खेल नीतियाँ और प्रमुख संस्थाएँ: राष्ट्रीय खेल नीति 2025, खेल शासन अधिनियम, SAI, खेलो इंडिया और राजस्थान
नीति, क़ानून, संस्थाएँ और योजनाएँ: खेल-शासन की चार परतें, 2 अक्टूबर 2026 तक की स्थिति के साथ।
- खेल नीति
- खेल शासन अधिनियम 2025
- खेलो इंडिया
- राजस्थान
सिलेबस में
RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई I, 'चालू घटनाएँ और मुद्दे' के अंतिम दो बिंदुओं में पहला बिंदु: "Sports policies, key institutions, significant sports events and achievements of India and Rajasthan." इस पृष्ठ पर इसका नीति और संस्थाओं वाला हिस्सा है: राष्ट्रीय खेल नीति, खेल-शासन का ढाँचा, प्रमुख योजनाएँ, राष्ट्रीय खेल पुरस्कार और राजस्थान का संस्थागत ढाँचा। खेल-आयोजनों और उपलब्धियों का हिस्सा अलग पृष्ठ पर है।
इस विषय को क्यों पढ़ें
याद रखें
- 2018, 2021, 2023 और 2024 के पेपर III में इकाई III का भाग क "खेल" था, पर उपलब्ध पेपर-पाठों (2013 से 2024) में इस विषय का कोई प्रश्न नहीं मिलता। इसलिए इस पृष्ठ पर पिछले वर्षों के प्रश्न नहीं हैं, केवल अभ्यास-प्रश्न हैं।
- जनवरी 2026 के सिलेबस में खेल अलग इकाई नहीं रहा; वह चालू घटनाओं के अंतिम दो बिंदुओं में है। इसलिए प्रश्न का स्वरूप तथ्य और समसामयिक विश्लेषण का मिश्रण हो सकता है: नई नीति, नया क़ानून, नई योजना।
- 2025 और 2026 में इस विषय में बड़े बदलाव हुए: राष्ट्रीय खेल नीति 2025, राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम 2025 और उसके नियम, तथा खेलो इंडिया का पुनर्गठन। यही हिस्से सबसे ज़्यादा परीक्षा-योग्य हैं और नीचे स्थिति के साथ दिए गए हैं।
खेल-शासन: पहले एक तस्वीर
मोहल्ले का एक क्रिकेट टूर्नामेंट सोचिए। कुछ लोग तय करते हैं कि टूर्नामेंट का उद्देश्य क्या है (नीति)। नियम-पुस्तिका बनती है और अंपायर नियुक्त होते हैं (क़ानून और विवाद-निपटान)। मैदान, किट और कोच का इंतज़ाम एक समिति करती है (संस्थाएँ)। और नए खिलाड़ियों को चुनकर आगे बढ़ाने के लिए अलग कार्यक्रम चलता है (योजनाएँ)। भारत की खेल-व्यवस्था भी इन्हीं चार परतों पर टिकी है, बस पैमाना देश का है।
परीक्षा के लिए इसे इस तरह याद रखें। परत एक: नीति, यानी सरकार की दिशा। परत दो: विधि, यानी वह क़ानून जो खेल-संगठनों को जवाबदेह बनाता है। परत तीन: संस्थाएँ, यानी खेल मंत्रालय, भारतीय खेल प्राधिकरण, ओलंपिक समिति और राष्ट्रीय खेल महासंघ। परत चार: योजनाएँ, यानी खेलो इंडिया, टॉप्स और फ़िट इंडिया। हर प्रश्न का उत्तर इन चारों में से किसी एक या दो परतों पर खड़ा होता है।
परिभाषा के रूप में: खेल-शासन (sports governance) वह ढाँचा है जिसके अंतर्गत सरकार, खेल-निकाय और खिलाड़ी मिलकर खेल के विकास, उत्कृष्टता, पारदर्शी प्रशासन और खिलाड़ियों के कल्याण के नियम तय करते और लागू करते हैं। 2025 का राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम स्वयं अपनी प्रस्तावना में खेल के विकास, खिलाड़ियों के कल्याण, नैतिक आचरण और खेल-विवादों के समाधान को अपना उद्देश्य बताता है (स्रोत: राजपत्र की प्रति)।
राष्ट्रीय खेल नीति: 1984, 2001 और 2025
भारत में खेल को संगठित ढाँचा देने की पहली कोशिश राष्ट्रीय खेल नीति 1984 थी, जिसे बाद की नीति का पूर्ववर्ती माना गया है। राष्ट्रीय खेल नीति 2001 का उद्देश्य खेलों का व्यापक आधार बनाना, उत्कृष्टता हासिल करना, आधारभूत ढाँचे का उन्नयन, राष्ट्रीय खेल महासंघों को सहायता, खेल-विज्ञान और प्रशिक्षण को मज़बूत करना, महिलाओं, अनुसूचित जनजातियों और ग्रामीण युवाओं की भागीदारी बढ़ाना और कॉर्पोरेट क्षेत्र को जोड़ना था। उसने खेल और शारीरिक शिक्षा को पाठ्यक्रम का अंग बनाने पर भी बल दिया।
1 जुलाई 2025 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय खेल नीति 2025 को मंज़ूरी दी, जिसे 'खेलो भारत नीति 2025' नाम से भी पुकारा गया है। यह 2001 की नीति का स्थान लेती है और भारत को वैश्विक खेल-शक्ति बनाने तथा 2036 के ओलंपिक सहित अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में मज़बूत दावेदार बनाने का रोडमैप देती है। नीति केंद्रीय मंत्रालयों, नीति आयोग, राज्य सरकारों, राष्ट्रीय खेल महासंघों, खिलाड़ियों और विशेषज्ञों से परामर्श के बाद बनी है।
नीति की एक अहम बात यह है कि वह राज्यों के लिए 'मॉडल नीति' का काम करेगी और राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को अपनी नीतियाँ उसके अनुरूप बनाने या संशोधित करने के लिए प्रेरित करेगी। यानी राजस्थान जैसे राज्य की खेल नीति पर भी इसका असर आगे दिख सकता है। साथ ही नीति 'सम्पूर्ण-सरकार दृष्टिकोण' अपनाती है: खेल केवल खेल मंत्रालय का काम नहीं, सभी मंत्रालयों की योजनाओं में खेल का समावेश होना चाहिए।
राष्ट्रीय खेल नीति 2025 के पाँच स्तंभ
| स्तंभ | मुख्य बिंदु (PIB के अनुसार) |
|---|---|
| 1. वैश्विक मंच पर उत्कृष्टता | ज़मीनी स्तर से शीर्ष स्तर तक कार्यक्रम, प्रतिभा की शीघ्र पहचान, प्रतिस्पर्धी लीग, प्रशिक्षण और कोचिंग प्रणाली, खेल-विज्ञान और तकनीक, राष्ट्रीय खेल महासंघों की क्षमता और शासन |
| 2. आर्थिक विकास के लिए खेल | खेल-पर्यटन, बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन, खेल-उपकरण विनिर्माण, स्टार्टअप, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) और कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) |
| 3. सामाजिक विकास के लिए खेल | महिलाओं, आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों, जनजातीय समुदायों और दिव्यांगजनों की भागीदारी; स्वदेशी और पारंपरिक खेलों का पुनरुद्धार; खेल को करियर के रूप में स्थापित करना |
| 4. जन-आंदोलन के रूप में खेल | फ़िटनेस की संस्कृति, राष्ट्रव्यापी अभियान, विद्यालय-महाविद्यालय-कार्यस्थल के लिए फ़िटनेस सूचकांक, खेल-सुविधाओं तक सार्वभौमिक पहुँच |
| 5. शिक्षा से एकीकरण (NEP 2020) | खेल को विद्यालय पाठ्यक्रम में जोड़ना; शारीरिक शिक्षा शिक्षकों का विशेष प्रशिक्षण |
क्रियान्वयन-ढाँचे में शासन और क़ानूनी ढाँचा, निजी वित्त, तकनीक और AI, राष्ट्रीय निगरानी ढाँचा (KPI और समय-सीमा), राज्यों के लिए मॉडल नीति और सम्पूर्ण-सरकार दृष्टिकोण शामिल हैं।
संस्थागत ढाँचा: कौन क्या करता है
खेल-शासन की सबसे ऊपरी कड़ी केंद्र सरकार का युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय (MYAS) है, जिसके अंतर्गत खेल विभाग (Department of Sports) आता है। राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम 2025 में भी केंद्र सरकार के 'खेल विभाग' के सचिव को राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण की चयन-समिति में रखा गया है। मंत्रालय नीति बनाता है, योजनाएँ चलाता है और राष्ट्रीय खेल महासंघों को मान्यता देता है।
भारतीय खेल प्राधिकरण (Sports Authority of India, SAI) मंत्रालय का क्रियान्वयन-अंग है। SAI की स्थापना 1984 में नौवें एशियाई खेलों (नई दिल्ली, 1982) की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए हुई। यह सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के अंतर्गत पंजीकृत समिति है और खेल विभाग के 25 जनवरी 1984 के संकल्प के आधार पर बनी। उसके दोहरे उद्देश्य हैं: खेलों को बढ़ावा देना और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल-उत्कृष्टता हासिल करना। वह दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम, इंदिरा गांधी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, मेजर ध्यानचंद राष्ट्रीय स्टेडियम, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी तरणताल परिसर और डॉ. कर्णी सिंह शूटिंग रेंज का रखरखाव भी करता है। साथ ही खेलो इंडिया, राष्ट्रीय खेल महासंघों को सहायता, टॉप्स और फ़िट इंडिया जैसी योजनाओं के क्रियान्वयन में मंत्रालय की मदद करता है।
SAI अपनी योजनाएँ क्षेत्रीय केंद्रों के माध्यम से चलाता है: बेंगलुरु, कोलकाता, गांधीनगर, मुंबई (कांदिवली), भोपाल, सोनीपत, लखनऊ, चंडीगढ़, गुवाहाटी और इम्फाल। शैक्षणिक शाखाएँ पटियाला (एन.एस.एन.आई.एस.) और तिरुवनंतपुरम (एल.एन.सी.पी.ई.) में हैं। योजनाएँ चार स्तर की हैं: राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (NCOE) ओलंपिक-स्तर के प्रशिक्षण के लिए, SAI प्रशिक्षण केंद्र (STC) 10 से 18 वर्ष के खिलाड़ियों के लिए, STC के विस्तार केंद्र, और राष्ट्रीय खेल प्रतिभा खोज (NSTC) 8 से 14 वर्ष के विद्यालयी बच्चों की पहचान के लिए।
भारतीय ओलंपिक संघ (Indian Olympic Association, IOA) भारत की राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (National Olympic Committee, NOC) है और अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) से मान्यता प्राप्त है। संसद को दिए उत्तर में इसे सोसायटी पंजीकरण अधिनियम 1860 के अंतर्गत पंजीकृत स्वायत्त निकाय बताया गया। ओलंपिक की मेज़बानी के लिए IOC से बातचीत की प्रक्रिया यही समिति आगे बढ़ाती है; 2024 में सरकार ने बताया कि IOA ने इसके लिए IOC की भावी मेज़बान आयोग (Future Host Commission) से संवाद शुरू किया है। 2025 के अधिनियम ने राष्ट्रीय ओलंपिक समिति को और राष्ट्रीय पैरालंपिक समिति को क़ानूनी रूप से 'राष्ट्रीय खेल निकाय' का दर्जा दिया है।
राष्ट्रीय खेल महासंघ (National Sports Federations, NSF) अपने-अपने खेल की सर्वोच्च संस्था होते हैं, जैसे हॉकी, कुश्ती या बैडमिंटन का महासंघ। सरकार केवल राष्ट्रीय स्तर के महासंघों से व्यवहार करती है और उन्हें मान्यता देती है, ताकि वे वित्तीय सहायता पा सकें। 2010 से सरकार ने वार्षिक मान्यता की प्रणाली अपनाई, जिसमें उन्हीं महासंघों को वार्षिक मान्यता मिलती है जो 'राष्ट्रीय खेल विकास संहिता, 2011' (NSDCI) का पालन करें और समय पर चुनाव कराएँ। इस संहिता में चुनाव के आदर्श दिशानिर्देश, पदाधिकारियों की आयु और कार्यकाल की सीमा जैसे प्रावधान हैं। 2019 के उत्तर में सरकार ने 56 मान्यता-प्राप्त महासंघों की सूची दी थी; यह संख्या समय-समय पर बदलती रहती है।
प्रमुख संस्थाओं की तुलना
प्रकृति
युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय (खेल विभाग)केंद्र सरकार का मंत्रालय
भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI)सोसायटी अधिनियम 1860 के अंतर्गत पंजीकृत समिति, स्थापना 1984
भारतीय ओलंपिक संघ (IOA)राष्ट्रीय ओलंपिक समिति; पंजीकृत स्वायत्त निकाय
राष्ट्रीय खेल महासंघ (NSF)प्रत्येक खेल की राष्ट्रीय शासी संस्था
राष्ट्रीय खेल बोर्ड (NSB)2025 के अधिनियम से बनने वाला वैधानिक निकाय
राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण2025 के अधिनियम से बनने वाला न्यायाधिकरण
मुख्य भूमिका
युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय (खेल विभाग)नीति-निर्माण, योजनाएँ, NSF को मान्यता और सहायता, खेल पुरस्कारों का प्रशासन
भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI)प्रतिभा खोज, प्रशिक्षण केंद्र, उत्कृष्टता केंद्र, दिल्ली के स्टेडियमों का रखरखाव, मंत्रालय की योजनाओं का क्रियान्वयन
भारतीय ओलंपिक संघ (IOA)ओलंपिक आंदोलन में भारत का प्रतिनिधित्व, IOC से संवाद, ओलंपिक की मेज़बानी के प्रयास
राष्ट्रीय खेल महासंघ (NSF)खेल का संचालन, चयन, राष्ट्रीय प्रतियोगिताएँ; मान्यता मिलने पर सरकारी सहायता
राष्ट्रीय खेल बोर्ड (NSB)राष्ट्रीय खेल निकायों को मान्यता देना, जाँच, मान्यता निलंबित या रद्द करना, एड-हॉक निकाय बनाना
राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरणखेल-विवादों का स्वतंत्र, त्वरित और कम ख़र्चीला निपटारा
मंत्रालय, SAI, NSF और IOA की भूमिकाएँ PIB और SAI के आधिकारिक पृष्ठों पर आधारित हैं; NSB और न्यायाधिकरण राजपत्र में प्रकाशित अधिनियम के अनुसार हैं।
राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम, 2025: मुख्य प्रावधान
पहले भारत में खेल-महासंघों की जवाबदेही केवल सरकारी निर्देशों और संहिता पर टिकी थी। अब पहली बार इसके लिए अलग संसदीय क़ानून है। विधेयक लोक सभा में 11 अगस्त 2025 को और राज्य सभा में 12 अगस्त 2025 को पारित हुआ और 18 अगस्त 2025 को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली। यह 2025 का अधिनियम संख्या 25 है। अधिनियम की धारा 1(2) के अनुसार वह केंद्र सरकार की अधिसूचित तिथियों से, अलग-अलग प्रावधानों के लिए अलग तिथियों पर, लागू होता है।
राष्ट्रीय खेल निकाय (धारा 3): राष्ट्रीय ओलंपिक समिति, राष्ट्रीय पैरालंपिक समिति (दोनों एक-एक, बहु-खेल), प्रत्येक अधिसूचित खेल के लिए राष्ट्रीय खेल महासंघ और क्षेत्रीय खेल महासंघ। राष्ट्रीय ओलंपिक समिति और राष्ट्रीय पैरालंपिक समिति के लिए संबंधित अंतरराष्ट्रीय समिति की मान्यता अनिवार्य है।
प्रत्येक राष्ट्रीय खेल निकाय की संरचना (धारा 4): साधारण सभा, अधिकतम पंद्रह सदस्यों की कार्यकारी समिति (कम से कम दो उत्कृष्ट खिलाड़ी, एथलीट समिति से दो निर्वाचित सदस्य और कम से कम चार महिलाएँ), नैतिकता समिति, विवाद समाधान समिति, एथलीट समिति, तथा अध्यक्ष, महासचिव और कोषाध्यक्ष। चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु 25 वर्ष है और सामान्यतः आयु 70 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए; 70 से 75 वर्ष के बीच केवल तब, जब अंतरराष्ट्रीय चार्टर और उपनियम अनुमति दें। अध्यक्ष, महासचिव या कोषाध्यक्ष का पद लगातार अधिकतम तीन कार्यकाल तक रखा जा सकता है, उसके बाद एक कार्यकाल का अनिवार्य विराम (cooling off) होता है। कार्यकारी समिति का कार्यकाल अधिकतम चार वर्ष है।
राष्ट्रीय खेल बोर्ड (धारा 5 और 6): केंद्र सरकार अधिसूचना द्वारा बोर्ड स्थापित कर सकती है (धारा 5(1)), जिसमें एक अध्यक्ष और अन्य सदस्य होते हैं; इनकी नियुक्ति खोज-सह-चयन समिति की सिफ़ारिश पर होती है और मुख्यालय दिल्ली में है। बोर्ड मान्यता देता है, राष्ट्रीय खेल निकायों और उनकी संबद्ध इकाइयों का रजिस्टर रखता है, शिकायतों या स्वयं संज्ञान पर जाँच करता है, एड-हॉक प्रशासनिक निकाय बना सकता है, नैतिकता संहिता के दिशानिर्देश देता है और 'सुरक्षित खेल नीति' (Safe Sports Policy) बनाता है, जो महिलाओं और नाबालिग खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए है। अंतरराष्ट्रीय मान्यता निलंबित या रद्द होने, अधिनियम के उल्लंघन या रजिस्ट्रार द्वारा गंभीर अनियमितता की रिपोर्ट जैसी स्थितियों में बोर्ड मान्यता निलंबित या रद्द कर सकता है (धारा 10)।
जवाबदेही के प्रावधान: केवल मान्यता-प्राप्त खेल संगठन ही केंद्र सरकार से अनुदान या वित्तीय सहायता पा सकते हैं, और जो संगठन केंद्र या राज्य सरकार से सहायता लेते हैं वे उस सहायता के उपयोग के संबंध में सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत 'लोक प्राधिकारी' माने जाएँगे (धारा 14)। चुनाव की निष्पक्षता के लिए 'राष्ट्रीय खेल निर्वाचन पैनल' बनेगा, जिसमें भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त, चुनाव आयुक्त, उप चुनाव आयुक्त, पूर्व राज्य चुनाव आयुक्त या राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारी जैसे अनुभवी लोग होंगे (धारा 16)।
राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण (धारा 17 से 25): एक अध्यक्ष और दो सदस्य; अध्यक्ष सर्वोच्च न्यायालय के वर्तमान या पूर्व न्यायाधीश अथवा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (वर्तमान या पूर्व) होंगे। नियुक्ति की सिफ़ारिश करने वाली समिति में भारत के मुख्य न्यायाधीश या उनके द्वारा अनुशंसित सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश (अध्यक्ष), विधि और न्याय मंत्रालय के सचिव तथा खेल विभाग के सचिव होते हैं। न्यायाधिकरण के आदेश (अंतरिम आदेश छोड़कर) के विरुद्ध 30 दिन के भीतर सर्वोच्च न्यायालय में अपील हो सकती है, जब तक अंतरराष्ट्रीय चार्टर में खेल पंचाट न्यायालय (CAS) में अपील का प्रावधान न हो। न्यायाधिकरण ओलंपिक, एशियाई या राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान उपजे विवादों, राष्ट्रीय डोपिंग-रोधी अधिनियम 2022 के अंतर्गत डोपिंग-विवादों और CAS या किसी अंतरराष्ट्रीय महासंघ के अनन्य क्षेत्राधिकार वाले विवादों पर निर्णय नहीं करता (धारा 20)।
अधिनियम 2025 का क्रियान्वयन: स्थिति (अंतिम जाँच: 2 अक्टूबर 2026)
| तिथि | घटना |
|---|---|
| 11 और 12 अगस्त 2025 | विधेयक क्रमशः लोक सभा और राज्य सभा में पारित |
| 18 अगस्त 2025 | राष्ट्रपति की स्वीकृति; राजपत्र में प्रकाशन (2025 का अधिनियम 25) |
| 15 अक्टूबर 2025 | तीन मसौदा नियमों (राष्ट्रीय खेल निकाय, राष्ट्रीय खेल बोर्ड, राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण) पर जन-प्रतिक्रिया आमंत्रित; अंतिम तिथि 14 नवंबर 2025 |
| 1 जनवरी 2026 | चुनिंदा प्रावधान लागू (धारा 1 से 3, धारा 4 की उपधाराएँ (1), (2), (4), धारा 5 की उपधाराएँ (1), (2), धारा 8(5), धारा 11(1), धाराएँ 14 और 15, धारा 17 की उपधाराएँ (1) से (7) और (10), धाराएँ 30, 31 और 33 से 38) |
| 12 जनवरी 2026 | राष्ट्रीय खेल शासन (राष्ट्रीय खेल निकाय) नियम, 2026 अधिसूचित |
| 26 मई 2026 | राष्ट्रीय खेल बोर्ड नियम, 2026 और राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण नियम, 2026 अधिसूचित |
बोर्ड और न्यायाधिकरण के सदस्यों की नियुक्तियों पर यहाँ कोई कथन नहीं है; उनकी स्थिति केवल आधिकारिक अधिसूचना से लिखें।
2026 के नियमों से क्या ठोस बदला
राष्ट्रीय खेल निकाय नियम, 2026 के अनुसार राष्ट्रीय खेल निकायों की साधारण सभा में कम से कम चार 'उत्कृष्ट खिलाड़ी' (Sportspersons of Outstanding Merit) होने चाहिए, और इन उत्कृष्ट खिलाड़ियों में पचास प्रतिशत महिलाएँ। कार्यकारी समिति में कम से कम चार महिलाओं की अनिवार्यता का पालन उपनियमों के ज़रिये पदों के आरक्षण से हो सकता है। उत्कृष्ट खिलाड़ी के रूप में आवेदन करने वाले की आयु 25 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए और उसे सक्रिय खेल से संन्यास ले चुका और आवेदन से पहले कम से कम एक वर्ष से निष्क्रिय होना चाहिए। उपलब्धि के आधार पर दस श्रेणियाँ तय हैं, ओलंपिक या पैरालंपिक पदक विजेताओं से लेकर राष्ट्रीय खेलों या राष्ट्रीय चैंपियनशिप के पदक विजेताओं तक।
राष्ट्रीय खेल निर्वाचन पैनल में हर समय कम से कम बीस सदस्य रहेंगे। निर्वाचन अधिकारी का शुल्क अधिकतम पाँच लाख रुपये तय हुआ है। हर राष्ट्रीय खेल निकाय को छह माह में अपने उपनियम अधिनियम के अनुरूप संशोधित करने होंगे, और आवेदन पर केंद्र सरकार बारह माह तक के लिए छूट दे सकती है। जो व्यक्ति न्यायालय से दोषसिद्ध होकर कारावास की सज़ा पा चुका है, वह कार्यकारी समिति या एथलीट समिति का चुनाव नहीं लड़ सकता।
राष्ट्रीय खेल बोर्ड नियम, 2026 के अनुसार बोर्ड में एक अध्यक्ष और दो सदस्य होंगे, जिनकी नियुक्ति केंद्र सरकार खोज-सह-चयन समिति के पैनल से करेगी। बोर्ड राष्ट्रीय खेल निकायों को मान्यता देने और शासन, वित्तीय तथा नैतिक मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करने वाला केंद्रीय प्राधिकरण होगा। न्यायाधिकरण नियमों में विवाद दाख़िल करने, नोटिस, आदेश के प्रकाशन और आभासी सुनवाई के लिए एक समर्पित पोर्टल की व्यवस्था है, ताकि प्रक्रिया डिजिटल और तेज़ हो।
समय-रेखा: खेल-नीति और संस्थाएँ
1984
भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) की स्थापना; राष्ट्रीय खेल नीति 1984
2001
राष्ट्रीय खेल नीति 2001
2010 और 2011
NSF की वार्षिक मान्यता (2010 से); राष्ट्रीय खेल विकास संहिता 2011
2014
टॉप्स (Target Olympic Podium Scheme) की शुरुआत, सितंबर 2014
2017
खेलो इंडिया का पुनर्गठित कार्यक्रम, मंत्रिमंडल की मंज़ूरी (सितंबर 2017)
2019
फ़िट इंडिया आंदोलन का शुभारंभ, 29 अगस्त 2019
2021
राजीव गांधी खेल रत्न का नाम मेजर ध्यानचंद खेल रत्न, 6 अगस्त 2021
2025
राष्ट्रीय खेल नीति 2025 (1 जुलाई); राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम (18 अगस्त)
2026
अधिनियम का आंशिक प्रवर्तन (1 जनवरी); नियम (जनवरी और मई); खेलो इंडिया का नया चरण 2026 से 2031 (31 जुलाई)
प्रमुख योजनाएँ: खेलो इंडिया, टॉप्स, ANSF और फ़िट इंडिया
खेलो इंडिया (Khelo India, 'खेलो इंडिया: खेल विकास का राष्ट्रीय कार्यक्रम') 2016-17 में शुरू हुआ, जिसके दोहरे उद्देश्य हैं: जन-भागीदारी और उत्कृष्टता का विकास। सितंबर 2017 में मंत्रिमंडल ने इसके पुनर्गठित रूप को 2017-18 से 2019-20 के लिए 1,756 करोड़ रुपये की लागत पर मंज़ूरी दी, जिसमें हर वर्ष एक हज़ार प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आठ वर्ष तक पाँच लाख रुपये वार्षिक छात्रवृत्ति की व्यवस्था थी (यह 2017 की रूपरेखा है; राशियाँ और संख्याएँ बाद में बदली हैं)। कोविड के दौरान 2020-21 के लिए अंतरिम विस्तार हुआ और फिर 2021-22 से 2025-26 के लिए पाँच घटकों वाली योजना चली: खेल अधोसंरचना का निर्माण और उन्नयन, खेल प्रतियोगिताएँ और प्रतिभा विकास, खेलो इंडिया केंद्र और खेल अकादमियाँ, फ़िट इंडिया आंदोलन, और खेल के माध्यम से समावेशन।
31 जुलाई 2026 को मंत्रिमंडल ने संशोधित खेलो इंडिया योजना और राष्ट्रीय खेल महासंघों को बढ़ी हुई सहायता (ANSF) को मिलाकर 2026-27 से 2030-31 के लिए कुल 36,441 करोड़ रुपये के परिव्यय को मंज़ूरी दी। इसमें राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र, खेलो इंडिया उत्कृष्टता केंद्र, SAI प्रशिक्षण केंद्र, मान्यता-प्राप्त अकादमियाँ, खेलो इंडिया केंद्र और सशस्त्र बलों की युवा खेल कंपनियों का एकीकृत ढाँचा है। विद्यालयों के लिए दो नई पहलें 'खेलो इंडिया फ़ीडर स्कूल' और 'खेलो इंडिया उत्कृष्ट विद्यालय' हैं। 'उभरते खेलो इंडिया खिलाड़ी' (E-KIA) की नई श्रेणी से खिलाड़ी-पूल लगभग दस गुना बढ़ाने का लक्ष्य है। प्रशिक्षकों के मानक तय करने के लिए राष्ट्रीय कोच प्रत्यायन बोर्ड (NCAB) और एकीकृत डिजिटल खेल मंच की व्यवस्था है। परिव्यय का आँकड़ा बजट-योग्य और बदल सकने वाली जानकारी है, इसलिए उत्तर में वर्ष के साथ लिखें।
टॉप्स (Target Olympic Podium Scheme) खेल मंत्रालय ने सितंबर 2014 में शुरू की, ताकि ओलंपिक और पैरालंपिक में भारत का प्रदर्शन सुधरे। अप्रैल 2018 में इसे पुनर्गठित कर खिलाड़ियों के प्रबंधन के लिए तकनीकी सहयोग-दल बनाया गया। इसमें चुने हुए खिलाड़ियों को विदेशी प्रशिक्षण, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएँ, उपकरण, कोचिंग शिविर और मासिक भत्ते की सहायता मिलती है (SAI के पृष्ठ पर मासिक भत्ता 50,000 रुपये बताया गया है)। 2026 की मंज़ूरी में ज़मीनी प्रतियोगिताओं से खेलो इंडिया और फिर टॉप्स तक की स्पष्ट प्रगति-सीढ़ी बताई गई है।
राष्ट्रीय खेल महासंघों को सहायता (Assistance to National Sports Federations, ANSF) योजना में मान्यता-प्राप्त महासंघों को प्रशिक्षण, अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भागीदारी, राष्ट्रीय चैंपियनशिप, विदेशी कोच और खेल-विज्ञान के लिए धन मिलता है। जुलाई 2025 में संशोधित मानकों के अनुसार महासंघों को अपने वार्षिक बजट का कम से कम 20 प्रतिशत संबद्ध इकाइयों के माध्यम से ज़मीनी विकास पर और कम से कम 10 प्रतिशत योजना-निधि कोचों और तकनीकी स्टाफ़ के विकास पर ख़र्च करना है; दस करोड़ रुपये या उससे अधिक बजट वाले महासंघों को उच्च-प्रदर्शन निदेशक (High Performance Director) की नियुक्ति करनी होगी।
फ़िट इंडिया आंदोलन का शुभारंभ प्रधानमंत्री ने 29 अगस्त 2019 को, राष्ट्रीय खेल दिवस पर, इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम, नई दिल्ली से किया। राष्ट्रीय खेल दिवस मेजर ध्यानचंद की जयंती (29 अगस्त) पर मनाया जाता है। खेलो इंडिया पोर्टल के अनुसार अब फ़िट इंडिया की गतिविधियों में फ़्रीडम रन, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, साइक्लोथॉन और सामुदायिक भागीदारी शामिल हैं; पाँच वर्ष में 300 करोड़ रुपये के आवंटन और फ़िट इंडिया सूचकांक जैसी योजनाएँ प्रस्तावित बताई गई हैं।
योजनाओं का एक नज़र में सार
| योजना | शुरुआत या चरण | मुख्य उद्देश्य | स्थिति या टिप्पणी |
|---|---|---|---|
| खेलो इंडिया | 2016-17 में शुरू; 2017 में पुनर्गठन; 2021-22 से 2025-26; 2026-27 से 2030-31 का नया चरण | जन-भागीदारी और उत्कृष्टता; प्रतिभा-पहचान से कोचिंग तक का मार्ग | नया चरण 31 जुलाई 2026 को मंज़ूर (ANSF के साथ कुल 36,441 करोड़ रुपये) |
| टॉप्स | सितंबर 2014; पुनर्गठन अप्रैल 2018 | ओलंपिक और पैरालंपिक पदक की संभावना वाले शीर्ष खिलाड़ियों को समग्र सहायता | खिलाड़ियों की संख्या और भत्ते बदलते रहते हैं |
| ANSF | निरंतर योजना; संशोधित मानक जुलाई 2025 | मान्यता-प्राप्त राष्ट्रीय महासंघों को प्रशिक्षण और आयोजनों के लिए सहायता | 2026-31 के लिए सुदृढ़ रूप में स्वीकृत |
| फ़िट इंडिया | 29 अगस्त 2019 | फ़िटनेस को जन-आंदोलन बनाना | अब खेलो इंडिया योजना का एक घटक |
संख्याएँ और परिव्यय समय-संवेदनशील हैं, इसलिए उत्तर में स्रोत-वर्ष के साथ लिखें।
प्रतिभा का मार्ग: विद्यालय से ओलंपिक तक
ज़मीनी प्रतियोगिताएँ
विद्यालय, विश्वविद्यालय और क्षेत्रीय लीग
प्रतिभा-पहचान
प्रतिभा-खोज समितियाँ, क्षेत्रीय समितियाँ और प्रतिभा-खोजक (2026 का ढाँचा)
खेलो इंडिया
केंद्र, अकादमियाँ, खेलो इंडिया खिलाड़ी (KIA) और E-KIA
टॉप्स
ओलंपिक और पैरालंपिक के लिए समग्र सहायता
पदक-मंच
राष्ट्रीय खेल महासंघों और ANSF के सहारे अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएँ
राष्ट्रीय खेल पुरस्कार: ढाँचा और परिभाषाएँ
राष्ट्रीय खेल पुरस्कार हर वर्ष युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय द्वारा दिए जाते हैं और राष्ट्रपति भवन में समारोह में प्रदान किए जाते हैं। चयन एक समिति करती है, जिसकी अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश करते हैं और उसमें प्रमुख खिलाड़ी, खेल-पत्रकार तथा खेल-प्रशासक होते हैं। आवेदन ऑनलाइन पोर्टल से लिए जाते हैं।
पुरस्कारों की मूल श्रेणियाँ छह मानी जाती हैं: मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार, अर्जुन पुरस्कार, द्रोणाचार्य पुरस्कार, मेजर ध्यानचंद पुरस्कार (जीवनपर्यंत उपलब्धि), मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ट्रॉफ़ी (MAKA) और राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार। इनके अलावा तेनज़िंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार भी दिया जाता है, जो खेल पुरस्कारों के साथ दिया जाता रहा है। राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम 6 अगस्त 2021 को बदलकर मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार किया गया; पुरस्कार की स्थापना 1991-92 में हुई थी।
राशि के संबंध में 2020 में सरकार ने खेल रत्न की राशि 7.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये, अर्जुन पुरस्कार की 5 लाख से बढ़ाकर 15 लाख रुपये, द्रोणाचार्य (नियमित श्रेणी) की 5 लाख से 10 लाख रुपये और (जीवनपर्यंत श्रेणी) की 5 लाख से 15 लाख रुपये, तथा ध्यानचंद पुरस्कार की 5 लाख से 10 लाख रुपये की थी। ये राशियाँ 2020 की संशोधित राशियाँ हैं और समय के साथ बदल सकती हैं, इसलिए उत्तर में वर्ष के साथ लिखें।
राष्ट्रीय खेल पुरस्कार: श्रेणीवार संरचना
| पुरस्कार | स्थापना | किसे और किस आधार पर |
|---|---|---|
| मेजर ध्यानचंद खेल रत्न | 1991-92 (2021 में नया नाम) | खिलाड़ी को पिछले चार वर्षों के शानदार और सर्वाधिक उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए; भारत का सर्वोच्च खेल सम्मान |
| अर्जुन पुरस्कार | 1961 | पिछले चार वर्षों के अच्छे प्रदर्शन तथा नेतृत्व, खेल-भावना और अनुशासन के लिए; आजीवन श्रेणी भी (2024 की घोषणा में 'Arjuna Award (Lifetime)') |
| द्रोणाचार्य पुरस्कार | 1985 | उत्कृष्ट प्रशिक्षकों के लिए जिनके प्रशिक्षित खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में चमके; नियमित और जीवनपर्यंत श्रेणियाँ |
| मेजर ध्यानचंद पुरस्कार | 2002 | खेल में जीवनपर्यंत उपलब्धि और सेवानिवृत्ति के बाद भी खेल-संवर्धन में योगदान के लिए |
| मौलाना अबुल कलाम आज़ाद (MAKA) ट्रॉफ़ी | 1956-57 | खेलो इंडिया विश्वविद्यालय खेलों में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले विश्वविद्यालय को |
| राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार | 2009 | खेल-प्रोत्साहन में भूमिका निभाने वाले संगठनों, कंपनियों और व्यक्तियों को |
श्रेणी-वर्णन PIB की 2021 और 2024 की सामग्री पर आधारित; 2024 की घोषणा में आजीवन अर्जुन पुरस्कार दिखता है।
राजस्थान: राज्य खेल परिषद और प्रारूप नीति में वर्णित ढाँचा
राज्य स्तर पर वही चार परतें दोहराई जाती हैं: नीति, संस्था, संगठन और योजनाएँ। राजस्थान की सबसे महत्त्वपूर्ण संस्था राजस्थान राज्य खेल परिषद है। परिषद की वेबसाइट पर उपलब्ध प्रारूप नीति के अनुसार परिषद सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत समिति है, जिसका मुख्य कार्य राज्य में खेलों को बढ़ावा देने वाली नीतियों और महत्त्वपूर्ण योजनाओं को मंज़ूर करना है। प्रारूप में उसे राजस्थान के खेलों की शीर्ष संस्था कहा गया है।
प्रारूप के अनुसार परिषद के कार्य हैं: खेल-स्टेडियमों का संचालन और रखरखाव, विशेष खेल-उपकरणों की ख़रीद और रखरखाव, खेल अकादमियों और खेल छात्रावासों की स्थापना व प्रबंधन, खेल-अधिकारियों, प्रशिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्ति, श्रेष्ठ खिलाड़ियों का प्रशिक्षण और लक्ष्य-आधारित खेल-परियोजनाओं का क्रियान्वयन, तथा खेल-संघों के साथ निकट सहयोग। खेल विभाग के लिए प्रारूप में अनुदान-नियम बनाने, प्रोत्साहन देने और अधोसंरचना के निर्माण व रखरखाव में सहायता का उल्लेख है।
प्रारूप के उद्देश्यों में खेल-संस्कृति बनाना, सभी नागरिकों को भागीदारी का अवसर देना, जन-भागीदारी बढ़ाना, उत्कृष्टता को बढ़ावा देना, उच्च गुणवत्ता का खेल-ढाँचा बनाना, विकलांग खिलाड़ियों की ज़रूरतों को पहचानना और साहसिक खेलों को प्रोत्साहन देना शामिल हैं। अधोसंरचना के लिए प्रारूप में संभाग, ज़िला, तहसील और पंचायत स्तर पर क्रमशः अलग-अलग खेल-सुविधाओं की परिकल्पना है; खेल-प्रतिभा खोज की योजना 12 से 17 वर्ष के बालक-बालिकाओं के लिए बताई गई है। प्रारूप में दिए गए प्रशासनिक इकाइयों के आँकड़े पुराने हैं, इसलिए यहाँ नहीं दिए गए हैं।
प्रारूप में खेल छात्रावासों, अंतरराष्ट्रीय स्तर की अकादमियों, डे-बोर्डिंग केंद्रों और खेल-विज्ञान केंद्र की भी परिकल्पना है। इनके साथ महिला खेल, जनजातीय खेल और दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए 'विशेष क्षेत्र' के खेलों की चर्चा है। खेल-संघों की भूमिका में राज्य ओलंपिक संघ को खेल-विशेष संघों का राज्य-स्तरीय संघ बताया गया है, जो उन्हें संबद्धता देता है और राज्य-स्तरीय खेल आयोजित करता है; ज़िला ओलंपिक संघ राज्य ओलंपिक संघ से जुड़े होते हैं। ये सभी बातें प्रारूप में प्रस्तावित या वर्णित हैं और इन्हें अंतिम अधिसूचित नीति न समझें।
खेल-संगठनों के नियमन के लिए India Code पर 'Rajasthan Sports (Registration, Recognition and Regulation of Associations) Act, 2005' नाम का राज्य अधिनियम सूचीबद्ध है। इस अधिनियम की धाराओं का पाठ यहाँ उद्धृत नहीं किया गया है। परीक्षा में इस अधिनियम पर कोई तथ्य लिखने से पहले उसका आधिकारिक पाठ देख लें। राष्ट्रीय स्तर के 2025 के अधिनियम में राज्य की खेल-इकाइयाँ 'संबद्ध इकाई' (affiliate unit) हैं और बोर्ड के पास उनका पंजीकरण रखा जाएगा।
राष्ट्रीय खेल नीति 2025 राज्यों को अपनी नीति बनाने या संशोधित करने के लिए 'मॉडल' देती है, और राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम राज्य-स्तर की महासंघ-इकाइयों के पंजीकरण की व्यवस्था करता है। इस दृष्टि से उत्तर में 'राज्य खेल नीति को राष्ट्रीय नीति के साथ संरेखित करने की आवश्यकता' जैसा विश्लेषण जोड़ा जा सकता है। यह विश्लेषण है, किसी अधिसूचना का तथ्य नहीं।
राजस्थान: प्रारूप नीति (2011) की प्रमुख बातें
| पहलू | प्रारूप में वर्णन |
|---|---|
| संस्था | राजस्थान राज्य खेल परिषद: सोसायटी के रूप में पंजीकृत; नीतियों और योजनाओं की मंज़ूरी; स्टेडियम, अकादमी और छात्रावास का संचालन |
| अधोसंरचना | संभाग, ज़िला, तहसील और पंचायत स्तर पर अलग-अलग खेल-मैदान और सुविधाओं की परिकल्पना |
| प्रतिभा-खोज | 12 से 17 वर्ष के बालक-बालिकाओं के लिए राज्य खेल प्रतिभा खोज योजना; खेल छात्रावास; डे-बोर्डिंग केंद्र |
| विशेष क्षेत्र | महिला खेल, जनजातीय खेल, दिव्यांग खिलाड़ियों के खेल |
| खेल-संघ | राज्य ओलंपिक संघ खेल-विशेष संघों का राज्य-स्तरीय संघ; ज़िला ओलंपिक संघ उससे संबद्ध |
| स्थिति | प्रारूप (Draft), 2011; अंतिम अधिसूचित पाठ आधिकारिक अधिसूचना में प्रकाशित नहीं मिला |
सभी पंक्तियाँ परिषद की वेबसाइट पर उपलब्ध प्रारूप से हैं; पहुँच तिथि 2 अक्टूबर 2026।
मुख्य तथ्य
- राष्ट्रीय खेल नीति 2025
- मंत्रिमंडल की मंज़ूरी 1 जुलाई 2025; 2001 की नीति का स्थान; पाँच स्तंभ; राज्यों के लिए मॉडल नीति
- राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम
- 2025 का अधिनियम 25; लोक सभा 11 अगस्त और राज्य सभा 12 अगस्त 2025 को पारित; राष्ट्रपति की स्वीकृति 18 अगस्त 2025
- प्रवर्तन
- चुनिंदा प्रावधान 1 जनवरी 2026 से लागू; शेष प्रावधान अलग अधिसूचना पर निर्भर
- खेल निकाय नियम
- राष्ट्रीय खेल शासन (राष्ट्रीय खेल निकाय) नियम, 2026: 12 जनवरी 2026 को अधिसूचित
- बोर्ड और न्यायाधिकरण नियम
- 26 मई 2026 को अधिसूचित
- राष्ट्रीय खेल बोर्ड और न्यायाधिकरण
- बोर्ड: अध्यक्ष और दो सदस्य (नियम 2026); न्यायाधिकरण: अध्यक्ष और दो सदस्य (धारा 17)
- SAI
- 1984 में स्थापित, सोसायटी पंजीकरण अधिनियम 1860 के अंतर्गत पंजीकृत; 25 जनवरी 1984 का खेल विभाग का संकल्प
- IOA
- भारत की राष्ट्रीय ओलंपिक समिति; IOC से मान्यता प्राप्त; पंजीकृत स्वायत्त निकाय
- टॉप्स
- सितंबर 2014 में शुरू; अप्रैल 2018 में पुनर्गठन
- खेलो इंडिया (नया चरण)
- 2026-27 से 2030-31; खेलो इंडिया और ANSF का संयुक्त परिव्यय 36,441 करोड़ रुपये (मंत्रिमंडल, 31 जुलाई 2026)
- फ़िट इंडिया
- 29 अगस्त 2019 को शुभारंभ
- खेल रत्न का नया नाम
- मेजर ध्यानचंद खेल रत्न, 6 अगस्त 2021 से
- पुरस्कार-राशि (2020 की संशोधित)
- खेल रत्न 25 लाख रुपये; अर्जुन 15 लाख रुपये; ध्यानचंद पुरस्कार 10 लाख रुपये
- राजस्थान
- राज्य खेल परिषद, सवाई मानसिंह स्टेडियम, जयपुर; प्रारूप राज्य खेल नीति 2011 परिषद की वेबसाइट पर
- अंतिम जाँच
- 2 अक्टूबर 2026 (समय-संवेदनशील पंक्तियों के लिए)
राजस्थान का पहलू (आधिकारिक स्रोत; पहुँच तिथि: 2 अक्टूबर 2026)
राजस्थान राज्य खेल परिषद (Rajasthan State Sports Council) का पता सवाई मानसिंह स्टेडियम, जयपुर है और उसका आधिकारिक पोर्टल खुद को राजस्थान में खेल-योजनाओं, आयोजनों, खिलाड़ियों, पुरस्कारों और अधोसंरचना का आधिकारिक पोर्टल बताता है। परिषद की अपनी वेबसाइट पर 'Draft Rajasthan State Sports Policy-2011' प्रारूप के रूप में उपलब्ध है। उसकी विषय-वस्तु ऊपर प्रारूप के रूप में दी गई है; अंतिम अधिसूचित राज्य खेल नीति का पाठ और राज्य के वर्तमान पुरस्कारों व अकादमियों की सूची आधिकारिक अधिसूचना में प्रकाशित नहीं मिली, इसलिए उन्हें यहाँ नहीं लिखा गया है।
परीक्षा में आम ग़लतियाँ
याद रखें
- राष्ट्रीय खेल नीति 2001 को वर्तमान नीति लिख देना। 1 जुलाई 2025 की नीति ने उसका स्थान लिया है।
- राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम को 'पूरी तरह लागू' लिखना। 1 जनवरी 2026 से केवल चुनिंदा प्रावधान लागू हुए हैं, बाक़ी की तिथियाँ अलग अधिसूचना से तय होंगी।
- राष्ट्रीय खेल बोर्ड और न्यायाधिकरण को एक ही संस्था बता देना। अधिनियम के अनुसार बोर्ड का काम मान्यता और अनुपालन है, न्यायाधिकरण का विवादों का निपटारा।
- राजीव गांधी खेल रत्न नाम का प्रयोग करना। 6 अगस्त 2021 से यह मेजर ध्यानचंद खेल रत्न है।
- IOA, SAI और मंत्रालय की भूमिकाएँ मिला देना। IOA ओलंपिक समिति है, SAI क्रियान्वयन-अंग है, मंत्रालय नीति और मान्यता का केंद्र है।
- राजस्थान की प्रारूप नीति (2011) को अंतिम राज्य खेल नीति बता देना। वह प्रारूप है।
- योजनाओं की राशि और खिलाड़ियों की संख्या बिना वर्ष के लिखना। ऐसे आँकड़े बदलते रहते हैं।
उदाहरण (कल्पित): एक महासंघ में चुनाव-विवाद और न्यायाधिकरण
उदाहरण (काल्पनिक)नया क़ानून व्यवहार में कैसे काम करेगा
यह उदाहरण समझाने के लिए गढ़ा गया है; महासंघ, नाम और घटनाएँ वास्तविक नहीं हैं। मान लीजिए एक काल्पनिक 'राष्ट्रीय तीरंदाज़ी महासंघ' के चुनाव में एक पूर्व खिलाड़ी का नामांकन इस आधार पर ख़ारिज कर दिया जाता है कि वह 'उत्कृष्ट खिलाड़ी' की श्रेणी में नहीं आती। वह खिलाड़ी इसे अनुचित मानती है।
- पहला चरण
- वह पहले महासंघ की अपनी विवाद समाधान समिति में जाती है, क्योंकि अधिनियम में हर राष्ट्रीय खेल निकाय के लिए ऐसी समिति अनिवार्य है और बोर्ड भी शिकायत तभी लेता है जब आंतरिक उपाय आज़मा लिए गए हों।
- चुनाव की निगरानी
- चुनाव का संचालन राष्ट्रीय खेल निर्वाचन पैनल के किसी अनुभवी पूर्व चुनाव अधिकारी की देखरेख में होना है, इसलिए नामांकन अस्वीकृति की प्रक्रिया पर भी निष्पक्षता का दबाव रहता है।
- न्यायाधिकरण
- आंतरिक उपाय से संतोष न मिलने पर मामला राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण में जा सकता है, बशर्ते वह किसी अपवाद (जैसे डोपिंग या ओलंपिक के दौरान का विवाद) में न आता हो।
- अपील
- न्यायाधिकरण के अंतिम आदेश के विरुद्ध 30 दिन में सर्वोच्च न्यायालय में अपील हो सकती है।
सीख
पहले खेल-विवाद सीधे दीवानी न्यायालयों में लंबे चलते थे। अधिनियम का ढाँचा आंतरिक समिति, निर्वाचन पैनल, न्यायाधिकरण और सर्वोच्च न्यायालय की एक सीढ़ी बनाता है। उत्तर में यह सीढ़ी लिखने से 'विवाद-निपटान' का मुद्दा संक्षेप में स्पष्ट हो जाता है।
उदाहरण (कल्पित): ज़िले की एक किशोर खिलाड़ी का मार्ग
उदाहरण (काल्पनिक)नीति के चार स्तर एक खिलाड़ी की नज़र से
यह उदाहरण समझाने के लिए गढ़ा गया है; पात्र और स्थान वास्तविक नहीं हैं। कल्पना कीजिए कि राजस्थान के किसी ज़िले के विद्यालय में 'रीना' नाम की एक कल्पित 14 वर्षीय धाविका है, जो विद्यालयी प्रतियोगिता में अच्छा समय निकालती है।
- प्रतिभा-पहचान
- खेलो इंडिया की प्रतिभा-खोज प्रणाली (प्रतिभा-खोजक और क्षेत्रीय समितियाँ) उसे ज़मीनी स्तर पर पहचानती है।
- प्रशिक्षण
- वह किसी मान्यता-प्राप्त अकादमी या SAI प्रशिक्षण केंद्र में जाती है, जहाँ कोचिंग और खेल-विज्ञान का सहयोग मिलता है।
- महासंघ का मंच
- राष्ट्रीय खेल महासंघ उसे राष्ट्रीय चैंपियनशिप और चयन-परीक्षणों में उतारता है; इसके लिए महासंघ ANSF से सहायता पाता है।
- शीर्ष सहायता
- यदि वह ओलंपिक-स्तर की संभावना दिखाती है, तो टॉप्स के अंतर्गत समग्र सहायता का विकल्प खुलता है।
सीख
यह मार्ग दिखाता है कि नीति, संस्थाएँ और योजनाएँ अलग-अलग नहीं, एक सीढ़ी के पायदान हैं। उत्तर में इस सीढ़ी को योजनाओं के नामों के साथ लिखें और कमज़ोर कड़ी (जैसे संसाधन और जवाबदेही) भी बताएँ।
अभ्यास प्रश्न (अपने)
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
राष्ट्रीय खेल नीति 2025 के पाँच स्तंभ लिखिए।
आदर्श उत्तर
उत्कृष्टता, आर्थिक विकास, सामाजिक विकास, जन-आंदोलन और शिक्षा (NEP 2020) से एकीकरण के लिए खेल।
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) क्या है?
आदर्श उत्तर
खेल विभाग के 1984 के संकल्प से बनी, पंजीकृत समिति; खेल-योजनाओं का क्रियान्वयन करती है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण की संरचना बताइए।
आदर्श उत्तर
अध्यक्ष और दो सदस्य; अध्यक्ष सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश या उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रहे हों।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम, 2025 के मुख्य प्रावधान लिखिए।
आदर्श उत्तर
अधिनियम राष्ट्रीय खेल निकायों की संरचना तय करता है: कार्यकारी समिति में कम से कम चार महिलाएँ और उत्कृष्ट खिलाड़ी, कार्यकाल सीमा और पदों पर विराम। राष्ट्रीय खेल बोर्ड मान्यता और जाँच करेगा, निर्वाचन पैनल चुनाव में निगरानी देगा और न्यायाधिकरण विवाद निपटाएगा। सहायता लेने वाले संगठन RTI के दायरे में आते हैं।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
खेलो इंडिया योजना के उद्देश्य और नए चरण की विशेषताएँ लिखिए।
आदर्श उत्तर
खेलो इंडिया का उद्देश्य जन-भागीदारी और उत्कृष्टता है। 2026-27 से 2030-31 के नए चरण में खेलो इंडिया और ANSF का संयुक्त परिव्यय 36,441 करोड़ रुपये मंज़ूर हुआ। इसमें उत्कृष्टता केंद्र, फ़ीडर स्कूल, उभरते खिलाड़ियों की श्रेणी, कोच प्रत्यायन बोर्ड और डिजिटल मंच शामिल हैं।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
भारतीय ओलंपिक संघ और राष्ट्रीय खेल महासंघों की भूमिका में अंतर बताइए।
आदर्श उत्तर
भारतीय ओलंपिक संघ भारत की राष्ट्रीय ओलंपिक समिति है; वह बहु-खेल संगठन है, IOC से मान्यता प्राप्त है और ओलंपिक आंदोलन में देश का प्रतिनिधित्व करता है। राष्ट्रीय खेल महासंघ किसी एक खेल की शासी संस्था है, जो चयन और राष्ट्रीय प्रतियोगिताएँ कराता है और मान्यता पर सरकारी सहायता पाता है।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
राष्ट्रीय खेल नीति 2025 की मुख्य विशेषताओं का विश्लेषण करते हुए बताइए कि यह 2001 की नीति से कैसे आगे है।
आदर्श उत्तर
राष्ट्रीय खेल नीति 2025 को मंत्रिमंडल ने 1 जुलाई 2025 को मंज़ूरी दी और उसने 2001 की नीति का स्थान लिया। 2001 की नीति खेलों के व्यापक आधार, उत्कृष्टता और ढाँचे पर केंद्रित थी। नई नीति पाँच स्तंभों पर टिकी है: वैश्विक उत्कृष्टता, आर्थिक विकास, सामाजिक विकास, जन-आंदोलन और शिक्षा से एकीकरण। वह खेल-पर्यटन, उपकरण-निर्माण और निजी भागीदारी जैसे आर्थिक आयाम जोड़ती है, खेल-शासन के लिए क़ानूनी ढाँचे पर बल देती है, राज्यों के लिए मॉडल नीति बनती है और 2036 के ओलंपिक का लक्ष्य रखती है। क्रियान्वयन में निगरानी-ढाँचा और संकेतक भी तय हैं।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
भारत में खेल-शासन की संस्थाओं और उनकी भूमिकाओं का वर्णन कीजिए।
आदर्श उत्तर
खेल-शासन की शीर्ष कड़ी युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय है, जो नीति बनाता, योजनाएँ चलाता और राष्ट्रीय खेल महासंघों को मान्यता देता है। भारतीय खेल प्राधिकरण 1984 में बना क्रियान्वयन-अंग है, जो प्रतिभा-खोज, प्रशिक्षण केंद्र और दिल्ली के स्टेडियम सँभालता है। भारतीय ओलंपिक संघ राष्ट्रीय ओलंपिक समिति है। महासंघ अपने-अपने खेल को चलाते हैं। खेलो इंडिया और टॉप्स जैसी योजनाएँ मंत्रालय और SAI चलाते हैं। 2025 के अधिनियम से राष्ट्रीय खेल बोर्ड मान्यता और अनुपालन देखेगा तथा न्यायाधिकरण विवाद सुलझाएगा। राज्य स्तर पर राज्य खेल परिषद और राज्य ओलंपिक संघ जैसी इकाइयाँ हैं।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
राजस्थान राज्य खेल परिषद की भूमिका बताइए।
आदर्श उत्तर
परिषद की वेबसाइट पर उपलब्ध प्रारूप नीति के अनुसार वह सोसायटी के रूप में पंजीकृत राज्य की शीर्ष खेल संस्था है। वह खेल-नीतियों और योजनाओं को मंज़ूर करती, स्टेडियमों का संचालन करती, अकादमियाँ और छात्रावास चलाती, प्रशिक्षकों की नियुक्ति करती और खेल-संघों के साथ मिलकर काम करती है। ये प्रारूप में वर्णित बातें हैं।
उत्तर कैसे लिखें (10 अंक, 100 शब्द)
भूमिका
प्रश्न का नमूना: "भारत में खेल-शासन के ढाँचे और हाल के सुधारों की विवेचना कीजिए।" पहली पंक्ति में चार परतें लिखें: नीति, क़ानून, संस्थाएँ, योजनाएँ।
मुख्य भाग
- नीति: राष्ट्रीय खेल नीति 2025 (1 जुलाई 2025), जिसने 2001 की नीति का स्थान लिया, पाँच स्तंभ
- क़ानून: राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम 2025, बोर्ड, न्यायाधिकरण, निर्वाचन पैनल, RTI; चुनिंदा प्रावधान 1 जनवरी 2026 से लागू
- संस्थाएँ: मंत्रालय, SAI (1984), IOA (राष्ट्रीय ओलंपिक समिति), राष्ट्रीय खेल महासंघ
- योजनाएँ: खेलो इंडिया (2026-31 का नया चरण), टॉप्स, ANSF, फ़िट इंडिया
- राजस्थान: राज्य खेल परिषद; राज्य की नीति को राष्ट्रीय नीति से संरेखित करने का प्रश्न (विश्लेषण)
निष्कर्ष
निष्कर्ष: नीति, क़ानून, संस्था और योजना की चारों परतें अब पहले से अधिक जवाबदेह और जुड़ी हुई हैं। असली कसौटी यह होगी कि बोर्ड और न्यायाधिकरण वास्तव में कितनी जल्दी और निष्पक्षता से काम शुरू करते हैं और राज्य अपनी नीतियाँ कितनी तत्परता से संरेखित करते हैं।
अतिरिक्त मूल्य
- वर्ष और तिथि के साथ तथ्य लिखें (1 जुलाई 2025, 18 अगस्त 2025, 1 जनवरी 2026)
- स्थिति-संबंधी सावधानी की एक पंक्ति जोड़ें: अधिनियम के सभी प्रावधान अभी लागू नहीं हैं
- एक रेखाचित्र बनाएँ: प्रतिभा-सीढ़ी (विद्यालय से खेलो इंडिया और टॉप्स तक)
त्वरित पुनरावृत्ति
- खेल-शासन की चार परतें: नीति, क़ानून, संस्थाएँ, योजनाएँ
- राष्ट्रीय खेल नीति: 1984 पहली, 2001 दूसरी, 2025 वर्तमान (मंत्रिमंडल 1 जुलाई 2025); पाँच स्तंभ; राज्यों के लिए मॉडल
- SAI: 1984, सोसायटी अधिनियम 1860, 25 जनवरी 1984 का संकल्प; NCOE, STC, NSTC; क्षेत्रीय केंद्र दस
- IOA: राष्ट्रीय ओलंपिक समिति, IOC से मान्यता; NSF: खेल-विशेष शासी संस्था; वार्षिक मान्यता 2010 से; NSDCI 2011
- राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम 2025 (संख्या 25): पारित 11 और 12 अगस्त, स्वीकृति 18 अगस्त 2025; चुनिंदा प्रावधान 1 जनवरी 2026 से
- कार्यकारी समिति: अधिकतम 15 सदस्य, कम से कम 4 महिलाएँ; आयु 25 वर्ष से; तीन कार्यकाल के बाद एक कार्यकाल का विराम; कार्यकाल अधिकतम 4 वर्ष
- अधिनियम के अनुसार बोर्ड मान्यता देगा; न्यायाधिकरण (अध्यक्ष और दो सदस्य) विवाद निपटाएगा; अपील 30 दिन में सर्वोच्च न्यायालय
- योजनाएँ: खेलो इंडिया (नया चरण 2026-27 से 2030-31), टॉप्स (सितंबर 2014), ANSF, फ़िट इंडिया (29 अगस्त 2019)
- पुरस्कार: खेल रत्न (1991-92, नया नाम 6 अगस्त 2021), अर्जुन (1961), द्रोणाचार्य (1985), ध्यानचंद (2002), MAKA (1956-57), खेल प्रोत्साहन (2009)
- राजस्थान: राज्य खेल परिषद, जयपुर; 2011 की नीति प्रारूप है, अंतिम पाठ प्रकाशित नहीं मिला
- सावधानी: राशि, संख्या और प्रवर्तन की स्थिति समय के साथ बदलती है, इसलिए वर्ष के साथ लिखें
याद रखने योग्य शब्द
- राष्ट्रीय खेल नीति 2025
- राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम
- राष्ट्रीय खेल बोर्ड
- खेल न्यायाधिकरण
- SAI
- IOA
- खेलो इंडिया
- टॉप्स
- खेल रत्न