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पृष्ठ 8.7

बुनियादी ज़रूरतें और कल्याणकारी राज्य

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RAS मुख्य परीक्षा, पत्र II, इकाई I, बिंदु 8: "Basis of ethical decision making: social justice, humanitarian concerns, accountability in governance; instrumental rationality versus value rationality" (नैतिक निर्णय का आधार: सामाजिक न्याय, मानवीय सरोकार, शासन में जवाबदेही)। यह पृष्ठ "मानवीय सरोकार" और "सामाजिक न्याय" को ज़मीन पर उतारता है

  • जनवरी 2026 के पाठ्यक्रम के अनुसार अद्यतन
  • पढ़ने का समय: लगभग 16 मिनट
2 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

परीक्षा-भार (2018-2024 के प्रश्नों के आधार पर)

2 प्रश्न (15 अंक): 2021 भाग ख का Q9 (न्यूनतम बुनियादी ज़रूरतें और प्रशासक की ज़िम्मेदारी, 5 अंक) और 2024 भाग ग का Q13 (मानव संसाधन और मानवता साध्य के रूप में, कल्याणकारी राज्य के परिप्रेक्ष्य में, 10 अंक; पूरा मॉडल उत्तर पृष्ठ 6.3 में, यहाँ कल्याणकारी राज्य का पक्ष)।

30 सेकंड का सार

याद रखें

  • बुनियादी ज़रूरतें: भोजन और पोषण, स्वच्छ पेयजल, वस्त्र, आश्रय, स्वास्थ्य-सेवा, शिक्षा, स्वच्छता, आजीविका और सामाजिक सुरक्षा, और इन सबके साथ गरिमा। मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा (10 दिसंबर 1948) का अनुच्छेद 25(1) भोजन, वस्त्र, आवास, चिकित्सा और आवश्यक सामाजिक सेवाओं को "स्वास्थ्य और कल्याण के लिए पर्याप्त जीवन-स्तर" में गिनता है।
  • संविधान का आधार: अनुच्छेद 21 (फ्रांसिस कोरैली मुलिन, 1981: पर्याप्त पोषण, वस्त्र और आश्रय), अनुच्छेद 39(क), 41, 43 और 47 ("पोषण और जीवन-स्तर को ऊँचा उठाना और लोक स्वास्थ्य का सुधार" राज्य के "प्राथमिक कर्तव्यों" में)।
  • कानूनी अधिकार: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 (2013 का अधिनियम 20; 10 सितंबर 2013): ग्रामीण आबादी के 75 प्रतिशत और शहरी के 50 प्रतिशत तक को रियायती अनाज, गर्भवती महिलाओं, बच्चों के लिए पोषण, शिकायत-निवारण और सामाजिक अंकेक्षण।
  • कल्याणकारी राज्य: राज्य नागरिकों के बुनियादी कल्याण का ज़िम्मेदार है। भारत में प्रस्तावना और भाग IV (अनुच्छेद 38 से 47) यह दिशा देते हैं; अनुच्छेद 37 के कारण निदेशक तत्व अदालत से लागू नहीं होते, पर अनुच्छेद 21 की व्याख्या और कानूनों ने कई को अधिकार बना दिया।
  • प्रशासक का दायित्व: पहचानना और शामिल करना, पहुँचाना, रिसाव रोकना, शिकायत सुनना, कमज़ोरों की रक्षा करना और परिणाम दर्ज करना। न्यूनतम "फ़र्श" है, छत नहीं।

भाग क के लिए छोटे उत्तर (15 शब्द तक)

याद रखें

  • प्रश्न: व्यक्ति की बुनियादी ज़रूरतें क्या हैं?
  • उत्तर: भोजन, पेयजल, वस्त्र, आश्रय, स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका, गरिमा के साथ।
  • अनुच्छेद 47 पोषण, जीवन-स्तर और लोक स्वास्थ्य को राज्य का प्राथमिक कर्तव्य मानता है।
  • खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 ग्रामीण 75 और शहरी 50 प्रतिशत आबादी को अधिकार देता है।

1. न्यूनतम बुनियादी ज़रूरतें: "स्वस्थ और उत्पादक जीवन" के लिए

(2021 भाग ख Q9)

ज़रूरतसंवैधानिक या कानूनी आधार
भोजन और पोषणअनुच्छेद 47, 21; राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013; निःशुल्क अनाज: मंत्रिमंडल, 29 नवंबर 2023: 81.35 करोड़ लाभार्थी, पाँच वर्ष, 1 जनवरी 2024 से, यानी दिसंबर 2028 तक; 2026 तक बदलाव की सूचना नहीं मिली (PIB)
स्वच्छ पेयजल और स्वच्छताअनुच्छेद 21 और 47 (लोक स्वास्थ्य); योजना या कानून का नाम इस पृष्ठ में नहीं; वर्तमान योजनाएँ आधिकारिक स्रोतों में देखें
वस्त्र और आश्रयफ्रांसिस कोरैली मुलिन, 1981: "adequate nutrition, clothing and shelter"; ओल्गा टेलिस, 1985
स्वास्थ्यअनुच्छेद 47; परमानंद कटारा, 1989 (आपात चिकित्सा)
शिक्षाअनुच्छेद 21A (6 से 14 वर्ष), 45 (छह वर्ष तक बाल्यावस्था की देखभाल और शिक्षा); शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (लागू 1 अप्रैल 2010)
आजीविका और आयअनुच्छेद 39(क), 41, 43 (निर्वाह मज़दूरी और "सभ्य जीवन-स्तर"); ग्रामीण रोज़गार: विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम, 2025 में प्रति ग्रामीण परिवार 125 दिन की मज़दूरी-रोज़गार गारंटी (अधिनियम का पाठ और PIB; 1 जुलाई 2026 से लागू)
सामाजिक सुरक्षाअनुच्छेद 41 (बेरोज़गारी, वृद्धावस्था, बीमारी, निःशक्तता में लोक सहायता); खाद्य सुरक्षा अधिनियम में गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं को कम से कम 6,000 रुपये का मातृत्व लाभ
सुरक्षा और गरिमाअनुच्छेद 21; प्रस्तावना: "व्यक्ति की गरिमा"

मानवाधिकार घोषणा, अनुच्छेद 25(1): "Everyone has the right to a standard of living adequate for the health and well-being of himself and of his family, including food, clothing, housing and medical care and necessary social services, and the right to security in the event of unemployment, sickness, disability, widowhood, old age or other lack of livelihood in circumstances beyond his control."

"स्वस्थ और उत्पादक" की कड़ी (हमारा तर्क): पोषण से स्वास्थ्य, स्वास्थ्य और शिक्षा से उत्पादकता, उत्पादकता और आजीविका से आत्मनिर्भरता और गरिमा। यह विचार मानव विकास सूचकांक (HDI) के स्वास्थ्य, शिक्षा और आय के आयामों से मेल खाता है (HDI पाठ्यक्रम में पत्र I इकाई II में है)।

2. संविधान में कल्याणकारी राज्य

अनुच्छेद 39(क): स्त्री-पुरुष को आजीविका के पर्याप्त साधन। अनुच्छेद 41: आर्थिक सामर्थ्य और विकास की सीमाओं के भीतर काम, शिक्षा और लोक सहायता। अनुच्छेद 43: सभी श्रमिकों को काम, निर्वाह मज़दूरी, "सभ्य जीवन-स्तर" की कार्य-परिस्थितियाँ और अवकाश। अनुच्छेद 45: छह वर्ष तक की बाल्यावस्था की देखभाल और शिक्षा (2002 के 86वें संशोधन से वर्तमान रूप)। अनुच्छेद 47: पोषण-स्तर और जीवन-स्तर को ऊँचा उठाना और लोक स्वास्थ्य का सुधार राज्य के "प्राथमिक कर्तव्यों" में।

अनुच्छेद 37: ये तत्व न्यायालय से लागू नहीं कराए जा सकते। पर अनुच्छेद 21 के माध्यम से अदालतों ने पोषण, आश्रय, आजीविका और आपात चिकित्सा को अधिकार के रूप में पढ़ा है (पृष्ठ 8.2), और संसद ने अधिनियम बनाए।

तनाव: (क) संसाधन की सीमा (अनुच्छेद 41 में "आर्थिक सामर्थ्य"); (ख) सबको देना बनाम ज़रूरतमंद को चुनना (लक्ष्यीकरण); (ग) सहायता बनाम सशक्तीकरण (हमारा विश्लेषण)।

3. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 (NFSA)

2013 का अधिनियम 20, दिनांक 10 सितंबर 2013; "5 जुलाई 2013 से प्रभावी माना गया" (धारा 1(3))। उद्देश्य: "सम्मानजनक जीवन" के लिए सस्ती दर पर पर्याप्त गुणवत्ता वाला भोजन।

धारा 3: प्राथमिकता वाले परिवारों के प्रत्येक व्यक्ति को प्रति माह 5 किलो अनाज; अंत्योदय अन्न योजना के परिवार को 35 किलो प्रति परिवार; पात्रता ग्रामीण आबादी के 75 प्रतिशत और शहरी के 50 प्रतिशत तक।

अनुसूची I: अधिनियम के प्रारंभ से तीन वर्ष तक चावल 3 रुपये, गेहूँ 2 रुपये और मोटे अनाज 1 रुपया प्रति किलो से अधिक नहीं। (बाद में निःशुल्क अनाज: ऊपर PMGKAY)।

धारा 4: गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माता को आँगनवाड़ी से निःशुल्क भोजन (गर्भावस्था और प्रसव के छह माह बाद तक) और कम से कम 6,000 रुपये का मातृत्व लाभ (नियमित सरकारी नौकरी वाली या समान लाभ पाने वाली को नहीं)।

धारा 5: छह माह से छह वर्ष के बच्चों को आँगनवाड़ी से आयु-उपयुक्त निःशुल्क भोजन; कक्षा 8 तक (6 से 14 वर्ष) सरकारी और सहायता-प्राप्त स्कूलों में रोज़ एक निःशुल्क मध्याह्न भोजन।

धारा 13: राशन कार्ड के लिए परिवार की सबसे बड़ी 18 वर्ष से अधिक की महिला मुखिया।

धारा 8: अनाज या भोजन न मिलने पर "खाद्य सुरक्षा भत्ता"। धारा 14, 15, 16: आंतरिक शिकायत निवारण तंत्र, जिला शिकायत निवारण अधिकारी (DGRO) और राज्य खाद्य आयोग। धारा 33: DGRO की सिफ़ारिश की राहत बिना उचित कारण न देने या जानबूझकर अनदेखी करने पर, राज्य आयोग द्वारा दोषी पाए जाने और सुनवाई के बाद, लोक सेवक या प्राधिकारी पर 5,000 रुपये तक का दंड। धारा 28 और 29: सामाजिक अंकेक्षण और सतर्कता समितियाँ (पृष्ठ 8.3)।

4. भोजन का अधिकार: पीयूसीएल बनाम भारत संघ, 2001

अप्रैल 2001 में PUCL (राजस्थान) ने राजस्थान में भीषण सूखे के बीच भुखमरी की खबरों के बाद सर्वोच्च न्यायालय में रिट याचिका (WP(C) 196/2001) दाखिल की। 28 नवंबर 2001 के अंतरिम आदेश ने आठ पोषण-संबंधी योजनाओं के लाभ (जैसे मध्याह्न भोजन, ICDS, अंत्योदय अन्न योजना, पेंशन, मातृत्व लाभ) को कानूनी अधिकार बनाया और सरकारी स्कूलों में छह माह में पका मध्याह्न भोजन देने को कहा; 8 मई 2002 के आदेश में सामाजिक अंकेक्षण और निगरानी के लिए आयुक्तों की बात आई (राइट टू फ़ूड कैंपेन और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार शब्दकोश के सार)।

पाठ: राजस्थान की भुखमरी की घटना से भोजन का अधिकार संवैधानिक विमर्श बना और आगे NFSA 2013 तक पहुँचा (यह कड़ी हमारा आकलन है)।

5. प्रशासक की ज़िम्मेदारी: "पाँच काम"

(2021 प्रश्न का दूसरा भाग; हमारा व्यावहारिक ढाँचा, धाराएँ NFSA से)

1. पहचानो और शामिल करो: सर्वेक्षण, शिविर, छूटे हुए परिवारों की खोज; घुमंतू, विधवा, दिव्यांग, बेघर पर विशेष ध्यान; महिला को परिवार की मुखिया बनाना (धारा 13)।

2. पहुँचाओ: समय पर, पूरी मात्रा और गुणवत्ता से अनाज, भोजन, पोषण; उचित मूल्य की दुकान की नियमित जाँच।

3. रिसाव रोको: पारदर्शिता, सतर्कता समितियाँ और सामाजिक अंकेक्षण (धारा 28, 29); रिकॉर्ड का स्वतः प्रकटीकरण।

4. शिकायत सुनो और सुलझाओ: आंतरिक तंत्र, DGRO, राज्य खाद्य आयोग (धारा 14 से 16); अधिकार न मिलने पर खाद्य सुरक्षा भत्ता (धारा 8)।

5. कमज़ोर की रक्षा और परिणाम दर्ज करना: समूह-वार आँकड़े; कोई व्यक्ति तकनीकी विफलता के कारण भूखा न रहे, इसके लिए आपातकालीन वैध उपाय (हमारा सिद्धांत)।

6. न्यूनतम "फ़र्श" है, "छत" नहीं

राज्य को न्यूनतम सुनिश्चित करना है; उससे ऊपर का विकास और अवसर अलग लक्ष्य हैं। उत्तर में यह भेद लिखने से गहराई दिखती है।

7. 2024 भाग ग Q13 का कल्याणकारी राज्य वाला पक्ष

(पूरा मॉडल पृष्ठ 6.3 में)

"मानव संसाधन" शब्द व्यक्ति को उत्पादन का साधन भर देख सकता है; कांट की कसौटी (मानवता साध्य) के अनुसार आपत्ति तब है जब व्यक्ति को केवल साधन माना जाए।

कल्याणकारी राज्य दोनों को जोड़ता है: स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और आजीविका में निवेश (अनुच्छेद 21A, 41, 43, 47; NFSA, RTE) व्यक्ति के अपने विकास और गरिमा के लिए हो; उत्पादकता उसका परिणाम है, लक्ष्य नहीं।

कसौटी: क्या योजना व्यक्ति को पूर्ण मनुष्य बनाती है या केवल "उपयोगी इकाई"?

वास्तविक उदाहरण

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013.

(ऊपर खंड 3): भोजन को कानूनी अधिकार बनाने का उदाहरण; साथ में शिकायत और अंकेक्षण का तंत्र।

स्रोत: संसद द्वारा पारित रूप में अधिनियम का पाठ (PRS की प्रति); राजपत्र में प्रकाशन 10 सितंबर 2013।

पीयूसीएल बनाम भारत संघ (भोजन का अधिकार), 2001.

राजस्थान की भुखमरी से शुरू होकर योजनाओं को कानूनी अधिकार बनाने वाले अंतरिम आदेश (खंड 4)। अंतरिम आदेश 28 नवंबर 2001 (राइट टू फ़ूड कैंपेन के सार से); उत्तर में वर्ष और आदेश-तिथि लिखें।

फ्रांसिस कोरैली मुलिन (13 जनवरी 1981) और ओल्गा टेलिस (10 जुलाई 1985)

(पृष्ठ 8.2): पोषण, वस्त्र, आश्रय और आजीविका अनुच्छेद 21 के भाग।

शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009.

(अनुमति 26 अगस्त 2009; लागू 1 अप्रैल 2010; पृष्ठ 8.1): शिक्षा की बुनियादी ज़रूरत को कानूनी अधिकार बनाना।

उत्तर में कैसे लगाएँ

पहले ज़रूरतों की सूची और अनुच्छेद 21 या 47; फिर NFSA 2013 जैसा एक कानून; फिर प्रशासक के पाँच काम; अंत में एक उदाहरण (पीयूसीएल 2001 या निःशुल्क अनाज 2023) और गांधी का तावीज़।

विचारक और उद्धरण

नामविचारप्रयोग-योग्य पंक्ति
मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा, अनुच्छेद 25(1) (10 दिसंबर 1948)पर्याप्त जीवन-स्तर"Everyone has the right to a standard of living adequate for the health and well-being of himself and of his family, including food, clothing, housing and medical care and necessary social services..." (संयुक्त राष्ट्र का पाठ)
संविधान, अनुच्छेद 47पोषण और लोक स्वास्थ्यराज्य "the raising of the level of nutrition and the standard of living of its people and the improvement of public health" को "primary duties" में गिनेगा (constitutionofindia.net)
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 (दीर्घ शीर्षक)सम्मानजनक जीवन"...to live a life with dignity..." (अधिनियम का पाठ)
महात्मा गांधी (आरोपित; पियारेलाल, 1958)तावीज़"Recall the face of the poorest and the weakest man whom you may have seen, and ask yourself if the step you contemplate is going to be of any use to him" (देखें पृष्ठ 5.6)

चित्र: प्रवाह: ज़रूरत से परिणाम तक

  1. बुनियादी ज़रूरत: भोजन, पेयजल, वस्त्र, आश्रय, स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका, सुरक्षा

    बॉक्स 1

  2. अधिकार: अनुच्छेद 21, 39(क), 41, 43, 47

    बॉक्स 2

  3. कानून: खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013, शिक्षा का अधिकार 2009

    बॉक्स 3

  4. वितरण: पहचानो, पहुँचाओ

    बॉक्स 4

  5. रिसाव और शिकायत: सतर्कता समिति, सामाजिक अंकेक्षण, DGRO, राज्य खाद्य आयोग

    बॉक्स 5

  6. परिणाम: स्वस्थ, उत्पादक और गरिमामय जीवन (फ़र्श, छत नहीं)

    अंतिम बॉक्स

पहले इसी अवधारणा का प्रश्न: कल्याणकारी राज्य और बुनियादी ज़रूरतें 2021 (5 अंक) और 2024 (10 अंक) में आईं, यानी 2018 और 2023 में नहीं। 2018 भाग क Q2 (जन-कल्याण और लोकसंग्रह) निकट विषय था।

आम गलतियाँ

याद रखें

  • ज़रूरतों की सूची लिखकर रुक जाना; प्रश्न का दूसरा भाग (प्रशासक की ज़िम्मेदारी) छोड़ देना।
  • निदेशक तत्वों को सीधे अदालत से लागू होने वाले अधिकार बता देना, या अनुच्छेद 41 की "आर्थिक सामर्थ्य की सीमा" भूल जाना।
  • योजना या आँकड़े बिना स्रोत के लिखना (जैसे लाभार्थियों की संख्या); जो पुष्ट नहीं, वह न लिखें।

आत्म-जाँच (5 प्रश्न)

याद रखें

  • न्यूनतम बुनियादी ज़रूरतों की सूची बताइए।
  • अनुच्छेद 47 राज्य के लिए क्या कर्तव्य बताता है?
  • खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 में पात्रता का प्रतिशत और प्रति व्यक्ति मासिक अनाज कितना है?
  • प्रशासक के पाँच काम कौन-से हैं?
  • "फ़र्श, छत नहीं" का क्या अर्थ है?