सिविल सेवा के मूल्य: नोलन के सात सिद्धांत, 2nd ARC की "Ethics in Governance" और संवैधानिक मूल्य
RAS मुख्य परीक्षा, पत्र II, इकाई I, बिंदु 3 (नैतिकता और सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता, गैर-पक्षपात, पारदर्शिता, नौकरशाही) का समेकन; 2021 का असली प्रश्न इसी सार को माँगता है
- जनवरी 2026 के पाठ्यक्रम के अनुसार अद्यतन
- पढ़ने का समय: लगभग 12 मिनट
परीक्षा-भार (2018-2024 के प्रश्नों के आधार पर)
1 सीधा प्रश्न: 2021 भाग ख Q10 ("What are the core ethical values required for excellence in civil service?", 5 अंक)। साथ ही 2024 Q6 (सत्यनिष्ठा) इसी सूची का एक मूल्य है।
30 सेकंड का सार
याद रखें
- सिविल सेवा के मूल्यों के तीन स्रोत हैं: अंतरराष्ट्रीय मानदंड (नोलन के सात सिद्धांत, 1995), भारत की संहिताएँ और आयोग (आचरण नियम, 2nd ARC की चौथी रिपोर्ट, जनवरी 2007), और संविधान के मूल्य।
- नोलन के सात: निःस्वार्थता, सत्यनिष्ठा, वस्तुनिष्ठता, जवाबदेही, खुलापन, ईमानदारी, नेतृत्व।
- 2nd ARC ने कहा कि भारत में आचरण नियम कई निषेध गिनाते हैं पर पूर्ण "आचार-संहिता" नहीं है; उसने "सार्वजनिक सेवा मूल्य" कानून से तय करने की सिफ़ारिश की।
- संवैधानिक आधार: प्रस्तावना के न्याय, स्वतंत्रता, समता, बंधुता; आचरण नियम 3(1) में संविधान की सर्वोच्चता के प्रति प्रतिबद्धता।
- उत्कृष्टता का अर्थ नियम-पालन से ऊपर: नियम न्यूनतम सीमा हैं, मूल्य ऊँचा लक्ष्य।
भाग क के लिए छोटे उत्तर (15 शब्द तक)
याद रखें
- प्रश्न: नोलन के सात सिद्धांत लिखिए।
- उत्तर: निःस्वार्थता, सत्यनिष्ठा, वस्तुनिष्ठता, जवाबदेही, खुलापन, ईमानदारी और नेतृत्व।
- 2nd ARC चाहता था: सार्वजनिक सेवा मूल्य कानून से तय हों, उल्लंघन कदाचार हो।
- संवैधानिक मूल्य हैं प्रस्तावना के न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता।
1. स्रोत एक: नोलन के सात सिद्धांत
(ब्रिटेन)
ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने अक्तूबर 1994 में "सार्वजनिक जीवन में मानक समिति" (नोलन समिति) बनाई; उसकी पहली रिपोर्ट मई 1995 में आई (2nd ARC की रिपोर्ट के अनुसार); सात सिद्धांत 31 मई 1995 को प्रकाशित हुए (gov.uk)।
नीचे का पाठ gov.uk पर आज का पाठ है। 1995 के मूल पाठ में कुछ अंतर थे: "ईमानदारी" सिद्धांत निजी हित घोषित करने का कर्तव्य था, जबकि आज वह "सत्यनिष्ठा" में है और "ईमानदारी" का अर्थ केवल सच बोलना है; "वस्तुनिष्ठता" 1995 में "योग्यता पर चयन" पर केंद्रित थी और "खुलापन" में "जितना संभव हो उतना खुले" शब्द थे। सातों नाम वही हैं। परीक्षा में पाठ-सहित उद्धृत करना हो तो वर्ष बताइए। (1995 का पाठ नोलन समिति की पहली रिपोर्ट के सार पर आधारित है।)
| सिद्धांत | आशय (gov.uk के पाठ से) |
|---|---|
| निःस्वार्थता (Selflessness) | केवल जनहित में कार्य |
| सत्यनिष्ठा (Integrity) | अनुचित प्रभाव डालने वालों के प्रति कोई दायित्व न लेना; अपने, परिवार या मित्रों के लाभ के लिए निर्णय न लेना; हित घोषित करना और सुलझाना |
| वस्तुनिष्ठता (Objectivity) | निष्पक्षता, न्यायपूर्णता और योग्यता पर, सर्वोत्तम साक्ष्य से, बिना भेदभाव या पूर्वाग्रह के |
| जवाबदेही (Accountability) | जनता के प्रति उत्तरदायी; आवश्यक जाँच के लिए स्वयं को प्रस्तुत करना |
| खुलापन (Openness) | खुले और पारदर्शी ढंग से निर्णय; सूचना तभी रोकी जाए जब "स्पष्ट और विधिसम्मत कारण" हों |
| ईमानदारी (Honesty) | सच बोलना |
| नेतृत्व (Leadership) | इन सिद्धांतों को अपने आचरण में दिखाना, दूसरों से सम्मान से व्यवहार करना, और बुरे आचरण को चुनौती देना |
2nd ARC की रिपोर्ट में अध्यक्ष का वक्तव्य (परिशिष्ट में पुनर्मुद्रित) कहता है: खुलापन और जवाबदेही प्रक्रिया-संबंधी हैं और उनके लिए प्रक्रियाएँ बनाई जा सकती हैं; वस्तुनिष्ठता और नेतृत्व प्रदर्शन-संबंधी हैं; सबसे बड़ी चुनौती सत्यनिष्ठा, ईमानदारी और निःस्वार्थता है, जो विशुद्ध नैतिक गुण होने से मापनीय मानक बनाना कठिन है।
2. स्रोत दो: भारत की संहिताएँ और 2nd ARC
केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1964, नियम 3(1) (31.12.2014 तक संशोधित पाठ): पूर्ण निष्ठा, कर्तव्यपरायणता, "अनुपयुक्त" आचरण से बचाव; संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता; उच्च नैतिक मानक और ईमानदारी; राजनीतिक तटस्थता; योग्यता, न्यायपूर्णता और निष्पक्षता को बढ़ावा; जवाबदेही और पारदर्शिता; जनता, विशेषकर कमज़ोर वर्ग के प्रति संवेदनशीलता; शिष्टाचार; केवल जनहित में निर्णय और संसाधनों का दक्ष उपयोग; निजी हित घोषित करना; दायित्वों से बचाव; पद का दुरुपयोग न करना। (वर्तमान पाठ DoPT से मिला लें)
अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968: नियम 3(1) और 3(1A) (अगस्त 2014 का संशोधन) में उच्च नैतिक मानक, सत्यनिष्ठा, ईमानदारी, राजनीतिक तटस्थता, योग्यता-न्यायपूर्णता-निष्पक्षता, जवाबदेही और पारदर्शिता, जनता के प्रति संवेदनशीलता, शिष्टाचार।
2nd ARC, चौथी रिपोर्ट "Ethics in Governance" (जनवरी 2007, अध्यक्ष एम. वीरप्पा मोइली), खंड 2.7 "सिविल सेवकों के लिए आचार-संहिता":
आचरण नियम कुछ कार्यों का वर्गीकरण-भर करते हैं; भारत में सिविल सेवकों के लिए कोई "आचार-संहिता" नहीं है (2.7.5)। विशेषकर हित-टकराव पर सुरक्षा-उपाय ज़रूरी।
मसौदा सार्वजनिक सेवा विधेयक, 2006 में प्रस्तावित दस मूल्य: (1) संविधान की प्रस्तावना के आदर्शों के प्रति निष्ठा; (2) अराजनीतिक कार्यप्रणाली; (3) जनता की बेहतरी के लिए सुशासन को प्राथमिक लक्ष्य बनाना; (4) वस्तुनिष्ठ और निष्पक्ष कार्य का कर्तव्य; (5) निर्णयों में जवाबदेही और पारदर्शिता; (6) उच्चतम नैतिक मानकों का पालन; (7) चयन में योग्यता (देश की विविधताओं के अनुरूप); (8) व्यय में मितव्ययिता और अपव्यय से बचाव; (9) स्वस्थ और अनुकूल कार्य-वातावरण; (10) संवाद, परामर्श और सहयोग।
सिफ़ारिश (2.7.12): (क) "सार्वजनिक सेवा मूल्य" परिभाषित हों और सरकार के सभी स्तरों और अर्ध-सरकारी संस्थाओं पर लागू हों, उनके उल्लंघन को कदाचार मानकर दंड दिया जाए; (ख) हित-टकराव को आचार-संहिता और आचरण-संहिता में पूर्णतः शामिल किया जाए, और कार्यरत अधिकारियों को सार्वजनिक उपक्रमों के बोर्डों में नामित न किया जाए (गैर-लाभकारी सार्वजनिक संस्थाओं और सलाहकार निकायों को छोड़कर)।
अनुच्छेद 2.7.2: स्वयं को बड़े सामाजिक हित के अधीन करने और ज़रूरतमंद के प्रति सहानुभूति जगाने वाले मूल्य ऐसे कौशल नहीं हैं जो सेवा में आने के बाद आसानी से सीख लिए जाएँ; सही "संस्कृति" पीढ़ियों में बनती है।
3. स्रोत तीन: संवैधानिक मूल्य
प्रस्तावना: न्याय (सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक), स्वतंत्रता, समता और बंधुता, जो व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करे (संविधान-पाठ)।
मौलिक अधिकार (भाग III) और विधि के समक्ष समता (अनुच्छेद 14, 16): निष्पक्षता और भेदभाव-निषेध की जड़ें (पृष्ठ 3.3)।
मौलिक कर्तव्य (अनुच्छेद 51क) और संवैधानिक नैतिकता (पत्र III का विषय): नियमों के पीछे की भावना।
आचरण नियम 3(1)(iv): संविधान की सर्वोच्चता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता; मसौदा विधेयक का पहला मूल्य भी प्रस्तावना के प्रति निष्ठा।
4. मूल्यों की सूची: "उत्कृष्टता" के लिए
(2021 के प्रश्न के लिए हमारा संश्लेषण; हर बिंदु के स्रोत ऊपर हैं)
| मूल्य | स्रोत |
|---|---|
| सत्यनिष्ठा और ईमानदारी | नोलन 2 और 6; आचरण नियम 3(1)(i), (vi), (xiii) से (xv) |
| निष्पक्षता और वस्तुनिष्ठता | नोलन 3; आचरण नियम 3(1)(viii); ARC मूल्य 4 |
| गैर-पक्षपात और राजनीतिक तटस्थता | आचरण नियम 3(1)(vii), 5; ARC मूल्य 2 |
| जवाबदेही और पारदर्शिता | नोलन 4 और 5; नियम 3(1)(ix); ARC मूल्य 5 |
| जनता के प्रति संवेदनशीलता, कमज़ोर वर्ग को प्राथमिकता | नियम 3(1)(x); ARC मूल्य 3; संविधान का न्याय |
| निःस्वार्थता, सार्वजनिक हित | नोलन 1; नियम 3(1)(xii) |
| कर्तव्यपरायणता, साहस, नेतृत्व | नियम 3(1)(ii); नोलन 7 |
| संविधान के प्रति निष्ठा | नियम 3(1)(iv); ARC मूल्य 1 |
| दक्षता और मितव्ययिता | नियम 3(1)(xii); ARC मूल्य 8 |
5. नियम और मूल्य का अंतर
नियम बताते हैं क्या मना है; मूल्य बताते हैं क्या होना चाहिए। उत्कृष्टता नियम-पालन से आगे जाती है: सही करना तब भी जब नियम चुप हो। फिर भी मूल्य अकेले व्यक्ति पर नहीं छोड़े जा सकते; आचार-संहिता, प्रशिक्षण, नेतृत्व का उदाहरण और ईमानदार की सुरक्षा (पृष्ठ 3.2) साथ चाहिए।
नोलन के सात मूल्य और इस इकाई के प्रलेखित उदाहरण:
| मूल्य | उदाहरण | पृष्ठ |
|---|---|---|
| सत्यनिष्ठा | सत्येंद्र दुबे, नवंबर 2003; PIDPI प्रस्ताव, अप्रैल 2004 | 3.2 |
| वस्तुनिष्ठता | क्रैपक (1969): चयन-बोर्ड में सदस्य स्वयं उम्मीदवार; चयन रद्द | 3.3 |
| जवाबदेही और नेतृत्व | लाल बहादुर शास्त्री, 1956: रेल दुर्घटनाओं पर इस्तीफ़े की पेशकश; दूसरी बार स्वीकृत (7 दिसंबर 1956) | 3.2 |
| खुलापन | MKSS (1990 से), राजस्थान RTI 2000, RTI 2005, जन सूचना पोर्टल 2019 | 3.5 |
| ईमानदारी (नकारात्मक उदाहरण) | प्रोफ़्यूमो, 1963: संसद से झूठ बोलने पर इस्तीफ़ा | 3.1 |
| तटस्थता | प्रकाश सिंह (2006), सुब्रमण्यम (2013) के निर्देश | 3.4 |
उत्तर में कैसे लगाएँ
पाँच-छह मूल्य चुनिए, हर एक के साथ स्रोत (नोलन, आचरण नियम, ARC) और एक संक्षिप्त उदाहरण जोड़िए; अंत में "मूल्य + संस्था" का निष्कर्ष।
विचारक और उद्धरण
| नाम | विचार | प्रयोग-योग्य पंक्ति |
|---|---|---|
| नोलन समिति | नेतृत्व | "Holders of public office should exhibit these principles in their own behaviour and treat others with respect." (gov.uk का वर्तमान पाठ) |
| 2nd ARC (2007), अनुच्छेद 2.7.2 | मूल्य जल्दी नहीं सीखे जाते | "...not skills which could be easily imbibed after joining the civil services." (रिपोर्ट-पाठ; संदर्भ: स्वयं को सामाजिक हित के अधीन करने और सहानुभूति के मूल्य) |
| महात्मा गांधी (द्वारा प्रकाशित) | सात सामाजिक पाप | "Politics without principle", "Knowledge without character", "Commerce without morality" (यंग इंडिया, 22 अक्तूबर 1925; 2nd ARC बॉक्स 2.8 में उद्धृत) |
चित्र: संकेंद्रित वृत्त
संविधान की प्रस्तावना: न्याय, स्वतंत्रता, समता, बंधुता
भीतरी वृत्त
नोलन के सात: निःस्वार्थता, सत्यनिष्ठा, वस्तुनिष्ठता, जवाबदेही, खुलापन, ईमानदारी, नेतृत्व
मध्य वृत्त
भारत की संहिताएँ: आचरण नियम (CCS 1964, AIS 1968), मसौदा सार्वजनिक सेवा मूल्य (ARC 2007)
बाहरी वृत्त
आचार-संहिता, प्रशिक्षण, नेतृत्व का उदाहरण, ईमानदार की सुरक्षा
वृत्तों के बाहर तीर
पहले यह कैसे पूछा गया: मूल्यों की सूची वाला प्रश्न एक बार (2021) आया; सत्यनिष्ठा-आधारित प्रश्न 2024 में। दोनों भाग ख, 5 अंक।
आम गलतियाँ
याद रखें
- बिना स्रोत के पाँच-छह मूल्य गिना देना; नोलन, आचरण नियम या ARC का नाम जोड़ें।
- नोलन को भारतीय संहिता बता देना; वह ब्रिटेन की समिति है और 2nd ARC ने उसका संदर्भ लिया।
- केवल सूची देना; "नियम न्यूनतम, मूल्य ऊँचा लक्ष्य" वाली व्याख्या छोड़ देना।
आत्म-जाँच (5 प्रश्न)
याद रखें
- नोलन के सातों सिद्धांत क्रम से लिखिए।
- 2nd ARC ने आचरण नियमों के बारे में क्या कमी बताई?
- मसौदा सार्वजनिक सेवा विधेयक, 2006 के किन्हीं पाँच मूल्यों के नाम लिखिए।
- आचरण नियम 3(1)(iv) क्या माँगता है?
- 2021 के प्रश्न का 50 शब्द का उत्तर अपने शब्दों में बनाइए।
काल्पनिक केस
उदाहरण (काल्पनिक)काल्पनिक केस (Hypothetical case)
कविता एक ज़िला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) है। सरकारी योजना से बने एक स्कूल-भवन की दीवार पहली बरसात में गिर गई। सौभाग्य से कोई घायल नहीं हुआ। निर्माण के दौरान ही कनिष्ठ अभियंता ने घटिया सामग्री की लिखित रिपोर्ट दी थी, पर अंतिम भुगतान से पहले के निरीक्षण पर कविता के अपने हस्ताक्षर भी हैं। ठेकेदार सत्तारूढ़ दल के एक स्थानीय नेता का रिश्तेदार है। नेता कहते हैं, "चुनाव तक मामला दबा दीजिए, और अभियंता को ही दोषी ठहरा दीजिए।" इसी बीच एक पत्रकार और एक RTI आवेदक रिपोर्ट माँग रहे हैं।
- हितधारक
- कविता, कनिष्ठ अभियंता, ठेकेदार और स्थानीय नेता, स्कूल के बच्चे और अभिभावक, विभाग, पत्रकार और RTI आवेदक, राज्य सरकार।
- मुद्दा और टकराते मूल्य
- खुलापन, जवाबदेही, ईमानदारी (सच बोलना) और निष्पक्षता बनाम राजनीतिक दबाव और अपनी चूक छिपाने का लोभ; यह नेतृत्व की भी परीक्षा है।
- तीन विकल्प
- (क) मामला दबाना और रिपोर्ट रोके रखना। लाभ: तुरंत शांति, नेता प्रसन्न। हानि: बच्चों की सुरक्षा का खतरा बना रहता है, ईमानदारी और खुलापन दोनों टूटते हैं, और बाद में उजागर होने पर नुकसान और बड़ा होगा। (ख) सारा दोष कनिष्ठ अभियंता पर डालकर उसे निलंबित करना। लाभ: जल्दी "कार्रवाई" दिखती है। हानि: जिसने चेतावनी दी थी उसी को बिना सुनवाई सज़ा; ईमानदारी से रिपोर्ट करने वालों का मनोबल टूटेगा; अपनी जवाबदेही से बचाव। (ग) भवन तुरंत खाली कराना और बकाया भुगतान रोकना; स्वतंत्र तकनीकी जाँच कराना; जाँच-रिपोर्ट सार्वजनिक करना और पत्रकार तथा RTI आवेदक को समय पर तथ्य देना; अपने निरीक्षण की चूक स्वीकार कर वरिष्ठ को लिखित सूचना देना; जाँच में जिसकी भी चूक निकले (अभियंता हो तो वह भी), उस पर सुनवाई के बाद नियमानुसार कार्रवाई और ठेकेदार को काली-सूची में डालना। लाभ: बच्चों की सुरक्षा, सत्य, पारदर्शिता और निष्पक्षता। हानि: राजनीतिक नाराज़गी, अपनी छवि पर आँच, काम का बोझ।
- सर्वोत्तम विकल्प और समर्थक मूल्य
- विकल्प (ग)। नोलन के सिद्धांत: ईमानदारी (सच बोलना), खुलापन, जवाबदेही (अपनी चूक सहित), वस्तुनिष्ठता (साक्ष्य पर निर्णय) और नेतृत्व (गलत आचरण को चुनौती देना)।
सीख
कदम: अल्पकालिक: भवन खाली कराना, भुगतान रोकना, स्वतंत्र जाँच, रिपोर्ट का प्रकाशन, वरिष्ठ को लिखित सूचना, नेता को विनम्रता से बताना कि जाँच नियमानुसार होगी। दीर्घकालिक: ठेकेदार-चयन में हित-घोषणा, निर्माण के हर चरण पर तृतीय-पक्ष निरीक्षण, निर्माण-गुणवत्ता रिपोर्टों का स्वतः प्रकटीकरण, और चेतावनी देने वाले कर्मचारियों के संरक्षण की व्यवस्था। अभ्यास: पृष्ठ 3.1 से 3.5 और 3.7 के केसों में भी पूछिए: कौन-से दो मूल्य टकरा रहे हैं, और नोलन का कौन-सा सिद्धांत समाधान का समर्थन करता है?
अभ्यास प्रश्न
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
What are the core ethical values required for excellence in civil service?
आदर्श उत्तर
उत्कृष्ट सिविल सेवा के लिए सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता, राजनीतिक तटस्थता, जवाबदेही और पारदर्शिता, जनता के प्रति संवेदनशीलता तथा संविधान के प्रति निष्ठा आवश्यक हैं। नोलन के सात सिद्धांत और आचरण नियम 3(1) इन्हीं का आधार हैं। नियम न्यूनतम हैं; उत्कृष्टता में कर्तव्यपरायणता और नेतृत्व का उदाहरण जुड़ता है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
नोलन के सात सिद्धांतों, 2nd ARC की सिफ़ारिशों और संवैधानिक मूल्यों के आधार पर सिविल सेवा के मूल्यों की चर्चा कीजिए। क्या आचरण नियम पर्याप्त हैं?
आदर्श उत्तर
नोलन के सात सिद्धांत (1995) निःस्वार्थता से नेतृत्व तक का मानक देते हैं। भारत के आचरण नियम 3(1) में इनमें से अनेक, जैसे निष्पक्षता, पारदर्शिता और हित-घोषणा, शामिल हैं, पर 2nd ARC (2007) ने कहा कि ये निषेधों की सूची हैं, पूर्ण आचार-संहिता नहीं। उसने सार्वजनिक सेवा मूल्य कानून से तय करने और हित-टकराव के नियम की सिफ़ारिश की। संवैधानिक आधार प्रस्तावना का न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता है, जो अनुच्छेद 14 और 16 के समान व्यवहार में दिखता है। इसलिए नियम पर्याप्त नहीं: संहिता, प्रशिक्षण, नेतृत्व का उदाहरण और ईमानदार की सुरक्षा भी चाहिए। तभी मूल्य आचरण में उतरते हैं।
पिछले असली प्रश्न
2021पत्र II, भाग ख5 अंक
What are the core ethical values required for excellence in civil service? उत्तर-सूत्र: मूल्यों की संक्षिप्त सूची (5-6) → हर एक के साथ स्रोत → "नियम बनाम मूल्य" की एक पंक्ति → निष्कर्ष।
2024निकट संबंधीपत्र II, भाग ख5 अंक
Does administrative objectivity necessarily presuppose administrative integrity? (पृष्ठ 3.2)।
यह उत्तर कैसे लिखें
भूमिका
तीन स्रोत
मुख्य भाग
- नोलन, आचरण नियम, ARC, संविधान
निष्कर्ष
नियम न्यूनतम, मूल्य लक्ष्य, संस्थागत सहारा
अतिरिक्त मूल्य
- ARC 2.7.2, गांधी के सात पाप
एक पेज में दोहराव
- तीन स्रोत: नोलन 1995
- भारत की संहिताएँ और ARC 2007
- संविधान
- नोलन के सात: निःस्वार्थता, सत्यनिष्ठा, वस्तुनिष्ठता, जवाबदेही, खुलापन, ईमानदारी, नेतृत्व
- ARC चौथी रिपोर्ट जनवरी 2007 (अध्यक्ष मोइली): 2.7.5 (संहिता नहीं), 2.7.12 (मूल्य कानून से, कदाचार, हित-टकराव, PSU बोर्ड)
- मसौदा विधेयक 2006 के दस मूल्य
- CCS नियम 3(1) (2014 तक संशोधित), AIS 3(1A) (2014)
- प्रस्तावना: न्याय, स्वतंत्रता, समता, बंधुता
- अनु. 14, 16, 51क
- गांधी के सात पाप (यंग इंडिया 1925)
- 2021 Q10: 5-6 मूल्य + स्रोत + "नियम न्यूनतम, मूल्य लक्ष्य"
- उदाहरण: दुबे 2003, क्रैपक 1969, शास्त्री 1956, MKSS 1990, प्रोफ़्यूमो 1963।