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राजस्थान की अरावली पर्वतमाला — चोटियाँ, दर्रे, विभाजन एवं तथ्य

Aravalli Range in Rajasthan — Peaks, Passes, Divisions & Facts

10 मिनटintermediate✓ अपडेटेड: जुलाई 2026· Geography of World and India

अरावली पर्वतमाला: राजस्थान की रीढ़

राजस्थान के लगभग मध्य भाग से कर्णवत (तिरछे) रूप में गुजरने वाली अरावली पर्वतमाला पृथ्वी की सबसे प्राचीन वलित पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है, जिसकी उत्पत्ति प्री-केम्ब्रियन कल्प में लगभग 650 मिलियन वर्ष पूर्व मानी जाती है। भूवैज्ञानिक इसे प्राचीन गोंडवाना लैंड के अवशिष्ट भाग के रूप में वर्णित करते हैं। उद्भव के समय यह पर्वतमाला आज के हिमालय से भी ऊँची थी, लेकिन करोड़ों वर्षों के निरंतर अनाच्छादन (क्षरण) ने इसे एक निचली, अवशिष्ट पर्वत श्रृंखला में बदल दिया — कुछ-कुछ उत्तरी अमेरिका के अप्लेशियन पर्वतों जैसी। यही दीर्घकालिक अपरदन इसे युवा पर्वतों जैसे हिमालय की तीखी, नुकीली आकृति के बजाय गोल और घिसे-पिटे स्वरूप में ढाल देता है।

अरावली केवल एक भौगोलिक जिज्ञासा नहीं है — इसे प्रायः 'राजस्थान की जीवन रेखा' कहा जाता है, क्योंकि राज्य में बहने वाली लगभग हर उल्लेखनीय नदी का उद्गम इसी की ढलानों से होता है। यह राजस्थान को दो बिल्कुल भिन्न भू-भागों में बाँटती है — उत्तर-पश्चिम में शुष्क, रेतीले क्षेत्र तथा दक्षिण-पूर्व में अपेक्षाकृत उपजाऊ व अधिक वर्षा वाले मैदान और पठार।

विस्तार, दिशा एवं भौगोलिक निर्देशांक

यह पर्वतमाला दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर तिरछे रूप में गुजरात के पालनपुर स्थित खेड़ ब्रह्म से आरंभ होकर सिरोही जिले से होते हुए झुंझुनूँ जिले के खेतड़ी व सिंघाना तक एक सतत् श्रृंखला के रूप में फैली है। इसके आगे यह केवल छितरी हुई, टूटी-फूटी पहाड़ियों के रूप में दिल्ली तक पहुँचती है, जहाँ रायसीना पहाड़ी — जहाँ राष्ट्रपति भवन स्थित है — इसका अंतिम चिह्न मानी जाती है। राजस्थान के भीतर यह पट्टी लगभग 23°20' से 28°20' उत्तरी अक्षांश तथा 72°10' से 77°50' पूर्वी देशांतर के बीच स्थित है।

अरावली की कुल लंबाई 692 किमी है, जिसमें से लगभग 550 किमी (करीब 80 प्रतिशत) राजस्थान में स्थित है। यह श्रृंखला दक्षिण-पश्चिम में उल्लेखनीय रूप से अधिक चौड़ी व ऊँची है और उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ते हुए क्रमशः संकरी व नीची होती जाती है — इसकी आकृति की तुलना अक्सर तानपूरे से की जाती है, जिसका आधार चौड़ा-भरा हुआ और ऊपरी भाग पतला होता है।

एक नज़र में प्रमुख आँकड़े

  • क्षेत्रफल: राज्य के कुल भू-भाग का लगभग 9% (कुछ कक्षा 11 की पुस्तकों में 9.3% भी बताया गया है)।
  • जनसंख्या: इस पट्टी में राज्य की लगभग 10% जनसंख्या निवास करती है, जिसमें अधिकांश जनजातीय समुदाय शामिल हैं।
  • औसत वर्षा: 50 सेमी से 90 सेमी — यह पर्वतमाला एक प्राकृतिक जल विभाजक के रूप में कार्य करती है।
  • जलवायु व मिट्टी: उपआर्द्र जलवायु तथा काली, भूरी-लाल व कंकरीली मिट्टी।
  • समुद्र तल से औसत ऊँचाई: लगभग 930 मीटर।

चट्टानी संरचना

भूगर्भिक दृष्टि से अरावली प्री-केम्ब्रियन चट्टानी समूह से संबंधित है और इसे दो प्रमुख चट्टानी वर्गों में बाँटा जाता है — दिल्ली सुपरग्रुप, जिसमें क्वार्टजाइट की प्रधानता है, तथा अरावली सुपरग्रुप, जिसमें नीस, शिष्ट व ग्रेनाइट चट्टानें अधिक पाई जाती हैं। मुख्य श्रेणी स्वयं मूलतः क्वार्टजाइट की बनी है। ब्यावर के निकट सेंदड़ा के आसपास सर्पाकार (कोबरा के फण जैसी) ग्रेनाइट चट्टानें आम हैं, और इन पर्वतों में गहरी, प्रौढ़ावस्था प्राप्त घाटियाँ हैं जो इनकी अत्यधिक प्राचीनता का प्रमाण देती हैं।

अरावली के तीन प्रमुख भाग

ऊँचाई व स्वरूप के आधार पर भूगोलवेत्ता राजस्थान की अरावली प्रणाली को तीन मुख्य भागों में बाँटते हैं — उत्तरी-पूर्वी पहाड़ी प्रदेश, मध्यवर्ती अरावली श्रेणी, तथा दक्षिणी अरावली प्रदेश (जिसमें मेवाड़ का चट्टानी क्षेत्र व आबू पर्वत खंड शामिल हैं)।

1. उत्तरी-पूर्वी पहाड़ी प्रदेश

यह भाग जयपुर से खेतड़ी व झुंझुनूँ की ओर फैला है, जो साँभर झील के उत्तर-पूर्व से राजस्थान-हरियाणा सीमा तक विस्तृत है। इसमें शेखावाटी व तोरावाटी क्षेत्रों की पहाड़ियों के साथ-साथ जयपुर, कोटपूतली-बहरोड़, दौसा व अलवर की पहाड़ियाँ भी शामिल हैं। यहाँ अरावली श्रृंखला टूटी-फूटी व अनवरत नहीं है, क्वार्टजाइट व फाइरोलाइट शैलों से बनी अपरदित पहाड़ियों के बीच उपजाऊ घाटियाँ व काँपीय बेसिन पाए जाते हैं। औसत ऊँचाई लगभग 450 मीटर है, जो कुछ स्थानों पर 750 मीटर तक पहुँच जाती है। अलवर के पास श्रेणी पुनः सघन हो जाती है, जहाँ कई उल्लेखनीय चोटियाँ मिलती हैं। इस उत्तरी पट्टी का सर्वोच्च बिंदु रघुनाथगढ़ (1055 मी., सीकर) है।

चोटीऊँचाईजिला
रघुनाथगढ़1055 मी.सीकर
लोहार्गल1051 मी.झुंझुनूँ
मालखेत1052 मी.सीकर
खौ920 मी.जयपुर
भैराच792 मी.अलवर
बिलाली775 मी.अलवर
बरवाड़ा786 मी.सवाई माधोपुर
हर्षनाथ चोटी820 मी.सीकर
बाबाई780 मी.झुंझुनूँ
मनोहरपुरा747 मी.जयपुर
बैराठ704 मी.कोटपूतली-बहरोड़
सरिस्का677 मी.अलवर
सिरावास651 मी.अलवर
भानगढ़649 मी.अलवर
जयगढ़648 मी.जयपुर
नाहरगढ़599 मी.जयपुर
अलवर दुर्ग597 मी.अलवर

2. मध्यवर्ती अरावली श्रेणी

यह मध्य भाग मुख्यतः अजमेर, ब्यावर व भीलवाड़ा में फैला है, और इसमें शेखावाटी क्षेत्र (सीकर-झुंझुनूँ) की निम्न पहाड़ियाँ व जयपुर जिले का कुछ भाग भी शामिल है। इसका विस्तार दक्षिण-पश्चिम जयपुर स्थित साँभर से लेकर राजसमंद जिले की देवगढ़ तहसील तक है। उत्तरी अजमेर प्रायः समतल है, जबकि ब्यावर क्षेत्र काफी पहाड़ी है, जहाँ पहाड़ियों की औसत ऊँचाई लगभग 700 मीटर है; मध्यवर्ती अरावली पट्टी की कुल औसत ऊँचाई लगभग 550 मीटर है। इस भाग को आगे शेखावाटी निम्न पहाड़ियों व मेरवाड़ा पहाड़ियों में बाँटा जाता है — मेरवाड़ा पहाड़ियाँ वह श्रेणी है जो मेवाड़ के उच्च पठार को मारवाड़ के मैदान से अलग करती है। साँभर के आसपास का क्षेत्र इस मध्य पट्टी का सबसे निचला भाग है। यहाँ दो चोटियाँ शेष सबसे ऊँची हैं: गोरमजी (934 मी.) व मायरजी (933 मी.), दोनों ब्यावर के टोडगढ़ के निकट मेरवाड़ा पहाड़ियों में स्थित हैं।

चोटीऊँचाईजिला
गोरमजी934 मी.ब्यावर
मायरजी933 मी.ब्यावर
तारागढ़873 मी.अजमेर
नाग पहाड़795 मी.अजमेर

ब्यावर की मेरवाड़ा पहाड़ियों में चार ऐतिहासिक दर्रे हैं — बर, पखेरिया, शिवपुरघाट व सूराघाट — जबकि इस पट्टी के अन्य दर्रों में जीलवाड़ा की नाल, कछवाली, अरणिया व पीपली शामिल हैं।

3. दक्षिणी अरावली प्रदेश

राजसमंद से आबू तक फैला दक्षिणी भाग समूची अरावली प्रणाली का सबसे ऊँचा, चौड़ा व सघन हिस्सा है, जो सिरोही, उदयपुर, सलूम्बर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, बाँसवाड़ा व डूँगरपुर के कुछ भागों में फैला है। इसका विस्तार लगभग 23°46' से 26°02' उत्तरी अक्षांश तथा 72°16' से 74°35' पूर्वी देशांतर के बीच है, और इसे परंपरागत रूप से दो भागों में बाँटा जाता है — मेवाड़ का चट्टानी प्रदेश तथा आबू पर्वत खंड। दक्षिणी अरावली की औसत ऊँचाई लगभग 950 मीटर है, जो तीनों भागों में सर्वाधिक है।

मेवाड़ का चट्टानी प्रदेश एवं भोराठ का पठार

यह भाग उदयपुर, सलूम्बर, डूँगरपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़ तथा पूर्वी सिरोही की पहाड़ियों को समाहित करता है, जो हाथ के खुले पंजे जैसी आकृति में फैली हैं। आबू खंड को छोड़कर, समूची अरावली प्रणाली की सबसे ऊँची भूमि भोराठ का पठार है, जो उदयपुर के उत्तर-पश्चिम में कुंभलगढ़ व गोगुन्दा के बीच स्थित है, जिसकी औसत ऊँचाई लगभग 1225 मीटर है। इसी पठार पर जरगा चोटी (1431 मी.) भी स्थित है, जो उदयपुर-राजसमंद पट्टी का सबसे ऊँचा बिंदु और राज्य की चौथी सर्वोच्च चोटी है; इसकी संरचना को प्रायः एक जटिल भूगर्भिक 'गाँठ' के रूप में वर्णित किया जाता है। सलूम्बर स्थित जयसमंद झील के पूर्व में विषम, कटा-फटा लसाड़िया पठार स्थित है। महत्वपूर्ण बात यह है कि भोराठ पठार का दक्षिणी स्कंध अरब सागर व बंगाल की खाड़ी के जल प्रवाह के बीच एक महान जल विभाजक का कार्य करता है — यही वह बिंदु है जहाँ भारत की महान जल विभाजक रेखा उदयपुर के निकट मुड़कर दक्षिण-पूर्व की ओर चली जाती है।

चोटीऊँचाईजिला
कुंभलगढ़1224 मी.राजसमंद
कमलनाथ की पहाड़ी1001 मी.उदयपुर
सज्जनगढ़, उदयपुर938 मी.उदयपुर
सायरा900 मी.उदयपुर
लीलागढ़874 मी.उदयपुर
नागपानी867 मी.उदयपुर
गोगुन्दा840 मी.उदयपुर
कोटड़ा450 मी.उदयपुर
ऋषभदेव400 मी.उदयपुर

स्थानीय बोलचाल में यहाँ की भू-आकृतियों के लिए कई विशिष्ट शब्द प्रचलित हैं: 'भाकर' पूर्वी सिरोही की तीव्र ढाल वाली ऊबड़-खाबड़ कटक पहाड़ियों के लिए प्रयुक्त होता है; 'गिरवा' उदयपुर शहर के आसपास तश्तरीनुमा घेरे में फैली पहाड़ियों को कहते हैं; 'मगरा' उदयपुर के जनजाति बहुल उत्तर-पश्चिमी पहाड़ी भाग का नाम है; तथा 'मेसा का पठार' चित्तौड़गढ़ का वह पठारी भाग है जिस पर चित्तौड़गढ़ दुर्ग स्वयं स्थित है।

महान सीमा भ्रंश (Great Boundary Fault)

उदयपुर के दक्षिण से एक प्रमुख भूगर्भिक संरचना आरंभ होती है, जिसे महान सीमा भ्रंश कहा जाता है, और यह राज्य के दक्षिण-पूर्वी भाग से होकर गुजरती है। यह चित्तौड़गढ़ के बेगूँ तथा उत्तरी कोटा में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, और पुनः सवाई माधोपुर, करौली व धौलपुर जिलों में उभरती है। भूवैज्ञानिक हैरॉन ने इस भ्रंश रेखा को 'थ्रस्ट' कहा था।

आबू पर्वत खंड

पूर्णतः सिरोही जिले में स्थित आबू पर्वत खंड (जिसे अर्बुद भी कहते हैं) समूची अरावली प्रणाली का सर्वोच्च भाग है, जिसकी औसत ऊँचाई 1200 मीटर से भी अधिक है और जो मुख्यतः ग्रेनाइट चट्टानों से बना है। यह खंड लगभग 19 किमी लंबा व 8 किमी चौड़ा है, जो एक अनियमित बैसोलिथ पठार बनाता है, जिसे स्थलाकृति की दृष्टि से एक विशाल 'इन्सेलबर्ग' कहा जा सकता है। माउंट आबू से सटा हुआ उड़िया पठार (1360 मी.) राज्य का सबसे ऊँचा पठार है, जो सबसे ऊँची चोटी गुरु शिखर के ठीक नीचे स्थित है। आबू क्षेत्र सघन वनों से आच्छादित है और यह राज्य के सर्वाधिक प्राकृतिक सौंदर्य वाले क्षेत्रों में गिना जाता है।

चोटीऊँचाईजिला
गुरु शिखर1722 मी.सिरोही
सेर (राज्य की दूसरी सर्वोच्च चोटी)1597 मी.सिरोही
दिलवाड़ा1442 मी.सिरोही
अचलगढ़1380 मी.सिरोही
आबू1295 मी.सिरोही
धोनिया1183 मी.सिरोही
जयराज1090 मी.सिरोही
ऋषिकेश1017 मी.सिरोही
मानगाँव923 मी.सिरोही

जसवंतपुरा एवं सिवाना की पहाड़ियाँ

आबू खंड के पश्चिम में जसवंतपुरा की पहाड़ियाँ हैं, जिनका सर्वोच्च बिंदु डोरा पर्वत (869 मी.) है। इससे आगे, सिवाना की गोलाकार ग्रेनाइट पहाड़ियाँ (जालौर व बालोतरा जिलों में फैली हुई) को छप्पन की पहाड़ियाँ भी कहा जाता है, जिनमें नाकोड़ा पर्वत एक प्रमुख बिंदु है। यहाँ ग्रेनाइट की इतनी अधिकता है कि जालौर को 'ग्रेनाइट नगरी' की उपाधि मिली है। नाकोड़ा (मेवानगर) कस्बा भगवान पार्श्वनाथ के प्रसिद्ध जैन मंदिर तथा अधिष्ठापक देव भैरव के मंदिर के लिए जाना जाता है।

चोटीऊँचाई
सुंधा पर्वत991 मी.
इसराना भाखर839 मी.
रोजा भाखर730 मी.
झारोला भाखर588 मी.

गुरु शिखर — सबसे ऊँची चोटी

1722 मीटर (कुछ अनुमानों के अनुसार 5650 फीट) की ऊँचाई वाला गुरु शिखर सिरोही जिले के माउंट आबू पर स्थित है और राजस्थान की सर्वोच्च चोटी का गौरव रखता है। और भी उल्लेखनीय बात यह है कि यह उत्तर में हिमालय व दक्षिण में नीलगिरि पर्वतों के बीच की सबसे ऊँची चोटी है। राजपूताने के प्रसिद्ध इतिहासकार कर्नल जेम्स टॉड ने इसे 'संतों का शिखर' कहा, और इसे 'गुरु माथा' के नाम से भी जाना जाता है। टॉड ने माउंट आबू को स्वयं भी एक सुंदर उपाधि दी — 'हिन्दू ओलम्पस' — जो पहाड़ी पर बिखरे अनगिनत मंदिरों व देवालयों की ओर इशारा करती है।

अरावली के प्रमुख दर्रे (नाल/घाट)

अरावली अनेक पर्वतीय दर्रों से गुँथी हुई है, जो ऐतिहासिक रूप से सामरिक व व्यापारिक मार्गों के रूप में उपयोग में लाए जाते रहे हैं। सबसे महत्वपूर्ण दर्रों में देसूरी की नाल, हाथी गुड़ा का दर्रा, केवड़ा की नाल, जीलवाड़ा (जीलवा) की नाल — जिसे पगल्या नाल भी कहते हैं, सोमेश्वर नाल, दिवेर के निकट शिवपुर घाट (सरूप घाट), ऐतिहासिक हल्दीघाटी का दर्रा तथा देबारी दर्रा शामिल हैं। विशेष रूप से दक्षिणी अरावली में प्रमुख दर्रे हैं — जीलवा की नाल (पगल्या नाल), सोमेश्वर की नाल, हाथीगुड़ा की नाल, दिवेर दर्रा, हल्दीघाटी दर्रा, देसूरी की नाल तथा कुंभलगढ़ का दर्रा।

उपनाम एवं ऐतिहासिक संदर्भ

सदियों से इतिहासकारों व यात्रियों ने अरावली के लिए अनेक रोचक विशेषण गढ़े हैं। मुगल इतिहासकार अबुल फजल ने अरावली की पहाड़ियों को 'ऊँट की गर्दन' के समान बताया। कर्नल जेम्स टॉड ने इस समूची श्रेणी को 'राजपूताने की सुरक्षा दीवार' कहा, जो क्षेत्र की रियासतों के लिए इसकी प्राकृतिक रक्षात्मक भूमिका को रेखांकित करता है।

जलवायु में भूमिका — प्रकृति की महान जल विभाजक रेखा

अरावली राजस्थान की जलवायु को गढ़ने में बड़ी भूमिका निभाती है। इसकी ढलानों पर उगे वनस्पति आवरण से उत्सर्जित नमी मानसूनी पवनों को आकर्षित कर वर्षा में सहायक होती है, विशेषकर श्रेणी के पूर्वी हिस्से में। एक क्रेस्ट लाइन के रूप में कार्य करते हुए यह उत्तर-पश्चिम में सिन्धु बेसिन को पूर्व में गंगा बेसिन से अलग करती है। पूर्वी ढलानों पर गिरने वाला वर्षाजल अंततः पूर्व की ओर बहती नदियों के माध्यम से बंगाल की खाड़ी तक पहुँचता है, जबकि पश्चिमी ढलानों का जल अरब सागर की ओर बहता है। चूँकि यह श्रेणी अरब सागर से आने वाली दक्षिण-पश्चिमी मानसूनी पवनों की दिशा के लगभग समानांतर फैली है, इसलिए वे नमी युक्त पवनें राजस्थान में अधिकांशतः बिना वर्षा किए ही आगे निकल जाती हैं, जिससे राज्य का पश्चिमी भाग लगातार शुष्क बना रहता है — यह इस बात का आदर्श उदाहरण है कि किसी पर्वत का वर्षा-प्रभाव केवल उसकी ऊँचाई से नहीं, बल्कि उसकी दिशा से भी नियंत्रित होता है। यह श्रेणी पश्चिमी मरुस्थल के पूर्व की ओर विस्तार को भी भौतिक रूप से रोकती है, जो शुष्क पश्चिम व उपजाऊ पूर्व के बीच एक प्राकृतिक बाड़ का कार्य करती है।

खनिज एवं आर्थिक महत्व

अरावली की श्रेणियों के बीच बसी घाटियाँ व बेसिन — जैसे अलवर, बैराठ, सरिस्का, जयपुर, पुष्कर, उदयपुर, राजसमंद, ब्यावर व अजमेर बेसिन — आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, जहाँ उपजाऊ कृषि क्षेत्रों के साथ-साथ प्रचुर खनिज संपदा भी पाई जाती है। ताँबा, सीसा, जस्ता, अभ्रक, चाँदी, लोहा, मैंगनीज, फेल्सपार, ग्रेनाइट, मार्बल, चूना पत्थर व एसबेस्टोस — ये सभी इस पट्टी में प्रचुर मात्रा में मिलते हैं, जिससे अरावली क्षेत्र राजस्थान की खनन अर्थव्यवस्था में एक बड़ा योगदानकर्ता बन जाता है।

अरावली की जनजातियाँ

अरावली के पहाड़ी व वनाच्छादित क्षेत्र कई जनजातीय समुदायों का घर हैं, जिनमें प्रमुख हैं भील, मीणा, गरासिया व डामोर। ये समुदाय पीढ़ियों से इन पहाड़ों के आसपास बसे हैं, और इनकी संस्कृति इस क्षेत्र की भू-आकृति व वन संसाधनों से गहराई से जुड़ी हुई है।

अरावली नदी घाटियों में प्राचीन सभ्यताएँ

अरावली से निकलने वाली नदियों ने ऐसी घाटियाँ बनाईं जिन्होंने क्षेत्र की कुछ प्राचीनतम ज्ञात बस्तियों को पोषित किया, जिनमें आहड़, बालाथल व बागोर सभ्यताएँ शामिल हैं — जो इस पर्वतीय पट्टी में प्रागैतिहासिक काल से ही निरंतर मानव बसाव के प्रमाण हैं।

वनस्पति एवं वन्यजीव

दक्षिणी अरावली की सामान्य वनस्पति में ढाक, गूलर, हरड़, आम, जामुन, गुगल, शीशम, आँवला, नीम, बहेड़ा व पीपल जैसे वृक्ष शामिल हैं। इस श्रेणी में अनेक वन्यजीव अभयारण्य फैले हुए हैं, जो विविध वन्यजीवों को आश्रय देते हैं और देशभर से पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। माउंट आबू को स्वयं राजस्थान में सर्वाधिक वार्षिक वर्षा (लगभग 150 सेमी) प्राप्त करने का गौरव प्राप्त है — जो श्रेणी की पश्चिमी तलहटी से ठीक परे स्थित शुष्क मरुस्थलीय जिलों से एकदम विपरीत है।

🧠 याद रखने की तरकीब — शीर्ष चोटियाँ (ऊँचाई के अवरोही क्रम में)
"गुरु का शेर दिलवाड़ा में जरगा को अचलगढ़ तक ले गया"
गुरु (शिखर) 1722 मी. → शेर 1597 मी. → दिलवाड़ा 1442 मी. → जरगा (चोटी) 1431 मी. → अचलगढ़ 1380 मी.
सत्यापन: वाक्य के हर नाम की ऊँचाई क्रमशः घटती है — 1722 > 1597 > 1442 > 1431 > 1380 (सभी सिरोही में, आबू पर्वत खंड)।
⚠️ भ्रम-निवारक: गुरु शिखर बनाम जरगा चोटी
गुरु शिखर
1722 मी. • माउंट आबू, सिरोही (आबू पर्वत खंड)
राजस्थान व समूची अरावली की सबसे ऊँची चोटी (आबू खंड सहित)
जरगा चोटी
1431 मी. • भोराठ पठार, उदयपुर-राजसमंद
आबू खंड को छोड़कर अरावली का सबसे ऊँचा बिंदु; राज्य की चौथी सर्वोच्च चोटी
याद रखें: 'आबू खंड को छोड़कर सबसे ऊँचा भाग' पूछे जाने पर उत्तर भोराठ पठार/जरगा है, न कि गुरु शिखर।
आरेखीय चित्र, भौगोलिक रूप से सटीक नहीं / Schematic diagram, not to scale — अरावली पर्वतमाला: दक्षिण-पश्चिम (गुजरात) से उत्तर-पूर्व (दिल्ली) / Aravalli Range: South-west (Gujarat) to North-east (Delhi)
अरावली पर्वतमाला का आरेखीय मानचित्र / Schematic map of the Aravalli Rangeअरावली मुख्य कटक: खेड़ ब्रह्म (गुजरात) से खेतड़ी-सिंघाना (झुंझुनूँ) तक / Main Aravalli ridge: Khed Brahma (Gujarat) to Khetri-Singhana (Jhunjhunu)आगे टूटी-फूटी पहाड़ियों के रूप में दिल्ली तक / Continues as scattered broken hillocks up to Delhiमाउंट आबू / गुरु शिखर (1722 मी., सिरोही) - राजस्थान व अरावली की सबसे ऊँची चोटी / Mount Abu / Guru Shikhar (1722 m, Sirohi) - highest peak of Rajasthan and the Aravalliगुरु शिखर बिंदु / Guru Shikhar pointमाउंट आबू, सिरोही / Mount Abu, Sirohiमाउंट आबूभोराठ पठार / जरगा चोटी (1431 मी., उदयपुर-राजसमंद) - आबू खंड को छोड़कर अरावली का सबसे ऊँचा भाग / Bhorat Plateau / Jarga Peak (1431 m, Udaipur-Rajsamand) - highest part of the Aravalli excluding the Abu blockभोराठ पठार / जरगा, उदयपुर-राजसमंद / Bhorat Plateau / Jarga, Udaipur-Rajsamandभोराठ/जरगारघुनाथगढ़ (1055 मी., सीकर) - उत्तरी-पूर्वी पहाड़ी प्रदेश का सर्वोच्च बिंदु / Raghunathgarh (1055 m, Sikar) - highest point of the Northern-Eastern Hilly Regionरघुनाथगढ़, सीकर / Raghunathgarh, Sikarरघुनाथगढ़दिल्ली - रायसीना पहाड़ी, अरावली का अंतिम चिह्न / Delhi - Raisina Hill, the Aravalli's final traceदिल्ली / Delhiदिल्लीदक्षिण-पश्चिम / South-westSW (गुजरात)उत्तर-पूर्व / North-eastNE (दिल्ली की ओर)

त्वरित तथ्य

  • सिरोही जिले के माउंट आबू पर स्थित गुरु शिखर (1722 मी.) राजस्थान की सबसे ऊँची चोटी है और साथ ही हिमालय व नीलगिरि के बीच की सबसे ऊँची चोटी भी है; सिरोही की ही सेर चोटी (1597 मी.) दूसरी सर्वोच्च चोटी है।
  • अरावली की कुल लंबाई 692 किमी है, जिसमें से लगभग 550 किमी (करीब 80%) राजस्थान में स्थित है, जो गुजरात के खेड़ ब्रह्म से झुंझुनूँ के खेतड़ी-सिंघाना तक तथा आगे टुकड़ों में दिल्ली की रायसीना पहाड़ी तक फैली है।
  • कर्नल जेम्स टॉड ने माउंट आबू को 'हिन्दू ओलम्पस' और अरावली को 'राजपूताने की सुरक्षा दीवार' कहा, जबकि अबुल फजल ने इसकी पहाड़ियों की तुलना ऊँट की गर्दन से की।
  • अरावली सिन्धु बेसिन व गंगा बेसिन के बीच महान जल विभाजक का कार्य करती है, और दक्षिण-पश्चिमी मानसून के समानांतर दिशा में फैली होने के कारण पश्चिमी राजस्थान अधिकांशतः वर्षाविहीन रह जाता है।

त्वरित रिवीजन — One-Liners

  • थार मरुस्थल विश्व का 9वाँ सबसे बड़ा मरुस्थल है; यह राजस्थान के पश्चिमी भाग में है।
  • चंबल नदी राजस्थान की एकमात्र बारहमासी नदी है; यह यमुना में मिलती है।
  • भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून जून में केरल पहुंचता है; यह अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों से आता है।
  • कर्क रेखा (23.5°N) राजस्थान के बांसवाड़ा जिले से गुजरती है।
  • मकराना (नागौर) का सफेद संगमरमर ताजमहल में प्रयुक्त।
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1

राजस्थान की सबसे ऊँची पर्वत चोटी 'गुरु शिखर' किस जिले में स्थित है?

2

आबू पर्वत खंड को छोड़कर, अरावली का सबसे ऊँचा भाग कौन सा पठार है, जो कुंभलगढ़ व गोगुन्दा के बीच स्थित है?

3

निम्नलिखित अरावली चोटियों को उनकी ऊँचाई के अवरोही (घटते) क्रम में व्यवस्थित करें: (i) सेर (ii) दिलवाड़ा (iii) जरगा चोटी (iv) कुंभलगढ़

4

निम्नलिखित में से कौन सा राजस्थान में अरावली प्रणाली के तीन प्रमुख भागों में से एक नहीं है?

5

दिवेर के निकट स्थित अरावली का कौन सा दर्रा 'सरूप घाट' के नाम से भी जाना जाता है?

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