स्मृति एवं विस्मृति (Memory and Forgetting)
स्मृति यह तय करती है कि छात्र कितनी जानकारी संचित व पुनः प्राप्त कर पाते हैं, और विस्मृति के सिद्धांत बताते हैं कि हम क्यों भूलते हैं। REET में इस टॉपिक से स्मृति के भंडार, विस्मृति के कारण व संज्ञानात्मक भार जैसे आधुनिक सिद्धांत पूछे जाते हैं, जो शिक्षण-रणनीति के लिए भी उपयोगी हैं।
- REET 2024 में 1 प्रश्न
- L1+L2 स्तर
- 8 मिनट पढ़ें
REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
2024 का प्रश्न संज्ञानात्मक भार सिद्धांत (Cognitive Load Theory) पर आधारित था — आंतरिक संज्ञानात्मक भार (intrinsic load) का सबसे अच्छा उदाहरण पूछा गया, जिसका उत्तर था 'जटिल तत्वों को पहचानने में छात्र का संघर्ष'। यह दर्शाता है कि REET स्मृति व सीखने की क्षमता से जुड़े आधुनिक सिद्धांतों को भी इस टॉपिक में शामिल करता है, विशेषकर यह समझना कि विषयवस्तु की जटिलता स्वयं स्मृति पर कैसे बोझ डालती है।
स्मृति (Memory) क्या है
स्मृति वह मानसिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा हम सूचना को ग्रहण (encoding), संचित (storage) और आवश्यकता पड़ने पर पुनः प्राप्त (retrieval) करते हैं। एटकिंसन व शिफरिन (Atkinson & Shiffrin, 1968) के बहु-भंडार मॉडल (Multi-Store Model) के अनुसार स्मृति तीन प्रमुख भंडारों में काम करती है।
सूचना पहले संवेदी स्मृति में आती है, जहाँ अगर हम उस पर ध्यान (attention) दें, तो वह अल्पकालिक स्मृति में पहुँचती है। अल्पकालिक स्मृति में सूचना को बार-बार दोहराने (maintenance rehearsal) से वह कुछ देर और टिक सकती है, पर उसे स्थायी रूप से दीर्घकालिक स्मृति में भेजने के लिए 'विस्तृत पुनरावृत्ति' (elaborative rehearsal) — यानी नई जानकारी को पहले से जाने हुए ज्ञान से अर्थपूर्ण ढंग से जोड़ना — सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है। यही कारण है कि रटने की बजाय समझकर जोड़ी गई जानकारी अधिक समय तक याद रहती है।
दीर्घकालिक स्मृति को आगे कई उप-प्रकारों में बाँटा जाता है — जैसे घटनात्मक स्मृति (episodic memory, व्यक्तिगत अनुभवों की), तथ्यात्मक स्मृति (semantic memory, सामान्य ज्ञान व तथ्यों की) और प्रक्रियात्मक स्मृति (procedural memory, कौशलों व आदतों की, जैसे साइकिल चलाना)। कक्षा-शिक्षण में शिक्षक इन तीनों प्रकार की स्मृति को अलग-अलग रणनीतियों से मज़बूत कर सकते हैं — कहानियों व अनुभवों से घटनात्मक स्मृति, तथ्यों की पुनरावृत्ति व चार्ट से तथ्यात्मक स्मृति, और बार-बार अभ्यास से प्रक्रियात्मक स्मृति।
स्मृति के तीन भंडार (Atkinson-Shiffrin मॉडल)
| भंडार | धारण-क्षमता | अवधि |
|---|---|---|
| संवेदी स्मृति (Sensory Memory) | बहुत बड़ी (सभी संवेदी सूचना) | बहुत ही संक्षिप्त — लगभग 0.25 से 2 सेकंड तक |
| अल्पकालिक स्मृति (Short-Term Memory) | सीमित — लगभग 7 ± 2 इकाइयाँ (मिलर का प्रसिद्ध नियम) | बिना दोहराव के लगभग 15-30 सेकंड |
| दीर्घकालिक स्मृति (Long-Term Memory) | असीमित | स्थायी — जीवनभर तक टिक सकती है, अर्थपूर्ण (semantic) रूप से एन्कोड होती है |
विस्मृति (Forgetting) के प्रमुख सिद्धांत
| सिद्धांत | मुख्य विचार |
|---|---|
| क्षय सिद्धांत (Decay Theory) | समय के साथ स्मृति-चिह्न (memory trace) स्वतः कमजोर होकर मिट जाता है, विशेषकर उपयोग न होने पर |
| व्यतिकरण सिद्धांत (Interference Theory) | नई व पुरानी जानकारी एक-दूसरे में हस्तक्षेप करती हैं — पूर्वगामी व्यतिकरण (proactive) में पुरानी जानकारी नई को बाधित करती है, पश्चगामी व्यतिकरण (retroactive) में नई जानकारी पुरानी को बाधित करती है |
| पुनः प्राप्ति विफलता (Retrieval Failure) | सूचना स्मृति में मौजूद रहती है, पर सही संकेत (cue) न मिलने से याद नहीं आती — उपयुक्त संकेत मिलने पर बाद में याद आ सकती है |
संज्ञानात्मक भार सिद्धांत (Cognitive Load Theory — स्वेलर)
- आंतरिक भार (Intrinsic Load)
- विषयवस्तु की स्वयं की जटिलता से उत्पन्न भार — जैसे एक साथ कई जुड़े हुए जटिल तत्वों को समझना; इसे विषय को छोटे, क्रमबद्ध भागों में पढ़ाकर कुछ हद तक प्रबंधित किया जा सकता है
- बाह्य भार (Extraneous Load)
- खराब शिक्षण-सामग्री डिज़ाइन या ध्यान भटकाने वाले तत्वों (जैसे अनावश्यक शोर/चित्र) से उत्पन्न भार, जिसे स्पष्ट, सुव्यवस्थित सामग्री देकर काफी हद तक कम किया जा सकता है
- उपयोगी भार (Germane Load)
- सीखने व स्कीमा-निर्माण (नए ज्ञान को मौजूदा ज्ञान-संरचना से जोड़ने) में सीधे सहायक मानसिक प्रयास — इसे बढ़ाना ही प्रभावी शिक्षण का लक्ष्य होना चाहिए
कक्षा में इसका उपयोग
| उद्देश्य | कक्षा में रणनीति |
|---|---|
| दीर्घकालिक स्मृति में जानकारी स्थानांतरित करना | विस्तृत पुनरावृत्ति (elaborative rehearsal) — नई जानकारी को पहले से जाने हुए ज्ञान व वास्तविक जीवन के उदाहरणों से अर्थपूर्ण ढंग से जोड़कर पढ़ाना |
| अल्पकालिक स्मृति के बोझ को कम करना | जानकारी को छोटे-छोटे सार्थक समूहों (chunking) में बाँटकर प्रस्तुत करना |
| व्यतिकरण से बचाव | एक जैसे दिखने वाले नए व पुराने पाठों के बीच पर्याप्त अभ्यास-अंतराल व स्पष्ट तुलना देना |
REET के लिए क्यों ज़रूरी है
स्मृति व विस्मृति की समझ शिक्षक की दैनिक शिक्षण-रणनीति को सीधे प्रभावित करती है — जैसे नई पाठ्यवस्तु को कब व कैसे दोहराना है (spaced repetition), परीक्षा-पूर्व पुनरावृत्ति की योजना कैसे बनानी है, और जटिल पाठों को छोटे-छोटे भागों में क्यों तोड़ना चाहिए। REET में यह टॉपिक प्रायः स्मृति-मॉडल के भंडारों, विस्मृति के सिद्धांतों की पहचान व अब संज्ञानात्मक भार जैसे आधुनिक सिद्धांतों के व्यावहारिक उदाहरण देकर पूछा जाता है, इसलिए केवल परिभाषा नहीं बल्कि उदाहरण-आधारित समझ जरूरी है।
अभ्यर्थियों को यह भी समझना चाहिए कि विस्मृति के तीनों सिद्धांत एक-दूसरे के प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि पूरक माने जाते हैं — किसी भी वास्तविक जीवन की स्थिति में विस्मृति एक साथ कई कारणों (क्षय, व्यतिकरण, संकेत की कमी) से हो सकती है। REET में जब किसी उदाहरण के आधार पर सही सिद्धांत पहचानने को कहा जाए, तो सबसे विशिष्ट/सटीक रूप से लागू होने वाला सिद्धांत चुनना चाहिए — जैसे यदि उदाहरण में स्पष्ट रूप से दो समान जानकारियों के बीच टकराव दिखाया गया हो, तो व्यतिकरण सबसे उपयुक्त उत्तर होगा।
त्वरित रिवीज़न बिंदु
- मॉडल के प्रतिपादक
- एटकिंसन व शिफरिन (1968)
- तीन भंडार
- संवेदी, अल्पकालिक, दीर्घकालिक
- विस्मृति के 3 सिद्धांत
- क्षय, व्यतिकरण, पुनः प्राप्ति विफलता
- संज्ञानात्मक भार सिद्धांत के प्रतिपादक
- जॉन स्वेलर
स्मृति भंडार याद रखने की ट्रिक
'7 ± 2' अंक अल्पकालिक स्मृति की क्षमता है — मोबाइल नंबर याद रखते समय हम अक्सर उसे छोटे-छोटे टुकड़ों (chunking) में बाँटते हैं, यही रणनीति कक्षा में जटिल जानकारी सिखाने में भी काम आती है।
REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)
प्रश्न 19
आंतरिक संज्ञानात्मक भार का सबसे अच्छा उदाहरण कौन-सा है ?
- Aएक कार्य जिसके लिये कई उदाहरणों की आवश्यकता है
- Bएक छात्र जो जटिल तत्वों को पहचानने के लिए संघर्ष कर रहा है
- Cविनाशकारी दृश्यों वाला पाठ
- Dअसंबंधित पृष्ठभूमि शोर को प्रबंधित करना
व्याख्या
संज्ञानात्मक भार सिद्धान्त (Cognitive Load Theory, स्वेलर) में आंतरिक भार (intrinsic load) विषयवस्तु की अपनी जटिलता — एक साथ संसाधित किए जाने वाले तत्वों की संख्या — से उत्पन्न होता है। जटिल तत्वों को पहचानने में छात्र का संघर्ष इसी का उदाहरण है। ध्यान भटकाने वाले दृश्य या पृष्ठभूमि शोर बाहरी (extraneous) भार के उदाहरण हैं।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
एटकिंसन-शिफरिन मॉडल के अनुसार स्मृति के कितने भंडार हैं?
- A2
- B3
- C4
- D5
व्याख्या
एटकिंसन-शिफरिन मॉडल में संवेदी, अल्पकालिक व दीर्घकालिक — कुल 3 स्मृति भंडार माने गए हैं।
प्रश्न 2
अल्पकालिक स्मृति (STM) की सामान्य धारण-क्षमता कितनी मानी जाती है?
- A2±1 इकाइयाँ
- B7±2 इकाइयाँ
- Cअसीमित
- D20±5 इकाइयाँ
व्याख्या
मिलर के नियम के अनुसार अल्पकालिक स्मृति की सामान्य धारण-क्षमता लगभग 7±2 इकाइयाँ मानी जाती है।
प्रश्न 3
'पूर्वगामी व्यतिकरण (Proactive Interference)' का सही उदाहरण कौन-सा है?
- Aपुराना फोन नंबर याद रहने से नया फोन नंबर याद करने में कठिनाई होना
- Bनया फोन नंबर सीखने से पुराना नंबर भूल जाना
- Cदोनों नंबर तुरंत भूल जाना
- Dकोई भी नंबर याद न रहना
व्याख्या
पूर्वगामी व्यतिकरण में पहले सीखी गई (पुरानी) जानकारी नई जानकारी सीखने/याद रखने में बाधा डालती है।
प्रश्न 4
संज्ञानात्मक भार सिद्धांत में 'बाह्य भार (Extraneous Load)' का उदाहरण क्या है?
- Aविषय की स्वाभाविक जटिलता
- Bपाठ में अनावश्यक चित्र या शोर से ध्यान भटकना
- Cसीखने में मानसिक प्रयास लगाना
- Dदीर्घकालिक स्मृति में जानकारी संचित होना
व्याख्या
बाह्य भार खराब शिक्षण-सामग्री डिज़ाइन या ध्यान भटकाने वाले तत्वों से उत्पन्न होता है, जिसे शिक्षक कम कर सकते हैं।
प्रश्न 5
'पुनः प्राप्ति विफलता (Retrieval Failure)' सिद्धांत के अनुसार विस्मृति क्यों होती है?
- Aजानकारी पूरी तरह मिट जाती है
- Bजानकारी मौजूद रहती है पर सही संकेत (cue) न मिलने से याद नहीं आती
- Cनई जानकारी पुरानी को पूरी तरह बदल देती है
- Dमस्तिष्क में जगह की कमी हो जाती है
व्याख्या
पुनः प्राप्ति विफलता सिद्धांत मानता है कि जानकारी स्मृति में संचित रहती है, परंतु उपयुक्त संकेत के अभाव में उसे पुनः प्राप्त नहीं किया जा सकता।
प्रश्न 6
एक शिक्षक लंबी सूची (जैसे 12 राज्यों के नाम) एक साथ रटवाने के बजाय उसे 3-4 छोटे समूहों में बाँटकर पढ़ाता है। यह किस रणनीति का उदाहरण है?
- Aव्यतिकरण
- Bचंकिंग (Chunking)
- Cक्षय
- Dपुनः प्राप्ति विफलता
व्याख्या
बड़ी सूची को छोटे सार्थक समूहों में बाँटना (chunking) अल्पकालिक स्मृति की सीमित क्षमता को ध्यान में रखते हुए याद रखना आसान बनाता है।
प्रश्न 7
दीर्घकालिक स्मृति (LTM) की धारण-क्षमता व अवधि कैसी मानी जाती है?
- Aसीमित क्षमता, संक्षिप्त अवधि
- Bअसीमित क्षमता, स्थायी/दीर्घ अवधि
- Cशून्य क्षमता
- Dकेवल कुछ सेकंड की अवधि
व्याख्या
दीर्घकालिक स्मृति की क्षमता असीमित मानी जाती है और यह जीवनभर तक स्थायी रह सकती है।
प्रश्न 8
संज्ञानात्मक भार सिद्धांत (Cognitive Load Theory) का प्रतिपादन मुख्यतः किससे जोड़ा जाता है?
- Aजॉन स्वेलर (John Sweller)
- Bबी.एफ. स्किनर
- Cजीन पियाजे
- Dलेव वाइगोत्स्की
व्याख्या
संज्ञानात्मक भार सिद्धांत मुख्यतः जॉन स्वेलर के कार्य से जुड़ा है, जिन्होंने आंतरिक, बाह्य व उपयोगी भार का भेद प्रस्तुत किया।
प्रश्न 9
एक छात्र किसी जटिल गणितीय संकल्पना को समझने में संघर्ष कर रहा है क्योंकि उसमें कई परस्पर जुड़े चरण एक साथ याद रखने पड़ते हैं। यह किस प्रकार के संज्ञानात्मक भार का उदाहरण है?
- Aबाह्य भार
- Bआंतरिक भार
- Cउपयोगी भार
- Dशून्य भार
व्याख्या
विषयवस्तु की अपनी अंतर्निहित जटिलता से उत्पन्न भार आंतरिक भार (intrinsic load) कहलाता है।
प्रश्न 10
संवेदी स्मृति (Sensory Memory) की मुख्य विशेषता क्या है?
- Aअसीमित अवधि पर सीमित क्षमता
- Bबहुत बड़ी क्षमता पर अत्यंत संक्षिप्त अवधि (लगभग 0.25-2 सेकंड)
- Cशून्य क्षमता
- Dकेवल दृश्य जानकारी के लिए
व्याख्या
संवेदी स्मृति में सभी संवेदी सूचना बहुत बड़ी मात्रा में आती है, पर बहुत ही कम समय (लगभग 0.25-2 सेकंड) के लिए टिकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
स्मृति के कितने भंडार माने जाते हैं?+
एटकिंसन-शिफरिन मॉडल के अनुसार स्मृति के तीन भंडार हैं — संवेदी, अल्पकालिक व दीर्घकालिक स्मृति।
व्यतिकरण सिद्धांत क्या है?+
इसके अनुसार नई व पुरानी जानकारी एक-दूसरे में हस्तक्षेप करके विस्मृति का कारण बनती हैं — पूर्वगामी व पश्चगामी व्यतिकरण इसके दो प्रकार हैं।
आंतरिक संज्ञानात्मक भार क्या है?+
विषयवस्तु की स्वयं की जटिलता से उत्पन्न मानसिक भार, जैसे कई परस्पर जुड़े तत्वों को एक साथ समझना।
REET में स्मृति व विस्मृति से किस तरह के प्रश्न आते हैं?+
प्रायः स्मृति के भंडार, विस्मृति के सिद्धांत व संज्ञानात्मक भार से जुड़ी अवधारणाओं की पहचान व उदाहरण-आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं।
चंकिंग (Chunking) क्या है और संज्ञानात्मक भार सिद्धांत का शिक्षण में क्या उपयोग है?+
बड़ी मात्रा में जानकारी को छोटे-छोटे सार्थक समूहों में बाँटने की रणनीति, जो अल्पकालिक स्मृति की सीमित क्षमता (लगभग 7±2 इकाइयाँ) को ध्यान में रखते हुए याद रखना आसान बनाती है। यह शिक्षक को यह समझने में मदद करता है कि पाठ को इस तरह डिज़ाइन करें कि अनावश्यक (बाह्य) भार कम हो और छात्र की मानसिक ऊर्जा सीखने (उपयोगी भार) पर केंद्रित रहे।
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आधिकारिक स्रोत
बदलाव लॉग
- 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए