नैतिक निर्णय के चरण
RAS मुख्य परीक्षा, पत्र II, इकाई I, बिंदु 8: "Basis of ethical decision making: social justice, humanitarian concerns, accountability in governance; instrumental rationality versus value rationality" (नैतिक निर्णय का आधार)। साथ ही बिंदु 7 (दुविधाएँ) और बिंदु 9 (केस स्टडी की विधि)
- जनवरी 2026 के पाठ्यक्रम के अनुसार अद्यतन
- पढ़ने का समय: लगभग 15 मिनट
परीक्षा-भार (2018-2024 के प्रश्नों के आधार पर)
1 सीधा प्रश्न: 2021 भाग ग का Q12 ("नैतिक निर्णय" के आवश्यक कारक और नैतिक बनाम प्रशासनिक निर्णय का सामंजस्य, 10 अंक)। निकट: 2023 भाग ग का Q13 (नैतिक दुविधा, 10 अंक) और 2021 भाग क का Q3 (नैतिक दुविधा, 2 अंक)।
30 सेकंड का सार
याद रखें
- नैतिक निर्णय अंतर्ज्ञान का खेल नहीं, अनुशासित प्रक्रिया है। हमारी सात-सीढ़ी (प्रशासकों के लिए): मुद्दा पहचानो; तथ्य जुटाओ; हितधारक और दाँव पर लगे मूल्य देखो; कानून और नियम जाँचो; विकल्प बनाओ; हर विकल्प को परखो; निर्णय लो, दर्ज करो, कार्य करो और समीक्षा करो।
- संदर्भ ढाँचा: सांता क्लारा विश्वविद्यालय (मार्कुला केंद्र) की पाँच सीढ़ियाँ: मुद्दा पहचानो, तथ्य लो, विकल्पों को छह दृष्टियों (अधिकार, न्याय, उपयोगितावादी, सार्वजनिक हित, सद्गुण, देखभाल) से परखो, चुनो और परखो, कार्य करो और चिंतन करो।
- 2021 के प्रश्न का पहला भाग (आवश्यक कारक): तथ्य, कानून और नियम, मूल्य, परिणाम, हितधारक, नीयत, विकल्प, विवेक और प्रक्रिया की निष्पक्षता।
- दूसरा भाग (सामंजस्य): टकराव अक्सर दिखावटी होता है। नियम का उद्देश्य पढ़ो, उसकी अपनी छूट का प्रयोग करो, लिखित स्पष्टीकरण माँगो, कारण और असहमति दर्ज करो, और ज़रूरत हो तो ऊपर भेजो। स्पष्ट रूप से अवैध आदेश को लिखित में अस्वीकार करो।
- वज़न तौलने का क्रम (हमारा सुझाव): वैधता और संवैधानिक मूल्य; जीवन और गरिमा; सार्वजनिक हित और सबसे कमज़ोर; फिर परिणाम और कुशलता (पृष्ठ 8.4 का तीन-प्रश्न परीक्षण)।
भाग क के लिए छोटे उत्तर (15 शब्द तक)
याद रखें
- प्रश्न: नैतिक निर्णय-प्रक्रिया क्या है?
- उत्तर: तथ्य, कानून, मूल्य और परिणाम तौलकर चरणबद्ध ढंग से सही कदम चुनना।
- चरण: मुद्दा पहचानना, तथ्य जुटाना, विकल्प परखना, निर्णय लेना, कार्य करना, समीक्षा करना।
- सामंजस्य: नियम का उद्देश्य पढ़ें, वैध विवेक अपनाएँ, लिखित निर्देश माँगें, कारण दर्ज करें।
1. नैतिक निर्णय क्या है और क्यों चरणबद्ध
दुविधा में दबाव, डर और पक्षपात निर्णय बिगाड़ते हैं। चरण हमें धीमा करके हर कोण दिखाते हैं।
नैतिक निर्णय में चार प्रश्न एक साथ रहते हैं: क्या यह वैध है? क्या यह उचित और न्यायपूर्ण है? इसके परिणाम किस पर क्या होंगे? क्या मैं इसे सबके सामने बता सकता/सकती हूँ?
2. सात सीढ़ियों वाला मॉडल
(यह हमारा ढाँचा है, SCU के पाँच चरणों से प्रेरित)
| सीढ़ी | क्या करें | अधिकारी का प्रश्न |
|---|---|---|
| 1. मुद्दा पहचानो | दुविधा का नाम दो: कौन-से मूल्य या कर्तव्य टकरा रहे हैं? | असल प्रश्न क्या है? |
| 2. तथ्य जुटाओ | दस्तावेज़, गवाह, समय-सीमा; अफ़वाह और तथ्य अलग करो | मुझे क्या पता है और क्या नहीं? |
| 3. हितधारक और मूल्य | किस पर असर पड़ेगा? कौन-से मूल्य दाँव पर हैं? सबसे कमज़ोर कौन? | मेरी जगह कमज़ोर व्यक्ति होता तो? |
| 4. कानून और नियम | संविधान, अधिनियम, सेवा-नियम, आदेश; छूट और विवेक कहाँ? | क्या यह वैध है? |
| 5. विकल्प बनाओ | कम से कम तीन, बीच के रास्ते सहित | क्या कोई तीसरा रास्ता है? |
| 6. हर विकल्प परखो | नीचे की सात कसौटियाँ | कौन-सा विकल्प सबसे कम हानि और सबसे अधिक न्याय देता है? |
| 7. निर्णय, दर्ज, कार्य, समीक्षा | कारण लिखो, ज़रूरी हो तो अनुमति लो, लागू करो, परिणाम की समीक्षा करो | क्या अगली बार बेहतर कर सकता/सकती हूँ? |
3. सीढ़ी 6 की सात कसौटियाँ
| कसौटी | प्रश्न | आधार |
|---|---|---|
| वैधता | क्या कानून और नियम की सीमा में है? | संविधान, अधिनियम |
| अधिकार और गरिमा | क्या किसी का अधिकार या गरिमा छिनती है? | अनुच्छेद 21; SCU की अधिकार-दृष्टि: "Which option best respects the rights of all who have a stake?" |
| सार्वभौमिकता | क्या मैं चाहूँगा कि यह नियम सब पर लागू हो? | कांट: "Act only on that maxim whereby thou canst at the same time will that it should become a universal law." (पृष्ठ 6.3) |
| परिणाम | किसे कितना लाभ और कितनी हानि? | उपयोगितावादी दृष्टि: "Which option will produce the most good and do the least harm for as many stakeholders as possible?" (SCU) |
| न्याय और निष्पक्षता | क्या सबके साथ उचित व्यवहार, सुनवाई और बराबर नियम? | रॉल्स की पर्दा-परीक्षा (पृष्ठ 6.8); SCU: "Which option treats people fairly, giving them each what they are due?" |
| सबसे कमज़ोर और सार्वजनिक हित | इससे अंतिम व्यक्ति और समाज को क्या मिला? | गांधी का तावीज़ (पृष्ठ 5.6); SCU की सार्वजनिक-हित दृष्टि |
| विवेक और प्रकाशन | क्या मैं इसे खुले में बता सकता/सकती हूँ? क्या विवेक शांत है? | गांधी (1920): भीतर की धीमी आवाज़ अंतिम निर्णायक; "सबके सामने" वाली कसौटी एक सामान्य व्यावहारिक नियम है, स्रोत-रहित |
4. "नैतिक निर्णय" के आवश्यक कारक
(2021 प्रश्न का पहला भाग; हमारा संकलन)
1. तथ्य और सूचना: सही, पूर्ण और समय पर।
2. कानून और नियम: वैधता पहली शर्त।
3. मूल्य: सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता, करुणा, पारदर्शिता, जवाबदेही।
4. परिणाम: सभी हितधारकों पर, विशेषकर कमज़ोरों पर; अल्प और दीर्घ अवधि।
5. नीयत: निर्णय का उद्देश्य जनहित है या निजी लाभ या डर?
6. विवेक: अंतरात्मा की पुकार।
7. प्रक्रिया की निष्पक्षता: सुनवाई, कारण, रिकॉर्ड (प्राकृतिक न्याय)।
8. संसाधन और समय: क्रियान्वयन-योग्यता (पृष्ठ 8.4: कुशलता तभी जब लक्ष्य और साधन सही हों)।
5. जब कसौटियाँ अलग-अलग दिशा में खींचें: वज़न तौलना
(हमारा सुझाव, कानून नहीं)
1. वैधता और संवैधानिक मूल्य: अवैध या असंवैधानिक विकल्प बाहर।
2. जीवन और गरिमा: इन पर चोट करने वाला विकल्प बहुत भारी कारण के बिना नहीं।
3. सबसे कमज़ोर और सार्वजनिक हित: अधिक हानि किस पर पड़ेगी?
4. परिणाम और कुशलता: शेष विकल्पों में सर्वाधिक लाभ। (पृष्ठ 8.4: पहले "क्या लक्ष्य सही है?" "क्या साधन सही हैं?", फिर "क्या यह काम करेगा?")
6. नैतिक बनाम प्रशासनिक निर्णय: सामंजस्य
(2021 प्रश्न का दूसरा भाग)
प्रशासनिक निर्णय: नियम, आदेश या प्रक्रिया से तय निर्णय। नैतिक निर्णय: मूल्यों और परिणाम से तय निर्णय। दोनों अक्सर एक ही दिशा में होते हैं; टकराव तब होता है जब नियम का अक्षर उसके उद्देश्य के विरुद्ध खड़ा हो।
| टकराव का प्रकार | क्या करें |
|---|---|
| नियम अस्पष्ट या मौन | उद्देश्य के अनुसार व्याख्या करें; लिखित स्पष्टीकरण माँगें |
| नियम कठोर पर विवेक की गुंजाइश | विवेक का प्रयोग, कारण लिखकर |
| नियम कठोर, विवेक नहीं, पर गंभीर हानि | सक्षम प्राधिकारी से लिखित छूट माँगें, तथ्य दें, रिकॉर्ड करें, नियम-परिवर्तन का प्रस्ताव |
| आदेश वैध है पर आप उससे असहमत हैं | असहमति और कारण फ़ाइल में दर्ज करें, फिर वैध आदेश का पालन करें |
| आदेश स्पष्टतः अवैध या असंवैधानिक है | लिखित में विनम्रता से अस्वीकार करें, ऊपर भेजें; "आदेश था" बहाना नहीं (नूरेमबर्ग सिद्धांत IV, 1950: "provided a moral choice was in fact possible to him"; पृष्ठ 7.6) |
सेवा-नियम का आधार: अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 का नियम 3(3)(ii)-(iii): निर्देश सामान्यतः लिखित हो, अपरिहार्य मौखिक निर्देश की तुरंत लिखित पुष्टि हो, और पाने वाला अधिकारी लिखित पुष्टि माँगे (सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय में उद्धृत, पृष्ठ 8.3)।
कानून स्वयं सामंजस्य करता है: पुट्टस्वामी (24 अगस्त 2017) की वैधता, आवश्यकता और आनुपातिकता की कसौटी और मेनका गांधी (1978) की "न्यायोचित, निष्पक्ष और उचित प्रक्रिया" (पृष्ठ 8.4)।
पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ, 24 अगस्त 2017.
(नौ न्यायाधीश; वैधता, आवश्यकता, आनुपातिकता; पृष्ठ 8.4): साधन (कुशलता) को मूल्य (अधिकार) की सीमा के भीतर रखने का उदाहरण।
उत्तर में कैसे लगाएँ
पहले कारक (तथ्य, कानून, मूल्य, परिणाम, नीयत, विवेक), फिर सामंजस्य की सीढ़ी (उद्देश्य पढ़ो, विवेक, लिखित, असहमति दर्ज, ऊपर भेजो), फिर एक उदाहरण (काल्पनिक चित्रण और सुब्रमण्यम 2013) और अंत में गांधी का विवेक या कांट।
विचारक और उद्धरण
| नाम | विचार | प्रयोग-योग्य पंक्ति |
|---|---|---|
| इमैनुएल कांट | सार्वभौमिक नियम | "Act only on that maxim whereby thou canst at the same time will that it should become a universal law." (देखें पृष्ठ 6.3) |
| महात्मा गांधी | विवेक अंतिम निर्णायक | "The 'still small voice' within you must always be the final arbiter when there is a conflict of duty." (यंग इंडिया, 4 अगस्त 1920) |
| सांता क्लारा विश्वविद्यालय (मार्कुला केंद्र) | सद्गुण-दृष्टि | "Which option leads me to act as the sort of person I want to be?" |
| सर्वोच्च न्यायालय, टी.एस.आर. सुब्रमण्यम (2013) | निर्देश दर्ज हों | "Recording of instructions, directions is, therefore, necessary for fixing responsibility and ensure accountability in the functioning of civil servants and to uphold institutional integrity." |
चित्र: प्रवाह, सात सीढ़ियाँ
मुद्दा पहचानो
बॉक्स 1: बॉक्स 2: बॉक्स 3
तथ्य जुटाओ
हितधारक और मूल्य
कानून और नियम (छूट कहाँ?)
बॉक्स 4: बॉक्स 5
कम से कम तीन विकल्प
सात कसौटियाँ: वैधता, अधिकार, सार्वभौमिकता, परिणाम, न्याय, कमज़ोर, विवेक/प्रकाशन
बॉक्स 6
निर्णय, कारण दर्ज, कार्य, समीक्षा
बॉक्स 7
नियम बनाम नैतिकता का टकराव? उद्देश्य पढ़ो → विवेक → लिखित स्पष्टीकरण → असहमति दर्ज → ऊपर भेजो → अवैध आदेश: लिखित अस्वीकार
बगल की शाखा (बॉक्स 4 से)
पहले इसी अवधारणा का प्रश्न: "नैतिक निर्णय के चरण" नाम से सीधा प्रश्न केवल 2021 में आया (10 अंक)। दुविधा-आधारित प्रश्न 2018 (गीता और अर्जुन, भाग ग Q11), 2021 और 2023 में आए।
आम गलतियाँ
याद रखें
- केवल "अंतरात्मा की आवाज़ सुनो" लिख देना; चरण, कारक और कानून का नाम न देना।
- नैतिकता के नाम पर नियम तोड़ने की सलाह देना; सही रास्ता है वैध छूट, लिखित अनुमति और रिकॉर्ड (अवैध आदेश पर लिखित अस्वीकार)।
- उदाहरण न देना, जबकि प्रश्न "Explain with examples" कहता है; और काल्पनिक चित्रण को असली घटना की तरह लिखना।
आत्म-जाँच (5 प्रश्न)
याद रखें
- नैतिक निर्णय की सात सीढ़ियाँ गिनाइए।
- "नैतिक निर्णय" के चार आवश्यक कारक बताइए।
- नैतिक और प्रशासनिक निर्णय का टकराव हो तो पाँच कदम कौन-से हैं?
- अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 का नियम 3(3)(ii)-(iii) क्या कहता है?
- कसौटियाँ अलग-अलग दिशा में खींचें तो वज़न तौलने का क्रम क्या होगा?
वास्तविक उदाहरण
केस स्टडीटी.एस.आर. सुब्रमण्यम बनाम भारत संघ, सर्वोच्च न्यायालय, 31 अक्तूबर 2013
(पृष्ठ 8.3 में विवरण): मौखिक निर्देशों पर काम करने से जवाबदेही कमज़ोर होती है; राज्यों से आचरण नियम 3(3) जैसे लिखित-पुष्टि के निर्देश तीन महीने में जारी करने को कहा गया। न्यायालय के शब्दों में, निर्देशों का रिकॉर्ड "ज़िम्मेदारी तय करने और जवाबदेही सुनिश्चित करने" के लिए ज़रूरी है।
सीख
नैतिक और प्रशासनिक निर्णय के बीच सेतु: लिखित पुष्टि और रिकॉर्ड।
केस स्टडीओल्गा टेलिस बनाम बॉम्बे नगर निगम, 10 जुलाई 1985
(पाँच न्यायाधीश; पृष्ठ 8.2): बेदखली का प्रशासनिक अधिकार माना गया, पर न्यायालय ने कहा कि झुग्गियाँ चालू मानसून के अंत के एक महीने बाद, यानी 31 अक्तूबर 1985 तक, न हटाई जाएँ (निर्णय का पाठ, Indian Kanoon)।
सीख
प्रशासनिक आवश्यकता और मानवीय चिंता का समय और प्रक्रिया से सामंजस्य।
काल्पनिक केस
उदाहरण (काल्पनिक)काल्पनिक केस (Hypothetical case)
अधिशासी अभियंता संदीप (काल्पनिक) को एक पुराने पैदल पुल की मरम्मत का टेंडर देना है। विभागीय नियम कहता है कि सबसे कम बोली (L1) वाले को काम मिले। L1 ठेकेदार का पिछला काम घटिया रहा है और हाल में एक पुल ढह चुका है। मुख्य अभियंता मौखिक रूप से कहते हैं: "L1 को ही दो, वित्त वर्ष के अंत तक बजट लैप्स न हो।" संदीप पर समय का दबाव है।
- हितधारक
- संदीप, मुख्य अभियंता, L1 ठेकेदार और अन्य बोलीदाता, पुल के उपयोगकर्ता (जनता), विभाग, वित्त विभाग।
- मुद्दा और टकराते मूल्य
- प्रशासनिक नियम (L1) और बजट-समय का दबाव बनाम जन-सुरक्षा, गुणवत्ता और सत्यनिष्ठा। क्या नियम का उद्देश्य (किफ़ायत) बिना गुणवत्ता के पूरा होता है?
- तीन विकल्प
- (क) मौखिक आदेश मानकर L1 को काम दे देना। लाभ: बजट बचा, कोई विवाद नहीं। हानि: पुल असुरक्षित रह सकता है; मौखिक आदेश पर कार्य कर संदीप जवाबदेही से बच नहीं पाएगा। (ख) खुलकर इनकार कर देना। लाभ: सिद्धांत पर दृढ़। हानि: टकराव, समाधान नहीं मिलता, बजट लैप्स। (ग) लिखित निर्देश माँगना; फ़ाइल पर अपनी चिंता और L1 के पिछले प्रदर्शन के तथ्य दर्ज करना; निविदा-शर्तों के भीतर (तकनीकी पात्रता, पिछला कार्य-अनुभव, निष्पादन गारंटी जैसी वैध शर्तें, जहाँ नियम अनुमति दें) अयोग्य बोली को अस्वीकार करना या पुनः निविदा या चरणबद्ध कार्य का प्रस्ताव देना; और मुख्य अभियंता व वित्त विभाग को लिखकर बजट की पुनर्विनियोजन या कार्य आगे ले जाने की माँग करना। लाभ: नियम और गुणवत्ता दोनों का सामंजस्य, रिकॉर्ड सुरक्षित। हानि: समय, मुख्य अभियंता की नाराज़गी, बजट-जोखिम।
- सर्वोत्तम विकल्प और समर्थक मूल्य
- विकल्प (ग)। समर्थक मूल्य: जन-सुरक्षा (अनुच्छेद 21), सत्यनिष्ठा, जवाबदेही; सुब्रमण्यम (2013) का लिखित निर्देश; गांधी का विवेक और तावीज़। टेंडर-नियम का उद्देश्य (सर्वोत्तम मूल्य, न कि केवल न्यूनतम मूल्य) पढ़कर नैतिक और प्रशासनिक निर्णय को मिलाया गया।
सीख
कदम: अल्पकालिक: लिखित निर्देश माँगना, फ़ाइल में तथ्य, वैध पात्रता-जाँच, वैकल्पिक योजना, बजट-पुनर्विनियोजन का पत्र। दीर्घकालिक: ठेकेदार का गुणवत्ता-रिकॉर्ड और काली सूची की प्रक्रिया, टेंडर में गुणवत्ता-मानक, निर्माण की तीसरे पक्ष से जाँच, बजट लैप्स के भय को घटाने वाली नीति।
अभ्यास प्रश्न
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
नैतिक निर्णय लेने के मुख्य चरण बताइए।
आदर्श उत्तर
पहले मुद्दा पहचानें और तथ्य जुटाएँ। फिर हितधारकों, दाँव पर लगे मूल्यों और लागू कानून को देखें। कम से कम तीन विकल्प बनाकर उन्हें वैधता, अधिकार, परिणाम, न्याय और विवेक की कसौटी पर परखें। अंत में कारण दर्ज कर निर्णय लें, कार्य करें और परिणाम की समीक्षा करें।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
"Explain the factors essential in 'Ethical decision' making. In case of ethical decision being against to administrative decision, how will you harmonise them? Explain with examples."
आदर्श उत्तर
नैतिक निर्णय के आवश्यक कारक हैं: सही तथ्य, कानून और नियम, सत्यनिष्ठा-निष्पक्षता-करुणा जैसे मूल्य, सभी हितधारकों पर परिणाम, नीयत, विवेक और निष्पक्ष प्रक्रिया। टकराव में सामंजस्य ऐसे हो: नियम का उद्देश्य पढ़ें, उसकी छूट का प्रयोग करें, लिखित निर्देश माँगें, असहमति दर्ज करें और ऊपर भेजें। उदाहरण (काल्पनिक चित्रण): घटिया रिकॉर्ड वाले L1 ठेकेदार पर मौखिक दबाव हो तो लिखित निर्देश माँगकर वैध पात्रता-शर्तों से निर्णय लें। सुब्रमण्यम (2013) ने भी निर्देश दर्ज करने को कहा। इस राह में नियम का अक्षर नहीं, उसका उद्देश्य बचता है; कारण फ़ाइल में रहें और परिणाम की समीक्षा हो। स्पष्टतः अवैध आदेश लिखित में अस्वीकार करें।
पिछले असली प्रश्न
2021पत्र II, भाग ग Q1210 अंक
Explain the factors essential in 'Ethical decision' making. In case of ethical decision being against to administrative decision, how will you harmonise them? Explain with examples. इस पृष्ठ के खंड 4 और 6 पूरा उत्तर देते हैं।
2023निकट संबंधीपत्र II, भाग ग Q1310 अंक
What do you mean by moral dilemma? Should personal ethics take precedence over professional ethics in a situation of moral conflict? (पृष्ठ 7.1 और 7.5; यहाँ की सात सीढ़ियाँ और कसौटियाँ दूसरे भाग में काम आती हैं)।
2021निकट संबंधीपत्र II, भाग क Q32 अंक
What do you understand by ethical dilemma? (पृष्ठ 7.1)।
यह उत्तर कैसे लिखें
भूमिका
नैतिक और प्रशासनिक निर्णय का अर्थ
मुख्य भाग
- आवश्यक कारक; सामंजस्य की सीढ़ी; दो उदाहरण
निष्कर्ष
नियम का अक्षर नहीं, उद्देश्य; कानून के भीतर
अतिरिक्त मूल्य
- गांधी का विवेक, कांट, सुब्रमण्यम
एक पेज में दोहराव
- सात सीढ़ियाँ: मुद्दा, तथ्य, हितधारक-मूल्य, कानून, विकल्प, परख, निर्णय-दर्ज-कार्य-समीक्षा
- SCU पाँच चरण और छह दृष्टियाँ
- सात कसौटियाँ: वैधता, अधिकार, सार्वभौमिकता (कांट), परिणाम, न्याय (रॉल्स), कमज़ोर (तावीज़), विवेक/प्रकाशन
- कारक: तथ्य, कानून, मूल्य, परिणाम, नीयत, विवेक, प्रक्रिया, संसाधन
- सामंजस्य: उद्देश्य पढ़ो, विवेक, लिखित स्पष्टीकरण, असहमति दर्ज, ऊपर भेजो; अवैध आदेश लिखित अस्वीकार
- AIS आचरण नियम 1968 नियम 3(3)(ii)-(iii)
- सुब्रमण्यम 31.10.2013
- ओल्गा टेलिस 10.7.1985
- पुट्टस्वामी 24.8.2017
- नूरेमबर्ग IV (1950)
- गांधी 4.8.1920
- काल्पनिक केस: अभियंता संदीप, L1 टेंडर, मौखिक आदेश, लिखित निर्देश।