गुप्त साम्राज्य: REET लेवल-2 के लिए पूरे नोट्स
इस पेज पर गुप्त साम्राज्य के शासक, प्रशासन, साहित्य, विज्ञान, मंदिर-स्थापत्य और राजस्थान से जुड़े साक्ष्य एक जगह सरल भाषा में दिए गए हैं। REET 2024 लेवल-2 में इस काल से कई प्रश्न सीधे अभिलेख, ग्रंथ-लेखक और मंदिरों पर आधारित पूछे गए, इसलिए यह टॉपिक पक्के अंक दिलाने वाला है।
- REET 2024 में 7 प्रश्न
- कक्षा 6–8 व शिक्षक-प्रशिक्षण स्तर
- 12 मिनट पढ़ें
REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
REET 2024 (लेवल-2) की दो पालियों में इस काल-खंड से 7 प्रश्न आए। पैटर्न साफ है: (1) अभिलेख और उसका रचयिता — प्रयाग प्रशस्ति किसने लिखी (हरिषेण); (2) लेखक–ग्रंथ सुमेलन — दण्डी, विशाखदत्त, कालिदास; (3) गुप्तकालीन मंदिर — देवगढ़ के दशावतार मंदिर पर कथन-आधारित प्रश्न और उसकी मूर्तियाँ (गजेन्द्र मोक्ष, नर-नारायण); (4) वैवाहिक संबंध — प्रभावती गुप्त का विवाह वाकाटक रुद्रसेन द्वितीय से; (5) प्राचीन भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के संपर्क — जावा का प्राचीन नाम यवद्वीप। साथ में चोलकालीन ग्रंथ पर भी एक प्रश्न था। यानी रटने के साथ ‘कौन–किससे जुड़ा’ वाली सूचियाँ पक्की होनी चाहिए; कथन-आधारित प्रश्नों के लिए तथ्य बारीकी से याद रखें।
गुप्त वंश के प्रमुख शासक एक नज़र में
| शासक | मुख्य तथ्य (परीक्षा की दृष्टि से) |
|---|---|
| श्रीगुप्त | वंश का संस्थापक माना जाता है; उपाधि ‘महाराज’। |
| घटोत्कच | श्रीगुप्त का उत्तराधिकारी; उपाधि ‘महाराज’। |
| चन्द्रगुप्त प्रथम | वंश का पहला प्रतापी शासक; ‘महाराजाधिराज’ उपाधि; लिच्छवि राजकुमारी कुमारदेवी से विवाह; गुप्त संवत् (319–320 ई.) का आरम्भ इन्हीं के समय से माना जाता है। |
| समुद्रगुप्त | दरबारी कवि हरिषेण ने प्रयाग प्रशस्ति लिखी; उत्तर भारत के राजाओं को जीता, दक्षिण के राजाओं को हराकर पुनः राज्य लौटाया; वीणा बजाते हुए सिक्के; इतिहासकार वी.ए. स्मिथ ने ‘भारत का नेपोलियन’ कहा। |
| चन्द्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) | शकों को पराजित कर पश्चिमी भारत जीता; पुत्री प्रभावती गुप्त का विवाह वाकाटक रुद्रसेन द्वितीय से; चीनी यात्री फाह्यान (Faxian) इन्हीं के समय भारत आया; दिल्ली के महरौली लौह स्तंभ का ‘चन्द्र’ इन्हीं को माना जाता है। |
| कुमारगुप्त प्रथम | लगभग 415–455 ई.; ह्वेनसांग ने नालंदा महाविहार का संस्थापक ‘शक्रादित्य’ बताया, जिसे विद्वान कुमारगुप्त प्रथम मानते हैं। |
| स्कन्दगुप्त | हूणों का सामना किया (भितरी स्तंभ लेख); जूनागढ़ अभिलेख के अनुसार सुदर्शन झील की मरम्मत गवर्नर पर्णदत्त के पुत्र चक्रपालित ने करवाई। |
गुप्त शासकों के क्रम और उनसे जुड़े अभिलेख REET में बार-बार पूछे जाते हैं।[स्रोत 2]
प्रयाग प्रशस्ति और समुद्रगुप्त की विजय-नीति
प्रयाग प्रशस्ति (इलाहाबाद स्तंभ अभिलेख) संस्कृत में लिखी गई है और उसी स्तंभ पर उत्कीर्ण है जिस पर पहले से अशोक का लेख है। इसके रचयिता समुद्रगुप्त के दरबारी कवि और उच्च अधिकारी हरिषेण थे। NCERT कक्षा 6 की इतिहास पुस्तक इसी प्रशस्ति के माध्यम से समझाती है कि ‘प्रशस्ति’ का अर्थ प्रशंसा-लेख है — इसलिए इसमें राजा का गुणगान है, इसे पढ़ते समय इतिहासकार सावधानी रखते हैं।
प्रशस्ति के अनुसार समुद्रगुप्त ने चार तरह की नीति अपनाई: (1) आर्यावर्त (उत्तर भारत) के राजाओं को हराकर उनका राज्य अपने साम्राज्य में मिला लिया; (2) दक्षिणापथ के राजाओं को हराया, पर उन्हें अपना राज्य वापस दे दिया; (3) पूर्व के समतट व कामरूप, उत्तर के नेपाल जैसे सीमावर्ती राज्यों और पश्चिम के गण-राज्यों ने कर देकर, आज्ञा मानकर और दरबार में उपस्थित होकर अधीनता मानी; (4) दूर के शासकों — शक-कुषाण वंशजों और श्रीलंका के राजा — ने उपहार भेजकर और वैवाहिक संबंधों का प्रस्ताव देकर अधीनता स्वीकारी। पश्चिमी गणों में मालव, आर्जुनायन, यौधेय, मद्रक और आभीर के नाम मिलते हैं — इनमें मालव और आर्जुनायन जैसे गणों का संबंध आज के राजस्थान के क्षेत्रों से जोड़ा जाता है।
गुप्तकाल: साहित्य, विज्ञान और लेखक–ग्रंथ सूची
| विद्वान / लेखक | प्रमुख रचना / योगदान |
|---|---|
| कालिदास | अभिज्ञानशाकुन्तलम्, मेघदूतम्, रघुवंशम्, कुमारसम्भवम्, मालविकाग्निमित्रम्, विक्रमोर्वशीयम् |
| विशाखदत्त | मुद्राराक्षस, देवीचन्द्रगुप्तम् |
| शूद्रक | मृच्छकटिकम् |
| अमरसिंह | अमरकोश (संस्कृत शब्दकोश) |
| आर्यभट | आर्यभटीय (499 ई.) — पृथ्वी का अपनी धुरी पर घूमना, ग्रहण की वैज्ञानिक व्याख्या |
| वराहमिहिर | पंचसिद्धान्तिका, बृहत्संहिता |
| हरिषेण | प्रयाग प्रशस्ति |
| दण्डी | दशकुमारचरित — दण्डी गुप्तोत्तर काल (लगभग 7वीं सदी) के लेखक हैं; REET 2024 में सही युग्म के रूप में |
| बुद्धदत्त | अभिधम्मावतार (पालि बौद्ध ग्रंथ) — इसे सिद्धसेन से जोड़ना गलत युग्म है |
सुमेलन वाले प्रश्नों के लिए यह सूची सबसे उपयोगी है।
प्रशासन, अर्थव्यवस्था, कला और मंदिर स्थापत्य
गुप्त शासक ‘महाराजाधिराज’, ‘परमभट्टारक’ जैसी बड़ी उपाधियाँ धारण करते थे। साम्राज्य प्रांतों (भुक्ति) और जिलों (विषय) में बँटा था। ब्राह्मणों और धार्मिक संस्थाओं को भूमि-दान (अग्रहार) देने की परम्परा बढ़ी, जिसके साक्ष्य ताम्रपत्रों में मिलते हैं। गुप्तों ने बड़ी संख्या में सोने के सिक्के चलाए, जिन्हें ‘दीनार’ कहा जाता था।
गुप्तकाल को भारतीय मंदिर-स्थापत्य की शुरुआत का काल माना जाता है। देवगढ़ (ललितपुर, उत्तर प्रदेश) का दशावतार मंदिर ऊँचे चबूतरे (जगती) पर बना है और शिखर वाले मंदिरों का प्रारम्भिक उदाहरण माना जाता है; इसकी दीवारों पर गजेन्द्र मोक्ष, नर-नारायण तपस्या और शेषशायी विष्णु के फलक हैं। भितरगाँव (कानपुर) का ईंटों से बना मंदिर, भूमरा का शिव मंदिर, नचना-कुठार का पार्वती मंदिर और तिगवाँ का विष्णु मंदिर भी इसी काल के हैं।
इस काल में भारत का दक्षिण-पूर्व एशिया से व्यापारिक और सांस्कृतिक संपर्क बढ़ा। प्राचीन भारतीय साहित्य में जावा को ‘यवद्वीप’ और दक्षिण-पूर्व एशिया के समृद्ध क्षेत्रों को ‘सुवर्णद्वीप’ कहा गया।
राजस्थान से जुड़ाव
- बयाना निधि (Bayana Hoard)
- 17 फरवरी 1946 को भरतपुर रियासत के बयाना क्षेत्र के नगला छेला गाँव में गुप्तकालीन सोने के सिक्कों का विशाल भंडार मिला; सरकार को 1,821 सिक्के प्राप्त हुए।[स्रोत 3]
- बयाना निधि के शासक
- चन्द्रगुप्त प्रथम, समुद्रगुप्त, चन्द्रगुप्त द्वितीय, कुमारगुप्त प्रथम और स्कन्दगुप्त के सिक्के।[स्रोत 3]
- पश्चिमी गण-राज्य
- प्रयाग प्रशस्ति में समुद्रगुप्त की अधीनता मानने वाले मालव, आर्जुनायन, यौधेय आदि गणों का उल्लेख है।[स्रोत 4]
बच्चों को कैसे पढ़ाएँ
कक्षा-गतिविधि (कक्षा 6–7)
‘अभिलेख पढ़ो, इतिहास बनाओ’: प्रयाग प्रशस्ति का सरल हिंदी अंश बच्चों को दें और समूहों से पूछें — इसमें राजा के बारे में क्या बताया गया है, और क्या छूट गया होगा? इससे बच्चे स्रोत के प्रति आलोचनात्मक सोच सीखते हैं।
शिक्षण सहायक सामग्री
भारत का रेखा-मानचित्र जिसमें आर्यावर्त, दक्षिणापथ और सीमावर्ती गणों को अलग रंग से दिखाएँ; सिक्कों और देवगढ़ मंदिर के चित्रों की फ्लैश-कार्ड; वंश-वृक्ष चार्ट।
सामान्य भ्रांतियाँ
(1) बच्चे मौर्य चन्द्रगुप्त और गुप्त चन्द्रगुप्त को एक समझ लेते हैं — दोनों के बीच लगभग छह शताब्दियों का अंतर है। (2) ‘प्रशस्ति’ को निष्पक्ष इतिहास मान लेना। (3) ‘स्वर्ण युग’ का अर्थ यह मान लेना कि सभी वर्गों का जीवन समृद्ध था।
आकलन का विचार
‘लेखक–ग्रंथ’ जोड़ी मिलाओ खेल और एक खुला प्रश्न: ‘यदि आप हरिषेण होते तो समुद्रगुप्त की किस बात पर प्रशस्ति लिखते और क्यों?’ — इससे ज्ञान और विश्लेषण दोनों परखे जाते हैं।
याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप
शासकों का क्रम याद करें: ‘श्री-घटो-चन्द्र-समुद्र-चन्द्र-कुमार-स्कन्द’। और जोड़ियाँ: समुद्र → हरिषेण (प्रयाग), चन्द्र द्वितीय → फाह्यान + प्रभावती (वाकाटक), कुमार → नालंदा, स्कन्द → हूण + सुदर्शन झील। कथन-आधारित प्रश्न में ‘पहला’, ‘केवल’ जैसे शब्दों पर रुककर तथ्य जाँचें।
REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)
प्रश्न 103
‘जावा’ का प्राचीन नाम क्या था ?
- Aयवद्वीप
- Bसुवर्णद्वीप
- Cवरुणद्वीप
- Dलक्षद्वीप
व्याख्या
प्राचीन भारतीय साहित्य में जावा द्वीप को 'यवद्वीप' कहा गया है (रामायण में भी यवद्वीप का उल्लेख है)। सुवर्णद्वीप सामान्यतः सुमात्रा/दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए प्रयुक्त नाम है। अतः सही उत्तर यवद्वीप है।
प्रश्न 107
देवगढ के दशावतार मंदिर के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. यह मंदिर उत्तर प्रदेश राज्य में स्थित है । 2. मंदिर का निर्माण एक ऊंचे एवं चौड़े चबूतरे पर किया गया है । 3. यह मंदिर शिखर मंदिर का पहला उदाहरण है । उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं ?
- Aकेवल 1
- B1, 2
- C1, 3
- D1,2,3
व्याख्या
देवगढ़ का दशावतार मंदिर उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में स्थित गुप्तकालीन मंदिर है (कथन 1 सही)। यह एक ऊँचे और चौड़े चबूतरे (जगती) पर बना है (कथन 2 सही)। इसे शिखर वाले मंदिर का प्रारम्भिक/पहला उदाहरण माना जाता है (कथन 3 सही)। अतः तीनों कथन सही हैं और उत्तर (D) है।
प्रश्न 125
इलाहाबाद स्तंभ अभिलेख के नाम से प्रसिद्ध ‘प्रयाग प्रशस्ति’ की रचना किसने की थी ?
- Aहरिषेण
- Bकालिदास
- Cशूद्रक
- Dभास
व्याख्या
'प्रयाग प्रशस्ति' (इलाहाबाद स्तंभ अभिलेख) की रचना समुद्रगुप्त के दरबारी कवि हरिषेण ने की थी। इसमें समुद्रगुप्त की विजयों और गुणों का वर्णन है। यह लेख उसी अशोक स्तंभ पर उत्कीर्ण है। कालिदास, शूद्रक और भास संस्कृत नाटककार/कवि थे।
प्रश्न 97
चोलयुगीन ‘कलिंगट्टुपरानी’ नामक ग्रंथ किसने लिखा ?
- Aकम्बन
- Bतिरुतक्कदेवर
- Cजयन्गोन्दार
- Dपुलगेन्दि
व्याख्या
‘कलिंगत्तुपरणि’ तमिल ग्रंथ की रचना जयन्गोन्दार (जयंगोंडार) ने की थी, जो चोल शासक कुलोत्तुंग प्रथम के दरबारी कवि थे। इसमें कुलोत्तुंग प्रथम के कलिंग अभियान का वर्णन है। कम्बन ने तमिल ‘रामावतारम्’ (कम्ब रामायण), तिरुतक्कदेवर ने ‘जीवक चिन्तामणि’ तथा पुगलेन्दि ने ‘नलवेम्बा’ की रचना की।
प्रश्न 107
चन्द्रगुप्त द्वितीय ने अपनी पुत्री प्रभावती गुप्त का विवाह किस शासक के साथ किया था ?
- Aरुद्रसेन प्रथम
- Bपृथ्वीसेन प्रथम
- Cविन्ध्यशक्ति द्वितीय
- Dरुद्रसेन द्वितीय
व्याख्या
चन्द्रगुप्त द्वितीय ने अपनी पुत्री प्रभावती गुप्त का विवाह वाकाटक शासक रुद्रसेन द्वितीय से किया था। इस वैवाहिक संबंध से दक्कन में गुप्तों का प्रभाव बढ़ा; रुद्रसेन द्वितीय की मृत्यु के बाद प्रभावती गुप्त ने अपने अल्पवयस्क पुत्रों की संरक्षिका के रूप में शासन संभाला। रुद्रसेन प्रथम और पृथ्वीसेन प्रथम पहले के वाकाटक शासक थे।
प्रश्न 140
निम्नलिखित में से कौन-सा एक युग्म सही सुमेलित नहीं हैं ? लेखक – ग्रन्थ
- Aदण्डिन – दशकुमारचरित
- Bविशाखदत्त – देवीचन्द्रगुप्तं
- Cकालिदास – कुमार सम्भव
- Dसिद्धसेन – अभिधम्मावतार
व्याख्या
‘अभिधम्मावतार’ पालि भाषा का बौद्ध ग्रंथ है, जिसकी रचना बुद्धदत्त ने की; जैन आचार्य सिद्धसेन दिवाकर की प्रसिद्ध रचना ‘न्यायावतार’ है। इसलिए युग्म (D) सुमेलित नहीं है। दण्डी – दशकुमारचरित, विशाखदत्त – देवीचन्द्रगुप्तम् तथा कालिदास – कुमारसम्भव सही युग्म हैं।
प्रश्न 147
‘नर-नारायण तपस्यां’ और ‘गजेन्द्र मोक्ष’ का दृश्य गुप्तकालीन किस मंदिर में दर्शाया गया हैं ?
- Aदेवगढ़ का दशावतार मंदिर
- Bभूमरा का शिव मंदिर
- Cतिगवां का विष्णु मंदिर
- Dनचना-कुठार का पार्वती मंदिर
व्याख्या
गुप्तकालीन देवगढ़ (ललितपुर, उत्तर प्रदेश) के दशावतार मंदिर की दीवारों पर ‘गजेन्द्र मोक्ष’, ‘नर-नारायण तपस्या’ और ‘शेषशायी विष्णु’ के प्रसिद्ध प्रस्तर फलक उत्कीर्ण हैं। यह मंदिर शिखर युक्त प्रारंभिक मंदिरों में गिना जाता है। भूमरा का शिव मंदिर, तिगवां का विष्णु मंदिर और नचना-कुठार का पार्वती मंदिर भी गुप्तकालीन हैं, पर ये दृश्य देवगढ़ से संबंधित हैं।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
गुप्त वंश में ‘महाराजाधिराज’ उपाधि धारण करने वाला पहला शासक कौन था?
- Aश्रीगुप्त
- Bघटोत्कच
- Cचन्द्रगुप्त प्रथम
- Dसमुद्रगुप्त
व्याख्या
श्रीगुप्त और घटोत्कच केवल ‘महाराज’ कहलाते थे। चन्द्रगुप्त प्रथम ने ‘महाराजाधिराज’ की बड़ी उपाधि ली, जो वंश की बढ़ती शक्ति का संकेत है।
प्रश्न 2
चन्द्रगुप्त प्रथम ने किस वंश की राजकुमारी कुमारदेवी से विवाह किया था?
- Aवाकाटक
- Bलिच्छवि
- Cकुषाण
- Dशक
व्याख्या
कुमारदेवी लिच्छवि वंश की थीं। इस विवाह से गुप्तों की प्रतिष्ठा और शक्ति बढ़ी। वाकाटकों से वैवाहिक संबंध चन्द्रगुप्त द्वितीय के समय बना।
प्रश्न 3
‘भारत का नेपोलियन’ किस गुप्त शासक को कहा गया है?
- Aचन्द्रगुप्त द्वितीय
- Bस्कन्दगुप्त
- Cकुमारगुप्त प्रथम
- Dसमुद्रगुप्त
व्याख्या
इतिहासकार वी.ए. स्मिथ ने समुद्रगुप्त की व्यापक सैन्य विजयों के कारण उन्हें ‘भारत का नेपोलियन’ कहा। उनकी विजयों का वर्णन प्रयाग प्रशस्ति में है।
प्रश्न 4
चीनी यात्री फाह्यान किस गुप्त शासक के शासनकाल में भारत आया था?
- Aसमुद्रगुप्त
- Bचन्द्रगुप्त द्वितीय
- Cकुमारगुप्त प्रथम
- Dस्कन्दगुप्त
व्याख्या
फाह्यान बौद्ध ग्रंथों की खोज में चन्द्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) के समय भारत आया था। ह्वेनसांग बहुत बाद में हर्षवर्धन के समय आया।
प्रश्न 5
सुदर्शन झील की मरम्मत का उल्लेख स्कन्दगुप्त के किस अभिलेख में मिलता है?
- Aभितरी स्तंभ लेख
- Bजूनागढ़ अभिलेख
- Cमहरौली लौह स्तंभ लेख
- Dप्रयाग प्रशस्ति
व्याख्या
स्कन्दगुप्त के जूनागढ़ अभिलेख में बताया गया है कि सुदर्शन झील की मरम्मत गवर्नर पर्णदत्त के पुत्र चक्रपालित ने करवाई। भितरी स्तंभ लेख हूणों से संघर्ष के लिए प्रसिद्ध है।
प्रश्न 6
निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?
- Aशूद्रक – मृच्छकटिकम्
- Bअमरसिंह – अमरकोश
- Cविशाखदत्त – मेघदूतम्
- Dआर्यभट – आर्यभटीय
व्याख्या
मेघदूतम् कालिदास की रचना है। विशाखदत्त ने मुद्राराक्षस और देवीचन्द्रगुप्तम् लिखे। शेष तीनों युग्म सही हैं।
प्रश्न 7
1946 में मिली ‘बयाना निधि’ के संबंध में कौन-सा कथन सही है?
- Aयह मौर्यकालीन चाँदी के सिक्कों का भंडार है
- Bयह भरतपुर क्षेत्र में मिला गुप्तकालीन सोने के सिक्कों का भंडार है
- Cयह उदयपुर में मिला कुषाणकालीन ताम्र-सिक्कों का भंडार है
- Dयह जयपुर में मिला मुगलकालीन सिक्कों का भंडार है
व्याख्या
बयाना निधि 1946 में भरतपुर रियासत के बयाना क्षेत्र (नगला छेला) में मिली थी। इसमें गुप्त शासकों के सोने के सिक्के थे, जिनमें से 1,821 सिक्के सरकार को प्राप्त हुए।
प्रश्न 8
नालंदा महाविहार के संस्थापक के रूप में विद्वान किस गुप्त शासक की पहचान करते हैं?
- Aकुमारगुप्त प्रथम
- Bसमुद्रगुप्त
- Cश्रीगुप्त
- Dचन्द्रगुप्त प्रथम
व्याख्या
ह्वेनसांग ने नालंदा के संस्थापक का नाम ‘शक्रादित्य’ बताया है। विद्वान उपाधि और समय के आधार पर शक्रादित्य को कुमारगुप्त प्रथम मानते हैं।
प्रश्न 9
कक्षा 6 में प्रयाग प्रशस्ति पढ़ाते समय एक छात्र कहता है, ‘इसमें जो लिखा है वह पूरा सच है।’ शिक्षक की सबसे उपयुक्त प्रतिक्रिया क्या होगी?
- Aछात्र की बात को सही मानकर आगे बढ़ जाना
- Bछात्र को डाँटकर चुप करा देना
- Cबच्चों से चर्चा करवाना कि प्रशस्ति किसने, किसके लिए लिखी और उसमें क्या छूट सकता है
- Dप्रशस्ति को पाठ्यक्रम से हटा देना
व्याख्या
प्रशस्ति प्रशंसा-लेख होती है, इसलिए स्रोत के लेखक और उद्देश्य पर चर्चा से बच्चों में आलोचनात्मक सोच विकसित होती है। यही सामाजिक विज्ञान शिक्षण का लक्ष्य है।
प्रश्न 10
गुप्तकालीन मंदिर-स्थापत्य को समझाने के लिए कक्षा 7 में सबसे प्रभावी शिक्षण सामग्री कौन-सी होगी?
- Aकेवल पाठ्यपुस्तक का वाचन
- Bदेवगढ़ और भितरगाँव मंदिरों के चित्र/मॉडल की तुलना कर चबूतरा, गर्भगृह व शिखर पहचानना
- Cगुप्त शासकों के नामों का श्रुतलेख
- Dमानचित्र पर नदियों के नाम भरवाना
व्याख्या
स्थापत्य दृश्य विषय है; चित्रों या मॉडलों की तुलना से बच्चे मंदिर के भागों को स्वयं पहचानते हैं और समझ स्थायी बनती है। अन्य विकल्प इस अवधारणा से सीधे नहीं जुड़ते।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गुप्त साम्राज्य से REET में कितने प्रश्न आते हैं?+
प्रश्नों की संख्या तय नहीं है। REET 2024 लेवल-2 की दो पालियों में गुप्तकाल और उससे जुड़े सांस्कृतिक इतिहास से कुल 7 प्रश्न आए थे, इसलिए यह महत्वपूर्ण टॉपिक है।
प्रयाग प्रशस्ति किसने लिखी?+
समुद्रगुप्त के दरबारी कवि हरिषेण ने। यह इलाहाबाद (प्रयागराज) के उसी स्तंभ पर उत्कीर्ण है जिस पर अशोक का लेख है।
गुप्त संवत् किसने आरम्भ किया?+
गुप्त संवत् का आरम्भ 319–320 ई. में चन्द्रगुप्त प्रथम के शासनकाल से माना जाता है।
गुप्तकाल का सबसे बड़ा सिक्कों का भंडार कहाँ मिला?+
राजस्थान के भरतपुर जिले के बयाना क्षेत्र (नगला छेला) में 1946 में, जिसे बयाना निधि कहते हैं।
देवगढ़ का दशावतार मंदिर क्यों प्रसिद्ध है?+
यह ललितपुर (उ.प्र.) में स्थित गुप्तकालीन मंदिर है, जिसे शिखर वाले मंदिर का प्रारम्भिक उदाहरण माना जाता है; इसमें गजेन्द्र मोक्ष और नर-नारायण के फलक हैं।
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आधिकारिक स्रोत
बदलाव लॉग
- 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए