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अर्द्धशासकीय पत्र (डी.ओ. पत्र)

अर्द्धशासकीय पत्र वह अकेला सरकारी प्रारूप है जिसमें ‘मैं’ लिखा जाता है। यह एक अधिकारी दूसरे अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से लिखता है, प्रायः तब जब औपचारिक पत्र भेजने पर भी काम आगे नहीं बढ़ा। इसका पूरा ढाँचा इसी व्यक्तिगत स्वर से निकलता है।

30 सितंबर 2026 को सत्यापित

अर्द्धशासकीय पत्र क्या है

अर्द्धशासकीय पत्र को अंग्रेज़ी में डी.ओ. (Demi-Official) पत्र कहते हैं। इसमें विषय सरकारी होता है, पर संबोधन व्यक्तिगत। एक अधिकारी दूसरे अधिकारी को अपने नाम से लिखता है, अपने पदनाम की मुहर के पीछे छिपकर नहीं। इसीलिए इसमें हस्ताक्षर के नीचे पदनाम नहीं, केवल नाम आता है, और पदनाम पत्र के शीर्ष पर छपे लेटरहेड में रहता है।

इसका प्रयोग तीन स्थितियों में होता है — जब किसी विषय पर व्यक्तिगत ध्यान चाहिए, जब औपचारिक पत्राचार के बाद भी कार्यवाही नहीं हुई, और जब विषय ऐसा हो जिसमें शिष्टाचार या संवेदनशीलता आवश्यक हो। तीनों ही स्थितियों में भाषा शिष्ट रहती है, पर आग्रह स्पष्ट रहता है।

सरकारी पत्र और अर्द्धशासकीय पत्र — अंतर जो अंक तय करता है

बिंदुसरकारी पत्रअर्द्धशासकीय पत्र
कौन लिखता हैकार्यालयअधिकारी स्वयं, अपने नाम से
पुरुषअन्य पुरुष — ‘लेख है’, ‘निवेदन है’उत्तम पुरुष — ‘मैं चाहूँगा’, ‘मुझे विश्वास है’
संबोधनमहोदय,प्रिय श्री (उपनाम), / प्रिय महोदय,
समापनभवदीय,आपका सद्भावी, / सादर,
हस्ताक्षर के नीचेनाम और पदनामकेवल नाम
प्राप्तकर्ता का पताऊपर, ‘सेवा में’ के नीचेनीचे बाईं ओर, हस्ताक्षर के बाद
विषयअनिवार्यप्रायः नहीं लिखा जाता

आदर्श नमूना उत्तर

नीचे का नमूना उस स्थिति का है जिसमें औपचारिक पत्र भेजे जाने के बाद भी कार्यवाही लंबित है — यही सबसे अधिक पूछी जाने वाली स्थिति है।

नमूना — पत्र का शीर्ष भाग

लेटरहेड
(नाम) जिला कलक्टर (जिले का नाम), राजस्थान
अ.शा. पत्र संख्या
अ.शा./कल./जल/2026/37
दिनांक
5 सितंबर 2026

प्रिय श्री (उपनाम),

जिले के पश्चिमी भाग की सत्रह ढाणियों में पेयजल की स्थिति इस बार जिस तेज़ी से बिगड़ी है, उससे आप परिचित होंगे। इस विषय में इस कार्यालय का पत्र संख्या कल./जल/2026/214, दिनांक 28 जुलाई 2026 आपके विभाग को भेजा जा चुका है, किंतु पाइपलाइन विस्तार की तकनीकी स्वीकृति अब तक प्राप्त नहीं हो सकी है।

मैं समझ सकता हूँ कि इस समय आपके विभाग पर कार्य का दबाव अधिक है। फिर भी यह विषय ऐसा है जिसमें विलंब का सीधा असर आमजन पर पड़ रहा है, और आगामी ग्रीष्म ऋतु से पहले कार्य पूर्ण होना आवश्यक है।

मैं चाहूँगा कि आप इस प्रकरण को व्यक्तिगत रूप से देख लें और तकनीकी स्वीकृति शीघ्र जारी करा दें। किसी अतिरिक्त सूचना की आवश्यकता हो तो इस कार्यालय से तत्काल उपलब्ध करा दी जाएगी।

सादर,

आपका सद्भावी,

(हस्ताक्षर) (नाम)

प्राप्तकर्ता का पता — यहाँ नीचे आता है, ऊपर नहीं

सेवा में
श्री (नाम) मुख्य अभियंता, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, जयपुर।

‘मैं’ यहाँ भूल नहीं है — यहीं तो चलता है

पूरे भाग स में यही एक प्रारूप है जिसमें उत्तम पुरुष अपेक्षित है। बहुत से अभ्यर्थी सरकारी पत्र का अभ्यास इतना कर लेते हैं कि यहाँ भी ‘निवेदन है’ लिख बैठते हैं, और पत्र अपना व्यक्तिगत स्वर खो देता है — जो कि इस प्रारूप का पूरा प्रयोजन ही था। ‘मैं चाहूँगा’, ‘मुझे विश्वास है’, ‘आप इसे व्यक्तिगत रूप से देख लें’ — यही इसकी भाषा है।

स्रोत और नमूनों के बारे में

यह पृष्ठ RPSC के आधिकारिक पाठ्यक्रम एवं परीक्षा योजना, दिनांक 09-01-2026 के आधार पर बनाया गया है। आयोग का अपना नोट भी ध्यान में रखिए — परीक्षा योजना केवल सामान्य मार्गदर्शन के लिए है, अंक और प्रश्न-संख्या में बदलाव संभव है। नीचे दिए गए सभी नमूने पढ़ाने के लिए स्वयं तैयार किए गए हैं; उनमें आए पत्र-क्रमांक, तिथियाँ और कार्यालय काल्पनिक हैं और किसी वास्तविक सरकारी दस्तावेज़ की प्रतिलिपि नहीं हैं।