सिंधु घाटी सभ्यता — REET नोट्स (सामाजिक अध्ययन)
सिंधु घाटी सभ्यता (हड़प्पा सभ्यता) भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे पुरानी नगरीय सभ्यता थी, जिसकी नियोजित नगर-योजना आज भी विस्मित करती है। REET में इस टॉपिक से पुरातात्त्विक स्थलों की विशिष्ट संरचनाओं, उनकी खोज करने वालों और कथन-आधारित (सही/गलत) प्रश्नों पर गहराई से पूछा जाता है।
- REET 2024 में 3 प्रश्न
- कक्षा 6 स्तर
- 10 मिनट पढ़ें
REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
REET 2024 में स्थलों को उनकी विशिष्ट संरचना से मिलाने (बनावली-कालीबंगा-शोर्तुघई-धौलावीरा), किसी स्थल की खोज किसने की (कालीबंगा — अमलानन्द घोष) और बहु-कथन वाले सही/गलत प्रश्न पूछे गए, जिनमें से एक कथन में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के प्रथम महानिदेशक को लेकर जान-बूझकर भ्रम पैदा किया गया था। यानी यहाँ सामान्य 'कौन-सा स्थल कहाँ है' से आगे बढ़कर 'किसने खोजा', 'कब खोजा' और स्थल-विशेष की बारीक संरचना तक तैयारी करनी चाहिए। कक्षा 6 की पाठ्यपुस्तक में यह टॉपिक शुरुआती अध्यायों में आता है, इसलिए इसकी नींव मज़बूत होना आगे के इतिहास अध्यायों को समझने के लिए भी ज़रूरी है।
सभ्यता की बुनियादी जानकारी
- अन्य नाम
- हड़प्पा सभ्यता — क्योंकि हड़प्पा (पंजाब, पाकिस्तान) 1921 में सबसे पहले खोजा गया स्थल था, जिसकी खोज दयाराम साहनी ने की
- दूसरा प्रमुख स्थल
- मोहनजोदड़ो (सिंध, पाकिस्तान) — 1922 में आर.डी. बनर्जी द्वारा खोजा गया
- कालक्रम
- परिपक्व (mature) हड़प्पा सभ्यता लगभग 2600–1900 ईसा-पूर्व मानी जाती है
- लिपि
- चित्रात्मक लिपि, अब तक अपठित (undeciphered) — इसे 'बुस्ट्रोफेदन' शैली में दाएँ से बाएँ व बाएँ से दाएँ दोनों तरह लिखा मिलता है
- मुहरें (Seals)
- अधिकतर सेलखड़ी (स्टिएटाइट) पत्थर से बनी, जिन पर पशु-आकृतियाँ उकेरी गई हैं — इनमें 'एकश्रृंगी पशु' (unicorn) सबसे अधिक मिलता है
- बाट-माप (weights)
- 16 के गुणकों पर आधारित मानकीकृत बाट प्रणाली, जो व्यापार में एकरूपता दर्शाती है
- नगर-योजना
- ग्रिड पद्धति पर बसे नगर, ढकी हुई जल-निकासी (drainage) व्यवस्था, पक्की ईंटों का प्रयोग — यह शहरी नियोजन की दृष्टि से समकालीन विश्व में अद्वितीय था
- धातु व औज़ार
- ताँबे व काँसे (टिन मिलाकर) के औज़ार व बर्तन प्रचलित थे; लोहे का प्रयोग इस सभ्यता में नहीं मिलता
सभ्यता का भौगोलिक विस्तार
- उत्तर में
- मांडा (जम्मू-कश्मीर)
- दक्षिण में
- दाइमाबाद (महाराष्ट्र)
- पश्चिम में
- सुत्कागेनडोर (बलूचिस्तान, पाकिस्तान)
- पूर्व में
- आलमगीरपुर (उत्तर प्रदेश)
प्रमुख स्थल और उनकी विशिष्ट पहचान
| स्थल | वर्तमान स्थान | विशिष्ट पहचान |
|---|---|---|
| हड़प्पा | पंजाब (पाकिस्तान) | अन्न-भण्डार (granary), सबसे पहले खोजा गया स्थल |
| मोहनजोदड़ो | सिंध (पाकिस्तान) | विशाल स्नानागार (Great Bath), बड़ा अन्न-भण्डार |
| लोथल | गुजरात | गोदी-बाड़ा (dockyard), मनका-निर्माण उद्योग |
| धौलावीरा | गुजरात | जल-संग्रहण के विशाल जलाशय, अनोखा त्रि-स्तरीय नगर-विभाजन |
| कालीबंगा | राजस्थान (हनुमानगढ़) | जुते हुए खेत के साक्ष्य, अग्नि-वेदिकाएँ (fire altars) |
| बनावली | हरियाणा | मिट्टी से बना हल का खिलौना/प्रतिरूप |
| शोर्तुघई | अफ़गानिस्तान | सिंचाई नहरों के अवशेष, व्यापारिक चौकी |
REET 2024 में ठीक इसी तालिका के आधार पर बनावली-कालीबंगा-शोर्तुघई-धौलावीरा का मिलान पूछा गया था।
राजस्थान में सिंधु घाटी के प्रमाण
कालीबंगा (हनुमानगढ़ ज़िला) घग्गर नदी (प्राचीन सरस्वती) के सूखे तट पर स्थित है और यह राजस्थान का सबसे महत्त्वपूर्ण हड़प्पाकालीन स्थल है। इसकी सबसे पहले जानकारी 1952 में अमलानन्द घोष ने दी थी, जिसके बाद 1961-69 के बीच बी.बी. लाल व बी.के. थापर ने यहाँ विस्तृत उत्खनन किया। यहाँ से हल से जुते हुए खेत के प्रमाण और अग्नि-पूजा से जुड़ी वेदिकाएँ मिली हैं, जो इसे अन्य हड़प्पाई स्थलों से अलग बनाती हैं।
इसके अतिरिक्त राजस्थान में बालाथल (उदयपुर) और गणेश्वर (सीकर) जैसे स्थल भी महत्त्वपूर्ण हैं। गणेश्वर से मिले प्रचुर ताँबे के औज़ार यह दर्शाते हैं कि यह क्षेत्र हड़प्पा सभ्यता को ताँबा आपूर्ति करने वाला एक प्रमुख केंद्र रहा होगा, इसीलिए इसे 'गणेश्वर-जोधपुरा संस्कृति' भी कहा जाता है।
समाज, अर्थव्यवस्था और धर्म
सिंधु घाटी सभ्यता की अर्थव्यवस्था कृषि, पशुपालन, शिल्प (मनका-निर्माण, मुहर-निर्माण, कपड़ा-बुनाई) और व्यापार पर आधारित थी। मेसोपोटामिया (आधुनिक इराक) के साथ समुद्री व स्थल-मार्ग से व्यापारिक संबंध होने के प्रमाण मुहरों व अन्य वस्तुओं की खोज से मिलते हैं। बाट-माप की मानकीकृत प्रणाली और सुव्यवस्थित नगर-योजना यह दर्शाती है कि व्यापार व प्रशासन पर किसी सुनियोजित प्राधिकरण का नियंत्रण रहा होगा, हालाँकि किसी महल या राजसी भवन के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले — इसी कारण विद्वानों में इसके शासन-स्वरूप को लेकर आज भी बहस जारी है।
धार्मिक जीवन के बारे में जानकारी मुख्यतः मुहरों व मूर्तियों से मिलती है — मातृ-देवी (मातृशक्ति) की उपासना, वृक्ष-पूजा, पशु-पूजा (विशेषकर बैल) और एक योगी जैसी मुद्रा में बैठे पशुपति-सदृश देवता के चित्रण के प्रमाण मिलते हैं, जिन्हें कुछ विद्वान शिव के प्रारंभिक रूप से जोड़ते हैं। हड़प्पा में मिली शवाधान (burial) पद्धतियों से यह भी संकेत मिलता है कि इस सभ्यता में मृत्यु के बाद जीवन को लेकर कोई मान्यता रही होगी।
कुछ आम भ्रम, जिन्हें स्पष्ट रखें
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के प्रथम महानिदेशक अलेक्ज़ेंडर कनिंघम थे (1861 से), जॉन मार्शल नहीं — मार्शल 1902 में महानिदेशक बने और उन्हीं के कार्यकाल में हड़प्पा व मोहनजोदड़ो की खोज को 1924 में विश्व के सामने घोषित किया गया। दूसरा आम भ्रम मेसोपोटामिया के लेखों में उल्लिखित 'मेलुहा' शब्द को लेकर है — यह सिंधु क्षेत्र के लिए प्रयुक्त नाम माना जाता है, जिसे मेसोपोटामिया के अभिलेखों में नाविकों/समुद्री व्यापारियों की भूमि बताया गया है, 'देवताओं की भूमि' नहीं।
बच्चों को कैसे पढ़ाएँ
कक्षा गतिविधि (कक्षा 6)
मिट्टी या साबुन से मुहर जैसी आकृति बनवाकर उस पर कोई सरल पशु-चित्र उकेरने को कहना — इससे बच्चे सिंधु सभ्यता की मुहरों की अवधारणा को व्यावहारिक रूप से समझते हैं।
शिक्षण सहायक सामग्री
भारत के मानचित्र पर हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, लोथल, धौलावीरा और कालीबंगा को चिह्नित करवाकर सभ्यता के विस्तार को दृश्य रूप देना।
सामान्य ग़लतफ़हमी
बच्चे प्रायः सोचते हैं कि सिंधु घाटी की लिपि पढ़ी जा चुकी है — जबकि यह लिपि आज तक अपठित है। इसे स्पष्ट करना ज़रूरी है ताकि बच्चे तथ्य और अनुमान में अंतर समझें।
आकलन विचार
'स्थल और विशेषता जोड़ो' तालिका बनवाकर बच्चों से लोथल-गोदीबाड़ा, धौलावीरा-जलाशय, कालीबंगा-जुता खेत जैसे जोड़े मिलवाना — त्वरित व प्रभावी आकलन विधि, जिसके बाद कक्षा में ज़ोर से पढ़वाकर सामूहिक रूप से सही उत्तर पर चर्चा करना भी उपयोगी रहता है।
याद रखने की ट्रिक
स्थल-विशेषता याद रखने के लिए संक्षिप्त कोड बनाएँ — 'मो-स्ना' (मोहनजोदड़ो-स्नानागार), 'लो-गो' (लोथल-गोदीबाड़ा), 'ध-ज' (धौलावीरा-जलाशय), 'का-खे' (कालीबंगा-खेत)। और भौगोलिक विस्तार याद रखने के लिए दिशाओं को घुमाएँ: 'मांडा उत्तर, दाइमाबाद दक्षिण, सुत्कागेनडोर पश्चिम, आलमगीरपुर पूर्व' — जैसे कम्पास की चार दिशाओं में चार स्थल।
REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)
प्रश्न 119
सूची - I को सूची - II से सुमेलित कीजिये : सूची – I (पुरातात्त्विक स्थल) – सूची – II (संरचना) 1. बनावली – i. नहरों के अवशेष 2. कालीबंगा – ii. मिट्टी से बने हल के प्रतिरूप 3. शोर्तुघई – iii. जुते हुए खेत 4. धौलावीरा – iv. जलाशयों का प्रयोग नीचे दिये गये कूट का प्रयोग करके सही उत्तर का चयन कीजिए : 1 2 3 4
- Ai ii iii iv
- Biv iii ii i
- Cii iii iv i
- Dii iii i iv
व्याख्या
बनावली (हरियाणा) से मिट्टी के हल का खिलौना/प्रतिरूप मिला है (1-ii)। कालीबंगा (राजस्थान) से जुते हुए खेत के साक्ष्य मिले हैं (2-iii)। शोर्तुघई (अफगानिस्तान) से सिंचाई नहरों के अवशेष मिले हैं (3-i) और धौलावीरा (गुजरात) अपनी जल-प्रबंधन प्रणाली और जलाशयों के लिए प्रसिद्ध है (4-iv)। अतः सही कूट (D) ii, iii, i, iv है।
प्रश्न 129
कालीबंगा सभ्यता की खोज किसने की ?
- Aअमलानन्द घोष
- Bअक्षयकीर्ति व्यास
- Cरतन चन्द्र अग्रवाल
- Dविजय कुमार
व्याख्या
कालीबंगा (हनुमानगढ़, राजस्थान) की सबसे पहले जानकारी/खोज 1952 में अमलानन्द घोष ने दी थी। बाद में 1961-69 के बीच बी.बी. लाल और बी.के. थापर ने यहाँ विस्तृत उत्खनन किया। अतः सही उत्तर अमलानन्द घोष है।
प्रश्न 112
सिन्धु घाटी सभ्यता के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. इस सभ्यता में हड़प्पा सबसे पहले खोजा गया स्थल था । 2. भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण के पहले डायरेक्टर जॉन मार्शल थे । 3. मेसोपोटामिया के लेख मेलुहा को देवताओं का देश कहते हैं । उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं ?
- Aकेवल 2
- B1, 2, 3
- Cकेवल 1
- D1, 3
व्याख्या
कथन 1 सही है: 1921 में दयाराम साहनी द्वारा खोजा गया हड़प्पा इस सभ्यता का सबसे पहले खोजा गया स्थल है, इसीलिए इसे हड़प्पा सभ्यता भी कहते हैं। कथन 2 गलत है: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के पहले डायरेक्टर जनरल अलेक्ज़ेंडर कनिंघम थे; जॉन मार्शल बाद में (1902 से) महानिदेशक बने। कथन 3 गलत है: मेसोपोटामिया के लेखों में मेलुहा (संभवतः हड़प्पा क्षेत्र) को नाविकों/समुद्री व्यापारियों का देश बताया गया है, देवताओं का देश नहीं। अतः केवल कथन 1 सही है।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
सिंधु घाटी सभ्यता को 'हड़प्पा सभ्यता' क्यों कहा जाता है ?
- Aक्योंकि हड़प्पा सबसे बड़ा स्थल है
- Bक्योंकि हड़प्पा सबसे पहले खोजा गया स्थल था
- Cक्योंकि हड़प्पा राजधानी थी
- Dक्योंकि हड़प्पा से लिपि पढ़ी गई
व्याख्या
1921 में दयाराम साहनी द्वारा खोजा गया हड़प्पा इस सभ्यता का सबसे पहले खोजा गया स्थल था, इसीलिए पुरातत्वविद इसे 'हड़प्पा सभ्यता' भी कहते हैं।
प्रश्न 2
मोहनजोदड़ो में स्थित 'विशाल स्नानागार' (Great Bath) किस उद्देश्य से जुड़ा माना जाता है ?
- Aव्यापारिक लेन-देन
- Bधार्मिक/सामुदायिक स्नान अनुष्ठान
- Cअन्न भण्डारण
- Dसैन्य प्रशिक्षण
व्याख्या
मोहनजोदड़ो का विशाल स्नानागार पक्की ईंटों व जलरोधी परत से बना एक बड़ा जलाशय है, जिसे विद्वान धार्मिक या सामुदायिक स्नान-अनुष्ठान से जुड़ा मानते हैं, न कि सामान्य दैनिक स्नान के लिए।
प्रश्न 3
सिंधु घाटी सभ्यता का कौन-सा स्थल 'गोदी-बाड़ा' (dockyard) के लिए प्रसिद्ध है ?
- Aकालीबंगा
- Bबनावली
- Cलोथल
- Dहड़प्पा
व्याख्या
गुजरात में स्थित लोथल अपने गोदी-बाड़े (dockyard) के लिए प्रसिद्ध है, जो समुद्री व्यापार का प्रमाण देता है। यह मनका-निर्माण उद्योग के लिए भी जाना जाता है।
प्रश्न 4
राजस्थान का कालीबंगा स्थल किस नदी के तट पर स्थित है ?
- Aलूनी
- Bघग्गर (प्राचीन सरस्वती)
- Cबनास
- Dचम्बल
व्याख्या
कालीबंगा (हनुमानगढ़) घग्गर नदी, जिसे प्राचीन सरस्वती नदी माना जाता है, के सूखे तट पर स्थित है। यहाँ से जुते हुए खेत व अग्नि-वेदिकाओं के प्रमाण मिले हैं।
प्रश्न 5
सिंधु घाटी सभ्यता का पूर्वी छोर किस स्थल तक माना जाता है ?
- Aमांडा
- Bदाइमाबाद
- Cआलमगीरपुर
- Dसुत्कागेनडोर
व्याख्या
आलमगीरपुर (उत्तर प्रदेश) सिंधु घाटी सभ्यता का पूर्वी छोर माना जाता है। मांडा उत्तरी, दाइमाबाद दक्षिणी और सुत्कागेनडोर पश्चिमी छोर पर स्थित हैं।
प्रश्न 6
सिंधु घाटी सभ्यता की मुहरों पर सबसे अधिक किस पशु का चित्रण मिलता है ?
- Aहाथी
- Bबैल
- Cएकश्रृंगी पशु (unicorn)
- Dबाघ
व्याख्या
सिंधु घाटी सभ्यता की मुहरों पर सबसे अधिक बार 'एकश्रृंगी पशु' (unicorn जैसी आकृति) का चित्रण मिलता है, जो इस सभ्यता की सबसे विशिष्ट कलात्मक पहचान है।
प्रश्न 7
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के प्रथम महानिदेशक कौन थे ?
- Aजॉन मार्शल
- Bअलेक्ज़ेंडर कनिंघम
- Cआर.डी. बनर्जी
- Dमॉर्टिमर व्हीलर
व्याख्या
अलेक्ज़ेंडर कनिंघम भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के प्रथम महानिदेशक थे (1861 से)। जॉन मार्शल बाद में 1902 में महानिदेशक बने, जिनके कार्यकाल में हड़प्पा-मोहनजोदड़ो की खोज विश्व के सामने आई।
प्रश्न 8
एक शिक्षक कक्षा 6 में सिंधु घाटी सभ्यता पढ़ाते समय बच्चों से मिट्टी की मुहर जैसी आकृति बनवाकर उस पर पशु-चित्र उकेरने को कहता है। यह गतिविधि किस उद्देश्य के लिए उपयुक्त है ?
- Aकेवल कला अभ्यास के लिए
- Bअमूर्त ऐतिहासिक अवधारणा को अनुभव द्वारा समझाने के लिए
- Cपरीक्षा से बचने के लिए
- Dसमय व्यतीत करने के लिए
व्याख्या
हाथों से बनाई गई गतिविधियाँ (hands-on activities) अमूर्त ऐतिहासिक अवधारणाओं — जैसे प्राचीन मुहरों का उपयोग — को बच्चों के लिए ठोस अनुभव में बदल देती हैं, जिससे समझ गहरी और स्थायी बनती है।
प्रश्न 9
धौलावीरा किस राज्य में स्थित है और किस विशेषता के लिए प्रसिद्ध है ?
- Aराजस्थान — जुता हुआ खेत
- Bगुजरात — जल-संग्रहण के विशाल जलाशय
- Cहरियाणा — मिट्टी का हल
- Dपंजाब — अन्न भण्डार
व्याख्या
धौलावीरा गुजरात में स्थित है और अपने जल-प्रबंधन तंत्र व विशाल जलाशयों के साथ-साथ अनोखे त्रि-स्तरीय नगर-विभाजन के लिए प्रसिद्ध है।
प्रश्न 10
सिंधु घाटी सभ्यता की लिपि के बारे में निम्न में से कौन-सा कथन सही है ?
- Aयह लिपि पूरी तरह पढ़ी जा चुकी है
- Bयह लिपि संस्कृत भाषा में है
- Cयह लिपि आज तक अपठित है
- Dयह लिपि ब्राह्मी लिपि से मिलती-जुलती है
व्याख्या
सिंधु घाटी सभ्यता की चित्रात्मक लिपि आज तक अपठित (undeciphered) है। इस कारण इस सभ्यता की भाषा, धर्म व शासन-व्यवस्था के बारे में हमारी जानकारी मुख्यतः पुरातात्त्विक साक्ष्यों पर निर्भर है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सिंधु घाटी सभ्यता से REET में कितने प्रश्न आते हैं?+
REET 2024 में इस टॉपिक से 3 प्रश्न पूछे गए थे। प्राचीन भारत के अध्यायों में यह पहला और आधारभूत टॉपिक होने के कारण लगभग हर वर्ष पूछा जाता है।
सिंधु घाटी सभ्यता को हड़प्पा सभ्यता क्यों कहा जाता है?+
क्योंकि हड़प्पा (पंजाब, पाकिस्तान) इस सभ्यता का सबसे पहले (1921 में) खोजा गया स्थल था, इसलिए पुरातत्वविद प्रायः इसे 'हड़प्पा सभ्यता' भी कहते हैं।
राजस्थान का कौन-सा स्थल सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़ा है?+
राजस्थान का कालीबंगा (हनुमानगढ़) सबसे महत्त्वपूर्ण हड़प्पाकालीन स्थल है, जो जुते हुए खेत व अग्नि-वेदिकाओं के प्रमाणों के लिए जाना जाता है।
सिंधु घाटी की लिपि पढ़ी जा चुकी है क्या?+
नहीं, सिंधु घाटी की चित्रात्मक लिपि आज तक अपठित (undeciphered) है, इसलिए इस सभ्यता के धर्म, शासन-व्यवस्था आदि के बारे में हमारी जानकारी मुख्यतः पुरातात्त्विक साक्ष्यों पर आधारित है।
मेलुहा शब्द का क्या अर्थ है?+
मेलुहा मेसोपोटामिया (आधुनिक इराक) के प्राचीन लेखों में प्रयुक्त एक नाम है, जिसे संभवतः सिंधु क्षेत्र के लिए इस्तेमाल किया गया और वहाँ इसे नाविकों/समुद्री व्यापारियों की भूमि बताया गया है।
सिंधु घाटी सभ्यता के लोग किन देवताओं की पूजा करते थे?+
मुहरों व मूर्तियों के प्रमाणों के आधार पर मातृ-देवी, वृक्ष-पूजा, पशु-पूजा (विशेषकर बैल) और एक योगी-मुद्रा में बैठे पशुपति-सदृश देवता की उपासना के संकेत मिलते हैं, जिन्हें कुछ विद्वान शिव के प्रारंभिक रूप से जोड़ते हैं।
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आधिकारिक स्रोत
बदलाव लॉग
- 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए