ब्रिटिश शासन का प्रभाव
यह पेज ब्रिटिश शासन के आर्थिक शोषण (भू-राजस्व व्यवस्थाएँ, धन-अपवाह, विऔद्योगीकरण) और उसी दौर के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों को कवर करता है। REET में यह टॉपिक इतिहास व नागरिक शास्त्र दोनों की समझ जोड़ता है, इसलिए तथ्य-आधारित प्रश्न बार-बार आते हैं।
- REET 2024 में 1 प्रश्न
- कक्षा 6–8 स्तर
- 12 मिनट पढ़ें
REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
REET 2024 में इस टॉपिक से सीधे आर्य समाज के सिद्धांतों पर बहु-कथन (multi-statement) प्रश्न पूछा गया — किन कथनों को आर्य समाज मानता है और किसे नहीं, यह पहचानना था। इससे स्पष्ट है कि परीक्षा किसी आंदोलन के नाम-वर्ष रटाने के बजाय उसके सिद्धांतों की बारीक समझ जाँचती है (जैसे आर्य समाज मूर्ति-पूजा व अवतारवाद का विरोधी था पर विधवा पुनर्विवाह का समर्थक)। साथ ही भू-राजस्व व्यवस्थाओं और समाज-सुधार कानूनों से भी प्रत्यक्ष तथ्यात्मक प्रश्न (वर्ष, प्रवर्तक, क्षेत्र) की परंपरा रही है।
ब्रिटिश शासन का आर्थिक प्रभाव
ब्रिटिश शासन ने भारत की अर्थव्यवस्था को इंग्लैंड के हितों के अनुसार ढाला। दादाभाई नौरोजी ने अपनी पुस्तक 'Poverty and Un-British Rule in India' (1901) में 'धन-अपवाह सिद्धांत' (Drain of Wealth Theory) दिया — भारत से कच्चा माल सस्ते में इंग्लैंड जाता और तैयार माल भारत में ऊँचे दामों पर बिकता; इसके अलावा प्रशासनिक वेतन, पेंशन और कंपनी के मुनाफे के रूप में भी भारत की संपत्ति निरंतर इंग्लैंड जाती रही।
इसी दौर में भारत का पारंपरिक हस्तशिल्प व वस्त्र उद्योग तेज़ी से चौपट हुआ — इसे 'विऔद्योगीकरण' (Deindustrialisation) कहा जाता है। इंग्लैंड में मशीनों से बना सस्ता कपड़ा भारतीय बाज़ार में भर दिया गया जबकि भारतीय माल पर इंग्लैंड में भारी शुल्क लगाकर उसका निर्यात रोका गया, जिससे लाखों बुनकर व कारीगर बेरोज़गार हुए।
भू-राजस्व व्यवस्थाएँ
| व्यवस्था | प्रवर्तक | वर्ष | मुख्य क्षेत्र | विशेषता |
|---|---|---|---|---|
| स्थायी बंदोबस्त (Permanent Settlement) | लॉर्ड कॉर्नवालिस | 1793 | बंगाल, बिहार, उड़ीसा | राजस्व राशि स्थायी रूप से तय; ज़मींदार भू-स्वामी व राजस्व-वसूली एजेंट बने |
| रैयतवारी व्यवस्था (Ryotwari System) | थॉमस मुनरो (मद्रास) | लगभग 1820 | मद्रास, बंबई प्रेसीडेंसी | सीधे किसान (रैयत) से राजस्व वसूली, कोई बिचौलिया ज़मींदार नहीं, पर दर समय-समय पर बढ़ती |
| महालवारी व्यवस्था (Mahalwari System) | होल्ट मैकेंजी | 1822 | उत्तर-पश्चिमी प्रांत (वर्तमान उ.प्र.), पंजाब | गाँव (महाल) इकाई मानकर राजस्व तय; वसूली की ज़िम्मेदारी गाँव/मुखिया की |
तीनों व्यवस्थाओं का सामान्य लक्ष्य अधिकतम राजस्व वसूली था; अंतर था कि राजस्व किससे और कैसे वसूला जाए।
प्रमुख सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन
| संस्था | संस्थापक | वर्ष | प्रमुख सिद्धांत/कार्य |
|---|---|---|---|
| ब्रह्म समाज | राजा राममोहन राय | 1828 (कलकत्ता) | मूर्ति-पूजा व सती प्रथा का विरोध; एकेश्वरवाद; सती प्रथा उन्मूलन (1829) में सहयोग |
| आर्य समाज | स्वामी दयानंद सरस्वती | 1875 (मुंबई) | वेदों को सत्य व ज्ञान का भंडार मानना; मूर्ति-पूजा व अवतारवाद का विरोध; विधवा पुनर्विवाह का समर्थन; ग्रंथ 'सत्यार्थ प्रकाश' |
| प्रार्थना समाज | आत्माराम पांडुरंग | 1867 (बंबई) | जाति-प्रथा व बाल-विवाह का विरोध, विधवा पुनर्विवाह का समर्थन |
| थियोसोफिकल सोसाइटी (भारत शाखा) | एनी बेसेंट (भारत में नेतृत्व) | 1882 (भारत मुख्यालय, अड्यार) | हिंदू धर्म-दर्शन के पुनरुत्थान व भारतीय स्वशासन का समर्थन |
समाज-सुधार से जुड़े प्रमुख कानून
- सती प्रथा उन्मूलन
- 1829, गवर्नर-जनरल लॉर्ड विलियम बेंटिक (राजा राममोहन राय के प्रयासों से)
- हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम
- 1856, ईश्वरचंद्र विद्यासागर के प्रयासों से पारित
- संमति आयु अधिनियम (Age of Consent Act)
- 1891 — विवाह की सहमति आयु बढ़ाई
- बाल-विवाह निरोधक अधिनियम (शारदा एक्ट)
- 1929 — लड़कियों की विवाह आयु 14 व लड़कों की 18 वर्ष तय
शिक्षा व यातायात में बदलाव
ब्रिटिश शासन ने शिक्षा व यातायात ढाँचे में भी गहरे बदलाव किए, जिनका उद्देश्य मुख्यतः प्रशासनिक सुविधा व व्यापारिक हित था, पर इनका दीर्घकालिक सामाजिक असर भी पड़ा। 1835 में लॉर्ड मैकाले का 'शिक्षा संबंधी विवरण-पत्र' (Macaulay's Minute) आया, जिसमें अंग्रेज़ी माध्यम से पाश्चात्य शिक्षा को बढ़ावा देने की सिफारिश की गई — इसी के आधार पर अंग्रेज़ी शिक्षा अधिनियम, 1835 पारित हुआ।
इसके बाद 1854 में चार्ल्स वुड का 'शिक्षा संबंधी घोषणा-पत्र' (Wood's Despatch) आया, जिसे भारत में अंग्रेज़ी शिक्षा का 'मैग्नाकार्टा' (Magna Carta) कहा जाता है — इसने स्कूल-कॉलेज से लेकर विश्वविद्यालय तक की एक व्यवस्थित शिक्षा-नीति की रूपरेखा दी। इसी दौर में 16 अप्रैल 1853 को भारत की पहली यात्री रेलगाड़ी बंबई से ठाणे (लगभग 34 किमी) के बीच चली, जिसने आगे चलकर पूरे देश में रेल-तंत्र के विस्तार की शुरुआत की।
दीर्घकालिक प्रभाव व राष्ट्रीय चेतना
आर्थिक शोषण, विऔद्योगीकरण व भू-राजस्व की सख्ती ने किसानों व कारीगरों में गहरा असंतोष भरा, जबकि सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों व अंग्रेज़ी शिक्षा से एक नया शिक्षित मध्यम-वर्ग उभरा, जिसने पहली बार 'भारतीय' पहचान के रूप में सोचना शुरू किया। यही आर्थिक असंतोष व वैचारिक जागरूकता आगे चलकर 1857 के विद्रोह व बाद में संगठित राष्ट्रीय आंदोलन की ज़मीन तैयार करती है — इसलिए REET में यह टॉपिक '1857 की क्रांति' टॉपिक से सीधा जुड़ा है।
बच्चों को कैसे पढ़ाएँ
समयरेखा गतिविधि
कक्षा 6-8 के बच्चों से 1793 से 1929 तक की घटनाओं (स्थायी बंदोबस्त, सती उन्मूलन, आर्य समाज, शारदा एक्ट) की चार्ट-पेपर पर समयरेखा बनवाएँ — तिथि याद रखने में मदद करती है।
भूमिका-अभिनय (रोल-प्ले)
राजा राममोहन राय व स्वामी दयानंद सरस्वती की भूमिका निभाकर बच्चे उनके विचारों में अंतर (मूर्ति-पूजा पर रुख, वेदों का स्थान) स्वयं खोजें।
सामान्य भ्रांति
विद्यार्थी अक्सर सोचते हैं सभी सुधार आंदोलन एक जैसे थे — स्पष्ट करें कि आर्य समाज वेद-केंद्रित व पुनरुत्थानवादी था जबकि ब्रह्म समाज तर्कवादी-सुधारवादी अधिक था।
आकलन विचार
'संस्था-संस्थापक-वर्ष' मिलान वाली एक छोटी वर्कशीट दें, ठीक उसी तरह जैसे REET में पूछा जाता है।
याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप
आर्य समाज के सिद्धांत याद रखने की ट्रिक: 'वेद सत्य, मूर्ति आडंबर, अवतार नकार — पर विधवा को अधिकार'। यानी वेद को सत्य मानना, मूर्ति-पूजा व अवतारवाद का विरोध करना पर विधवा पुनर्विवाह का समर्थन करना — ठीक REET 2024 के प्रश्न जैसा।
REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)
प्रश्न 136
निम्नलिखित में से आर्य समाज के सिद्धान्त कौन-से है/हैं ? 1. वेद ही सत्य, विद्या और ज्ञान के भण्डार हैं । 2. मूर्ति पूजा आडम्बर है । 3. विधवा पुनर्विवाह का विरोध । 4. अवतारवाद का विरोध ।
- A1, 2, 3
- B1, 3, 4
- C1, 4
- D1, 2, 4
व्याख्या
आर्य समाज की स्थापना स्वामी दयानन्द सरस्वती ने 1875 में की थी। इसके अनुसार वेद सत्य विद्या और ज्ञान के भण्डार हैं, मूर्ति पूजा आडम्बर है और अवतारवाद का खण्डन किया गया। आर्य समाज विधवा पुनर्विवाह का समर्थक था, विरोधी नहीं, इसलिए कथन 3 गलत है और उत्तर (D) 1, 2, 4 है।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
स्थायी बंदोबस्त (Permanent Settlement) किस गवर्नर-जनरल ने लागू किया था?
- Aवारेन हेस्टिंग्स
- Bलॉर्ड कॉर्नवालिस
- Cलॉर्ड विलियम बेंटिक
- Dलॉर्ड डलहौज़ी
व्याख्या
लॉर्ड कॉर्नवालिस ने 1793 में बंगाल, बिहार व उड़ीसा में स्थायी बंदोबस्त लागू किया, जिसमें राजस्व राशि हमेशा के लिए तय कर दी गई। यह भारत की पहली भू-राजस्व व्यवस्था थी।
प्रश्न 2
रैयतवारी व्यवस्था के अंतर्गत राजस्व किससे वसूला जाता था?
- Aज़मींदार से
- Bगाँव के मुखिया से
- Cसीधे किसान (रैयत) से
- Dव्यापारियों से
व्याख्या
रैयतवारी व्यवस्था में कोई बिचौलिया ज़मींदार नहीं होता था; सरकार सीधे किसान (रैयत) से राजस्व वसूल करती थी। इसे मद्रास प्रेसीडेंसी में थॉमस मुनरो ने लागू किया।
प्रश्न 3
महालवारी व्यवस्था मुख्यतः किस क्षेत्र में लागू की गई?
- Aमद्रास प्रेसीडेंसी
- Bबंगाल
- Cउत्तर-पश्चिमी प्रांत व पंजाब
- Dबंबई प्रेसीडेंसी
व्याख्या
महालवारी व्यवस्था 1822 में होल्ट मैकेंजी द्वारा उत्तर-पश्चिमी प्रांत (वर्तमान उत्तर प्रदेश) में शुरू की गई और बाद में पंजाब तक विस्तारित हुई; इसमें गाँव (महाल) इकाई मानी जाती थी।
प्रश्न 4
'धन-अपवाह सिद्धांत' (Drain of Wealth Theory) किसने प्रतिपादित किया?
- Aमहात्मा गांधी
- Bदादाभाई नौरोजी
- Cबाल गंगाधर तिलक
- Dगोपाल कृष्ण गोखले
व्याख्या
दादाभाई नौरोजी ने अपनी पुस्तक 'Poverty and Un-British Rule in India' (1901) में धन-अपवाह सिद्धांत दिया, जिसमें उन्होंने बताया कि किस तरह भारत की संपत्ति निरंतर इंग्लैंड जाती रही।
प्रश्न 5
ब्रह्म समाज की स्थापना किसने की थी?
- Aस्वामी दयानंद सरस्वती
- Bराजा राममोहन राय
- Cईश्वरचंद्र विद्यासागर
- Dआत्माराम पांडुरंग
व्याख्या
राजा राममोहन राय ने 1828 में कलकत्ता में ब्रह्म समाज की स्थापना की; उन्होंने सती प्रथा के विरुद्ध आंदोलन चलाया, जिसके फलस्वरूप 1829 में सती प्रथा प्रतिबंधित हुई।
प्रश्न 6
आर्य समाज का मुख्य ग्रंथ कौन-सा है?
- Aगीता रहस्य
- Bसत्यार्थ प्रकाश
- Cहिंद स्वराज
- Dआनंद मठ
व्याख्या
स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा रचित 'सत्यार्थ प्रकाश' आर्य समाज का मुख्य ग्रंथ है, जिसमें वेदों की सर्वोच्चता, मूर्ति-पूजा व अवतारवाद के विरोध जैसे सिद्धांत दिए गए हैं।
प्रश्न 7
हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम, 1856 पारित कराने में मुख्य भूमिका किसकी थी?
- Aराजा राममोहन राय
- Bईश्वरचंद्र विद्यासागर
- Cस्वामी विवेकानंद
- Dज्योतिबा फुले
व्याख्या
ईश्वरचंद्र विद्यासागर के अथक प्रयासों से हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम, 1856 पारित हुआ, जिसने हिंदू विधवाओं को कानूनी रूप से पुनर्विवाह का अधिकार दिया।
प्रश्न 8
बाल-विवाह निरोधक अधिनियम (शारदा एक्ट) किस वर्ष पारित हुआ?
- A1891
- B1919
- C1929
- D1947
व्याख्या
शारदा एक्ट 1929 में पारित हुआ, जिसमें लड़कियों की न्यूनतम विवाह आयु 14 वर्ष और लड़कों की 18 वर्ष तय की गई थी।
प्रश्न 9
शिक्षक कक्षा 7 में सुधार आंदोलनों को पढ़ाते समय बच्चों से राजा राममोहन राय व स्वामी दयानंद सरस्वती की भूमिका निभवाते हैं। इस गतिविधि का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- Aसमय बिताना
- Bदोनों के विचारों में अंतर को अनुभवात्मक रूप से समझाना
- Cबच्चों की वाणी-कला जाँचना
- Dपरीक्षा से ध्यान हटाना
व्याख्या
भूमिका-अभिनय (रोल-प्ले) जैसी गतिविधियाँ बच्चों को अमूर्त ऐतिहासिक विचारों को अनुभव द्वारा समझने में मदद करती हैं, जिससे सीखना गहरा व स्थायी होता है — यही इस गतिविधि का शैक्षणिक उद्देश्य है।
प्रश्न 10
निम्न में से कौन-सा कथन आर्य समाज के विषय में सही नहीं है?
- Aयह वेदों को सत्य व ज्ञान का भंडार मानता है
- Bयह मूर्ति-पूजा का विरोध करता है
- Cयह विधवा पुनर्विवाह का विरोधी है
- Dयह अवतारवाद का खंडन करता है
व्याख्या
आर्य समाज विधवा पुनर्विवाह का समर्थक था, विरोधी नहीं। REET 2024 में ठीक इसी बिंदु पर प्रश्न पूछा गया था, जहाँ यह गलत कथन पहचानना था।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ब्रिटिश शासन के प्रभाव से REET में कितने प्रश्न आते हैं?+
REET 2024 में इस टॉपिक से 1 प्रश्न पूछा गया था; सामाजिक अध्ययन के इतिहास खंड में यह टॉपिक हर साल किसी न किसी रूप (भू-राजस्व व्यवस्था या सुधार आंदोलन) में आता है।
धन-अपवाह सिद्धांत किसने दिया?+
दादाभाई नौरोजी ने धन-अपवाह सिद्धांत (Drain of Wealth Theory) दिया, जिसे उन्होंने 1901 की पुस्तक 'Poverty and Un-British Rule in India' में विस्तार से समझाया।
स्थायी बंदोबस्त व रैयतवारी में मुख्य अंतर क्या है?+
स्थायी बंदोबस्त में ज़मींदार बिचौलिए के रूप में राजस्व वसूलते थे और राशि स्थायी थी; रैयतवारी में सरकार सीधे किसान (रैयत) से राजस्व वसूलती थी और दर समय-समय पर बदल सकती थी।
आर्य समाज की स्थापना कब व किसने की?+
आर्य समाज की स्थापना स्वामी दयानंद सरस्वती ने 1875 में मुंबई में की थी; इसका मुख्य ग्रंथ 'सत्यार्थ प्रकाश' है।
वुड्स डिस्पैच (1854) को क्या कहा जाता है?+
वुड्स डिस्पैच को भारत में अंग्रेज़ी शिक्षा का 'मैग्नाकार्टा' कहा जाता है, क्योंकि इसने प्राथमिक से विश्वविद्यालय स्तर तक एक व्यवस्थित शिक्षा-नीति की नींव रखी।
आर्थिक शोषण व सुधार आंदोलनों का दीर्घकालिक असर क्या हुआ?+
आर्थिक असंतोष व सुधार आंदोलनों से उपजी वैचारिक जागरूकता ने मिलकर भारत में राष्ट्रीय चेतना की नींव रखी, जो 1857 के विद्रोह व आगे के स्वतंत्रता आंदोलन का आधार बनी।
स्थायी बंदोबस्त में सरकार व ज़मींदार के बीच राजस्व का बँटवारा कैसे होता था?+
स्थायी बंदोबस्त में कुल वसूली गई राशि का लगभग 10/11 भाग सरकार को और शेष 1/11 भाग ज़मींदार को उसके पारिश्रमिक के रूप में मिलता था, और यह अनुपात स्थायी रूप से तय कर दिया गया था।
प्रार्थना समाज की स्थापना किसने की थी?+
प्रार्थना समाज की स्थापना आत्माराम पांडुरंग ने 1867 में बंबई में की थी; यह जाति-प्रथा व बाल-विवाह का विरोधी और विधवा पुनर्विवाह का समर्थक था।
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आधिकारिक स्रोत
बदलाव लॉग
- 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए