मुख्य सामग्री पर जाएं
पेपर III · इकाई I · समसामयिकी (खेल और योग)

स्वास्थ्य, कुशलक्षेम और तनाव-प्रबंधन में योग की भूमिका: अर्थ, अष्टांग, आयुष मंत्रालय, योग दिवस और CYP

योग का अर्थ और परंपराएँ, पतंजलि के अष्टांग, आयुष मंत्रालय और योग दिवस, सामान्य योग प्रोटोकॉल, Y-Break और तनाव से संबंध; कल्पित कार्य-उदाहरण और केस, हल प्रश्न और उत्तर-ढाँचा।

  • योग
  • अष्टांग
  • आयुष मंत्रालय
  • योग दिवस
  • CYP
  • तनाव-प्रबंधन
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर III, इकाई I (समसामयिकी) की अंतिम पंक्ति: "Role of Yoga in health, wellness and stress management." इस पृष्ठ पर योग का अर्थ और उत्पत्ति, मुख्य परंपराएँ, पतंजलि के अष्टांग, आसन, प्राणायाम और ध्यान की बुनियाद, आयुष मंत्रालय, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस, सामान्य योग प्रोटोकॉल और तनाव से योग का संबंध है। खेल-नीतियों और खेल-उपलब्धियों वाली पंक्ति अलग पृष्ठों पर है। यह पृष्ठ केवल परीक्षा-ज्ञान के लिए है, चिकित्सा सलाह नहीं है; यह किसी रोग की पहचान या उपचार के लिए नहीं है। स्वास्थ्य-समस्या हो तो कोई भी अभ्यास करने से पहले चिकित्सक से परामर्श करें।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • 2013 से 2024 के उपलब्ध प्रश्न-पाठों में योग शीर्षक का सीधा प्रश्न नहीं मिलता, और 2018 से 2024 के "खेल" खंड के प्रश्न-पाठ उपलब्ध नहीं हैं। फिर भी 2024 के पेपर I में 2 अंक का प्रश्न 'AYUSH का पूरा नाम' आया, और पेपर III के व्यवहार वाले खंड में तनाव-प्रबंधन (2021, 5 अंक) तथा सकारात्मक स्वास्थ्य और कुशलक्षेम (2016 और 2018, 5 अंक) पर प्रश्न आए हैं। योग का पंक्ति-विषय इन्हीं से जुड़ता है, इसलिए इन्हें नीचे हल करके दिया गया है।
  • सबसे उपयोगी चीज़ें: योग का अर्थ और परिभाषा, पतंजलि के आठ अंगों का सही क्रम, आयुष मंत्रालय का पूरा नाम, UN प्रस्ताव की तिथि (11 दिसंबर 2014) और पहले योग दिवस की तिथि (21 जून 2015), सामान्य योग प्रोटोकॉल का ढाँचा, और Y-Break।
  • तनाव वाले हिस्से में उत्तर संतुलित रखें: अध्ययनों में योग और कम अनुभूत तनाव के बीच संबंध दिखा है, पर प्रमाण की गुणवत्ता सीमित है। 'योग से तनाव ठीक होता है' जैसा पक्का दावा परीक्षा में भी कमज़ोर माना जाएगा।

पहले सरल भाषा में

खेत में दो बैल एक जुए से जोड़े जाते हैं, तभी हल सीधा चलता है। एक बैल आगे और दूसरा पीछे खिंचे तो खेत टेढ़ा जुतता है। शरीर, श्वास और मन भी ऐसी ही तिकड़ी हैं। दिन भर की भागदौड़ में शरीर कुर्सी पर जकड़ा रहता है, श्वास छिछली चलती है और मन फ़ाइलों में उलझा रहता है; तीनों अलग-अलग दिशा में खिंचते हैं। योग इन तीनों को एक लय में जोड़ने का अभ्यास है।

दूसरी तुलना सितार की है। तार ढीले हों तो सुर नहीं लगता, बहुत कसे हों तो टूटने का डर रहता है। योग का शुरुआती अभ्यास शरीर के तार हल्के कसता है (आसन), श्वास की लय साधता है (प्राणायाम) और मन को कुछ देर एक जगह टिकाता है (ध्यान)। इसीलिए सरकारी और निजी दफ़्तरों के कर्मचारियों के लिए भी पाँच मिनट के छोटे योग-विराम बनाए गए हैं, जिनकी चर्चा आगे है।

ध्यान रखने की बात यह है कि योग केवल व्यायाम नहीं है। प्रधानमंत्री के जिस भाषण से योग दिवस की बात शुरू हुई, उसमें भी कहा गया कि योग व्यायाम भर नहीं, अपने से, दुनिया से और प्रकृति से एकत्व को खोजने का मार्ग है।

योग का अर्थ और उत्पत्ति

शब्द-अर्थ: 'योग' संस्कृत धातु 'युज' से बना है, जिसका अर्थ है जोड़ना, जुए में कसना या मिलाना। आयुष मंत्रालय की सामान्य योग प्रोटोकॉल पुस्तिका योग को ऐसा आध्यात्मिक अनुशासन बताती है जो मन और शरीर के बीच सामंजस्य लाता है, और इसे स्वस्थ जीवन की कला एवं विज्ञान कहती है। योग-ग्रंथों के अनुसार अभ्यास से व्यक्ति-चेतना का सार्वभौम चेतना से मिलन होता है। जो इस एकत्व का अनुभव करता है उसे योगी कहा गया है, और उसकी मुक्त अवस्था को मुक्ति, निर्वाण, कैवल्य या मोक्ष नाम दिए गए हैं।

परीक्षा-योग्य परिभाषा (सार-रूप): योग वह अभ्यास-पद्धति है जो शरीर, श्वास, मन और भाव को साधकर मन-शरीर में संतुलन लाती है और स्वस्थ, सुखी तथा सामंजस्यपूर्ण जीवन को लक्ष्य बनाती है। पुस्तिका के अनुसार साधना (अभ्यास) का उद्देश्य हर तरह के दुःख से पार पाकर जीवन के हर क्षेत्र में स्वतंत्रता, समग्र स्वास्थ्य, सुख और सामंजस्य की अनुभूति है।

उत्पत्ति: आयुष मंत्रालय की पुस्तिका और PIB के विवरणात्मक लेख, दोनों के अनुसार योग की जड़ें सिंधु-सरस्वती सभ्यता (लगभग 2700 ई.पू.) तक जाती हैं। पुस्तिका के मुताबिक उस सभ्यता की कुछ मुहरों और मूर्तियों में योग-साधना जैसी आकृतियाँ मिलती हैं, जिन्हें योग की उपस्थिति का संकेत माना गया है। वेदों और उपनिषदों, बौद्ध और जैन परंपराओं, दर्शनों, महाभारत (भगवद्गीता सहित) और रामायण में भी योग-अभ्यासों के संदर्भ हैं। पतंजलि से पहले भी योग का अभ्यास चलता था; महर्षि पतंजलि ने उस समय की योग-पद्धतियों, उनके अर्थ और ज्ञान को 'योगसूत्र' में व्यवस्थित और संहिताबद्ध किया। पतंजलि के बाद अनेक ऋषियों और योगाचार्यों ने इस परंपरा को लिखित साहित्य और अभ्यासों के रूप में आगे बढ़ाया।

उत्तर लिखते समय तिथियाँ 'आधिकारिक पुस्तिका के अनुसार' जैसे वाक्यांश के साथ लिखना सुरक्षित रहता है, क्योंकि इतने पुराने कालखंड की तिथियों पर विद्वानों के बीच मतभेद की गुंजाइश रहती है।

योग के चार मूल मार्ग (सामान्य योग प्रोटोकॉल पुस्तिका)

मार्गकिस स्तर पर काम करता है
कर्म योगशरीर का उपयोग
ज्ञान योगमन का उपयोग
भक्ति योगभाव का उपयोग
क्रिया योगऊर्जा का उपयोग

पुस्तिका के अनुसार योग व्यक्ति के शरीर, मन, भाव और ऊर्जा के स्तर पर काम करता है, इसलिए चार व्यापक वर्ग बनते हैं; हर पद्धति एक या अधिक वर्ग में आती है। हर व्यक्ति इन चारों का अलग मिश्रण है और उपयुक्त मिश्रण गुरु सुझाता है।

प्रमुख परंपराएँ (योग की धाराएँ)

अलग-अलग दर्शनों, परंपराओं और गुरु-शिष्य परंपराओं से योग की कई धाराएँ बनीं। पुस्तिका में गिनाई गई पारंपरिक धाराएँ ये हैं: ज्ञान योग, भक्ति योग, कर्म योग, पातंजल योग, कुंडलिनी योग, हठ योग, ध्यान योग, मंत्र योग, लय योग, राज योग, जैन योग और बौद्ध योग। हर धारा का अपना तरीक़ा है, पर सबका अंतिम लक्ष्य और उद्देश्य वही माना गया है।

इनमें से परीक्षा के लिए दो बातें याद रखने योग्य हैं। पहली, पतंजलि को राज योग का आचार्य कहा जाता है और उनका आठ अंगों वाला मार्ग 'अष्टांग योग' नाम से जाना जाता है। दूसरी, आसन और प्राणायाम के अनेक संदर्भ हठप्रदीपिका, घेरंड संहिता और शिव संहिता जैसे हठयोग-ग्रंथों में मिलते हैं; आयुष मंत्रालय की पुस्तिका की संदर्भ-सूची में इन्हीं ग्रंथों के नाम बार-बार आते हैं।

पतंजलि के अष्टांग योग

'अष्टांग' का शाब्दिक अर्थ है आठ अंगों वाला। पतंजलि के योगसूत्र में योग के आठ अंग बताए गए हैं: यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि। एक सुविधाजनक तुलना सीढ़ी की है: पहली दो सीढ़ियाँ आचरण सुधारती हैं, अगली दो शरीर और श्वास को साधती हैं, और आख़िरी चार मन को भीतर की ओर ले जाती हैं। सीढ़ी की यह तुलना याद रखने के लिए है, मूल ग्रंथ की श्रेणी नहीं। आयुष मंत्रालय की पुस्तिका के अनुसार यम और नियम आगे के योग-अभ्यास की पूर्व-आवश्यकताएँ माने जाते हैं।

अष्टांग योग: आठ अंग और उनका आशय

क्रमअंगआशय (सामान्य योग प्रोटोकॉल पुस्तिका के अनुसार)
1यमसंयम (restraints); आगे के अभ्यास की पूर्व-आवश्यकता
2नियमपालन करने योग्य अनुशासन (observances); पूर्व-आवश्यकता
3आसनशरीर की ऐसी स्थितियाँ जो शरीर और मन में स्थिरता लाती हैं और एक मुद्रा को कुछ देर सजग रहकर बनाए रखने की क्षमता देती हैं
4प्राणायामपहले श्वास की जागरूकता, फिर सोच-समझकर श्वास का नियमन: पूरक (भरना), कुंभक (रोकना), रेचक (छोड़ना)
5प्रत्याहारइंद्रियों से, जो बाहरी वस्तुओं से जुड़ती हैं, चेतना का हटना (withdrawal)
6धारणाशरीर और मन के भीतर ध्यान का व्यापक क्षेत्र; सामान्यतः एकाग्रता
7ध्यानचिंतन, यानी शरीर और मन के भीतर केंद्रित ध्यान (meditation)
8समाधिएकीकरण (integration)

क्रम याद रखने का सूत्र: यम, नियम, आसन, प्राण, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि। पुस्तिका के अनुसार यम-नियम के अलावा बंध, मुद्रा, षट्कर्म, युक्ताहार, मंत्र-जप और युक्त-कर्म भी प्रचलित साधनाएँ हैं।

आसन, प्राणायाम और ध्यान: बुनियादी बातें

आसन: पुस्तिका में उद्धृत पंक्ति 'कुर्यात्तदासनं स्थैर्यम्' का भाव है कि आसन वह है जो स्थिरता लाए। आसन में शरीर को धीरे-धीरे, तनाव दिए बिना और श्वास की जागरूकता के साथ एक मुद्रा में लाया और कुछ देर रखा जाता है। उदाहरण के लिए ताड़ासन खड़े होने की सभी मुद्राओं का आधार माना गया है और स्थिरता सिखाता है। वृक्षासन में संतुलन और सजगता पर ज़ोर है। शवासन में शरीर को पूरी तरह ढीला छोड़कर श्वास की स्वाभाविक, धीमी लय पर ध्यान रखा जाता है; पुस्तिका इसे तनाव और उसके परिणामों के प्रबंधन में उपयोगी बताती है।

प्राणायाम: इसमें पहले अपनी श्वास (श्वास और प्रश्वास) के प्रवाह की जागरूकता विकसित की जाती है, फिर श्वास का सोच-समझकर नियमन होता है। एक चक्र में पूरक, कुंभक और रेचक आते हैं। पुस्तिका के सामान्य निर्देश हैं कि श्वास नासिका से लें, किसी अभ्यास में विशेष रूप से न कहा गया हो तो साँस न रोकें, और शरीर को न कसें, न झटका दें। सामान्य योग प्रोटोकॉल में तीन प्राणायाम हैं: नाड़ीशोधन या अनुलोम-विलोम (बारी-बारी से दोनों नासिका से श्वास, पाँच चक्र), शीतली और भ्रामरी (तीन चक्र, जिसमें साँस छोड़ते समय भौंरे जैसी गुंजन ध्वनि निकाली जाती है)। कपालभाति एक अलग क्रिया है, जिसमें सक्रिय रूप से साँस छोड़ी जाती है और भीतर लेना निष्क्रिय रहता है; पुस्तिका में हृदय-रोग, चक्कर, उच्च रक्तचाप, मिर्गी, माइग्रेन, स्ट्रोक, हर्निया और आमाशय के घाव जैसी स्थितियों में इससे बचने की चेतावनी दी गई है।

ध्यान: पुस्तिका के अनुसार ध्यान निरंतर चिंतन की क्रिया है। इसे किसी ध्यान-मुद्रा में बैठकर, रीढ़ को सहज सीधी रखकर, आँखें बंद करके, ज्ञान मुद्रा में हाथ रखकर और श्वास के प्रति सजग रहकर किया जाता है। पुस्तिका ध्यान को योग-साधना का सबसे महत्त्वपूर्ण घटक कहती है और नए अभ्यासी के लिए पृष्ठभूमि में हल्का संगीत बजाने का सुझाव देती है। योगसूत्र का ध्यान-संबंधी संदर्भ पुस्तिका की संदर्भ-सूची में योगसूत्र III.2 बताया गया है।

सामान्य दिशा-निर्देश (पुस्तिका के अनुसार): अभ्यास शांत वातावरण में, ख़ाली या हल्के पेट, मैट या दरी पर, आरामदायक सूती कपड़ों में करें। थकावट, बीमारी, जल्दबाज़ी या तीव्र तनाव की अवस्था में योग न करें। पुरानी बीमारी, दर्द या हृदय की समस्या हो, तो पहले चिकित्सक या योग-चिकित्सक से परामर्श करें; गर्भावस्था और मासिक-धर्म में योग-विशेषज्ञ से पूछें। अभ्यास प्रार्थना से शुरू और ध्यान, मौन या संकल्प व शांति-पाठ से समाप्त हो; स्नान और भोजन अभ्यास के 20 से 30 मिनट बाद। हर अभ्यास की सीमाएँ और निषेध होते हैं और अपनी क्षमता के अनुसार ही करना चाहिए।

सामान्य योग प्रोटोकॉल (CYP) का क्रम: 45 मिनट का ढाँचा

चरणक्या होता हैउदाहरण (2017 की पुस्तिका)
1. प्रार्थनाअभ्यास की शुरुआत प्रार्थना या प्रार्थना-भाव से'संगच्छध्वं संवदध्वं' से शुरू होने वाली सामूहिक प्रार्थना
2. सूक्ष्म व्यायामशरीर ढीला करने वाली क्रियाएँ (सदिलाज / चालन क्रियाएँ), खड़े होकर और बैठकरगर्दन, कंधे, कमर (धड़) और घुटनों की गतियाँ
3. आसनखड़े, बैठकर, पेट के बल और पीठ के बलताड़ासन, वृक्षासन, पादहस्तासन, अर्धचक्रासन, त्रिकोणासन; भद्रासन, वज्रासन, उष्ट्रासन, शशकासन; मकरासन, भुजंगासन, शलभासन; सेतुबंधासन, पवनमुक्तासन, शवासन
4. कपालभातिसक्रिय श्वास-निष्कासन की क्रिया40 तेज़ श्वास, तीन चक्र (नए अभ्यासी कम)
5. प्राणायामश्वास-नियमननाड़ीशोधन, शीतली, भ्रामरी
6. ध्याननिरंतर चिंतनकिसी ध्यान-मुद्रा में, ज्ञान मुद्रा
7. संकल्पअभ्यास का समापन संकल्प सेमन को संतुलित रखने और कर्तव्य निभाने का संकल्प
8. शांति-पाठ'सर्वे भवन्तु सुखिनः' के साथ समापनशांतिः, शांतिः, शांतिः

पुस्तिका के अनुसार 45 मिनट के प्रोटोकॉल के अलावा अग्रणी योग-संस्थाओं को संकल्प से पहले 15 मिनट का संस्थागत योगाभ्यास (प्राणायाम, योग-निद्रा, ध्यान, सत्संग आदि) जोड़ने का प्रावधान है। PIB के 2026 के लेख में भी यही प्रावधान बताया गया है।

आयुष मंत्रालय और अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस

आयुष मंत्रालय: भारत की पारंपरिक चिकित्सा-पद्धतियों के विकास और नियमन का केंद्रीय मंत्रालय। इसे नवंबर 2014 में विभाग से उन्नत करके स्वतंत्र मंत्रालय बनाया गया (MyGov का समूह-पृष्ठ; 2014 में मंत्रालय के गठन की बात आकाशवाणी के 2025 के साक्षात्कार-समाचार में भी है)। 'आयुष' (AYUSH) का पूरा रूप आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथी है; यही नाम मंत्रालय की सामान्य योग प्रोटोकॉल पुस्तिका के आवरण पर छपा है। योग के क्षेत्र में मंत्रालय का संस्थान मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (MDNIY) है; सामान्य योग प्रोटोकॉल पुस्तिका इसी के निदेशक के संपादन में और इसी की ओर से प्रकाशित हुई।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस: 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 69वें सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस अपनाने की अपील की। 11 दिसंबर 2014 को महासभा ने प्रस्ताव A/RES/69/131 से 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया। UN के पृष्ठ के अनुसार प्रस्ताव में व्यक्तियों और आबादी द्वारा स्वास्थ्यकर विकल्प चुनने (healthier choices) और ऐसी जीवन-शैली अपनाने के महत्त्व पर बल है जो अच्छे स्वास्थ्य को बढ़ाती हो। आयुष मंत्रालय की पुस्तिका के अनुसार प्रस्ताव आम सहमति से पारित हुआ, और महासभा ने माना कि योग स्वास्थ्य और कुशलक्षेम का समग्र दृष्टिकोण देता है। ध्यान रहे: घोषणा दिसंबर 2014 में हुई, पहला आयोजन 21 जून 2015 को।

पहला दिवस: 21 जून 2015 को राजपथ, नई दिल्ली में आयुष मंत्रालय ने पहला अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस आयोजित किया, जिसमें 35,985 प्रतिभागी थे और 84 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। PIB और आयुष पुस्तिका, दोनों के अनुसार इस आयोजन ने दो गिनीज़ विश्व रिकॉर्ड बनाए: किसी एक स्थान पर सबसे बड़ा योग-पाठ, और सबसे अधिक राष्ट्रीयताओं की भागीदारी वाला योग-पाठ। उसी वर्ष विज्ञान भवन में दो दिन का 'Yoga for Holistic Health' सम्मेलन भी हुआ।

आगे का चलन: हर वर्ष की थीम और मुख्य राष्ट्रीय आयोजन-स्थल बदलता है। 2026 में 12वाँ दिवस 'Yoga for Healthy Ageing' (स्वस्थ आयु के लिए योग) थीम पर मनाया गया, जिसमें PIB के अनुसार 'योग 365' के रूप में एक दिन से आगे रोज़मर्रा के अभ्यास पर बल है।

समय-रेखा: प्रस्ताव से योग दिवस तक

  1. 27 सितंबर 2014

    UNGA के 69वें सत्र में प्रधानमंत्री का प्रस्ताव

  2. नवंबर 2014

    आयुष विभाग से स्वतंत्र आयुष मंत्रालय

  3. 11 दिसंबर 2014

    प्रस्ताव A/RES/69/131: 21 जून अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस

  4. 21 जून 2015

    पहला दिवस, राजपथ, नई दिल्ली; 35,985 प्रतिभागी, 84 देश, दो गिनीज़ रिकॉर्ड

  5. जनवरी 2020

    Y-Break का पायलट: दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोलकाता

  6. सितंबर 2021

    Y-Break मोबाइल ऐप; केंद्र के विभागों से प्रचार का अनुरोध

  7. 21 जून 2026

    12वाँ दिवस; थीम: स्वस्थ आयु के लिए योग (अंतिम जाँच: 2 अक्टूबर 2026)

सामान्य योग प्रोटोकॉल और Y-Break

सामान्य योग प्रोटोकॉल (Common Yoga Protocol, CYP): योग दिवस पर पूरी दुनिया में एक ही क्रम से अभ्यास हो सके, इसके लिए आयुष मंत्रालय ने 2015 में प्रमुख योग-गुरुओं और संस्थाओं के परामर्श से CYP तैयार किया। यह 45 मिनट का मानक अभ्यास है, जो दिवस के कार्यक्रमों का केंद्र बनता है। पुस्तिका का तृतीय संस्करण मई 2017 का है। पुस्तिका में यह चेतावनी भी दी गई है कि प्रोटोकॉल सामान्य जागरूकता के लिए है और चिकित्सक की सलाह का विकल्प नहीं है।

Y-Break (योग-विराम): यह आयुष मंत्रालय का पाँच मिनट का कार्यस्थल योग-प्रोटोकॉल है, जो कर्मचारियों को तनाव घटाने, तरोताज़ा होने और ध्यान दोबारा केंद्रित करने में मदद के लिए बनाया गया। Business Standard (PTI) की रिपोर्ट के अनुसार इसे 2019 में विशेषज्ञ-समिति ने तैयार किया, जनवरी 2020 में छह महानगरों में पायलट के रूप में लाया गया, और 2021 में Android ऐप बना। कार्मिक मंत्रालय के आदेश में केंद्र के सभी विभागों से इसे अपने कर्मचारियों में बढ़ावा देने को कहा गया। मंत्रालय की सामग्री के अनुसार इसमें ताड़ासन, ऊर्ध्व-हस्तोत्तानासन, स्कंध चक्र, उत्तान मंडूकासन, कटि चक्रासन, अर्ध चक्रासन, प्रसारित पादोत्तानासन, गहरी श्वास, नाड़ीशोधन प्राणायाम और भ्रामरी प्राणायाम जैसे सरल अभ्यास हैं, और आसन, प्राणायाम और ध्यान तीनों शामिल हैं।

योग, तनाव और कुशलक्षेम: अध्ययन क्या कहते हैं

पहले दो परिभाषाएँ। WHO के संविधान में दिया गया सिद्धांत स्वास्थ्य को पूर्ण शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कुशलक्षेम की अवस्था मानता है, केवल रोग या दुर्बलता की अनुपस्थिति नहीं। NCERT (कक्षा 12 मनोविज्ञान) में इसी विचार में 'आध्यात्मिक' आयाम भी जुड़ा मिलता है, और सकारात्मक स्वास्थ्य में स्वस्थ शरीर, अच्छे व्यक्तिगत संबंध, जीवन का उद्देश्य, आत्म-सम्मान, जीवन के कार्यों में निपुणता और तनाव, आघात तथा परिवर्तन के प्रति लचीलापन गिनाए गए हैं। NCERT के अनुसार तनाव के प्रभाव को कम करने वाले कारकों में आहार, व्यायाम, सकारात्मक दृष्टिकोण, सकारात्मक सोच और सामाजिक सहारा आते हैं; व्यायाम के रूप में वह योगासनों जैसे खिंचाव-अभ्यासों को गिनाता है, जिनका शांत करने वाला प्रभाव बताया गया है। तनाव-प्रबंधन की तकनीकों में विश्राम, योग-पद्धति से ध्यान, बायोफ़ीडबैक, रचनात्मक कल्पना और संज्ञानात्मक-व्यवहारात्मक तकनीकें भी आती हैं।

अब अनुसंधान का चित्र। नीचे के निष्कर्ष समीक्षाओं और मेटा-विश्लेषणों से हैं और संबंध या प्रवृत्ति बताते हैं; इन्हें उपचार का दावा न समझें। एक आम सीमा यह है कि योग की शैलियाँ अलग-अलग होती हैं और इसी वजह से अध्ययनों की तुलना कठिन हो जाती है (NCCIH)।

तनाव और योग: समीक्षाओं के निष्कर्ष (संबंध के रूप में, उपचार के दावे के बिना)

समीक्षा / स्रोतक्या देखा गयासावधानी
NCCIH (अमेरिकी NIH), अगस्त 2023 का पृष्ठअनुसंधान सुझाव देता है कि योग तनाव घटाने, स्वस्थ आदतें अपनाने, मानसिक-भावनात्मक स्वास्थ्य, नींद और संतुलन में सहायक हो सकता है। स्वस्थ वयस्कों में तनाव-प्रबंधन के लिए 12 हालिया अध्ययनों (672 प्रतिभागी) की 2020 की समीक्षा में सभी अध्ययनों में अनुभूत तनाव के मापों पर लाभकारी प्रभाव मिले।योग की शैलियाँ भिन्न होने से अध्ययनों का मूल्यांकन कठिन है
Schleinzer और अन्य (2024), Frontiers in Psychiatryतनावग्रस्त वयस्कों के 13 यादृच्छिक परीक्षणों (1,026 प्रतिभागी) में निष्क्रिय नियंत्रण-समूह की तुलना में योग के अल्पकालिक प्रभाव का प्रमाण निम्न गुणवत्ता का था; जीवन-गुणवत्ता पर अल्पकालिक प्रभाव का प्रमाण मध्यम गुणवत्ता का। तीन अध्ययनों में सुरक्षा-रिपोर्ट थी और किसी में प्रतिकूल घटना नहीं हुई।दीर्घकालिक तुलना में सक्रिय नियंत्रण-समूह के पक्ष का निम्न-गुणवत्ता रुझान भी रिपोर्ट हुआ
Mu और अन्य (2026), Frontiers in Psychology30 नियंत्रित परीक्षणों (2,288 प्रतिभागी, 13 से 82 वर्ष) में योग वाले समूहों में तनाव, चिंता और अवसाद के मापों में सुधार दिखा; लेखकों ने सभी के लिए प्रमाण 'निम्न स्तर' का बताया। उम्र को तनाव-प्रभाव का महत्त्वपूर्ण नियंत्रक पाया गया।निम्न-स्तर का प्रमाण; पूरक अभ्यास के रूप में विचार, उपचार के रूप में नहीं
Sharma और अन्य (2025), J Fam Med Prim Careधीमे प्राणायाम की भूमिका चिंता के लक्षणों के संदर्भ में आशाजनक बताई गई; लेख में वर्तमान प्रमाण, सीमाएँ और भावी शोध की दिशाएँ भी जाँची गई हैं।समीक्षा-लेख; सीमाओं और आगे के शोध की ज़रूरत पर बल

निष्कर्ष केवल संबंध या प्रवृत्ति के रूप में हैं; किसी रोग के उपचार का दावा नहीं है। अंतिम जाँच: 2 अक्टूबर 2026।

तनाव-ढाँचे में योग कहाँ बैठता है (विश्लेषण)

विश्लेषण (लेखक की व्याख्या, किसी स्रोत का निष्कर्ष नहीं): 'तनाव से सामना' (coping) वाले पृष्ठ में समस्या-केंद्रित और संवेग-केंद्रित सामना अलग किए गए हैं। श्वास-नियमन, विश्राम और ध्यान जैसे योग-अभ्यास मुख्यतः संवेग और शरीर की उत्तेजना को सँभालने के साधन के रूप में पढ़ाए जाते हैं, यानी संवेग-केंद्रित सामना और जीवन-शैली के घटक की तरह। वे तनाव के कारण को नहीं हटाते। मान लीजिए तनाव का स्रोत रोज़ फ़ाइलों का अंबार या अस्पष्ट भूमिका है; तब स्रोत को सुधारने का रास्ता समस्या-केंद्रित है: कार्य-वितरण, प्राथमिकता तय करना, स्पष्ट भूमिका।

'व्यावसायिक तनाव के स्रोत' वाले पृष्ठ में कार्य-स्थल के तनाव-कारकों की चर्चा है। उनसे जोड़ें तो ढाँचा यह बनता है: संगठन के स्तर पर कारणों को सुधारें (कार्यभार, भूमिका की स्पष्टता, सहायता), और व्यक्ति के स्तर पर योग जैसी युक्तियाँ सहायक के रूप में दें। Y-Break का उद्देश्य भी कर्मचारी को छोटा, सुलभ व्यक्ति-स्तरीय साधन देना है; उसे संगठनात्मक उपायों का स्थान लेने वाला नहीं माना जाना चाहिए।

परीक्षा के उत्तर में संतुलन का एक वाक्य जोड़ दें: 'योग तनाव के प्रबंधन में सहायक जीवन-शैली-अभ्यास है, पर अध्ययनों में प्रमाण की गुणवत्ता सीमित है, इसलिए यह चिकित्सा या संगठन-सुधार का विकल्प नहीं है।' पुस्तिका के अनुसार भी तीव्र तनाव, थकावट या जल्दबाज़ी की अवस्था में योग न करने और चिकित्सक की सलाह लेने के निर्देश हैं, जो इस सीमा को दर्शाते हैं।

मुख्य तथ्य

UN प्रस्ताव
11 दिसंबर 2014; प्रस्ताव A/RES/69/131; 21 जून अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस
प्रधानमंत्री का प्रस्ताव
27 सितंबर 2014, UNGA का 69वाँ सत्र
पहला योग दिवस
21 जून 2015, राजपथ, नई दिल्ली; 35,985 प्रतिभागी, 84 राष्ट्रीयताएँ; दो गिनीज़ रिकॉर्ड
आयुष मंत्रालय
नवंबर 2014 में विभाग से स्वतंत्र मंत्रालय
आयुष का पूरा नाम
आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथी
सामान्य योग प्रोटोकॉल
45 मिनट का मानक अभ्यास; 15 मिनट के संस्थागत अभ्यास का प्रावधान (अंतिम जाँच: 2 अक्टूबर 2026)
अष्टांग योग
यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि
Y-Break
पाँच मिनट का कार्यस्थल योग-प्रोटोकॉल; पायलट जनवरी 2020 (छह महानगर); केंद्रीय विभागों को बढ़ावा देने का आदेश 2021 में (अंतिम जाँच: 2 अक्टूबर 2026)
योग दिवस 2026
12वाँ संस्करण; थीम 'Yoga for Healthy Ageing' (अंतिम जाँच: 2 अक्टूबर 2026)
स्वास्थ्य की परिभाषा (WHO)
पूर्ण शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कुशलक्षेम की अवस्था, केवल रोग की अनुपस्थिति नहीं
स्वास्थ्य की परिभाषा (NCERT)
शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक कुशलक्षेम की अवस्था (पुनर्मुद्रण 2026-27)
अंतिम जाँच
2 अक्टूबर 2026

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • योग को केवल आसन या व्यायाम लिख देना। आसन आठ अंगों में तीसरा है; पुस्तिका ने ख़ुद योग को मन-शरीर के सामंजस्य का अनुशासन कहा है।
  • अष्टांग का क्रम बिगाड़ना। प्राणायाम चौथा है और ध्यान सातवाँ; यम-नियम पहले दो।
  • 'योग तनाव या रोग को ठीक करता है' जैसा पक्का दावा लिखना। अध्ययन संबंध और प्रवृत्ति बताते हैं, प्रमाण की गुणवत्ता सीमित है, इसलिए 'सहायक' या 'सहायक हो सकता है' लिखें।
  • तिथियाँ मिलाना। UN प्रस्ताव 11 दिसंबर 2014 का है और पहला योग दिवस 21 जून 2015 का; 2014 में दिवस नहीं मना।
  • CYP (45 मिनट, योग दिवस के लिए) और Y-Break (5 मिनट, कार्यस्थल के लिए) को आपस में मिलाना।
  • AYUSH का पूरा नाम लिखते समय 'योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा' को छोड़ देना या 'योग' को अलग से भूल जाना।
  • स्वास्थ्य की परिभाषा में WHO और NCERT का अंतर न बताना: NCERT में 'आध्यात्मिक' भी जुड़ता है, WHO के सिद्धांत में तीन आयाम (शारीरिक, मानसिक, सामाजिक) हैं।
  • योग-विराम को संगठनात्मक सुधार का विकल्प बता देना; कार्यभार जैसे कारण अलग से सुधारने होते हैं।