मुख्य सामग्री पर जाएं
पृष्ठ 7.1

नैतिक दुविधा और नैतिक द्वंद्व (Ethical and Moral Dilemma)

Read this in English →

RAS मुख्य परीक्षा, पत्र II, इकाई I, बिंदु 7: "Ethical concerns, dilemmas and challenges in administration" (प्रशासन में नैतिक चिंताएँ, दुविधाएँ और चुनौतियाँ)

  • जनवरी 2026 के पाठ्यक्रम के अनुसार अद्यतन
  • पढ़ने का समय: लगभग 15 मिनट
2 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

परीक्षा-भार (2018-2024 के प्रश्नों के आधार पर)

बिंदु 7 के सीधे 2 प्रश्न (12 अंक): 2021 भाग क Q3 (2 अंक) और 2023 भाग ग Q13 (10 अंक)। दो और प्रश्न "दुविधा" से जुड़े हैं पर दूसरे बिंदु के नीचे गिने गए: 2018 भाग ग Q11 (गीता और अर्जुन की दुविधा, पृष्ठ 4.5) और 2021 भाग ग Q12 (नैतिक निर्णय बनाम प्रशासनिक निर्णय)। यानी 2018, 2021, 2023 में दुविधा किसी न किसी रूप में आई; 2024 में नहीं।

30 सेकंड का सार

याद रखें

  • दुविधा वह स्थिति है जिसमें हर विकल्प की कोई कीमत है। नैतिक दुविधा में दो सही कर्तव्य या मूल्य टकराते हैं और एक को निभाने में दूसरा छूटता है।
  • कठिन चुनाव और दुविधा एक नहीं हैं। लालच के सामने सही-गलत साफ़ दिखता है; दुविधा में "सही बनाम सही" होता है।
  • चार आम प्रकार (किडर): सच बनाम निष्ठा, व्यक्ति बनाम समुदाय, तात्कालिक बनाम दीर्घकालिक, न्याय बनाम दया। प्रशासन में इनमें "नियम बनाम करुणा" जुड़ जाता है।
  • हल के लिए तीन चश्मे: परिणाम, नियम-कर्तव्य और देखभाल (सबके साथ वह करो जो अपने साथ चाहो)। साथ में छह कदम: तथ्य, हितधारक, टकराते मूल्य, विकल्प, परीक्षा, निर्णय और लिखित कारण।
  • अच्छा उत्तर "अंतरात्मा की सुनो" पर नहीं रुकता। वह कानून, कारण, अभिलेख और बाद की समीक्षा तक जाता है।

भाग क के लिए छोटे उत्तर (15 शब्द तक)

याद रखें

  • प्रश्न (असली PYQ, 2021, भाग क Q3): What do you understand by ethical dilemma?
  • उत्तर: दो वैध मूल्यों के बीच ऐसा चुनाव जहाँ एक निभाने पर दूसरा छूट जाता है।
  • नैतिक द्वंद्व में दो नैतिक माँगें टकराती हैं और व्यक्ति दोनों पूरी नहीं कर सकता।
  • समाधान: तथ्य, हितधारक, मूल्य, विकल्प, तीन चश्मों से परीक्षा, फिर लिखित कारण सहित निर्णय।

1. अर्थ और शब्द

दुविधा (dilemma): ऐसा चुनाव जिसमें हर विकल्प के साथ कुछ खोना पड़ता है।

नैतिक द्वंद्व (moral dilemma), सख्त अर्थ में: स्टैनफ़ोर्ड एनसाइक्लोपीडिया ऑफ़ फ़िलॉसफ़ी (मैककोनेल) के अनुसार: व्यक्ति से दो (या अधिक) कर्म करने की अपेक्षा है; वह हर एक कर सकता है; पर दोनों साथ नहीं कर सकता। असली (genuine) द्वंद्व में कोई भी माँग दूसरी से कमज़ोर सिद्ध नहीं होती।

नैतिक दुविधा (ethical dilemma): आम तौर पर पेशे या पद की भूमिका में दो मूल्यों, नियमों या कर्तव्यों का टकराव। कई पुस्तकें दोनों शब्द एक ही अर्थ में बरतती हैं। परीक्षा के लिए हमारी कामचलाऊ भेद-रेखा (RPSC की नहीं): "द्वंद्व" अंतरात्मा के स्तर का है; "दुविधा" भूमिका और संहिता के स्तर की। उत्तर में पहले कह दें कि आप किस अर्थ में लिख रहे हैं।

पछतावे का अवशेष (moral residue): सही निर्णय के बाद भी जो कसक रहती है। यह संकेत है कि दोनों पक्षों में सचमुच कुछ मूल्यवान था।

दुविधा नहीं क्या है: (क) प्रलोभन, जहाँ सही रास्ता साफ़ है पर कठिन; (ख) साधारण लागत-लाभ, जहाँ कोई मूल्य दाँव पर नहीं; (ग) अज्ञान, जहाँ तथ्य जुटाने से हल निकल आता है।

2. प्रकार

(क) संरचना के आधार पर (SEP):

भेदआशय
ज्ञानमूलक (epistemic) बनाम तात्त्विक (ontological)पहले में हमें पता नहीं कि कौन-सी माँग भारी है; दूसरे में सचमुच कोई माँग दूसरी को नहीं दबाती (असली दुविधा)
स्वयं-जनित बनाम परिस्थिति-जनितपहले में अपनी ही गलती से फँसे (जैसे दो टकराते वादे); दूसरे में बिना दोष के
कर्तव्य-दुविधा बनाम निषेध-दुविधापहले में दो काम करने हैं पर साथ नहीं हो सकते; दूसरे में हर संभव रास्ता निषिद्ध है

(ख) किडर के चार नमूने (How Good People Make Tough Choices):

नमूनाप्रशासनिक उदाहरण
सच बनाम निष्ठावरिष्ठ की चूक पर सच बोलें या साथ दें
व्यक्ति बनाम समुदायएक परिवार की ज़रूरत बनाम पूरे गाँव की योजना
तात्कालिक बनाम दीर्घकालिकआज का राहत-वितरण बनाम कल की वित्तीय अनुशासन
न्याय बनाम दयानियम की कठोरता बनाम किसी गरीब की मजबूरी

(ग) प्रशासन में आम रूप (हमारी सूची, याद रखने के लिए): नियम बनाम करुणा · वरिष्ठ का आदेश बनाम जनहित · गोपनीयता बनाम पारदर्शिता · राजनीतिक निर्देश बनाम तटस्थता · निजी बनाम पेशेवर नैतिकता (पृष्ठ 7.5) · AI की सिफ़ारिश बनाम अंतरात्मा (पृष्ठ 7.6) · नैतिक निर्णय बनाम प्रशासनिक निर्णय (2021 भाग ग Q12)।

3. प्रशासन में दुविधाएँ क्यों उठती हैं

संविधान के मूल्य अनेक हैं (स्वतंत्रता, समानता, न्याय) और कभी-कभी आपस में खिंचते हैं; संसाधन कम हैं; विवेकाधिकार है; आदेश श्रेणी-क्रम से आते हैं; और नियम हर स्थिति का पूर्वानुमान नहीं कर पाते।

4. हल की रूपरेखा

तीन चश्मे (किडर):

परिणाम-आधारित (ends-based): किस विकल्प से कुल मिलाकर सबसे अधिक भला और सबसे कम हानि होगी? (उपयोगितावाद, पृष्ठ 6.4)

नियम-आधारित (rule-based): कौन-सा विकल्प उस सिद्धांत पर चलता है जिसे मैं सब पर लागू करना चाहूँगा? (कांट, पृष्ठ 6.3; कर्तव्यवाद)

देखभाल-आधारित (care-based): यदि मैं उनकी जगह होता तो मुझे क्या चाहिए होता? (सुनहरा नियम)

छह कदम (हमारी विधि, RAS केस-विधि कार्ड से मेल खाती):

1. तथ्य: क्या सचमुच दुविधा है, या सूचना की कमी है? पहले तथ्य पक्के करें।

2. हितधारक: कौन प्रभावित होगा? सबसे कमज़ोर कौन है?

3. टकराते मूल्य और नियम: कौन-से दो (या अधिक) मूल्य, कानून या आचरण-नियम खिंच रहे हैं?

4. विकल्प: कम से कम तीन, जिनमें एक "तीसरा रास्ता" हो जो दोनों मूल्यों को आंशिक रूप से बचाए।

5. परीक्षा: हर विकल्प को तीनों चश्मों से, और चार सवालों से जाँचें: क्या यह कानूनसम्मत है? क्या मैं इसे नागरिक या अखबार के सामने समझा सकता हूँ? क्या यह अनुपात में है? क्या इसे पलटा जा सकता है?

6. निर्णय, अभिलेख, समीक्षा: निर्णय लें, कारण लिखें, लागू करें, और बाद में देखें कि क्या सीखा।

व्यवहार के नियम: कानून पहले आता है (आदेश अवैध हो तो मौखिक आदेश लिखित में पुष्ट कराएँ: CCS आचरण नियम 3(2)(iv); गंभीर अवैधता पर ऊपर लिखित में सूचित करें)। भावना के नाम पर कानून न तोड़ें, नियम के नाम पर मानवीयता न छोड़ें। वेबर (1919) की भाषा में: आस्था की नैतिकता और उत्तरदायित्व की नैतिकता, दोनों साथ चाहिए (पृष्ठ 6.6)। डी. के. बसु (18 दिसंबर 1996) में सर्वोच्च न्यायालय ने जानकारी निकलवाने के नाम पर भी यातना को अस्वीकार किया: यह नियम-आधारित चश्मे का न्यायिक उदाहरण है (पृष्ठ 6.6)।

5. गीता और दुविधा (2018 भाग ग Q11 का संकेत)

अर्जुन अपने को "धर्म के विषय में मोहित चित्त वाला" कहता है (2.7) और पूछता है कि निश्चित कल्याणकारी मार्ग क्या है। कृष्ण आदेश नहीं थोपते; बुद्धि-योग समझाते हैं और अंत में कहते हैं: "पूरी तरह विचार करके फिर जैसा चाहो वैसा करो" (18.63)। प्रशासक के लिए सीख: दुविधा में पहले मोह और आसक्ति हटाएँ, कर्तव्य का स्पष्ट बोध करें, फल की चिंता कम और लोकहित का ध्यान अधिक रखें। पूरा उत्तर-सूत्र पृष्ठ 4.5 पर है। ध्यान रहे, 18.66 में समर्पण भी सिखाया गया है, इसलिए यह न लिखें कि गीता असीमित निजी चुनाव का समर्थन करती है (व्याख्या)।

6. नैतिक तनाव का छोटा बॉक्स (2018 भाग ख Q8 के लिए)

2018 के भाग ख Q8 ("What are the main causes of mental stress in an administrator according to you? Explain.", 5 अंक) का मुख्य स्थान व्यवहार इकाई है: पत्र III इकाई III, "Burnout, stress and coping at workplace" (पाठ्यक्रम पंक्ति के अनुसार)। फिर भी नैतिकता वाला हिस्सा यहाँ उपयोगी है:

नैतिक पीड़ा (moral distress): एंड्रयू जेमटन (1984, Nursing Practice: The Ethical Issues) के अनुसार "सही क्या है यह जानते हुए ऐसी स्थिति में होना जिसमें उसे करना लगभग असंभव हो"।

प्रशासक के तनाव के नैतिक स्रोत (हमारी सूची): दुविधाएँ और टकराते आदेश; राजनीतिक या वरिष्ठ का दबाव; तबादले और प्रतिशोध का डर; संसाधनों की कमी के बीच जनता की अपेक्षा; लंबे घंटे और निर्णय का अकेलापन।

निपटने के उपाय: निर्णय के कारण लिखकर रखना (अभिलेख से मन हल्का और स्थिति सुरक्षित), विश्वस्त सहकर्मी या मार्गदर्शक से चर्चा, लिखित आदेश की माँग, कार्य-सीमा तय करना, और व्यवस्था-स्तर पर प्रशिक्षण।

पाठ्य-पुस्तकीय विचार-प्रयोग (घटनाएँ नहीं)

हाइंज़ की दुविधा (लॉरेंस कोह्लबर्ग का नैतिक-विकास में प्रयुक्त उदाहरण: जान बचाने के लिए चोरी?); ट्रॉली समस्या (फ़िलिपा फ़ुट, 1967; नाम जूडिथ थॉमसन, 1976); "दरवाज़े पर हत्यारा" (कांट, 1797: झूठ बोलने पर कांट की कठोरता)। इन्हें सिद्धांत समझाने में प्रयोग करें, इतिहास की तरह नहीं।

उत्तर में कैसे लगाएँ

परिभाषा (दो वैध मूल्यों का टकराव) → एक प्रकार (किडर) → तीन चश्मे और छह कदम → एक वास्तविक उदाहरण (पेत्रोव या बसु) → निर्णय और कारण लिखने की बात।

विचारक और उद्धरण

नामविचारप्रयोग-योग्य पंक्ति
स्टैनफ़ोर्ड एनसाइक्लोपीडिया ऑफ़ फ़िलॉसफ़ी (मैककोनेल)नैतिक द्वंद्व की परिभाषा"the agent is required to do each of two (or more) actions; the agent can do each of the actions; but the agent cannot do both (or all) of the actions"
महात्मा गांधीकर्तव्यों के टकराव में भीतर की आवाज़"The 'still small voice' within you must always be the final arbiter when there is a conflict of duty." (यंग इंडिया, 4 अगस्त 1920)
भगवद्गीता 18.63पूरा सोचो, फिर चुनो"Reflect fully on this ... and then act as you wish." (व्याख्या के लिए पृष्ठ 7.6 और 4.5)
रशवर्थ किडरचार नमूने, तीन सिद्धांतसच बनाम निष्ठा, व्यक्ति बनाम समुदाय, तात्कालिक बनाम दीर्घकालिक, न्याय बनाम दया (How Good People Make Tough Choices, 1995; संशोधित संस्करण 2009)
मैक्स वेबर (1919)आस्था और उत्तरदायित्व की नैतिकतादोनों साथ चाहिए (विस्तार पृष्ठ 6.6)

चित्र: समाधान-प्रवाह

  1. दुविधा दिखी: दो वैध मूल्य टकरा रहे हैं

    नोड (धूसर)

  2. 1 तथ्य पक्के करें, 2 हितधारक पहचानें (सबसे कमज़ोर कौन?)

    तीर नीचे। नोड (नीला)

  3. 3 टकराते मूल्य और नियम लिखें, 4 कम से कम तीन विकल्प, एक 'तीसरा रास्ता'

    तीर नीचे। नोड (नीला)

  4. परिणाम

    तीर नीचे। त्रिकोण (नारंगी): तीन कोने: · · ; बीच में

  5. नियम-कर्तव्य

  6. देखभाल

  7. कानूनसम्मत? अखबार के सामने समझा सकूँ? अनुपात में? पलटने योग्य?

  8. 6 निर्णय, लिखित कारण, लागू करें

    तीर नीचे। नोड (हरा)

  9. समीक्षा और सीख; पछतावे का अवशेष स्वीकारें

    तीर नीचे। नोड (नेवी)

  10. कानून पहले; भावना के नाम पर नियम नहीं टूटता, नियम के नाम पर मानवीयता नहीं छूटती।

    पाद-पट्टी

पहले इसी अवधारणा का प्रश्न: 2018 में गीता के सहारे (भाग ग), 2021 में 2 अंक की परिभाषा और नैतिक-बनाम-प्रशासनिक निर्णय (भाग ग), 2023 में नैतिक द्वंद्व और निजी बनाम पेशेवर नैतिकता (भाग ग)। 2024 में नहीं। हमारा अनुमान (RPSC की सूचना नहीं): अगला कोण हितों का टकराव, AI या सूचना-देने वाले का हो सकता है।

आम गलतियाँ

याद रखें

  • हर कठिन चुनाव को "दुविधा" कह देना; प्रलोभन और दुविधा का भेद न लिखना।
  • "अंतरात्मा की सुनें" लिखकर रुक जाना; कानून, कारण और लिखित अभिलेख की बात न करना।
  • परिभाषा लिखकर रुकना; समाधान की रूपरेखा या एक वास्तविक उदाहरण न देना। 2 अंक के प्रश्न में बहुत लंबा लिखना भी गलती है।

आत्म-जाँच (5 प्रश्न)

याद रखें

  • नैतिक दुविधा की परिभाषा 15 शब्दों में लिखिए।
  • किडर के चार नमूने कौन-से हैं?
  • तीन चश्मे कौन-से हैं और प्रत्येक किस विचारधारा से जुड़ा है?
  • दुविधा और प्रलोभन में क्या फ़र्क है?
  • पेत्रोव (1983) का पाठ एक वाक्य में लिखिए।