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REET L1+L2 · बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र

संवेगात्मक विकास (Emotional Development)

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यह पेज संवेग (emotion) की परिभाषा, बच्चों के संवेगों की विशेषताओं और कैथरीन ब्रिजेज़ के संवेगात्मक विभेदीकरण सिद्धांत (1932) को समझाता है। REET के CDP खंड में संवेगात्मक विकास एक नियमित रूप से पढ़ाया जाने वाला विषय है।

  • REET 2024 में इस टॉपिक से सीधा प्रश्न नहीं आया
  • शिक्षक-प्रशिक्षण स्तर
  • 8 मिनट पढ़ें
16 सितंबर 2026 को सत्यापित

REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

REET 2024 के 930 डिजिटाइज़ किए गए प्रश्नों में 'संवेगात्मक विकास' से सीधा कोई प्रश्न नहीं आया, लेकिन यह बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र के आधिकारिक पाठ्यक्रम का हिस्सा है, इसलिए आगामी परीक्षाओं में इससे प्रश्न बनने की पूरी संभावना है। पाठ्यक्रम की रूपरेखा के अनुसार इस टॉपिक से मुख्यतः संवेग की परिभाषा, बाल-संवेगों की विशेषताएँ, और संवेगात्मक विभेदीकरण की प्रक्रिया पर आधारित तथ्यात्मक प्रश्न पूछे जा सकते हैं।

संवेग (Emotion) क्या है?

संवेग किसी उद्दीपन (stimulus) के प्रति शरीर व मन की एक उत्तेजित अवस्था है, जिसमें शारीरिक बदलाव (जैसे दिल की धड़कन तेज़ होना, पसीना आना), मानसिक अनुभूति (feeling) और बाहरी व्यवहार — तीनों पक्ष शामिल होते हैं। भय, क्रोध, खुशी, दुख, ईर्ष्या जैसे भाव संवेगों के सामान्य उदाहरण हैं।

संवेग बच्चे के समग्र विकास में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं — ये सीखने की गति, सामाजिक संबंधों और आत्म-नियंत्रण की क्षमता को गहराई से प्रभावित करते हैं। इसीलिए शिक्षक के लिए संवेगात्मक विकास को समझना उतना ही ज़रूरी है जितना शैक्षिक विषयों को पढ़ाना, क्योंकि दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

बच्चों के संवेगों की प्रमुख विशेषताएँ

तीव्रता
बच्चों के संवेग वयस्कों की तुलना में अधिक तीव्र व प्रबल होते हैं।
अल्पकालिकता
संवेग जल्दी उठते हैं और सामान्यतः जल्दी शांत भी हो जाते हैं।
बार-बार बदलना
छोटे बच्चों में एक संवेग से दूसरे संवेग में तेज़ी से बदलाव देखा जाता है।
वैयक्तिक भिन्नता
एक ही स्थिति में अलग-अलग बच्चे अलग-अलग संवेगात्मक प्रतिक्रिया दिखा सकते हैं।
आयु के साथ परिवर्तन
आयु बढ़ने के साथ संवेगों को व्यक्त करने व नियंत्रित करने के तरीके अधिक सामाजिक रूप से स्वीकार्य होते जाते हैं।

ब्रिजेज़ का संवेगात्मक विभेदीकरण सिद्धांत (Bridges' Theory, 1932)

मनोवैज्ञानिक कैथरीन ब्रिजेज़ (Katherine Bridges) के अनुसार जन्म के समय शिशु में केवल एक सामान्य, अविभेदित उत्तेजना (general excitement) होती है, जिसमें कोई स्पष्ट व विशिष्ट संवेग नहीं होता।

लगभग 6 महीने की आयु तक इस सामान्य उत्तेजना से भय, क्रोध, घृणा, हर्ष (delight) और असंतोष (distress) जैसे मौलिक संवेग अलग-अलग पहचाने जाने लगते हैं। लगभग 1 वर्ष की आयु तक अधिकांश बुनियादी संवेग स्पष्ट रूप से विभेदित हो जाते हैं, और 2 वर्ष की आयु के बाद जैसे-जैसे भाषा विकसित होती है, ईर्ष्या व शोक (grief) जैसे अधिक जटिल संवेग भी इसमें जुड़ते जाते हैं। ब्रिजेज़ के अनुसार यह प्रक्रिया परिपक्वन (maturation) और अनुभव दोनों से प्रभावित होती है।

