सामाजिक न्याय
RAS मुख्य परीक्षा, पत्र II, इकाई I, बिंदु 8: "Basis of ethical decision making: social justice, humanitarian concerns, accountability in governance; instrumental rationality versus value rationality" (नैतिक निर्णय का आधार: सामाजिक न्याय, मानवीय सरोकार, शासन में जवाबदेही)
- जनवरी 2026 के पाठ्यक्रम के अनुसार अद्यतन
- पढ़ने का समय: लगभग 14 मिनट
परीक्षा-भार (2018-2024 के प्रश्नों के आधार पर)
"सामाजिक न्याय" नाम से कोई प्रश्न नहीं आया। सबसे सीधा प्रश्न 2023 भाग ग का Q11 है (प्रशासन की "सामाजिक सुधार" में भूमिका, 10 अंक)। 2021 भाग ख का Q6 (नैतिक उन्नति और समाज की उन्नति) दूर का संबंधी है।
30 सेकंड का सार
याद रखें
- सामाजिक न्याय का अर्थ है अवसर, संसाधन और गरिमा का निष्पक्ष बँटवारा, और जो पीछे से शुरू करते हैं उनके लिए विशेष ध्यान। प्रस्तावना सबसे पहले "न्याय: सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक" का वचन देती है।
- संविधान की रीढ़: प्रस्तावना; अनुच्छेद 14 से 17 (समानता, विशेष उपबंध, अस्पृश्यता का अंत); नीति-निदेशक तत्व अनुच्छेद 38, 39, 39A, 41, 46। निदेशक तत्व न्यायालय से लागू नहीं कराए जा सकते (अनुच्छेद 37), पर शासन में "मूलभूत" हैं।
- दो विचार अलग रखें: समता (सबके लिए एक ही नियम) और equity (जो पीछे हैं उन्हें अतिरिक्त मदद)। अनुच्छेद 15(4), 15(5), 15(6) और 16(4) ऐसी मदद की अनुमति देते हैं।
- रॉल्स (पृष्ठ 6.8): नियम को "अज्ञान के पर्दे" के पीछे से परखें और देखें कि सबसे वंचित को लाभ हुआ या नहीं। अंबेडकर की चेतावनी: राजनीति में समानता, पर सामाजिक-आर्थिक जीवन में असमानता, यानी "विरोधाभासों का जीवन"।
- अधिकारी के लिए सामाजिक न्याय का मतलब है अमल: सही व्यक्ति तक सही योजना, भेदभाव नहीं, सुनवाई, और पंक्ति के अंतिम व्यक्ति को पहले। सामाजिक सुधार (2023 का प्रश्न) भी इसी का हिस्सा है।
भाग क के लिए छोटे उत्तर (15 शब्द तक)
याद रखें
- प्रश्न: सामाजिक न्याय क्या है?
- उत्तर: अवसर, संसाधन और गरिमा का निष्पक्ष बँटवारा, वंचितों के लिए विशेष ध्यान के साथ।
- अनुच्छेद 38 राज्य को आय, प्रतिष्ठा, सुविधाओं और अवसरों की असमानता घटाने को कहता है।
- समता सबको एक नियम देती है; equity अतिरिक्त सहारा देकर अवसर बराबर बनाती है।
1. तीन रूप: सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक न्याय
| रूप | अर्थ | संवैधानिक आधार |
|---|---|---|
| सामाजिक न्याय | जन्म, जाति, लिंग, धर्म या विकलांगता से कोई छोटा नहीं | अनुच्छेद 15, 17 |
| आर्थिक न्याय | शोषण नहीं; संसाधनों में उचित हिस्सा | अनुच्छेद 38(2), 39 |
| राजनीतिक न्याय | निर्णय में सबकी बराबर आवाज़ | प्रस्तावना; वयस्क मताधिकार |
संविधान "सामाजिक न्याय" को अलग से परिभाषित नहीं करता; प्रस्तावना में "JUSTICE, social, economic and political" पहले आता है, फिर स्वतंत्रता, समानता और बंधुता।
2. संविधान का नक्शा
| स्थान | क्या कहता है |
|---|---|
| प्रस्तावना | न्याय: सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक; प्रतिष्ठा और अवसर की समता; बंधुता जो "व्यक्ति की गरिमा" सुनिश्चित करे |
| अनुच्छेद 15 | धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्म-स्थान के आधार पर भेदभाव नहीं। 15(3) स्त्रियों और बच्चों के लिए विशेष उपबंध; 15(4) और 15(5) सामाजिक-शैक्षिक पिछड़े वर्गों, SC और ST के लिए विशेष उपबंध; 15(6) आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों के लिए (अधिकतम 10 प्रतिशत, शिक्षा-प्रवेश में) |
| अनुच्छेद 16 | सार्वजनिक नियोजन में अवसर की समता; 16(4) पर्याप्त प्रतिनिधित्व न पाने वाले पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान |
| अनुच्छेद 17 | "अस्पृश्यता" समाप्त; किसी भी रूप में उसका आचरण निषिद्ध; उससे उपजी निर्योग्यता लागू करना दंडनीय अपराध |
| अनुच्छेद 37 | इस भाग के उपबंध न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं, फिर भी देश के शासन में मूलभूत हैं और विधि बनाने में इन्हें लागू करना राज्य का कर्तव्य है |
| अनुच्छेद 38 | 38(1): ऐसी सामाजिक व्यवस्था जिसमें "न्याय, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक" राष्ट्रीय जीवन की सभी संस्थाओं को सूचित करे। 38(2): आय की असमानता न्यूनतम करना; प्रतिष्ठा, सुविधाओं और अवसरों की असमानता समाप्त करने का प्रयास (व्यक्तियों में भी और समूहों में भी) |
| अनुच्छेद 39 | (क) स्त्री-पुरुष को आजीविका के पर्याप्त साधन; (ख) भौतिक संसाधनों का स्वामित्व और नियंत्रण सामान्य हित में बँटे; (ग) आर्थिक तंत्र से धन का संकेंद्रण न हो; (घ) समान कार्य के लिए समान वेतन; (ङ) श्रमिकों और बच्चों का शोषण न हो; (च) बच्चों को स्वस्थ विकास के अवसर, गरिमा और स्वतंत्रता में |
| अनुच्छेद 39A | समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता (42वें संशोधन, 1976 से जुड़ा) |
| अनुच्छेद 41 | अपनी आर्थिक सामर्थ्य और विकास की सीमाओं के भीतर काम, शिक्षा और बेरोज़गारी, वृद्धावस्था, बीमारी, निःशक्तता और अन्य अनर्जित अभाव में लोक सहायता का अधिकार सुनिश्चित करने का प्रयास |
| अनुच्छेद 46 | कमज़ोर वर्गों, विशेषकर अनुसूचित जातियों और जनजातियों के शैक्षिक और आर्थिक हितों की विशेष सावधानी से उन्नति, और उन्हें सामाजिक अन्याय और शोषण से बचाना |
ध्यान दें: अनुच्छेद 41 में "सामर्थ्य की सीमा" की शर्त है, इसलिए निदेशक तत्व चरणबद्ध लक्ष्य हैं; मूल अधिकार की तरह तुरंत माँगे जाने वाले हक नहीं। प्रस्तावना में "समाजवादी" शब्द 1976 में जुड़ा (मानक तथ्य; 1949 के मूल पाठ में नहीं था, constitutionofindia.net पर देखें)।
3. समता बनाम equity
समता (formal equality): सबके साथ एक जैसा व्यवहार।
Equity (substantive equality): शुरुआती असमानता को देखकर अतिरिक्त सहारा, ताकि दौड़ बराबरी से शुरू हो। अनुच्छेद 15(4), 15(5), 16(4) इसी विचार के औज़ार हैं।
उत्तर में कैसे लिखें: आरक्षण या विशेष योजना को "छूट" नहीं, बराबरी तक पहुँचाने का साधन बताएँ, और साथ में सुरक्षा-उपाय गिनाएँ (जैसे creamy layer का बहिष्कार, 50 प्रतिशत की सीमा, नीचे के उदाहरण)।
4. रॉल्स और अंबेडकर से जोड़ें
(पृष्ठ 6.8 और 6.14)
रॉल्स का "अज्ञान का पर्दा": नियम बनाते समय मान लें कि आपको नहीं पता कि आप लाभार्थी होंगे या बहिष्कृत, ग्रामीण होंगे या शहरी। तब क्या वही नियम चुनेंगे? यह "पर्दा-परीक्षा" पंक्ति, पात्रता और आवंटन के नियमों पर लगाई जा सकती है (पृष्ठ 6.8 की विधि)। अनुच्छेद 38(2) की भावना रॉल्स के निकट है (यह हमारी व्याख्या है)।
अंबेडकर, संविधान सभा, 25 नवंबर 1949 (देखें पृष्ठ 6.14): राजनीतिक लोकतंत्र तब तक नहीं टिकता जब तक उसके आधार में सामाजिक लोकतंत्र न हो; और 26 जनवरी 1950 से भारत "विरोधाभासों के जीवन" में प्रवेश करेगा। अधिकारी का काम इस विरोधाभास को ज़मीन पर घटाना है।
5. प्रशासक के पाँच कार्य-नियम
(यह हमारा व्यावहारिक ढाँचा है, कानून नहीं)
1. अंतिम व्यक्ति को पहचानें: गांधी का तावीज़ (पृष्ठ 5.6): सबसे ग़रीब और कमज़ोर का चेहरा याद करें।
2. कसौटी प्रकाशित करें, सब पर समान लगाएँ: पात्रता, प्राथमिकता और अंक सार्वजनिक हों।
3. बहिष्कृत तक जाएँ: शिविर, घर-द्वार सेवा; जो दफ़्तर नहीं आ सकते उनकी प्रतीक्षा न करें।
4. निर्णय से पहले सुनें: प्रभावित व्यक्ति को सुनवाई का अवसर (प्रक्रियात्मक न्याय)।
5. समूह-वार परिणाम दर्ज करें: कितनी महिलाएँ, SC, ST, दिव्यांग, घुमंतू परिवार पहुँचे; तभी बहिष्कार दिखाई देता है।
6. सामाजिक सुधार में प्रशासन की भूमिका
(2023 भाग ग Q11)
| भूमिका | कैसे | उदाहरण |
|---|---|---|
| कानून लागू करना | कानून का सख्त पर विवेकपूर्ण प्रवर्तन | बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006, धारा 13(4): अक्षय तृतीया जैसे दिनों पर सामूहिक बाल विवाह रोकने के लिए जिला मजिस्ट्रेट को बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी माना गया है |
| रोकथाम और जागरूकता | स्कूल, पंचायत, आँगनवाड़ी, धर्मगुरुओं और समाज के साथ संवाद | राजसमंद का मामला नीचे |
| पीड़ित और सुधारक की रक्षा | शिकायत सुनना, सुरक्षा देना, मुकदमे में सहायता | विशाखा (1997): राजस्थान की एक सामाजिक कार्यकर्ता के साथ हुई घटना से शुरू हुआ मामला |
| सेवा-वितरण की बाधाएँ हटाना | जो सुविधा कानून में है, उसे वंचित तक पहुँचाना | शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 में निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें (नीचे) |
| समाज के साथ साझेदारी | नागरिक संगठन, स्वयं-सहायता समूह, पंचायतें | (हमारा सुझाव) |
सीमा: केवल कानून से मानसिकता नहीं बदलती; सुधार धैर्य, संवाद और गरिमा के सम्मान से टिकता है। ज़बरदस्ती या अपमान से विरोध बढ़ता है।
संतुलित जानकारी, EWS आरक्षण.
जनहित अभियान बनाम भारत संघ, 7 नवंबर 2022: सर्वोच्च न्यायालय ने 3:2 के बहुमत से (न्यायमूर्ति माहेश्वरी, त्रिवेदी और पारदीवाला बहुमत में; न्यायमूर्ति ललित और भट असहमत) 103वें संशोधन को वैध ठहराया (अनुच्छेद 15(6) और 16(6); 10 प्रतिशत की सीमा)। उत्तर में तथ्य लिखें, पक्ष-विपक्ष की भाषा संतुलित रखें।
उत्तर में कैसे लगाएँ
पहले अर्थ और अनुच्छेद 38 या प्रस्तावना; फिर समता बनाम equity; फिर प्रशासक के कार्य-नियम; अंत में एक उदाहरण (विशाखा 1997 या राजसमंद 2015) और रॉल्स या अंबेडकर।
विचारक और उद्धरण
| नाम | विचार | प्रयोग-योग्य पंक्ति |
|---|---|---|
| जॉन रॉल्स | न्याय संस्थाओं का पहला गुण | "Justice is the first virtue of social institutions, as truth is of systems of thought." (A Theory of Justice, 1971; देखें पृष्ठ 6.8) |
| बी. आर. अंबेडकर | सामाजिक लोकतंत्र के बिना राजनीतिक लोकतंत्र नहीं टिकता | "Political democracy cannot last unless there lies at the base of it social democracy." (संविधान सभा, 25 नवंबर 1949; देखें पृष्ठ 6.14) |
| संविधान, अनुच्छेद 38(2) | असमानता घटाना | राज्य "आय में असमानताओं को न्यूनतम करने" का प्रयास करेगा (हिंदी भाव; अंग्रेज़ी पाठ constitutionofindia.net से) |
| महात्मा गांधी (आरोपित; पियारेलाल, 1958) | तावीज़ | "Recall the face of the poorest and the weakest man whom you may have seen, and ask yourself if the step you contemplate is going to be of any use to him" (देखें पृष्ठ 5.6) |
चित्र: प्रवाह
प्रस्तावना: न्याय (सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक); प्रतिष्ठा और अवसर की समता
शीर्ष बॉक्स
मूल अधिकार (अनुच्छेद 14 से 17) और नीति-निदेशक तत्व (38, 39, 39A, 41, 46)
तीर नीचे, बॉक्स 2
कानून और योजनाएँ (उदाहरण: शिक्षा का अधिकार, बाल विवाह प्रतिषेध, कार्यस्थल यौन उत्पीड़न निवारण)
तीर नीचे, बॉक्स 3
अधिकारी: पहचानो, पहुँचो, सुनो, दर्ज करो
तीर नीचे, बॉक्स 4
कसौटी: क्या सबसे वंचित व्यक्ति को वास्तविक लाभ पहुँचा?
अंतिम बॉक्स
पहले इसी अवधारणा का प्रश्न: "सामाजिक न्याय" नाम से कोई प्रश्न 2018, 2021, 2023, 2024 में नहीं मिला। सामाजिक सुधार का प्रश्न 2023 में 10 अंक का आया; 2018 भाग ग Q12 और 2021 भाग ग Q13 में "नेताओं, सुधारकों और प्रशासकों की शिक्षाएँ" का रूप आया था।
आम गलतियाँ
याद रखें
- सामाजिक न्याय को केवल "आरक्षण" बना देना; वह अवसर, संसाधन, गरिमा और प्रक्रिया की न्यायपूर्णता का पूरा दायरा है।
- नीति-निदेशक तत्वों को अदालत से लागू होने वाले अधिकार बता देना; अनुच्छेद 37 के अनुसार वे अप्रवर्तनीय हैं पर शासन में मूलभूत हैं।
- उदाहरण बिना वर्ष और स्रोत के देना, या अपने काल्पनिक केस (कविता, धनपुर) को असली घटना की तरह लिखना।
आत्म-जाँच (5 प्रश्न)
याद रखें
- प्रस्तावना में "न्याय" के तीन रूप कौन-से हैं?
- अनुच्छेद 38(2) क्या कहता है?
- समता और equity में एक अंतर बताइए, और अनुच्छेद 15(4) किसका उदाहरण है?
- बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 की धारा 13(4) में जिला मजिस्ट्रेट को क्या अधिकार है?
- रॉल्स की "पर्दा-परीक्षा" को पात्रता-नियम पर कैसे लगाएँगे?
वास्तविक उदाहरण
केस स्टडीविशाखा बनाम राजस्थान राज्य, सर्वोच्च न्यायालय, 13 अगस्त 1997
महिला संगठनों ने जनहित याचिका दाखिल की। पीठ: मुख्य न्यायाधीश जे. एस. वर्मा, न्यायमूर्ति सुजाता मनोहर, न्यायमूर्ति बी. एन. किरपाल (निर्णय का पाठ, Indian Kanoon)। पृष्ठभूमि: याचिका राजस्थान के एक गाँव में एक सामाजिक कार्यकर्ता के साथ हुए कथित सामूहिक बलात्कार की घटना के बाद आई (निर्णय के अपने शब्द); खबरों के अनुसार वे बाल विवाह के विरुद्ध एक सरकारी कार्यक्रम में काम करती थीं। न्यायालय ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकने के दिशा-निर्देश (विशाखा दिशा-निर्देश) दिए, जो बाद में कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 (2013 का अधिनियम 14, लागू 9 दिसंबर 2013) से बदले।
सीख
सुधार करने वाले को सुरक्षा और संस्था से जवाब चाहिए; अंतराल भरने के लिए न्यायालय ने दिशा-निर्देश दिए। उत्तर में पीड़िता के विवरण नहीं, केवल सिद्धांत लिखें।
केस स्टडीबंगाल सती विनियम, 4 दिसंबर 1829
गवर्नर-जनरल लॉर्ड विलियम बेंटिक ने सती प्रथा को अवैध और दंडनीय घोषित किया; यह ब्रिटिश भारत का पहला बड़ा सामाजिक सुधार कानून माना जाता है (विकिपीडिया)।
सीख
राज्य की शक्ति से प्रथा पर रोक संभव, पर समाज की स्वीकृति के लिए सुधारकों का काम अलग से चाहिए।
केस स्टडीराजसमंद, राजस्थान, 20 अप्रैल 2015 (अक्षय तृतीया की पूर्व संध्या)
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार जिला मजिस्ट्रेट खामनोर गाँव के उस घर पहुँचे जहाँ 15 वर्ष की लड़की के विवाह की रस्में चल रही थीं, रस्में रुकवाईं और माता-पिता को आगाह किया; पिता ने क्षमा माँगी और अगले दिन विवाह न करने का आश्वासन दिया (स्रोत: बिज़नेस स्टैंडर्ड/पीटीआई, 20 अप्रैल 2015, पाठ पढ़ा गया; लड़की का नाम न लिखें)।
सीख
जिला मजिस्ट्रेट की ऐसी क्षेत्रीय कार्रवाई का उदाहरण, जैसी धारा 13(4) और 13(5) संभव बनाती हैं (रिपोर्ट धारा का नाम नहीं लेती)।
केस स्टडीइंद्रा साहनी बनाम भारत संघ, सर्वोच्च न्यायालय, 16 नवंबर 1992 (नौ न्यायाधीश)
केंद्र की नौकरियों में OBC के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण को वैध ठहराया, आरक्षण की सामान्य सीमा 50 प्रतिशत रखी और "creamy layer" को बाहर रखने की बात कही (दो सार-स्रोतों के अनुसार; आदेश के शब्द उद्धृत करने से पहले निर्णय-पाठ देख लें)।
सीख
equity के साथ सुरक्षा-उपाय।
केस स्टडीशिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 और 12 अप्रैल 2012 का निर्णय
अधिनियम को 26 अगस्त 2009 को स्वीकृति मिली और 1 अप्रैल 2010 से लागू हुआ। सोसाइटी फ़ॉर अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स ऑफ़ राजस्थान बनाम भारत संघ (12 अप्रैल 2012) में तीन न्यायाधीशों की पीठ ने 2:1 से धारा 12(1)(ग) को वैध ठहराया: निजी गैर-सहायता प्राप्त, गैर-अल्पसंख्यक स्कूलों में कमज़ोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें (देखें पृष्ठ 6.8)।
सीख
नियम से अवसर की समानता लाई जा सकती है।
काल्पनिक केस
उदाहरण (काल्पनिक)काल्पनिक केस (Hypothetical case)
धनपुर ब्लॉक (काल्पनिक) की तहसीलदार कविता को आदिवासी और घुमंतू बालिकाओं के छात्रावास की 50 सीटें भरनी हैं। स्थानीय विधायक के कार्यालय से 50 नामों की सूची आती है, जिसमें अधिकांश प्रभावशाली समुदाय के हैं। कविता के सर्वेक्षण में 120 पात्र बालिकाएँ मिलती हैं, जिनमें से ज़्यादातर घुमंतू परिवारों की हैं और उनके पास निवास या जन्म के कागज़ नहीं हैं। पात्रता-नियम में कागज़ों की माँग है।
- हितधारक
- कविता, 120 पात्र बालिकाएँ और उनके परिवार, विधायक का कार्यालय और सूची के नाम, विभाग, जिला प्रशासन, स्थानीय समुदाय।
- मुद्दा और टकराते मूल्य
- सामाजिक न्याय और निष्पक्षता बनाम राजनीतिक दबाव और कागज़ी नियम की कठोरता। नियम की भावना (वंचित को अवसर) और अक्षर (कागज़) टकराते हैं।
- तीन विकल्प
- (क) सूची स्वीकार कर लेना। लाभ: विवाद नहीं, विधायक से संबंध ठीक। हानि: वंचित बहिष्कृत, पक्षपात का आरोप, छात्रावास का उद्देश्य विफल। (ख) सूची को सीधे ठुकराना और केवल कागज़-पूर्ण नामों को लेना। लाभ: नियम का अक्षर पूरा। हानि: सबसे वंचित (घुमंतू) फिर भी छूट जाएँगी; सामाजिक न्याय का उद्देश्य अधूरा। (ग) पात्रता और प्राथमिकता के अंक पहले से प्रकाशित करना, हर नाम (120 पात्र बालिकाएँ और सूची के 50 नाम) पर एक ही अंक-पद्धति लगाना, घुमंतू परिवारों के लिए दस्तावेज़ शिविर लगाना और विभाग से सीटें बढ़ाने या कागज़ों में अस्थायी छूट की लिखित माँग करना, तथा विधायक कार्यालय को विनम्रता से लिखित उत्तर देना कि चयन अंकों से होगा। लाभ: निष्पक्षता, सबसे वंचित को अवसर, पारदर्शिता। हानि: समय और अतिरिक्त काम; विधायक की नाराज़गी का जोखिम।
- सर्वोत्तम विकल्प और समर्थक मूल्य
- विकल्प (ग)। समर्थक मूल्य: सामाजिक न्याय (अनुच्छेद 38, 46), निष्पक्षता और पारदर्शिता; रॉल्स की पर्दा-परीक्षा (अगर मैं उस घुमंतू बालिका की जगह होती तो?); गांधी का तावीज़।
सीख
कदम: अल्पकालिक: अंक-पद्धति प्रकाशित करना, दस्तावेज़ शिविर, सूची पर समान अंकन, अतिरिक्त सीटों के लिए पत्र। दीर्घकालिक: पात्रता में दस्तावेज़ की जगह वैकल्पिक प्रमाण (सरपंच या विभागीय सत्यापन) का नियम, छात्रावास-प्रवेश में समूह-वार आँकड़े प्रकाशित करना, जनसुनवाई।
अभ्यास प्रश्न
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
प्रस्तावना और नीति-निदेशक तत्व सामाजिक न्याय को कैसे व्यक्त करते हैं?
आदर्श उत्तर
प्रस्तावना "न्याय: सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक" और अवसर की समता का वचन देती है। अनुच्छेद 38 आय की असमानता घटाने और प्रतिष्ठा, सुविधाओं, अवसरों की असमानता मिटाने को कहता है; अनुच्छेद 39, 41 और 46 आजीविका, शिक्षा और कमज़ोर वर्गों की रक्षा जोड़ते हैं। ये अदालत से लागू नहीं होते (अनुच्छेद 37), पर हर कानून का मार्गदर्शन करते हैं।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
"Discuss the role of administration in bringing about 'social reform'."
आदर्श उत्तर
प्रशासन सामाजिक सुधार को कानून से ज़मीन तक लाता है। वह कानून लागू करता है, जैसे बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 की धारा 13(4) में अक्षय तृतीया पर जिला मजिस्ट्रेट बाल विवाह रोकने का अधिकारी है; राजसमंद (2015) में जिला मजिस्ट्रेट ने रस्में रुकवाईं। वह योजनाएँ वंचितों तक पहुँचाता है, पीड़ितों और सुधारकों की रक्षा करता है, और पंचायत, स्कूल व नागरिक संगठनों के साथ जागरूकता बनाता है। विशाखा (1997) राजस्थान की एक कार्यकर्ता के मामले से शुरू होकर कार्यस्थल सुरक्षा तक पहुँचा। पर कानून अकेले मानसिकता नहीं बदलता, इसलिए संवाद, निष्पक्षता और गरिमा चाहिए। सफलता का पैमाना अंतिम व्यक्ति का लाभ है, जारी आदेश नहीं।
पिछले असली प्रश्न
2023पत्र II, भाग ग Q1110 अंक
Discuss the role of administration in bringing about 'social reform'. इस पृष्ठ का खंड 6 और उदाहरण 1 से 3 सीधे उत्तर देते हैं।
2021निकट संबंधीपत्र II, भाग ख Q65 अंक
'Men's Moral Advancement depends upon complete advancement of society.' Discuss. (समाज की उन्नति से नैतिक उन्नति का संबंध; नींव वाले पृष्ठों से जोड़ें)।
2024निकट संबंधीपत्र II, भाग ग Q1310 अंक
How is the idea of 'Human Resource' consistent with the idea of 'Humanity as an End'? Analyse in the perspective of Welfare State. (कल्याणकारी राज्य का पक्ष: पृष्ठ 8.7 और 6.3)।
यह उत्तर कैसे लिखें
भूमिका
सामाजिक सुधार और प्रशासन का संबंध
मुख्य भाग
- कानून लागू करना, योजनाएँ पहुँचाना, सुरक्षा, जागरूकता, साझेदारी; एक उदाहरण
निष्कर्ष
कानून के साथ संवाद, परिणाम से मूल्यांकन
अतिरिक्त मूल्य
- अंबेडकर का सामाजिक लोकतंत्र, रॉल्स की पर्दा-परीक्षा
एक पेज में दोहराव
- सामाजिक न्याय = अवसर + संसाधन + गरिमा, वंचित पर विशेष ध्यान
- प्रस्तावना: न्याय सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक
- अनुच्छेद 14-17, 15(3)(4)(5)(6), 16(4), 17
- अनुच्छेद 37 (अप्रवर्तनीय पर मूलभूत), 38(1)(2), 39 (क-च), 39A (1976), 41 ("आर्थिक सामर्थ्य की सीमा"), 46
- समता बनाम equity
- रॉल्स: पर्दा, अंतिम लाभार्थी
- अंबेडकर 25.11.1949: सामाजिक लोकतंत्र, विरोधाभासों का जीवन
- पाँच कार्य-नियम (अंतिम व्यक्ति, प्रकाशित कसौटी, पहुँच, सुनवाई, समूह-वार आँकड़े)
- सुधार में प्रशासन: कानून, जागरूकता, सुरक्षा, वितरण, साझेदारी
- विशाखा 13.8.1997
- सती विनियम 4.12.1829
- बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 धारा 13(4); राजसमंद 20.4.2015
- इंद्रा साहनी 16.11.1992
- RTE 2009 और 12.4.2012
- EWS निर्णय 7.11.2022 (3:2)
- काल्पनिक केस: तहसीलदार कविता, छात्रावास की 50 सीटें, अंक-पद्धति और दस्तावेज़ शिविर।