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पृष्ठ 3.3

निष्पक्षता (Impartiality)

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RAS मुख्य परीक्षा, पत्र II, इकाई I, बिंदु 3: "philosophical basis of integrity, impartiality and non-partisanship" (सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता और गैर-पक्षपात का दार्शनिक आधार); इस पृष्ठ में निष्पक्षता

  • जनवरी 2026 के पाठ्यक्रम के अनुसार अद्यतन
  • पढ़ने का समय: लगभग 10 मिनट
2 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

परीक्षा-भार (2018-2024 के प्रश्नों के आधार पर)

"निष्पक्षता" नाम से कोई प्रश्न नहीं; सबसे निकट 2024 भाग ख का Q8 ("क्या प्रशासनिक निर्णय राजनीतिक पूर्वाग्रह से मुक्त हैं?", 5 अंक) और 2018 का Q10 (राजनीतिक तटस्थता, पृष्ठ 3.4)। नया पाठ्यक्रम "दार्शनिक आधार" माँगता है, इसलिए यह विषय आगे आ सकता है (यह हमारा अनुमान है, RPSC की सूचना नहीं)।

30 सेकंड का सार

याद रखें

  • निष्पक्षता का अर्थ है समान मामलों में समान व्यवहार और निर्णय केवल प्रासंगिक आधार (योग्यता, कानून, साक्ष्य) पर।
  • इसका अर्थ हर किसी से एक जैसा बर्ताव नहीं है; जहाँ ज़रूरत या स्थिति में प्रासंगिक अंतर है, वहाँ भिन्न व्यवहार भी न्यायसंगत हो सकता है।
  • दार्शनिक आधार: रॉल्स का अज्ञान का आवरण, कांट की सार्वभौमिकता और गीता की समदृष्टि।
  • सुरक्षा-उपाय: "अपने मामले में स्वयं न्यायाधीश न बनो" का नियम, हितों का खुलासा, पारदर्शी मापदंड और लिखित कारण।
  • सबसे बड़ा दबाव राजनीतिक हस्तक्षेप, तबादले की धमकी और अचेतन पूर्वाग्रह से आता है।

भाग क के लिए छोटे उत्तर (15 शब्द तक)

याद रखें

  • प्रश्न: निष्पक्षता को परिभाषित कीजिए।
  • उत्तर: निष्पक्षता है योग्यता और कानून के आधार पर, बिना पक्षपात, समान मामलों में समान निर्णय।
  • निष्पक्षता निर्णयों में न्याय है; तटस्थता मूल्यों पर चुप रहना नहीं, पक्ष न लेना है।
  • "नेमो जूडेक्स इन कॉज़ा सुआ" का अर्थ: कोई अपने ही मामले में निर्णायक न बने।

1. अर्थ

निष्पक्षता (impartiality) में दो बातें हैं: (क) समान मामलों के साथ समान व्यवहार; (ख) निर्णय में केवल प्रासंगिक कारणों का उपयोग, यानी योग्यता, कानून, साक्ष्य और ज़रूरत। जाति, धर्म, संपर्क, दल, धन, क्षेत्र या लिंग जैसे अप्रासंगिक कारण निर्णय में न आएँ।

2. निष्पक्षता का मतलब "एक जैसा" नहीं

सबको एक ही डंडे से हाँकना समानता नहीं। जहाँ प्रासंगिक अंतर है (जैसे विकलांग व्यक्ति की सुगम्यता की ज़रूरत, या संवैधानिक आरक्षण), वहाँ अंतर के अनुपात में व्यवहार न्यायसंगत है। संविधान का अनुच्छेद 14 (विधि के समक्ष समता) और अनुच्छेद 16(1) (सार्वजनिक नियोजन में अवसर की समता) इसकी जड़ हैं (शब्द संविधान-पाठ में देख लें)। 2x2 चित्र नीचे है।

3. पक्षपात के रूप

भाई-भतीजावाद; पूर्वाग्रह (जाति, धर्म, लिंग); राजनीतिक दबाव; दान-उपहार से बना झुकाव; पुष्टि-पूर्वाग्रह (मन में बनी राय की पुष्टि खोजना) और अचेतन पूर्वाग्रह।

4. संबंधित शब्दों का भेद

शब्दआशय
निष्पक्षता (Impartiality)निर्णय में बिना पक्षपात न्याय
गैर-पक्षपात (Non-partisanship)किसी राजनीतिक दल से जुड़ाव न रखना (पृष्ठ 3.4)
तटस्थता (Neutrality)पक्ष न लेना; सेवा में संविधान के प्रति निष्ठा के साथ
वस्तुनिष्ठता (Objectivity)साक्ष्य के आधार पर निर्णय

5. दार्शनिक आधार (पाठ्यक्रम की माँग)

जॉन रॉल्स, A Theory of Justice (1971): "अज्ञान का आवरण" (veil of ignorance): निर्णय ऐसे लें मानो आपको पता न हो कि आप समाज में किस स्थान पर होंगे। तब आप सबके लिए उचित नियम चुनेंगे। (स्रोत: विकिपीडिया, Veil of ignorance)

कांट: वही नियम अपनाएँ जो सब पर समान रूप से लागू हो सके।

गीता 2.48 (समत्व): सफलता-असफलता में समभाव को योग कहा गया है। गीता 5.18: ज्ञानी ब्राह्मण, गाय, हाथी, कुत्ते और चांडाल में समदर्शी होते हैं।

नोलन का "ऑब्जेक्टिविटी" सिद्धांत: पदधारी निर्णय निष्पक्षता, न्यायपूर्णता और योग्यता पर, सर्वोत्तम साक्ष्य के साथ और बिना भेदभाव या पूर्वाग्रह के लें (gov.uk का वर्तमान पाठ)।

6. सेवा-नियम

केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1964 के नियम 3(1)(viii) में "योग्यता, न्यायपूर्णता और निष्पक्षता के सिद्धांतों को बढ़ावा देना" लिखा है; अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 के नियम 3(1A)(iii) में भी यही भाव है।

7. प्राकृतिक न्याय के दो स्तंभ (मानक विधि-ज्ञान)

(क) नेमो जूडेक्स इन कॉज़ा सुआ: पक्षपात के विरुद्ध नियम; (ख) ऑडी अल्टरम पार्टेम: दूसरे पक्ष को भी सुनो। निर्णय के कारण लिखित रहें।

8. असली प्रश्न का तर्क: क्या प्रशासनिक निर्णय राजनीतिक पूर्वाग्रह से मुक्त हैं?

(हमारा तर्क)

आदर्श: संविधान और सेवा-नियम निर्णय को दल-निरपेक्ष रखना चाहते हैं।

वास्तविकता: 2nd ARC (जनवरी 2007) ने अध्याय 9 में पाँचवें वेतन आयोग का मत उद्धृत किया कि तबादले का साधन देश में व्यापक रूप से, "विशेषकर सत्तारूढ़ राजनेताओं द्वारा", दुरुपयोग होता है और सज़ा के रूप में भी (अनुच्छेद 9.7); ARC ने स्वयं कहा कि इसका दुरुपयोग न हो (9.11)। इसलिए पूरी तरह मुक्त कहना सही नहीं।

उपाय: न्यूनतम कार्यकाल, तबादले के कारण लिखित, सिविल सेवा बोर्ड, लिखित निर्देश, पारदर्शी मापदंड।

वास्तविक उदाहरण

ए.के. क्रैपक बनाम भारत संघ (निर्णय 29 अप्रैल 1969; AIR 1970 SC 150; (1969) 2 SCC 262)

जम्मू-कश्मीर के कार्यवाहक मुख्य वन संरक्षक (नकीशबंद) भारतीय वन सेवा के चयन-बोर्ड के सदस्य भी थे और उम्मीदवार भी। उन्होंने अपने नाम पर विचार के समय भाग नहीं लिया, पर अन्य अभ्यर्थियों पर विचार और अंतिम सूची में भाग लिया। सर्वोच्च न्यायालय ने चयन रद्द किए। कसौटी: असली पक्षपात सिद्ध करना ज़रूरी नहीं; देखना यह है कि क्या यह मानने का उचित आधार है कि वह पक्षपाती हो सकता था। दूसरा बड़ा बिंदु: प्राकृतिक न्याय केवल न्यायिक नहीं, प्रशासनिक कार्रवाई पर भी लागू होता है।

स्रोत: निर्णय का पाठ (Indian Kanoon)।

टी.एस.आर. सुब्रमण्यम बनाम भारत संघ (31 अक्तूबर 2013)

सर्वोच्च न्यायालय ने अखिल भारतीय सेवा अधिकारियों के तबादले-पदस्थापन के लिए सिविल सेवा बोर्ड (केंद्र में कैबिनेट सचिव, राज्य में मुख्य सचिव की अध्यक्षता), निश्चित कार्यकाल और मौखिक निर्देशों के बजाय लिखित निर्देशों की बात कही।

स्रोत: विकिपीडिया (T. S. R. Subramanian v. Union of India)।

2nd ARC, चौथी रिपोर्ट, जनवरी 2007, अध्याय 9.

सामान्यतः पदस्थापन का न्यूनतम कार्यकाल तीन से पाँच वर्ष (संवेदनशील पदों पर दो से तीन वर्ष) और तबादले का सज़ा के रूप में प्रयोग न हो (अनुच्छेद 9.9 और 9.11)।

उत्तर में कैसे लगाएँ

अवधारणा → रॉल्स या नोलन की पंक्ति → क्रैपक (नियम बनाम व्यवहार) → ARC और 2013 का निर्णय (सुधार)।

विचारक और उद्धरण

नामविचारप्रयोग-योग्य पंक्ति
जॉन रॉल्स (1971)अज्ञान का आवरणनिर्णयकर्ता अपनी सामाजिक स्थिति न जानते हुए नियम चुनें (विचार; शब्दशः उद्धरण नहीं)
नोलन (वर्तमान पाठ)ऑब्जेक्टिविटी"Holders of public office must act and take decisions impartially, fairly and on merit, using the best evidence and without discrimination or bias."
गीता 5.18समदर्शिताज्ञानीजन सब प्राणियों में समान दृष्टि रखते हैं (अनुवाद-आधारित)

चित्र: 2x2

क्या प्रासंगिक अंतर है?

पंक्तियाँ: (हाँ / नहीं); स्तंभ: (हाँ / नहीं)।

क्या अलग व्यवहार हुआ?

निष्पक्ष

नहीं अंतर, एक व्यवहार

पक्षपात (भाई-भतीजावाद, पूर्वाग्रह)

नहीं अंतर, अलग व्यवहार

न्यायसंगत विभेद (आरक्षण, ज़रूरत)

अंतर है, अनुपात में अलग व्यवहार

अन्याय (ज़रूरत की अनदेखी)

अंतर है, फिर भी एक व्यवहार

पहले यह कैसे पूछा गया: निष्पक्षता नाम से कोई प्रश्न नहीं; राजनीति-प्रशासन के संबंध वाला कोण 2018 और 2024 में आया, छह वर्ष के अंतर से, अलग शब्दों में।

आम गलतियाँ

याद रखें

  • निष्पक्षता को "सबसे एक जैसा व्यवहार" लिखना; प्रासंगिक अंतर और संवैधानिक विभेद छोड़ देना।
  • "राजनीतिक पूर्वाग्रह" वाले प्रश्न में केवल आदर्श लिखना या केवल नेताओं को कोसना; दोनों पक्ष और उपाय दें।
  • निष्पक्षता, तटस्थता और गैर-पक्षपात को एक ही शब्द मानना।

आत्म-जाँच (5 प्रश्न)

याद रखें

  • निष्पक्षता की दो शर्तें क्या हैं?
  • रॉल्स का अज्ञान का आवरण क्या है?
  • क्रैपक मामले में चयन क्यों रद्द हुआ?
  • 2013 के सुब्रमण्यम निर्णय के दो निर्देश बताइए।
  • 2x2 चित्र के चार खानों के नाम लिखिए।