बुनियादी संवेगों की पहचान

संवेगसामान्य कारण/व्यवहार (बाल्यावस्था में)
भय (Fear)अचानक तेज़ आवाज़, अनजान व्यक्ति/वस्तु, अंधेरा
क्रोध (Anger)इच्छा पूरी न होना, खिलौना छीना जाना, बार-बार रोक-टोक
हर्ष/खुशी (Delight/Joy)खेल, प्रशंसा, पसंदीदा वस्तु मिलना
ईर्ष्या (Jealousy)किसी और (जैसे छोटे भाई-बहन) को अपेक्षा से अधिक ध्यान व प्यार मिलना

संवेगों को प्रभावित करने वाले कारक

कारकप्रभाव
शारीरिक स्वास्थ्य व थकानबीमार या थका हुआ बच्चा सामान्य से जल्दी चिड़चिड़ा या रोनी शक्ल का हो सकता है
पारिवारिक व सामाजिक वातावरणस्नेहपूर्ण, सुरक्षित माहौल में संवेगात्मक स्थिरता बेहतर विकसित होती है
परिपक्वन (Maturation)आयु बढ़ने के साथ मस्तिष्क व तंत्रिका-तंत्र का स्वाभाविक विकास संवेगों को समझने व नियंत्रित करने की क्षमता को बढ़ाता है
अनुभव व सीखनाबार-बार के अनुभव बच्चे को यह सिखाते हैं कि किस स्थिति में कौन-सी संवेगात्मक प्रतिक्रिया सामाजिक रूप से स्वीकार्य व उपयुक्त मानी जाती है
विद्यालय व शिक्षक का व्यवहारप्रशंसा, सहयोग व सम्मानपूर्ण व्यवहार बच्चे में संवेगात्मक सुरक्षा बढ़ाता है, जबकि बार-बार आलोचना या तुलना असुरक्षा व चिंता को बढ़ा सकती है

संवेगात्मक विकास को समझना शिक्षक के लिए क्यों ज़रूरी है

एक बच्चा जो संवेगात्मक रूप से असुरक्षित या तनावग्रस्त है, वह कक्षा में ध्यान केंद्रित करने, नए विषय समझने या दूसरों के साथ सहज व्यवहार करने में कठिनाई महसूस कर सकता है। इसलिए संवेगात्मक विकास केवल 'व्यक्तिगत' विषय नहीं, बल्कि सीखने की प्रक्रिया से सीधे जुड़ा पक्ष है।

शिक्षक को यह भी समझना चाहिए कि हर बच्चे में संवेग व्यक्त करने का तरीका अलग हो सकता है — कोई बच्चा गुस्सा चिल्लाकर दिखाता है तो कोई चुप होकर। एक जैसी प्रतिक्रिया सभी बच्चों पर थोपने के बजाय, वैयक्तिक भिन्नता को स्वीकार करते हुए संवेदनशीलता से पेश आना बेहतर परिणाम देता है, और कक्षा में एक भावनात्मक रूप से सुरक्षित वातावरण बनाता है जहाँ बच्चे बिना डर के अपनी भावनाएँ साझा कर सकें, जिससे उनका आत्मविश्वास व सीखने में रुचि दोनों मज़बूत होते हैं।

कक्षा में इसका उपयोग

शिक्षक बच्चों के संवेगों को दबाने के बजाय पहचानने व सुरक्षित ढंग से व्यक्त करने में मदद कर सकता है — जैसे कहानी, चित्रकारी या भूमिका-निर्वाह (role play) के माध्यम से भय या क्रोध जैसी भावनाओं पर सहज व खुली चर्चा करना।

छोटे बच्चों (शैशव व पूर्व बाल्यावस्था) में संवेग तेज़ी से बदलते हैं, इसलिए शिक्षक को धैर्य रखते हुए तुरंत कड़ी प्रतिक्रिया देने के बजाय बच्चे को शांत होने का समय देना चाहिए। बड़े बच्चों (उत्तर बाल्यावस्था व किशोरावस्था) में संवेगों पर खुली चर्चा व सहानुभूतिपूर्ण संवाद अधिक कारगर होता है।

