अनुस्मारक
अनुस्मारक पहले भेजे गए पत्र की याद दिलाने के लिए लिखा जाता है। इसकी पूरी पहचान एक ही बात से बनती है — पूर्व पत्र की संख्या और दिनांक। वह छूट जाए तो शेष पत्र चाहे कितना ही अच्छा लिखा हो, वह अनुस्मारक रह ही नहीं जाता।
अनुस्मारक क्या है
जब किसी कार्यालय को भेजे गए पत्र का उत्तर निर्धारित समय में नहीं आता, तब वही कार्यालय उसी प्राप्तकर्ता को स्मरण कराने के लिए जो पत्र भेजता है, उसे अनुस्मारक कहते हैं। यह नया विषय नहीं उठाता — पुराने विषय को फिर सामने रखता है। इसीलिए यह छोटा होता है, प्रायः दो अनुच्छेदों का।
इसकी भाषा में एक संतुलन साधना पड़ता है। शिकायत का स्वर नहीं आना चाहिए, क्योंकि पत्र समान या उच्च कार्यालय को जा रहा है; पर आग्रह ढीला भी नहीं पड़ना चाहिए, अन्यथा वह अनुस्मारक क्यों भेजा गया यह स्पष्ट नहीं होता। ‘अब तक कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ है’ — यह वाक्य तथ्य बताता है, आरोप नहीं लगाता, और इसीलिए हर अनुस्मारक में चलता है।
एक ही विषय पर एक से अधिक अनुस्मारक भेजने पड़ें तो उन्हें क्रम दिया जाता है — प्रथम अनुस्मारक, द्वितीय अनुस्मारक। परीक्षा में यदि प्रश्न में यह संकेत हो कि पहले भी स्मरण कराया जा चुका है, तो यह क्रम लिखना चाहिए।
अनुस्मारक के अंग
| क्रम | अंग | ध्यान देने की बात |
|---|---|---|
| 1 | पत्र संख्या और दिनांक | नई संख्या, पर प्रायः उसी पत्रावली की |
| 2 | प्रेषक और सेवा में | वही, जो मूल पत्र में थे |
| 3 | विषय | मूल पत्र का ही विषय, अंत में ‘के संबंध में’ |
| 4 | संदर्भ | ‘संदर्भ — इस कार्यालय का पत्र संख्या ..., दिनांक ...’ — यही अनिवार्य अंग है |
| 5 | संबोधन | महोदय, |
| 6 | पहला अनुच्छेद | पूर्व पत्र की याद और यह तथ्य कि उत्तर नहीं आया |
| 7 | दूसरा अनुच्छेद | शीघ्र कार्यवाही का आग्रह, प्रायः एक निश्चित तिथि सहित |
| 8 | समापन | भवदीय, — हस्ताक्षर और पदनाम |
अंग 4 इस प्रारूप का प्राण है। शेष सात अंग सरकारी पत्र जैसे ही हैं।
आदर्श नमूना उत्तर
नीचे का नमूना प्रथम अनुस्मारक का है।
नमूना — पत्र का शीर्ष भाग
- पत्र संख्या
- जि.उ.के./सांख्यिकी/2026/561
- प्रेषक
- जिला उद्योग केंद्र, (जिले का नाम)
- सेवा में
- समस्त विकास अधिकारी, पंचायत समिति — (जिले की समस्त पंचायत समितियाँ)
- दिनांक
- 18 अगस्त 2026
- विषय
- ग्रामीण दस्तकारों की सूचना उपलब्ध कराने के संबंध में — प्रथम अनुस्मारक।
- संदर्भ
- इस कार्यालय का पत्र संख्या जि.उ.के./सांख्यिकी/2026/402, दिनांक 21 जुलाई 2026।
महोदय,
उपर्युक्त संदर्भित पत्र द्वारा आपसे अपने क्षेत्र के ग्रामीण दस्तकारों की निर्धारित प्रपत्र में सूचना 5 अगस्त 2026 तक चाही गई थी। खेद है कि नियत तिथि बीत जाने के उपरांत भी आपके कार्यालय से यह सूचना अब तक प्राप्त नहीं हुई है।
सूचना के अभाव में जिले का समेकित प्रतिवेदन तैयार नहीं किया जा सका है, जिसे निदेशालय को भेजा जाना है। अतः अनुरोध है कि वांछित सूचना निर्धारित प्रपत्र में 25 अगस्त 2026 तक इस कार्यालय को अनिवार्य रूप से भिजवाने का श्रम करें।
भवदीय,
(हस्ताक्षर)
(नाम) महाप्रबंधक, जिला उद्योग केंद्र, (जिले का नाम)
तीन भूलें जो अनुस्मारक को अनुस्मारक नहीं रहने देतीं
संदर्भ न लिखना
पूर्व पत्र की संख्या और दिनांक ही वह अंग है जो इसे साधारण पत्र से अलग करता है। वह न हो तो परीक्षक के पास यह मानने का कोई आधार नहीं कि आपने अनुस्मारक लिखा है।
पूरा विषय दोबारा समझा देना
अनुस्मारक विषय दोहराता नहीं, याद दिलाता है। मूल पत्र की बात एक पंक्ति में आनी चाहिए, एक अनुच्छेद में नहीं। लंबा अनुस्मारक अपने आप में विरोधाभास है।
शिकायत का स्वर आ जाना
‘आपकी लापरवाही के कारण’ जैसे वाक्य सरकारी पत्राचार में नहीं आते। तथ्य लिखिए — ‘अब तक प्राप्त नहीं हुई है’ — और परिणाम लिखिए — ‘प्रतिवेदन तैयार नहीं हो सका’। आग्रह इन्हीं दो तथ्यों से अपने आप बन जाता है।
स्रोत और नमूनों के बारे में
यह पृष्ठ RPSC के आधिकारिक पाठ्यक्रम एवं परीक्षा योजना, दिनांक 09-01-2026 के आधार पर बनाया गया है। आयोग का अपना नोट भी ध्यान में रखिए — परीक्षा योजना केवल सामान्य मार्गदर्शन के लिए है, अंक और प्रश्न-संख्या में बदलाव संभव है। नीचे दिए गए सभी नमूने पढ़ाने के लिए स्वयं तैयार किए गए हैं; उनमें आए पत्र-क्रमांक, तिथियाँ और कार्यालय काल्पनिक हैं और किसी वास्तविक सरकारी दस्तावेज़ की प्रतिलिपि नहीं हैं।