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REET L2 · सामाजिक अध्ययन

सामाजिक अध्ययन / सामाजिक विज्ञान की प्रकृति एवं उद्देश्य

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इस पेज में सामाजिक अध्ययन का अर्थ, उसकी प्रकृति और क्षेत्र, शिक्षण के उद्देश्य, अंतःविषयक दृष्टिकोण और NCF 2005 द्वारा सुझाए बदलावों को परीक्षा की दृष्टि से दिया गया है। Level 2 सामाजिक अध्ययन में शिक्षाशास्त्र के प्रश्न इसी समझ पर टिके होते हैं और REET 2024 में इस टॉपिक से 5 प्रश्न आए।

  • REET 2024 में 5 प्रश्न
  • शिक्षक-प्रशिक्षण स्तर
  • 7 मिनट पढ़ें
16 सितंबर 2026 को सत्यापित · स्रोत: राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 (NCERT)

REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

REET 2024 के 5 प्रश्न सिद्धांत-आधारित थे, तथ्य-आधारित नहीं: सामाजिक विज्ञान पढ़ने का मुख्य उद्देश्य (समाज व पर्यावरण को जानना, समझना और समायोजन), स्थानीय ज्ञान को पाठ्यचर्या में शामिल करने का कारण (वास्तविक जीवन से जोड़ना), अंतःविषयक दृष्टिकोण का महत्व (इतिहास को भूगोल के संदर्भ से जोड़ना), NCF 2005 का ज़ोर (ज्ञान को विद्यालय के बाहर के जीवन से जोड़ना) और उच्च प्राथमिक स्तर के अधिगम प्रतिफल पहचानना। सही उत्तर लगभग हमेशा वह होता है जो समझ, जीवन से जुड़ाव और आलोचनात्मक चिंतन की बात करे — रटना, केवल पाठ्यपुस्तक या 'एकांत में' विषय पढ़ना वाले विकल्प गलत होते हैं।

सामाजिक अध्ययन का अर्थ

सामाजिक अध्ययन (Social Studies) वह विषय है जो मनुष्य का उसके सामाजिक, भौतिक और सांस्कृतिक पर्यावरण के साथ संबंध समझाता है — मनुष्य कैसे रहता है, समाज कैसे संगठित होता है, संसाधनों का उपयोग कैसे होता है और शासन कैसे चलता है। 'Social Studies' शब्द अमेरिका में बीसवीं सदी की शुरुआत में प्रचलित हुआ; 1916 में नेशनल एजुकेशन एसोसिएशन (NEA) की 'सामाजिक अध्ययन समिति' की रिपोर्ट से इसे औपचारिक मान्यता मिली।

सामाजिक विज्ञान (Social Sciences) — इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र — स्वतंत्र शोध-अनुशासन हैं। सामाजिक अध्ययन इन्हीं से सामग्री लेकर विद्यालय स्तर पर बच्चों की आयु और आवश्यकता के अनुसार समेकित (integrated) रूप में प्रस्तुत करता है। NCF 2005 ने 'सामाजिक विज्ञान' शब्द अपनाया और सुझाया कि उच्च प्राथमिक स्तर पर इसकी विषयवस्तु इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र से ली जाए, जबकि प्राथमिक स्तर (कक्षा 3–5) पर यह पर्यावरण अध्ययन (EVS) का हिस्सा है। NCF 2005 ने 'नागरिक शास्त्र' को 'राजनीति विज्ञान' के रूप में पुनर्गठित करने की बात भी कही।

सामाजिक अध्ययन की प्रकृति (विशेषताएँ)

विशेषताअर्थकक्षा का उदाहरण
अंतःविषयक / समन्वित (Interdisciplinary)विभिन्न सामाजिक विज्ञानों को जोड़कर एक समग्र समझहड़प्पा सभ्यता (इतिहास) को सिंधु नदी घाटी के भूगोल से जोड़ना
जीवन-केंद्रितविषयवस्तु बच्चे के परिवेश और दैनिक जीवन से जुड़ीग्राम पंचायत, स्थानीय बाज़ार, मोहल्ले का जल स्रोत
गत्यात्मक (Dynamic)समाज बदलता है, इसलिए विषयवस्तु भी बदलती रहती हैनई योजनाएँ, संविधान संशोधन, डिजिटल भुगतान
मूल्य-आधारितलोकतंत्र, समानता, न्याय, धर्मनिरपेक्षता, सहिष्णुता जैसे संवैधानिक मूल्यों का विकासलैंगिक समानता पर कक्षा चर्चा
बहु-दृष्टिकोण (Multiple perspectives)एक घटना को अलग-अलग समूहों — स्त्रियाँ, किसान, हाशिए के समुदाय — की दृष्टि से देखनाएक ही युद्ध को शासक और आम जनता की नज़र से
स्थानीय से वैश्विकपरिचित (निकट) से अपरिचित (दूर) की ओरअपना ज़िला → राजस्थान → भारत → विश्व

सामाजिक अध्ययन शिक्षण के उद्देश्य

सामाजिक अध्ययन पढ़ाने का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों को उनके समाज और पर्यावरण को जानने, समझने और उसके साथ समायोजन करने में सहायता देना है, ताकि वे जागरूक, ज़िम्मेदार और सक्रिय नागरिक बनें। इसके प्रमुख उद्देश्य हैं: (1) समाज, संस्कृति और संस्थाओं का ज्ञान व बोध; (2) लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों का विकास; (3) आलोचनात्मक चिंतन, प्रश्न पूछने और प्रमाणों को परखने की क्षमता; (4) मानचित्र पढ़ने, आँकड़ों की व्याख्या, समय-रेखा बनाने जैसे कौशल; (5) विविधता का सम्मान और राष्ट्रीय एकता; (6) सामाजिक समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता।

NCF 2005 के मुख्य सुझाव: सामाजिक विज्ञान को तथ्यों के ढेर की जगह अवधारणात्मक समझ के रूप में पढ़ाया जाए; ज्ञान को विद्यालय के बाहर के जीवन से जोड़ा जाए; स्थानीय ज्ञान और बच्चों के अनुभवों को कक्षा में स्थान मिले; लैंगिक न्याय और हाशिए के समूहों (जैसे अनुसूचित जाति-जनजाति) के दृष्टिकोण को शामिल किया जाए; पाठ्यपुस्तक को एकमात्र स्रोत न मानकर चर्चा, परियोजना और क्षेत्र-कार्य अपनाए जाएँ। अनुशासनों की पहचान बनी रहे, पर 'जल' जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर समेकन (integration) हो।

अधिगम प्रतिफल (Learning Outcomes): NCERT ने 2017 में प्रारंभिक स्तर के लिए कक्षावार अधिगम प्रतिफल जारी किए, जो बताते हैं कि कक्षा के अंत में विद्यार्थी क्या कर सकेगा। उच्च प्राथमिक सामाजिक विज्ञान के प्रतिफल क्रियात्मक और विश्लेषणात्मक होते हैं — जैसे विद्यार्थी तारों, ग्रहों और उपग्रहों में अंतर करता है; ग्रहण से जुड़े अंधविश्वासों को तर्क से परखता है; विभिन्न जलवायु और स्थलरूपों में पादप-जंतुओं की विविधता के कारण बताता है। परीक्षा में प्रतिफल पहचानते समय देखें कि कथन कक्षा-स्तर और विश्लेषण-स्तर से मेल खाता है या नहीं।

सामाजिक अध्ययन शिक्षण की चुनौतियाँ और शिक्षक की भूमिका

व्यवहार में सामाजिक अध्ययन को अक्सर 'रटने वाला' और कम उपयोगी विषय मान लिया जाता है। इसके कारण हैं — तिथियों, नामों और परिभाषाओं पर टिका मूल्यांकन, केवल पाठ्यपुस्तक का सस्वर वाचन, और बच्चों के अनुभवों से कटी विषयवस्तु। नतीजा यह होता है कि विद्यार्थी परीक्षा के बाद सब भूल जाते हैं और विषय से कोई जुड़ाव नहीं बनता।

इसलिए सामाजिक अध्ययन के शिक्षक की भूमिका केवल सूचना देने वाले की नहीं, बल्कि सुविधादाता (facilitator) की है। शिक्षक को निष्पक्ष रहकर विवादित मुद्दों पर स्वस्थ चर्चा करानी चाहिए, बच्चों के प्रश्नों को प्रोत्साहित करना चाहिए, स्थानीय उदाहरणों और स्रोतों का उपयोग करना चाहिए, और मूल्यांकन में 'क्यों' व 'कैसे' वाले प्रश्न रखने चाहिए। कक्षा में विविध पृष्ठभूमि के बच्चों के अनुभवों को सम्मान देना भी उतना ही ज़रूरी है, क्योंकि यही विविधता सामाजिक अध्ययन की सबसे जीवंत पाठ्य-सामग्री है।

कक्षा में इसका उपयोग: उद्देश्य से गतिविधि तक

सिद्धांतअपनाएँबचें
स्थानीय ज्ञान'हमारे गाँव की बावड़ी का इतिहास' — बुज़ुर्गों से बातचीतकेवल पुस्तक के दूर-दराज़ उदाहरण
अंतःविषयक समझराजस्थान के मरुस्थल (भूगोल) को वहाँ के पहनावे, भोजन, व्यवसाय (अर्थशास्त्र-संस्कृति) से जोड़नाइतिहास, भूगोल, राजनीति को अलग-अलग खानों में रटाना
आलोचनात्मक चिंतन'ग्रहण पर प्रचलित मान्यताओं को वैज्ञानिक तर्क से परखो' जैसे प्रश्नतिथियों और नामों वाली सूचियाँ कंठस्थ कराना
लोकतांत्रिक मूल्यकक्षा में बाल-संसद, नियम बनाने में विद्यार्थियों की भागीदारीशिक्षक द्वारा एकतरफ़ा निर्णय

याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप

NCF 2005 के सामाजिक विज्ञान प्रश्नों में 'जीवन से जोड़ो, समझो, सवाल करो' वाला विकल्प चुनें। 'केवल', 'रटना', 'कंठस्थ', 'एकांत में', 'पूरी तरह पाठ्यपुस्तक' जैसे शब्द वाले विकल्प लगभग हमेशा गलत होते हैं।

REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)

प्रश्न 94

स्थानीय ज्ञान को सामाजिक विज्ञान पाठ्यचर्या में क्यों शामिल किया जाना चाहिए ?

  1. Aपरीक्षाओं के लिए स्थानीय तथ्यों और आंकड़ों को याद करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए
  2. Bकेवल एक विशेष समुदाय को परंपराओं पर ध्यान केन्द्रित करने के लिए
  3. Cपाठ्यचर्या को छात्रों के वास्तविक जीवन के परिवेश से जोड़ने और सीखने को सार्थक बनाने के लिए
  4. Dपाठ्यपुस्तकों को पूरी तरह से सामुदायिक चर्चा में बदलने के लिए

व्याख्या

सामाजिक विज्ञान में स्थानीय ज्ञान शामिल करने का उद्देश्य पढ़ाई को बच्चों के आसपास के वास्तविक परिवेश और अनुभवों से जोड़ना है, जिससे सीखना सार्थक और रोचक बने (NCF 2005 का भी यही सुझाव है)। केवल तथ्य रटाना (A), किसी एक समुदाय तक सीमित रहना (B) या पाठ्यपुस्तकों को पूरी तरह हटाना (D) इसका उद्देश्य नहीं है।

प्रश्न 150

सामाजिक विज्ञानों का अध्ययन करने का मुख्य उद्देश्य क्या है ?

  1. Aशारीरिक कौशल में सुधार करना
  2. Bछात्रों को उनके समाज और पर्यावरण को जानने, समझने और समायोजन करने में मदद करना
  3. Cगणितीय मॉडल विकसित करना
  4. Dयांत्रिक प्रणालियों का विश्लेषण करना

व्याख्या

सामाजिक विज्ञान के अध्ययन का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को अपने समाज, संस्कृति और पर्यावरण को जानने, समझने और उसमें समायोजन करने योग्य बनाना है, ताकि वे जिम्मेदार नागरिक बनें। शारीरिक कौशल, गणितीय मॉडल या यांत्रिक प्रणालियाँ अन्य विषयों के क्षेत्र हैं।

प्रश्न 121

सामाजिक विज्ञान शिक्षण में अंत: विषयक दृष्टिकोण क्यों महत्वपूर्ण है ?

  1. Aएकांत में विभिन्न विषयों को समझने की क्षमता को बढ़ाने के लिए
  2. Bऐतिहासिक घटनाओं को भौगोलिक संदर्भों से जोड़ने के लिए
  3. Cअध्ययन को विशिष्ट क्षेत्रों तक सीमित करने के लिए
  4. Dकेवल पाठ्यपुस्तक पर ध्यान केन्द्रित करने के लिए

व्याख्या

अंतःविषयक (interdisciplinary) दृष्टिकोण में विभिन्न विषयों को एक-दूसरे से जोड़कर पढ़ाया जाता है, जैसे ऐतिहासिक घटनाओं को उनके भौगोलिक संदर्भ (स्थान, जलवायु, संसाधन) के साथ समझना। इससे विद्यार्थियों की समझ समग्र और सार्थक बनती है। विषयों को अलग-थलग पढ़ाना, अध्ययन को सीमित करना या केवल पाठ्यपुस्तक पर निर्भर रहना इस दृष्टिकोण के विपरीत है।

प्रश्न 125

निम्नलिखित में से कौन-सा उच्च प्राथमिक कक्षाओं /स्तर पर सामाजिक विज्ञान को सीखने का प्रतिफल नहीं है ?

  1. Aविद्यार्थी तारों, ग्रहों एवं उपग्रहों में अंतर करते है
  2. Bग्रहण से संबंधित अंधविश्वासों को तर्कपूर्ण रूप से परखते है
  3. Cविभिन्न जलवायु एवं स्थलरूपों में पाये जाने वाले पादपों एवं जंतुओं की विभिन्नताओं के कारणों को बताते है
  4. Dविभिन्न भौतिक विशेषताओं, वनों के प्रकार, मौसम आदि को पहचानता है और उनका वर्णन करता है

व्याख्या

NCERT के उच्च प्राथमिक स्तर के सामाजिक विज्ञान (भूगोल) के सीखने के प्रतिफलों में तारों, ग्रहों और उपग्रहों में अंतर करना, ग्रहण से जुड़े अंधविश्वासों को तर्कपूर्ण ढंग से परखना तथा जलवायु व स्थलरूप के कारण पादप-जंतुओं की विविधता के कारण बताना जैसे प्रतिफल पढ़ाए जाते हैं। BSER की अंतिम कुंजी के अनुसार विकल्प (D) को इस स्तर के सामाजिक विज्ञान का प्रतिफल नहीं माना गया है, इसलिए उत्तर (D) है।

प्रश्न 127

राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF)–2005 सामाजिक विज्ञान शिक्षण में किस पर जोर देती है ?

  1. Aतथ्यों को कंठस्थ करने पर
  2. Bज्ञान को विद्यालय के बाहर के जीवन से जोड़ने पर
  3. Cपाठ्यपुस्तकों पर अत्यधिक निर्भरता
  4. Dरटने की विधियों पर ध्यान

व्याख्या

राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF) 2005 का प्रमुख मार्गदर्शक सिद्धान्त है — ज्ञान को विद्यालय के बाहर के जीवन से जोड़ना। सामाजिक विज्ञान शिक्षण में भी यह रटने, तथ्यों को कंठस्थ करने और पाठ्यपुस्तक पर अत्यधिक निर्भरता के स्थान पर बच्चों के अनुभवों और परिवेश से जुड़ी समझ विकसित करने पर बल देती है।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

NCF 2005 के अनुसार उच्च प्राथमिक स्तर पर सामाजिक विज्ञान की विषयवस्तु किन विषयों से ली जानी चाहिए?

  1. Aइतिहास, नागरिक शास्त्र और भूगोल
  2. Bइतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र
  3. Cपर्यावरण विज्ञान, इतिहास और भूगोल
  4. Dइतिहास, भूगोल, समाजशास्त्र और मनोविज्ञान

व्याख्या

NCF 2005 उच्च प्राथमिक स्तर के लिए इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र सुझाती है। उसने 'नागरिक शास्त्र' को राजनीति विज्ञान के रूप में पुनर्गठित करने की बात कही।

प्रश्न 2

कक्षा 7 के शिक्षक मुगल काल पढ़ाते समय आगरा और फ़तेहपुर सीकरी की भौगोलिक स्थिति को मानचित्र पर दिखाते हैं। यह किस दृष्टिकोण का उदाहरण है?

  1. Aविषय-केंद्रित पृथक दृष्टिकोण
  2. Bअंतःविषयक दृष्टिकोण
  3. Cव्याख्यान दृष्टिकोण
  4. Dपरीक्षा-केंद्रित दृष्टिकोण

व्याख्या

इतिहास की घटना को भूगोल के संदर्भ से जोड़ना अंतःविषयक दृष्टिकोण है, जिससे समग्र और गहरी समझ बनती है। पृथक दृष्टिकोण में विषय एक-दूसरे से अलग पढ़ाए जाते हैं।

प्रश्न 3

सामाजिक विज्ञान शिक्षण में 'बहु-दृष्टिकोण' (multiple perspectives) का अर्थ है—

  1. Aएक ही घटना को विभिन्न सामाजिक समूहों की दृष्टि से समझना
  2. Bहर प्रकरण के लिए कई पाठ्यपुस्तकें रटना
  3. Cप्रत्येक प्रश्न के कई सही उत्तर स्वीकार करना
  4. Dएक ही पाठ को कई बार पढ़ाना

व्याख्या

बहु-दृष्टिकोण का अर्थ है किसी घटना को शासक, किसान, स्त्रियों, हाशिए के समुदायों आदि की नज़र से देखना। NCF 2005 हाशिए के समूहों और स्त्रियों के दृष्टिकोण को शामिल करने पर ज़ोर देती है।

प्रश्न 4

'Social Studies' शब्द को औपचारिक मान्यता किस समिति की रिपोर्ट (1916) से मिली?

  1. Aकोठारी आयोग
  2. BNEA की सामाजिक अध्ययन समिति (अमेरिका)
  3. Cमुदालियर आयोग
  4. Dयशपाल समिति

व्याख्या

1916 में अमेरिका की नेशनल एजुकेशन एसोसिएशन की सामाजिक अध्ययन समिति की रिपोर्ट से यह शब्द औपचारिक रूप से स्थापित हुआ। अन्य विकल्प भारत के शिक्षा आयोग/समितियाँ हैं।

प्रश्न 5

सामाजिक विज्ञान की पाठ्यचर्या में स्थानीय ज्ञान को शामिल करने का सबसे उपयुक्त कारण है—

  1. Aस्थानीय आँकड़े रटवाकर अंक बढ़ाना
  2. Bपढ़ाई को बच्चों के वास्तविक परिवेश से जोड़कर सार्थक बनाना
  3. Cपाठ्यपुस्तक को हटा देना
  4. Dकेवल अपने समुदाय की परंपराएँ पढ़ाना

व्याख्या

स्थानीय ज्ञान बच्चे के अनुभव और परिवेश को कक्षा से जोड़ता है, जिससे सीखना सार्थक और रोचक होता है। रटना, पाठ्यपुस्तक हटाना या एक समुदाय तक सीमित रहना इसका उद्देश्य नहीं है।

प्रश्न 6

निम्नलिखित में से कौन-सी सामाजिक अध्ययन की प्रकृति की विशेषता नहीं है?

  1. Aयह गत्यात्मक है
  2. Bयह जीवन-केंद्रित है
  3. Cयह स्थिर और अपरिवर्तनीय तथ्यों का संग्रह है
  4. Dयह अंतःविषयक है

व्याख्या

समाज निरंतर बदलता है, इसलिए सामाजिक अध्ययन गत्यात्मक है, स्थिर तथ्यों का संग्रह नहीं। जीवन-केंद्रित और अंतःविषयक होना इसकी मूल विशेषताएँ हैं।

प्रश्न 7

कक्षा 8 में 'हाशियाकरण' पढ़ाते समय NCF 2005 की भावना के सबसे अनुरूप गतिविधि कौन-सी है?

  1. Aपरिभाषा लिखवाकर याद कराना
  2. Bविद्यार्थियों द्वारा अपने आसपास के वंचित समूहों की समस्याओं पर चर्चा और छोटा सर्वेक्षण
  3. Cकेवल पाठ का सस्वर वाचन
  4. Dप्रश्नोत्तर की कुंजी से अभ्यास

व्याख्या

NCF 2005 ज्ञान को विद्यालय के बाहर के जीवन से जोड़ने, चर्चा और आलोचनात्मक चिंतन पर ज़ोर देती है। स्थानीय सर्वेक्षण और चर्चा इसी के अनुरूप हैं; अन्य विकल्प रटने पर आधारित हैं।

प्रश्न 8

प्राथमिक स्तर (कक्षा 3–5) पर सामाजिक अध्ययन की विषयवस्तु किस रूप में पढ़ाई जाती है?

  1. Aअलग-अलग इतिहास और भूगोल विषय
  2. Bपर्यावरण अध्ययन (EVS) के भाग के रूप में
  3. Cराजनीति विज्ञान के रूप में
  4. Dअर्थशास्त्र के रूप में

व्याख्या

NCF 2005 के अनुसार कक्षा 3–5 में विज्ञान और सामाजिक विज्ञान की विषयवस्तु समेकित रूप से पर्यावरण अध्ययन (EVS) में पढ़ाई जाती है; अलग विषय उच्च प्राथमिक स्तर से शुरू होते हैं।

प्रश्न 9

'अपना ज़िला → राजस्थान → भारत → विश्व' क्रम में विषयवस्तु प्रस्तुत करना किस शिक्षण सूत्र पर आधारित है?

  1. Aअमूर्त से मूर्त
  2. Bज्ञात से अज्ञात
  3. Cसामान्य से विशिष्ट
  4. Dजटिल से सरल

व्याख्या

बच्चे के परिचित परिवेश (ज्ञात) से दूर के क्षेत्रों (अज्ञात) की ओर बढ़ना 'ज्ञात से अज्ञात' सूत्र है। अमूर्त से मूर्त और जटिल से सरल उल्टे और गलत सूत्र हैं।

प्रश्न 10

कक्षा में बाल-संसद का आयोजन सामाजिक विज्ञान के किस उद्देश्य की पूर्ति सबसे अधिक करता है?

  1. Aमानचित्र कौशल का विकास
  2. Bलोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक सहभागिता का विकास
  3. Cऐतिहासिक तिथियाँ याद करना
  4. Dआँकड़ों का गणितीय विश्लेषण

व्याख्या

बाल-संसद में विद्यार्थी चुनाव, चर्चा, निर्णय और ज़िम्मेदारी का अनुभव करते हैं, जिससे लोकतांत्रिक मूल्य और नागरिक सहभागिता विकसित होती है। अन्य उद्देश्य इस गतिविधि का मुख्य लक्ष्य नहीं हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सामाजिक अध्ययन और सामाजिक विज्ञान में क्या अंतर है?+

सामाजिक विज्ञान (इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान, अर्थशास्त्र आदि) स्वतंत्र शोध-अनुशासन हैं। सामाजिक अध्ययन इन्हीं से सामग्री लेकर विद्यालय स्तर पर बच्चों के लिए समेकित और सरल रूप में प्रस्तुत करता है।

NCF 2005 के अनुसार उच्च प्राथमिक स्तर पर सामाजिक विज्ञान में कौन-से विषय हैं?+

इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र। प्राथमिक स्तर (कक्षा 3–5) पर सामाजिक विषयवस्तु पर्यावरण अध्ययन (EVS) में शामिल है।

सामाजिक विज्ञान पढ़ाने का मुख्य उद्देश्य क्या है?+

विद्यार्थियों को उनके समाज और पर्यावरण को जानने, समझने और उसके साथ समायोजन करने में मदद करना, तथा उन्हें लोकतांत्रिक मूल्यों वाला जागरूक, सक्रिय नागरिक बनाना।

REET में सामाजिक अध्ययन की प्रकृति से कितने प्रश्न आते हैं?+

संख्या तय नहीं है, पर REET 2024 में Level 2 सामाजिक अध्ययन की पालियों में इस टॉपिक से 5 प्रश्न आए। ये NCF 2005, उद्देश्यों और अंतःविषयक दृष्टिकोण पर आधारित थे।

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आधिकारिक स्रोत

  1. राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 (NCERT)
  2. CBSE — Learning Framework: Social Science
  3. Social studies — इतिहास और 1916 की NEA समिति

बदलाव लॉग

  • 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए