मुख्य सामग्री पर जाएं
पृष्ठ 3.4

गैर-पक्षपात और राजनीतिक तटस्थता

Read this in English →

RAS मुख्य परीक्षा, पत्र II, इकाई I, बिंदु 3: "philosophical basis of integrity, impartiality and non-partisanship" (सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता और गैर-पक्षपात का दार्शनिक आधार); इस पृष्ठ में गैर-पक्षपात

  • जनवरी 2026 के पाठ्यक्रम के अनुसार अद्यतन
  • पढ़ने का समय: लगभग 11 मिनट
2 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

परीक्षा-भार (2018-2024 के प्रश्नों के आधार पर)

2 प्रश्न, दोनों भाग ख (5 अंक): 2018 Q10 (राजनीतिक तटस्थता) और 2024 Q8 (राजनीतिक पूर्वाग्रह, पृष्ठ 3.3 में भी)। एक ही विचार छह वर्ष के अंतर से अलग शब्दों में आया।

30 सेकंड का सार

याद रखें

  • गैर-पक्षपात यानी किसी राजनीतिक दल से जुड़ाव या दलगत गतिविधि से दूरी; तटस्थता यानी हर सरकार की निष्ठा से सेवा।
  • तटस्थता मूल्य-शून्यता नहीं है: अधिकारी संविधान के प्रति प्रतिबद्ध है, किसी दल के प्रति नहीं।
  • नियम: आचरण नियम 5 राजनीतिक दल की सदस्यता, चुनाव में प्रचार या हस्तक्षेप को मना करता है।
  • लाभ: निरंतरता, जनविश्वास, सबके साथ समान व्यवहार। सीमा: तटस्थता को "जी-हुज़ूरी" या निष्क्रियता न बना दिया जाए।
  • सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय (विनीत नारायण 1997, प्रकाश सिंह 2006, सुब्रमण्यम 2013) राजनीतिक हस्तक्षेप के विरुद्ध ढाल बनाने की ओर बढ़े हैं।

भाग क के लिए छोटे उत्तर (15 शब्द तक)

याद रखें

  • प्रश्न: गैर-पक्षपात को परिभाषित कीजिए।
  • उत्तर: गैर-पक्षपात का अर्थ है किसी राजनीतिक दल से जुड़े बिना सबके प्रति समान सेवा।
  • राजनीतिक तटस्थता का अर्थ है सरकार बदलने पर भी समान निष्ठा से सेवा करना।
  • तटस्थ अधिकारी दल के प्रति नहीं, संविधान और कानून के प्रति प्रतिबद्ध रहता है।

1. अर्थ और भेद

गैर-पक्षपात (Non-partisanship): किसी राजनीतिक दल का सदस्य, समर्थक या कार्यकर्ता न होना।

राजनीतिक तटस्थता (Political neutrality): चुनी हुई किसी भी सरकार के प्रति समान निष्ठा; सलाह निष्पक्ष, क्रियान्वयन ईमानदार।

अनामता (Anonymity): श्रेय या दोष मंत्री को, अधिकारी परदे के पीछे (परंपरागत सिद्धांत; पाठ्यक्रम में "neutrality and anonymity" पत्र III में है)।

ये पृष्ठ 3.3 की निष्पक्षता से जुड़े हैं पर अलग हैं: निष्पक्षता निर्णयों में न्याय है, गैर-पक्षपात राजनीतिक जुड़ाव का प्रश्न।

2. यह क्यों ज़रूरी है

सरकारें बदलती हैं, स्थायी सेवा निरंतरता देती है।

नागरिक को भरोसा रहे कि मतदान किसी को भी किया हो, सेवा बराबर मिलेगी।

योग्यता आधारित सेवा दल-आश्रित नहीं हो सकती।

विल्सन (1887), भावार्थ: "प्रशासनिक प्रश्न राजनीतिक प्रश्न नहीं हैं। राजनीति प्रशासन के कार्य तय करती है, पर उसे प्रशासन के पदों को हेर-फेर करने की छूट नहीं दी जानी चाहिए।" (वुड्रो विल्सन, "The Study of Administration", 1887; अंग्रेज़ी पंक्ति नीचे बॉक्स में)

3. सेवा-नियम

केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1964, नियम 5(1): कोई सरकारी सेवक किसी राजनीतिक दल या राजनीति में भाग लेने वाले संगठन का सदस्य या उससे किसी प्रकार जुड़ा नहीं होगा, और किसी राजनीतिक आंदोलन या गतिविधि में भाग, चंदा या सहायता नहीं देगा। नियम 5(4): विधायिका या स्थानीय निकाय के चुनाव में प्रचार, हस्तक्षेप या प्रभाव का प्रयोग नहीं करेगा।

नियम 3(1)(vii): "राजनीतिक तटस्थता बनाए रखना" (संशोधित पाठ); साथ में 3(1)(iv): "संविधान की सर्वोच्चता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहना"। यानी तटस्थता और संवैधानिक प्रतिबद्धता साथ चलती हैं।

अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968: नियम 5 में वही निषेध; नियम 3(1A)(ii) में "राजनीतिक तटस्थता" (अगस्त 2014 के संशोधन से)।

राजस्थान: राजस्थान सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1971 के नियम 7 में राजनीति और चुनाव पर समान निषेध (राजस्थान सरकार की आधिकारिक PDF में शीर्षक "राजनीति और चुनाव में भाग लेना")।

2nd ARC की चौथी रिपोर्ट (जनवरी 2007): सुझाए जा रहे सार्वजनिक सेवा मूल्यों (मसौदा सार्वजनिक सेवा विधेयक, 2006) में "अराजनीतिक कार्यप्रणाली", "वस्तुनिष्ठ और निष्पक्ष कार्य का कर्तव्य" शामिल हैं (अनुच्छेद 2.7.5)।

4. पटेल और तटस्थता

सरदार पटेल ने 21 अप्रैल 1947 को परिवीक्षार्थियों से कहा कि सिविल सेवक "राजनीति में भाग नहीं ले सकता और उसे नहीं लेना चाहिए"; अक्तूबर 1949 में संविधान सभा में स्वतंत्र रूप से बात रखने वाली अखिल भारतीय सेवा पर बल दिया (1947 के शब्द भाषण के एक पुनर्मुद्रण में हैं; 1949 का कथन द्वितीयक स्रोतों पर आधारित है)। "स्टील फ़्रेम" वाक्यांश 1922 में लॉयड जॉर्ज का था; उत्तर में इसे पटेल का शब्द न लिखें।

5. तटस्थता की सीमाएँ और संतुलन

(हमारा विश्लेषण)

तटस्थता ≠ आज्ञाकारिता: विधिविरुद्ध आदेश मानना तटस्थता नहीं; आदेश पर आपत्ति लिखित दर्ज करना और मौखिक निर्देशों की जगह लिखित निर्देश माँगना सही रास्ता है (सुब्रमण्यम 2013 ने भी लिखित निर्देशों पर बल दिया)।

तटस्थता ≠ उदासीनता: लोकतंत्र में निर्वाचित सरकार की नीतियों के प्रति उत्तरदायी रहना ज़रूरी है; तटस्थ अधिकारी नीति का क्रियान्वयन निष्ठा से करे, पर निर्णय-पूर्व सलाह निडर और स्पष्ट दे।

राजनीति-प्रशासन विभाजन पूरी तरह साफ़ नहीं: नीति और क्रियान्वयन में अतिव्याप्ति है (विल्सन का विभाजन आदर्श-रेखा है)।

राजनीतिक दबाव: 2nd ARC ने अनुच्छेद 9.15 में कहा कि मंत्री औपचारिक या अनौपचारिक निर्देश देकर अधीनस्थ अधिकारियों के निर्णय प्रभावित करते देखे गए हैं।

6. असली प्रश्न का तर्क: क्या राजनीतिक तटस्थता से बेहतर प्रशासन बनता है?

(हमारा तर्क)

हाँ: निरंतरता, जनविश्वास, समान सेवा, मनमाने तबादलों में कमी, योग्यता को महत्व।

शर्तें: तटस्थता के साथ उत्तरदायित्व (निर्वाचित सरकार के प्रति), संवैधानिक प्रतिबद्धता और निडर सलाह; वरना तटस्थता निष्क्रिय नौकरशाही बन सकती है।

निष्कर्ष: "बेहतर" तब, जब तटस्थता के साथ ये तीन चीज़ें हों।

वास्तविक उदाहरण

विनीत नारायण बनाम भारत संघ (निर्णय 18 दिसंबर 1997; (1998) 1 SCC 226)

जैन हवाला मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने CBI को बाहरी हस्तक्षेप से बचाने के लिए निदेशक का न्यूनतम दो वर्ष का कार्यकाल तय किया, केंद्रीय सतर्कता आयोग को वैधानिक दर्जा देने को कहा और "एकल निर्देश" (वरिष्ठ अधिकारियों की जाँच से पहले सरकारी अनुमति की शर्त) को अवैध ठहराया।

स्रोत: निर्णय का पाठ (Indian Kanoon)।

प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ (22 सितंबर 2006)

पुलिस पर "अनुचित प्रभाव या दबाव" रोकने के लिए प्रत्येक राज्य में राज्य सुरक्षा आयोग, पुलिस महानिदेशक का न्यूनतम दो वर्ष का कार्यकाल, परिचालन अधिकारियों (IG, DIG, SP, SHO) का न्यूनतम दो वर्ष का कार्यकाल, तबादलों के लिए पुलिस स्थापना बोर्ड आदि निर्देश।

स्रोत: निर्णय का पाठ और निर्देशों का सारांश (सात निर्देश, 2006)।

टी.एस.आर. सुब्रमण्यम बनाम भारत संघ (31 अक्तूबर 2013)

अखिल भारतीय सेवाओं के लिए सिविल सेवा बोर्ड, निश्चित कार्यकाल और लिखित निर्देश।

स्रोत: विकिपीडिया।

राजस्थान (2017)

6 सितंबर 2017 के अध्यादेश और विधेयक के बारे में पृष्ठ 3.6 देखें, जो राजनीतिक कार्यपालिका, नौकरशाही और मीडिया के संबंध का उदाहरण है।

उत्तर में कैसे लगाएँ

नियम 5 और 3(1) → पटेल का कथन → एक न्यायिक निर्देश (विनीत नारायण, प्रकाश सिंह या 2013) → संतुलन (तटस्थता के साथ संवैधानिक प्रतिबद्धता)।

विचारक और उद्धरण

नामविचारप्रयोग-योग्य पंक्ति
वुड्रो विल्सन (1887)राजनीति-प्रशासन विभाजन"Administrative questions are not political questions. Although politics sets the tasks for administration, it should not be suffered to manipulate its offices." ("The Study of Administration", Political Science Quarterly, 1887)
सरदार पटेलसेवाओं की तटस्थता"A civil servant cannot afford to, and must not, take part in politics." (आईएएस परिवीक्षार्थियों को संबोधन, 21 अप्रैल 1947)
महात्मा गांधी (द्वारा प्रकाशित)सात सामाजिक पाप"Politics without principle" (यंग इंडिया, 22 अक्तूबर 1925; 2nd ARC बॉक्स 2.8 में भी उद्धृत)

चित्र: प्रवाह

  1. जनता मतदान करती है

    ऊपर से नीचे

  2. निर्वाचित सरकार: नीति तय करती है

  3. तटस्थ अधिकारी: निष्पक्ष सलाह + ईमानदार क्रियान्वयन

  4. जनता को समान सेवा

  5. संविधान और कानून का शासन

    दोनों ओर रेलिंग: बाएँ , दाएँ

  6. लिखित आदेश, स्वतंत्र बोर्ड, निश्चित कार्यकाल

  7. दलीय सदस्यता, चुनाव-प्रचार, सरकारी साधनों का दलगत प्रयोग

    लाल सीमा-चिह्न

पहले यह कैसे पूछा गया: यही विचार 2018 में "तटस्थता से बेहतर प्रशासन?" और 2024 में "क्या निर्णय पक्षपात-मुक्त हैं?" के रूप में आया। दोनों बार भाग ख, 5 अंक।

आम गलतियाँ

याद रखें

  • तटस्थता को "जो कहा जाए वही करो" बताना; संवैधानिक प्रतिबद्धता और लिखित आपत्ति भूल जाना।
  • केवल लाभ लिखना; सीमाएँ (निष्क्रियता, विभाजन की अस्पष्टता) न देना।
  • पटेल के नाम "स्टील फ़्रेम" जोड़ना, जबकि यह 1922 में लॉयड जॉर्ज का वाक्यांश था।

आत्म-जाँच (5 प्रश्न)

याद रखें

  • गैर-पक्षपात और राजनीतिक तटस्थता में अंतर बताइए।
  • आचरण नियम 5(1) और 5(4) क्या मना करते हैं?
  • विल्सन की पंक्ति का भाव क्या है?
  • प्रकाश सिंह (2006) के दो निर्देश बताइए।
  • "तटस्थता आज्ञाकारिता नहीं" का एक उदाहरण दीजिए।