सामान्य कार्यालयी पत्र (सरकारी पत्र)
सरकारी पत्र वह पत्र है जो एक सरकारी कार्यालय दूसरे सरकारी कार्यालय को भेजता है। पूरे भाग स में यही सबसे अधिक पूछा जाने वाला प्रारूप है, और इसमें अंक विषय-वस्तु से ज़्यादा प्रारूप पर मिलते हैं — क्रम एक बार सीख लेने पर हर बार वही रहता है।
सरकारी पत्र क्या है
सरकारी पत्र, जिसे कार्यालयी पत्र भी कहा जाता है, शासन के भीतर का औपचारिक पत्राचार है — एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय को, या अधीनस्थ कार्यालय से उच्च कार्यालय को, या उच्च से अधीनस्थ को। इसे कोई व्यक्ति अपनी ओर से नहीं लिखता; लिखता कार्यालय है और हस्ताक्षर उसका अधिकारी पदनाम के साथ करता है। यही कारण है कि इसमें ‘मैं’ नहीं आता, ‘लेख है’, ‘निवेदन है’, ‘अवगत कराया जाता है’ जैसे निर्वैयक्तिक वाक्य आते हैं।
परीक्षा की दृष्टि से यह प्रारूप सबसे सुरक्षित है, क्योंकि इसके अंग निश्चित हैं और उनका क्रम बदलता नहीं। जिस अभ्यर्थी को दस अंग क्रम से याद हैं, उसका आधा उत्तर प्रश्न पढ़ने से पहले ही तय हो चुका होता है।
पत्र के दस अंग — इसी क्रम में
| क्रम | अंग | क्या लिखा जाता है |
|---|---|---|
| 1 | पत्र संख्या | फ़ाइल या पत्रावली का क्रमांक, वर्ष सहित — पत्र के ऊपर बाईं ओर |
| 2 | प्रेषक | भेजने वाले का पदनाम और कार्यालय — नाम नहीं, केवल पद |
| 3 | सेवा में | प्राप्तकर्ता का पदनाम, कार्यालय और स्थान |
| 4 | स्थान और दिनांक | दाईं ओर, प्रेषक के स्थान के साथ |
| 5 | विषय | एक ही वाक्य में, ‘के संबंध में’ पर समाप्त |
| 6 | संबोधन | ‘महोदय,’ — एक ही शब्द, अलग पंक्ति में |
| 7 | विषय-वस्तु | पहला अनुच्छेद संदर्भ, बीच का तथ्य, अंतिम अनुच्छेद निवेदन या माँग |
| 8 | समापन | ‘भवदीय,’ — दाईं ओर |
| 9 | हस्ताक्षर और पदनाम | हस्ताक्षर के नीचे पदनाम, कार्यालय सहित |
| 10 | प्रतिलिपि | जिन्हें सूचनार्थ भेजी जा रही है, क्रमांक सहित |
अंग 1 से 6 तक पत्र का ‘शीर्ष’ है और उसी में प्रारूप के अंक बँटे होते हैं। अंग 7 विषय-वस्तु है, अंग 8 से 10 ‘पाद’।
आदर्श नमूना उत्तर
नीचे का नमूना एक अधीनस्थ कार्यालय से उच्च कार्यालय को भेजे जाने वाले पत्र का है — यही सबसे अधिक पूछा जाता है, क्योंकि इसमें निवेदन और स्वीकृति दोनों का भाव आता है। इसमें आए क्रमांक, दिनांक और कार्यालय केवल उदाहरण के लिए हैं।
नमूना — पत्र का शीर्ष भाग
- पत्र संख्या
- प्र.शि./माध्य./स्वीकृति/2026-27/418
- प्रेषक
- जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक), जिला — (जिले का नाम)
- सेवा में
- निदेशक, माध्यमिक शिक्षा विभाग, राजस्थान, बीकानेर
- स्थान एवं दिनांक
- (जिले का नाम), 12 अगस्त 2026
- विषय
- जिले के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों में अतिरिक्त कक्षा-कक्ष निर्माण की प्रशासनिक स्वीकृति के संबंध में।
महोदय,
उपर्युक्त विषय के संबंध में लेख है कि जिले के सात राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों में इस सत्र में नामांकन विगत सत्र की तुलना में लगभग अठारह प्रतिशत बढ़ा है। इन विद्यालयों में उपलब्ध कक्षा-कक्षों की संख्या उसी अनुपात में नहीं बढ़ी, जिसके कारण कई कक्षाएँ बरामदे में संचालित करनी पड़ रही हैं।
इस कार्यालय द्वारा तीनों ब्लॉकों का भौतिक निरीक्षण कराया गया है। निरीक्षण दल की रिपोर्ट के अनुसार सातों विद्यालयों में कुल चौदह अतिरिक्त कक्षा-कक्षों की आवश्यकता है। संबंधित विद्यालयों के भवन-परिसर में निर्माण हेतु पर्याप्त भूमि उपलब्ध है और उस पर कोई विवाद लंबित नहीं है। प्रस्तावित निर्माण का विस्तृत प्राक्कलन तथा निरीक्षण रिपोर्ट की प्रति इस पत्र के साथ संलग्न है।
अतः निवेदन है कि उक्त चौदह कक्षा-कक्षों के निर्माण हेतु प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान करने का श्रम करें, जिससे आगामी सत्र के आरंभ से पूर्व निर्माण कार्य पूर्ण कराया जा सके।
संलग्न — (1) निरीक्षण रिपोर्ट, (2) विस्तृत प्राक्कलन।
भवदीय,
(हस्ताक्षर)
(नाम) जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) जिला — (जिले का नाम)
प्रतिलिपि किस तरह लिखी जाती है
प्रतिलिपि — निम्नलिखित को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित :
1. जिला कलक्टर महोदय, (जिले का नाम) — सूचनार्थ।
2. अधिशासी अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग, (जिले का नाम) — प्राक्कलन के परीक्षण हेतु।
3. संबंधित समस्त प्रधानाचार्य — आवश्यक कार्यवाही हेतु।
जहाँ प्रारूप के अंक सबसे ज़्यादा कटते हैं
विषय में पूरा वाक्य लिख देना
विषय एक पंक्ति का होता है और ‘के संबंध में।’ पर समाप्त होता है। उसमें क्रिया लगाकर पूरा वाक्य बना देना सबसे आम भूल है — ‘...स्वीकृति दी जाए।’ नहीं, ‘...स्वीकृति के संबंध में।’
‘मैं’ लिख देना
सरकारी पत्र कार्यालय लिखता है, व्यक्ति नहीं। ‘मैं निवेदन करता हूँ’ की जगह ‘निवेदन है’ या ‘लेख है’ आएगा। उत्तम पुरुष केवल अर्द्धशासकीय पत्र में चलता है।
संबोधन और समापन का मेल न बैठना
‘महोदय,’ के साथ ‘भवदीय,’ ही आता है। ‘प्रिय महोदय’ और ‘आपका सद्भावी’ अर्द्धशासकीय पत्र के हैं; उन्हें यहाँ लिख देने पर प्रारूप ही बदल जाता है।
प्रतिलिपि छोड़ देना
प्रश्न में जब भी किसी और कार्यालय का उल्लेख हो, प्रतिलिपि अपेक्षित है। उसे न लिखने पर एक पूरा अंग छूट जाता है, जबकि उसे लिखने में तीन पंक्तियाँ लगती हैं।
अनुच्छेद न बाँटना
विषय-वस्तु के तीन अनुच्छेद — संदर्भ, तथ्य, निवेदन — अलग-अलग दिखने चाहिए। एक ही पैराग्राफ़ में सब लिख देने पर परीक्षक को संरचना दिखती ही नहीं।
स्रोत और नमूनों के बारे में
यह पृष्ठ RPSC के आधिकारिक पाठ्यक्रम एवं परीक्षा योजना, दिनांक 09-01-2026 के आधार पर बनाया गया है। आयोग का अपना नोट भी ध्यान में रखिए — परीक्षा योजना केवल सामान्य मार्गदर्शन के लिए है, अंक और प्रश्न-संख्या में बदलाव संभव है। नीचे दिए गए सभी नमूने पढ़ाने के लिए स्वयं तैयार किए गए हैं; उनमें आए पत्र-क्रमांक, तिथियाँ और कार्यालय काल्पनिक हैं और किसी वास्तविक सरकारी दस्तावेज़ की प्रतिलिपि नहीं हैं।