सामाजिक अध्ययन में मूल्यांकन
मूल्यांकन के प्रकार, रूब्रिक्स और वस्तुनिष्ठ-निबंधात्मक परीक्षणों के गुण-दोष — इस पेज में सामाजिक अध्ययन शिक्षण के मूल्यांकन पक्ष को REET परीक्षा के नज़रिए से समझाया गया है। REET 2024 में इस टॉपिक से रूब्रिक्स के प्रकार, मूल्यांकन के तीन घटक और NCERT की 'परख' पहल जैसे सैद्धांतिक व समसामयिक प्रश्न पूछे गए।
- REET 2024 में 3 प्रश्न
- शिक्षक-प्रशिक्षण स्तर
- 9 मिनट पढ़ें
REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
REET 2024 में इस टॉपिक से रूब्रिक्स के दो मुख्य प्रकार (समग्र व विश्लेषणात्मक), मूल्यांकन प्रक्रिया के तीन परस्पर संबंधित घटक (उद्देश्य, शिक्षण अनुभव, मूल्यांकन) और NCERT की 'परख' पहल के अंतर्गत बने समग्र प्रगति कार्ड पर प्रश्न पूछे गए — यह दर्शाता है कि परीक्षा पारंपरिक मूल्यांकन सिद्धांत के साथ-साथ हालिया नीतिगत पहलों को भी जोड़कर पूछती है।
मूल्यांकन के प्रकार
शिक्षा में मूल्यांकन (Evaluation) मुख्यतः तीन उद्देश्यों से किया जाता है — निदानात्मक (Diagnostic), रचनात्मक/सतत (Formative) और योगात्मक (Summative)। निदानात्मक मूल्यांकन शिक्षण शुरू होने से पहले या बीच में छात्र की विशिष्ट कठिनाइयों व कमजोरियों का पता लगाने के लिए किया जाता है, ताकि उचित उपचारात्मक शिक्षण दिया जा सके। रचनात्मक मूल्यांकन शिक्षण-प्रक्रिया के दौरान लगातार होता है और छात्र व शिक्षक दोनों को तुरंत प्रतिपुष्टि देकर सुधार का अवसर देता है, जबकि योगात्मक मूल्यांकन किसी इकाई/सत्र के अंत में समग्र उपलब्धि मापने के लिए किया जाता है।
ब्लूम के अनुसार मूल्यांकन प्रक्रिया त्रिध्रुवीय (त्रिकोणीय) होती है, जिसके तीन परस्पर संबंधित घटक हैं — शैक्षिक उद्देश्य (objectives), शिक्षण अनुभव (learning experiences) और मूल्यांकन (evaluation)। उद्देश्य तय करते हैं कि छात्रों को कौन-से अनुभव दिए जाएँ, और मूल्यांकन यह जाँचता है कि निर्धारित उद्देश्य कितने प्राप्त हुए — तीनों एक-दूसरे से जुड़े हैं, अलग-अलग नहीं।
वस्तुनिष्ठ व निबंधात्मक परीक्षण: गुण-दोष
| परीक्षण प्रकार | प्रमुख गुण | प्रमुख दोष |
|---|---|---|
| वस्तुनिष्ठ परीक्षण (Objective test) | उच्च विश्वसनीयता व वैधता, व्यापक पाठ्यवस्तु कवरेज, अंकन में परीक्षक-प्रभाव नहीं | मौलिक चिंतन व अभिव्यक्ति क्षमता की जाँच सीमित, अनुमान का प्रभाव |
| निबंधात्मक परीक्षण (Essay test) | विचारों की स्वतंत्र अभिव्यक्ति, मौलिक चिंतन का आकलन | विश्वसनीयता व वैधता में कमी, सीमित पाठ्यवस्तु प्रतिनिधित्व, अंकन में व्यक्तिपरकता |
अच्छे मूल्यांकन की विशेषताएँ
- वैधता (Validity)
- परीक्षण वही मापे जो मापना उद्देश्य था
- विश्वसनीयता (Reliability)
- बार-बार प्रयोग करने पर समान परिणाम मिलें
- निरंतरता (Continuity)
- मूल्यांकन एक बार की घटना नहीं, बल्कि निरंतर प्रक्रिया हो
- वस्तुनिष्ठता व व्यापकता
- अंकन व्यक्तिगत पक्षपात से मुक्त हो और सम्पूर्ण पाठ्यवस्तु को समेटे
रूब्रिक्स और नई नीतिगत पहलें
रूब्रिक्स (मूल्यांकन मानदंड-तालिका) के दो मुख्य प्रकार हैं — समग्र (Holistic) रूब्रिक, जिसमें पूरे कार्य को एक समग्र स्तर/अंक दिया जाता है, और विश्लेषणात्मक (Analytic) रूब्रिक, जिसमें हर मानदंड (जैसे भाषा, तथ्यात्मक सटीकता, प्रस्तुतीकरण) का अलग-अलग मूल्यांकन किया जाता है। सामाजिक अध्ययन में परियोजना-कार्य व मानचित्र-कार्य के मूल्यांकन के लिए विश्लेषणात्मक रूब्रिक अधिक उपयोगी माना जाता है, क्योंकि यह छात्र को विशिष्ट सुधार-बिंदु बताता है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप NCERT ने 'परख' (PARAKH) नामक राष्ट्रीय आकलन केंद्र स्थापित किया है, जिसने आधारभूत स्तर (Foundational Stage) के लिए समग्र प्रगति कार्ड (Holistic Progress Card) विकसित किया है। यह कार्ड केवल अंकों के बजाय वर्णनात्मक फीडबैक के माध्यम से बच्चे के बहुआयामी विकास — जैसे संज्ञानात्मक, सामाजिक-भावनात्मक, शारीरिक व सृजनात्मक पक्ष — को दर्ज करता है, न कि केवल विषय-ज्ञान को।
सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE)
शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के बाद स्कूली शिक्षा में सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (Continuous and Comprehensive Evaluation, CCE) की अवधारणा अपनाई गई। इसमें 'सतत' का अर्थ है कि मूल्यांकन वर्ष भर नियमित अंतराल पर होता रहे, न कि केवल वर्ष के अंत में एक परीक्षा के रूप में; और 'व्यापक' का अर्थ है कि मूल्यांकन केवल शैक्षणिक (scholastic) पक्ष तक सीमित न रहकर सह-शैक्षणिक (co-scholastic) पक्षों — जैसे जीवन-कौशल, मनोवृत्ति, खेलकूद व सह-पाठ्यचर्या गतिविधियाँ — को भी शामिल करे।
सामाजिक अध्ययन में CCE लागू करते समय शिक्षक मानचित्र-कार्य, परियोजना, समूह-चर्चा और मौखिक प्रस्तुति जैसे विविध उपकरणों का प्रयोग करते हैं, ताकि छात्र के ज्ञान के साथ-साथ उसकी सामाजिक समझ, सहयोग और अभिव्यक्ति क्षमता का भी आकलन हो सके। इससे केवल याददाश्त पर निर्भर परंपरागत परीक्षा प्रणाली का दबाव कम होता है और अधिगम अधिक सर्वांगीण बनता है।
पोर्टफोलियो मूल्यांकन (छात्र के कार्यों का संचित संग्रह) और सहपाठी-मूल्यांकन (peer assessment) जैसी तकनीकें भी सामाजिक अध्ययन में उपयोगी मानी जाती हैं — पोर्टफोलियो से समय के साथ छात्र की प्रगति दिखती है, जबकि सहपाठी-मूल्यांकन से छात्रों में आलोचनात्मक सोच और आत्म-मूल्यांकन की क्षमता विकसित होती है। एक अच्छा प्रश्न-पत्र भी ज्ञान, समझ, अनुप्रयोग व विश्लेषण जैसे ब्लूम वर्गीकरण के विभिन्न स्तरों को संतुलित रूप से समेटता है, ताकि केवल तथ्य-स्मरण पर आधारित प्रश्न हावी न हों।
स्व-मूल्यांकन (self-assessment) भी एक महत्वपूर्ण उपकरण है, जिसमें छात्र स्वयं अपने कार्य की समीक्षा एक निर्धारित मानदंड-सूची के आधार पर करता है। इससे छात्र में जवाबदेही और आत्म-निर्भरता की भावना विकसित होती है, और शिक्षक को भी यह पता चलता है कि छात्र अपनी सीखने की प्रक्रिया को कितनी गहराई से समझ पा रहा है — यह रचनात्मक मूल्यांकन का ही एक विस्तारित रूप माना जाता है।
कुल मिलाकर, सामाजिक अध्ययन में मूल्यांकन का उद्देश्य केवल अंक देना नहीं, बल्कि यह जाँचना है कि छात्र इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र व अर्थशास्त्र की अवधारणाओं को वास्तविक जीवन से कितना जोड़ पा रहा है। इसलिए एक अच्छा शिक्षक निदानात्मक, रचनात्मक व योगात्मक — तीनों प्रकार के मूल्यांकन को सही समय पर, सही उद्देश्य के साथ प्रयोग करता है, न कि केवल वर्ष के अंत में एक परीक्षा पर निर्भर रहता है।
कक्षा में इसका उपयोग
| परिस्थिति | उपयुक्त मूल्यांकन उपकरण |
|---|---|
| पाठ शुरू करने से पहले छात्रों का पूर्व-ज्ञान जाँचना | निदानात्मक परीक्षण / मौखिक प्रश्नोत्तर |
| पाठ के दौरान समझ जाँचना | रचनात्मक (formative) मूल्यांकन — कक्षा-प्रश्न, त्वरित क्विज़ |
| इकाई/सत्र के अंत में उपलब्धि मापना | योगात्मक (summative) परीक्षण |
| मानचित्र-कार्य या परियोजना का मूल्यांकन | विश्लेषणात्मक रूब्रिक (अलग-अलग मानदंडों पर अंकन) |
| समग्र मौखिक प्रस्तुति का मूल्यांकन | समग्र (holistic) रूब्रिक |
| सह-शैक्षणिक पक्ष (जीवन-कौशल, सहयोग) का आकलन | अवलोकन-आधारित चेकलिस्ट (CCE की सह-शैक्षणिक श्रेणी) |
याद रखने की ट्रिक
'निदान पहले, उपचार बाद में' — निदानात्मक परीक्षण हमेशा उपचारात्मक शिक्षण से पहले होता है। रूब्रिक याद रखें: 'समग्र = एक अंक सबके लिए, विश्लेषणात्मक = अलग अंक हर मानदंड के लिए'। मूल्यांकन के तीन प्रकार याद रखने के लिए क्रम याद रखें — 'पहले निदान (पाठ से पहले), फिर रचना (पाठ के दौरान), अंत में योग (पाठ के बाद)' — यही निदानात्मक, रचनात्मक और योगात्मक मूल्यांकन का स्वाभाविक क्रम है।
REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)
प्रश्न 108
रूब्रिक्स के दो मुख्य प्रकार कौन-से है ?
- Aउद्देश्यपरक और व्यक्तिपरक रूब्रिक्स
- Bयोगात्मक और रचनात्मक रूब्रिक्स
- Cसमग्र और विश्लेषणात्मक रूब्रिक्स
- Dनिदानात्मक और मूल्यांकनात्मक रूब्रिक्स
व्याख्या
रूब्रिक्स (मूल्यांकन मानदंड-तालिका) के दो मुख्य प्रकार हैं – समग्र (holistic) रूब्रिक, जिसमें पूरे कार्य को एक समग्र अंक/स्तर दिया जाता है, और विश्लेषणात्मक (analytic) रूब्रिक, जिसमें हर मानदंड का अलग-अलग मूल्यांकन होता है। योगात्मक और रचनात्मक, मूल्यांकन के प्रकार हैं, रूब्रिक के नहीं।
प्रश्न 132
मूल्यांकन प्रक्रिया के तीन परस्पर संबंधित घटक कौन-से है ?
- Aउद्देश्य, संसाधन और उपकरण
- Bयोजना, क्रियान्वयन और उद्देश्य
- Cउद्देश्य, शिक्षण अनुभव और मूल्यांकन
- Dशिक्षण, परीक्षण और अधिगम
व्याख्या
ब्लूम के अनुसार मूल्यांकन प्रक्रिया त्रिध्रुवीय (triangular) है, जिसके तीन परस्पर सम्बंधित घटक हैं – शैक्षिक उद्देश्य, अधिगम/शिक्षण अनुभव और मूल्यांकन (व्यवहार परिवर्तन)। उद्देश्य तय करते हैं कि कौन-से अनुभव दिए जाएँ, और मूल्यांकन बताता है कि उद्देश्य कितने प्राप्त हुए।
प्रश्न 129
परख (एनसीईआरटी) द्वारा फाउंडेशनल स्टेज के विकसित किये गये समग्र प्रगति कार्ड में मापन एवं मूल्यांकन के कितने आयाम शामिल किये गये है ?
- Aतीन
- Bचार
- Cपाँच
- Dछ:
व्याख्या
परख (PARAKH), NCERT द्वारा फाउंडेशनल स्टेज के लिए विकसित समग्र प्रगति कार्ड (HPC) विकास के पाँच प्रमुख क्षेत्रों पर आधारित है — शारीरिक विकास, सामाजिक-भावनात्मक एवं नैतिक विकास, संज्ञानात्मक विकास, भाषा एवं साक्षरता विकास तथा सौंदर्यात्मक एवं सांस्कृतिक विकास। शिक्षक मार्गदर्शिका में इनके साथ 'सकारात्मक अधिगम आदतें' भी अलग से दी गई हैं, पर पाँच प्रमुख आयामों के आधार पर BSER की अंतिम कुंजी में उत्तर (C) पाँच माना गया है।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
शिक्षण शुरू होने से पहले छात्रों की कठिनाइयाँ पहचानने के लिए कौन-सा मूल्यांकन उपयुक्त है?
- Aयोगात्मक
- Bनिदानात्मक
- Cरचनात्मक
- Dआत्मगत
व्याख्या
निदानात्मक (Diagnostic) मूल्यांकन विशेष रूप से छात्र की सीखने की कठिनाइयों का पता लगाने के लिए किया जाता है।
प्रश्न 2
इकाई के अंत में छात्रों की समग्र उपलब्धि मापने वाला मूल्यांकन कहलाता है?
- Aनिदानात्मक
- Bरचनात्मक
- Cयोगात्मक
- Dसतत
व्याख्या
योगात्मक (Summative) मूल्यांकन किसी इकाई या सत्र के अंत में समग्र उपलब्धि मापने के लिए किया जाता है।
प्रश्न 3
रूब्रिक्स के दो मुख्य प्रकार कौन-से हैं?
- Aवस्तुनिष्ठ व व्यक्तिपरक
- Bसमग्र व विश्लेषणात्मक
- Cयोगात्मक व रचनात्मक
- Dनिदानात्मक व उपचारात्मक
व्याख्या
रूब्रिक्स के दो मुख्य प्रकार समग्र (holistic) और विश्लेषणात्मक (analytic) रूब्रिक हैं।
प्रश्न 4
वस्तुनिष्ठ परीक्षण का प्रमुख गुण क्या है?
- Aमौलिक चिंतन का पूर्ण आकलन
- Bउच्च विश्वसनीयता व वैधता
- Cअनुमान का कोई प्रभाव नहीं होता
- Dसीमित पाठ्यवस्तु कवरेज
व्याख्या
वस्तुनिष्ठ परीक्षण में अंकन पर परीक्षक का व्यक्तिगत प्रभाव नहीं पड़ता, इसलिए इसकी विश्वसनीयता व वैधता उच्च होती है।
प्रश्न 5
निबंधात्मक परीक्षा का मुख्य गुण क्या माना जाता है?
- Aउच्च विश्वसनीयता
- Bविचारों की स्वतंत्र अभिव्यक्ति
- Cवस्तुनिष्ठता
- Dतीव्र अंकन
व्याख्या
निबंधात्मक परीक्षा में विद्यार्थी अपने विचारों को स्वतंत्र रूप से व्यक्त कर सकता है — यह इसका मुख्य गुण है।
प्रश्न 6
निम्न में से कौन-सी अच्छे मूल्यांकन की विशेषता नहीं है?
- Aवैधता
- Bविश्वसनीयता
- Cसंकीर्णता
- Dनिरंतरता
व्याख्या
संकीर्णता (narrow mindedness) व्यापकता के विपरीत है, इसलिए यह अच्छे मूल्यांकन की विशेषता नहीं मानी जाती।
प्रश्न 7
ब्लूम के अनुसार मूल्यांकन प्रक्रिया के तीन परस्पर संबंधित घटक कौन-से हैं?
- Aउद्देश्य, संसाधन, उपकरण
- Bउद्देश्य, शिक्षण अनुभव, मूल्यांकन
- Cयोजना, क्रियान्वयन, समीक्षा
- Dशिक्षण, परीक्षण, अधिगम
व्याख्या
ब्लूम के अनुसार मूल्यांकन प्रक्रिया के तीन घटक शैक्षिक उद्देश्य, शिक्षण अनुभव और मूल्यांकन हैं।
प्रश्न 8
'परख' (PARAKH) संस्था किससे संबंधित है?
- Aउच्च शिक्षा नियमन
- Bराष्ट्रीय आकलन केंद्र (NCERT)
- Cशिक्षक भर्ती
- Dपाठ्यपुस्तक प्रकाशन
व्याख्या
'परख' NCERT द्वारा स्थापित राष्ट्रीय आकलन केंद्र है, जो मूल्यांकन ढाँचे व समग्र प्रगति कार्ड जैसे कार्य करता है।
प्रश्न 9
सामाजिक अध्ययन में मानचित्र-कार्य के मूल्यांकन के लिए सबसे उपयुक्त रूब्रिक कौन-सा है?
- Aसमग्र रूब्रिक
- Bविश्लेषणात्मक रूब्रिक
- Cकोई रूब्रिक नहीं
- Dकेवल मौखिक फीडबैक
व्याख्या
विश्लेषणात्मक रूब्रिक हर मानदंड (सटीकता, स्पष्टता, प्रस्तुतीकरण) को अलग-अलग अंकित करता है, जिससे छात्र को विशिष्ट सुधार-बिंदु मिलते हैं।
प्रश्न 10
एक शिक्षक चाहता है कि पाठ के दौरान ही छात्रों की समझ की तुरंत जाँच हो सके और सुधार का मौका मिले। इसके लिए सबसे उपयुक्त मूल्यांकन है?
- Aयोगात्मक मूल्यांकन
- Bरचनात्मक (formative) मूल्यांकन
- Cवार्षिक परीक्षा
- Dकेवल सत्र के अंत में निबंधात्मक परीक्षा
व्याख्या
रचनात्मक मूल्यांकन शिक्षण के दौरान निरंतर चलता है और तुरंत प्रतिपुष्टि देकर सुधार का अवसर देता है, जबकि योगात्मक मूल्यांकन सत्र के अंत में होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
REET में मूल्यांकन (Evaluation) से जुड़े कितने प्रश्न आते हैं?+
REET 2024 में इस टॉपिक से लगभग 2-3 प्रश्न पूछे गए, मुख्यतः रूब्रिक्स व मूल्यांकन के सिद्धांतों पर।
निदानात्मक और उपचारात्मक शिक्षण में क्या संबंध है?+
निदानात्मक परीक्षण कठिनाई की पहचान करता है, उसके बाद उपचारात्मक शिक्षण उस कमी को दूर करता है।
रूब्रिक्स के दो मुख्य प्रकार कौन-से हैं?+
समग्र (Holistic) और विश्लेषणात्मक (Analytic) रूब्रिक।
मूल्यांकन प्रक्रिया के तीन परस्पर संबंधित घटक क्या हैं?+
उद्देश्य, शिक्षण अनुभव और मूल्यांकन (ब्लूम के अनुसार)।
'परख' (PARAKH) क्या है?+
NCERT द्वारा स्थापित राष्ट्रीय आकलन केंद्र, जिसने आधारभूत स्तर के लिए समग्र प्रगति कार्ड विकसित किया है।
आगे पढ़ें
आधिकारिक स्रोत
बदलाव लॉग
- 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए