करुणा (पृष्ठ 6.9); लोकसंग्रह (पृष्ठ 4.4); गांधी का तावीज़ (पृष्ठ 5.6)।
कांट: मानवता को केवल साधन नहीं, साध्य मानो (पृष्ठ 6.3)। देखभाल की नैतिकता (care ethics): संबंधों और भावनाओं को निर्णय में गिनो (सांता क्लारा विश्वविद्यालय का ढाँचा; देखें पृष्ठ 8.5)।
3. कानूनी आधार: अनुच्छेद 21 और गरिमा
| निर्णय | क्या ठहराया |
|---|---|
| फ्रांसिस कोरैली मुलिन बनाम प्रशासक, दिल्ली संघ राज्य क्षेत्र, 13 जनवरी 1981 (न्यायमूर्ति भगवती की पीठ) | जीवन के अधिकार में गरिमा के साथ जीना और उसके साथ जुड़ी हर चीज़ शामिल है, यानी "the bare necessaries of life such as adequate nutrition, clothing and shelter" (निर्णय का पाठ, Indian Kanoon) |
| ओल्गा टेलिस बनाम बॉम्बे नगर निगम, 10 जुलाई 1985 (पाँच न्यायाधीश) | आजीविका का अधिकार अनुच्छेद 21 में शामिल; बेदखली पर पूरी रोक नहीं, पर विधि-सम्मत प्रक्रिया ज़रूरी; न्यायालय ने कहा कि झुग्गियाँ चालू मानसून के अंत के एक महीने बाद, यानी 31 अक्तूबर 1985 तक, नहीं हटाई जाएँ (निर्णय का पाठ, Indian Kanoon) |
| परमानंद कटारा बनाम भारत संघ, 28 अगस्त 1989 (न्यायमूर्ति रंगनाथ मिश्र और जी. एल. ओझा) | सरकारी और निजी डॉक्टर का पेशेवर कर्तव्य कि घायल को तुरंत चिकित्सा सहायता दे; जीवन की रक्षा सर्वोपरि; प्रक्रियागत औपचारिकता इसे रोक नहीं सकती (निर्णय का सार) |
प्रस्तावना भी बंधुता को "व्यक्ति की गरिमा" से जोड़ती है।
4. आपदा राहत: प्रशासन की भूमिका
आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (2005 का अधिनियम 53; दिनांक 23 दिसंबर 2005): राष्ट्रीय, राज्य और जिला प्राधिकरण। जिला प्राधिकरण (धारा 25) का अध्यक्ष पदेन कलेक्टर या जिला मजिस्ट्रेट या उपायुक्त और सह-अध्यक्ष स्थानीय निकाय का निर्वाचित प्रतिनिधि। आपदा प्रबंधन (संशोधन) अधिनियम, 2025 (2025 का अधिनियम 10; स्वीकृति 29 मार्च 2025; PIB के अनुसार 9 अप्रैल 2025 से लागू) ने धारा 25 में केवल सदस्यों वाला खंड बदला (अध्यक्ष वही रहा), धारा 12 और 13 हटाईं, और राज्यों को राजधानियों व नगर निगम वाले शहरों के लिए शहरी आपदा प्राधिकरण (धारा 41A) बनाने की छूट दी।
धारा 6(2)(w) (2025 के संशोधन से; पहले यह धारा 12 थी): राष्ट्रीय प्राधिकरण राहत के न्यूनतम मानकों की सिफ़ारिश करेगा: राहत शिविरों में आश्रय, भोजन, पेयजल, चिकित्सा और स्वच्छता; विधवाओं और अनाथों के लिए विशेष व्यवस्था; जीवन की हानि पर अनुग्रह राशि, मकान की क्षति पर सहायता और आजीविका की बहाली।
राहत अधिकारी के छह नियम (हमारा ढाँचा): जीवन पहले; सबसे कमज़ोर की छँटाई (बच्चे, गर्भवती, बुज़ुर्ग, दिव्यांग); बिना भेदभाव समान व्यवहार; पारदर्शिता (सूचियाँ, स्टॉक-पंजी); गरिमा (महिलाओं की सुरक्षा, शौचालय, निजता); जवाबदेही और बाद में पुनर्वास।
सीख: तैयारी करुणा को प्रभावी बनाती है (फेलिन, नीचे)।
5. कमज़ोर वर्ग और विशेष सावधानी
| वर्ग | सुरक्षा-उपाय |
|---|---|
| दिव्यांग | दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016: मान्य दिव्यांगता 7 से बढ़कर 21 प्रकार; सरकारी पदों में आरक्षण 3 से 4 प्रतिशत; बेंचमार्क दिव्यांगता वाले 6 से 18 वर्ष के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा (PIB, 2016) |
| ट्रांसजेंडर | नालसा बनाम भारत संघ, 15 अप्रैल 2014: "तीसरे लिंग" की मान्यता, मौलिक अधिकार, सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ा वर्ग मानकर कल्याण-लाभ और आरक्षण के निर्देश (निर्णय के सार-स्रोत) |
| महिलाएँ | विशाखा (13 अगस्त 1997) और 2013 का कार्यस्थल यौन उत्पीड़न निवारण अधिनियम (पृष्ठ 8.1) |
| बच्चे | अनुच्छेद 21A (6 से 14 वर्ष को निःशुल्क अनिवार्य शिक्षा, 86वें संशोधन 2002 से); खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 में आँगनवाड़ी और मध्याह्न भोजन (पृष्ठ 8.7) |
| बुज़ुर्ग | माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007 (पाठ्यक्रम में पत्र III, इकाई III में धाराएँ 1 से 25) |
| बेघर और प्रवासी | रैन बसेरा, राशन की पोर्टेबिलिटी (पृष्ठ 8.7), राहत शिविर में पंजीकरण |
6. जब मानवता और नियम टकराएँ: "वैध मानवता" की सीढ़ी
(हमारा ढाँचा; पृष्ठ 6.6 और 8.5 से जोड़ें)
1. नियम की अपनी लचक देखें: क्या कोई अपवाद, आपातकालीन प्रावधान या विवेकाधिकार है?
2. सक्षम प्राधिकारी से पूछें: तुरंत लिखित (या तुरंत लिखित पुष्टि वाला मौखिक) अनुमोदन।
3. जीवन बचाने का कदम लें, दर्ज करें, बाद में नियमित करें: रजिस्टर, रसीद, कारण।
4. पक्षपात-परीक्षा: क्या हर वैसी स्थिति वाले व्यक्ति के लिए मैं यही करती/करता? (निष्पक्षता, रॉल्स का पर्दा)
5. व्यवस्था सुधारें: अगली बार के लिए नियम में प्रावधान जोड़ने का प्रस्ताव।
7. सीमाएँ
करुणा बिना कुशलता के दिशाहीन है और कुशलता बिना करुणा के क्रूर। मीडिया-दबाव या भावुकता में लिए निर्णय भी जाँच के दायरे में आते हैं।
नालसा, 15 अप्रैल 2014 और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016.
कमज़ोर वर्ग को पहचानने और विशेष अधिकार देने के उदाहरण।
उत्तर में कैसे लगाएँ
परिभाषा; अनुच्छेद 21 और फ्रांसिस कोरैली मुलिन; आपदा अधिनियम की धारा 25 और 6(2)(w); "वैध मानवता" की सीढ़ी; अंत में फेलिन 2013 या ओल्गा टेलिस 1985।
विचारक और उद्धरण
| नाम | विचार | प्रयोग-योग्य पंक्ति |
|---|---|---|
| भगवद्गीता 12.13 | करुणा | "अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च" (देखें पृष्ठ 4.3) |
| भगवद्गीता 6.32 | दूसरे के सुख-दुख को अपना देखना | "आत्मौपम्येन सर्वत्र समं पश्यति" (देखें पृष्ठ 4.3) |
| सर्वोच्च न्यायालय, फ्रांसिस कोरैली मुलिन (1981) | गरिमा | "The right to life includes the right to live with human dignity and all that goes along with it, namely, the bare necessaries of life such as adequate nutrition, clothing and shelter..." (निर्णय का पाठ, Indian Kanoon) |
| महात्मा गांधी (आरोपित; पियारेलाल, 1958) | तावीज़ | "Recall the face of the poorest and the weakest man whom you may have seen, and ask yourself if the step you contemplate is going to be of any use to him" (देखें पृष्ठ 5.6) |
चित्र: 2x2: करुणा और कुशलता
नेक नीयत, कमज़ोर परिणाम
बायाँ ऊपर (करुणा अधिक, कुशलता कम)
प्रभावी मानवीय प्रशासन (उदाहरण: फेलिन 2013)
दायाँ ऊपर (करुणा अधिक, कुशलता अधिक)
उपेक्षा
बायाँ नीचे (करुणा कम, कुशलता कम)
कुशल पर क्रूर
दायाँ नीचे (करुणा कम, कुशलता अधिक)
लक्ष्य: ऊपर-दाएँ; साधन: तैयारी, प्रशिक्षण, नियमों में लचक
बीच में तीर
पहले इसी अवधारणा का प्रश्न: "मानवीय सरोकार" या "करुणा" नाम से कोई प्रश्न 2018, 2021, 2023, 2024 में नहीं मिला। 2018 भाग क Q2 (लोकसंग्रह, जन-कल्याण) और 2018 भाग ग Q11 (गीता और दुविधा) निकट विषय थे।
आम गलतियाँ
याद रखें
- करुणा को नियम तोड़ने की छूट मान लेना; वैध ढंग, सक्षम अनुमति और रिकॉर्ड के साथ ही राहत टिकती है।
- केवल भावुक भाषा लिखना और अनुच्छेद 21, आपदा अधिनियम या किसी निर्णय का नाम न देना।
- उदाहरण बिना वर्ष और स्रोत के देना, या अपने काल्पनिक केस (SDM नेहा) को असली घटना बताना।
आत्म-जाँच (5 प्रश्न)
याद रखें
- फ्रांसिस कोरैली मुलिन में न्यायालय ने जीवन के अधिकार में क्या शामिल माना?
- आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 में जिला प्राधिकरण का अध्यक्ष कौन होता है?
- राहत शिविरों के न्यूनतम मानकों (धारा 6(2)(w)) में क्या-क्या आता है?
- "वैध मानवता" की सीढ़ी के पाँच चरण बताइए।
- फेलिन (2013) में मौतें 1999 के मुकाबले कम क्यों रहीं?
वास्तविक उदाहरण
केस स्टडीचक्रवात फेलिन, ओडिशा, 12 अक्तूबर 2013
विश्व बैंक के विवरण के अनुसार चक्रवात गोपालपुर के पास लगभग रात 9:15 बजे आया; लगभग 10 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया (ओडिशा से लगभग 8.5 लाख, आंध्र प्रदेश से लगभग 1.5 लाख)। मौतें 38 रहीं, जबकि 1999 के चक्रवात में 10,000 से अधिक। श्रेय: चक्रवात आश्रय, निकासी-मार्ग, मज़बूत तटबंध, वार्षिक अभ्यास, स्वयंसेवक दल और प्रारंभिक चेतावनी, यानी वर्षों की तैयारी।
सीख
करुणा का सबसे अच्छा रूप पूर्व-तैयारी है। (स्रोत: विश्व बैंक की फ़ीचर कहानी, 17 अक्तूबर 2013)
केस स्टडीओल्गा टेलिस, 10 जुलाई 1985
फुटपाथवासियों की बेदखली का मामला; न्यायालय ने आजीविका को अनुच्छेद 21 में माना और बेदखली के लिए प्रक्रिया ज़रूरी बताई।
सीख
सार्वजनिक हित (सड़क खाली कराना) और मानवीय हित (आश्रय, आजीविका) दोनों तौलने होते हैं; प्रक्रिया और समय देना मानवीय सरोकार का रूप है।
केस स्टडीपरमानंद कटारा, 28 अगस्त 1989
आपात चिकित्सा में प्रशासनिक औपचारिकता जीवन से बड़ी नहीं।
सीख
जीवन-रक्षा पहले, कागज़ बाद में।
केस स्टडीफ्रांसिस कोरैली मुलिन, 13 जनवरी 1981
गरिमा से जीना अनुच्छेद 21 का भाग।
सीख
बुनियादी ज़रूरतें (पोषण, वस्त्र, आश्रय) गरिमा की शर्त हैं (पृष्ठ 8.7 से जोड़ें)।
काल्पनिक केस
उदाहरण (काल्पनिक)काल्पनिक केस (Hypothetical case)
SDM नेहा (काल्पनिक) को न्यायालय के निर्णय के बाद जारी आदेश से नाले के किनारे बसी 40 झुग्गियों को मानसून से पहले हटाना है। नाला बंद रहने से हर साल पास की कॉलोनियों में पानी भरता है। परिवार 15 वर्ष से वहीं रह रहे हैं; उनमें दो गर्भवती महिलाएँ और तीन बुज़ुर्ग हैं। आदेश में हटाने की अगले हफ़्ते की तिथि है।
- हितधारक
- नेहा, 40 परिवार (गर्भवती, बुज़ुर्ग, बच्चे), पास की कॉलोनियों के निवासी, नगर निकाय, न्यायालय, पुलिस, स्वयंसेवी संगठन।
- मुद्दा और टकराते मूल्य
- जन-सुरक्षा और कानून का पालन (आदेश, बाढ़ का खतरा) बनाम मानवीय गरिमा, आश्रय और आजीविका। दोनों पक्ष वैध हैं।
- तीन विकल्प
- (क) तय सप्ताह में आदेश का पालन कर सब हटा देना। लाभ: आदेश का पालन, नाला समय पर साफ़। हानि: परिवार बेघर, गर्भवती और बुज़ुर्गों को जोखिम, पुनर्वास के बिना हटाना अन्यायपूर्ण दिखेगा। (ख) संवेदना में अनिश्चित काल तक टाल देना। लाभ: परिवार तत्काल सुरक्षित। हानि: न्यायालय के आदेश की अवहेलना, बाढ़ से कॉलोनियों को नुकसान, जवाबदेही का सवाल। (ग) चरणबद्ध कार्रवाई: पहले सर्वेक्षण और पात्रता सूची, लिखित नोटिस और सुनवाई; सबसे अधिक बाधा वाले नाले के हिस्से के परिवारों को पहले अस्थायी आश्रय (रैन बसेरा या खाली सरकारी भवन) और राशन, स्वास्थ्य जाँच; वैकल्पिक स्थान और कागज़ों में मदद के बाद स्थानांतरण; समय-बद्ध योजना और अनुपालन रिपोर्ट के साथ न्यायालय से सीमित अतिरिक्त समय की प्रार्थना। लाभ: आदेश की भावना और मानवता दोनों; बाढ़ का जोखिम भी घटता है। हानि: अधिक काम, कुछ देर, खर्च।
- सर्वोत्तम विकल्प और समर्थक मूल्य
- विकल्प (ग)। समर्थक मूल्य: मानवीय सरोकार (अनुच्छेद 21), कानून का शासन, जन-सुरक्षा; ओल्गा टेलिस की सीख (प्रक्रिया और समय); गांधी का तावीज़।
सीख
कदम: अल्पकालिक: सर्वेक्षण, नोटिस, अस्थायी आश्रय, गर्भवती और बुज़ुर्गों की प्राथमिकता, न्यायालय में अनुपालन-रिपोर्ट के साथ प्रार्थना। दीर्घकालिक: स्थायी पुनर्वास योजना, नाले की नियमित सफ़ाई और अतिक्रमण-रोक का तंत्र, शहरी ग़रीबों के लिए किफ़ायती आवास।
अभ्यास प्रश्न
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
नियम लागू करते समय प्रशासक को करुणा क्यों दिखानी चाहिए?
आदर्श उत्तर
नियम साधन हैं; उनका उद्देश्य मनुष्य की भलाई है। अनुच्छेद 21 गरिमा से जीने का अधिकार देता है, इसलिए जीवन और बुनियादी ज़रूरतों के प्रश्न पर औपचारिकता आड़े नहीं आनी चाहिए। करुणा का अर्थ पक्षपात नहीं: कानून के भीतर, लिखित अनुमति से और रिकॉर्ड के साथ राहत दी जाए, ताकि दया और जवाबदेही साथ चलें।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
आपदा-राहत में मानवीय सरोकार और नियम-पालन टकराएँ तो प्रशासक संतुलन कैसे बनाए?
आदर्श उत्तर
आपदा में जीवन और गरिमा सर्वोपरि हैं (अनुच्छेद 21), पर नियम जवाबदेही देते हैं। संतुलन के चार कदम हैं। पहला, नियम की अपनी लचक देखना; आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 6(2)(w) में राष्ट्रीय प्राधिकरण आश्रय, भोजन, पेयजल, चिकित्सा और स्वच्छता के न्यूनतम मानकों की सिफ़ारिश करता है। दूसरा, सक्षम प्राधिकारी, जैसे जिला प्राधिकरण के अध्यक्ष कलेक्टर, से लिखित अनुमति। तीसरा, राहत देकर रजिस्टर में दर्ज करना और बाद में नियमित करना। चौथा, हर वैसे पीड़ित के लिए समान व्यवहार। फेलिन (2013) में पूर्व-तैयारी से 38 मौतें रहीं, जबकि 1999 में दस हज़ार से अधिक थीं।
पिछले असली प्रश्न
2021पत्र II, भाग ख Q95 अंक
What are generally considered to be the minimum basic needs of an individual to lead a healthy and productive life? What is the administrators responsibility in ensuring these minimums? (पृष्ठ 8.7 में पूरा हल; यहाँ खंड 3 और 5 आधार देते हैं)।
2024पत्र II, भाग ग Q1310 अंक
How is the idea of 'Human Resource' consistent with the idea of 'Humanity as an End'? Analyse in the perspective of Welfare State. (पृष्ठ 6.3 और 8.7)।
यह उत्तर कैसे लिखें
भूमिका
मानवीय सरोकार का अर्थ
मुख्य भाग
- अनुच्छेद 21, आपदा अधिनियम, "वैध मानवता" की सीढ़ी, उदाहरण
निष्कर्ष
करुणा के साथ कुशलता
अतिरिक्त मूल्य
- गीता 12.13, गांधी का तावीज़
एक पेज में दोहराव
- मानवीय सरोकार = पीड़ा और गरिमा की चिंता + कर्म
- करुणा + कुशलता
- अनुच्छेद 21: फ्रांसिस कोरैली मुलिन 13.1.1981 (पोषण, वस्त्र, आश्रय); ओल्गा टेलिस 10.7.1985 (आजीविका; प्रक्रिया); परमानंद कटारा 28.8.1989 (जीवन-रक्षा)
- आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005: धारा 25 (कलेक्टर अध्यक्ष), धारा 6(2)(w) (न्यूनतम राहत मानक; पुरानी धारा 12 2025 में हटी)
- फेलिन 12.10.2013: लगभग 10 लाख निकासी, 38 मौतें बनाम 1999 में 10,000+
- दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 (21 प्रकार, 4 प्रतिशत)
- नालसा 15.4.2014
- "वैध मानवता" की सीढ़ी: लचक देखो, प्राधिकारी से पूछो, करो-दर्ज करो-नियमित करो, पक्षपात-परीक्षा, व्यवस्था सुधारो
- गीता 12.13, 6.32
- काल्पनिक केस: SDM नेहा, 40 झुग्गियाँ, चरणबद्ध कार्रवाई।