परिचय एवं परीक्षा प्रासंगिकता
कराधान (Taxation) आधुनिक अर्थव्यवस्था का मेरुदंड है और राजस्थान की आर्थिक संरचना को समझने के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। RPSC RAS परीक्षा में राजस्थान की अर्थव्यवस्था एक प्रमुख विषय है, जहाँ कराधान व्यवस्था से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। कर राज्य की आय का प्रमुख स्रोत है और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों के वित्तपोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। राजस्थान विशेष रूप से, जहाँ कृषि, पर्यटन और खनिज उद्योग प्रमुख क्षेत्र हैं, वहाँ कराधान नीति अत्यधिक महत्वपूर्ण है।
मुख्य अवधारणाएं
1. कर की परिभाषा और विशेषताएँ
कर एक अनिवार्य वित्तीय दायित्व है जो सरकार द्वारा व्यक्तियों, वस्तुओं और सेवाओं पर लगाया जाता है। कर की मुख्य विशेषताएँ हैं: यह अनिवार्य है, करदाता को इसका कोई प्रत्यक्ष प्रतिफल नहीं मिलता, यह राजस्व का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, और सामाजिक कल्याण के लिए व्यय किया जाता है। राज्य के कर संबंधी कानून राज्य विधानमंडल बनाता है; राज्य वित्त आयोग (अनुच्छेद 243-I) राज्य और स्थानीय निकायों के बीच करों के बंटवारे की सिफारिश करता है। कराधान सरकार की आर्थिक और राजनैतिक नीति का एक अभिन्न अंग है।
2. कर के प्रकार और वर्गीकरण
कर दो प्रमुख श्रेणियों में विभाजित होते हैं: (अ) प्रत्यक्ष कर और (ब) अप्रत्यक्ष कर। प्रत्यक्ष कर में आय कर, संपत्ति कर, और उत्तराधिकार कर आते हैं जहाँ करदाता सीधे सरकार को कर देता है। अप्रत्यक्ष कर में बिक्री कर, उत्पाद शुल्क, सीमा शुल्क और सेवा कर आते हैं। राजस्थान में राज्य स्तर पर वैट (मूल्य वर्धित कर) 1 अप्रैल 2006 से लागू हुआ था (राजस्थान वैट अधिनियम 2003)। GST (वस्तु एवं सेवा कर) केंद्र और राज्यों का संयुक्त कर है, जो 101वें संविधान संशोधन के बाद 1 जुलाई 2017 से लागू हुआ और जिसने अप्रत्यक्ष कराधान में क्रांतिकारी परिवर्तन किया।
3. कराधान के सिद्धांत और उद्देश्य
अर्थशास्त्रियों द्वारा निर्धारित कराधान के मुख्य सिद्धांत हैं: समानता (समान आय पर समान कर), निश्चितता (कर की दर निश्चित हो), सुविधा (समय और रूप में सुविधाजनक), और मितव्यय (कम से कम प्रशासनिक खर्च)। कर लगाने के प्राथमिक उद्देश्य राजस्व संग्रह, आय का पुनर्वितरण, आर्थिक स्थिरता, और सामाजिक कल्याण हैं। राजस्थान सरकार विभिन्न कर नीतियों के माध्यम से आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करती है।
4. कर-जीडीपी अनुपात और राजस्व संग्रह
कर-जीडीपी अनुपात किसी देश या क्षेत्र की कर संग्रह क्षमता का सूचकांक है। भारत में केंद्र और राज्यों का संयुक्त कर-जीडीपी अनुपात लगभग 17-18% है (केवल केंद्र का अनुपात इससे कम, लगभग 11-12% है)। राज्य के स्वयं के कर राजस्व को बढ़ाना राजस्थान की एक चुनौती है। सरकार कर संग्रह बढ़ाने के लिए डिजिटल तरीकों और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा दे रही है।
5. भारतीय कराधान व्यवस्था में संघीय संरचना
भारतीय संविधान के अनुसार, कर निर्धारण की शक्तियाँ केंद्र, राज्य और स्थानीय सरकारों के बीच विभाजित हैं। संघ सूची में कृषि आय को छोड़कर आय कर, निगम कर, और सीमा शुल्क (आयात-निर्यात शुल्क) आते हैं जो केंद्र द्वारा लगाए जाते हैं। राज्य सूची में भूमि-भवन पर कर (संपत्ति कर), मदिरा पर राज्य उत्पाद शुल्क, स्टांप शुल्क, मोटर वाहन कर, बिजली पर कर और मनोरंजन कर आते हैं; बिक्री कर की जगह अब GST है। GST के संदर्भ में अनुच्छेद 246A के अंतर्गत संसद और राज्य विधानमंडल दोनों कानून बना सकते हैं। यह विभाजन राजस्थान जैसे राज्यों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उनकी वित्तीय स्वायत्तता को परिभाषित करता है।
| सूची | कर / शुल्क के उदाहरण | कौन लगाता है |
|---|---|---|
| संघ सूची | आय कर (कृषि आय को छोड़कर), निगम कर, सीमा शुल्क | केंद्र सरकार |
| राज्य सूची | संपत्ति कर, राज्य उत्पाद शुल्क (मदिरा), स्टांप शुल्क, मोटर वाहन कर, बिजली पर कर, मनोरंजन कर | राज्य सरकार |
| GST (अनुच्छेद 246A) | CGST, SGST, IGST | संसद और राज्य विधानमंडल दोनों कानून बना सकते हैं |
महत्वपूर्ण तथ्य
भारतीय कर व्यवस्था की ऐतिहासिकता: आधुनिक भारतीय कर व्यवस्था का आधार ब्रिटिश शासन काल से आता है, जिसे स्वतंत्रता के बाद संशोधित और विकसित किया गया है। भारतीय संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ (डॉ. राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के अध्यक्ष थे), और भाग XII तथा सातवीं अनुसूची कराधान के अधिकार केंद्र और राज्यों के बीच बाँटते हैं।
राजस्थान की कर आय स्रोत: राजस्थान के स्वयं के कर राजस्व के प्रमुख स्रोत हैं: राज्य GST (SGST), स्टांप शुल्क व पंजीकरण शुल्क, राज्य उत्पाद शुल्क, मोटर वाहन कर और बिजली शुल्क। इनके अलावा राज्य को केंद्रीय करों में हिस्सा (वित्त आयोग के अनुसार) और केंद्रीय अनुदान मिलते हैं। भू-राजस्व का योगदान अब बहुत कम है, और खनन रॉयल्टी कर नहीं, गैर-कर राजस्व है।
जीएसटी का प्रभाव: 1 जुलाई 2017 को GST लागू होने से वैट, केंद्रीय उत्पाद शुल्क, सेवा कर आदि कई केंद्रीय और राज्य अप्रत्यक्ष कर इसमें समाहित हो गए। GST परिषद (अनुच्छेद 279A) दरें तय करती है। सितंबर 2025 के सुधार (22 सितंबर 2025 से लागू) के बाद मुख्य दरें 5% और 18% हैं, तथा तंबाकू जैसी हानिकारक और विलासिता की वस्तुओं पर 40% की विशेष दर है।
- राज्य के भीतर बिक्रीCGST (केंद्र) + SGST (राज्य)
- एक राज्य से दूसरे राज्य में बिक्रीIGST, केंद्र द्वारा संग्रहित
- IGST का बंटवाराउपभोग वाले राज्य को उसका हिस्सा
- नीति और दरेंGST परिषद (अनुच्छेद 279A)
आयकर छूट सीमा: व्यक्तिगत आयकर की दरें और छूट-सीमा बजट में बदलती रहती हैं। नई (डिफ़ॉल्ट) कर व्यवस्था में 2025-26 से 4 लाख रुपये तक की आय पर कोई कर नहीं है और 12 लाख रुपये तक की कर योग्य आय पर रिबेट के कारण कर शून्य रहता है (बजट 2026 में दरें अपरिवर्तित रहीं)।
कॉर्पोरेट कर दर: भारत में कॉर्पोरेट कर की दर कंपनी की श्रेणी और चुनी गई कर व्यवस्था पर निर्भर करती है; घरेलू कंपनियों के लिए रियायती विकल्प में मूल दर 22% है, जबकि छूट लेने वाली कंपनियों पर सामान्यतः 25-30% दर लागू होती है।
राजस्थान विशेष
राजस्थान की कर नीति की विशेषताएँ: राजस्थान सरकार ने औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न कर छूट और प्रोत्साहन प्रदान किए हैं। कृषि आय केंद्रीय आयकर से मुक्त है, जिससे किसानों को राहत मिलती है।
वाणिज्यिक कर और GST: GST लागू होने के बाद वाणिज्यिक करों की जगह अधिकांश वस्तुओं और सेवाओं पर राज्य GST (SGST) राज्य के कर राजस्व का सबसे बड़ा स्रोत बन गया है। पेट्रोल, डीजल और मदिरा जैसी कुछ वस्तुओं पर अब भी राज्य वैट/उत्पाद शुल्क लगता है।
स्टांप ड्यूटी और पंजीकरण कर: राजस्थान में संपत्ति पंजीकरण पर स्टांप ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क लगता है (दरें समय-समय पर बदलती हैं)। यह राज्य की कर आय का महत्वपूर्ण स्रोत है, विशेषकर शहरी क्षेत्रों में जहाँ संपत्ति लेनदेन अधिक होता है।
पर्यटन और होटल सेवाएँ: होटल, रेस्तरां और परिवहन जैसी पर्यटन-संबंधी सेवाओं पर अब GST लगता है, जिसके SGST भाग से राज्य को आय होती है। जयपुर, जोधपुर, उदयपुर और पुष्कर जैसे पर्यटन केंद्र इस क्षेत्र के प्रमुख आधार हैं।
खनिज राजस्व और रॉयल्टी: राजस्थान संगमरमर, फेल्सपार, और अन्य खनिजों में समृद्ध है। खनन से मिलने वाली रॉयल्टी राज्य का गैर-कर राजस्व है।
परीक्षा पैटर्न
प्रश्न के संभावित प्रारूप: RPSC RAS प्रारंभिक परीक्षा (150 प्रश्न, 200 अंक, 3 घंटे; 1/3 ऋणात्मक अंकन) में राजस्थान की अर्थव्यवस्था से पिछले वर्षों में नियमित रूप से प्रश्न आए हैं। कराधान से बहुविकल्पीय प्रश्नों में कर के प्रकार, GST की संरचना, संवैधानिक प्रावधान और राजस्थान के कर स्रोत पूछे जा सकते हैं।
महत्वपूर्ण तिथियाँ और घटनाएँ: 1 अप्रैल 2006 - राजस्थान में वैट लागू; 1 जुलाई 2017 - GST लागू; 22 सितंबर 2025 - GST की नई दर-संरचना (5%, 18% और 40%) लागू; 1 अप्रैल - नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत।
स्मरण युक्तियां
- GST के तीन मुख्य भाग: CGST (केंद्रीय), SGST (राज्य), IGST (एकीकृत, अंतर-राज्य आपूर्ति पर)।
- वित्त आयोग से करों में राज्यों का हिस्सा: 14वें आयोग में 42%, 15वें में 41%; 16वें आयोग (2026-31) ने भी 41% की सिफारिश की है।
- राजस्थान में वैट 1 अप्रैल 2006 से और GST 1 जुलाई 2017 से लागू हुआ।
- GST परिषद का प्रावधान अनुच्छेद 279A में है; राज्य वित्त आयोग का अनुच्छेद 243-I में।
- खनन रॉयल्टी कर नहीं, गैर-कर राजस्व है।
⚡ त्वरित रिवीजन — One-Liners
- •राजस्थान में बाजरा सर्वाधिक उत्पादित खाद्य फसल है; देश के कुल बाजरा उत्पादन में प्रथम स्थान।
- •राजस्थान सीसा-जस्ता, तांबा, संगमरमर और जिप्सम में देश में प्रथम स्थान पर है।
- •इंदिरा गांधी नहर परियोजना थार मरुस्थल में सिंचाई की सबसे बड़ी परियोजना है; यह व्यास और सतलज नदियों से जल लेती है।
- •राजस्थान भारत के GDP में लगभग 5% योगदान करता है (2023-24)।
- •राजस्थान की अर्थव्यवस्था में कृषि व सम्बद्ध क्षेत्र ~25-26% योगदान देते हैं।