महान नेताओं, सुधारकों और प्रशासकों के जीवन से सीख
RAS मुख्य परीक्षा, पत्र II, इकाई I, बिंदु 1: "Lessons from the lives and teachings of great leaders, reformers and administrators" (महान नेताओं, सुधारकों और प्रशासकों के जीवन व शिक्षाओं से सीख)
- जनवरी 2026 के पाठ्यक्रम के अनुसार अद्यतन
- पढ़ने का समय: लगभग 10 मिनट
परीक्षा-भार (2018-2024 के प्रश्नों के आधार पर)
3 प्रश्न, तीनों भाग ग (10 अंक): 2018 Q12, 2021 Q13, 2023 Q11, यानी 30 अंक।
30 सेकंड का सार
याद रखें
- मूल्य उपदेश से कम और उदाहरण से अधिक सीखे जाते हैं; इसलिए यह विषय हमेशा उदाहरण-आधारित उत्तर माँगता है।
- हर उदाहरण से तीन बातें निकालिए: क्या किया (तथ्य), कौन-सा मूल्य दिखा, आज प्रशासक इसे कहाँ लागू करे।
- पिछले तीनों प्रश्न भाग ग के थे: शिक्षाएँ कभी पुरानी नहीं होतीं (2018), एक की सफलता दूसरे के लिए सबक (2021), प्रशासन और सामाजिक सुधार (2023)।
- उत्तर में वही तथ्य लिखिए जो पक्के हैं; तिथि या संख्या पर शंका हो तो "माना जाता है" या "प्रचलित स्रोतों के अनुसार" लिखिए।
- सीख मूल्य की लीजिए, हूबहू तरीके की नहीं: अंधानुकरण नहीं, विवेकपूर्ण प्रयोग।
भाग क के लिए छोटे उत्तर (15 शब्द तक)
याद रखें
- प्रश्न (हमारा अभ्यास): आदर्श व्यक्तित्वों का अध्ययन लोक सेवक के लिए क्यों उपयोगी है?
- उत्तर: आदर्श जीवन मूल्यों को ठोस उदाहरण बनाकर लोक सेवक को आचरण की दिशा देते हैं।
- हर उदाहरण से तीन बातें लें: क्या किया, कौन-सा मूल्य दिखा, आज कहाँ लागू।
- सीख मूल्य की लें, तरीके की नहीं; अंधानुकरण नहीं, विवेकपूर्ण प्रयोग करें।
1. अध्ययन क्यों
आदर्श जीवन दिखाते हैं कि कठिन परिस्थिति में मूल्य व्यवहार में कैसे उतरे (देखें पृष्ठ 1.4: आदर्श व्यक्तित्व मूल्यों का एक स्रोत हैं)।
2. पढ़ने का ढंग
केवल प्रशंसा याद करना काफ़ी नहीं। तालिका की हर पंक्ति को तीन खानों में पढ़िए: तथ्य, मूल्य, आज का प्रयोग।
3. अंधानुकरण नहीं, विवेक
समय और परिस्थिति बदलती है; सीख मूल्य की है, हूबहू तरीके की नहीं।
4. चुने हुए उदाहरण (केवल प्रलेखित तथ्य)
| व्यक्तित्व | प्रमुख कार्य | प्रशासक के लिए सीख |
|---|---|---|
| महात्मा गांधी | 1917 के चंपारण सत्याग्रह में तिनकठिया प्रथा से पीड़ित किसानों की शिकायतें जाँचीं; सरकारी जाँच समिति में भी रहे। 12 मार्च से 6 अप्रैल 1930 की दांडी यात्रा (लगभग 240 मील, शुरू में 78 सत्याग्रही) नमक कानून के विरोध में। | निर्णय से पहले ज़मीनी तथ्य-संग्रह; साधन की शुद्धता; सादगी |
| डॉ. भीमराव अंबेडकर | 1927 का महाड़ सत्याग्रह (सार्वजनिक जल-स्रोत के अधिकार के लिए); संविधान की प्रारूप समिति के अध्यक्ष (29 अगस्त 1947 से 24 जनवरी 1950); स्वतंत्र भारत के प्रथम विधि मंत्री। संदेश: शिक्षित बनो, संघर्ष करो, संगठित रहो। | सामाजिक न्याय को कानून और संस्था का रूप देना; समता |
| स्वामी विवेकानंद | 11 सितंबर 1893 को शिकागो की धर्म-संसद में भाषण; 1 मई 1897 को रामकृष्ण मिशन की स्थापना, जिसका आधार सेवा है। राजस्थान के खेतड़ी के राजा अजीत सिंह से निकट संबंध; 'विवेकानंद' नाम अपनाने में उनके सुझाव की भूमिका मानी जाती है। | सेवा-भाव; आत्मविश्वास; युवाओं में विश्वास |
| राजा राममोहन राय | 1815 में आत्मीय सभा (कुछ स्रोतों में 1814), 1821 में 'संवाद कौमुदी', 1828 में ब्रह्म सभा; सती-प्रथा के विरुद्ध अभियान। माना जाता है कि उनके अभियान ने 1829 के बंगाल सती विनियम की ज़मीन तैयार की। प्रेस की स्वतंत्रता और कार्यपालिका-न्यायपालिका के पृथक्करण जैसे मुद्दे भी उठाए। | सुधार में तर्क, जनमत और कानून का मेल |
| सरदार वल्लभभाई पटेल | 1928 के बारडोली आंदोलन का नेतृत्व; 1947-49 में लगभग 565 रियासतों (स्रोतों में संख्या 562 से 565) के एकीकरण में केंद्रीय भूमिका; प्रथम उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री। 21 अप्रैल 1947 को सिविल सेवा परिवीक्षार्थियों से कहा कि सिविल सेवक राजनीति में भाग न ले। 10 अक्तूबर 1949 को संविधान सभा में कहा कि अपनी बात स्वतंत्र रूप से रख सकने वाली अच्छी अखिल भारतीय सेवा के बिना एकजुट भारत नहीं बनेगा। | एकता, दृढ़ता, सेवाओं की राजनीतिक तटस्थता |
| डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम | SLV-III के परियोजना निदेशक (जुलाई 1980 में रोहिणी उपग्रह की कक्षा में स्थापना); जुलाई 1992 से दिसंबर 1999 तक रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार और DRDO के सचिव; नवंबर 1999 से नवंबर 2001 तक भारत सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार; 1997 में भारत रत्न; 2002 से 2007 तक राष्ट्रपति। | टीम-नेतृत्व; वैज्ञानिक दृष्टि; युवाओं से संवाद |
| सर एम. विश्वेश्वरैया | जन्म 15 सितंबर 1861; खड़कवासला बाँध पर पेटेंट-प्राप्त स्वचालित द्वार (पहली बार 1903); कृष्णराज सागर बाँध के मुख्य अभियंता; 1912-1918 मैसूर के दीवान; 1955 में भारत रत्न। जन्मदिन अभियंता दिवस है। | तकनीकी दक्षता को जन-सेवा से जोड़ना |
| राजस्थान: मज़दूर किसान शक्ति संगठन (MKSS) | अरुणा रॉय, निखिल डे और शंकर सिंह 1987 से देवडूंगरी (राजसमंद, राजस्थान) में बसकर काम करने लगे; 1 मई 1990 को मज़दूर किसान शक्ति संगठन का औपचारिक गठन (MKSS की अपनी वेबसाइट: 1990, देवडूंगरी)। पहली जन सुनवाई 2 दिसंबर 1994 को कोट किराना (पाली) में। आधिकारिक खर्च-अभिलेख सार्वजनिक सभाओं (जन सुनवाई) में पढ़कर सुनाए गए; 6 अप्रैल 1996 से ब्यावर में 40 दिन का धरना (फिर जयपुर में 10 दिन, 16 मई 1996 तक)। | पारदर्शिता, जवाबदेही, नागरिक और प्रशासन का संवाद |
| राजस्थान: खेजड़ली (1730) | सितंबर 1730 में (सामान्यतः 11 सितंबर माना जाता है) मारवाड़ के महाराजा अभय सिंह के आदेश पर खेजड़ी के पेड़ काटने आए लोगों को अमृता देवी के नेतृत्व में बिश्नोई ग्रामीणों ने रोका; प्रचलित स्रोतों के अनुसार 363 बिश्नोई मारे गए। | मूल्य के लिए बलिदान; पर्यावरण-संरक्षण |
सावधानी (पटेल): 'स्टील फ़्रेम' वाक्यांश 1922 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री लॉयड जॉर्ज ने ICS के लिए कहा था। पटेल से इसे जोड़ना लोक-प्रचलन है, इसलिए उत्तर में इसे उनका शब्द न लिखें।
5. एक-दूसरे की सफलता से सीख (नीति-विस्तार, 2021 के प्रश्न का आधार)
सूचना का अधिकार: राजस्थान का जन-आंदोलन और राज्य-कानून उस पृष्ठभूमि का हिस्सा थे जिसमें अन्य राज्यों ने भी कानून बनाए और अंततः 2005 में केंद्रीय अधिनियम आया। (यह कारण-दावा नहीं, पृष्ठभूमि का कथन है।)
मध्याह्न भोजन: तमिलनाडु इसके सबसे जाने-माने शुरुआती उदाहरणों में है। कामराज के मुख्यमंत्री-काल में यह प्राथमिक विद्यालयों में शुरू हुआ (स्रोतों में आरंभ-वर्ष 1956-57 से 1960 के दशक की शुरुआत तक भिन्न मिलता है, इसलिए उत्तर में केवल "कामराज के समय" लिखें)। जुलाई 1982 में एम.जी. रामचंद्रन ने इसे 'पौष्टिक मध्याह्न भोजन योजना' के रूप में बढ़ाया। 15 अगस्त 1995 को राष्ट्रीय पोषण-सहायता कार्यक्रम शुरू हुआ और 28 नवंबर 2001 को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश (PUCL बनाम भारत संघ) ने सरकारी और सहायता-प्राप्त प्राथमिक विद्यालयों में पका हुआ भोजन देना अनिवार्य किया। 2021 में योजना का नाम PM पोषण हुआ।
सीख: सफल प्रयोग को दर्ज करना, स्थानीय परिस्थिति के अनुसार ढालना और असफलताओं से भी सबक लेना।
6. प्रशासन कोण
इन जीवनों में बार-बार तीन बातें मिलती हैं: फ़ैसले से पहले तथ्य (चंपारण), संस्था के ज़रिये न्याय (संविधान) और नागरिक के प्रति जवाबदेही (MKSS)। अधिकारी इन्हें फ़ील्ड-विज़िट, जन-सुनवाई और अभिलेख-खुलासे की आदत बना सकता है।
वास्तविक उदाहरण
राजस्थान में पारदर्शिता का आंदोलन, 1990 से 2001.
कार्यकर्ता 1987 से देवडूंगरी में बसे और MKSS का औपचारिक गठन 1 मई 1990 को हुआ; पहली जन सुनवाई 2 दिसंबर 1994 (कोट किराना, पाली) में हुई, जहाँ आधिकारिक खर्च-अभिलेख गाँव के सामने पढ़े गए; 6 अप्रैल 1996 से ब्यावर में 40 दिन का धरना हुआ। राजस्थान सूचना का अधिकार अधिनियम, 2000 (2000 का अधिनियम सं. 13) को राज्यपाल की स्वीकृति 11 मई 2000 को मिली और वह 26 जनवरी 2001 से लागू हुआ; संसद ने 2005 में राष्ट्रीय RTI अधिनियम पारित किया।
स्रोत: UNDP का चर्चा-पत्र (People's Right to Information Movement: Lessons from Rajasthan) और MKSS की वेबसाइट; अधिनियम-पाठ (CHRI पर: अधिनियम सं. 13 / 2000, राज्यपाल की स्वीकृति 11 मई 2000) और CHRI का राजस्थान पृष्ठ (लागू: 26 जनवरी 2001)। राजपत्र की प्रकाशन-तिथि यहाँ नहीं दी गई है।
स्रोत-भेद का समाधान: 1987 वह वर्ष है जब संस्थापक देवडूंगरी में बसे; 1990 औपचारिक गठन; 1994 पहली जन सुनवाई। उत्तर में "MKSS (1990)" लिखना सुरक्षित है।
चंपारण, 1917.
गांधीजी ने कार्रवाई से पहले किसानों के बयान दर्ज किए और जाँच समिति में बैठे।
स्रोत: मानक इतिहास-ग्रंथ।
उत्तर में कैसे लगाएँ
पहले तथ्य एक पंक्ति में (वर्ष सहित), फिर मूल्य का नाम, फिर आज के प्रशासन में प्रयोग। जैसे: "MKSS की जन सुनवाइयों (1990 के दशक) से पारदर्शिता की माँग बनी, जिससे 2000-01 में राजस्थान का RTI कानून और 2005 का केंद्रीय अधिनियम आगे आए; आज वही भावना सामाजिक अंकेक्षण और खुले अभिलेख में दिखती है।"
विचारक और उद्धरण
| नाम | विचार | प्रयोग-योग्य पंक्ति |
|---|---|---|
| महात्मा गांधी | निर्णय से पहले ज़मीनी तथ्य | चंपारण (1917): किसानों के बयान दर्ज करके कार्रवाई (प्रलेखित घटना; उद्धरण नहीं, तथ्य) |
| डॉ. अंबेडकर | शिक्षा, संघर्ष और संगठन | उनके नाम से प्रचलित नारा: शिक्षित बनो, संघर्ष करो, संगठित रहो (Educate, Agitate, Organize); इसे 1942 के नागपुर सम्मेलन से जोड़ा जाता है, शब्द-क्रम स्रोतों में भिन्न मिलता है, इसलिए इसे "नारे" के रूप में लिखें, शब्दशः उद्धरण की तरह नहीं |
| राजा राममोहन राय | तर्क, जनमत और कानून | सती के विरुद्ध अभियान और 1829 का विनियम (संबंध "माना जाता है") |
| सरदार पटेल | सिविल सेवा की स्वतंत्रता | अक्तूबर 1949: संविधान सभा में स्वतंत्र अखिल भारतीय सेवा पर बल (शब्द 'स्टील फ़्रेम' नहीं) |
चित्र: मन-नक्शा
लोक सेवक
केंद्र
नौ शाखाएँ, हर तीर पर मूल्य-शब्द: गांधी (तथ्य-खोज) · अंबेडकर (न्याय) · विवेकानंद (सेवा) · राममोहन राय (सुधार) · पटेल (एकता) · कलाम (विज्ञान) · विश्वेश्वरैया (दक्षता) · MKSS (पारदर्शिता) · खेजड़ली (पर्यावरण-रक्षा)
नीचे पट्टी: तथ्य → मूल्य → आज का प्रयोग
इसी अवधारणा का पुराना रूप: तीनों प्रश्न "उदाहरण सहित विवेचना" के रूप में आए; कोई प्रश्न एक व्यक्ति पर नहीं, एक सामान्य कथन पर था।
आम गलतियाँ
याद रखें
- केवल नाम-गिनती या प्रशंसा लिखना; हर उदाहरण में तथ्य, मूल्य और आज का प्रयोग तीनों न देना।
- पक्का न होने पर भी तिथि या संख्या लिख देना (जैसे पटेल को 'स्टील फ़्रेम' का श्रेय, या कामराज का एक वर्ष)।
- सभी उदाहरण राष्ट्रीय नेताओं के लेना; भाग ग में एक राजस्थान का उदाहरण (MKSS, खेजड़ली) अंक और प्रासंगिकता बढ़ाता है।
आत्म-जाँच (5 प्रश्न)
याद रखें
- उदाहरण से सीख निकालने की तीन बातें क्या हैं?
- 1917 के चंपारण में गांधीजी ने कार्रवाई से पहले क्या किया?
- राजस्थान RTI अधिनियम किस वर्ष लागू हुआ और राष्ट्रीय अधिनियम कब आया?
- पटेल के बारे में 'स्टील फ़्रेम' वाला दावा उत्तर में क्यों नहीं लिखना चाहिए?
- 2023 के प्रश्न में प्रशासन की भूमिका के दो रूप बताइए।
मिनी केस स्टडी
उदाहरण (काल्पनिक)काल्पनिक केस (Hypothetical case)
एक नए खंड विकास अधिकारी (BDO) को पता चलता है कि पंचायत की मज़दूरी-सूची के आँकड़े गाँव में कभी पढ़कर नहीं सुनाए गए। गाँव के युवा जन सुनवाई की माँग करते हैं। सरपंच कहते हैं कि "इससे गाँव में झगड़ा होगा", और एक वरिष्ठ अधिकारी सलाह देते हैं कि "बंद कमरे में निपटा लो।"
- हितधारक
- BDO, गाँव के मज़दूर और युवा, सरपंच, वरिष्ठ अधिकारी, ज़िला प्रशासन।
- मुद्दा और टकराते मूल्य
- पारदर्शिता और जवाबदेही बनाम स्थानीय शांति और वरिष्ठ का दबाव। साथ में निष्पक्षता: किसी को पहले से दोषी न मानना।
- तीन विकल्प
- (क) माँग टाल देना। लाभ: तत्काल शांति। हानि: अविश्वास बढ़ेगा; शिकायतें ऊपर पहुँचेंगी। (ख) केवल बंद कमरे में रिकॉर्ड जाँचना। लाभ: टकराव से बचाव। हानि: पारदर्शिता का उद्देश्य अधूरा; मज़दूर की आवाज़ नहीं। (ग) पूर्व-सूचना देकर शांतिपूर्ण सार्वजनिक सुनवाई करना, पहले रिकॉर्ड का स्वयं मिलान, पुलिस या वरिष्ठ को जानकारी, शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा के साथ। लाभ: विश्वास और जवाबदेही। हानि: कुछ दबाव और अतिरिक्त परिश्रम।
- सर्वोत्तम विकल्प और समर्थक मूल्य
- विकल्प (ग)। समर्थक मूल्य: पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक की सहभागिता; MKSS की जन सुनवाइयाँ इसका वास्तविक उदाहरण हैं।
सीख
कदम: अल्पकालिक: पहले स्वयं रिकॉर्ड-मिलान, तिथि की सार्वजनिक सूचना, वरिष्ठ को लिखित जानकारी, सभा में सबके लिए समान नियम। दीर्घकालिक: हर पंचायत में नियमित रिकॉर्ड-वाचन, शिकायत-निवारण की व्यवस्था, सीख का दस्तावेज़ बनाकर अन्य खंडों से साझा करना।
अभ्यास प्रश्न
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
राजा राममोहन राय के सुधार-कार्य से आज के प्रशासक को क्या सीख मिलती है?
आदर्श उत्तर
राममोहन राय ने सती जैसी कुप्रथा के विरुद्ध तर्क, प्रेस और जनमत के सहारे अभियान चलाया; माना जाता है कि इसी ने 1829 के विनियम की ज़मीन तैयार की। प्रशासक के लिए सीख है कि सामाजिक बदलाव केवल आदेश से नहीं, संवाद, साक्ष्य और समाज के समर्थन से टिकता है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
"Teachings of leaders and reformers never grow old. Bring out their significance in modern context."
आदर्श उत्तर
महापुरुषों की शिक्षाएँ इसलिए पुरानी नहीं पड़तीं कि वे सत्य, न्याय, सेवा और समता जैसे सार्वभौमिक मूल्यों पर टिकी हैं। गांधीजी ने चंपारण (1917) में कार्रवाई से पहले तथ्य जाँचे; अंबेडकर ने सामाजिक न्याय को संविधान में संस्थागत रूप दिया; विवेकानंद ने सेवा को साधना बनाया; राममोहन राय ने जनमत और कानून को जोड़ा। आज भ्रष्टाचार, असमानता और पर्यावरण-संकट के दौर में पारदर्शिता, समावेशन, संवेदनशीलता और जवाबदेही की ये सीखें और भी प्रासंगिक हैं। राजस्थान में MKSS की जन सुनवाइयाँ और बिश्नोइयों का खेजड़ली-बलिदान (1730) इसके स्थानीय उदाहरण हैं। पर सीख मूल्य की है, तरीके की नहीं; विवेकपूर्ण प्रयोग ही सच्चा अनुसरण है।
पिछले असली प्रश्न
2018पत्र II, भाग ग10 अंक
Teachings of leaders and reformers never grow old. Bring out their significance in modern context. उत्तर-सूत्र: शिक्षाएँ शाश्वत क्यों (सत्य, न्याय, सेवा जैसे सार्वभौमिक मूल्य) → 3-4 उदाहरण (ऊपर की तालिका) → आज के संदर्भ (भ्रष्टाचार, असमानता, पर्यावरण) → निष्कर्ष: सीख मूल्य की, तरीका समय के अनुसार।
2021पत्र II, भाग ग10 अंक
Each other's success teaches a lesson for better governance. Analyze this statement with examples. उत्तर-सूत्र: कथन का अर्थ (नीति-विस्तार, सहकारी सीख) → RTI और मध्याह्न भोजन के उदाहरण → सावधानी (स्थानीय ढलाव, केवल नकल नहीं) → निष्कर्ष।
2023पत्र II, भाग ग10 अंक
Discuss the role of administration in bringing about 'social reform'. उत्तर-सूत्र: (1) भूमिका: सामाजिक सुधार यानी कुप्रथा और भेदभाव हटाकर समता व न्याय की ओर बदलाव; संविधान (समानता, अस्पृश्यता-उन्मूलन, राज्य के नीति-निदेशक तत्त्व) आधार देता है। (2) प्रशासन क्या करता है: (क) कानूनों का प्रवर्तन: नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम 1955, दहेज निषेध अधिनियम 1961, बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006, सती (निवारण) अधिनियम 1987 (Commission of Sati (Prevention) Act); (ख) सेवाओं और योजनाओं की पहुँच: शिक्षा, मध्याह्न भोजन, छात्रवृत्ति; (ग) जागरूकता और संवाद: स्थानीय नेताओं, स्वयंसेवी संस्थाओं और स्वयं सहायता समूहों के साथ साझेदारी; (घ) पीड़ित का संरक्षण और शिकायत-निवारण; (ङ) आँकड़ों से निगरानी। (3) सीख: राममोहन राय का मेल (जनमत और कानून, 1829): केवल आदेश से बदलाव नहीं टिकता। (4) सावधानी: सामाजिक प्रतिरोध, संवेदनशीलता, निष्पक्षता, बल के बजाय सहमति। (5) निष्कर्ष: प्रशासन सुधार का सहायक और संवाहक है, समाज की भागीदारी के बिना स्थायी नहीं। (अधिनियमों के नाम और वर्ष इंडिया कोड और संबद्ध स्रोतों के अनुसार: नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम 1955 (मूल नाम अस्पृश्यता अपराध अधिनियम, 1955; 1976 में नाम बदला); दहेज निषेध अधिनियम 1961 (अधिनियम सं. 28); बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 (अधिनियम सं. 6 / 2007, स्वीकृति 10 जनवरी 2007, लागू 1 नवंबर 2007); सती अधिनियम का संक्षिप्त नाम 1987 है, पर अधिनियम-क्रमांक 3 / 1988। उत्तर में नाम और संक्षिप्त नाम वाला वर्ष लिखें।)
यह उत्तर कैसे लिखें
भूमिका
शिक्षाएँ शाश्वत क्यों: सार्वभौमिक मूल्य
मुख्य भाग
- 3-4 उदाहरण, हर एक में तथ्य और मूल्य
- आज का संदर्भ: भ्रष्टाचार, असमानता, पर्यावरण
निष्कर्ष
मूल्य की सीख, तरीका समय के अनुसार
अतिरिक्त मूल्य
- MKSS या खेजड़ली जैसा राजस्थान का उदाहरण
एक पेज में दोहराव
- तथ्य → मूल्य → आज का प्रयोग
- गांधी (चंपारण 1917, दांडी 1930)
- अंबेडकर (प्रारूप समिति, महाड़ 1927)
- विवेकानंद (1893, 1897)
- राय (1828, सती, 1829 विनियम)
- पटेल (21 अप्रैल 1947, अक्तूबर 1949; 'स्टील फ़्रेम' नहीं)
- कलाम (SLV-III, 1980)
- विश्वेश्वरैया (खड़कवासला)
- MKSS (1987 बसे, 1990 गठन, पहली जन सुनवाई 2.12.1994; RTI राजस्थान 2000, लागू 2001; केंद्र 2005)
- मध्याह्न भोजन (कामराज-काल, 1982 MGR, 1995, 28.11.2001, PM पोषण 2021)
- खेजड़ली 1730
- असली PYQ: 2018 Q12, 2021 Q13, 2023 Q11
- अंधानुकरण नहीं
- काल्पनिक केस: BDO और जन सुनवाई।