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सामाजिक अंकेक्षण: अर्थ, उद्देश्य, प्रक्रिया, महत्त्व और सीमाएँ

3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर I, इकाई III, भाग C (Accounting and Auditing): "Meaning and objectives of auditing, audit programme, basic knowledge of social, performance and efficiency audit; elementary knowledge of government audit." इस पृष्ठ पर सामाजिक अंकेक्षण का लेखा-परीक्षा वाला पक्ष है: अर्थ, उद्देश्य, महत्त्व, प्रक्रिया और सीमाएँ। प्रशासन और जवाबदेही वाला पक्ष पेपर III के लोक प्रशासन खंड के सामाजिक अंकेक्षण पृष्ठ पर अलग से है।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • 2013-2024 के उपलब्ध छह पेपरों में सामाजिक अंकेक्षण पर दो प्रश्न दर्ज हैं: 2016 में 5 अंक का (महत्ता के पाँच बिंदु) और 2018 में 2 अंक का (सामाजिक अंकेक्षण क्या है)। दोनों पेपर I के लेखा-परीक्षा खंड में आए, इसलिए यह विषय सिलेबस की "social, performance and efficiency audit" पंक्ति का वह हिस्सा है जिससे प्रश्न पूछे जा चुके हैं।
  • दो अंक में परिभाषा और एक भेद, पाँच अंक में उद्देश्य या महत्त्व, और दस अंक के रूप में प्रक्रिया तथा सीमाओं का मूल्यांकन तैयार रखें। इस पृष्ठ में तीनों शैलियों के हल उत्तर हैं।
  • अंक वहाँ मिलते हैं जहाँ आप बता पाएँ कि सामाजिक अंकेक्षण सरकारी अभिलेख को ज़मीनी तथ्य से मिलाता है और निष्कर्ष जनता के सामने पढ़ता है। इसी बात से यह वित्तीय या CAG के अंकेक्षण से अलग पहचाना जाता है।

पहले सरल भाषा में: राशन की दुकान का रजिस्टर

मान लीजिए गाँव की राशन दुकान के रजिस्टर में दर्ज है कि इस महीने 200 परिवारों को गेहूँ मिला (यह काल्पनिक उदाहरण है)। बिल, स्टॉक रजिस्टर और बैंक का हिसाब आपस में मेल खाते हैं, इसलिए दफ़्तर में बैठकर जाँच करने वाले को सब ठीक दिखता है। पर चौपाल पर बैठे लोगों से पूछिए तो 60 परिवार कहते हैं कि उन्हें उस महीने कुछ मिला ही नहीं। काग़ज़ में कोई गड़बड़ी नहीं दिखती, फिर भी ग़रीब का हक़ उस तक पहुँचा नहीं। यहीं सामाजिक अंकेक्षण (social audit) काम आता है। रजिस्टर चौपाल पर लाया जाता है, नाम ज़ोर से पढ़े जाते हैं और जिन परिवारों के नाम पर राशन दर्ज है, उनसे सीधे पूछा जाता है: "क्या आपको मिला?"

परीक्षा के लिए सटीक परिभाषा: ग्रामीण विकास मंत्रालय के 2016 के लेखा-परीक्षा मानकों के अनुसार सामाजिक अंकेक्षण वह अंकेक्षण है जो जनता करती है, ख़ासकर वे लोग जो किसी कार्यक्रम से प्रभावित हों या उसके अभिप्रेत लाभार्थी हों। इसमें योजना और उसके परिणामों की जाँच समुदाय सक्रिय भागीदारी से करता है। सरकारी अभिलेखों की तुलना ज़मीनी तथ्यों से की जाती है, सत्यापन के निष्कर्ष सार्वजनिक मंच पर ज़ोर से पढ़े जाते हैं और लोगों की मौखिक गवाही अभिलेखों से मिलाई जाती है।

इस परिभाषा के तीन शब्द याद रखें। पहला, लाभार्थी: जाँच वही करते हैं जिनके लिए पैसा ख़र्च हुआ। दूसरा, ज़मीनी सत्यापन: जाँच का आधार केवल काग़ज़ नहीं, गाँव, कार्यस्थल और व्यक्ति से मिलान है। तीसरा, सार्वजनिक वाचन: निष्कर्ष बंद फ़ाइल में नहीं, खुली सभा में पढ़े जाते हैं। अंकेक्षण (audit) शब्द का अर्थ वही है जो हर जगह होता है: किसी दावे या हिसाब की स्वतंत्र जाँच। फ़र्क़ यह है कि यहाँ जाँचने वाले पेशेवर अंकेक्षक के साथ-साथ ख़ुद प्रभावित लोग भी हैं।

सरकारी अंकेक्षण से अलग क्यों है

सरकारी विभागों का अंकेक्षण मुख्यतः पेशेवर अंकेक्षक करते हैं। वे लेखा-बहियों, बिलों, वाउचरों और स्वीकृतियों की जाँच करते हैं और अपनी रिपोर्ट विधायिका या संबंधित प्राधिकारी को देते हैं (विश्लेषण)। यह ज़रूरी काम है, पर इसकी एक स्वाभाविक सीमा है: जो कुछ काग़ज़ पर पूरा दिखता है, उसकी ज़मीनी सच्चाई तक हर बार पहुँचना कठिन है, और रिपोर्ट पढ़ने के लिए गाँव का मज़दूर मौजूद नहीं होता।

ग्रामीण विकास मंत्रालय के 2013 के परिचालन दिशानिर्देश यह तर्क साफ़ देते हैं: जो एजेंसी योजना चला रही है, वह अपना अंकेक्षण ख़ुद नहीं कर सकती, इसलिए लोगों की भागीदारी और उसमें सहयोग देने वाली एक स्वतंत्र सामाजिक अंकेक्षण संस्था की ज़रूरत है। 2016 के मानकों ने बताया है कि सामाजिक अंकेक्षण का वातावरण सार्वजनिक क्षेत्र के सामान्य अंकेक्षण से कम से कम तीन बातों में अलग है। यह अधिक संवादात्मक है, क्योंकि ग्राम सभा के सदस्य एक साथ अंकेक्षक भी हैं और निष्कर्षों के मुख्य उपयोगकर्ता भी। अभिलेख के साथ मौखिक साक्ष्य भी जुटाए जाते हैं, और ग्राम सभा के सदस्यों को कार्यस्थल के सत्यापन और रोज़मर्रा की नैतिक समझ पर कहीं अधिक निर्भर रहना पड़ता है।

दिशानिर्देशों का एक वाक्य उत्तर में गहराई देता है: सामाजिक अंकेक्षण दोष-खोज (fault finding) की नहीं, तथ्य-खोज (fact finding) की प्रक्रिया है, और अंकेक्षक को स्वयं को अभियोजक नहीं समझना चाहिए। मतलब यह कि पहला काम तथ्य सामने रखना है, सज़ा देना या न देना आगे की कार्रवाई का विषय है।

सामाजिक अंकेक्षण और वित्तीय (पेशेवर) अंकेक्षण: तुलना

सामाजिक अंकेक्षण

कौन जाँचता हैलाभार्थी और ग्राम सभा, स्वतंत्र संस्था (SAU) की सहायता से

साक्ष्य का स्वरूपअभिलेख, साथ में मौखिक गवाही और कार्यस्थल का सत्यापन

निष्कर्ष कहाँ रखे जाते हैंखुली ग्राम सभा में ज़ोर से पढ़कर, फिर पंचायत की सूचना-पट्टिका पर

मुख्य प्रश्नक्या लाभ और काम सचमुच लोगों तक पहुँचे?

परिणामशिकायतों और आपराधिक जाँच-योग्य निष्कर्षों की अलग सूची; कार्रवाई-रिपोर्ट अगली सभा में

अंकेक्षण का दायित्वग्राम सभा का; SAU केवल सहूलियत देती है

वित्तीय या पेशेवर अंकेक्षण

कौन जाँचता हैप्रशिक्षित पेशेवर अंकेक्षक

साक्ष्य का स्वरूपमुख्यतः लेखा-बहियाँ, बिल, वाउचर और अन्य दस्तावेज़

निष्कर्ष कहाँ रखे जाते हैंरिपोर्ट के रूप में संबंधित प्राधिकारी या विधायिका को

मुख्य प्रश्नक्या हिसाब सही है और नियमों के अनुसार है?

परिणामअंकेक्षक की राय या रिपोर्ट; आगे की जाँच संबंधित निकाय करता है

अंकेक्षण का दायित्वअंकेक्षक का, अपने नियुक्ति-आधार के अनुसार

पहली, दूसरी और पाँचवीं पंक्ति का सामाजिक अंकेक्षण वाला कॉलम ग्रामीण विकास मंत्रालय के 2016 के मानकों और 2013 के दिशानिर्देशों से है। वित्तीय अंकेक्षण वाला कॉलम परीक्षा में तुलना की सुविधा के लिए सामान्य ढाँचे का सार है (विश्लेषण)।

उद्देश्य: मानकों में गिनाए गए छह लक्ष्य

2016 के मानकों में सामाजिक अंकेक्षण के छह उद्देश्य दिए गए हैं। परीक्षा में "उद्देश्य" पूछे जाएँ तो इन्हें अपने शब्दों में लिखें, पर क्रम और भाव यही रखें। तालिका में हर उद्देश्य के साथ उसका सरल अर्थ दिया गया है।

सामाजिक अंकेक्षण के छह उद्देश्य

उद्देश्य (मानकों के अनुसार)सरल अर्थ
योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ानापैसा कहाँ और कैसे लगा, यह सबको दिखे और अधिकारी जवाब दें
क़ानून के तहत लोगों को उनके अधिकार और पात्रताएँ बतानालोग जानें कि उन्हें क्या मिलना चाहिए, तभी वे माँग सकते हैं
लोगों को आवश्यकताएँ और शिकायतें रखने का साझा मंच देनाअकेले की शिकायत दब जाती है, सभा में सामूहिक आवाज़ बनती है
क्रियान्वयन के सभी चरणों में जन-भागीदारी बढ़ानायोजना बनने से लेकर जाँच तक लोग साथ रहें
ग्राम सभा को सहभागी संस्था और राजनीतिक शिक्षा का मंच बनानाग्राम सभा केवल औपचारिक बैठक न रहकर सीखने और निर्णय का स्थान बने
अंकेक्षण में भाग लेने वाले स्थानीय हितधारकों की क्षमता बढ़ानाहिसाब पढ़ना, मापना और सवाल पूछना लोग सीखें

दाएँ कॉलम का सरल अर्थ पाठक की सुविधा के लिए है।

महत्त्व के पाँच बिंदु (2016 में 5 अंक का प्रश्न)

उपर्युक्त उद्देश्यों से ही महत्त्व निकलता है। पाँच अंक के उत्तर के लिए पाँच बिंदु इस क्रम में सुरक्षित रहते हैं।

1. पारदर्शिता: अभिलेख गाँव के सामने खुलते हैं, इसलिए ख़र्च और लाभार्थियों की सूची छिपी नहीं रहती।

2. जवाबदेही: संबंधित अधिकारी ग्राम सभा में उपस्थित रहकर प्रश्नों का उत्तर देते हैं और पिछली कार्रवाई-रिपोर्ट सबसे पहले पढ़ी जाती है।

3. अधिकारों की जानकारी: लोग अपनी पात्रता, मज़दूरी या लाभ की मात्रा जान पाते हैं, जिससे वे अपना हक़ माँगने की स्थिति में आते हैं।

4. गड़बड़ी की पहचान: अभिलेख को ज़मीनी तथ्य से मिलाने पर फ़र्ज़ी नाम, बढ़ा-चढ़ाकर लिखे माप या न बँटे लाभ पकड़ में आते हैं, जो केवल काग़ज़ी जाँच में अक्सर छूट जाते हैं (विश्लेषण)।

5. जन-भागीदारी और ग्राम सभा का सशक्तीकरण: गाँव ख़ुद निगरानी करता है, इसलिए लोकतंत्र की सबसे निचली इकाई मज़बूत होती है।

प्रक्रिया: कैसे होता है सामाजिक अंकेक्षण

प्रक्रिया का सबसे विस्तृत लिखित रूप MGNREGA के परिचालन दिशानिर्देश 2013 (अध्याय 13) में है। दिशानिर्देश एक बात पर ज़ोर देते हैं: अंकेक्षण करने का दायित्व ग्राम सभा का है, जबकि राज्य की स्वतंत्र सामाजिक अंकेक्षण इकाई (Social Audit Unit, SAU) केवल सहूलियत देती है। इकाई के सहायक चार स्तर पर होते हैं: राज्य, ज़िला, ब्लॉक और गाँव के संसाधन-व्यक्ति (SRP, DRP, BRP और VRP)। अगली तालिका प्रक्रिया को क्रम से रखती है। पूरे चक्र का विस्तृत उदाहरण और राज्यों के मॉडल लोक प्रशासन वाले पृष्ठ पर हैं।

प्रक्रिया के चरण (MGNREGA परिचालन दिशानिर्देश 2013, अध्याय 13)

चरणक्या होता है
1. वार्षिक कैलेंडरइकाई वर्ष के आरंभ में कैलेंडर बनाती है ताकि हर ग्राम पंचायत में हर छह माह में कम से कम एक सामाजिक अंकेक्षण हो
2. अभिलेख की उपलब्धताकार्यक्रम अधिकारी ग्राम सभा की तारीख़ से कम से कम 15 दिन पहले जॉब कार्ड रजिस्टर, मस्टर रोल, बिल-वाउचर, माप-पुस्तिका, संपत्ति रजिस्टर, पिछली कार्रवाई-रिपोर्ट और शिकायत रजिस्टर जैसे अभिलेख इकाई को देता है
3. ज़मीनी सत्यापनसंसाधन-व्यक्ति और प्राथमिक हितधारक मस्टर रोल में दर्ज मज़दूरों से मिलते हैं, कार्यस्थल पर माप देखते हैं और संपत्ति की स्थिति और गुणवत्ता जाँचते हैं
4. ग्राम सभातटस्थ सार्वजनिक स्थान पर, पंचायत-प्रमुख के गाँव या टोले में नहीं; अध्यक्षता पंचायत या कार्यान्वयन एजेंसी से बाहर के बुज़ुर्ग ग्रामीण करते हैं; ज़िम्मेदार अधिकारी उपस्थित रहकर उत्तर देते हैं
5. रिकॉर्डिंगपूरी कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग, बिना संपादन के वेबसाइट पर अपलोड और ज़िला कार्यक्रम समन्वयक के पास सुरक्षित
6. रिपोर्टस्थानीय भाषा में, सभा के अध्यक्ष के प्रतिहस्ताक्षर के साथ; पंचायत की सूचना-पट्टिका पर कम से कम सात दिन; शिकायतों की सूची और आपराधिक जाँच-योग्य निष्कर्षों की अलग सूची
7. कार्रवाईकार्रवाई-रिपोर्ट इकाई और संबंधित शिकायतकर्ता को दी जाती है और अगली सभा में सबसे पहले पढ़ी जाती है

संख्याएँ: 15 दिन, सात दिन और छह माह, उत्तर में तीनों अलग-अलग लिखें।

क़ानूनी आधार: MGNREGA धारा 17 से VB-G RAM G धारा 20 तक

सामाजिक अंकेक्षण पहली बार देश-स्तर पर MGNREGA, 2005 की धारा 17 में क़ानूनी रूप से बँधा। उसके तीन उपबंध थे: ग्राम सभा ग्राम पंचायत में हो रहे कार्यों की निगरानी करेगी; ग्राम सभा योजना की सभी परियोजनाओं का नियमित सामाजिक अंकेक्षण करेगी; और ग्राम पंचायत मस्टर रोल, बिल, वाउचर, माप-पुस्तिकाएँ, स्वीकृति-आदेश की प्रतियाँ तथा अन्य संबंधित बहियाँ ग्राम सभा को उपलब्ध कराएगी। तीसरा उपबंध इसलिए अहम है कि अभिलेख देखे बिना कोई अंकेक्षण हो ही नहीं सकता।

अधिनियम की धारा 24(1) के अंतर्गत ग्रामीण विकास मंत्रालय ने CAG से परामर्श करके 2011 में Audit of Scheme Rules, 2011 अधिसूचित किए। इन नियमों में राज्य सरकार को हर ग्राम पंचायत में सामाजिक अंकेक्षण की सुविधा देनी थी और एक स्वतंत्र संस्था, यानी SAU, बनानी या चुननी थी। मंत्रालय ने 22 जून 2015 को CAG के परामर्श से एक संयुक्त कार्यबल बनाया और उसकी सिफ़ारिशें मानकर 19 दिसंबर 2016 को लेखा-परीक्षा मानक जारी किए। ध्यान रहे कि ये मानक ग्रामीण विकास मंत्रालय के कार्यालय ज्ञापन का अनुलग्नक हैं, इसलिए उत्तर में "CAG ने जारी किए" न लिखकर "मंत्रालय ने CAG के परामर्श से जारी किए" लिखना सही है।

वर्तमान स्थिति: विकसित भारत: रोज़गार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण), यानी VB-G RAM G अधिनियम, 2025, PIB के अनुसार 1 जुलाई 2026 से लागू हुआ और उसी तारीख़ से MGNREGA, 2005 निरस्त हो गया। इस अधिनियम की धारा 20 में कहा गया है कि ग्राम सभा योजना के अंतर्गत ग्राम पंचायत में लिए गए सभी कार्यों का नियमित सामाजिक अंकेक्षण करेगी, उस रीति से जो केंद्र सरकार निर्धारित करे। यानी सिद्धांत वही है, क़ानूनी हवाला बदल गया है। पुराने पेपरों के उत्तर में धारा 17 का नाम लिखा जा सकता है, पर आज की स्थिति बताते समय धारा 20 का उल्लेख साथ करें।

राजस्थान से निकला विचार: MKSS और जन सुनवाई

सामाजिक अंकेक्षण की जड़ें राजस्थान में हैं। मज़दूर किसान शक्ति संगठन (MKSS) के अपने परिचय के अनुसार संगठन की स्थापना 1990 में राजस्थान के देवडूंगरी गाँव में अरुणा रॉय, निखिल डे, शंकर सिंह और स्थानीय ग्रामीणों ने की। संगठन ने जन सुनवाई (public hearing) की पद्धति बनाई, जिसमें सरकारी दस्तावेज़ हासिल किए जाते थे, सबके सामने ज़ोर से पढ़े जाते थे और समुदाय के साथ जाँचे जाते थे। The Better India के विवरण के अनुसार अधिकारियों से कहा जाता था कि वे अपने हिसाब की बहियाँ लाएँ और उन्हें खुले स्थान पर पढ़ा जाता था; पहली जन सुनवाई दिसंबर 1994 में पाली ज़िले के कोट किरना गाँव में हुई।

Accountability Research Centre के लेख के अनुसार 1990 के दशक की शुरुआत में न्यूनतम मज़दूरी के लिए चले अभियान ने "ऑडिट" शब्द को नए अर्थ में इस्तेमाल किया: गाँव में जनता द्वारा विकास-व्यय की सार्वजनिक जाँच। राजस्थान ने 2000 में अपना सूचना क़ानून बनाया और केंद्र का सूचना का अधिकार अधिनियम 12 अक्टूबर 2005 को पूरी तरह लागू हुआ। उसी वर्ष MGNREGA ने सामाजिक अंकेक्षण को पहली बार राष्ट्रीय क़ानून का हिस्सा बनाया। परीक्षा-उपयोग: जानकारी का अधिकार अभिलेख दिलाता है, जन सुनवाई उन अभिलेखों को ज़मीनी सच से मिलाती है, और क़ानून उस प्रक्रिया को स्थायी बनाता है।

सीमाएँ और सुझाव (विश्लेषण)

सामाजिक अंकेक्षण की ताक़त जन-भागीदारी में है और वहीं इसकी चुनौतियाँ भी हैं। पहली, अभिलेख समय पर और पूरे न मिलें तो सत्यापन अधूरा रहता है; इसीलिए 15 दिन पहले अभिलेख देने की व्यवस्था रखी गई है। दूसरी, गाँव की सत्ता-संरचना में कमज़ोर व्यक्ति दबाव के कारण खुलकर बोल न पाए, तो सभा का नतीजा बदल सकता है; इसीलिए दिशानिर्देशों में सभा तटस्थ जगह और पंचायत से बाहर के अध्यक्ष की बात है। तीसरी, कार्रवाई-रिपोर्ट की कड़ी कमज़ोर हो तो पूरी प्रक्रिया रस्म बनकर रह जाती है, और यह किसी भी निगरानी-व्यवस्था की सबसे बड़ी परीक्षा है।

चौथी, इकाई की स्वतंत्रता तभी असली है जब उसे पर्याप्त धन, कर्मचारी और बिना दबाव के काम करने की जगह मिले। पाँचवीं, सामाजिक अंकेक्षण CAG जैसी संवैधानिक अंकेक्षण-व्यवस्था का विकल्प नहीं, पूरक है: एक तरफ़ सटीक वित्तीय जाँच, दूसरी तरफ़ लाभ के ज़मीनी पहुँचने की जाँच। सुझाव के रूप में उत्तर में लिखा जा सकता है कि निष्कर्षों पर समयबद्ध कार्रवाई, इकाई को स्वतंत्र संसाधन, और प्रशिक्षित स्थानीय संसाधन-व्यक्ति सबसे ज़रूरी हैं।

समय-रेखा: जन सुनवाई से क़ानून तक

  1. 1990

    देवडूंगरी (राजस्थान) में MKSS की स्थापना

  2. दिसंबर 1994

    पाली ज़िले के कोट किरना में पहली जन सुनवाई

  3. 2000

    राजस्थान का सूचना क़ानून

  4. 12 अक्टूबर 2005

    केंद्रीय RTI अधिनियम पूरी तरह लागू; MGNREGA 2005 में धारा 17 सामाजिक अंकेक्षण

  5. 2011

    Audit of Scheme Rules, 2011, CAG से परामर्श में

  6. 19 दिसंबर 2016

    ग्रामीण विकास मंत्रालय का सामाजिक अंकेक्षण-मानक ज्ञापन

  7. 1 जुलाई 2026

    VB-G RAM G अधिनियम लागू; MGNREGA निरस्त; धारा 20 में सामाजिक अंकेक्षण

प्रवाह: सामाजिक अंकेक्षण का चक्र

  1. कैलेंडर

    हर ग्राम पंचायत में छह माह में एक

  2. अभिलेख

    15 दिन पहले इकाई को

  3. ज़मीनी सत्यापन

    लाभार्थियों से मिलान और माप

  4. ग्राम सभा

    तटस्थ स्थान, बाहरी अध्यक्ष, वीडियो रिकॉर्डिंग

  5. रिपोर्ट

    स्थानीय भाषा, सात दिन सूचना-पट्टिका पर

  6. कार्रवाई

    अगली सभा में कार्रवाई-रिपोर्ट

मुख्य तथ्य

परिभाषा
जनता द्वारा, ख़ासकर प्रभावित लाभार्थियों द्वारा की गई जाँच; अभिलेख और ज़मीनी तथ्य का मिलान; निष्कर्ष सार्वजनिक मंच पर (ग्रामीण विकास मंत्रालय, 2016)
उद्देश्यों की संख्या
छह (मानकों में अनुलग्नक 1)
अंकेक्षण की आवृत्ति
हर ग्राम पंचायत में हर छह माह में कम से कम एक (परिचालन दिशानिर्देश 2013, 13.3.1)
अभिलेख देने की अवधि
सभा से कम से कम 15 दिन पहले (13.3.3)
रिपोर्ट का प्रदर्शन
पंचायत की सूचना-पट्टिका पर कम से कम सात दिन (13.3.12)
MGNREGA धारा 17
(1) कार्यों की निगरानी, (2) सभी परियोजनाओं का नियमित सामाजिक अंकेक्षण, (3) अभिलेख ग्राम सभा को देना
Audit of Scheme Rules
2011, धारा 24(1) के अंतर्गत, CAG से परामर्श में
MKSS
स्थापना 1990, देवडूंगरी (राजस्थान)
VB-G RAM G अधिनियम 2025
1 जुलाई 2026 से लागू; MGNREGA उसी तारीख़ से निरस्त; धारा 20 में ग्राम सभा का सामाजिक अंकेक्षण
अंतिम जाँच
2 अक्टूबर 2026

राजस्थान का पहलू

राजस्थान सरकार के सामाजिक अंकेक्षण पोर्टल (socialaudit.rajasthan.gov.in, देखा गया 2 अक्टूबर 2026) के अनुसार राज्य में यह काम "सामाजिक अंकेक्षण, जवाबदेही और पारदर्शिता सोसायटी" (Society for Social Audit, Accountability and Transparency, SSAAT) के अंतर्गत चलता है। पोर्टल पर MGNREGA, मध्याह्न भोजन, प्रधानमंत्री आवास योजना और स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजनाओं के सामाजिक अंकेक्षण से जुड़ी सामग्री, आदेश और रिपोर्टें प्रकाशित हैं। पोर्टल पर "सामाजिक विकास विशेषज्ञ और अन्य संसाधन-व्यक्ति चुनने संबंधी विनियम, 2020" का भी उल्लेख है, जो संसाधन-व्यक्तियों के चयन का आधार दिखाता है।

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • सामाजिक अंकेक्षण को CAG का अंकेक्षण या सरकारी विभाग का अंदरूनी अंकेक्षण लिख देना। यह जनता, यानी ग्राम सभा और लाभार्थियों, द्वारा किया जाता है।
  • 2016 के मानकों को "CAG के मानक" लिख देना। वे ग्रामीण विकास मंत्रालय के कार्यालय ज्ञापन के अनुलग्नक हैं, जो CAG से परामर्श में बने।
  • यह लिखना कि SAU अंकेक्षण करती है। अंकेक्षण का दायित्व ग्राम सभा का है; SAU सहूलियत देती है।
  • उद्देश्य बताते समय केवल "भ्रष्टाचार रोकना" लिख देना। मानकों में उद्देश्य पारदर्शिता, जवाबदेही, अधिकारों की जानकारी, साझा मंच, जन-भागीदारी और ग्राम सभा की मज़बूती जैसे हैं।
  • आज की स्थिति में केवल MGNREGA धारा 17 लिखना। 1 जुलाई 2026 से MGNREGA निरस्त है और VB-G RAM G अधिनियम की धारा 20 लागू है।
  • दो अंक के उत्तर में प्रक्रिया या इतिहास लिख देना। 15 शब्द में केवल परिभाषा और एक विशेषता लिखें।