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राजस्थान में गरीबी: गरीबी रेखा, MPI व योजनाएं | RAS

Poverty in Rajasthan: Poverty Line, MPI, Schemes | RAS

⏱ 12 मिनटintermediate✓ अपडेटेड: मार्च 2026· Economy of Rajasthan

परिचय एवं परीक्षा प्रासंगिकता

गरीबी किसी भी राष्ट्र के आर्थिक विकास और सामाजिक स्थिति का सबसे महत्वपूर्ण सूचक है। राजस्थान की अर्थव्यवस्था के अध्ययन में गरीबी का विश्लेषण अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह राज्य की आर्थिक स्थिति, विकास दर और सामाजिक कल्याण योजनाओं को प्रभावित करता है। आरपीएससी आरएएस परीक्षा में राजस्थान की आर्थिक स्थिति से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। गरीबी रेखा, गरीबी दर, गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम और राजस्थान में गरीबी की स्थिति ये सभी विषय परीक्षा के लिए अत्यावश्यक हैं।

मुख्य अवधारणाएं

१. गरीबी की परिभाषा और वर्गीकरण

गरीबी को आम तौर पर आय और खपत के निम्न स्तर के रूप में परिभाषित किया जाता है जो किसी व्यक्ति की बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने में असमर्थ बनाता है। भारतीय परिप्रेक्ष्य में गरीबी को दो प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है - पूर्ण गरीबी (Absolute Poverty) और सापेक्ष गरीबी (Relative Poverty)। पूर्ण गरीबी में व्यक्ति न्यूनतम जीवन स्तर भी नहीं बनाए रख सकता, जबकि सापेक्ष गरीबी समाज के अन्य सदस्यों की तुलना में आय में असमानता को दर्शाती है। राजस्थान में ग्रामीण गरीबी अधिक गंभीर समस्या है क्योंकि यहां कृषि पर अधिकांश जनसंख्या निर्भर है और कृषि की अनिश्चितता गरीबी को बढ़ाती है।

२. गरीबी रेखा और माप

गरीबी रेखा (Poverty Line) एक आय की सीमा है जिसके नीचे रहने वाले व्यक्ति को गरीब माना जाता है। भारत में गरीबी रेखा का निर्धारण प्रतिदिन की न्यूनतम खाद्य आवश्यकता (कैलोरी खपत) के आधार पर किया जाता है। गरीबी रेखा और गरीबी अनुपात का निर्धारण योजना आयोग (अब नीति आयोग) की विशेषज्ञ समितियाँ (तेंदुलकर, रंगराजन) करती रही हैं; राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण (NSSO, अब NSO) केवल उपभोग व्यय के आँकड़े उपलब्ध कराता है। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए खाद्य की आवश्यकता अलग है और शहरी क्षेत्रों के लिए भिन्न। राजस्थान में ग्रामीण गरीबी रेखा शहरी गरीबी रेखा से अलग निर्धारित की जाती है। गरीबी को मापने के लिए सरकार समय-समय पर सर्वेक्षण संचालित करती है और गरीबी अनुपात (Poverty Ratio) निकाला जाता है।

समितिगरीबी रेखा (प्रति व्यक्ति प्रति माह)भारत में गरीबी अनुपात
तेंदुलकर समिति (2009)2004-05 के मूल्यों पर: ग्रामीण ₹446.68, शहरी ₹578.802004-05: 37.2%; 2011-12: 21.9%
रंगराजन समिति (2014)2011-12 के लिए: ग्रामीण ₹972, शहरी ₹1,4072011-12: 29.5% (ग्रामीण 30.9%, शहरी 26.4%)

३. गरीबी के कारण और प्रभाव

राजस्थान में गरीबी के मुख्य कारणों में भूमि का असमान वितरण, कृषि पर अधिक निर्भरता, शिक्षा की कमी, बेरोजगारी और अपर्याप्त बुनियादी सुविधाएं शामिल हैं। राजस्थान एक अर्ध-शुष्क क्षेत्र है जहां सूखे की परिस्थितियां आवर्ती समस्या हैं। यह कृषि उत्पादन को प्रभावित करता है और कृषकों को गरीबी की ओर धकेलता है। गरीबी के प्रभाव दूरगामी हैं - यह शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और बाल विकास को प्रभावित करता है। महिलाओं और बालिकाओं पर गरीबी का सबसे अधिक नकारात्मक असर पड़ता है। गरीबी सामाजिक असमानता को बढ़ाती है और अपराध दर को भी प्रभावित करती है।

४. गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम

भारत सरकार ने गरीबी दूर करने के लिए विभिन्न राष्ट्रीय कार्यक्रम संचालित किए हैं। महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस), प्रधानमंत्री आवास योजना और राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम शामिल हैं। राजस्थान राज्य ने भी अपने स्तर पर कई योजनाएं शुरू की हैं जैसे सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना आदि। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य रोजगार सृजन, आय वृद्धि, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच प्रदान करना है। मनरेगा ने विशेष रूप से राजस्थान जैसे कृषि प्रधान राज्यों में ग्रामीण गरीबी कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

५. गरीबी सूचकांक और अन्य संकेतक

गरीबी को मापने के लिए आय के अलावा अन्य सूचकांकों का भी उपयोग किया जाता है। नीति आयोग का राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक (Multidimensional Poverty Index) तीन समान भार वाले आयामों - स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर - को 12 संकेतकों के आधार पर मापता है। इसके अनुसार भारत में बहुआयामी गरीबी का अनुपात 2015-16 के 24.85% से घटकर 2019-21 में 14.96% रह गया; राजस्थान ने भी इस दौरान उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की। मानव विकास सूचकांक (Human Development Index) भी गरीबी का एक संकेतक माना जाता है। राज्यों के सामाजिक विकास की तुलना में यह सूचकांक उपयोगी है। बेरोजगारी दर, साक्षरता दर, कुपोषण दर और शिशु मृत्यु दर भी गरीबी से संबंधित महत्वपूर्ण संकेतक हैं। राजस्थान में विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में कुपोषण की समस्या बनी हुई है और महिला साक्षरता राष्ट्रीय औसत से कम है।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • राजस्थान में गरीबी दर: तेंदुलकर पद्धति के अनुसार राजस्थान में गरीबी अनुपात 2004-05 में 34.4% था, जो 2011-12 में घटकर 14.7% रह गया (भारत: 37.2% से 21.9%)। यानी 2011-12 में राजस्थान की दर राष्ट्रीय औसत से कम थी। ग्रामीण गरीबी शहरी गरीबी से अधिक रही है।
  • ग्रामीण और शहरी विभाजन: राजस्थान की लगभग ७५ प्रतिशत जनसंख्या (जनगणना 2011) ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि पर निर्भरता अधिक है जिससे मौसमी बेरोजगारी की समस्या है।
  • लैंगिक विभाजन: महिलाओं की आय में असमानता और आर्थिक अधिकारों की कमी उन्हें गरीबी के प्रति अधिक संवेदनशील बनाती है।
  • जाति आधारित गरीबी: अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के समुदायों में गरीबी की दर अधिक है। सामाजिक भेदभाव और संसाधनों तक सीमित पहुंच इसके कारण हैं।
  • बाल गरीबी: राजस्थान में बाल गरीबी एक गंभीर समस्या है। कई बच्चे शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाते और बाल श्रम में लगते हैं।
  • सूखा और गरीबी: राजस्थान में आवर्ती सूखे की स्थिति गरीबी को और गहरा करती है। पशुपालकों और छोटे किसानों को विशेष रूप से प्रभावित करता है।
  • पलायन और शहरीकरण: गरीबी के कारण गांवों से शहरों की ओर पलायन बढ़ा है। यह झुग्गी बस्तियों के विकास और शहरी गरीबी को बढ़ाता है।
वर्षराजस्थान में गरीबी अनुपातभारत में गरीबी अनुपात
2004-0534.4%37.2%
2011-1214.7%21.9%

राजस्थान विशेष

राजस्थान भारत का एक बड़ा राज्य है जिसकी अर्थव्यवस्था मुख्यतः कृषि, खनिज और पर्यटन पर निर्भर है। राजस्थान में गरीबी की समस्या अन्य राज्यों से कुछ अलग विशेषताएं रखती है। यहां की जलवायु अर्ध-शुष्क है जिससे कृषि उत्पादकता अस्थिर है। मरुस्थलीय क्षेत्रों में गरीबी विशेषकर कठोर है। राजस्थान में भूमि का वितरण असमान है - बड़े जमींदारों के पास विशाल भूखंड हैं जबकि अधिकांश किसान छोटी या सीमांत जोतें रखते हैं। यह असमानता गरीबी को बढ़ाती है। राजस्थान की जनसंख्या वृद्धि दर भी उच्च है जिससे प्रति व्यक्ति आय में कमी आती है। महिला साक्षरता दर राजस्थान में अभी भी अपेक्षाकृत कम है जो महिलाओं की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करता है। राजस्थान में प्रवासी श्रमिकों की संख्या काफी अधिक है जो दक्षिण भारत और महानगरों में काम करते हैं। मनरेगा ने राजस्थान में ग्रामीण परिवारों को रोजगार देकर सकारात्मक प्रभाव डाला है। राजस्थान सरकार ने कृषि उत्पादकता बढ़ाने और ग्रामीण विकास के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की हैं।

परीक्षा पैटर्न

आरपीएससी आरएएस परीक्षा में गरीबी से संबंधित प्रश्न निम्नलिखित रूपों में पूछे जा सकते हैं:

  • तथ्यात्मक प्रश्न: गरीबी दर, सांख्यिकीय डेटा, विभिन्न कार्यक्रमों के नाम और उद्देश्य।
  • विश्लेषणात्मक प्रश्न: गरीबी के कारणों का विश्लेषण, गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों की प्रभावशीलता, राजस्थान की विशेष परिस्थितियां।
  • तुलनात्मक प्रश्न: ग्रामीण और शहरी गरीबी में अंतर, विभिन्न राज्यों में गरीबी दरों की तुलना।
  • केस स्टडी: राजस्थान में किसी विशेष जिले या क्षेत्र की गरीबी से संबंधित प्रश्न।
  • नीति आधारित प्रश्न: गरीबी दूर करने के लिए सरकारी नीतियों और कार्यक्रमों पर आधारित प्रश्न।

स्मरण युक्तियां

१. संख्यात्मक डेटा याद रखने के लिए: राजस्थान में तेंदुलकर गरीबी अनुपात 34.4% (2004-05) से 14.7% (2011-12) और भारत में 37.2% से 21.9%। जनसंख्या का ७५% ग्रामीण है। यह सांख्यिकीय तथ्य परीक्षा में महत्वपूर्ण है।

२. कार्यक्रमों की सूची: मनरेगा, पीडीएस, आवास योजना, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को याद करने के लिए एक क्रम बनाएं। प्रत्येक कार्यक्रम का उद्देश्य एक शब्द में याद रखें - मनरेगा = रोजगार, पीडीएस = खाद्य सुरक्षा, आवास = आश्रय।

३. कारणों का विश्लेषण: राजस्थान में गरीबी के कारणों को तीन श्रेणियों में बाँटें - भौगोलिक (सूखा, मरुस्थल), आर्थिक (कृषि पर निर्भरता, बेरोजगारी), सामाजिक (असमानता, शिक्षा की कमी)।

४. संक्षिप्त नोट्स बनाएं: प्रत्येक पैराग्राफ के लिए एक-दो वाक्य का सारांश बनाएं। यह परीक्षा से पहले पुनरीक्षण में मदद करेगा।

५. समितियाँ क्रम से याद करें: तेंदुलकर (2009) के बाद रंगराजन (2014); रेखा और अनुपात दोनों की तालिका ऊपर देखें।

६. वर्तमान घटनाएं जोड़ें: हाल की योजनाओं, सरकारी घोषणाओं और आंकड़ों को अपने अध्ययन से जोड़ें। यह आपके उत्तरों को प्रासंगिक और वर्तमान बनाता है।

७. अवधारणाओं को समझें: केवल याद न करें, अवधारणाओं को समझें। समझने से आप किसी भी रूप में प्रश्न का उत्तर दे सकेंगे।

⚡ त्वरित रिवीजन — One-Liners

  • •राजस्थान में बाजरा सर्वाधिक उत्पादित खाद्य फसल है; देश के कुल बाजरा उत्पादन में प्रथम स्थान।
  • •राजस्थान सीसा-जस्ता, तांबा, संगमरमर और जिप्सम में देश में प्रथम स्थान पर है।
  • •इंदिरा गांधी नहर परियोजना थार मरुस्थल में सिंचाई की सबसे बड़ी परियोजना है; यह व्यास और सतलज नदियों से जल लेती है।
  • •राजस्थान भारत के GDP में लगभग 5% योगदान करता है (2023-24)।
  • •राजस्थान की अर्थव्यवस्था में कृषि व सम्बद्ध क्षेत्र ~25-26% योगदान देते हैं।
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  1. RAS 2018

    पश्चिमी राजस्थान में गरीबी शमन (MPoWR) कार्यक्रम किसके द्वारा समर्थित है?

    1. (A) एशियाई विकास बैंक (ADB)
    2. (B) जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA)
    3. (C) अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD) और रतन टाटा ट्रस्ट
    4. (D) कनाडाई अंतर्राष्ट्रीय विकास एजेंसी (CIDA)

    उत्तर: (C) अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष (IFAD) और रतन टाटा ट्रस्ट

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