परीक्षा टिप

याद रखें — ब्रिजेज़ के सिद्धांत का क्रम है: 'जन्म पर सामान्य अविभेदित उत्तेजना → लगभग 6 माह तक भय-क्रोध-हर्ष-असंतोष जैसे विशिष्ट संवेग → लगभग 1 वर्ष तक अधिकांश संवेग स्पष्ट रूप से विभेदित → 2 वर्ष के बाद भाषा के साथ ईर्ष्या-शोक जैसे जटिल संवेग'। प्रश्नों में अक्सर पूछा जाता है कि जन्म के समय शिशु में कौन-सी अवस्था होती है — सही उत्तर हमेशा 'अविभेदित सामान्य उत्तेजना' होगा, कोई विशिष्ट संवेग नहीं। सिद्धांतकार का नाम 'ब्रिजेज़' व वर्ष '1932' भी याद रखें, क्योंकि ये सीधे पूछे जा सकते हैं।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

संवेगात्मक विकास सिद्धांत के अनुसार जन्म के समय शिशु में क्या पाया जाता है?

  1. Aकेवल ईर्ष्या
  2. Bस्पष्ट भय व क्रोध
  3. Cकेवल एक सामान्य अविभेदित उत्तेजना
  4. Dपूर्ण रूप से विकसित सभी संवेग

व्याख्या

ब्रिजेज़ के अनुसार जन्म के समय शिशु में केवल एक सामान्य, अविभेदित उत्तेजना होती है; विशिष्ट संवेग बाद में धीरे-धीरे विकसित होते हैं।

प्रश्न 2

कैथरीन ब्रिजेज़ का सिद्धांत मुख्यतः किससे संबंधित है?

  1. Aसंवेगों का विभेदीकरण
  2. Bनैतिक विकास
  3. Cबुद्धि का मापन
  4. Dभाषा-अर्जन

व्याख्या

ब्रिजेज़ का सिद्धांत बताता है कि जन्म की सामान्य उत्तेजना से समय के साथ विशिष्ट संवेग कैसे विभेदित होते हैं।

प्रश्न 3

निम्न में से कौन-सी बच्चों के संवेगों की विशेषता नहीं है?

  1. Aबार-बार बदलना
  2. Bतीव्रता
  3. Cअल्पकालिकता
  4. Dस्थिरता (कभी न बदलना)

व्याख्या

बच्चों के संवेग स्थिर नहीं होते — ये बार-बार व तेज़ी से बदलते हैं; इसलिए 'स्थिरता' उनकी विशेषता नहीं है।

प्रश्न 4

किसी बच्चे का पसंदीदा खिलौना छीन लेने पर वह सामान्यतः कौन-सा संवेग दिखाता है?

  1. Aहर्ष
  2. Bक्रोध
  3. Cईर्ष्या
  4. Dआश्चर्य

व्याख्या

इच्छा पूरी न होना या कोई पसंदीदा वस्तु छिन जाना सामान्यतः क्रोध के संवेग को जन्म देता है।

प्रश्न 5

ब्रिजेज़ के अनुसार लगभग किस आयु तक अधिकांश बुनियादी संवेग स्पष्ट रूप से विभेदित हो जाते हैं?

  1. Aलगभग 1 वर्ष
  2. B5 वर्ष
  3. C3 माह
  4. D6 माह

व्याख्या

ब्रिजेज़ के अनुसार लगभग 6 माह तक मौलिक संवेग अलग पहचाने जाने लगते हैं, और लगभग 1 वर्ष तक अधिकांश बुनियादी संवेग स्पष्ट रूप से विभेदित हो जाते हैं।

प्रश्न 6

2 वर्ष की आयु के बाद भाषा विकास के साथ कौन-से जटिल संवेग जुड़ने लगते हैं?

  1. Aकोई नया संवेग नहीं जुड़ता
  2. Bकेवल हर्ष
  3. Cईर्ष्या व शोक जैसे संवेग
  4. Dकेवल भय

व्याख्या

ब्रिजेज़ के अनुसार 2 वर्ष के बाद भाषा विकास के साथ ईर्ष्या व शोक जैसे अधिक जटिल संवेग भी बुनियादी संवेगों में जुड़ने लगते हैं।

प्रश्न 7

एक छोटा बच्चा कक्षा में अचानक रोने लगता है और कुछ ही मिनटों में सामान्य होकर फिर खेलने लगता है। यह बाल-संवेगों की किस विशेषता को सबसे बेहतर दर्शाता है?

  1. Aदमन
  2. Bतार्किकता
  3. Cस्थिरता
  4. Dअल्पकालिकता

व्याख्या

संवेग का जल्दी उठकर जल्दी शांत हो जाना बाल-संवेगों की 'अल्पकालिकता' विशेषता को दर्शाता है।

प्रश्न 8

संवेगात्मक विकास में शिक्षक के लिए सबसे उपयुक्त दृष्टिकोण क्या है?

  1. Aसंवेगों को पूरी तरह दबाना सिखाना
  2. Bसंवेगों को पहचानने व सुरक्षित ढंग से व्यक्त करने में मदद करना
  3. Cकेवल शैक्षिक विषयों पर ध्यान देना
  4. Dसभी बच्चों से एक जैसी प्रतिक्रिया की अपेक्षा करना

व्याख्या

शिक्षक की भूमिका बच्चों को उनके संवेग पहचानने व सुरक्षित, स्वीकार्य ढंग से व्यक्त करने में सहयोग देना है, न कि उन्हें दबाना।

प्रश्न 9

संवेग (Emotion) की परिभाषा में सामान्यतः कौन-कौन से पक्ष शामिल होते हैं?

  1. Aकेवल शारीरिक बदलाव
  2. Bकेवल विचार
  3. Cशारीरिक बदलाव, अनुभूति और व्यवहार तीनों
  4. Dकेवल भाषा

व्याख्या

संवेग में शारीरिक बदलाव (जैसे धड़कन तेज़ होना), मानसिक अनुभूति (feeling) और बाहरी व्यवहार — तीनों पक्ष शामिल होते हैं।

प्रश्न 10

निम्न में से कौन-सा एक मौलिक/बुनियादी संवेग है?

  1. Aभय
  2. Bआत्मविश्वास
  3. Cनैतिकता
  4. Dतर्कशक्ति

व्याख्या

भय, क्रोध, हर्ष व घृणा जैसे संवेग बुनियादी/मौलिक संवेग माने जाते हैं; आत्मविश्वास, नैतिकता व तर्कशक्ति व्यक्तित्व/संज्ञानात्मक विकास के अन्य पक्ष हैं, संवेग नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जन्म के समय शिशु में किस प्रकार का संवेग होता है?+

जन्म के समय शिशु में केवल एक सामान्य, अविभेदित उत्तेजना होती है, कोई विशिष्ट संवेग (जैसे भय या क्रोध) नहीं; विशिष्ट संवेग धीरे-धीरे परिपक्वन व अनुभव के साथ विकसित होते हैं।

बच्चों में संवेगों को अलग-अलग पहचानने की प्रक्रिया को क्या कहते हैं?+

संवेगात्मक विभेदीकरण (Emotional Differentiation), जैसा कैथरीन ब्रिजेज़ ने 1932 में अपने सिद्धांत में बताया।

क्या बच्चों के संवेग वयस्कों से अधिक तीव्र होते हैं?+

हाँ, सामान्यतः बच्चों के संवेग वयस्कों की तुलना में अधिक तीव्र पर अल्पकालिक होते हैं, और उम्र बढ़ने के साथ उनकी तीव्रता व अभिव्यक्ति अधिक नियंत्रित होती जाती है।

REET में इस टॉपिक से किस तरह के प्रश्न पूछे जा सकते हैं?+

मुख्यतः संवेग की परिभाषा, बाल-संवेगों की विशेषताएँ और ब्रिजेज़ के विभेदीकरण सिद्धांत के क्रम व आयु-बिंदुओं पर आधारित तथ्यात्मक प्रश्न।

संवेगात्मक विकास में शिक्षक की क्या भूमिका होनी चाहिए?+

शिक्षक को बच्चों के संवेगों को दबाने के बजाय पहचानने व सुरक्षित ढंग से व्यक्त करने में मदद करनी चाहिए, तथा आयु के अनुसार धैर्यपूर्ण व सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

क्या सभी बच्चे एक ही स्थिति में एक जैसा संवेग दिखाते हैं?+

नहीं, वैयक्तिक भिन्नता बाल-संवेगों की एक प्रमुख विशेषता है — एक ही परिस्थिति में अलग-अलग बच्चे अलग-अलग संवेगात्मक प्रतिक्रिया दिखा सकते हैं, इसलिए शिक्षक को हर बच्चे को अलग ढंग से व धैर्यपूर्वक समझने की कोशिश करनी चाहिए।

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  • 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए