दूरसंचार: टेलीग्राफ से उपग्रह संचार तक
REET Level 2 विज्ञान सिलेबस में दूरसंचार "दैनिक जीवन में विज्ञान" खंड का हिस्सा है, जहाँ टेलीग्राफ से लेकर उपग्रह संचार तक के आविष्कार व सिद्धांत पूछे जाते हैं। इस पेज में हर तकनीक को उसके आविष्कारक, सिद्धांत और आज के उपयोग के साथ क्रमबद्ध तरीके से समझाया गया है।
- REET 2024 में सीधा प्रश्न नहीं, सिलेबस आधारित
- कक्षा 6-8 स्तर
- 8 मिनट पढ़ें
REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
REET 2024 के पेपर में दूरसंचार से जुड़ा कोई सत्यापित प्रश्न हमारे पास दर्ज नहीं है, इसलिए हम कोई पुराना प्रश्न गढ़कर नहीं दिखा रहे। यह नोट पूरी तरह REET Level 2 विज्ञान सिलेबस के "दैनिक जीवन में विज्ञान का प्रयोग" खंड की शब्दावली और NCERT स्तर की समझ पर आधारित है। यह टॉपिक सिलेबस में स्पष्ट रूप से शामिल है, इसलिए भविष्य के पेपर में आविष्कारक, सिद्धांत या उपयोग पर आधारित सीधा प्रश्न आ सकता है।
टेलीग्राफ और टेलीफोन: तार के सहारे पहला संदेश
टेलीग्राफ दूर संचार की सबसे पुरानी विद्युत तकनीकों में से एक है। अमेरिकी आविष्कारक सैम्युअल मोर्स ने मोर्स कोड (बिंदु व रेखाओं की भाषा) विकसित किया और सन् 1844 में पहला सार्वजनिक टेलीग्राफ संदेश भेजा। भारत में टेलीग्राफ सेवा की शुरुआत 1850 के दशक में हुई और 1854 तक कलकत्ता-आगरा-बम्बई-पेशावर जैसे बड़े शहरों को जोड़ने वाला नेटवर्क तैयार हो गया था।
टेलीफोन की खोज का श्रेय अलेक्ज़ेंडर ग्राहम बेल को दिया जाता है, जिन्होंने सन् 1876 में इसका पेटेंट कराया। टेलीफोन ध्वनि (आवाज़) को विद्युत संकेत में बदलकर तार के सहारे भेजता है, और दूसरे छोर पर उसे वापस ध्वनि में बदल देता है — यह टेलीग्राफ से एक बड़ा कदम आगे था क्योंकि अब केवल कोड नहीं, बल्कि असली आवाज़ भेजी जा सकती थी।
रेडियो और टेलीविज़न: बिना तार के संदेश
रेडियो तकनीक विद्युत-चुम्बकीय तरंगों (रेडियो तरंगों) के सहारे बिना तार के संदेश भेजती है। इटली के गुग्लिएल्मो मार्कोनी को वायरलेस टेलीग्राफी के व्यावसायिक विकास का श्रेय दिया जाता है — सन् 1901 में उन्होंने पहला अटलांटिक-पार वायरलेस संकेत भेजा और इसी काम के लिए सन् 1909 में उन्हें नोबेल पुरस्कार (भौतिकी) मिला। ध्यान देने योग्य बात यह है कि भारतीय वैज्ञानिक जगदीशचंद्र बोस ने सन् 1895 में कोलकाता में बिना तार के संकेत भेजने का सार्वजनिक प्रदर्शन कर दिया था, जो मार्कोनी के प्रसिद्ध प्रदर्शनों से पहले का था — हालाँकि व्यावसायिक रेडियो प्रणाली को आगे बढ़ाने का श्रेय मार्कोनी को मिलता है।
टेलीविज़न की बात करें तो स्कॉटिश आविष्कारक जॉन लॉगी बेयर्ड ने सन् 1925-26 में पहला काम करता हुआ टेलीविज़न सिस्टम बनाया, जिसमें चित्र और ध्वनि दोनों दूर तक भेजे जा सकते थे। रेडियो और टीवी दोनों ही विद्युत-चुम्बकीय तरंगों पर आधारित हैं, न कि ध्वनि तरंगों पर — यह एक ज़रूरी अंतर है क्योंकि रेडियो तरंगें निर्वात (vacuum) में भी यात्रा कर सकती हैं, जबकि ध्वनि तरंगों को यात्रा के लिए माध्यम (हवा, पानी आदि) चाहिए।
आधुनिक दूरसंचार: उपग्रह, मोबाइल और ऑप्टिकल फाइबर
उपग्रह संचार में पृथ्वी की कक्षा में स्थापित कृत्रिम उपग्रह संकेतों को एक स्थान से पकड़कर दूसरे दूर स्थान तक पहुँचाते हैं (रिले करते हैं) — इसी से लंबी दूरी की टेलीफोन कॉल, टीवी प्रसारण और GPS (स्थिति बताने वाली प्रणाली) संभव होते हैं। भारत का अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) दूरसंचार, प्रसारण और मौसम जैसे कामों के लिए अपने INSAT/GSAT श्रृंखला के उपग्रह संचालित करता है।
मोबाइल (सेल्युलर) फोन नेटवर्क भी रेडियो तरंगों पर आधारित है — शहर को छोटे-छोटे "सेल" क्षेत्रों में बाँटकर हर क्षेत्र में मोबाइल टावर लगाए जाते हैं, जो फोन से रेडियो तरंगों के ज़रिए जुड़ते हैं। दूसरी ओर, ऑप्टिकल फाइबर केबल में सिग्नल विद्युत की जगह प्रकाश (लेज़र) के रूप में यात्रा करता है — यह इंटरनेट की तेज़ गति और बड़ी क्षमता वाली डेटा ट्रांसफर सेवाओं की रीढ़ है।
प्रमुख आविष्कार एवं आविष्कारक
| तकनीक | आविष्कारक/अग्रणी | वर्ष (लगभग) | सिद्धांत |
|---|---|---|---|
| टेलीग्राफ (मोर्स कोड) | सैम्युअल मोर्स | 1844 | विद्युत संकेत — तार के सहारे कोड |
| टेलीफोन | अलेक्ज़ेंडर ग्राहम बेल | 1876 | ध्वनि ↔ विद्युत संकेत — तार |
| रेडियो (वायरलेस) | जगदीशचंद्र बोस (प्रदर्शन) / गुग्लिएल्मो मार्कोनी (व्यावसायिक विकास) | 1895 / 1901 | विद्युत-चुम्बकीय तरंगें — बिना तार |
| टेलीविज़न | जॉन लॉगी बेयर्ड | 1925-26 | विद्युत-चुम्बकीय तरंगें — चित्र व ध्वनि |
भारत में टेलीफोन सेवा 1881-82 में कोलकाता में शुरू हुई थी।
आज के दूरसंचार से जुड़े ज़रूरी शब्द
- ऑप्टिकल फाइबर
- पतली काँच/प्लास्टिक की तार जिसमें सिग्नल प्रकाश के रूप में यात्रा करता है; इंटरनेट व लंबी दूरी के डेटा-संचार में उपयोग।
- उपग्रह संचार
- पृथ्वी की कक्षा में स्थापित उपग्रह संकेतों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक रिले करते हैं — लंबी दूरी संचार, टीवी प्रसारण, GPS में उपयोग।
- मोबाइल/सेल्युलर नेटवर्क
- क्षेत्र को छोटे "सेल" में बाँटकर टावरों के माध्यम से रेडियो तरंगों से जोड़ने वाली प्रणाली।
- इंटरनेट
- दुनिया भर के कंप्यूटर नेटवर्कों को आपस में जोड़ने वाला तंत्र, जो आज अधिकतर ऑप्टिकल फाइबर व उपग्रह संचार पर निर्भर करता है।
- बैंडविड्थ
- किसी संचार माध्यम से एक निश्चित समय में भेजी जा सकने वाली डेटा की मात्रा — ऑप्टिकल फाइबर की बैंडविड्थ तांबे के तार से कहीं अधिक होती है।
बच्चों को कैसे पढ़ाएँ
गतिविधि
दो टिन के डिब्बों और धागे से "डिब्बा-टेलीफोन" बनवाकर दिखाएँ कि ध्वनि कंपन धागे के सहारे कैसे यात्रा करती है — यह टेलीफोन के मूल विचार (ध्वनि का यांत्रिक संचरण) को सरलता से समझाता है, भले ही असली टेलीफोन विद्युत संकेत का उपयोग करता हो। धागे को ढीला करके दिखाएँ कि आवाज़ स्पष्ट नहीं आती — इससे "माध्यम कसा हुआ होना क्यों ज़रूरी है" भी समझ आता है।
शिक्षण सहायक सामग्री
टेलीग्राफ से इंटरनेट तक की एक समयरेखा (timeline chart) कक्षा में लगाना बच्चों को तकनीकों के विकास-क्रम को याद रखने में मदद करता है। पुराना रेडियो सेट या मोबाइल फोन के अंदरूनी हिस्से (सिम कार्ड, एंटीना) दिखाना भी रुचि बढ़ाता है।
सामान्य भ्रांति
बच्चे अक्सर मान लेते हैं कि रेडियो/मोबाइल तरंगें "ध्वनि तरंगें" हैं। स्पष्ट करें कि ये विद्युत-चुम्बकीय तरंगें हैं, जो निर्वात में भी चल सकती हैं, जबकि असली ध्वनि तरंगों को माध्यम चाहिए।
मूल्यांकन
बच्चों से आविष्कारक-तकनीक का मिलान (matching) करवाएँ (जैसे मोर्स-टेलीग्राफ, बेल-टेलीफोन, मार्कोनी-रेडियो) — यह तथ्यात्मक याद्दाश्त जाँचने का तेज़ तरीका है।
याद रखने की ट्रिक
क्रम याद रखें — "तार वाला पहले, बिना तार बाद में": टेलीग्राफ (1844) → टेलीफोन (1876) → रेडियो (1895/1901) → टीवी (1925-26)। तार वाली दो तकनीकें पहले आईं, फिर बिना तार वाली — यही क्रम परीक्षा में वर्ष पूछे जाने पर सही दिशा देता है। और याद रखें: "रेडियो तरंग सुनाई नहीं देती, हवा के बिना भी चलती है" — यही ध्वनि तरंग से इसका सबसे बड़ा फ़र्क़ है।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
मोर्स कोड का उपयोग किस तकनीक में होता है?
- Aटेलीफोन
- Bरेडियो
- Cटेलीग्राफ
- Dउपग्रह संचार
व्याख्या
सैम्युअल मोर्स ने मोर्स कोड विकसित किया, जिसका उपयोग टेलीग्राफ में बिंदु व रेखाओं के संकेतों से संदेश भेजने के लिए होता है।
प्रश्न 2
टेलीफोन का पेटेंट सन् 1876 में किसके नाम हुआ?
- Aगुग्लिएल्मो मार्कोनी
- Bसैम्युअल मोर्स
- Cजॉन लॉगी बेयर्ड
- Dअलेक्ज़ेंडर ग्राहम बेल
व्याख्या
अलेक्ज़ेंडर ग्राहम बेल ने सन् 1876 में टेलीफोन का पेटेंट कराया, जो ध्वनि को विद्युत संकेत में बदलकर भेजता है।
प्रश्न 3
रेडियो तरंगें निर्वात (vacuum) में यात्रा कर सकती हैं, लेकिन ध्वनि तरंगें नहीं — इसका क्या कारण है?
- Aरेडियो तरंगें विद्युत-चुम्बकीय हैं, ध्वनि तरंगों को यात्रा के लिए माध्यम चाहिए
- Bरेडियो तरंगें बहुत धीमी होती हैं
- Cध्वनि तरंगें प्रकाश से तेज़ होती हैं
- Dइनमें कोई अंतर नहीं है
व्याख्या
रेडियो तरंगें विद्युत-चुम्बकीय तरंगें हैं जिन्हें यात्रा के लिए किसी माध्यम की ज़रूरत नहीं, जबकि ध्वनि तरंगों को कंपन के लिए हवा जैसे माध्यम की आवश्यकता होती है।
प्रश्न 4
भारतीय वैज्ञानिक जगदीशचंद्र बोस किस उपलब्धि के लिए जाने जाते हैं?
- Aटेलीफोन का आविष्कार
- Bसन् 1895 में कोलकाता में बिना तार संकेत भेजने का प्रदर्शन
- Cटेलीविज़न का आविष्कार
- Dउपग्रह प्रक्षेपण
व्याख्या
जगदीशचंद्र बोस ने सन् 1895 में कोलकाता में बिना तार के संकेत (वायरलेस सिग्नल) भेजने का सार्वजनिक प्रदर्शन किया था, जो मार्कोनी के प्रसिद्ध प्रदर्शनों से पहले का माना जाता है।
प्रश्न 5
ऑप्टिकल फाइबर केबल में सिग्नल किस रूप में यात्रा करता है?
- Aध्वनि तरंग के रूप में
- Bचुम्बकीय क्षेत्र के रूप में
- Cप्रकाश (लेज़र) के रूप में
- Dऊष्मा के रूप में
व्याख्या
ऑप्टिकल फाइबर पतली काँच/प्लास्टिक तार होती है, जिसमें सिग्नल विद्युत की जगह प्रकाश के रूप में यात्रा करता है, जिससे डेटा तेज़ी से भेजा जा सकता है।
प्रश्न 6
मोबाइल (सेल्युलर) नेटवर्क में किसी शहर को छोटे-छोटे भागों में बाँटा जाता है, उन्हें क्या कहते हैं?
- Aज़ोन
- Bनोड
- Cग्रिड
- Dसेल
व्याख्या
मोबाइल नेटवर्क में क्षेत्र को छोटे "सेल" में बाँटा जाता है, हर सेल में एक टावर होता है जो फोन से रेडियो तरंगों के ज़रिए जुड़ता है — इसीलिए इसे सेल्युलर नेटवर्क कहते हैं।
प्रश्न 7
भारत में उपग्रह संचार के लिए INSAT/GSAT श्रृंखला के उपग्रह किस संस्था द्वारा संचालित किए जाते हैं?
- AISRO
- BBSNL
- CDRDO
- DAIIMS
व्याख्या
भारत का अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) दूरसंचार, प्रसारण व मौसम जैसे कामों के लिए INSAT/GSAT श्रृंखला के उपग्रह संचालित करता है।
प्रश्न 8
"डिब्बा-टेलीफोन" (दो टिन के डिब्बे और धागा) गतिविधि से शिक्षक बच्चों को मुख्यतः क्या समझाना चाहते हैं?
- Aरेडियो तरंगों का सिद्धांत
- Bध्वनि कंपन के यांत्रिक संचरण का विचार
- Cउपग्रह संचार का सिद्धांत
- Dऑप्टिकल फाइबर का सिद्धांत
व्याख्या
डिब्बा-टेलीफोन गतिविधि दिखाती है कि ध्वनि कंपन धागे के सहारे कैसे यात्रा कर सकते हैं — यह ध्वनि संचरण और टेलीफोन के मूल विचार को सरलता से समझाने वाली गतिविधि है।
प्रश्न 9
टेलीग्राफ, टेलीफोन, रेडियो और टेलीविज़न — इन्हें उनके आविष्कार के कालक्रम (जल्दी से देर तक) में सही क्रम में रखें।
- Aटेलीफोन → टेलीग्राफ → टीवी → रेडियो
- Bरेडियो → टेलीग्राफ → टेलीफोन → टीवी
- Cटेलीग्राफ → टेलीफोन → रेडियो → टीवी
- Dटीवी → रेडियो → टेलीफोन → टेलीग्राफ
व्याख्या
सही कालक्रम है: टेलीग्राफ (1844) → टेलीफोन (1876) → रेडियो (1895/1901) → टेलीविज़न (1925-26)।
प्रश्न 10
कक्षा में दूरसंचार के इतिहास को याद रखाने के लिए कौन-सी शिक्षण-सहायक सामग्री सबसे उपयुक्त होगी?
- Aकेवल पाठ्यपुस्तक पढ़ना
- Bकोई सहायक सामग्री न देना
- Cकेवल परिभाषाएँ रटवाना
- Dआविष्कारों की समयरेखा (timeline chart)
व्याख्या
समयरेखा (timeline chart) बच्चों को तकनीकों के विकास-क्रम को दृश्य रूप में देखने और याद रखने में मदद करती है, जो केवल पढ़ने या रटने से अधिक प्रभावी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
टेलीग्राफ का आविष्कार किसने किया?+
सैम्युअल मोर्स ने मोर्स कोड विकसित किया और सन् 1844 में पहला सार्वजनिक टेलीग्राफ संदेश भेजा।
टेलीफोन का पेटेंट किसके नाम है?+
टेलीफोन का पेटेंट सन् 1876 में अलेक्ज़ेंडर ग्राहम बेल के नाम हुआ था।
रेडियो और ध्वनि तरंगों में क्या अंतर है?+
रेडियो विद्युत-चुम्बकीय तरंगों पर आधारित है, जो निर्वात में भी चल सकती हैं; ध्वनि तरंगों को यात्रा के लिए हवा जैसे माध्यम की ज़रूरत होती है — इसीलिए अंतरिक्ष (निर्वात) में ध्वनि नहीं सुनी जा सकती, पर रेडियो संकेत भेजे जा सकते हैं।
क्या जगदीशचंद्र बोस का रेडियो से कोई संबंध है?+
हाँ — भारतीय वैज्ञानिक जगदीशचंद्र बोस ने सन् 1895 में कोलकाता में बिना तार के संकेत भेजने का सार्वजनिक प्रदर्शन किया था, जो मार्कोनी के प्रसिद्ध सार्वजनिक प्रदर्शनों से पहले का माना जाता है, हालाँकि रेडियो का व्यावसायिक विकास मार्कोनी से जुड़ा है।
REET में दूरसंचार से कितने प्रश्न आते हैं?+
यह टॉपिक REET Level 2 विज्ञान सिलेबस के "दैनिक जीवन में विज्ञान" खंड का हिस्सा है, लेकिन REET 2024 में इससे सीधा कोई सत्यापित प्रश्न नहीं आया — सिलेबस में होने के कारण भविष्य में प्रश्न आ सकता है।
ऑप्टिकल फाइबर, तांबे के तार से बेहतर क्यों माना जाता है?+
ऑप्टिकल फाइबर में सिग्नल प्रकाश के रूप में यात्रा करता है, जिससे डेटा बहुत तेज़ गति से और बहुत कम नुकसान (signal loss) के साथ लंबी दूरी तक भेजा जा सकता है — यही कारण है कि आज का इंटरनेट बैकबोन मुख्यतः ऑप्टिकल फाइबर पर निर्भर है।
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आधिकारिक स्रोत
बदलाव लॉग
- 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए