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REET L2 (गणित-विज्ञान) · विज्ञान शिक्षणशास्त्र

विज्ञान में बच्चों की सामान्य ग़लतफ़हमियाँ और उन्हें दूर करना

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REET Level 2 विज्ञान शिक्षणशास्त्र खंड में बच्चों की सामान्य वैज्ञानिक ग़लतफ़हमियों (misconceptions) को पहचानना और सुधारना एक महत्वपूर्ण विषय है, क्योंकि रटी हुई ग़लत समझ बाद में सही अवधारणा सीखने में बाधा बनती है। इस पेज में आम ग़लतफ़हमियों के उदाहरण, उनके बनने के कारण और कक्षा में उन्हें दूर करने की सिद्ध रणनीतियाँ बताई गई हैं।

  • REET 2024 में सीधा प्रश्न नहीं, सिलेबस आधारित
  • शिक्षक-प्रशिक्षण स्तर
  • 8 मिनट पढ़ें
16 सितंबर 2026 को सत्यापित · स्रोत: NCERT — राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF)

REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

REET 2024 के पेपर में विज्ञान की ग़लतफ़हमियों से जुड़ा कोई सत्यापित प्रश्न हमारे पास दर्ज नहीं है, इसलिए हम कोई पुराना प्रश्न गढ़कर नहीं दिखा रहे। यह नोट REET Level 2 विज्ञान शिक्षणशास्त्र सिलेबस (बाल-केंद्रित शिक्षण व मूल्यांकन के सिद्धांत) पर आधारित है। यह टॉपिक सिलेबस में शामिल है, इसलिए भविष्य के पेपर में सामान्य भ्रांतियों की पहचान या उन्हें दूर करने की रणनीति से जुड़ा प्रश्न आने की पूरी संभावना है।

ग़लतफ़हमियाँ बनती क्यों हैं

बच्चा कक्षा में आने से पहले ही अपने दैनिक अनुभवों, भाषा और आस-पास देखी घटनाओं से दुनिया के बारे में एक अपनी समझ बना चुका होता है — इसे पूर्व-अवधारणा (preconception) कहा जाता है। कई बार यह समझ रोज़मर्रा के अनुभव में तो "काम करती" दिखती है, पर वैज्ञानिक रूप से ग़लत होती है — इसी को वैज्ञानिक ग़लतफ़हमी (misconception) कहते हैं।

रचनावाद (Constructivism) के अनुसार बच्चा नई जानकारी को अपनी पुरानी समझ के ढाँचे में ही फिट करने की कोशिश करता है। यदि शिक्षक बिना पुरानी ग़लत समझ को चुनौती दिए सीधे सही तथ्य बता दे, तो अक्सर बच्चा परीक्षा के लिए नया तथ्य रट तो लेता है, पर मन में पुरानी (ग़लत) समझ बनी रहती है — यही कारण है कि ग़लतफ़हमियाँ बार-बार लौटकर आती हैं।

भाषा की भूमिका भी अहम है — रोज़मर्रा की हिंदी/स्थानीय भाषा में कुछ शब्दों के अर्थ वैज्ञानिक अर्थ से अलग होते हैं। जैसे "ठंडा" शब्द बोलचाल में किसी वस्तु का गुण लगता है, जबकि विज्ञान में तापमान एक सापेक्ष माप है (कोई वस्तु स्वयं "ठंडी" नहीं होती, बल्कि हमारे शरीर के तापमान से कम तापमान वाली होती है)। ऐसे भाषाई अंतर भी कई ग़लतफ़हमियों की जड़ में होते हैं, और REET शिक्षणशास्त्र में भाषा व विज्ञान-अवधारणा के इस रिश्ते को समझना भी अपेक्षित है।

विज्ञान में आम ग़लतफ़हमियों के उदाहरण

सामान्य ग़लतफ़हमीवैज्ञानिक सच्चाई
भारी वस्तु हल्की वस्तु से तेज़ गिरती हैनिर्वात में दोनों समान गति से गिरती हैं (वायु प्रतिरोध की वजह से ही अंतर दिखता है)
पौधे अपना भोजन मिट्टी से सीधे "खाकर" बनाते हैंपौधे प्रकाश-संश्लेषण द्वारा सूर्य के प्रकाश, जल व कार्बन डाइऑक्साइड से भोजन स्वयं बनाते हैं; मिट्टी से केवल जल व खनिज लेते हैं
गतिमान वस्तु को गतिमान बनाए रखने के लिए लगातार बल चाहिएन्यूटन के प्रथम नियम अनुसार बिना घर्षण/प्रतिरोध के वस्तु स्वतः समान वेग से गति करती रहती है; बल केवल गति में बदलाव के लिए चाहिए
सभी सूक्ष्मजीव (जीवाणु/कवक) हानिकारक होते हैंकई सूक्ष्मजीव लाभदायक भी हैं — जैसे दही जमाने वाले जीवाणु, नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाले जीवाणु
शरीर में सारी धमनियों में शुद्ध और सारी शिराओं में अशुद्ध रक्त बहता हैसामान्यतः धमनियाँ हृदय से रक्त ले जाती हैं व शिराएँ हृदय की ओर लाती हैं — फुफ्फुसीय परिसंचरण में यह उल्टा होता है (फुफ्फुसीय धमनी में अशुद्ध, फुफ्फुसीय शिरा में शुद्ध रक्त)

ये सभी उदाहरण दुनिया भर में विज्ञान शिक्षा अनुसंधान में बार-बार दर्ज की गई सामान्य छात्र-भ्रांतियाँ हैं।

ग़लतफ़हमियों को दूर करने की रणनीतियाँ

सबसे पहला कदम है निदानात्मक आकलन (diagnostic assessment) — अध्याय शुरू करने से पहले सरल प्रश्नों या चर्चा से यह जान लेना कि बच्चे इस विषय पर पहले से क्या सोचते हैं। इससे शिक्षक को पता चलता है कि किन ग़लतफ़हमियों को खासतौर पर संबोधित करना होगा।

संज्ञानात्मक द्वंद्व (cognitive conflict) रणनीति में शिक्षक जानबूझकर ऐसी स्थिति या प्रयोग सामने रखता है, जिसका परिणाम बच्चे की मौजूदा (ग़लत) समझ से मेल नहीं खाता — जैसे रुई और पत्थर को एक साथ (निर्वात नली में) गिराकर दिखाना। यह "आश्चर्य" बच्चे को अपनी पुरानी समझ पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित करता है — इसी प्रक्रिया को संकल्पनात्मक परिवर्तन मॉडल (Conceptual Change Model) कहा जाता है।

इसके साथ ही उपयुक्त सादृश्य (analogy) का प्रयोग सावधानी से करना चाहिए, क्योंकि गलत या अधूरी उपमा नई ग़लतफ़हमी पैदा कर सकती है — जैसे विद्युत प्रवाह को पानी के बहाव जैसा बताना कुछ हद तक सही है, पर आगे स्पष्ट सीमाएँ न बताई जाएँ तो नई भ्रांति बन सकती है। शिक्षक को पाठ्यपुस्तक और अपनी भाषा में भी ऐसे सरलीकरण से बचना चाहिए जो आगे चलकर ग़लत समझ बना दें।

कक्षा में इसका उपयोग

पूर्व-आकलन

नया अध्याय शुरू करने से पहले 2-3 सरल मौखिक या लिखित प्रश्नों से जानें कि बच्चे विषय के बारे में पहले से क्या मानते हैं — इससे शिक्षण की दिशा तय करने में मदद मिलती है।

प्रदर्शन/प्रयोग

जहाँ संभव हो, ऐसा सरल प्रदर्शन कराएँ जो बच्चे की गलत धारणा को सीधे चुनौती दे — जैसे कागज़ की सपाट शीट और उसी कागज़ की मुड़ी हुई गेंद को साथ गिराकर वायु-प्रतिरोध का असर दिखाना।

खुली चर्चा

बच्चों को अपने विचार खुलकर बताने दें, फिर सम्मानपूर्वक उनकी ग़लत समझ को तर्क व प्रमाण से सुधारें — सीधे "तुम गलत हो" कहने के बजाय प्रश्न पूछकर सोचने को प्रेरित करें।

मूल्यांकन

केवल परिभाषा पूछने के बजाय "क्यों" और "कैसे" वाले प्रश्न पूछें (जैसे "पौधा भोजन कहाँ से और कैसे बनाता है") — इससे पता चलता है कि ग़लतफ़हमी वाकई दूर हुई या केवल सही शब्द रट लिया गया।

दोबारा जाँच

कुछ हफ्तों बाद बिना पूर्व-सूचना के फिर से वही अवधारणा घुमा-फिराकर पूछें — यदि पुरानी ग़लतफ़हमी दोबारा दिखे तो समझें कि अवधारणा केवल परीक्षा के लिए रटी गई थी, स्थायी रूप से नहीं समझी गई।

परीक्षा टिप

जब भी प्रश्न में "बच्चे की पूर्व-धारणा को चुनौती देना" या "आश्चर्यजनक प्रयोग दिखाना" जैसे शब्द दिखें, तो उत्तर में संकल्पनात्मक परिवर्तन मॉडल (Conceptual Change Model) या संज्ञानात्मक द्वंद्व (Cognitive Conflict) की ओर झुकें — यह REET शिक्षणशास्त्र में बार-बार पूछा जाने वाला विचार है। यह भी याद रखें: ग़लतफ़हमी दूर करने का सबसे कमज़ोर तरीका है "बस सही उत्तर रटा देना", और सबसे मज़बूत तरीका है बच्चे को स्वयं प्रयोग या तर्क से विरोधाभास दिखाना।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

"भारी वस्तु हल्की वस्तु से तेज़ गिरती है" — यह किस प्रकार की समझ का उदाहरण है?

  1. Aसही वैज्ञानिक तथ्य
  2. Bगणितीय सूत्र
  3. Cसामान्य ग़लतफ़हमी (misconception)
  4. Dप्रयोगशाला नियम

व्याख्या

निर्वात में सभी वस्तुएँ समान गति से गिरती हैं; "भारी वस्तु तेज़ गिरती है" रोज़मर्रा के अनुभव (वायु प्रतिरोध के कारण) से बनी एक सामान्य वैज्ञानिक ग़लतफ़हमी है।

प्रश्न 2

पौधे अपना भोजन कैसे बनाते हैं, इस पर एक बच्चा कहता है "पौधे मिट्टी से भोजन सीधे खा लेते हैं"। शिक्षक को इस ग़लतफ़हमी को दूर करने के लिए सबसे उपयुक्त कदम क्या होगा?

  1. Aबच्चे को चुपचाप सही उत्तर याद करा देना
  2. Bविषय को आगे न पढ़ाना
  3. Cबच्चे को डाँटना
  4. Dप्रकाश-संश्लेषण का सरल प्रयोग (जैसे आयोडीन परीक्षण) कराकर दिखाना

व्याख्या

प्रत्यक्ष प्रयोग द्वारा दिखाना कि पौधा प्रकाश की उपस्थिति में ही स्टार्च बनाता है, बच्चे की मौजूदा ग़लत समझ को चुनौती देकर सही अवधारणा तक पहुँचाने का प्रभावी तरीका है।

प्रश्न 3

संकल्पनात्मक परिवर्तन मॉडल (Conceptual Change Model) का मूल उद्देश्य क्या है?

  1. Aबच्चे की मौजूदा ग़लत समझ को चुनौती देकर सही समझ की ओर ले जाना
  2. Bबच्चे को नया तथ्य रटा देना
  3. Cपरीक्षा का पैटर्न बदलना
  4. Dपाठ्यपुस्तक बदलना

व्याख्या

यह मॉडल बच्चे की पूर्व (ग़लत) अवधारणा को तर्क, प्रयोग या असंगत परिणाम दिखाकर चुनौती देता है, ताकि बच्चा स्वयं सोचकर सही समझ की ओर बढ़े, केवल नया तथ्य न रटे।

प्रश्न 4

"गतिमान वस्तु को गतिमान बनाए रखने के लिए लगातार बल चाहिए" — यह धारणा किस वैज्ञानिक नियम के विरुद्ध है?

  1. Aओम का नियम
  2. Bन्यूटन का प्रथम नियम (जड़त्व का नियम)
  3. Cआर्किमिडीज़ का सिद्धांत
  4. Dबॉयल का नियम

व्याख्या

न्यूटन के प्रथम नियम (जड़त्व के नियम) के अनुसार बिना घर्षण/प्रतिरोध के वस्तु समान वेग से गति करती रहती है — बल केवल गति में परिवर्तन के लिए आवश्यक है, गति बनाए रखने के लिए नहीं।

प्रश्न 5

अध्याय शुरू करने से पहले बच्चों की मौजूदा समझ जानने के लिए किए गए आकलन को क्या कहते हैं?

  1. Aयोगात्मक मूल्यांकन (summative)
  2. Bवार्षिक परीक्षा
  3. Cनिदानात्मक आकलन (diagnostic assessment)
  4. Dगृहकार्य

व्याख्या

निदानात्मक आकलन का उद्देश्य अध्याय शुरू करने से पहले बच्चों की पूर्व-समझ व संभावित ग़लतफ़हमियाँ जानना है, ताकि शिक्षण उसी अनुसार लक्षित किया जा सके।

प्रश्न 6

सभी सूक्ष्मजीवों को हानिकारक मानने वाली ग़लतफ़हमी को दूर करने के लिए कौन-सा उदाहरण सबसे उपयुक्त होगा?

  1. Aमलेरिया फैलाने वाला परजीवी
  2. Bफफूंद से खराब हुई रोटी
  3. Cजुकाम फैलाने वाला विषाणु
  4. Dदही जमाने वाले लाभदायक जीवाणु

व्याख्या

दही जमाने वाले जीवाणु (जैसे लैक्टोबेसिलस) एक स्पष्ट उदाहरण हैं जो दिखाते हैं कि सभी सूक्ष्मजीव हानिकारक नहीं होते — कई लाभदायक भी हैं।

प्रश्न 7

विद्युत प्रवाह को पानी के बहाव जैसी उपमा से समझाते समय शिक्षक को किस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए?

  1. Aउपमा की सीमाएँ भी स्पष्ट रूप से बताना ताकि नई ग़लतफ़हमी न बने
  2. Bउपमा की सीमाएँ स्पष्ट न बताना
  3. Cउपमा का प्रयोग बिल्कुल न करना
  4. Dकेवल सूत्र याद कराना

व्याख्या

अधूरी या असीमित उपमा नई ग़लतफ़हमी पैदा कर सकती है, इसलिए शिक्षक को उपमा के साथ यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि वह कहाँ तक सही है और कहाँ लागू नहीं होती।

प्रश्न 8

रुई और पत्थर को निर्वात नली में एक साथ गिराकर दिखाना किस शिक्षण रणनीति का उदाहरण है?

  1. Aयोगात्मक मूल्यांकन
  2. Bसंज्ञानात्मक द्वंद्व (cognitive conflict)
  3. Cगृहकार्य
  4. Dरटना

व्याख्या

यह प्रदर्शन बच्चे की "भारी वस्तु तेज़ गिरती है" वाली मौजूदा धारणा के विपरीत परिणाम दिखाकर आश्चर्य/द्वंद्व पैदा करता है, जो उसे पुनर्विचार के लिए प्रेरित करता है — यही संज्ञानात्मक द्वंद्व रणनीति है।

प्रश्न 9

एक शिक्षक परीक्षा में केवल "प्रकाश-संश्लेषण की परिभाषा लिखो" पूछता है, जबकि दूसरा शिक्षक पूछता है "पौधा भोजन कहाँ से और कैसे बनाता है, उदाहरण सहित समझाओ"। कौन-सा प्रश्न ग़लतफ़हमी दूर होने की बेहतर जाँच करता है?

  1. Aपहला प्रश्न (परिभाषा)
  2. Bदोनों समान रूप से उपयुक्त हैं
  3. Cदूसरा प्रश्न (कैसे और कहाँ से, उदाहरण सहित)
  4. Dदोनों ही अनुपयुक्त हैं

व्याख्या

"कैसे और कहाँ से" जैसे प्रश्न बच्चे की वास्तविक समझ जाँचते हैं, जबकि केवल परिभाषा रटकर भी लिखी जा सकती है — इससे पता नहीं चलता कि ग़लतफ़हमी वाकई दूर हुई या नहीं।

प्रश्न 10

बच्चों की वैज्ञानिक ग़लतफ़हमियाँ मुख्यतः किस कारण से बनती हैं?

  1. Aकेवल शिक्षक की गलती से
  2. Bकेवल पाठ्यपुस्तक की छपाई की गलती से
  3. Cबच्चों की बुद्धि कम होने से
  4. Dदैनिक अनुभव, भाषा और आस-पास देखी घटनाओं से बनी पूर्व-समझ से

व्याख्या

बच्चा कक्षा में आने से पहले ही अपने रोज़मर्रा के अनुभवों और भाषा से दुनिया की एक समझ बना चुका होता है, जो कई बार वैज्ञानिक रूप से ग़लत होती है — यही ग़लतफ़हमियों का मुख्य स्रोत है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वैज्ञानिक ग़लतफ़हमी (misconception) किसे कहते हैं?+

बच्चे के मन में दैनिक अनुभव या भाषा से बनी ऐसी समझ, जो रोज़मर्रा में तो सही लगती है पर वैज्ञानिक रूप से ग़लत होती है, जैसे "भारी वस्तु तेज़ गिरती है"।

संकल्पनात्मक परिवर्तन मॉडल (Conceptual Change Model) क्या है?+

यह एक शिक्षण रणनीति है जिसमें बच्चे की मौजूदा ग़लत समझ को प्रयोग या तर्क से चुनौती देकर, धीरे-धीरे उसे सही वैज्ञानिक समझ की ओर ले जाया जाता है।

ग़लतफ़हमियाँ दोबारा-दोबारा क्यों लौट आती हैं?+

क्योंकि बच्चा अक्सर परीक्षा के लिए नया तथ्य रट लेता है, लेकिन अगर पुरानी ग़लत समझ को ठीक से चुनौती न दिया जाए, तो वह मन में बनी रहती है और बाद में फिर सामने आ जाती है।

निदानात्मक आकलन (diagnostic assessment) का क्या महत्व है?+

अध्याय शुरू करने से पहले बच्चों की मौजूदा समझ जानने से शिक्षक को पता चलता है कि किन विशेष ग़लतफ़हमियों को कक्षा में संबोधित करने की ज़रूरत है, जिससे शिक्षण अधिक लक्षित व प्रभावी बनता है।

REET में इस टॉपिक से कितने प्रश्न आते हैं?+

यह टॉपिक REET Level 2 विज्ञान शिक्षणशास्त्र सिलेबस का हिस्सा है, लेकिन REET 2024 में इससे सीधा कोई सत्यापित प्रश्न नहीं आया — सिलेबस में होने के कारण भविष्य में प्रश्न आ सकता है।

आगे पढ़ें

आधिकारिक स्रोत

  1. NCERT — राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF)
  2. NCERT — विज्ञान पाठ्यपुस्तकें

बदलाव लॉग

  • 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए