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REET L2 · सामाजिक अध्ययन

जैन एवं बौद्ध धर्म — REET नोट्स (सामाजिक अध्ययन)

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जैन और बौद्ध धर्म छठी शताब्दी ईसा-पूर्व के दो सबसे बड़े श्रमण आंदोलन थे, जिन्होंने वैदिक कर्मकांड को चुनौती दी। REET सामाजिक अध्ययन में इनसे तीर्थंकरों, बुद्ध के जीवन-स्थलों, दोनों धर्मों के सिद्धांतों में अंतर और बौद्ध संगीतियों पर सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं।

  • REET 2024 में 4 प्रश्न
  • कक्षा 6–8 स्तर
  • 9 मिनट पढ़ें
16 सितंबर 2026 को सत्यापित · स्रोत: Wikipedia — Mahavira

REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

REET 2024 के चारों प्रश्न सीधे तथ्यों पर आधारित थे — तीर्थंकरों की क्रम-संख्या (23वें तीर्थंकर कौन थे), 'निम्न में से कौन-सा सिद्धांत सम्बंधित नहीं है' जैसे विलोपन (elimination) प्रश्न, और बुद्ध के जीवन से जुड़े स्थान (प्रथम उपदेश कहाँ दिया)। यानी परीक्षा गहरी दार्शनिक व्याख्या नहीं, बल्कि तीर्थंकरों, सिद्धांतों और स्थानों के सटीक मिलान पर केंद्रित रहती है — ठीक वैसे जैसे कक्षा 6 की सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक में पढ़ाया जाता है।

जैन धर्म — मूल तथ्य

अंतिम/24वें तीर्थंकर
महावीर स्वामी (मूल नाम वर्धमान)
जन्म
कुण्डग्राम (वैशाली, बिहार) में, पिता सिद्धार्थ (ज्ञातृक कुल के प्रमुख), माता त्रिशला
कैवल्य ज्ञान
जृम्भिकग्राम में ऋजुपालिका नदी के तट पर, 42 वर्ष की आयु में
निर्वाण
पावापुरी में (राजगृह के निकट)
पहले तीर्थंकर
ऋषभदेव
23वें तीर्थंकर
पार्श्वनाथ — इन्होंने गृहस्थों के लिए चार व्रत (चातुर्याम) बताए थे
त्रिरत्न (जैन)
सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चरित्र — मोक्ष के तीन साधन
प्रमुख सिद्धांत
अनेकान्तवाद (सत्य के अनेक पक्ष), स्याद्वाद (कथन-सापेक्षता), पंचमहाव्रत (साधुओं हेतु), पंचाणुव्रत (गृहस्थों हेतु — महावीर ने पार्श्वनाथ के चार व्रतों में ब्रह्मचर्य जोड़ा)
संप्रदाय विभाजन
दिगंबर और श्वेतांबर — भद्रबाहु के नेतृत्व में दक्षिण भारत गए समूह ने कड़े नियम अपनाए (दिगंबर), मगध में रुके समूह ने वस्त्र धारण जारी रखा (श्वेतांबर)

बौद्ध धर्म — मूल तथ्य

जन्म
लुम्बिनी (नेपाल तराई) में, शाक्य वंश, पिता शुद्धोधन, माता महामाया
ज्ञान प्राप्ति (बुद्धत्व)
बोधगया में पीपल (बोधि) वृक्ष के नीचे, 35 वर्ष की आयु में
प्रथम उपदेश
सारनाथ (ऋषिपत्तन/मृगदाव) में पाँच शिष्यों को — इसे 'धर्मचक्र प्रवर्तन' कहा जाता है
महापरिनिर्वाण
कुशीनगर में, 80 वर्ष की आयु में
त्रिरत्न (बौद्ध)
बुद्ध, धम्म (धर्म), संघ — तीन शरणस्थल
चार आर्य सत्य
दुःख है, दुःख का कारण है (तृष्णा), दुःख का निरोध संभव है, निरोध का मार्ग है (अष्टांगिक मार्ग)
अष्टांगिक मार्ग
सम्यक दृष्टि, संकल्प, वाणी, कर्मांत, आजीविका, व्यायाम, स्मृति, समाधि
प्रमुख सिद्धांत
अनीश्वरवाद (ईश्वर के अस्तित्व से इनकार नहीं पर उसे केंद्रीय नहीं मानना), अनात्मवाद (स्थायी आत्मा को न मानना), कर्मवाद, पुनर्जन्मवाद, प्रतीत्य-समुत्पाद (कार्य-कारण की शृंखला)

जैन बनाम बौद्ध धर्म — भ्रम पैदा करने वाले अंतर

जैन धर्म

आत्माआत्मवाद (आत्मा को शाश्वत सत्य मानता है)

भाषा (मूल ग्रंथ)प्राकृत/अर्धमागधी (आगम साहित्य)

संप्रदायदिगंबर, श्वेतांबर

विशिष्ट सिद्धांतअनेकांतवाद, स्याद्वाद, पंचमहाव्रत

ईश्वर सम्बंधी दृष्टिईश्वर-कर्ता को नहीं मानता, पर आत्मा की सत्ता स्वीकारता है

बौद्ध धर्म

आत्माअनात्मवाद (स्थायी आत्मा को अस्वीकार करता है)

भाषा (मूल ग्रंथ)पाली (त्रिपिटक — विनय, सुत्त, अभिधम्म)

संप्रदायहीनयान, महायान

विशिष्ट सिद्धांतप्रतीत्य-समुत्पाद, चार आर्य सत्य, अष्टांगिक मार्ग

ईश्वर सम्बंधी दृष्टिअनीश्वरवादी, कर्मफल को केंद्र में रखता है

REET में अक्सर 'कौन-सा सिद्धांत किस धर्म से संबंधित नहीं है' जैसे विलोपन प्रश्न इसी अंतर पर आधारित होते हैं।

चार बौद्ध संगीतियाँ (Councils)

संगीतिस्थानशासक/संरक्षकमुख्य परिणाम
प्रथमराजगृहअजातशत्रुविनय पिटक व सुत्त पिटक का संकलन (उपालि व आनंद द्वारा)
द्वितीयवैशालीकालाशोकसंघ में मतभेद — स्थविरवादी व महासांघिक का विभाजन शुरू
तृतीयपाटलिपुत्रअशोकअभिधम्म पिटक का संकलन, त्रिपिटक पूर्ण, मोग्गलिपुत्त तिस्स की अध्यक्षता
चतुर्थकुण्डलवन (कश्मीर)कनिष्कहीनयान-महायान का औपचारिक विभाजन, वसुमित्र की अध्यक्षता

जैन-बौद्ध धर्म के उदय के कारण

छठी शताब्दी ईसा-पूर्व में उत्तर भारत में लोहे के औजारों से खेती और व्यापार बढ़ने के कारण नए व्यापारी व शिल्पी वर्ग (वैश्य) आर्थिक रूप से सशक्त हो चुके थे, पर वैदिक वर्ण-व्यवस्था में उन्हें ऊँचा सामाजिक स्थान नहीं मिलता था। महँगे और जटिल यज्ञ-कर्मकांड तथा पशु-बलि से भी व्यापारी और आम जन असंतुष्ट थे, क्योंकि इनमें पशुधन की हानि होती थी।

जैन और बौद्ध — दोनों धर्मों ने वर्ण-भेद के बजाय कर्म और आचरण को महत्त्व दिया, सरल भाषा (प्राकृत, पाली) में उपदेश दिए और अहिंसा पर बल दिया — इसीलिए इन्हें व्यापारी वर्ग, आम जन और कई शासकों का व्यापक समर्थन मिला।

प्रसार एवं संरक्षक शासक

बौद्ध धर्म के प्रारंभिक प्रसार में मगध के शासकों बिम्बिसार और अजातशत्रु का समर्थन मिला। मौर्य सम्राट अशोक ने कलिंग युद्ध (261 ईसा-पूर्व) के पश्चात बौद्ध धर्म अपनाया और धम्म-महामात्रों तथा धम्म-यात्राओं के माध्यम से इसे श्रीलंका व मध्य एशिया तक फैलाया। बाद में कुषाण शासक कनिष्क के काल में महायान शाखा का प्रसार हुआ।

जैन धर्म को भी राजाश्रय मिला — कलिंग नरेश खारवेल जैन धर्म के महान संरक्षक थे, और परंपरा के अनुसार मौर्य सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य ने जीवन के अंतिम दिनों में जैन धर्म अपनाकर श्रवणबेलगोला (कर्नाटक) में तपस्या की थी। राजस्थान में भी दोनों धर्मों के प्राचीन प्रमाण मिलते हैं — जैन धर्म के मंदिर व मूर्तियाँ राज्य के कई नगरों (जैसे रणकपुर, दिलवाड़ा) की कला-परंपरा का आधार बने, जबकि बौद्ध स्तूपों के अवशेष भी कुछ स्थलों पर पाए गए हैं, जो दर्शाते हैं कि श्रमण परंपरा उत्तर भारत तक ही सीमित नहीं रही।

बच्चों को कैसे पढ़ाएँ

कक्षा गतिविधि (कक्षा 6–8)

विद्यार्थियों को दो समूहों में बाँटकर एक समूह से 'जैन धर्म का पोस्टर' और दूसरे से 'बौद्ध धर्म का पोस्टर' बनवाएँ, जिसमें संस्थापक, प्रतीक चिह्न (जैन — हाथ पर चक्र; बौद्ध — धर्मचक्र) और मुख्य सिद्धांत हों। इससे तुलनात्मक समझ स्वाभाविक रूप से बनती है।

शिक्षण सहायक सामग्री

भारत के मानचित्र पर बुद्ध के जीवन के चार स्थलों (लुम्बिनी, बोधगया, सारनाथ, कुशीनगर) को पिन/स्टिकर से चिह्नित कराना — दृश्य स्मृति (visual memory) बनाने में सहायक।

सामान्य ग़लतफ़हमी

बच्चे अक्सर सोचते हैं कि बौद्ध धर्म ईश्वर को पूरी तरह नकारता है या जैन धर्म व बौद्ध धर्म एक ही हैं — शिक्षक को दोनों के आत्मा-सम्बंधी दृष्टिकोण (आत्मवाद बनाम अनात्मवाद) का ठोस उदाहरण देकर यह भ्रम दूर करना चाहिए।

आकलन विचार

एक त्वरित 'सही सिद्धांत छाँटो' गतिविधि — शिक्षक बोर्ड पर मिश्रित सिद्धांत (अनेकांतवाद, अष्टांगिक मार्ग, स्याद्वाद, चार आर्य सत्य) लिखें और बच्चे उन्हें जैन/बौद्ध के कॉलम में वर्गीकृत करें।

याद रखने की ट्रिक

तीर्थंकरों का क्रम याद रखने के लिए बस इतना पर्याप्त है: पहले = ऋषभदेव, 22वें = नेमिनाथ (कृष्ण के रिश्तेदार), 23वें = पार्श्वनाथ (चार व्रत वाले), 24वें (अंतिम) = महावीर (पाँचवाँ व्रत ब्रह्मचर्य जोड़ने वाले)। और बौद्ध संगीतियों के लिए क्रम याद रखें — 'रा-वै-पा-कुं' यानी राजगृह, वैशाली, पाटलिपुत्र, कुण्डलवन — हर एक के साथ राजा भी जोड़ लें: अजातशत्रु, कालाशोक, अशोक, कनिष्क।

REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)

प्रश्न 91

जैन धर्म के 23 वें तीर्थंकर कौन थे ?

  1. Aऋषभदेव
  2. Bपार्श्वनाथ
  3. Cनेमीनाथ
  4. Dमहावीर स्वामी

व्याख्या

जैन धर्म में कुल 24 तीर्थंकर माने जाते हैं। पहले तीर्थंकर ऋषभदेव, 22वें नेमिनाथ, 23वें पार्श्वनाथ और 24वें (अंतिम) महावीर स्वामी थे। अतः 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ हैं।

प्रश्न 144

अधोलिखित में से कौन-सा सिद्धान्त बौद्ध धर्म से संबंधित नहीं है ?

  1. Aअनीश्वरवाद
  2. Bआत्मवाद
  3. Cकर्मवाद
  4. Dपुनर्जन्मवाद

व्याख्या

बौद्ध धर्म अनीश्वरवादी है, कर्मवाद (कर्म का सिद्धान्त) और पुनर्जन्म को मानता है। किन्तु बौद्ध धर्म 'अनात्मवाद' को मानता है, यानी स्थायी आत्मा के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करता। इसलिए आत्मवाद (spiritism) बौद्ध धर्म से सम्बंधित नहीं है।

प्रश्न 124

निम्नलिखित में से कौन-सा सिद्धान्त जैन धर्म का नहीं हैं ?

  1. Aपंचाणुवृत
  2. Bस्याद्वाद
  3. Cप्रतीत्य-समुत्पाद
  4. Dअनेकान्तवाद

व्याख्या

प्रतीत्य-समुत्पाद (कार्य-कारण की शृंखला/आश्रित उत्पत्ति) बौद्ध धर्म का सिद्धान्त है, जैन धर्म का नहीं। पंचाणुव्रत (गृहस्थों के पाँच व्रत), स्याद्वाद और अनेकान्तवाद जैन धर्म के प्रमुख सिद्धान्त हैं।

प्रश्न 128

गौतम बुद्ध ने प्रथम उपदेश कहाँ दिया था ?

  1. Aगया
  2. Bसारनाथ
  3. Cकुशीनगर
  4. Dलुम्बनीवन

व्याख्या

गौतम बुद्ध को बोधगया में ज्ञान प्राप्त हुआ और उन्होंने अपना प्रथम उपदेश सारनाथ (ऋषिपतन/मृगदाव) में पाँच शिष्यों को दिया, जिसे ‘धर्मचक्र प्रवर्तन’ कहा जाता है। उनका जन्म लुम्बिनी में तथा महापरिनिर्वाण कुशीनगर में हुआ।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

जैन धर्म के अनुसार मोक्ष प्राप्ति के त्रिरत्न में निम्न में से कौन-सा सम्मिलित नहीं है ?

  1. Aसम्यक दर्शन
  2. Bसम्यक ज्ञान
  3. Cसम्यक चरित्र
  4. Dसम्यक तप

व्याख्या

जैन धर्म में मोक्ष के तीन साधन (त्रिरत्न) सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र माने गए हैं। तप को इन तीनों को प्राप्त करने का सहायक साधन माना गया है, पर वह त्रिरत्न में सम्मिलित नहीं है।

प्रश्न 2

गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति (बुद्धत्व) कहाँ हुई थी ?

  1. Aलुम्बिनी
  2. Bसारनाथ
  3. Cबोधगया
  4. Dकुशीनगर

व्याख्या

गौतम बुद्ध को बोधगया में एक पीपल (बोधि) वृक्ष के नीचे 35 वर्ष की आयु में ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। लुम्बिनी उनका जन्म-स्थान, सारनाथ प्रथम उपदेश-स्थल और कुशीनगर महापरिनिर्वाण-स्थल है।

प्रश्न 3

बौद्ध धर्म के अनुसार दुःख का मूल कारण क्या बताया गया है ?

  1. Aअज्ञान
  2. Bतृष्णा (इच्छा)
  3. Cकर्मकांड
  4. Dजाति-भेद

व्याख्या

चार आर्य सत्यों में से दूसरा सत्य यह बताता है कि दुःख का मूल कारण तृष्णा (इच्छा/लालसा) है। इसी तृष्णा के निरोध के लिए बुद्ध ने अष्टांगिक मार्ग बताया।

प्रश्न 4

जैन धर्म में गृहस्थों के लिए बताए गए पाँच छोटे व्रतों को क्या कहा जाता है ?

  1. Aपंचमहाव्रत
  2. Bपंचाणुव्रत
  3. Cचातुर्याम
  4. Dअष्टांगिक मार्ग

व्याख्या

साधु-साध्वियों के लिए कठोर पंचमहाव्रत होते हैं, जबकि गृहस्थों (सामान्य अनुयायियों) के लिए इन्हीं पाँच व्रतों का सरल/आंशिक रूप 'पंचाणुव्रत' कहलाता है। चातुर्याम पार्श्वनाथ के चार व्रत थे और अष्टांगिक मार्ग बौद्ध धर्म का सिद्धांत है।

प्रश्न 5

तीसरी बौद्ध संगीति किस मौर्य शासक के संरक्षण में और कहाँ आयोजित हुई ?

  1. Aअशोक — पाटलिपुत्र
  2. Bअजातशत्रु — राजगृह
  3. Cकनिष्क — कुण्डलवन
  4. Dकालाशोक — वैशाली

व्याख्या

तृतीय बौद्ध संगीति सम्राट अशोक के संरक्षण में पाटलिपुत्र में मोग्गलिपुत्त तिस्स की अध्यक्षता में हुई थी, जिसमें अभिधम्म पिटक का संकलन कर त्रिपिटक को पूर्ण किया गया।

प्रश्न 6

एक शिक्षक कक्षा 7 में जैन व बौद्ध धर्म पढ़ाते समय बच्चों से मानचित्र पर बुद्ध के जीवन से जुड़े चार स्थान चिह्नित करवाता है। इस गतिविधि का मुख्य शैक्षिक उद्देश्य क्या है ?

  1. Aकेवल परीक्षा में अंक बढ़ाना
  2. Bभूगोल और इतिहास को जोड़कर दृश्य स्मृति बनाना
  3. Cबच्चों को चित्रकला सिखाना
  4. Dसमय बिताना

व्याख्या

स्थान-आधारित मानचित्र गतिविधि से बच्चे ऐतिहासिक घटनाओं को भौगोलिक संदर्भ में याद रखते हैं, जिससे दीर्घकालिक स्मृति (long-term retention) मज़बूत होती है — यह सामाजिक अध्ययन शिक्षण की एक प्रभावी विधि है।

प्रश्न 7

बौद्ध त्रिपिटक में मठ के आचार-नियमों (मॉनेस्टिक कोड) का वर्णन किस पिटक में मिलता है ?

  1. Aसुत्त पिटक
  2. Bविनय पिटक
  3. Cअभिधम्म पिटक
  4. Dजातक कथाएँ

व्याख्या

विनय पिटक में बौद्ध भिक्षु-भिक्षुणियों के लिए संघ के आचार-नियमों व अनुशासन का वर्णन है। सुत्त पिटक में बुद्ध के उपदेश और अभिधम्म पिटक में दार्शनिक विवेचन है।

प्रश्न 8

निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है ?

  1. Aप्रथम संगीति — राजगृह
  2. Bद्वितीय संगीति — वैशाली
  3. Cतृतीय संगीति — कुण्डलवन
  4. Dचतुर्थ संगीति — कश्मीर

व्याख्या

तृतीय बौद्ध संगीति पाटलिपुत्र में हुई थी, कुण्डलवन (कश्मीर) में नहीं। कुण्डलवन में चतुर्थ संगीति कनिष्क के संरक्षण में आयोजित हुई थी, इसलिए विकल्प (C) सही सुमेलित नहीं है।

प्रश्न 9

निम्न में से कौन-सा सिद्धांत जैन धर्म का है, बौद्ध धर्म का नहीं ?

  1. Aअष्टांगिक मार्ग
  2. Bप्रतीत्य-समुत्पाद
  3. Cस्याद्वाद
  4. Dचार आर्य सत्य

व्याख्या

स्याद्वाद जैन धर्म का विशिष्ट सिद्धांत है, जो अनेकांतवाद को व्यक्त करने की भाषा-शैली है। अष्टांगिक मार्ग, प्रतीत्य-समुत्पाद और चार आर्य सत्य — तीनों बौद्ध धर्म के सिद्धांत हैं।

प्रश्न 10

गौतम बुद्ध का महापरिनिर्वाण किस आयु में और कहाँ हुआ ?

  1. A80 वर्ष, कुशीनगर
  2. B35 वर्ष, बोधगया
  3. C72 वर्ष, वैशाली
  4. D80 वर्ष, राजगृह

व्याख्या

गौतम बुद्ध का महापरिनिर्वाण 80 वर्ष की आयु में कुशीनगर (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। बोधगया वह स्थान है जहाँ 35 वर्ष की आयु में उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ था।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जैन एवं बौद्ध धर्म से REET में कितने प्रश्न आते हैं?+

REET 2024 में सामाजिक अध्ययन के इतिहास खंड से इस टॉपिक पर 4 प्रश्न पूछे गए थे। यह प्राचीन भारत के प्रमुख उप-विषयों में गिना जाता है, इसलिए हर वर्ष 1–3 प्रश्नों की संभावना बनी रहती है।

महावीर स्वामी और गौतम बुद्ध समकालीन थे या नहीं?+

हाँ, दोनों लगभग समकालीन (छठी शताब्दी ईसा-पूर्व) थे और दोनों की कर्मभूमि मगध व वैशाली क्षेत्र में एक-दूसरे के निकट रही।

अनेकांतवाद और स्याद्वाद में क्या अंतर है?+

अनेकांतवाद यह सिद्धांत है कि सत्य के अनेक पक्ष (दृष्टिकोण) होते हैं, जबकि स्याद्वाद इस सिद्धांत को व्यक्त करने की भाषा-शैली है, जिसमें हर कथन के आगे 'स्यात्' (किसी दृष्टि से) जोड़ा जाता है।

चार आर्य सत्य क्या हैं?+

दुःख का अस्तित्व, दुःख का कारण (तृष्णा), दुःख का निरोध संभव है, और निरोध का मार्ग अष्टांगिक मार्ग है — यही बौद्ध धर्म की मूल शिक्षा है।

दिगंबर और श्वेतांबर संप्रदाय कैसे बने?+

मगध में भीषण अकाल के दौरान भद्रबाहु अपने अनुयायियों (जो निर्वस्त्र रहने के नियम पर अडिग रहे) के साथ दक्षिण भारत चले गए, जबकि स्थूलभद्र के नेतृत्व में मगध में रुके अनुयायियों ने श्वेत वस्त्र धारण करना जारी रखा — इसी से दिगंबर और श्वेतांबर संप्रदाय बने।

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आधिकारिक स्रोत

  1. Wikipedia — Mahavira

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  • 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए