प्रतिवेदन (रिपोर्ट)
प्रतिवेदन किसी जाँच, निरीक्षण या घटना के बाद उस अधिकारी को दिया जाता है जिसने वह काम सौंपा था। इसकी पूरी शक्ति एक अनुशासन से आती है — पहले तथ्य, फिर निष्कर्ष, और सुझाव सबसे अंत में। यह क्रम उलट जाए तो प्रतिवेदन राय बन जाता है।
प्रतिवेदन क्या है
प्रतिवेदन वह लिखित विवरण है जो किसी व्यक्ति, समिति या दल द्वारा जाँच, निरीक्षण, दुर्घटना, आयोजन या किसी विशेष प्रकरण के बारे में सक्षम अधिकारी को प्रस्तुत किया जाता है। यह पत्र नहीं है — इसमें ‘सेवा में’ और ‘महोदय’ प्रायः नहीं आते, हालाँकि इसे भेजते समय एक अग्रेषण पत्र के साथ भेजा जा सकता है।
इसका मूल गुण वस्तुनिष्ठता है। जो देखा गया वही लिखा जाता है, जो सुना गया उसे ‘अवगत कराया गया’ कहकर लिखा जाता है, और जो अनुमान है उसे निष्कर्ष के भाग में स्पष्ट रूप से अनुमान कहकर ही लिखा जाता है। इन तीनों को अलग रखना ही अच्छे प्रतिवेदन की कसौटी है।
परीक्षा में प्रतिवेदन प्रायः किसी घटना या निरीक्षण पर माँगा जाता है, और शब्द-सीमा छोटी होती है। इसलिए छह भागों को नाम देकर लिखना सबसे सुरक्षित रहता है — इससे परीक्षक को संरचना एक नज़र में दिख जाती है और शब्द भी नहीं बिखरते।
प्रतिवेदन की छह-भागीय संरचना
| क्रम | भाग | उसमें क्या आता है |
|---|---|---|
| 1 | शीर्षक | विषय, स्थान और अवधि सहित — ‘...का निरीक्षण प्रतिवेदन’ |
| 2 | प्रस्तावना | किसके आदेश से, कब और किस उद्देश्य से यह कार्य किया गया |
| 3 | प्रक्रिया | कहाँ-कहाँ गए, क्या-क्या देखा, किन अभिलेखों की जाँच की |
| 4 | तथ्य | जो पाया गया — संख्या और तिथि सहित, बिंदुवार |
| 5 | निष्कर्ष | तथ्यों से जो निकलता है — कारण, न कि उपाय |
| 6 | सुझाव | क्या किया जाना चाहिए — सबसे अंत में, और तथ्यों से जुड़ा हुआ |
भाग 4 और भाग 6 को मिला देना सबसे आम भूल है। तथ्य के साथ ही सुझाव लिख देने पर दोनों की विश्वसनीयता घट जाती है।
नमूना — प्रतिवेदन का शीर्ष
- शीर्षक
- राजकीय उचित मूल्य दुकानों के आकस्मिक निरीक्षण का प्रतिवेदन (निरीक्षण अवधि — 1 से 10 जुलाई 2026)
- प्रस्तुतकर्ता
- निरीक्षण दल, जिला रसद कार्यालय, (जिले का नाम)
- प्रस्तुत किसे
- जिला रसद अधिकारी, (जिले का नाम)
- दिनांक
- 14 जुलाई 2026
नमूना — प्रतिवेदन का मुख्य भाग
1. प्रस्तावना — इस कार्यालय के आदेश क्रमांक जि.र.अ./निरीक्षण/2026/92, दिनांक 24 जून 2026 के अनुपालन में गठित तीन सदस्यीय दल द्वारा जिले की उचित मूल्य दुकानों का आकस्मिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण का उद्देश्य वितरण व्यवस्था, स्टॉक की स्थिति तथा तौल-मापक यंत्रों की जाँच था।
2. प्रक्रिया — दल ने तीनों ब्लॉकों की कुल अठारह दुकानों का बिना पूर्व सूचना के निरीक्षण किया। प्रत्येक दुकान पर स्टॉक पंजिका, वितरण पंजिका तथा तौल-मापक यंत्रों की जाँच की गई और उपस्थित उपभोक्ताओं से भी वितरण के बारे में पूछा गया।
3. तथ्य — (क) अठारह में से चौदह दुकानों पर स्टॉक पंजिका अद्यतन पाई गई, शेष चार पर प्रविष्टियाँ जून माह से लंबित थीं। (ख) तीन दुकानों पर तौल-मापक यंत्रों का सत्यापन प्रमाण-पत्र अवधि-पार पाया गया। (ग) दो दुकानों पर वितरण का समय निर्धारित समय से भिन्न पाया गया और वह सूचना-पट्ट पर अंकित नहीं था। (घ) किसी भी दुकान पर भौतिक स्टॉक और पंजिका के स्टॉक में बड़ा अंतर नहीं पाया गया।
4. निष्कर्ष — वितरण व्यवस्था कुल मिलाकर संतोषजनक है। जहाँ कमियाँ मिलीं, वे अभिलेख संधारण और सूचना प्रदर्शन से संबंधित हैं, न कि खाद्यान्न की मात्रा से। चारों लंबित पंजिकाओं वाली दुकानें एक ही ब्लॉक की हैं, जिससे यह प्रतीत होता है कि वहाँ पर्यवेक्षण अपेक्षाकृत शिथिल रहा है।
5. सुझाव — (क) चारों दुकानों को पंजिका अद्यतन करने हेतु पंद्रह दिन का समय देकर पुनः जाँच कराई जाए। (ख) तीनों दुकानों के तौल-मापक यंत्रों का सत्यापन एक माह में अनिवार्य रूप से कराया जाए। (ग) वितरण का दिन और समय प्रत्येक दुकान के सूचना-पट्ट पर बड़े अक्षरों में अंकित कराया जाए। (घ) संबंधित ब्लॉक के प्रवर्तन अधिकारी से मासिक पर्यवेक्षण प्रतिवेदन नियमित रूप से लिया जाए।
(हस्ताक्षर)
अध्यक्ष एवं सदस्य, निरीक्षण दल जिला रसद कार्यालय, (जिले का नाम)
तथ्य, निष्कर्ष और सुझाव — तीनों अलग रखिए
उपर्युक्त नमूने में ध्यान दीजिए कि भाग 3 में एक भी सुझाव नहीं है और भाग 5 में एक भी नया तथ्य नहीं है। यही अनुशासन प्रतिवेदन को भरोसेमंद बनाता है, और परीक्षक इसी को देखकर अंक देता है। जिस सुझाव का आधार भाग 3 में कहीं नहीं दिखता, वह सुझाव कमज़ोर माना जाता है — इसलिए हर सुझाव किसी न किसी तथ्य से जुड़ा होना चाहिए।
स्रोत और नमूनों के बारे में
यह पृष्ठ RPSC के आधिकारिक पाठ्यक्रम एवं परीक्षा योजना, दिनांक 09-01-2026 के आधार पर बनाया गया है। आयोग का अपना नोट भी ध्यान में रखिए — परीक्षा योजना केवल सामान्य मार्गदर्शन के लिए है, अंक और प्रश्न-संख्या में बदलाव संभव है। नीचे दिए गए सभी नमूने पढ़ाने के लिए स्वयं तैयार किए गए हैं; उनमें आए पत्र-क्रमांक, तिथियाँ और कार्यालय काल्पनिक हैं और किसी वास्तविक सरकारी दस्तावेज़ की प्रतिलिपि नहीं हैं।