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REET L2 · सामाजिक अध्ययन

सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण: कारण और अंतर

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REET Level 2 सामाजिक अध्ययन के भूगोल खंड में ग्रहण एक बुनियादी खगोलीय टॉपिक है, जहाँ सूर्य व चंद्र ग्रहण कैसे और कब बनते हैं, इस पर सीधे प्रश्न बनते हैं। इस पेज में दोनों ग्रहणों की खगोलीय प्रक्रिया, प्रच्छाया-उपच्छाया का अंतर और शिक्षण के लिए सरल गतिविधि सहित समझाया गया है।

  • REET 2024 में सीधा प्रश्न नहीं, सिलेबस आधारित
  • कक्षा 6-8 स्तर
  • 8 मिनट पढ़ें

REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

REET 2024 के पेपर में ग्रहण से जुड़ा कोई सत्यापित प्रश्न हमारे पास दर्ज नहीं है, इसलिए हम कोई पुराना प्रश्न गढ़कर नहीं दिखा रहे। यह नोट REET Level 2 सामाजिक अध्ययन (भूगोल) सिलेबस की शब्दावली और NCERT कक्षा 6 स्तर की "पृथ्वी: हमारा आवास" जैसी अवधारणाओं पर आधारित है। यह टॉपिक सिलेबस में शामिल है, इसलिए भविष्य के पेपर में ग्रहण की खगोलीय प्रक्रिया या प्रकार पर सीधा प्रश्न आ सकता है।

सूर्य ग्रहण: जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आता है

सूर्य ग्रहण उस समय होता है जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के ठीक बीच में आ जाता है, जिससे चंद्रमा की छाया पृथ्वी के किसी भाग पर पड़ती है — यह केवल अमावस्या (जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच होता है) के दिन ही हो सकता है। चूँकि चंद्रमा पृथ्वी से आकार में बहुत छोटा है, उसकी छाया पृथ्वी के बहुत छोटे से भाग पर ही पड़ती है — इसीलिए सूर्य ग्रहण पृथ्वी के सीमित क्षेत्र से ही दिखाई देता है।

सूर्य ग्रहण तीन प्रकार का हो सकता है — पूर्ण सूर्य ग्रहण (जब चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक लेता है), आंशिक सूर्य ग्रहण (जब चंद्रमा सूर्य के केवल एक भाग को ढकता है) और वलयाकार/कंकणाकृति सूर्य ग्रहण (जब चंद्रमा अपनी कक्षा में पृथ्वी से सबसे दूर होने के कारण सूर्य से छोटा दिखता है, जिससे बीच में एक चमकीला वलय/छल्ला शेष रह जाता है)।

चंद्र ग्रहण: जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आती है

चंद्र ग्रहण उस समय होता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, जिससे पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है — यह केवल पूर्णिमा (जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच होती है) के दिन ही हो सकता है। पृथ्वी चंद्रमा से बड़ी होने के कारण उसकी छाया भी बड़ी होती है, इसलिए चंद्र ग्रहण पृथ्वी के उस पूरे आधे भाग से दिखाई देता है जहाँ उस समय रात हो — यही कारण है कि चंद्र ग्रहण, सूर्य ग्रहण की तुलना में कहीं अधिक बड़े क्षेत्र से और अधिक देर तक देखा जा सकता है।

हर अमावस्या पर सूर्य ग्रहण और हर पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण नहीं होता, क्योंकि चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी की कक्षा (क्रांतिवृत्त) से लगभग 5 डिग्री झुकी हुई है। ग्रहण तभी बनता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा लगभग एक सीध में आ जाएँ — यह स्थिति साल में सीमित बार ही बनती है।

चंद्र ग्रहण भी पूर्ण या आंशिक हो सकता है, यह इस पर निर्भर करता है कि चंद्रमा पृथ्वी की प्रच्छाया (umbra) में पूरी तरह प्रवेश करता है या केवल उसके एक भाग में। पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा पूरी तरह काला नहीं दिखता, बल्कि पृथ्वी के वायुमंडल से मुड़कर पहुँचने वाली सूर्य की लाल किरणों के कारण हल्का ताँबई/लाल रंग का दिखाई देता है — इसी कारण इसे कई बार "ब्लड मून" भी कहा जाता है।

सूर्य ग्रहण बनाम चंद्र ग्रहण

सूर्य ग्रहण

कब होता हैअमावस्या

बीच में कौन आता हैचंद्रमा (सूर्य व पृथ्वी के बीच)

किस पर छाया पड़ती हैपृथ्वी पर

दिखाई देने का क्षेत्रसीमित/छोटा भाग

सीधे देखना सुरक्षित?नहीं, बिना विशेष सुरक्षा चश्मे के खतरनाक

चंद्र ग्रहण

कब होता हैपूर्णिमा

बीच में कौन आता हैपृथ्वी (सूर्य व चंद्रमा के बीच)

किस पर छाया पड़ती हैचंद्रमा पर

दिखाई देने का क्षेत्रपृथ्वी का पूरा रात्रि वाला भाग (बड़ा क्षेत्र)

सीधे देखना सुरक्षित?हाँ, नग्न आँखों से देखना सुरक्षित है

प्रच्छाया (umbra — पूर्ण छाया) क्षेत्र से पूर्ण ग्रहण और उपच्छाया (penumbra — आंशिक छाया) क्षेत्र से आंशिक ग्रहण दिखाई देता है।

ज़रूरी खगोलीय शब्द

प्रच्छाया (Umbra)
छाया का सबसे गहरा, पूर्ण अंधकार वाला भाग — इस क्षेत्र से पूर्ण ग्रहण दिखाई देता है।
उपच्छाया (Penumbra)
छाया का हल्का, आंशिक अंधकार वाला बाहरी भाग — इस क्षेत्र से आंशिक ग्रहण दिखाई देता है।
अमावस्या
वह तिथि जब चंद्रमा सूर्य व पृथ्वी के बीच होता है और पृथ्वी से चंद्रमा दिखाई नहीं देता — सूर्य ग्रहण की संभावित तिथि।
पूर्णिमा
वह तिथि जब पृथ्वी सूर्य व चंद्रमा के बीच होती है और चंद्रमा पूरा गोल दिखाई देता है — चंद्र ग्रहण की संभावित तिथि।

बच्चों को कैसे पढ़ाएँ

गतिविधि

एक बड़ी गेंद (पृथ्वी), एक छोटी गेंद (चंद्रमा) और टॉर्च (सूर्य) से मॉडल बनाकर दिखाएँ — जब छोटी गेंद बड़ी गेंद और टॉर्च के बीच आए तो सूर्य ग्रहण, और जब बड़ी गेंद बीच में आए तो चंद्र ग्रहण की स्थिति दिखाई देगी।

शिक्षण सहायक सामग्री

प्रच्छाया व उपच्छाया को अलग रंगों में दिखाने वाला सरल आरेख (diagram) कक्षा में लगाना बच्चों को दोनों तरह के ग्रहण की स्पष्ट तस्वीर देता है।

सामान्य भ्रांति

बच्चे अक्सर मानते हैं कि ग्रहण बादलों के सूर्य/चंद्रमा को ढकने से होता है, या इसे अपशकुन मानते हैं। वैज्ञानिक कारण (पृथ्वी-चंद्रमा-सूर्य की सापेक्ष स्थिति) स्पष्ट व संवेदनशीलता से समझाएँ, बिना पारिवारिक मान्यताओं का मज़ाक उड़ाए।

मूल्यांकन

बच्चों से सूर्य व चंद्र ग्रहण का चित्र बनवाकर सूर्य, पृथ्वी व चंद्रमा की सही स्थिति दिखाने को कहें — यह अवधारणा की सही समझ जाँचने का दृश्य तरीका है।

जीवन-कौशल जोड़ना

ग्रहण को वैज्ञानिक ढंग से पढ़ाते समय सुरक्षा नियम (जैसे सूर्य ग्रहण नग्न आँखों से न देखना) भी साथ में सिखाएँ — इससे विषय व्यावहारिक जीवन-कौशल से भी जुड़ जाता है।

याद रखने की ट्रिक

याद रखें — "चाँद बीच में तो सूरज ग्रहण" (चंद्रमा सूर्य-पृथ्वी के बीच आए तो सूर्य ग्रहण) और "धरती बीच में तो चाँद ग्रहण" (पृथ्वी सूर्य-चंद्रमा के बीच आए तो चंद्र ग्रहण)। साथ ही, "पूर्णिमा-चंद्र, अमावस्या-सूर्य" — यह क्रम याद रखने से तिथि संबंधी प्रश्न आसान हो जाते हैं। और यह भी याद रखें: सूर्य ग्रहण छोटे क्षेत्र से, चंद्र ग्रहण बड़े क्षेत्र से दिखता है।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

सूर्य ग्रहण किस खगोलीय स्थिति में होता है?

  1. Aचंद्रमा सूर्य व पृथ्वी के बीच आए
  2. Bपृथ्वी सूर्य व चंद्रमा के बीच आए
  3. Cसूर्य पृथ्वी व चंद्रमा के बीच आए
  4. Dइनमें से कोई नहीं

व्याख्या

सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के ठीक बीच आ जाता है, जिससे चंद्रमा की छाया पृथ्वी के एक सीमित भाग पर पड़ती है।

प्रश्न 2

चंद्र ग्रहण किस तिथि को हो सकता है?

  1. Aअमावस्या
  2. Bपूर्णिमा
  3. Cअष्टमी
  4. Dकिसी भी तिथि को

व्याख्या

चंद्र ग्रहण केवल पूर्णिमा के दिन हो सकता है, जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के ठीक बीच में आ जाती है।

प्रश्न 3

सूर्य ग्रहण, चंद्र ग्रहण की तुलना में पृथ्वी के बहुत छोटे भाग से ही क्यों दिखाई देता है?

  1. Aक्योंकि सूर्य बहुत बड़ा है
  2. Bक्योंकि सूर्य ग्रहण रात में होता है
  3. Cक्योंकि चंद्रमा छोटा होने से उसकी छाया पृथ्वी के केवल एक सीमित भाग पर पड़ती है
  4. Dक्योंकि पृथ्वी घूमती नहीं है

व्याख्या

चंद्रमा पृथ्वी की तुलना में आकार में बहुत छोटा है, इसलिए उसकी छाया पृथ्वी के केवल एक छोटे भाग पर ही पड़ती है, जबकि चंद्र ग्रहण में पृथ्वी की बड़ी छाया पूरे रात्रि वाले भाग को ढक लेती है।

प्रश्न 4

वलयाकार (कंकणाकृति) सूर्य ग्रहण कब बनता है?

  1. Aजब चंद्रमा पृथ्वी के सबसे पास हो
  2. Bजब पृथ्वी सूर्य के सबसे पास हो
  3. Cजब चंद्र ग्रहण भी साथ में हो
  4. Dजब चंद्रमा अपनी कक्षा में पृथ्वी से सबसे दूर होने के कारण सूर्य से छोटा दिखे

व्याख्या

जब चंद्रमा अपनी कक्षा में पृथ्वी से सबसे दूर बिंदु (अपोजी) पर होता है, तो वह सूर्य से छोटा दिखता है और सूर्य का किनारा वलय (छल्ले) की तरह दिखाई देता है — इसे वलयाकार/कंकणाकृति सूर्य ग्रहण कहते हैं।

प्रश्न 5

प्रच्छाया (umbra) क्षेत्र से किस प्रकार का ग्रहण दिखाई देता है?

  1. Aपूर्ण ग्रहण
  2. Bआंशिक ग्रहण
  3. Cकोई ग्रहण नहीं
  4. Dवलयाकार ग्रहण ही

व्याख्या

प्रच्छाया छाया का सबसे गहरा, पूर्ण अंधकार वाला भाग है, इस क्षेत्र से पूर्ण ग्रहण दिखाई देता है, जबकि उपच्छाया क्षेत्र से आंशिक ग्रहण दिखता है।

प्रश्न 6

हर अमावस्या पर सूर्य ग्रहण नहीं होता — इसका मुख्य कारण क्या है?

  1. Aसूर्य हर महीने अपनी स्थिति बदलता है
  2. Bचंद्रमा की कक्षा पृथ्वी की कक्षा से लगभग 5 डिग्री झुकी होती है
  3. Cपृथ्वी घूमना बंद कर देती है
  4. Dचंद्रमा का आकार बदल जाता है

व्याख्या

चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी की कक्षा (क्रांतिवृत्त) से लगभग 5 डिग्री झुकी होने के कारण सूर्य, पृथ्वी व चंद्रमा हर अमावस्या पर एक सीध में नहीं आते, इसलिए ग्रहण केवल कुछ ही अमावस्या/पूर्णिमा पर होता है।

प्रश्न 7

सूर्य ग्रहण को नग्न आँखों से सीधे क्यों नहीं देखना चाहिए?

  1. Aयह कानूनन प्रतिबंधित है
  2. Bइससे कुछ दिखाई नहीं देता
  3. Cइससे आँखों को नुकसान पहुँच सकता है
  4. Dइसका कोई कारण नहीं है

व्याख्या

सूर्य की तेज़ किरणें बिना उचित सुरक्षा चश्मे के सीधे देखने पर आँखों की रेटिना को स्थायी नुकसान पहुँचा सकती हैं, इसलिए सूर्य ग्रहण देखने के लिए विशेष सुरक्षा चश्मे या अप्रत्यक्ष तरीकों का उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 8

एक शिक्षक कक्षा में गेंद और टॉर्च से ग्रहण का मॉडल बनाकर दिखाता है। यह गतिविधि मुख्यतः किस अवधारणा को स्पष्ट करती है?

  1. Aजलवायु परिवर्तन
  2. Bभूकंप के कारण
  3. Cमानसून का आना
  4. Dसूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की सापेक्ष स्थिति व छाया का बनना

व्याख्या

गेंद और टॉर्च का मॉडल सूर्य, पृथ्वी व चंद्रमा की सापेक्ष स्थिति के अनुसार छाया कैसे बनती है, यह प्रत्यक्ष रूप से दिखाता है — यही ग्रहण की मूल अवधारणा है।

प्रश्न 9

चंद्र ग्रहण, सूर्य ग्रहण की तुलना में अधिक देर तक क्यों दिखाई देता है?

  1. Aपृथ्वी की छाया चंद्रमा की छाया से बड़ी होती है
  2. Bचंद्रमा तेज़ी से घूमता है
  3. Cसूर्य ग्रहण रात में होता है
  4. Dइसका कोई निश्चित कारण नहीं है

व्याख्या

पृथ्वी चंद्रमा से बड़ी होने के कारण उसकी छाया भी बड़ी होती है, जिससे चंद्र ग्रहण पृथ्वी के पूरे रात्रि वाले भाग से और अपेक्षाकृत अधिक देर तक दिखाई देता है।

प्रश्न 10

बच्चों में ग्रहण को अपशकुन मानने जैसी भ्रांति होने पर शिक्षक को क्या करना चाहिए?

  1. Aबच्चों की पारिवारिक मान्यताओं का मज़ाक उड़ाना
  2. Bवैज्ञानिक कारण स्पष्ट व संवेदनशीलता से समझाना
  3. Cविषय पर चर्चा ही न करना
  4. Dबच्चों को डाँटना

व्याख्या

शिक्षक को ग्रहण का वैज्ञानिक कारण सम्मानपूर्वक व स्पष्ट रूप से समझाना चाहिए, बिना पारिवारिक/सांस्कृतिक मान्यताओं का उपहास किए, ताकि बच्चे वैज्ञानिक समझ को सहजता से अपना सकें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूर्य ग्रहण किस तिथि को होता है?+

सूर्य ग्रहण केवल अमावस्या के दिन हो सकता है, जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के ठीक बीच में आ जाता है।

चंद्र ग्रहण किस तिथि को होता है?+

चंद्र ग्रहण केवल पूर्णिमा के दिन हो सकता है, जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के ठीक बीच में आ जाती है।

हर अमावस्या या पूर्णिमा पर ग्रहण क्यों नहीं होता?+

चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी की कक्षा (क्रांतिवृत्त) से लगभग 5 डिग्री झुकी होती है, इसलिए सूर्य, पृथ्वी व चंद्रमा का लगभग एक सीध में आना ज़रूरी है, जो हर महीने नहीं होता।

प्रच्छाया (umbra) और उपच्छाया (penumbra) में क्या अंतर है?+

प्रच्छाया छाया का सबसे गहरा, पूर्ण अंधकार वाला भाग है (पूर्ण ग्रहण दिखता है), जबकि उपच्छाया हल्का, आंशिक अंधकार वाला बाहरी भाग है (आंशिक ग्रहण दिखता है)।

REET में ग्रहण से कितने प्रश्न आते हैं?+

यह टॉपिक REET Level 2 सामाजिक अध्ययन (भूगोल) सिलेबस का हिस्सा है, लेकिन REET 2024 में इससे सीधा कोई सत्यापित प्रश्न नहीं आया — सिलेबस में होने के कारण भविष्य में प्रश्न आ सकता है।

पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा लाल/ताँबई रंग का क्यों दिखता है?+

पूर्ण चंद्र ग्रहण में भी चंद्रमा पूरी तरह काला नहीं दिखता, क्योंकि पृथ्वी के वायुमंडल से मुड़कर पहुँचने वाली सूर्य की लाल किरणें चंद्रमा पर पड़ती हैं, जिससे वह हल्के लाल/ताँबई रंग का दिखाई देता है — इसे "ब्लड मून" भी कहते हैं।

आगे पढ़ें

आधिकारिक स्रोत

  1. NCERT कक्षा 7 विज्ञान (कुतूहल) — अध्याय 12: पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूर्य (ग्रहण)
  2. इसरो (ISRO) — आधिकारिक वेबसाइट

बदलाव लॉग

  • 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए