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REET L2 · सामाजिक अध्ययन

मुगल-राजपूत संबंध — REET नोट्स (सामाजिक अध्ययन)

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मुगल-राजपूत संबंध केवल युद्धों की कहानी नहीं, बल्कि गठबंधन, प्रतिरोध और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की भी कहानी है — कुछ राजपूत घरानों ने मुगलों से वैवाहिक संबंध जोड़े तो मेवाड़ ने लंबे समय तक प्रतिरोध जारी रखा। REET में इस टॉपिक से अकबर की नीतियों के साथ-साथ मुगलकालीन वस्त्र, विज्ञान व कला जैसी बारीक सांस्कृतिक शब्दावली पर भी प्रश्न पूछे जाते हैं।

  • REET 2024 में 3 प्रश्न
  • कक्षा 7–8 स्तर
  • 10 मिनट पढ़ें
16 सितंबर 2026 को सत्यापित · स्रोत: Wikipedia — Siege of Chittorgarh (1567–1568)

REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

REET 2024 में अकबर की 'सुलह-ए-कुल' नीति के साथ-साथ मुगलकालीन खगोल-विज्ञान ग्रंथ 'जिच-ए-शाहजहानी' और राजस्थानी दरबारों में प्रचलित वस्त्रों के नाम (मसरू, मीर-ए-बादला, नौरंगशाही) जैसे बारीक सांस्कृतिक प्रश्न पूछे गए। यानी यह टॉपिक केवल राजनीतिक संबंधों तक सीमित नहीं — मुगल-राजपूत सांस्कृतिक आदान-प्रदान (वस्त्र, विज्ञान, कला) पर भी उतना ही ध्यान देना ज़रूरी है। तीनों प्रश्नों में एक भी सीधा 'तारीख याद करो' वाला प्रश्न नहीं था — हर प्रश्न किसी शब्द या नीति की सही पहचान पर आधारित था, इसलिए परिभाषाओं व शब्दावली को ठोस रूप से समझना यहाँ रटने से अधिक फ़ायदेमंद है।

अकबर की राजपूत नीति

वैवाहिक संबंध
1562 में आमेर के राजा भारमल ने अपनी पुत्री का विवाह अकबर से किया — यह पहला बड़ा मुगल-राजपूत वैवाहिक गठबंधन था
उच्च पद
मानसिंह (आमेर) व भगवानदास जैसे राजपूत सरदारों को मुगल दरबार में ऊँचे मनसब व सैन्य पद दिए गए, और वे मुगल सेना के महत्त्वपूर्ण अभियानों का नेतृत्व करते थे
कर समाप्ति
अकबर ने 1563 में तीर्थ-यात्रा कर और 1564 में जज़िया कर समाप्त किया
सुलह-ए-कुल
'सार्वभौमिक शांति/सबके प्रति सहिष्णुता' की नीति — सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार पर आधारित; अबुल फ़ज़ल ने इसे अकबर की शासन-नीति का आधार बताया
इबादतखाना
1575 में फ़तेहपुर सीकरी में स्थापित, जहाँ विभिन्न धर्मों के विद्वान चर्चा करते थे; आगे चलकर 1582 में अकबर ने 'दीन-ए-इलाही' नामक पंथ की शुरुआत की

मेवाड़ का प्रतिरोध: अपवाद क्यों?

राणा उदयसिंह द्वितीय
1559 में उदयपुर नगर बसाया; 1567-68 में अकबर ने चित्तौड़ दुर्ग पर घेरा डालकर उसे जीत लिया
महाराणा प्रताप
उदयसिंह के पुत्र, 1572 में मेवाड़ की गद्दी संभाली और अकबर की अधीनता स्वीकार करने से इनकार किया; 1576 में हल्दीघाटी का युद्ध लड़ा
अमरसिंह प्रथम
प्रताप के पुत्र, 1615 में मुगल शहज़ादे खुर्रम (बाद में शाहजहाँ) के माध्यम से जहाँगीर से संधि की — यह मेवाड़ का पहला औपचारिक समझौता था, पर इसमें भी वैवाहिक संबंध शामिल नहीं था, जो मेवाड़ की विशिष्ट स्थिति दर्शाता है

मुगल-राजपूत सांस्कृतिक आदान-प्रदान

क्षेत्रउदाहरण
वस्त्रमसरू (रेशम-सूत मिश्रित वस्त्र), मीर-ए-बादला व नौरंगशाही — राजस्थानी दरबारों में प्रचलित महिलाओं के परिधान
चित्रकलामुगल लघु-चित्रकला शैली के प्रभाव से मेवाड़, बूँदी, किशनगढ़ जैसी राजपूत चित्रकला शैलियाँ विकसित हुईं
स्थापत्यराजपूत दुर्गों व महलों में मुगल-फ़ारसी शैली के गुम्बद, मेहराब व बाग़-नियोजन का मिश्रण दिखता है
विज्ञानशाहजहाँ के काल में 'जिच-ए-शाहजहानी' (खगोलीय सारणियों की पुस्तक) तैयार हुई

जहाँगीर-शाहजहाँ काल: सहयोग की निरंतरता

जहाँगीर व शाहजहाँ के काल में अधिकांश राजपूत राज्यों (आमेर, मारवाड़, बीकानेर) के साथ मुगल गठबंधन जारी रहा, और राजपूत सरदार मुगल सेना व प्रशासन में उच्च पदों पर बने रहे। इस दौर में मुगल दरबार में विज्ञान व कला को भी संरक्षण मिला — जैसे शाहजहाँ के समय खगोलविदों ने 'जिच-ए-शाहजहानी' तैयार की, जो ग्रह-नक्षत्रों की गणना पर आधारित खगोलीय सारणियों की पुस्तक थी।

इसी दौर में राजपूत दरबारों ने भी मुगल दरबार की भव्यता व सांस्कृतिक शैलियों को अपनाया — पोशाक, संगीत व स्थापत्य में मुगल-राजपूत मिश्रित शैली उभरी, जो आज भी राजस्थान की हवेलियों व मंदिरों में देखी जा सकती है।

औरंगज़ेब काल: संबंधों में पुनः तनाव

औरंगज़ेब ने 1679 में पुनः जज़िया कर लगाया, जिससे राजपूत राज्यों में असंतोष बढ़ा। मारवाड़ के शासक जसवंतसिंह की मृत्यु के बाद उनके अवयस्क पुत्र अजीतसिंह के उत्तराधिकार को लेकर मुगलों से संघर्ष छिड़ गया, जिसमें दुर्गादास राठौड़ ने अजीतसिंह की रक्षा में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। मेवाड़ के राणा राजसिंह ने भी औरंगज़ेब की नीतियों का विरोध कर मारवाड़ को समर्थन दिया, जिससे मेवाड़-मारवाड़-मुगल संघर्ष (1679–1709 के आसपास) लंबे समय तक चला।

इस लंबे संघर्ष ने राजपूत-मुगल संबंधों की उस साझेदारी को गहरी चोट पहुँचाई, जो अकबर के समय से बनी थी। औरंगज़ेब की मृत्यु (1707) के बाद मुगल सत्ता धीरे-धीरे कमज़ोर पड़ने लगी, जिससे राजपूत राज्यों को अपेक्षाकृत अधिक स्वायत्तता मिलने लगी और 18वीं सदी में कई रियासतों ने व्यावहारिक रूप से स्वतंत्र नीति अपनानी शुरू कर दी।

संबंधों का सार-संक्षेप, बादशाहवार

अकबर (1556–1605)
गठबंधन व सहिष्णुता की नीति — वैवाहिक संबंध, ऊँचे मनसब, सुलह-ए-कुल; अपवाद: मेवाड़ ने अधीनता स्वीकार नहीं की
जहाँगीर (1605–1627)
नीति जारी रही; 1615 में मेवाड़ के साथ भी (बिना वैवाहिक संबंध के) संधि हुई
शाहजहाँ (1628–1658)
सहयोग व सांस्कृतिक संरक्षण का दौर — कला, स्थापत्य व विज्ञान (जिच-ए-शाहजहानी) को बढ़ावा
औरंगज़ेब (1658–1707)
नीति में उलटफेर — जज़िया की पुनर्बहाली, मारवाड़-मेवाड़ से लंबा सैन्य संघर्ष

बच्चों को कैसे पढ़ाएँ

कक्षा गतिविधि (कक्षा 7–8)

एक तालिका बनवाना जिसमें बच्चे हर मुगल बादशाह (अकबर, जहाँगीर, शाहजहाँ, औरंगज़ेब) के आगे लिखें कि उस दौर में राजपूत-मुगल संबंध कैसे थे (मित्रवत/तनावपूर्ण) — इससे पूरे कालखंड का उतार-चढ़ाव स्पष्ट होता है।

शिक्षण सहायक सामग्री

किसी मुगल लघु-चित्र और उसी विषय की राजपूत शैली की चित्रकला की तस्वीर साथ-साथ दिखाकर दोनों शैलियों में समानता-अंतर पहचानने को कहना।

सामान्य ग़लतफ़हमी

बच्चे अक्सर मान लेते हैं कि सभी राजपूत राज्यों ने मुगलों की अधीनता स्वीकार की — जबकि मेवाड़ ने लंबे समय तक प्रतिरोध जारी रखा और 1615 की संधि में भी वैवाहिक संबंध शामिल नहीं था। यह अपवाद स्पष्ट करना ज़रूरी है।

आकलन विचार

'बादशाह और नीति जोड़ो' मिलान गतिविधि — अकबर-सुलह-ए-कुल, औरंगज़ेब-जज़िया पुनः लागू, जैसे जोड़े बनवाकर बच्चों की समझ जाँचना।

याद रखने की ट्रिक

मुगल-राजपूत संबंधों का उतार-चढ़ाव याद रखने के लिए एक लहर बनाएँ — 'अकबर: मेल-मिलाप ऊपर, जहाँगीर-शाहजहाँ: स्थिर ऊपर, औरंगज़ेब: नीचे' — यानी संबंध एक ऊँची लहर की तरह ऊपर गए, दो बादशाहों तक ऊपर रहे, फिर औरंगज़ेब के समय नीचे गिर गए। मेवाड़ को इस पूरी लहर से बाहर, हमेशा प्रतिरोध में रखकर याद करें।

REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)

प्रश्न 98

मसरु, मीर-ए-बादला और नौरंगशाही का सम्बंध किस से रहा है ?

  1. Aबर्तनों के नाम
  2. Bमहिलाओं के लिए कई प्रकार के कपड़े
  3. Cआभूषणों के प्रकार
  4. Dसंगीत रागों के प्रकार

व्याख्या

राजस्थान में महिलाओं के परिधान के लिए कई प्रकार के कपड़े प्रचलित थे, जिनमें मसरू, मीर-ए-बादला और नौरंगशाही भी गिने जाते हैं। मसरू रेशम और सूत के मिश्रण से बना एक प्रसिद्ध वस्त्र है। ये बर्तनों, आभूषणों या संगीत रागों के नाम नहीं हैं, इसलिए सही उत्तर (B) है।

प्रश्न 143

‘जिच-ए-शाहजहानी’ की मुख्य विषयवस्तु क्या थी ?

  1. Aशरीर रचना
  2. Bचित्रकला
  3. Cखगोल शास्त्र
  4. Dअंकगणित

व्याख्या

'जिच-ए-शाहजहानी' (ज़ीज-ए-शाहजहानी) शाहजहाँ के काल में तैयार की गई खगोलीय सारणियों (astronomical tables) की पुस्तक है। 'ज़ीज' शब्द का अर्थ ही ग्रह-नक्षत्रों की गणना वाली खगोलीय सारणी है। अतः इसकी मुख्य विषयवस्तु खगोल शास्त्र थी।

प्रश्न 92

‘सुलह-ए-कुल’ की नीति को किस मुगल शासक ने लागू की थी ?

  1. Aजहाँगीर
  2. Bअकबर
  3. Cशाहजहाँ
  4. Dऔरंगजेब

व्याख्या

‘सुलह-ए-कुल’ (सार्वभौमिक शांति/सबके साथ सहिष्णुता) की नीति मुगल बादशाह अकबर ने अपनाई थी। अबुल फज़ल ने इस विचार को अकबर की शासन-नीति का आधार बताया है, जिसमें सभी धर्मों के लोगों के साथ समान व्यवहार पर जोर था। इसी नीति के तहत अकबर ने जज़िया समाप्त किया और इबादतखाने में विभिन्न धर्मों के विद्वानों से चर्चा की। औरंगजेब की नीति इसके विपरीत कट्टर मानी जाती है।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

आमेर के राजा भारमल ने अपनी पुत्री का विवाह किस मुगल बादशाह से किया था ?

  1. Aबाबर
  2. Bहुमायूँ
  3. Cअकबर
  4. Dजहाँगीर

व्याख्या

1562 में आमेर के राजा भारमल ने अपनी पुत्री का विवाह अकबर से किया था, जो पहला बड़ा मुगल-राजपूत वैवाहिक गठबंधन माना जाता है।

प्रश्न 2

अकबर ने जज़िया कर कब समाप्त किया था ?

  1. A1556
  2. B1564
  3. C1575
  4. D1582

व्याख्या

अकबर ने 1564 में जज़िया कर समाप्त किया, इससे पहले 1563 में तीर्थ-यात्रा कर समाप्त किया था — दोनों उसकी धार्मिक सहिष्णुता की नीति (सुलह-ए-कुल) के उदाहरण हैं।

प्रश्न 3

1567-68 में अकबर ने किस दुर्ग पर घेरा डालकर उसे जीता था ?

  1. Aकुम्भलगढ़
  2. Bचित्तौड़गढ़
  3. Cमेहरानगढ़
  4. Dरणथम्भौर

व्याख्या

अकबर ने 1567-68 में चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर घेरा डालकर उसे जीत लिया था। इससे कुछ वर्ष पहले (1559) राणा उदयसिंह द्वितीय ने उदयपुर नगर बसाया था, जो आगे चलकर मेवाड़ की नई राजधानी बना।

प्रश्न 4

मेवाड़ के किस शासक ने 1615 में मुगल शहज़ादे खुर्रम के माध्यम से जहाँगीर से संधि की थी ?

  1. Aमहाराणा प्रताप
  2. Bराणा उदयसिंह द्वितीय
  3. Cअमरसिंह प्रथम
  4. Dराणा राजसिंह

व्याख्या

महाराणा प्रताप के पुत्र अमरसिंह प्रथम ने 1615 में मुगल शहज़ादे खुर्रम (बाद के शाहजहाँ) के माध्यम से जहाँगीर से संधि की, जो मेवाड़ का पहला औपचारिक मुगल-समझौता था।

प्रश्न 5

'इबादतखाना' की स्थापना अकबर ने कहाँ की थी ?

  1. Aआगरा
  2. Bफ़तेहपुर सीकरी
  3. Cदिल्ली
  4. Dलाहौर

व्याख्या

अकबर ने 1575 में फ़तेहपुर सीकरी में इबादतखाना स्थापित किया, जहाँ विभिन्न धर्मों के विद्वान धार्मिक विषयों पर चर्चा करते थे।

प्रश्न 6

औरंगज़ेब के काल में मारवाड़ के अवयस्क उत्तराधिकारी अजीतसिंह की रक्षा में किसने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई ?

  1. Aमानसिंह
  2. Bदुर्गादास राठौड़
  3. Cभगवानदास
  4. Dराणा राजसिंह

व्याख्या

जसवंतसिंह की मृत्यु के बाद उनके अवयस्क पुत्र अजीतसिंह के उत्तराधिकार को लेकर औरंगज़ेब से संघर्ष छिड़ा, जिसमें दुर्गादास राठौड़ ने अजीतसिंह की रक्षा में प्रमुख भूमिका निभाई। राणा राजसिंह ने मेवाड़ की ओर से इस संघर्ष में समर्थन दिया।

प्रश्न 7

'जिच-ए-शाहजहानी' किस विषय से संबंधित ग्रंथ है ?

  1. Aसंगीत
  2. Bचित्रकला
  3. Cखगोल-शास्त्र
  4. Dस्थापत्य कला

व्याख्या

'जिच-ए-शाहजहानी' शाहजहाँ के काल में तैयार की गई खगोलीय सारणियों (ग्रह-नक्षत्रों की गणना) की पुस्तक है, जो मुगल दरबार में खगोल-विज्ञान को मिले संरक्षण को दर्शाती है।

प्रश्न 8

एक शिक्षक कक्षा 8 में मुगल-राजपूत संबंध पढ़ाते समय बच्चों से हर मुगल बादशाह के आगे 'मित्रवत' या 'तनावपूर्ण' लिखवाता है। इस गतिविधि का मुख्य उद्देश्य क्या है ?

  1. Aकेवल तालिका बनाना सिखाना
  2. Bपूरे कालखंड में संबंधों के उतार-चढ़ाव को स्पष्ट करना
  3. Cचित्रकला सिखाना
  4. Dसमय व्यतीत करना

व्याख्या

ऐसी तुलनात्मक तालिका गतिविधि से बच्चे यह समझ पाते हैं कि मुगल-राजपूत संबंध स्थिर नहीं थे, बल्कि हर बादशाह के साथ बदलते रहे — यह ऐतिहासिक कारण-परिणाम की समझ विकसित करने में सहायक है।

प्रश्न 9

अकबर की 'सुलह-ए-कुल' नीति का मुख्य आशय क्या था ?

  1. Aकेवल राजपूतों से मित्रता
  2. Bसभी धर्मों के साथ समान व्यवहार व सार्वभौमिक सहिष्णुता
  3. Cकेवल सैन्य विस्तार
  4. Dकेवल कर वसूली की नई व्यवस्था

व्याख्या

'सुलह-ए-कुल' का अर्थ है सार्वभौमिक शांति व सभी धर्मों के प्रति समान व्यवहार। अबुल फ़ज़ल ने इसे अकबर की शासन-नीति का आधार बताया, जिसके तहत जज़िया व तीर्थ-कर समाप्त किए गए।

प्रश्न 10

मसरू, मीर-ए-बादला व नौरंगशाही किससे संबंधित हैं ?

  1. Aमुगल दरबार के संगीत राग
  2. Bमहिलाओं के लिए प्रचलित परिधान/वस्त्र
  3. Cमुगल स्थापत्य की शैलियाँ
  4. Dमुगल सिक्कों के नाम

व्याख्या

मसरू, मीर-ए-बादला व नौरंगशाही राजस्थानी दरबारों में प्रचलित महिलाओं के परिधान/वस्त्रों के नाम हैं, जो मुगल-राजपूत सांस्कृतिक आदान-प्रदान का उदाहरण हैं। मसरू रेशम व सूत के मिश्रण से बना वस्त्र है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुगल-राजपूत संबंध से REET में कितने प्रश्न आते हैं?+

REET 2024 में इस टॉपिक से 3 प्रश्न पूछे गए थे, जिनमें अकबर की नीति व मुगलकालीन सांस्कृतिक शब्दावली दोनों शामिल थीं।

अकबर ने राजपूतों के साथ गठबंधन की नीति क्यों अपनाई?+

अकबर ने राजपूत राज्यों को सैन्य शक्ति व प्रशासनिक स्थिरता के लिए महत्त्वपूर्ण माना, इसलिए वैवाहिक संबंध, उच्च मनसब और धार्मिक सहिष्णुता (सुलह-ए-कुल, जज़िया व तीर्थ-कर की समाप्ति) के माध्यम से उन्हें मुगल साम्राज्य से जोड़ने की नीति अपनाई।

मेवाड़ ने मुगलों की अधीनता स्वीकार क्यों नहीं की?+

मेवाड़ के शासक अपनी स्वतंत्रता व सम्मान को सर्वोपरि मानते थे। महाराणा प्रताप ने अकबर की अधीनता कभी स्वीकार नहीं की; उनके पुत्र अमरसिंह ने 1615 में जहाँगीर से संधि तो की, पर उसमें भी वैवाहिक संबंध शामिल नहीं थे।

जिच-ए-शाहजहानी क्या है?+

जिच-ए-शाहजहानी शाहजहाँ के काल में तैयार की गई खगोलीय सारणियों (ग्रह-नक्षत्रों की गणना) की पुस्तक है, जो मुगल दरबार में विज्ञान व खगोल-शास्त्र को मिले संरक्षण का उदाहरण है।

औरंगज़ेब के समय राजपूत-मुगल संबंध क्यों बिगड़े?+

औरंगज़ेब ने 1679 में जज़िया कर पुनः लागू किया और मारवाड़ के उत्तराधिकार-विवाद में हस्तक्षेप किया, जिससे मारवाड़ (दुर्गादास राठौड़ के नेतृत्व में) और मेवाड़ (राणा राजसिंह) दोनों ने मुगलों का विरोध किया।

मसरू और मीर-ए-बादला किस चीज़ के नाम हैं?+

मसरू, मीर-ए-बादला व नौरंगशाही राजस्थानी राजघरानों में प्रचलित महिलाओं के परिधान/वस्त्रों के नाम हैं। मसरू रेशम व सूत के मिश्रण से बना एक विशेष वस्त्र है, जो मुगल-राजपूत सांस्कृतिक आदान-प्रदान का उदाहरण है।

आगे पढ़ें

आधिकारिक स्रोत

  1. Wikipedia — Siege of Chittorgarh (1567–1568)
  2. Wikipedia — Rathore rebellion (1679–1707)

बदलाव लॉग

  • 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए