नीतिशास्त्र की शाखाएँ
RAS मुख्य परीक्षा, पत्र II, इकाई I, बिंदु 1: "Ethics and human values" (नीतिशास्त्र और मानवीय मूल्य)। विस्तार बिंदु 6 (नैतिक चिंतक) में आएगा।
- जनवरी 2026 के पाठ्यक्रम के अनुसार अद्यतन
- पढ़ने का समय: लगभग 9 मिनट
परीक्षा-भार (2018-2024 के प्रश्नों के आधार पर)
"शाखाएँ" नाम से कोई प्रश्न नहीं आया। पर इन्हीं सिद्धांतों से जुड़े प्रश्न आए हैं: 2023 भाग ग का Q12 (कर्तव्यवाद बनाम परिणामवाद), 2024 भाग क का Q4 (मध्य-मार्ग के रूप में सद्गुण), 2021 भाग ख का Q8 (कांट)। बिंदु 6 के कुल लगभग 15 प्रश्न आए हैं।
30 सेकंड का सार
याद रखें
- नीतिशास्त्र की तीन मुख्य शाखाएँ: मेटा (अर्थ और स्वरूप), आदर्शात्मक (क्या करना चाहिए), अनुप्रयुक्त (ठोस क्षेत्रों में)।
- आदर्शात्मक नीतिशास्त्र के तीन दृष्टिकोण: परिणामवाद (परिणाम), कर्तव्यवाद (कर्तव्य और नियम), सद्गुण नीतिशास्त्र (चरित्र)।
- वर्णनात्मक नीतिशास्त्र (लोग वास्तव में क्या मानते हैं) को कुछ पुस्तकें चौथी शाखा गिनती हैं।
- लोक प्रशासन की नैतिकता अनुप्रयुक्त नीतिशास्त्र है; प्रशासनिक निर्णय में तीनों दृष्टियाँ साथ चलती हैं।
- गीता के निष्काम कर्म की तुलना प्रायः कर्तव्यवाद से की जाती है; यह व्याख्या है, सर्वमान्य तथ्य नहीं।
भाग क के लिए छोटे उत्तर (15 शब्द तक)
याद रखें
- प्रश्न: मेटा-नीतिशास्त्र क्या है?
- उत्तर: मेटा-नीतिशास्त्र नैतिक शब्दों और निर्णयों के अर्थ तथा स्वरूप की जाँच करता है।
- परिणामवाद परिणाम से, कर्तव्यवाद नियम से और सद्गुण नीतिशास्त्र चरित्र से कर्म परखता है।
- अनुप्रयुक्त नीतिशास्त्र चिकित्सा, पर्यावरण, व्यवसाय और लोक प्रशासन जैसे क्षेत्रों के नैतिक प्रश्न सुलझाता है।
मुख्य नोट्स
नीतिशास्त्र को सामान्यतः तीन शाखाओं में समझा जाता है। (कुछ पाठ्य-पुस्तकें वर्णनात्मक नीतिशास्त्र, descriptive ethics, को चौथी शाखा गिनती हैं, जो यह देखता है कि लोग वास्तव में क्या मानते और करते हैं।)
1. मेटा-नीतिशास्त्र (Meta-ethics)
नैतिक धारणाओं का स्वरूप समझता है। जैसे "उचित" या "अनुचित" का अर्थ क्या है? क्या नैतिक निर्णय वस्तुनिष्ठ सत्य हैं या मत और भावनाएँ?
2. आदर्शात्मक नीतिशास्त्र (Normative ethics)
यह बताता है कि हमें क्या करना चाहिए और किन सिद्धांतों के आधार पर। इसके तीन प्रमुख दृष्टिकोण:
परिणामवाद (Consequentialism): कर्म का औचित्य उसके परिणाम से। इसका प्रमुख रूप उपयोगितावाद है (अधिकतम लोगों का अधिकतम हित); संबद्ध विचारक बेंथम और जे.एस. मिल।
कर्तव्यवाद (Deontology): कर्म का औचित्य कर्तव्य और नियम से, परिणाम से नहीं; संबद्ध विचारक कांट (उनकी "निरपेक्ष आदेश" की धारणा)।
सद्गुण नीतिशास्त्र (Virtue ethics): ध्यान कर्म पर नहीं, चरित्र पर; संबद्ध विचारक अरस्तू (सद्गुण को अतिरेकों के बीच का संतुलित मार्ग मानने का विचार)।
3. अनुप्रयुक्त नीतिशास्त्र (Applied ethics)
ठोस क्षेत्रों में नैतिक प्रश्नों का अध्ययन, जैसे चिकित्सा, पर्यावरण, व्यवसाय, लोक प्रशासन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता।
4. तीन दृष्टियों की तुलना
| दृष्टिकोण | कसौटी | पूछा जाने वाला प्रश्न | विचारक | ताकत | कमज़ोरी |
|---|---|---|---|---|---|
| परिणामवाद (उपयोगितावाद) | परिणाम | किस विकल्प से सबसे अधिक लोगों का सबसे अधिक हित होगा? | बेंथम, मिल | जनहित और नतीजों पर ध्यान | अल्पसंख्यक का हित दब सकता है |
| कर्तव्यवाद | कर्तव्य और नियम | मेरा कर्तव्य क्या है? क्या यह नियम सब पर समान लागू हो सकता है? | कांट | निष्पक्षता, अधिकारों की रक्षा | कठोरता; दो कर्तव्य टकराएँ तो उलझन |
| सद्गुण नीतिशास्त्र | चरित्र | ऐसी स्थिति में एक सद्गुणी व्यक्ति क्या करता? | अरस्तू | चरित्र-निर्माण पर बल | निर्णय के लिए स्पष्ट नियम कम |
(ताकत और कमज़ोरी के कॉलम हमारा विश्लेषण हैं, किसी एक ग्रंथ का वाक्य नहीं।)
इन सिद्धांतों का विस्तार इसी इकाई के "नैतिक चिंतक और दार्शनिक" खंड में आएगा। भारतीय परंपरा में गीता के निष्काम कर्म की तुलना प्रायः कर्तव्यवाद से की जाती है।
5. प्रशासन कोण
लोक प्रशासन की नैतिकता अनुप्रयुक्त नीतिशास्त्र का उदाहरण है, और प्रशासनिक निर्णय अक्सर तीनों दृष्टिकोणों को साथ लेकर चलते हैं: परिणाम देखना, कर्तव्य निभाना और चरित्र दिखाना। उदाहरण: सीमित बजट से कौन-सी योजना चुनें (परिणाम), नियम-प्रक्रिया का पालन (कर्तव्य), और अधिकारी की सत्यनिष्ठा (सद्गुण)।
वास्तविक उदाहरण
ऑक्सीजन आवंटन और राष्ट्रीय कार्य-बल, सर्वोच्च न्यायालय, 8 मई 2021.
कोविड की दूसरी लहर में न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एम.आर. शाह की पीठ ने 12 सदस्यों का राष्ट्रीय कार्य-बल (National Task Force) बनाया। उसका काम था: राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तरल चिकित्सीय ऑक्सीजन के वैज्ञानिक आवंटन की पद्धति बनाना, आवश्यकता का आकलन करना, आपूर्ति बढ़ाने के सुझाव देना और आवंटन की समय-समय पर समीक्षा के उपाय बताना। न्यायालय ने राज्यों/संघ राज्य-क्षेत्रों में उप-समूहों द्वारा ऑडिट सुगम बनाने को भी कहा। न्यायालय ने नोट किया कि केंद्र का मौजूदा फ़ॉर्मूला केवल अस्पताल के बिस्तरों की संख्या पर टिका था और अस्पताल के बाहर ऑक्सीजन की ज़रूरत वाले लोगों को छोड़ देता था।
तीन दृष्टियों से पढ़ना (हमारी व्याख्या): परिणामवाद पूछेगा कि किस आवंटन से सबसे अधिक जानें बचेंगी; कर्तव्यवाद पूछेगा कि क्या हर ज़रूरतमंद का दावा निष्पक्ष नियम से तय हो रहा है; सद्गुण-दृष्टि पूछेगी कि क्या आँकड़े ईमानदार हैं और निर्णय में साहस और करुणा है।
स्रोत जहाँ जाँचें: LiveLaw और Jurist की रिपोर्टें (8-9 मई 2021); सर्वोच्च न्यायालय का आदेश।
उत्तर में कैसे लगाएँ
"प्रशासनिक निर्णय तीनों दृष्टियों को साथ लेते हैं" के बाद एक पंक्ति: "जैसे 2021 में ऑक्सीजन आवंटन के लिए सर्वोच्च न्यायालय का राष्ट्रीय कार्य-बल: परिणाम (जानें बचाना), कर्तव्य (निष्पक्ष फ़ॉर्मूला) और ईमानदार आँकड़े (सद्गुण)।"
विचारक और उद्धरण
| नाम | विचार | प्रयोग-योग्य पंक्ति |
|---|---|---|
| जे.एस. मिल | सुख की गुणवत्ता भी मायने रखती है | "It is better to be a human being dissatisfied than a pig satisfied." (Utilitarianism; पहले 1861 में धारावाहिक, पुस्तक रूप 1863) |
| इमैनुएल कांट | सार्वभौमिक नियम की कसौटी | "Act only according to that maxim whereby you can at the same time will that it should become a universal law." (Groundwork, मानक अंग्रेज़ी अनुवाद; शब्द अनुवादक के अनुसार बदलते हैं) |
| अरस्तू | सद्गुण अतिरेकों के बीच का मध्य मार्ग | विचार-सार (Nicomachean Ethics): साहस, उदारता जैसे गुण दो अतिरेकों के बीच संतुलन हैं; यहाँ उद्धरण-चिह्न में शब्द नहीं दिए गए |
| गीता 2.47 | कर्म पर अधिकार, फल पर नहीं | "कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।" (तुलना कर्तव्यवाद से प्रायः की जाती है; यह व्याख्या है) |
चित्र: वृक्ष आरेख
नीतिशास्त्र
जड़
मेटा-नीतिशास्त्र (अर्थ और स्वरूप)
तीन शाखाएँ
आदर्शात्मक नीतिशास्त्र (क्या करना चाहिए)
अनुप्रयुक्त नीतिशास्त्र (चिकित्सा, पर्यावरण, व्यवसाय, लोक प्रशासन, AI)
परिणामवाद: बेंथम, मिल
आदर्शात्मक के नीचे तीन उप-शाखाएँ
कर्तव्यवाद: कांट
सद्गुण नीतिशास्त्र: अरस्तू
वर्णनात्मक नीतिशास्त्र (कुछ पुस्तकों में चौथी शाखा)
किनारे पर बिंदीदार डिब्बा
पहले इसी अवधारणा का प्रश्न: शाखाओं को नाम लेकर किसी वर्ष नहीं पूछा गया; पर तीनों आदर्शात्मक दृष्टियों में से हर एक से कम से कम एक प्रश्न 2021 से 2024 के बीच आया है, इसलिए तीनों की एक-एक पंक्ति तैयार रखिए।
आम गलतियाँ
याद रखें
- उपयोगितावाद को "बहुमत हमेशा जीते" बता देना; मिल ने सुख की गुणवत्ता और व्यक्तियों के हितों पर भी ध्यान दिलाया।
- गीता और कांट को "एक ही" बता देना; तुलना प्रायः की जाती है, पर वह व्याख्या है और उत्तर में "की जाती है" लिखना सुरक्षित है।
- शाखाओं की सूची लिखकर प्रशासन से न जोड़ना; हर उत्तर में एक पंक्ति लगाइए कि प्रशासक के निर्णय में तीनों दृष्टियाँ कैसे दिखती हैं।
आत्म-जाँच (5 प्रश्न)
याद रखें
- नीतिशास्त्र की तीन प्रमुख शाखाएँ कौन-सी हैं?
- परिणामवाद और कर्तव्यवाद में मूल अंतर क्या है?
- सद्गुण नीतिशास्त्र किस पर ध्यान देता है और उससे कौन-सा विचारक जुड़ा है?
- वर्णनात्मक नीतिशास्त्र क्या देखता है?
- 2021 में ऑक्सीजन आवंटन का उदाहरण तीन दृष्टियों से कैसे पढ़ा जा सकता है?
काल्पनिक केस
उदाहरण (काल्पनिक)काल्पनिक केस (Hypothetical case)
सूखे के समय ज़िला कलेक्टर नेहा के पास पेयजल के लिए केवल 60 लाख रुपये का कोष है। एक विकल्प कस्बे में बड़ी टंकी और पाइपलाइन है, जिससे लगभग 5,000 लोगों को राहत मिलेगी और प्रभावशाली लोग इसी के पक्ष में हैं। दूसरा विकल्प 12 दूरस्थ ढाणियों में हैंडपंप और टैंकर है, जहाँ लगभग 3,000 लोग हैं, सबसे गरीब, और महिलाएँ रोज़ घंटों पानी ढोती हैं।
- हितधारक
- कस्बे के 5,000 लोग, 12 ढाणियों के लगभग 3,000 लोग (खासकर महिलाएँ और बच्चे), कलेक्टर नेहा, प्रभावशाली स्थानीय नेता, जल-विभाग, ठेकेदार, राज्य सरकार।
- मुद्दा और टकराते मूल्य
- अधिकतम लोगों का हित (परिणाम) बनाम सबसे वंचितों का न्यायपूर्ण दावा (कर्तव्य, निष्पक्षता); साथ में दबाव में भी निष्पक्ष रहने का चरित्र।
- तीन विकल्प
- (क) पूरा कोष कस्बे की टंकी पर। लाभ: अधिक लोगों को लाभ। हानि: सबसे ज़रूरतमंद अनदेखे रहेंगे और निर्णय दबाव का परिणाम लगेगा। (ख) पूरा कोष ढाणियों पर। लाभ: सबसे वंचितों को राहत। हानि: कम लोग लाभान्वित और कस्बे में असंतोष। (ग) पारदर्शी मानदंड से बाँटना: जल-संकट की गंभीरता, आबादी और वंचित वर्ग के अंक तय करके पहले ढाणियों में तत्काल हैंडपंप-टैंकर (कम लागत), फिर बचे धन से कस्बे की टंकी का पहला चरण। लाभ: तीनों दृष्टियों का संतुलन। हानि: कोई पक्ष पूरी तरह संतुष्ट नहीं होगा; समय और समन्वय लगेगा।
- सर्वोत्तम विकल्प और समर्थक मूल्य
- विकल्प (ग)। समर्थक मूल्य: न्याय, निष्पक्षता, पारदर्शिता और जनहित। यहाँ तीनों दृष्टियाँ मिलती हैं: परिणाम (सबसे अधिक राहत प्रति रुपया), कर्तव्य (सबका दावा समान मानदंड से), चरित्र (दबाव में न झुकना)।
सीख
कदम: अल्पकालिक: मानदंड और अंक सार्वजनिक करना, ढाणियों में तुरंत टैंकर और हैंडपंप, ग्राम सभा-पंचायत को सूचित करना। दीर्घकालिक: टंकी का चरणबद्ध निर्माण, जल-संरक्षण के स्थानीय उपाय, भविष्य के आवंटन के लिए लिखित मानदंड-नीति।
अभ्यास प्रश्न
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
नीतिशास्त्र की शाखाओं का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
आदर्श उत्तर
नीतिशास्त्र की तीन प्रमुख शाखाएँ हैं। मेटा-नीतिशास्त्र नैतिक शब्दों और निर्णयों का अर्थ परखता है। आदर्शात्मक नीतिशास्त्र बताता है कि क्या करना चाहिए: परिणामवाद (बेंथम, मिल), कर्तव्यवाद (कांट), सद्गुण नीतिशास्त्र (अरस्तू)। अनुप्रयुक्त नीतिशास्त्र चिकित्सा, पर्यावरण और लोक प्रशासन जैसे क्षेत्रों के ठोस प्रश्न सुलझाता है। प्रशासनिक नैतिकता अनुप्रयुक्त का उदाहरण है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
State the features of Deontology and Consequentialism. Which one of the two approaches is more suitable for an administrator? Why?
आदर्श उत्तर
कर्तव्यवाद (कांट) कर्म को कर्तव्य और नियम से परखता है, परिणाम से नहीं; उसकी विशेषताएँ हैं निष्पक्षता, अधिकारों की रक्षा और सब पर समान नियम। परिणामवाद (बेंथम, मिल) कर्म को उसके परिणाम से परखता है, यानी अधिकतम का अधिकतम हित; उसकी ताकत जनहित है, पर अल्पसंख्यक का हित दब सकता है। गीता का निष्काम कर्म प्रायः कर्तव्यवाद से तुलनीय माना जाता है। प्रशासक के लिए कोई एक अकेला काफ़ी नहीं। ईमानदारी, निष्पक्षता और अधिकार जैसे मूल कर्तव्य अटल रहें, और उनके भीतर नीति और योजना का चुनाव परिणामों से हो। इसलिए कर्तव्य आधार है और परिणाम-दृष्टि उस पर टिका विवेक।
पिछले असली प्रश्न
2023पत्र II, भाग ग, Q1210 अंक
State the features of Deontology and Consequentialism. Which one of the two approaches is more suitable for an administrator? Why? [बिंदु 6/8]
2024इसी विषय के निकट (विस्तार बिंदु 6 के पृष्ठों में)भाग क, Q42 अंक
Explain Virtue as a mean. [बिंदु 6]
2021इसी विषय के निकट (विस्तार बिंदु 6 के पृष्ठों में)भाग ख, Q85 अंक
Explain the Kant's ultimate good on the basis of relative and categorical imperative. [बिंदु 6]
2023इसी विषय के निकट (विस्तार बिंदु 6 के पृष्ठों में)भाग क, Q2
What is Goodwill according to Kant? [बिंदु 6]
यह उत्तर कैसे लिखें
भूमिका
दोनों की एक पंक्ति परिभाषा
मुख्य भाग
- विशेषताएँ, ताकत, कमज़ोरी
निष्कर्ष
कौन-सा अधिक उपयुक्त और क्यों
अतिरिक्त मूल्य
- गीता 2.47 की तुलना, ऑक्सीजन आवंटन 2021
एक पेज में दोहराव
- मेटा (अर्थ/स्वरूप)
- आदर्शात्मक: परिणामवाद (बेंथम, मिल), कर्तव्यवाद (कांट), सद्गुण (अरस्तू)
- अनुप्रयुक्त (क्षेत्र-विशेष: चिकित्सा, पर्यावरण, व्यवसाय, लोक प्रशासन, AI)
- वर्णनात्मक (कुछ में चौथी शाखा)
- गीता 2.47 की तुलना = व्याख्या
- मिल, Utilitarianism 1863
- ऑक्सीजन कार्य-बल, 8 मई 2021, 12 सदस्य
- 2023 Q12 (C)
- केस: कलेक्टर नेहा, 60 लाख का कोष, पारदर्शी मानदंड।