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नीतिशास्त्र: अर्थ, स्वरूप और प्रशासन में आवश्यकता

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RAS मुख्य परीक्षा, पत्र II, इकाई I, बिंदु 1: "Ethics and human values" (नीतिशास्त्र और मानवीय मूल्य)

  • जनवरी 2026 के पाठ्यक्रम के अनुसार अद्यतन
  • पढ़ने का समय: लगभग 8 मिनट
2 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

परीक्षा-भार (2018-2024 के प्रश्नों के आधार पर)

"नीतिशास्त्र का अर्थ" नाम से सीधा प्रश्न इन चार वर्षों में नहीं आया। सबसे निकट 2024 भाग ख का Q9 (शिष्टता और नैतिकता वाला कथन) है। बिंदु 1 के कुल 9 प्रश्न आए हैं। इस पृष्ठ की बातें लगभग हर उत्तर की भूमिका में काम आती हैं।

30 सेकंड का सार

याद रखें

  • नीतिशास्त्र वह अध्ययन है जो तर्क के साथ पूछता है: क्या उचित है और हमें कैसे आचरण करना चाहिए।
  • यह "क्या है" नहीं, "क्या होना चाहिए" बताता है, इसीलिए इसे आदर्शपरक (normative) कहा जाता है।
  • कानून और नियम हर स्थिति को नहीं ढक सकते। जहाँ वे मौन हैं, वहाँ अधिकारी का विवेक चलता है और उसे दिशा नैतिकता से मिलती है।
  • लोक सेवक जनता का न्यासी (trustee) है; उसकी विश्वसनीयता ही शासन की वैधता है।
  • बाहरी निगरानी की सीमा है, इसलिए आंतरिक नैतिक नियंत्रण भ्रष्टाचार और मनमानी के विरुद्ध पहली रक्षा-पंक्ति है।

भाग क के लिए छोटे उत्तर (15 शब्द तक)

याद रखें

  • प्रश्न: नीतिशास्त्र क्या है?
  • उत्तर: नीतिशास्त्र तर्क के आधार पर उचित और अनुचित आचरण का अध्ययन है।
  • जहाँ नियम मौन हों, वहाँ अधिकारी का विवेक नैतिकता से दिशा पाता है।
  • लोक सेवक जनता के संसाधनों का न्यासी है, इसलिए विश्वसनीयता ही उसकी पूँजी है।

1. अर्थ और शब्द-मूल

नीतिशास्त्र (Ethics) दर्शन की वह शाखा है जो "क्या उचित है, क्या अनुचित; हमें कैसे आचरण करना चाहिए" जैसे प्रश्नों पर तर्क के साथ विचार करती है। अंग्रेज़ी शब्द Ethics यूनानी शब्द ethos (चरित्र, स्वभाव, रीति) से बना माना जाता है।

2. स्वरूप

यह मुख्यतः तथ्य बताने वाला नहीं, औचित्य तय करने वाला अध्ययन है: क्या "है" नहीं, क्या "होना चाहिए"। इसका संबंध उन कर्मों से है जो व्यक्ति अपनी इच्छा और विवेक से चुनता है। इसीलिए इसे आदर्शपरक (normative) विज्ञान भी कहा जाता है।

3. क्षेत्र

व्यक्तिगत जीवन, पेशेवर जीवन और सार्वजनिक/सामाजिक जीवन।

4. दो प्रचलित अर्थ

दर्शन के रूप में: नैतिकता का सैद्धांतिक अध्ययन।

व्यवहार में: "नीति-संहिता" (code of ethics) जैसे प्रयोग में किसी पेशे या संस्था के लिए तय आचरण-मानक।

लोक सेवा में दोनों अर्थ काम आते हैं: एक सोचने की दिशा देता है, दूसरा रोज़ के आचरण की कसौटी।

5. प्रशासन में नीतिशास्त्र क्यों आवश्यक है (पाँच कारण)

1. कानून और नियम हर परिस्थिति को नहीं ढक सकते। जहाँ नियम मौन हैं, वहाँ अधिकारी का विवेक काम करता है और विवेक को दिशा नैतिकता देती है।

2. लोक सेवक जनता के संसाधनों और अधिकारों का न्यासी है; उसकी विश्वसनीयता ही शासन की वैधता है।

3. बाहरी निगरानी सीमित होती है; आंतरिक नैतिक नियंत्रण भ्रष्टाचार और मनमानी के विरुद्ध पहली रक्षा-पंक्ति है।

4. निर्णयों में न्याय, निष्पक्षता और करुणा का संतुलन नैतिक दृष्टि से ही संभव है।

5. नैतिक आचरण से जनता का विश्वास बनता है, और विश्वास सुशासन तथा नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन की शर्त है।

6. नियम और विवेक का संतुलन

नियम "क्या अनुमत है" बताते हैं; नीतिशास्त्र "क्या उचित है" बताता है। जनसुनवाई, लाभार्थी चयन और संसाधन आवंटन जैसे निर्णयों में यह अंतर साफ़ दिखता है। इसलिए अच्छा अधिकारी नियम का पालन भी करता है और जहाँ नियम चुप हैं वहाँ विवेक का प्रयोग भी।

7. नैतिकता प्रणाली से भी मज़बूत होती है

द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग की चौथी रिपोर्ट (जनवरी 2007, "Ethics in Governance") ने केवल उपदेश पर भरोसा नहीं किया: विवेकाधिकार घटाने, ई-गवर्नेंस, प्रक्रियाएँ सरल करने और लोकपाल/लोकायुक्त जैसी संस्थाओं की सिफ़ारिश की। निष्कर्ष: व्यक्ति का चरित्र और व्यवस्था की बनावट, दोनों साथ चाहिए।

उत्तर में कैसे लगाएँ

"नियम मौन या संकीर्ण हों तो नैतिक माँग व्यवस्था को आगे बढ़ाती है" वाक्य के बाद एक पंक्ति: "जैसे राजस्थान में MKSS की जन-सुनवाइयों (1994) से 2000 के राज्य अधिनियम तक की यात्रा।" यही उदाहरण पृष्ठ 2.1 में भी आया है।

विचारक और उद्धरण

नामविचारप्रयोग-योग्य पंक्ति
राल्फ़ वाल्डो एमर्सनशिष्टता नैतिकता पर टिकी है"There can be no high civility without a deep morality, though it may not always call itself by that name." (निबंध "Civilization", Emerson Central के पाठ से; परचे में "always" नहीं है)
नोलन समिति (मई 1995)लोक-जीवन के सात सिद्धांतSelflessness, Integrity, Objectivity, Accountability, Openness, Honesty, Leadership (निःस्वार्थता, सत्यनिष्ठा, वस्तुनिष्ठता, जवाबदेही, खुलापन, ईमानदारी, नेतृत्व)
द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग (जनवरी 2007)चौथी रिपोर्ट "Ethics in Governance"नैतिकता को उपदेश से आगे ले जाकर प्रणाली-सुधार से मज़बूत करने की सिफ़ारिश

चित्र: वेन आरेख

कानून: क्या अनुमत है

बायाँ वृत्त

नैतिकता: क्या उचित है

दायाँ वृत्त

दोनों का मेल: अधिकांश दैनिक निर्णय

साझा भाग

कानूनी पर संदिग्ध

बायाँ अलग भाग: ; दायाँ अलग भाग

नैतिक पर कानून में मौन

लोक सेवक का विवेक

बीच में ऊपर तीर: (दोनों वृत्तों के बीच का सेतु)

पहले इसी अवधारणा का प्रश्न: नीतिशास्त्र का अर्थ या आवश्यकता सीधे पूछने वाला प्रश्न 2018, 2021, 2023, 2024 में नहीं मिला। "कथन + चर्चा/मूल्यांकन करें" रूप के मूल्य-संबंधी प्रश्न 2021 (Q6, Q7) और 2024 (Q9) में आए हैं; इसलिए परिभाषा के साथ अपना तर्क देने की आदत डालिए।

आम गलतियाँ

याद रखें

  • नीतिशास्त्र को धर्म या उपदेश बता देना; यह तर्क पर टिका अध्ययन है, केवल आस्था या आदेश नहीं।
  • "नियम का पालन ही नैतिकता है" लिख देना; नियम मौन या अपर्याप्त हो सकते हैं और तब विवेक चाहिए।
  • MKSS का उदाहरण बिना वर्ष के देना या वर्ष मिला देना (जन सुनवाई 1994, धरना 1996, राज्य अधिनियम 2000, केंद्रीय अधिनियम 2005)।

आत्म-जाँच (5 प्रश्न)

याद रखें

  • Ethics शब्द किस यूनानी शब्द से बना माना जाता है और उसका अर्थ क्या है?
  • नीतिशास्त्र को आदर्शपरक क्यों कहते हैं?
  • प्रशासन में नीतिशास्त्र की आवश्यकता के कोई तीन कारण बताइए।
  • नोलन के सात सिद्धांतों में से चार लिखिए।
  • MKSS की पहली जन सुनवाई (1994) से राज्य अधिनियम (2000) तक की कड़ी एक वाक्य में लिखिए।