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पृष्ठ 1.7

मूल्य निर्माण में शैक्षिक संस्थाओं की भूमिका

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RAS मुख्य परीक्षा, पत्र II, इकाई I, बिंदु 1: "role of family, society and educational institutions in inculcating values" (मूल्य विकसित करने में परिवार, समाज और शैक्षिक संस्थाओं की भूमिका)

  • जनवरी 2026 के पाठ्यक्रम के अनुसार अद्यतन
  • पढ़ने का समय: लगभग 9 मिनट
2 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

परीक्षा-भार (2018-2024 के प्रश्नों के आधार पर)

2024 भाग ख का Q7 ("औपचारिक शिक्षा या सामाजिक संस्कार: अच्छे प्रशासन के निर्माण में कौन अधिक महत्वपूर्ण?") सीधा प्रश्न है। निकट के प्रश्न 2021 Q6, 2021 Q7 और 2018 Q7 हैं (परिवार और समाज की भूमिका)। बिंदु 1 के कुल 9 प्रश्न आए हैं।

30 सेकंड का सार

याद रखें

  • शैक्षिक संस्थाएँ ज्ञान के साथ मूल्य सिखाती हैं: पाठ्यक्रम, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियाँ, शिक्षक का आदर्श और संस्था की संस्कृति (छिपा हुआ पाठ्यक्रम) के ज़रिये।
  • खेल, एनसीसी, एनएसएस और वाद-विवाद अनुशासन, सेवा और टीम-भावना का अभ्यास कराते हैं।
  • नीतिगत आधार: कोठारी आयोग (1964-66) और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 मूल्यों को शिक्षा का अंग मानते हैं।
  • सीमाएँ: अंक-केंद्रित रटंत शिक्षा, प्रतिस्पर्धा का दबाव (नकल जैसे शॉर्टकट), उपदेशात्मक मूल्य-शिक्षा।
  • सुझाव: संवाद, सेवा-आधारित अधिगम, केस-अध्ययन और शिक्षकों का मूल्य-प्रशिक्षण; यही दृष्टि लोक सेवकों के प्रशिक्षण में भी।

भाग क के लिए छोटे उत्तर (15 शब्द तक)

याद रखें

  • प्रश्न: छिपा हुआ पाठ्यक्रम क्या है?
  • उत्तर: छिपा पाठ्यक्रम संस्था का वह वातावरण है जो बिना कहे मूल्य सिखाता है।
  • शिक्षक का आचरण अक्सर पाठ से अधिक प्रभाव डालता है।
  • NEP 2020 में नैतिक और संवैधानिक मूल्यों को शिक्षा का अंग बनाने पर बल है।

1. संस्थाएँ

विद्यालय, महाविद्यालय और प्रशिक्षण संस्थान व्यवस्थित ढंग से ज्ञान के साथ मूल्य सिखाते हैं।

2. पाठ्यक्रम और गतिविधियाँ

नागरिक शिक्षा, इतिहास और साहित्य के माध्यम से मूल्यों का परिचय; खेल, एनसीसी, एनएसएस, वाद-विवाद जैसी गतिविधियाँ टीम-भावना, अनुशासन और सेवा का अभ्यास कराती हैं।

3. शिक्षक एक आदर्श

शिक्षक का व्यवहार पाठ से अधिक प्रभाव डाल सकता है।

4. संस्था की संस्कृति

निष्पक्ष मूल्यांकन, अनुशासन और सम्मानपूर्ण वातावरण एक छिपा हुआ पाठ्यक्रम (hidden curriculum) बन जाता है, जो बिना कहे भी मूल्य सिखाता है।

5. नीतिगत आधार

कोठारी आयोग: 14 जुलाई 1964 को गठित, 29 जून 1966 को रिपोर्ट; अध्यक्ष डी.एस. कोठारी। आयोग ने शिक्षा को उत्पादकता, सामाजिक और राष्ट्रीय एकता, आधुनिकीकरण और सामाजिक, नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों के विकास से जोड़ा।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (29 जुलाई 2020 को स्वीकृत): अनुच्छेद 4.23 में विद्यार्थियों के लिए आवश्यक कौशलों में "ethical and moral reasoning" (नैतिक तर्क) शामिल है (साथ में "मानवीय और संवैधानिक मूल्यों का ज्ञान और अभ्यास")। अनुच्छेद 4.28 कहता है कि विद्यार्थियों को छोटी उम्र में "doing what's right" का महत्व सिखाया जाएगा और नैतिक निर्णय के लिए तार्किक ढाँचा दिया जाएगा; साथ में परंपरागत भारतीय और संवैधानिक मूल्यों (सेवा, अहिंसा, सत्य, निष्काम कर्म, सहिष्णुता, बहुलवाद, लैंगिक संवेदनशीलता आदि) का उल्लेख है। बाद की कक्षाओं में इसे नकल, हिंसा, साहित्यिक चोरी, सहिष्णुता, समानता और सहानुभूति जैसे विषयों तक बढ़ाने की बात भी है। (ये संख्याएँ NEP के भाग 4, स्कूली पाठ्यक्रम और शिक्षण-विधि, के अनुच्छेद हैं।)

6. सीमाएँ और चुनौतियाँ

अंक-केंद्रित और रटंत आधारित शिक्षा में चरित्र-निर्माण की उपेक्षा।

प्रतिस्पर्धा का अत्यधिक दबाव, जिससे नकल जैसे शॉर्टकट को बल मिलता है।

मूल्य-शिक्षा का औपचारिक और उपदेशात्मक होना।

7. सुझाव

संवाद आधारित नैतिक चर्चा, सेवा-आधारित अधिगम, केस-आधारित प्रशिक्षण, और शिक्षकों का मूल्य-आधारित प्रशिक्षण।

8. "औपचारिक शिक्षा या सामाजिक संस्कार" (2024 Q7)

औपचारिक शिक्षा ज्ञान, नियम-कानून की समझ, कौशल और नैतिक तर्क देती है और व्यवस्थित है। सामाजिक संस्कार (परिवार, समुदाय) चरित्र और व्यवहार की आदतें देते हैं, जो जीवन के उदाहरणों से आती हैं। अच्छे प्रशासन के लिए दोनों चाहिए: संस्कार चरित्र की नींव रखते हैं, शिक्षा उस पर दक्षता और नैतिक विवेक का ढाँचा खड़ा करती है। संतुलित उत्तर इसी तरह दोनों को जोड़ता है।

9. प्रशासन कोण

लोक सेवकों के प्रशिक्षण संस्थानों (जैसे लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी, मसूरी, और राजस्थान में हरिश्चंद्र माथुर राजस्थान राज्य लोक प्रशासन संस्थान, जयपुर, HCM RIPA) में नीतिशास्त्र को केवल पाठ्य-विषय नहीं, बल्कि केस-अध्ययन और व्यवहार-अभ्यास के रूप में पढ़ाना अधिक प्रभावी माना जाता है (यह हमारा आकलन है)।

वास्तविक उदाहरण

मूल्य-शिक्षा को नीति में जगह: कोठारी आयोग (1964-66) से NEP 2020 तक.

1964-66: कोठारी आयोग ने रिपोर्ट की शुरुआत इस वाक्य से की: "The destiny of India is now being shaped in her classrooms." और शिक्षा के उद्देश्यों में सामाजिक, नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों का विकास रखा।

29 जुलाई 2020: राष्ट्रीय शिक्षा नीति में नैतिक तर्क को आवश्यक कौशल में गिना गया (अनुच्छेद 4.23) और छोटी उम्र से "सही काम करने" का महत्व सिखाने की बात कही गई (अनुच्छेद 4.28)।

राजस्थान: राजस्थान प्रशासनिक सेवा, राजस्थान पुलिस सेवा और राजस्थान लेखा सेवा जैसी राज्य सेवाओं का आधारभूत प्रशिक्षण HCM RIPA, जयपुर (स्थापना 1957) में होता है; वहाँ मूल्य-आधारित प्रशिक्षण की भूमिका सीधे इस पृष्ठ से जुड़ती है।

स्रोत जहाँ जाँचें: NEP 2020 का आधिकारिक पाठ (अनुच्छेद 4.23, 4.28); कोठारी आयोग पर शिक्षा-इतिहास के सारांश; HCM RIPA का पृष्ठ (Wikipedia पर संस्थान का परिचय)।

पाठ: लगभग छह दशकों से नीति-स्तर पर यह माना जाता रहा है कि शिक्षा केवल जानकारी नहीं, मूल्य भी देती है; असली चुनौती उसे कक्षा, गतिविधि और संस्था की संस्कृति में उतारना है (हमारा निष्कर्ष)।

उत्तर में कैसे लगाएँ

"शैक्षिक संस्थाएँ मूल्य सिखाती हैं" के बाद: "NEP 2020 (अनुच्छेद 4.28) भी नैतिक निर्णय के लिए तार्किक ढाँचा देने की बात कहती है।"

विचारक और उद्धरण

नामविचारप्रयोग-योग्य पंक्ति
कोठारी आयोग (1964-66)शिक्षा राष्ट्र का भविष्य गढ़ती है"The destiny of India is now being shaped in her classrooms." (रिपोर्ट की पहली पंक्ति)
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, अनुच्छेद 4.28छोटी उम्र से नैतिक तर्क"Students will be taught at a young age the importance of 'doing what's right', and will be given a logical framework for making ethical decisions."
मार्टिन लूथर किंग जूनियरशिक्षा का उद्देश्य बुद्धि के साथ चरित्र"Intelligence plus character - that is the goal of true education." (The Maroon Tiger, 1947)

चित्र: तीन स्तंभ

मूल्य-संपन्न नागरिक / लोक सेवक

ऊपर

परिवार: अनुकरण, संवाद

तीन स्तंभ

समाज: स्वीकृति-निंदा, परंपरा, मीडिया

शिक्षा: पाठ्यक्रम, गतिविधियाँ, शिक्षक, संस्था की संस्कृति

संविधान के मूल्य: न्याय, स्वतंत्रता, समता, बंधुता

नींव

सीमाएँ: अंक-केंद्रित, रटंत, उपदेशात्मकता; समाधान: संवाद, सेवा-अधिगम, केस-अध्ययन

शिक्षा के स्तंभ के पास छोटा डिब्बा

पहले इसी अवधारणा का प्रश्न: शैक्षिक संस्थाओं की भूमिका पर सीधा प्रश्न केवल 2024 में आया; परिवार (2021) और समाज (2018, 2021) पर पहले आ चुका था। तीनों संस्थाओं का आपसी संबंध अगले प्रश्न का संभावित रूप हो सकता है (यह हमारा अनुमान है, पूर्वानुमान नहीं)।

आम गलतियाँ

याद रखें

  • "शिक्षा अपने आप नैतिकता देती है" लिखना; अंक-केंद्रित और रटंत शिक्षा चरित्र की उपेक्षा कर सकती है।
  • नीति के नाम और वर्ष मिला देना (कोठारी आयोग 1964-66; NEP 2020, 29 जुलाई 2020)।
  • "औपचारिक बनाम सामाजिक" में एकतरफ़ा पक्ष लेना; 2024 Q7 में तर्क के साथ दोनों को जोड़ना बेहतर है।

आत्म-जाँच (5 प्रश्न)

याद रखें

  • छिपा हुआ पाठ्यक्रम क्या है?
  • मूल्य सिखाने वाली दो सह-पाठ्यक्रम गतिविधियाँ बताइए।
  • कोठारी आयोग किन वर्षों का है और उसकी रिपोर्ट की पहली पंक्ति क्या थी?
  • NEP 2020 के अनुच्छेद 4.28 में क्या कहा गया है?
  • मूल्य-शिक्षा की दो सीमाएँ और दो समाधान बताइए।