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REET L2 · सामाजिक अध्ययन

भक्ति एवं सूफी आंदोलन — REET नोट्स (सामाजिक अध्ययन)

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भक्ति और सूफी आंदोलन मध्यकालीन भारत के दो समानांतर धार्मिक-सामाजिक आंदोलन थे, जिन्होंने भक्ति व प्रेम के मार्ग से जाति-भेद और कर्मकांड को चुनौती दी। REET में इस टॉपिक से भक्ति दार्शनिकों के सिद्धांत, उत्तर भारतीय संतों और विशेष रूप से राजस्थान के लोक-संतों पर बारीक प्रश्न पूछे जाते हैं।

  • REET 2024 में 4 प्रश्न
  • कक्षा 6–8 स्तर
  • 10 मिनट पढ़ें
16 सितंबर 2026 को सत्यापित · स्रोत: Wikipedia — Guru Jambheshwar (Bishnoi sect)

REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

REET 2024 के प्रश्नों में गुरु नानक की जन्म-तिथि, राजस्थान के स्थानीय संतों (जसनाथजी, दादूदयाल) की जन्म/कर्मभूमि और भक्ति दार्शनिकों के सिद्धांतों पर बहु-कथन (statement-based) प्रश्न पूछे गए — जैसे रामानुज, वल्लभाचार्य व निम्बार्काचार्य के दर्शन का सही-गलत मिलान। इसका सीधा संकेत है: सामान्य भक्ति आंदोलन के साथ-साथ राजस्थान के स्थानीय संत-संप्रदायों को उतनी ही बारीकी से पढ़ना ज़रूरी है, क्योंकि RBSE का पेपर स्थानीय संदर्भ को प्राथमिकता देता है। ध्यान रहे, ऐसे बहु-कथन प्रश्नों में एक कथन प्रायः जान-बूझकर किसी दूसरे दार्शनिक के सिद्धांत से मिलाकर गलत बना दिया जाता है, इसलिए हर आचार्य-सिद्धांत जोड़ी को अलग-अलग स्पष्ट रूप से याद रखना ज़्यादा सुरक्षित रणनीति है।

भक्ति दार्शनिक और उनका सिद्धांत

आचार्यदर्शन/सिद्धांत
आदि शंकराचार्यअद्वैत (ब्रह्म ही एकमात्र सत्य, जगत मिथ्या)
रामानुजाचार्यविशिष्टाद्वैत
माध्वाचार्यद्वैतवाद (ईश्वर व जीव सर्वथा भिन्न)
निम्बार्काचार्यद्वैताद्वैत (भेदाभेद)
वल्लभाचार्यशुद्धाद्वैत (पुष्टिमार्ग के प्रवर्तक)
चैतन्य महाप्रभुअचिन्त्य भेदाभेद (बंगाल में कृष्ण-भक्ति)

REET 2024 में ठीक इसी सूची में से रामानुज-वल्लभ-निम्बार्क का सही/गलत मिलान पूछा गया था — निम्बार्क का दर्शन 'द्वैताद्वैत' है, 'द्वैतवाद' नहीं (वह माध्वाचार्य का है), यह भ्रम याद रखें।

उत्तर भारत के निर्गुण व सगुण भक्ति संत

कबीरदास
निर्गुण भक्ति धारा, काशी में जन्मे/पले, हिंदू-मुस्लिम दोनों रूढ़ियों की आलोचना की, 'दोहा' शैली में रचना
गुरु नानक देव
सिख धर्म के संस्थापक, जन्म 1469 ई. तलवंडी (वर्तमान ननकाना साहिब), मृत्यु 1539 ई. करतारपुर में
रैदास (रविदास)
निर्गुण संत, जाति-भेद के प्रबल विरोधी, कबीर के समकालीन
सूरदास
सगुण कृष्ण-भक्ति, 'सूरसागर' के रचयिता, वल्लभाचार्य के पुष्टिमार्ग से जुड़े
तुलसीदास
सगुण राम-भक्ति, अवधी भाषा में 'रामचरितमानस' के रचयिता
मीरा बाई
सगुण कृष्ण-भक्ति, मेवाड़ की राजकुमारी, विवाह मेवाड़ के युवराज भोजराज (राणा सांगा के पुत्र) से हुआ; चित्तौड़ व मेड़ता से जुड़ी भक्ति-काव्य परंपरा

राजस्थान के प्रमुख लोक-संत व संप्रदाय

संतसंप्रदाय/विशेषता
दादूदयालजन्म अहमदाबाद (1544 ई.), दादू पंथ के प्रवर्तक, मुख्य पीठ नरायणा (जयपुर), 'राजस्थान का कबीर' कहे जाते हैं
जसनाथजीजसनाथी संप्रदाय के संस्थापक, मुख्य पीठ कतरियासर (बीकानेर), परंपरा के अनुसार दिल्ली सुल्तान सिकंदर लोदी ने भूमि प्रदान की; अग्नि-नृत्य (जसनाथी सिद्धों का अग्नि नृत्य) प्रसिद्ध
जांभोजीबिश्नोई संप्रदाय के संस्थापक, समराथल धोरा (बीकानेर) में 29 नियम दिए, पर्यावरण व वृक्ष-संरक्षण इस संप्रदाय की पहचान
लालदासजीलालदासी संप्रदाय, मेवात-अलवर क्षेत्र से संबंधित
हरिदासजीनिरंजनी संप्रदाय, डीडवाना (नागौर) क्षेत्र से संबंधित
मावजीडूंगरपुर (बेणेश्वर) क्षेत्र से संबंधित, आदिवासी भक्ति-परंपरा से जुड़े

भक्ति आंदोलन की जड़ें: दक्षिण भारत से उत्तर भारत तक

भक्ति आंदोलन की शुरुआत उत्तर भारत में नहीं, बल्कि दक्षिण भारत में हुई थी। लगभग छठी से नौवीं शताब्दी के बीच तमिल क्षेत्र में वैष्णव संत 'आलवार' और शैव संत 'नयनार' हुए, जिन्होंने संस्कृत के बजाय जन-भाषा (तमिल) में भक्ति-काव्य रचकर आम लोगों तक भक्ति को पहुँचाया। यहीं से आगे चलकर शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, माध्वाचार्य जैसे दार्शनिकों ने भक्ति को व्यवस्थित दार्शनिक रूप दिया, और यह विचारधारा 13वीं-14वीं शताब्दी तक उत्तर भारत पहुँची, जहाँ कबीर, नानक, चैतन्य, मीरा जैसे संतों ने इसे लोकप्रिय बनाया।

उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन के दो व्यापक रूप देखने को मिलते हैं — निर्गुण धारा, जो जाति-भेद व मूर्ति-पूजा की आलोचक थी, और सगुण धारा, जो राम-कृष्ण जैसे अवतारों की भक्ति पर केंद्रित रही। दोनों धाराओं ने आम जन-भाषा (हिंदी, अवधी, ब्रज, राजस्थानी) में रचनाएँ कीं, जिससे साहित्य और समाज दोनों में गहरा प्रभाव पड़ा।

सूफी आंदोलन: मूल अवधारणा

सूफी मत इस्लाम की रहस्यवादी (mystic) धारा है, जो कर्मकांड के बजाय ईश्वर-प्रेम, गुरु (पीर) की शरण और आत्म-शुद्धि पर बल देती है। सूफी संत खानकाह (आश्रम) में रहते थे और 'समा' (संगीत-सभा) के माध्यम से भक्ति-भाव जगाते थे। भारत में सबसे प्रभावशाली सिलसिला 'चिश्ती' रहा, जिसके संस्थापक ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती ने अजमेर में अपनी दरगाह स्थापित की — यह आज भी हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदायों की आस्था का केंद्र है।

अन्य प्रमुख सूफी सिलसिलों में सुहरावर्दी (मुल्तान-पंजाब केंद्रित), कादिरी और नक्शबंदी शामिल हैं। सूफी संतों की शिक्षाओं में 'वहदत-उल-वुजूद' (ईश्वर व सृष्टि की एकता) की अवधारणा भक्ति संतों के निर्गुण विचार से काफ़ी मेल खाती है, जिस कारण मध्यकाल में भक्ति और सूफी दोनों धाराओं ने एक-दूसरे को प्रभावित किया और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा दिया।

बच्चों को कैसे पढ़ाएँ

कक्षा गतिविधि (कक्षा 6–8)

राजस्थान के मानचित्र पर दादूदयाल (नरायणा-जयपुर), जसनाथजी (कतरियासर-बीकानेर) और जांभोजी (समराथल-बीकानेर) के केंद्रों को चिह्नित करवाकर 'हमारे राज्य के संत' नामक चार्ट बनवाना।

शिक्षण सहायक सामग्री

मीरा बाई या कबीर के किसी एक प्रसिद्ध पद/दोहे को कक्षा में सस्वर पढ़वाना और उसका सरल अर्थ समझाना — भाषा व इतिहास को जोड़ने वाली अंतर-विषयी (cross-curricular) विधि।

सामान्य ग़लतफ़हमी

बच्चे अक्सर भक्ति और सूफी आंदोलन को एक ही मानते हैं, या यह सोचते हैं कि दोनों आंदोलनों की शुरुआत उत्तर भारत में हुई — शिक्षक को स्पष्ट करना चाहिए कि भक्ति की जड़ें दक्षिण भारत में और सूफी मत की जड़ें मध्य-पूर्व में हैं; भारत में आकर दोनों ने स्थानीय रंग लिया और एक-दूसरे को प्रभावित किया, पर वे अलग-अलग धार्मिक परंपराओं से निकले थे।

आकलन विचार

'संत को उसके संप्रदाय/क्षेत्र से जोड़ो' ऐसी एक मिलान तालिका बनवाना, जिसमें बच्चे दादूदयाल, जसनाथजी, जांभोजी, लालदासजी को उनके सही केंद्र से जोड़ें, और फिर कक्षा में एक-दूसरे की कॉपी की जाँच करवाकर तुरंत फीडबैक दें — इससे स्व-मूल्यांकन (peer assessment) की आदत भी बनती है।

याद रखने की ट्रिक

भक्ति दार्शनिकों के सिद्धांत याद रखने के लिए तुकबंदी बनाएँ — 'शंकर की अद्वैत, राम-अनुज की विशिष्टाद्वैत, माधव की द्वैत, निम्बार्क की द्वैताद्वैत, वल्लभ की शुद्धाद्वैत' — क्रम में पढ़ने पर 'अद्वैत' शब्द हर जगह घूमता दिखेगा, बस आगे लगने वाला विशेषण अलग है। राजस्थान के संतों के लिए स्थान से जोड़ें: नरायणा=दादू, कतरियासर=जसनाथ, समराथल=जांभोजी।

REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)

प्रश्न 131

गुरु नानक का जन्म कब हुआ ?

  1. A1398
  2. B1469
  3. C1498
  4. D1569

व्याख्या

सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव का जन्म 1469 ई. में तलवंडी (वर्तमान ननकाना साहिब, पाकिस्तान) में हुआ था। उनकी मृत्यु 1539 ई. में करतारपुर में हुई।

प्रश्न 148

किस सन्त के चमत्कारों से प्रभावित होकर दिल्ली सुल्तान सिकंदर लोदी ने उन्हें राजस्थान में भूमि दी थी ?

  1. Aजसनाथजी
  2. Bमल्लीनाथजी
  3. Cगोगाजी
  4. Dमेहाजी मांगलिया

व्याख्या

राजस्थान इतिहास की पुस्तकों में उल्लेख मिलता है कि जसनाथी सम्प्रदाय के संस्थापक सन्त जसनाथजी के चमत्कारों से प्रभावित होकर दिल्ली सुल्तान सिकंदर लोदी ने उन्हें कतरियासर (बीकानेर) में भूमि दी थी। यह परंपरागत विवरण है। मल्लीनाथजी, गोगाजी और मेहाजी मांगलिया राजस्थान के लोकदेवता हैं, पर यह घटना उनसे नहीं जोड़ी जाती। अतः सही उत्तर (A) है।

प्रश्न 94

निम्नलिखित में से किस संत का जन्म अहमदाबाद में हुआ ?

  1. Aलालदास
  2. Bहरिदास
  3. Cदादूदयाल
  4. Dमावजी

व्याख्या

संत दादूदयाल का जन्म 1544 ई. में अहमदाबाद (गुजरात) में माना जाता है। वे राजस्थान में दादू पंथ के प्रवर्तक थे और उनकी प्रमुख पीठ नरायणा (जयपुर) में है; उन्हें ‘राजस्थान का कबीर’ भी कहा जाता है। लालदास (लालदासी सम्प्रदाय) का संबंध मेवात-अलवर क्षेत्र से, हरिदास (निरंजनी सम्प्रदाय) का डीडवाना क्षेत्र से तथा मावजी का संबंध डूंगरपुर (बेणेश्वर) से है।

प्रश्न 100

भक्ति आन्दोलन के बारें में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. रामानुज के दार्शनिक दृष्टिकोण को विशिष्टाद्वैत कहा जाता है । 2. वल्लभाचार्य के दार्शनिक दृष्टिकोण को शुद्धाद्वैत कहा जाता है । 3. निम्बार्काचार्य के दार्शनिक दृष्टिकोण को द्वैतवाद कहा जाता है । उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं ?

  1. Aकेवल 1
  2. Bकेवल 3
  3. C1, 2
  4. D1,2, 3

व्याख्या

रामानुजाचार्य का दर्शन विशिष्टाद्वैत और वल्लभाचार्य का दर्शन शुद्धाद्वैत कहलाता है, अतः कथन 1 और 2 सही हैं। निम्बार्काचार्य का दर्शन द्वैताद्वैत (भेदाभेद) कहलाता है, जबकि ‘द्वैतवाद’ माध्वाचार्य का दर्शन है; इसलिए कथन 3 गलत है। अतः सही उत्तर ‘1, 2’ है।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

रामानुजाचार्य के दार्शनिक सिद्धांत को क्या कहा जाता है ?

  1. Aअद्वैत
  2. Bविशिष्टाद्वैत
  3. Cद्वैत
  4. Dशुद्धाद्वैत

व्याख्या

रामानुजाचार्य का दार्शनिक सिद्धांत विशिष्टाद्वैत कहलाता है, जिसमें ब्रह्म व जीव को भिन्न होते हुए भी एक-दूसरे से जुड़ा हुआ माना गया है। अद्वैत शंकराचार्य का और द्वैत माध्वाचार्य का सिद्धांत है।

प्रश्न 2

सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव का जन्म-स्थान कौन-सा था ?

  1. Aअमृतसर
  2. Bतलवंडी (ननकाना साहिब)
  3. Cकरतारपुर
  4. Dआनंदपुर साहिब

व्याख्या

गुरु नानक देव का जन्म 1469 ई. में तलवंडी (वर्तमान ननकाना साहिब, पाकिस्तान) में हुआ था। उनकी मृत्यु 1539 ई. में करतारपुर में हुई, जहाँ उन्होंने जीवन के अंतिम वर्ष बिताए।

प्रश्न 3

बिश्नोई संप्रदाय के संस्थापक जांभोजी ने अपने 29 नियम कहाँ दिए थे ?

  1. Aनरायणा (जयपुर)
  2. Bकतरियासर (बीकानेर)
  3. Cसमराथल धोरा (बीकानेर)
  4. Dमेड़ता (नागौर)

व्याख्या

जांभोजी ने समराथल धोरा (बीकानेर) में अपने अनुयायियों को 29 नियम दिए, जिनमें वृक्ष व वन्य-जीव संरक्षण पर विशेष बल है। नरायणा दादूदयाल का केंद्र है और कतरियासर जसनाथजी का।

प्रश्न 4

निम्नलिखित में से कौन-सा सिलसिला भारत में सूफी मत का सबसे प्रभावशाली सिलसिला माना जाता है, जिसकी प्रमुख दरगाह अजमेर में है ?

  1. Aसुहरावर्दी
  2. Bकादिरी
  3. Cचिश्ती
  4. Dनक्शबंदी

व्याख्या

चिश्ती सिलसिला भारत में सबसे प्रभावशाली रहा। इसके संस्थापक ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह अजमेर में स्थित है। सुहरावर्दी सिलसिला मुख्यतः पंजाब-मुल्तान क्षेत्र में प्रभावी था।

प्रश्न 5

निर्गुण भक्ति धारा से संबंधित संत कौन-सा है ?

  1. Aसूरदास
  2. Bतुलसीदास
  3. Cकबीरदास
  4. Dमीरा बाई

व्याख्या

कबीरदास निर्गुण भक्ति धारा के प्रमुख संत थे, जो निराकार ईश्वर की उपासना पर बल देते थे। सूरदास, तुलसीदास और मीरा बाई सगुण भक्ति (क्रमशः कृष्ण व राम भक्ति) से जुड़े थे।

प्रश्न 6

वल्लभाचार्य द्वारा प्रवर्तित पंथ, जिसमें कृष्ण-भक्ति व सेवा-भाव पर बल दिया गया, क्या कहलाता है ?

  1. Aपुष्टिमार्ग
  2. Bदादू पंथ
  3. Cनिरंजनी संप्रदाय
  4. Dरामस्नेही संप्रदाय

व्याख्या

वल्लभाचार्य ने शुद्धाद्वैत दर्शन के आधार पर 'पुष्टिमार्ग' की स्थापना की, जिसमें कृष्ण की सेवा-भाव से भक्ति पर बल दिया गया। सूरदास इसी पुष्टिमार्ग परंपरा से जुड़े थे।

प्रश्न 7

एक शिक्षक कक्षा 7 में भक्ति संतों को पढ़ाते हुए राजस्थान के मानचित्र पर नरायणा, कतरियासर व समराथल धोरा चिह्नित करवाता है। इस गतिविधि से मुख्यतः किस कौशल का विकास होता है ?

  1. Aगणितीय कौशल
  2. Bस्थानिक (spatial) व ऐतिहासिक समझ को जोड़ने का कौशल
  3. Cशारीरिक कौशल
  4. Dसंगीत कौशल

व्याख्या

मानचित्र-आधारित गतिविधियाँ ऐतिहासिक तथ्यों को भौगोलिक संदर्भ से जोड़ती हैं, जिससे बच्चों में स्थानिक व ऐतिहासिक समझ (spatial-historical thinking) का विकास होता है — यह सामाजिक अध्ययन शिक्षण का प्रभावी तरीका है।

प्रश्न 8

मीरा बाई का विवाह मेवाड़ के किस युवराज से हुआ था ?

  1. Aराणा सांगा
  2. Bभोजराज
  3. Cमहाराणा प्रताप
  4. Dराणा हम्मीर

व्याख्या

मीरा बाई का विवाह मेवाड़ के युवराज भोजराज से हुआ था, जो राणा सांगा के पुत्र थे। पति की असामयिक मृत्यु के बाद मीरा बाई पूर्णतः कृष्ण-भक्ति में लीन हो गईं।

प्रश्न 9

निम्नलिखित युग्मों में से कौन-सा सही सुमेलित नहीं है ?

  1. Aनिम्बार्काचार्य — द्वैताद्वैत
  2. Bमाध्वाचार्य — द्वैतवाद
  3. Cवल्लभाचार्य — शुद्धाद्वैत
  4. Dरामानुजाचार्य — द्वैतवाद

व्याख्या

रामानुजाचार्य का सिद्धांत विशिष्टाद्वैत है, द्वैतवाद नहीं — द्वैतवाद माध्वाचार्य का सिद्धांत है। शेष तीनों युग्म (निम्बार्क-द्वैताद्वैत, माध्व-द्वैत, वल्लभ-शुद्धाद्वैत) सही सुमेलित हैं।

प्रश्न 10

सूफी संतों की 'खानकाह' किसे कहा जाता था ?

  1. Aसूफी संगीत की सभा
  2. Bसूफी संतों का आश्रम/निवास-स्थान
  3. Cसूफी संतों की समाधि
  4. Dसूफी शिक्षा-ग्रंथ

व्याख्या

खानकाह सूफी संतों (पीर) का आश्रम या निवास-स्थान होता था, जहाँ शिष्य (मुरीद) रहकर शिक्षा व साधना करते थे। संगीत-सभा को 'समा' कहा जाता था।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भक्ति एवं सूफी आंदोलन से REET में कितने प्रश्न आते हैं?+

REET 2024 में इस टॉपिक से 4 प्रश्न पूछे गए थे, जिनमें राजस्थान के लोक-संतों पर विशेष ज़ोर था। यह इतिहास खंड का एक स्थिर (नियमित) उप-विषय है।

निर्गुण और सगुण भक्ति में क्या अंतर है?+

निर्गुण भक्ति (जैसे कबीर, नानक, रैदास) निराकार-निर्गुण ईश्वर की उपासना करती है, जबकि सगुण भक्ति (जैसे सूरदास, तुलसीदास, मीरा बाई) राम या कृष्ण जैसे साकार अवतारों की भक्ति पर केंद्रित है।

दादूदयाल को 'राजस्थान का कबीर' क्यों कहा जाता है?+

दादूदयाल का जन्म अहमदाबाद में हुआ, पर उनकी कर्मभूमि राजस्थान रही; कबीर की तरह वे भी निर्गुण भक्ति व जाति-भेद विरोधी विचारों के प्रचारक थे, इसी समानता के कारण उन्हें यह उपाधि दी जाती है।

भारत में सबसे प्रभावशाली सूफी सिलसिला कौन-सा था?+

चिश्ती सिलसिला भारत में सबसे प्रभावशाली रहा। इसके संस्थापक ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह अजमेर (राजस्थान) में है, जो आज भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है।

जांभोजी और बिश्नोई संप्रदाय का पर्यावरण से क्या संबंध है?+

जांभोजी ने समराथल धोरा (बीकानेर) में 29 नियम दिए, जिनमें वृक्षों व वन्य-जीवों की रक्षा पर विशेष बल है — इसी कारण बिश्नोई समुदाय आज भी पर्यावरण-संरक्षण के लिए जाना जाता है।

आलवार और नयनार संत कौन थे?+

आलवार दक्षिण भारत (तमिल क्षेत्र) के वैष्णव भक्ति-संत थे और नयनार शैव भक्ति-संत। दोनों ने लगभग छठी से नौवीं शताब्दी के बीच तमिल भाषा में भक्ति-काव्य रचकर भक्ति आंदोलन की नींव रखी, जो बाद में उत्तर भारत तक फैला।

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आधिकारिक स्रोत

  1. Wikipedia — Guru Jambheshwar (Bishnoi sect)

बदलाव लॉग

  • 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए