1857 की क्रांति: कारण, केंद्र, राजस्थान की भूमिका — REET नोट्स
इस पेज पर 1857 की क्रांति के कारण, प्रमुख केंद्र और नेता, परिणाम तथा राजस्थान में हुए विद्रोह (नसीराबाद से आउवा और कोटा तक) परीक्षा के नज़रिए से दिए गए हैं। REET 2024 लेवल-2 में इस टॉपिक से 4 प्रश्न आए, जिनमें से 2 सीधे राजस्थान से थे।
- REET 2024 में 4 प्रश्न
- कक्षा 8 व शिक्षक-प्रशिक्षण स्तर
- 12 मिनट पढ़ें
REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
REET 2024 (लेवल-2) में 1857 से 4 प्रश्न आए: (1) तिथि — मंगल पाण्डे का बैरकपुर विद्रोह (29 मार्च 1857), जिसमें 10 मई और 8 अप्रैल जैसे भ्रामक विकल्प थे; (2) उपनाम — ‘बंगाल आर्मी की पौधशाला’ (अवध); (3) राजस्थान — नाना साहब को शरण देने वाले कोठारिया के रावत; (4) सुमेलन — 1857 के समय राजस्थान की रियासतों के शासक। स्पष्ट है कि REET में राष्ट्रीय घटनाओं की तिथियों के साथ राजस्थान का 1857 (छावनियाँ, ठिकाने, शासक) खास तौर पर पूछा जाता है।
क्रांति के कारण
राजनीतिक कारण: लॉर्ड डलहौजी की ‘व्यपगत का सिद्धांत’ (Doctrine of Lapse) नीति से कई रियासतें (जैसे झाँसी, सतारा, नागपुर) अंग्रेजी राज्य में मिला ली गईं। 1856 में ‘कुशासन’ के आरोप पर अवध का विलय कर लिया गया। NCERT कक्षा 8 की पुस्तक बताती है कि मुगल बादशाह का नाम सिक्कों से हटाना और उसके उत्तराधिकारियों को लाल किला छोड़ने के लिए कहना भी असंतोष का कारण बना।
सैनिक कारण: भारतीय सिपाहियों को वेतन, भत्ते और पदोन्नति में भेदभाव झेलना पड़ता था। बंगाल सेना के अधिकांश सिपाही अवध और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आते थे, इसलिए अवध को ‘बंगाल आर्मी की पौधशाला’ कहा जाता था — अवध के विलय और किसानों पर भारी भू-राजस्व से सिपाहियों के परिवार सीधे प्रभावित हुए।
आर्थिक-सामाजिक कारण: भारी लगान, कारीगरों का पतन, जमींदारों-तालुकदारों की जमीनें छिनना और धर्म-परम्पराओं में हस्तक्षेप की आशंका। तात्कालिक कारण: नई एनफील्ड राइफल के कारतूस, जिनके बारे में अफवाह थी कि उन पर गाय और सुअर की चर्बी लगी है और उन्हें दाँत से खोलना पड़ता था।
घटनाक्रम और प्रमुख केंद्र
| केंद्र / घटना | नेता / तथ्य |
|---|---|
| बैरकपुर — 29 मार्च 1857 | मंगल पाण्डे (34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री) ने अंग्रेज अधिकारियों पर हमला किया; 8 अप्रैल 1857 को फाँसी। |
| मेरठ — 10 मई 1857 | सिपाहियों ने विद्रोह कर अधिकारियों को मारा और दिल्ली की ओर कूच किया; व्यापक विद्रोह का आरम्भ। |
| दिल्ली — 11 मई 1857 | सिपाहियों ने बहादुरशाह ज़फ़र को नेता घोषित किया; सितंबर 1857 में अंग्रेजों ने दिल्ली पुनः जीती, बहादुरशाह को रंगून निर्वासित किया। |
| कानपुर | नाना साहब (पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र); सहयोगी तात्या टोपे। |
| लखनऊ (अवध) | बेगम हज़रत महल, जिन्होंने अपने पुत्र बिरजिस क़द्र को नवाब घोषित किया। |
| झाँसी | रानी लक्ष्मीबाई; तात्या टोपे के साथ ग्वालियर तक संघर्ष, जून 1858 में वीरगति। |
| आरा / जगदीशपुर (बिहार) | कुँवर सिंह |
| फैजाबाद | मौलवी अहमदुल्ला शाह |
| बरेली | खान बहादुर खान |
उस समय गवर्नर जनरल लॉर्ड कैनिंग थे।[स्रोत 1]
राजस्थान में 1857: प्रमुख घटनाएँ
| स्थान / तिथि | क्या हुआ |
|---|---|
| पृष्ठभूमि | राजपूताना के AGG (एजेंट टू गवर्नर जनरल) जॉर्ज पैट्रिक लॉरेन्स थे। प्रमुख सैनिक छावनियाँ: नसीराबाद, नीमच, देवली, ब्यावर, एरिनपुरा, खैरवाड़ा। |
| नसीराबाद — 28 मई 1857 | राजस्थान में क्रांति की शुरुआत यहीं से हुई; सिपाहियों ने विद्रोह कर दिल्ली की ओर प्रस्थान किया। |
| नीमच — 3 जून 1857 | छावनी के सिपाहियों ने विद्रोह किया। |
| एरिनपुरा — 21 अगस्त 1857 | जोधपुर लीजन के सिपाहियों ने विद्रोह किया और आउवा के ठाकुर कुशाल सिंह से जा मिले। |
| बिथौड़ा — 8 सितंबर 1857 | कुशाल सिंह की सेना ने जोधपुर राज्य की सेना को हराया। |
| चेलावास — 18 सितंबर 1857 | क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी सेना को हराया; जोधपुर का पोलिटिकल एजेंट मॉक मेसन मारा गया और उसका सिर आउवा के किले के द्वार पर लटकाया गया। |
| कोटा — 15 अक्टूबर 1857 | कोटा की सेना ने विद्रोह किया, पोलिटिकल एजेंट मेजर बर्टन मारा गया; नेतृत्व जयदयाल और मेहराब खान ने किया। मार्च 1858 में अंग्रेजों ने कोटा पर पुनः नियंत्रण किया। |
| तात्या टोपे | 1858–59 में राजपूताना में सक्रिय रहे; टोंक की सेना उनसे मिल गई; 18 अप्रैल 1859 को शिवपुरी (सिप्री) में फाँसी दी गई। |
| आउवा के कुशाल सिंह | बाद में संघर्ष छोड़कर 8 अगस्त 1860 को नीमच में अंग्रेजों के सामने समर्पण किया। आउवा की कुलदेवी सुगाली माता की मूर्ति अंग्रेज अजमेर ले गए। |
तिथियाँ राजस्थान इतिहास की मानक पुस्तकों के अनुसार।
राजस्थान: शासक, ठिकाने और व्यक्ति
- 1857 के समय रियासतों के शासक
- बीकानेर – सरदार सिंह, जोधपुर – तख्त सिंह, प्रतापगढ़ – दलपत सिंह, झालावाड़ – पृथ्वी सिंह (REET 2024 का प्रश्न)।
- रियासतों का रुख
- अधिकांश रियासती शासक अंग्रेजों के प्रति वफादार रहे; बीकानेर के सरदार सिंह ने अंग्रेजों की सैनिक सहायता की। विरोध मुख्यतः सिपाहियों, ठिकानेदारों और जनता की ओर से हुआ।
- कोठारिया (मेवाड़)
- रावत जोधसिंह ने क्रांतिकारियों का साथ दिया; REET 2024 की उत्तर कुंजी के अनुसार नाना साहब को शरण कोठारिया के रावत ने दी (प्रश्न-पुस्तिका में नाम ‘ज्योत सिंह’ छपा)।
- सलूम्बर (मेवाड़)
- रावत केसरी सिंह ने क्रांतिकारियों का समर्थन किया।
- अमरचंद बाँठिया
- ग्वालियर में व्यापारी; क्रांतिकारियों की आर्थिक सहायता की और फाँसी पाने वाले पहले राजस्थानी माने जाते हैं।
परिणाम और स्वरूप
1858 के भारत शासन अधिनियम (Government of India Act, 1858) से ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त हुआ और भारत का शासन सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन आ गया; गवर्नर जनरल को ‘वायसराय’ भी कहा जाने लगा। 1 नवंबर 1858 को महारानी विक्टोरिया की घोषणा में देशी राजाओं को आश्वासन दिया गया कि उनके राज्य नहीं छीने जाएँगे। सेना में भारतीय सिपाहियों का अनुपात घटाया गया और अवध, बिहार आदि के बजाय अन्य क्षेत्रों से भर्ती बढ़ाई गई।
इसके स्वरूप पर मत अलग-अलग हैं: अंग्रेज लेखकों ने इसे ‘सिपाही विद्रोह’ कहा, जबकि वी.डी. सावरकर ने अपनी पुस्तक में इसे ‘भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम’ कहा। परीक्षा में यह पूछा जाता है कि किसने इसे क्या कहा, इसलिए यह जोड़ी याद रखें।
बच्चों को कैसे पढ़ाएँ
कक्षा-गतिविधि (कक्षा 8)
‘स्थानीय इतिहास की खोज’: बच्चों को समूहों में बाँटकर नसीराबाद, आउवा, कोटा और कोठारिया पर छोटी कहानी-पट्टिका बनवाएँ — कौन, कब, क्यों। इससे राष्ट्रीय घटना राजस्थान के स्थानीय संदर्भ से जुड़ती है।
शिक्षण सहायक सामग्री
भारत और राजस्थान का रेखा-मानचित्र जिस पर विद्रोह के केंद्र और छावनियाँ चिह्नित हों; मेरठ से दिल्ली तक का तीर; घटनाओं की समय-रेखा (Timeline) चार्ट।
सामान्य भ्रांतियाँ
(1) 1857 की शुरुआत 10 मई मेरठ से मानना और मंगल पाण्डे की घटना को भूल जाना — बैरकपुर की घटना पहले (29 मार्च) हुई। (2) यह मान लेना कि राजस्थान के सभी राजा अंग्रेजों के विरुद्ध थे — अधिकांश शासक वफादार रहे, विरोध ठिकानेदारों व सिपाहियों ने किया। (3) इसे केवल सैनिक घटना समझना।
आकलन का विचार
समय-रेखा को सही क्रम में लगाने की गतिविधि और एक विचार-प्रश्न: ‘कुशाल सिंह जैसे ठिकानेदार अंग्रेजों के विरुद्ध क्यों खड़े हुए, जबकि उनके राजा अंग्रेजों के साथ थे?’
याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप
तिथियों का क्रम: ‘बैरकपुर (29 मार्च) → मेरठ (10 मई) → दिल्ली (11 मई) → नसीराबाद (28 मई) → नीमच (3 जून)’। राजस्थान में ‘न-नी-ए’ (नसीराबाद–नीमच–एरिनपुरा) और आउवा के युद्ध ‘बि-चे’ (बिथौड़ा 8 सितंबर, चेलावास 18 सितंबर) याद रखें। प्रश्न में दो मिलती-जुलती तिथियाँ हों तो पहले घटना का स्थान पहचानें।
REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)
प्रश्न 109
1857 की क्रांति के दौरान पेशवा नाना साहब और उनके परिवार को राजस्थान में शरण किसने दी थी ?
- Aआउवा के ठाकुर कुशाल सिंह
- Bकोठारिया के रावत ज्योत सिंह
- Cभरतपुर के महाराजा तख्त सिंह
- Dउदयपुर के महाराणा स्वरूप सिंह
व्याख्या
1857 की क्रांति के दौरान मेवाड़ के कोठारिया ठिकाने के रावत ने क्रांतिकारियों की सहायता की और पेशवा नाना साहब को शरण दी – ऐसा राजस्थान इतिहास की पुस्तकों में बताया जाता है। अधिकांश पुस्तकों में उनका नाम 'रावत जोधसिंह' मिलता है; प्रश्न-पुस्तिका में 'ज्योत सिंह' छपा है। आउवा के ठाकुर कुशाल सिंह ने मारवाड़ में अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष का नेतृत्व किया था। उत्तर कुंजी के अनुसार सही उत्तर (B) है।
प्रश्न 120
मंगल पाण्डे ने बैरकपुर में विद्रोह कब किया ?
- A28 मई 1857
- B10 मई 1857
- C29 मार्च 1857
- D8 अप्रैल 1857
व्याख्या
मंगल पाण्डे (34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री) ने 29 मार्च 1857 को बैरकपुर छावनी में अंग्रेज अधिकारियों पर हमला कर विद्रोह किया; 8 अप्रैल 1857 को उन्हें फाँसी दी गई। 10 मई 1857 को मेरठ से क्रांति का व्यापक आरम्भ हुआ था, इसलिए वे विकल्प भ्रम पैदा करते हैं।
प्रश्न 110
ब्रिटिश शासनकाल में ‘बंगाल आर्मी की पौधशालां’ किस स्थान को कहा जाता था ?
- Aअवध
- Bदिल्ली
- Cकलकत्ता
- Dमद्रास
व्याख्या
ब्रिटिश शासनकाल में अवध को ‘बंगाल आर्मी की पौधशाला’ (Nursery of Bengal Army) कहा जाता था, क्योंकि बंगाल सेना के अधिकांश सिपाही अवध और पूर्वी उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों से भर्ती होते थे। 1856 में अवध के विलय से इन सिपाहियों में असंतोष बढ़ा, जो 1857 के विद्रोह का एक कारण बना।
प्रश्न 118
निम्नांकित में से कौन-सा युग्म सुमेलित नहीं है ? रियासत – 1857 की क्रांति के समय रियासती शासक
- Aबीकानेर – सरदार सिंह
- Bजोधपुर – तख्त सिंह
- Cप्रतापगढ़ – दलपत सिंह
- Dझालावाड़ – उदय सिंह
व्याख्या
1857 की क्रांति के समय बीकानेर के शासक सरदार सिंह, जोधपुर के तख्त सिंह तथा प्रतापगढ़ के दलपत सिंह थे, अतः ये युग्म सही हैं। उस समय झालावाड़ के शासक पृथ्वी सिंह थे, उदय सिंह नहीं; इसलिए युग्म (D) सुमेलित नहीं है।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
राजस्थान में 1857 की क्रांति की शुरुआत किस छावनी से हुई?
- Aनीमच
- Bएरिनपुरा
- Cनसीराबाद
- Dदेवली
व्याख्या
राजस्थान में क्रांति 28 मई 1857 को नसीराबाद छावनी से शुरू हुई। नीमच में 3 जून और एरिनपुरा में 21 अगस्त 1857 को विद्रोह हुआ।
प्रश्न 2
1857 की क्रांति के समय राजपूताना के AGG कौन थे?
- Aमेजर बर्टन
- Bजॉर्ज पैट्रिक लॉरेन्स
- Cमॉक मेसन
- Dलॉर्ड कैनिंग
व्याख्या
जॉर्ज पैट्रिक लॉरेन्स राजपूताना के AGG थे। मेजर बर्टन कोटा और मॉक मेसन जोधपुर के पोलिटिकल एजेंट थे, जबकि लॉर्ड कैनिंग गवर्नर जनरल थे।
प्रश्न 3
चेलावास के युद्ध (18 सितंबर 1857) में कौन-सा अंग्रेज अधिकारी मारा गया?
- Aमॉक मेसन
- Bमेजर बर्टन
- Cजॉर्ज लॉरेन्स
- Dलेफ्टिनेंट हीथकोट
व्याख्या
चेलावास में जोधपुर का पोलिटिकल एजेंट मॉक मेसन मारा गया और उसका सिर आउवा के किले के द्वार पर लटकाया गया। मेजर बर्टन कोटा में मारा गया था।
प्रश्न 4
कोटा में 1857 के विद्रोह का नेतृत्व किसने किया?
- Aकुशाल सिंह और रावत जोधसिंह
- Bजयदयाल और मेहराब खान
- Cतात्या टोपे और राव साहब
- Dअमरचंद बाँठिया और केसरी सिंह
व्याख्या
15 अक्टूबर 1857 को कोटा में जयदयाल और मेहराब खान के नेतृत्व में विद्रोह हुआ, जिसमें मेजर बर्टन मारा गया। बाद में दोनों नेताओं को फाँसी दी गई।
प्रश्न 5
लॉर्ड डलहौजी की किस नीति के कारण झाँसी का विलय हुआ?
- Aसहायक संधि
- Bव्यपगत का सिद्धांत
- Cस्थायी बंदोबस्त
- Dरैयतवाड़ी व्यवस्था
व्याख्या
व्यपगत के सिद्धांत के अनुसार प्राकृतिक उत्तराधिकारी न होने पर रियासत का विलय कर लिया जाता था; झाँसी, सतारा और नागपुर इसी से विलय हुए। स्थायी बंदोबस्त और रैयतवाड़ी भू-राजस्व व्यवस्थाएँ थीं।
प्रश्न 6
निम्नलिखित घटनाओं का सही कालक्रम क्या है? 1. नसीराबाद विद्रोह 2. मंगल पाण्डे की घटना 3. मेरठ विद्रोह 4. एरिनपुरा विद्रोह
- A2, 3, 1, 4
- B3, 2, 1, 4
- C2, 1, 3, 4
- D1, 2, 3, 4
व्याख्या
मंगल पाण्डे की घटना 29 मार्च, मेरठ 10 मई, नसीराबाद 28 मई और एरिनपुरा 21 अगस्त 1857 को हुआ। अतः सही क्रम 2, 3, 1, 4 है।
प्रश्न 7
1857 के विद्रोह के बाद ब्रिटिश क्राउन ने भारत का शासन सीधे किस अधिनियम द्वारा अपने हाथ में लिया?
- Aरेगुलेटिंग एक्ट 1773
- Bचार्टर एक्ट 1853
- Cभारत शासन अधिनियम 1858
- Dभारतीय परिषद अधिनियम 1861
व्याख्या
भारत शासन अधिनियम 1858 से ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त होकर क्राउन का सीधा शासन शुरू हुआ। 1 नवंबर 1858 को महारानी विक्टोरिया की घोषणा जारी हुई।
प्रश्न 8
1857 की क्रांति के समय आउवा के ठाकुर कुशाल सिंह किस क्षेत्र से संबंधित थे?
- Aमेवाड़
- Bहाड़ौती
- Cमारवाड़
- Dशेखावाटी
व्याख्या
आउवा मारवाड़ (जोधपुर रियासत) का ठिकाना था, जो आज पाली जिले में है। कुशाल सिंह ने एरिनपुरा के विद्रोही सिपाहियों के साथ मिलकर अंग्रेजों का विरोध किया।
प्रश्न 9
कक्षा 8 में 1857 पढ़ाते समय राजस्थान की घटनाओं को जोड़ने का सबसे उपयुक्त तरीका कौन-सा है?
- Aकेवल राष्ट्रीय नेताओं के नाम रटवाना
- Bराजस्थान के मानचित्र पर छावनियाँ व ठिकाने चिह्नित कर स्थानीय घटनाओं की समय-रेखा बनवाना
- Cराजस्थान की घटनाओं को पाठ से बाहर मानकर छोड़ देना
- Dकेवल प्रश्नोत्तर लिखवाना
व्याख्या
मानचित्र और समय-रेखा से बच्चे स्थान और क्रम दोनों समझते हैं तथा राष्ट्रीय इतिहास को स्थानीय संदर्भ से जोड़ पाते हैं। रटाने से वैचारिक समझ नहीं बनती।
प्रश्न 10
एक छात्र कहता है, ‘1857 में राजस्थान के सभी राजा अंग्रेजों के खिलाफ लड़े।’ शिक्षक को इस भ्रांति को दूर करने के लिए क्या करना चाहिए?
- Aछात्र की बात को सही मान लेना
- Bसाक्ष्य देकर चर्चा कराना कि अधिकांश शासक अंग्रेजों के साथ रहे, जबकि आउवा जैसे ठिकानों और सिपाहियों ने विरोध किया
- Cविषय बदल देना
- Dछात्र को गलत कहकर अंक काट देना
व्याख्या
भ्रांति को साक्ष्य-आधारित चर्चा से दूर करना सबसे प्रभावी है। बीकानेर के सरदार सिंह जैसे शासकों ने अंग्रेजों की सहायता की, जबकि कुशाल सिंह जैसे ठिकानेदारों ने विरोध किया — इससे बच्चे इतिहास की जटिलता समझते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1857 की क्रांति से REET में कितने प्रश्न आते हैं?+
संख्या तय नहीं है। REET 2024 लेवल-2 की पालियों में इस टॉपिक से 4 प्रश्न आए, जिनमें 2 राजस्थान में 1857 से संबंधित थे।
राजस्थान में 1857 की क्रांति की शुरुआत कहाँ से हुई?+
28 मई 1857 को नसीराबाद छावनी से। इसके बाद 3 जून 1857 को नीमच में विद्रोह हुआ।
आउवा के ठाकुर कुशाल सिंह क्यों प्रसिद्ध हैं?+
उन्होंने मारवाड़ में एरिनपुरा के विद्रोही सिपाहियों के साथ मिलकर बिथौड़ा (8 सितंबर 1857) और चेलावास (18 सितंबर 1857) में अंग्रेजों व जोधपुर की सेना को हराया; चेलावास में मॉक मेसन मारा गया।
‘बंगाल आर्मी की पौधशाला’ किसे कहा जाता था?+
अवध को, क्योंकि बंगाल सेना के अधिकांश सिपाही वहीं के ग्रामीण क्षेत्रों से भर्ती होते थे।
1857 के बाद भारत के शासन में क्या बदलाव हुआ?+
भारत शासन अधिनियम 1858 से कंपनी का शासन समाप्त होकर ब्रिटिश क्राउन का सीधा शासन शुरू हुआ।
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ब्रिटिश शासन का प्रभाव
पिछला टॉपिक: कंपनी शासन की नीतियाँ और उनका प्रभाव।
राष्ट्रीय आंदोलन 1885–1947
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REET सिलेबस
लेवल-1 और लेवल-2 का पूरा आधिकारिक सिलेबस।
REET 2024 हल प्रश्न-पत्र
सभी पालियों के प्रश्न, आधिकारिक उत्तर और व्याख्या।
राजस्थान सामान्य ज्ञान
राजस्थान का इतिहास, रियासतें और स्वतंत्रता संग्राम।
आधिकारिक स्रोत
बदलाव लॉग
- 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए