मीडिया और नीतिशास्त्र (उदार समाज)
RAS मुख्य परीक्षा, पत्र II, इकाई I, बिंदु 3: "liberal society: transparency, media and bureaucracy" (उदार समाज: पारदर्शिता, मीडिया और नौकरशाही); इस पृष्ठ में मीडिया
- जनवरी 2026 के पाठ्यक्रम के अनुसार अद्यतन
- पढ़ने का समय: लगभग 11 मिनट
परीक्षा-भार (2018-2024 के प्रश्नों के आधार पर)
"मीडिया" नाम से 0 प्रश्न। पाठ्यक्रम की यह नई पंक्ति है, इसलिए हमारा अनुमान है कि भाग ख या भाग ग में आ सकती है (RPSC की सूचना नहीं)। संबंधित कानूनी भाग पत्र III (RTI, IT अधिनियम) में भी आता है।
30 सेकंड का सार
याद रखें
- उदार समाज में स्वतंत्र मीडिया जनता की आँख और सत्ता का पहरेदार है; भ्रष्टाचार उजागर करना, नीति पर बहस कराना और जनता को सूचित करना उसका काम है।
- स्वतंत्रता के साथ नैतिक मर्यादा चाहिए: सत्य, सटीकता, निष्पक्षता, जवाब देने का मौका और निजता का सम्मान।
- संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 19(1)(क) की स्वतंत्रता और 19(2) की उचित सीमाएँ।
- प्रशासक को मीडिया से खुलापन, सटीक जानकारी और विनम्र उत्तर रखना है; पर दबाव, रोक या अफ़वाह से नहीं चलना।
- राजस्थान में 2017 का अध्यादेश और विधेयक (मीडिया, नौकरशाही और जवाबदेही का टकराव) इसका ज्वलंत उदाहरण है।
भाग क के लिए छोटे उत्तर (15 शब्द तक)
याद रखें
- प्रश्न: उदार समाज में मीडिया की मुख्य भूमिका क्या है?
- उत्तर: मीडिया जनता को सूचित करता, बहस कराता और सत्ता को जवाबदेह बनाता है।
- मीडिया-नैतिकता यानी सत्य, सटीकता, निष्पक्षता, जवाब का अवसर और निजता का सम्मान।
- "मीडिया ट्रायल" का अर्थ है अदालत से पहले मीडिया द्वारा आरोपी को दोषी ठहराना।
1. उदार समाज और मीडिया
उदार समाज में व्यक्ति की स्वतंत्रता, कानून का शासन और सीमित, उत्तरदायी सत्ता मूल सिद्धांत हैं। स्वतंत्र मीडिया इन्हें जीवित रखता है: जनता को सूचना देकर, सत्ता की आलोचना सुनाकर और विचारों का खुला मंच बनाकर।
जे.एस. मिल (On Liberty, 1859): विचारों को दबाना सत्य को दबाने का जोखिम है। उनकी प्रसिद्ध पंक्ति: "If all mankind minus one, were of one opinion... mankind would be no more justified in silencing that one person, than he, if he had the power, would be justified in silencing mankind." (स्रोत: विकिपीडिया, On Liberty)
2. मीडिया की चार भूमिकाएँ
(क) सूचना देना; (ख) निगरानी करना (खोजी पत्रकारिता); (ग) सार्वजनिक बहस का मंच; (घ) नागरिक और राज्य के बीच सेतु। 2nd ARC (चौथी रिपोर्ट, जनवरी 2007, अनुच्छेद 5.3.1): स्वतंत्र मीडिया भ्रष्टाचार की रोकथाम, निगरानी और नियंत्रण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
3. मीडिया की नैतिक चुनौतियाँ
(हमारी सूची, विचार-बिंदु के रूप में)
बिना जाँचे आरोप छापना; प्रतिस्पर्धा की जल्दबाज़ी (2nd ARC, 5.3.3: प्रतिस्पर्धा के दबाव में मीडिया कई बार आरोप की पुष्टि किए बिना उन्हें जनता तक पहुँचा देता है; कभी-कभी आरोप प्रेरित भी होते हैं)।
मीडिया ट्रायल, निजता का हनन, सनसनी।
पैसा लेकर खबर या एकतरफ़ा कवरेज; स्वामित्व और विज्ञापन का दबाव।
भ्रामक सूचना और सोशल मीडिया पर फैलती अफ़वाह।
गांधी का विचार (भावानुवाद): "पत्रकारिता का एकमात्र उद्देश्य सेवा होना चाहिए... अनियंत्रित कलम केवल नष्ट करती है; बाहर से नियंत्रण और भी विषैला है, नियंत्रण भीतर से ही लाभकारी है।" (गांधी, आत्मकथा; अंग्रेज़ी पाठ नीचे बॉक्स में)
4. कानूनी और संस्थागत ढाँचा
अनुच्छेद 19(1)(क) और 19(2): वाक्-स्वातंत्र्य और उसकी उचित सीमाएँ। रोमेश थापर बनाम मद्रास राज्य (26 मई 1950): मद्रास सार्वजनिक व्यवस्था अनुरक्षण अधिनियम, 1949 के तहत "क्रॉस रोड्स" पत्रिका के प्रसार पर रोक अवैध ठहरी; न्यायालय ने प्रचार-प्रसार (circulation) की स्वतंत्रता को प्रकाशन की स्वतंत्रता का अनिवार्य अंग माना। इसके बाद 1951 के पहले संविधान संशोधन से "सार्वजनिक व्यवस्था" को सीमाओं में जोड़ा गया। स्रोत: निर्णय का सार (AIR 1950 SC 124)।
श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ (24 मार्च 2015): सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66A को अस्पष्ट और अति-व्यापक कहकर, वाक्-स्वातंत्र्य पर "चिलिंग इफ़ेक्ट" के कारण रद्द किया गया; धारा 69A की अवरोध-प्रक्रिया बनी रही। स्रोत: विकिपीडिया।
भारतीय प्रेस परिषद: पहली बार 1966 में गठित (भारतीय प्रेस परिषद अधिनियम, 1965 के तहत), आपातकाल में भंग; प्रेस परिषद अधिनियम, 1978 से 1979 में पुनर्गठित। उद्देश्य: प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा और अखबारों-समाचार एजेंसियों के मानक सुधारना; "Norms of Journalistic Conduct" जारी किए। वह चेतावनी, फटकार, निंदा या अस्वीकृति दे सकती है, दंड नहीं। स्रोत: विकिपीडिया।
2nd ARC (2007) की टिप्पणी: प्रेस परिषद ने मुद्रित मीडिया के लिए आचरण-संहिता बनाई है, पर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए ऐसी संहिता नहीं थी (अनुच्छेद 5.3.4, 2007 की स्थिति; आज की स्थिति अलग हो सकती है, इसलिए इसे "2007 में" लिखें)।
5. अधिकारी और मीडिया
आचरण नियम 8 (प्रेस या अन्य मीडिया से संबंध): सरकार की पूर्व स्वीकृति के बिना कोई सरकारी सेवक किसी अखबार, पत्रिका या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का स्वामी या संपादन-प्रबंधन से जुड़ा नहीं होगा; सार्वजनिक मीडिया में भाग लेते समय स्पष्ट करना होगा कि विचार उसके अपने हैं, सरकार के नहीं। (सरकारी कर्तव्य के सद्भाव निर्वहन में पुस्तक प्रकाशित करने या सार्वजनिक मीडिया में भाग लेने पर यह रोक नहीं लगती।) राजस्थान आचरण नियम, 1971 में समान प्रावधान नियम 10 (प्रेस या रेडियो से संबंध) और नियम 11 (सरकार की आलोचना) हैं (शीर्षक राजस्थान सरकार की आधिकारिक PDF के अनुसार)।
नियम 9 (सरकार की आलोचना): रेडियो, टेलीविज़न, प्रकाशन या प्रेस को संवाद में सरकार की वर्तमान या हाल की नीति या कार्रवाई की प्रतिकूल आलोचना करने वाला कथन मना है; अपने सरकारी पद में, कर्तव्य-निर्वहन के दौरान दिए कथन पर यह रोक लागू नहीं।
अधिकारी का सकारात्मक कर्तव्य: सटीक, समय पर जानकारी देना; सूचना माँगने वालों से विनम्रता; आरोपों पर तथ्य-आधारित उत्तर। 2nd ARC (5.3.2) ने कहा कि मीडिया में आई भ्रष्टाचार की रिपोर्टों पर अधिकारियों को तत्काल उत्तर देना चाहिए, तथ्य परखने चाहिए और प्रेस और जनता को कार्रवाई की जानकारी देनी चाहिए; और (5.3.3) आरोपित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिलना चाहिए।
6. संतुलन
मीडिया की स्वतंत्रता और व्यक्ति की गरिमा, जनहित बनाम निजता, सूचना का अधिकार बनाम जाँच की गोपनीयता। कसौटी: क्या सार्वजनिक हित है? क्या तथ्य परखे गए? क्या दूसरा पक्ष सुना गया?
वास्तविक उदाहरण
रोमेश थापर (26 मई 1950)
और श्रेया सिंघल (24 मार्च 2015): पहला प्रेस-प्रसार, दूसरा ऑनलाइन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का आधार।
सेवा-नियम 8 और 9.
अधिकारी की मीडिया-भागीदारी की मर्यादा का सीधा उदाहरण।
उत्तर में कैसे लगाएँ
उदार समाज में भूमिका (मिल या ARC 5.3.1) → नैतिक चुनौतियाँ (ARC 5.3.3, गांधी) → कानूनी आधार (अनुच्छेद 19, रोमेश थापर, प्रेस परिषद) → राजस्थान 2017 का उदाहरण → संतुलित निष्कर्ष।
विचारक और उद्धरण
| नाम | विचार | प्रयोग-योग्य पंक्ति |
|---|---|---|
| महात्मा गांधी | पत्रकारिता का उद्देश्य सेवा | "...the sole aim of journalism should be service... an uncontrolled pen serves but to destroy." (An Autobiography; पृष्ठ-संख्या संस्करण के अनुसार बदलती है) |
| जे.एस. मिल (1859) | विचारों को दबाना उचित नहीं | "If all mankind minus one, were of one opinion... mankind would be no more justified in silencing that one person..." (On Liberty, अध्याय 2) |
| लुई ब्रैंडाइस (1913) | प्रचार से सफ़ाई | "Sunlight is said to be the best of disinfectants." |
चित्र: 2x2 और संतुलन
मीडिया की स्वतंत्रता (कम / अधिक)
दो अक्ष: क्षैतिज ; ऊर्ध्वाधर
मीडिया की ज़िम्मेदारी (कम / अधिक)
कम स्वतंत्रता, अधिक ज़िम्मेदारी: डरी हुई सेवा
चार खाने: / / /
अधिक स्वतंत्रता, कम ज़िम्मेदारी: अफ़वाह और मीडिया ट्रायल
कम, कम: दमन
अधिक, अधिक: उदार समाज की लक्ष्य-स्थिति
जनहित? तथ्य परखे? दूसरा पक्ष सुना?
बीच में तीन परीक्षण
2018, 2021, 2023, 2024 के पत्र II में "मीडिया" नाम से कोई प्रश्न नहीं मिला। यह गिनती 2018, 2021, 2023, 2024 के सभी 52 इकाई-I प्रश्नों पर आधारित है; यह RPSC की सूचना नहीं।
निकट संबंधी: पृष्ठ 3.3, 3.4 के 2018 और 2024 वाले प्रश्न सत्ता और प्रशासन के संबंध पर हैं; मीडिया उसी संबंध का तीसरा कोण है।
तैयारी-सलाह: भाग ख में "मीडिया की जाँच: सहायक या हानिकर", भाग ग में "उदार समाज में मीडिया और नौकरशाही"। यह हमारा अनुमान है।
आम गलतियाँ
याद रखें
- मीडिया को केवल "अच्छा पहरेदार" या केवल "सनसनी का कारखाना" लिखना; दोनों पक्ष दें।
- अनुच्छेद 19(1)(क) लिखकर 19(2) की सीमाएँ छोड़ देना।
- 2007 की ARC टिप्पणी (इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए संहिता नहीं) को आज की स्थिति बताना।
आत्म-जाँच (5 प्रश्न)
याद रखें
- उदार समाज में मीडिया की दो भूमिकाएँ बताइए।
- रोमेश थापर (1950) में क्या ठहराया गया?
- प्रेस परिषद क्या कर सकती है और क्या नहीं?
- आचरण नियम 8 और 9 क्या कहते हैं?
- राजस्थान 2017 के विधेयक की मुख्य बात और उसका नतीजा क्या था?
केस स्टडीराजस्थान, 2017-2018
6 सितंबर 2017 को राज्यपाल ने आपराधिक विधि (राजस्थान संशोधन) अध्यादेश, 2017 जारी किया; उसी पर आधारित विधेयक अक्तूबर 2017 में सदन में रखा गया। इसके अनुसार वर्तमान और पूर्व न्यायाधीशों, मजिस्ट्रेटों और लोक सेवकों पर सरकार की अनुमति के बिना अदालत में कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकती थी, और अनुमति मिलने तक मीडिया उनका नाम नहीं छाप सकता था। विरोध के बाद विधेयक प्रवर समिति को भेजा गया और 19 फ़रवरी 2018 को मुख्यमंत्री ने इसे वापस लेने की घोषणा की (अध्यादेश 4 दिसंबर 2017 को स्वतः समाप्त हो चुका था)।
सीख
जवाबदेही बनाम नौकरशाही-संरक्षण, और मीडिया की स्वतंत्रता।
काल्पनिक केस
उदाहरण (काल्पनिक)काल्पनिक केस (Hypothetical case)
ज़िला कलेक्टर नंदिनी के ज़िले में एक स्थानीय समाचार पोर्टल वीडियो के साथ खबर छापता है कि एक राशन-दुकान में अनाज कम तौला जा रहा है और विभाग ने शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया। खबर का एक हिस्सा सही है, पर आँकड़े बढ़ा-चढ़ाकर लिखे गए हैं। मीडिया-प्रकोष्ठ सलाह देता है, "पोर्टल को ब्लॉक कराइए और मुकदमा दर्ज कीजिए।" वीडियो सोशल मीडिया पर फैल रहा है।
- हितधारक
- नंदिनी, पोर्टल का पत्रकार, राशन-दुकानदार, उपभोक्ता, विभाग और ज़िला आपूर्ति अधिकारी, जनता, राज्य सरकार।
- मुद्दा और टकराते मूल्य
- प्रेस की स्वतंत्रता, पारदर्शिता और जवाबदेही बनाम विभाग की छवि; निष्पक्षता और तथ्य बनाम अर्ध-सत्य का नुकसान।
- तीन विकल्प
- (क) पोर्टल को ब्लॉक कराना और मुकदमा करना। लाभ: तुरंत "नियंत्रण"। हानि: प्रेस की स्वतंत्रता पर आघात, सही हिस्से को दबाने का आरोप, मामला और बढ़ेगा। (ख) चुप रहना। लाभ: टकराव नहीं। हानि: अफ़वाह फैलेगी, उपभोक्ताओं का नुकसान, विभाग पर अविश्वास। (ग) तत्काल जाँच कराकर सही हिस्से को स्वीकार करना और कार्रवाई की घोषणा करना; गलत आँकड़ों पर दस्तावेज़ों सहित तथ्य-आधारित स्पष्टीकरण भेजना और प्रकाशित करने का अनुरोध करना; दुर्भावना सिद्ध हो तभी प्रेस परिषद या कानूनी रास्ता। लाभ: सत्य, पारदर्शिता और प्रेस की स्वतंत्रता तीनों सुरक्षित। हानि: जाँच में समय और आलोचना सहना।
- सर्वोत्तम विकल्प और समर्थक मूल्य
- विकल्प (ग)। मूल्य: पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रेस की स्वतंत्रता का सम्मान; ARC (5.3.2, 5.3.3) का मार्गदर्शन: रिपोर्ट पर तुरंत कार्रवाई, तथ्य परखना और सभी को अपना पक्ष रखने का अवसर।
सीख
कदम: अल्पकालिक: 24 घंटे में जाँच, तथ्य-पत्र जारी, राशन-दुकान पर कार्रवाई, उपभोक्ताओं के लिए शिकायत-हेल्पलाइन। दीर्घकालिक: राशन-दुकानों की सूची और स्टॉक का स्वतः प्रकटीकरण, सामाजिक अंकेक्षण, विभाग में मीडिया-संवाद का स्पष्ट प्रोटोकॉल।
अभ्यास प्रश्न
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
क्या मीडिया की जाँच प्रशासन के लिए सहायक है या हानिकर? दो बिंदुओं में उत्तर दीजिए।
आदर्श उत्तर
सहायक: खोजी रिपोर्टें भ्रष्टाचार उजागर करती हैं और जवाबदेही बढ़ाती हैं, जैसा 2nd ARC ने माना। हानिकर: बिना जाँचे आरोप, मीडिया ट्रायल और सनसनी अधिकारियों की प्रतिष्ठा और निर्णय बिगाड़ सकते हैं। समाधान: प्रेस की स्वतंत्रता बनी रहे, पर सत्यापन, उत्तर का अवसर और आचार-संहिता भी लागू हो।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
उदार समाज में मीडिया की भूमिका की सीमाओं सहित समीक्षा कीजिए और बताइए कि नौकरशाही मीडिया से कैसा संबंध रखे।
आदर्श उत्तर
उदार समाज में मीडिया जनता को सूचित करता और सत्ता को जवाबदेह बनाता है; अनुच्छेद 19(1)(क) इसका आधार है और रोमेश थापर (1950) ने प्रसार की स्वतंत्रता मानी। पर बिना जाँचे आरोप, मीडिया ट्रायल और भ्रामक सूचना इसकी चुनौतियाँ हैं, इसलिए प्रेस परिषद की आचार-संहिता है। नौकरशाही को सटीक सूचना, समय पर उत्तर और खुलापन रखना चाहिए, पर प्रेस दबाने का रास्ता नहीं लेना चाहिए; राजस्थान का 2017 का विधेयक, जिसे 2018 में वापस लिया गया, इसकी चेतावनी है। संतुलन: स्वतंत्रता, सत्यापन और जवाब का अवसर। न दमन जनहित में है, न सनसनी; दोनों जनहित की कसौटी पर विफल हैं।
यह उत्तर कैसे लिखें
भूमिका
उदार समाज में मीडिया
मुख्य भाग
- भूमिका, चुनौतियाँ, कानूनी आधार, नौकरशाही का व्यवहार
निष्कर्ष
स्वतंत्रता + ज़िम्मेदारी
अतिरिक्त मूल्य
- मिल, गांधी, ब्रैंडाइस
एक पेज में दोहराव
- उदार समाज: स्वतंत्रता + कानून का शासन + उत्तरदायी सत्ता
- मीडिया की चार भूमिकाएँ (सूचना, निगरानी, बहस, सेतु)
- ARC 5.3.1 (भ्रष्टाचार-निरोध में भूमिका), 5.3.2 (त्वरित कार्रवाई), 5.3.3 (सत्यापन, पक्ष का अवसर)
- अनुच्छेद 19(1)(क), 19(2)
- रोमेश थापर 26.5.1950
- श्रेया सिंघल 24.3.2015 (66A रद्द)
- प्रेस परिषद 1966, अधिनियम 1978, पुनर्गठन 1979
- आचरण नियम 8, 9
- मिल 1859
- गांधी, आत्मकथा (सेवा)
- राजस्थान: अध्यादेश 6.9.2017, विधेयक अक्तूबर 2017, वापसी 19.2.2018
- काल्पनिक केस: कलेक्टर नंदिनी, जाँच + तथ्य-पत्र + पक्ष का अवसर।