स्वच्छता एवं साफ-सफाई
स्वच्छता EVS का सबसे व्यावहारिक टॉपिक है, जो बच्चों की रोज़मर्रा की आदतों (हाथ धोना, नहाना, कचरा प्रबंधन) से सीधे जुड़ा है। यह पेज व्यक्तिगत व सामुदायिक स्वच्छता, इनसे जुड़े रोगों और स्वच्छ भारत मिशन के तथ्य परीक्षा-केंद्रित ढंग से समझाता है।
- REET 2024 में इस टॉपिक से कोई प्रश्न नहीं आया
- कक्षा 1–5 स्तर
- 8 मिनट पढ़ें
REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
REET 2024 की उत्तर कुंजी में 'स्वच्छता' से सीधा प्रश्न दर्ज नहीं है। BSER के EVS सिलेबस में यह टॉपिक बुनियादी स्वास्थ्य-शिक्षा के अंतर्गत शामिल है, और सामान्यतः 'स्वच्छ भारत मिशन कब शुरू हुआ', 'हाथ धोने के सही चरण' या गंदगी से होने वाले रोगों से जुड़े तथ्यात्मक/व्यावहारिक प्रश्न पूछे जाने की संभावना रहती है।
व्यक्तिगत स्वच्छता की आदतें
व्यक्तिगत स्वच्छता में नियमित स्नान, दाँतों की सफाई (दिन में दो बार ब्रश), नाखून काटना, साफ कपड़े पहनना और खाने से पहले व शौचालय के बाद साबुन से हाथ धोना शामिल है। ये आदतें बचपन में ही सिखाई जानी चाहिए क्योंकि यही उम्र की अवस्था है जब व्यवहार स्थायी आदत बनता है।
हाथ धोने के सही चरण (गीला करना → साबुन लगाना → कम-से-कम 20 सेकंड तक रगड़ना → साफ पानी से धोना → सुखाना) को कक्षा में व्यावहारिक रूप से करके दिखाना सबसे प्रभावी शिक्षण विधि मानी जाती है। हर वर्ष 15 अक्टूबर को 'वैश्विक हाथ धुलाई दिवस' (Global Handwashing Day) मनाया जाता है।
अस्वच्छता से जुड़े सामान्य रोग व बचाव
| रोग | मुख्य कारण | बचाव |
|---|---|---|
| दस्त/डायरिया | दूषित पानी व भोजन | साफ पानी पीना, हाथ धोना |
| हैजा | दूषित पानी | उबला/स्वच्छ पानी, खुले में शौच से बचाव |
| टाइफाइड | दूषित भोजन व पानी | स्वच्छ भोजन-जल, टीकाकरण |
| त्वचा रोग (खुजली) | गंदे कपड़े/शरीर | नियमित स्नान, साफ कपड़े |
| कृमि संक्रमण | बिना धुले हाथों से भोजन | खाने से पहले हाथ धोना, नंगे पाँव न घूमना |
अधिकांश रोग हाथ धोने की आदत मात्र से रोके जा सकते हैं — यही स्वच्छता-शिक्षा का मूल संदेश है।
स्वच्छ भारत मिशन
भारत सरकार ने 2 अक्टूबर 2014 (महात्मा गांधी की जयंती) को 'स्वच्छ भारत मिशन' शुरू किया, जिसका उद्देश्य खुले में शौच को समाप्त करना, हर घर में शौचालय बनवाना और सामुदायिक स्वच्छता को बढ़ावा देना था। इस मिशन ने विद्यालयों में भी शौचालय-निर्माण व स्वच्छता-जागरूकता को प्राथमिकता दी।
सामुदायिक स्वच्छता में कचरे को गीला (जैविक) व सूखा (अजैविक) अलग-अलग एकत्र करना, नालियों की सफाई और सार्वजनिक स्थानों पर कचरा न फैलाना शामिल है — यह विषय बच्चों को व्यक्तिगत आदत से आगे 'सामुदायिक ज़िम्मेदारी' की समझ तक ले जाता है।
सामुदायिक स्वच्छता व स्वच्छ पर्यावरण
व्यक्तिगत आदतों के साथ-साथ सामुदायिक स्तर पर स्वच्छता बनाए रखना भी आवश्यक है — गली-मोहल्लों में नियमित सफाई, नालियों का बहाव सुचारु रखना और सार्वजनिक स्थानों (पार्क, बस स्टैंड, बाज़ार) को गंदा न करना, ये सभी मिलकर स्वस्थ वातावरण बनाते हैं। एक व्यक्ति की सफाई-आदतें तभी पूर्ण रूप से प्रभावी होती हैं जब पूरा समुदाय उसमें सहभागी बने।
विद्यालयों में 'स्वच्छता निगरानी दल' जैसी बाल-नेतृत्व वाली गतिविधियाँ बच्चों में ज़िम्मेदारी की भावना विकसित करती हैं — जहाँ बच्चे स्वयं बारी-बारी कक्षा व परिसर की स्वच्छता का ध्यान रखते हैं, यह उन्हें भविष्य में ज़िम्मेदार नागरिक बनने के लिए भी तैयार करता है।
स्वच्छता व पोषण का संबंध
स्वच्छता व पोषण एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं — बार-बार दस्त या कृमि संक्रमण होने पर शरीर भोजन से पूरा पोषण अवशोषित नहीं कर पाता, जिससे बच्चों में कुपोषण की समस्या बढ़ सकती है, भले ही उन्हें पर्याप्त भोजन मिल रहा हो। इसीलिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ 'स्वच्छता' को केवल सफाई का नहीं, बल्कि पोषण व बाल-विकास का भी मुद्दा मानते हैं।
छोटे बच्चों को ऊपरी आहार (weaning food) देते समय बर्तनों व हाथों की सफाई का विशेष ध्यान रखना ज़रूरी होता है, क्योंकि इस उम्र में उनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता अभी पूरी तरह विकसित नहीं होती। यह EVS के 'स्वच्छता' व 'संतुलित आहार' जैसे टॉपिकों को आपस में जोड़ता है, जिससे बच्चों को समग्र स्वास्थ्य की समझ मिलती है।
जमा पानी व मच्छर-जनित रोगों से बचाव
स्वच्छता केवल शरीर व भोजन तक सीमित नहीं — आसपास जमा पानी को रोकना भी उतना ही ज़रूरी है, क्योंकि रुका हुआ पानी मच्छरों के प्रजनन का मुख्य स्थान बनता है। डेंगू व मलेरिया जैसे रोग मच्छरों के काटने से फैलते हैं, इसलिए कूलर, गमलों व टायरों में जमा पानी नियमित रूप से खाली करना बचाव का एक प्रभावी उपाय है।
विद्यालय स्तर पर भी स्वच्छता महत्वपूर्ण है — पीने के पानी के स्रोत की नियमित सफाई, शौचालयों की स्वच्छता और मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) बनाने व परोसने में साफ-सफाई का ध्यान रखना बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए आवश्यक है। यही कारण है कि 'स्वच्छ विद्यालय' अभियान के अंतर्गत विद्यालयों में शौचालय, हाथ धोने की सुविधा व पेयजल व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाती है।
खाद्य स्वच्छता व सुरक्षित पेयजल
भोजन से जुड़ी स्वच्छता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है — फल व सब्ज़ियों को खाने से पहले साफ पानी से धोना, खुले में रखे भोजन को मक्खी व धूल से ढककर रखना, और बासी भोजन से परहेज़ करना बुनियादी आदतें हैं जो बीमारियों से बचाती हैं। पीने का पानी यदि सुरक्षित स्रोत से न हो, तो उसे उबालकर या उचित फिल्टर से शुद्ध करके ही पीना चाहिए।
प्रत्येक वर्ष 10 फरवरी को भारत में 'राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस' (National Deworming Day) मनाया जाता है, जिसके अंतर्गत स्कूली बच्चों को कृमि-नाशक दवा दी जाती है — यह स्वच्छता की कमी से होने वाले कृमि संक्रमण को रोकने की एक सामूहिक सरकारी पहल है। दस्त की स्थिति में तुरंत ओआरएस (ORS) घोल देना शरीर में जल व लवण की कमी को रोकने का प्राथमिक उपचार माना जाता है।
बच्चों को कैसे पढ़ाएँ
कक्षा गतिविधि
साबुन व पानी से हाथ धोने का व्यावहारिक प्रदर्शन (डेमो) कक्षा में कराएँ और बच्चों से बारी-बारी अभ्यास कराएँ।
शिक्षण सामग्री
'सही आदत बनाम गलत आदत' दिखाने वाले सरल पोस्टर या चित्र-कथा (जैसे गंदे हाथों से खाना खाने का परिणाम) का उपयोग करें।
सामान्य भ्रांति
बच्चे अक्सर मानते हैं कि 'हाथ पानी से धोना ही काफ़ी है' — साबुन के उपयोग का महत्व स्पष्ट रूप से समझाएँ, क्योंकि केवल पानी से कीटाणु नहीं हटते।
मूल्यांकन विचार
बच्चों से हाथ धोने के चरण क्रम में दोहराने को कहें (प्रदर्शन आधारित मूल्यांकन) — यह लिखित परीक्षा से अधिक प्रभावी संकेतक है।
याद रखने की ट्रिक
'2-2-2 का नियम' याद रखें — दिन में 2 बार ब्रश, हाथ धोने में कम-से-कम 20 सेकंड, और स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत 2 अक्टूबर 2014 को हुई थी।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
स्वच्छ भारत मिशन किस तारीख को शुरू किया गया था?
- A15 अगस्त 2014
- B2 अक्टूबर 2014
- C26 जनवरी 2015
- D1 मई 2014
व्याख्या
स्वच्छ भारत मिशन 2 अक्टूबर 2014 को महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर शुरू किया गया था।
प्रश्न 2
सही ढंग से हाथ धोते समय साबुन से कम-से-कम कितने समय तक रगड़ना चाहिए?
- A5 सेकंड
- B20 सेकंड
- C2 मिनट
- Dसमय मायने नहीं रखता
व्याख्या
स्वास्थ्य दिशानिर्देशों के अनुसार साबुन से कम-से-कम 20 सेकंड तक हाथ रगड़ना चाहिए ताकि कीटाणु प्रभावी रूप से हटें।
प्रश्न 3
निम्न में से कौन-सा रोग मुख्यतः दूषित पानी पीने से होता है?
- Aहैजा
- Bअस्थमा
- Cजुकाम
- Dमलेरिया
व्याख्या
हैजा मुख्यतः दूषित पानी पीने से होने वाला रोग है, जिससे बचाव के लिए स्वच्छ या उबला पानी पीना चाहिए।
प्रश्न 4
वैश्विक हाथ धुलाई दिवस किस तारीख को मनाया जाता है?
- A5 जून
- B2 फरवरी
- C15 अक्टूबर
- D22 मार्च
व्याख्या
हर वर्ष 15 अक्टूबर को वैश्विक हाथ धुलाई दिवस मनाया जाता है, जो हाथ स्वच्छता के महत्व पर जागरूकता फैलाता है।
प्रश्न 5
कचरे को घर पर अलग-अलग एकत्र करने के दो मुख्य प्रकार कौन-से हैं?
- Aगीला व सूखा कचरा
- Bहल्का व भारी कचरा
- Cबड़ा व छोटा कचरा
- Dपुराना व नया कचरा
व्याख्या
कचरे को जैविक (गीला) व अजैविक (सूखा) — इन दो श्रेणियों में अलग-अलग एकत्र करना उचित अपशिष्ट प्रबंधन की पहली सीढ़ी है।
प्रश्न 6
केवल पानी से हाथ धोने की तुलना में साबुन से हाथ धोना अधिक प्रभावी क्यों है?
- Aसाबुन से हाथ जल्दी सूखते हैं
- Bसाबुन कीटाणुओं व तेल की परत को तोड़कर हटाने में सहायक होता है
- Cसाबुन से हाथों का रंग बदलता है
- Dइसका कोई वैज्ञानिक कारण नहीं है
व्याख्या
साबुन हाथों पर जमी तेल-आधारित परत को तोड़ता है, जिसमें कीटाणु छिपे रहते हैं, और इस प्रकार उन्हें प्रभावी रूप से हटाता है।
प्रश्न 7
कक्षा 2 के बच्चों को हाथ धोना सिखाने का सबसे प्रभावी तरीका क्या है?
- Aकेवल मौखिक निर्देश देना
- Bव्यावहारिक प्रदर्शन कर उनसे अभ्यास कराना
- Cकेवल पाठ्यपुस्तक पढ़ाना
- Dगृहकार्य में परिभाषा लिखवाना
व्याख्या
छोटे बच्चों में कौशल-आधारित आदतें (जैसे हाथ धोना) प्रत्यक्ष प्रदर्शन व अभ्यास से सबसे प्रभावी ढंग से बनती हैं।
प्रश्न 8
कृमि संक्रमण से बचाव का सबसे सरल उपाय क्या है?
- Aखाने से पहले हाथ धोना व नंगे पाँव न घूमना
- Bअधिक मीठा खाना
- Cदेर रात तक जागना
- Dबाहर का पानी पीना
व्याख्या
खाने से पहले हाथ धोना व नंगे पाँव न घूमना कृमि संक्रमण से बचाव का सबसे सरल व प्रभावी उपाय है।
प्रश्न 9
स्वच्छ भारत मिशन का एक प्रमुख उद्देश्य क्या था?
- Aखुले में शौच को समाप्त करना
- Bनए स्कूल खोलना
- Cनई सड़कें बनाना
- Dबिजली उत्पादन बढ़ाना
व्याख्या
स्वच्छ भारत मिशन का प्रमुख उद्देश्य खुले में शौच को समाप्त करना और हर घर में शौचालय सुनिश्चित करना था।
प्रश्न 10
नियमित नाखून काटने की आदत मुख्यतः किस समस्या को रोकने में सहायक है?
- Aआँखों की कमजोरी
- Bनाखूनों के नीचे गंदगी जमा होने व संक्रमण को
- Cबालों का झड़ना
- Dदाँतों की सड़न
व्याख्या
लंबे नाखूनों में गंदगी व कीटाणु जमा हो जाते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ता है; नियमित काटना इसे रोकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
स्वच्छ भारत मिशन कब शुरू हुआ था?+
स्वच्छ भारत मिशन 2 अक्टूबर 2014 को महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर शुरू किया गया था।
वैश्विक हाथ धुलाई दिवस कब मनाया जाता है?+
हर वर्ष 15 अक्टूबर को वैश्विक हाथ धुलाई दिवस (Global Handwashing Day) मनाया जाता है।
हाथ धोते समय साबुन का उपयोग क्यों ज़रूरी है?+
केवल पानी से हाथों पर मौजूद तेल-आधारित परत में छिपे कीटाणु पूरी तरह नहीं हटते; साबुन इस परत को तोड़कर कीटाणुओं को हटाने में सहायक होता है।
खुले में शौच से कौन-कौन से रोग फैल सकते हैं?+
खुले में शौच से दस्त, हैजा, टाइफाइड व कृमि संक्रमण जैसे जल-जनित व स्वच्छता-संबंधी रोग फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस कब मनाया जाता है?+
भारत में हर वर्ष 10 फरवरी को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया जाता है, जिसमें स्कूली बच्चों को कृमि-नाशक दवा दी जाती है।
कूलर व गमलों में जमा पानी नियमित खाली करना क्यों ज़रूरी है?+
रुका हुआ पानी मच्छरों के प्रजनन का मुख्य स्थान बनता है, जिससे डेंगू व मलेरिया जैसे रोग फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
आगे पढ़ें
आधिकारिक स्रोत
बदलाव लॉग
- 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए