तुलनात्मक, सामान्य आकार और प्रवृत्ति विश्लेषण: चरण, सूत्र और कल्पित उदाहरण
तीनों तकनीकों के चरण, आधार का अंतर, कल्पित तुलन-पत्र और पाँच वर्ष के सूचकांक, और 2021 का प्रश्न हल सहित।
- क्षैतिज
- ऊर्ध्वाधर
- आधार वर्ष = 100
- प्रवृत्ति अनुपात
सिलेबस में
RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर I, इकाई III, भाग ग: "Financial statement of a company; techniques of analysis of financial statements; cash flow statement; basic knowledge of responsibility and social accounting." इस पृष्ठ पर तीन तकनीकें हैं: तुलनात्मक विवरण, सामान्य आकार विवरण और प्रवृत्ति विश्लेषण।
इस विषय को क्यों पढ़ें
याद रखें
- 2021 के पेपर I में 2 अंक का प्रश्न आया था: प्रवृत्ति विश्लेषण की किन्हीं दो विधियों के नाम लिखिए। यह प्रश्न नाम और एक पंक्ति में पहचान माँगता है।
- इसी विषय से 5 अंक का संख्यात्मक प्रश्न बनाना आसान है (तुलनात्मक या सामान्य आकार विवरण तैयार करना), इसलिए गणना की रीति और हर का आधार पक्का करें।
- तीनों तकनीकों में अंतर पूछा जाए तो आधार चुनना ही मुख्य बात है: पिछला वर्ष (तुलनात्मक), बिक्री या कुल संपत्ति (सामान्य आकार), आधार वर्ष = 100 (प्रवृत्ति)।
बात सीधी भाषा में: तीन तरह से देखना
मान लीजिए किसी ज़िले में बीते पाँच वर्षों के गेहूँ उत्पादन के आँकड़े हैं। आप तीन सवाल पूछ सकते हैं। पिछले साल से इस साल कितना बढ़ा? पड़ोसी ज़िले से तुलना करने पर इस ज़िले की कुल फ़सल में गेहूँ का हिस्सा कितना है? और पाँच साल पहले को सौ मानें तो आज कहाँ हैं? पहला सवाल तुलनात्मक विश्लेषण है, दूसरा सामान्य आकार विश्लेषण और तीसरा प्रवृत्ति विश्लेषण। तीनों वित्तीय विवरणों पर इसी तरह लगते हैं।
NCERT के अनुसार तुलनात्मक विवरण दो या अधिक अवधियों की स्थिति की तुलना का विचार देते हैं और इसे क्षैतिज विश्लेषण कहते हैं। सामान्य आकार विवरण हर मद को साझा आधार का प्रतिशत बनाते हैं और इसे ऊर्ध्वाधर विश्लेषण कहते हैं। प्रवृत्ति विश्लेषण कई वर्षों की श्रृंखला में आधार वर्ष की तुलना में प्रतिशत बदलाव देखता है।
तुलनात्मक विवरण: बनाने के चरण
तुलनात्मक विवरण (Comparative Statement) में लाभ-हानि विवरण या तुलन-पत्र के दो वर्षों के आँकड़े अगल-बगल स्तंभों में रखे जाते हैं और उनका बदलाव दिखाया जाता है। NCERT के अनुसार तीन चरण हैं। पहले, दोनों वर्षों के रुपये के आँकड़े लिखें। दूसरे, पहले वर्ष को दूसरे वर्ष में से घटाकर बदलाव निकालें और वृद्धि (+) या कमी (−) लिखें। तीसरे, प्रतिशत बदलाव निकालें: बदलाव ÷ पहले वर्ष का आँकड़ा × 100। इस तरह निरपेक्ष (रुपये में) और सापेक्ष (प्रतिशत में), दोनों रूपों में बदलाव दिखता है।
एक शर्त NCERT ने साफ़ लिखी है: तुलना तभी सार्थक है जब दोनों वर्षों के विवरण एक-से लेखांकन सिद्धांतों पर बने हों। अंतर हो तो उसे पाद-टिप्पणी में बताना चाहिए। तुलन-पत्र की व्याख्या करते समय NIOS तीन बातें देखने को कहती है: चालू वित्तीय स्थिति और तरलता (दोनों वर्षों की कार्यशील पूँजी), दीर्घकालीन वित्तीय स्थिति, और लाभप्रदता।
तुलनात्मक लाभ-हानि विवरण (कल्पित: सरस्वती मसाले लिमिटेड)
| मद | 2024-25 (₹) | 2025-26 (₹) | बदलाव (₹) | प्रतिशत बदलाव |
|---|---|---|---|---|
| प्रचालन से राजस्व | 40,00,000 | 46,00,000 | 6,00,000 | 15.00% |
| अन्य आय | 1,00,000 | 1,20,000 | 20,000 | 20.00% |
| कुल राजस्व | 41,00,000 | 47,20,000 | 6,20,000 | 15.12% |
| व्यय | 33,00,000 | 37,80,000 | 4,80,000 | 14.55% |
| कर-पूर्व लाभ | 8,00,000 | 9,40,000 | 1,40,000 | 17.50% |
| कर (25%, कल्पित) | 2,00,000 | 2,35,000 | 35,000 | 17.50% |
| कर-पश्चात लाभ | 6,00,000 | 7,05,000 | 1,05,000 | 17.50% |
कल्पित आँकड़े; कर की दर 25% केवल उदाहरण के लिए मानी गई है। हर प्रतिशत = बदलाव ÷ 2024-25 का आँकड़ा × 100।
तुलनात्मक तुलन-पत्र (कल्पित)
| मद | 2024-25 (₹) | 2025-26 (₹) | बदलाव (₹) | प्रतिशत बदलाव |
|---|---|---|---|---|
| अंश पूँजी | 10,00,000 | 12,00,000 | +2,00,000 | +20.00% |
| संचित आय और अधिशेष | 4,00,000 | 5,50,000 | +1,50,000 | +37.50% |
| दीर्घकालीन उधार | 6,00,000 | 5,00,000 | -1,00,000 | -16.67% |
| व्यापारिक देय | 3,00,000 | 4,50,000 | +1,50,000 | +50.00% |
| कुल देयताएँ | 23,00,000 | 27,00,000 | +4,00,000 | +17.39% |
| स्थिर संपत्ति | 12,00,000 | 14,00,000 | +2,00,000 | +16.67% |
| स्टॉक | 5,00,000 | 6,50,000 | +1,50,000 | +30.00% |
| व्यापारिक प्राप्य | 4,00,000 | 4,50,000 | +50,000 | +12.50% |
| रोकड़ और रोकड़ तुल्य | 2,00,000 | 2,00,000 | 0 | 0.00% |
| कुल संपत्ति | 23,00,000 | 27,00,000 | +4,00,000 | +17.39% |
कल्पित आँकड़े; दोनों वर्षों में कुल देयताएँ और कुल संपत्ति बराबर हैं।
तुलनात्मक विवरण की व्याख्या: ऊपर के आँकड़ों से
लाभ-हानि विवरण में प्रचालन से राजस्व 15% बढ़ा, पर कर-पूर्व लाभ 17.5% बढ़ा, यानी लाभ राजस्व से तेज़ बढ़ा। कारण यह है कि व्यय केवल 14.5% बढ़े। यह अच्छा संकेत है, पर देखना होगा कि क्या यह सिर्फ़ कुछ ख़र्च टलने की वजह से तो नहीं हुआ।
तुलन-पत्र में अंश पूँजी और संचित अधिशेष बढ़े, दीर्घकालीन उधार ₹1,00,000 घटा, यानी कंपनी ने अपने स्रोतों से ऋण चुकाया। पर स्टॉक 30% बढ़ा जबकि राजस्व केवल 15% बढ़ा: माल बिक्री से तेज़ जमा हो रहा है। व्यापारिक देय भी 50% बढ़े, जिससे चालू अनुपात 3.67:1 से घटकर 2.89:1 रह गया (चालू संपत्ति 11,00,000 से 13,00,000 और चालू देयता 3,00,000 से 4,50,000; कार्यशील पूँजी ₹8,00,000 से ₹8,50,000)। अनुपात अब भी 2:1 की सामान्य कसौटी से ऊपर है, पर दिशा ध्यान देने लायक़ है।
सामान्य आकार विवरण: बनाने के चरण
सामान्य आकार विवरण (Common Size Statement) में एक मद को 100 मानकर बाक़ी सब मदें उसके प्रतिशत में लिखी जाती हैं। NCERT के तीन चरण हैं: पहले, दो अवधियों के रुपये के आँकड़े लिखें; दूसरे, साझा आधार को 100 मानें (लाभ-हानि विवरण में प्रचालन से राजस्व; तुलन-पत्र में कुल संपत्ति या कुल देयताएँ); तीसरे, हर मद का उस आधार से प्रतिशत निकालें। इसे घटक प्रतिशत विवरण भी कहते हैं।
सामान्य आकार विवरण की ख़ास उपयोगिता यह है कि रुपये का आकार हट जाता है। 5 करोड़ और 500 करोड़ की दो कंपनियों की तुलना केवल प्रतिशत से हो सकती है। NCERT के अनुसार इसी कारण यह अंतर-फर्म तुलना और पूरे उद्योग के साथ तुलना में उपयोगी है, और कई वर्षों के सामान्य आकार विवरण बनाने पर प्रतिशतों की बदलती दिशा भी दिखती है।
सामान्य आकार तुलन-पत्र (कुल = 100%)
- 2024-25
- 2025-26
- अंश पूँजी43.5%44.4%
- संचित आय और अधिशेष17.4%20.4%
- दीर्घकालीन उधार26.1%18.5%
- व्यापारिक देय13%16.7%
- स्थिर संपत्ति52.2%51.9%
- स्टॉक21.7%24.1%
- व्यापारिक प्राप्य17.4%16.7%
- रोकड़ और रोकड़ तुल्य8.7%7.4%
| मद | 2024-25 | 2025-26 |
|---|---|---|
| अंश पूँजी | 43.5% | 44.4% |
| संचित आय और अधिशेष | 17.4% | 20.4% |
| दीर्घकालीन उधार | 26.1% | 18.5% |
| व्यापारिक देय | 13.0% | 16.7% |
| स्थिर संपत्ति | 52.2% | 51.9% |
| स्टॉक | 21.7% | 24.1% |
| व्यापारिक प्राप्य | 17.4% | 16.7% |
| रोकड़ और रोकड़ तुल्य | 8.7% | 7.4% |
ऊपर के कल्पित तुलन-पत्र से; देयताओं का आधार कुल देयताएँ और संपत्तियों का आधार कुल संपत्ति है।
सामान्य आकार विवरण की व्याख्या
संपत्ति में स्टॉक का हिस्सा 21.7% से बढ़कर 24.1% हो गया, जबकि रोकड़ का हिस्सा 8.7% से घटकर 7.4% रह गया। यानी संपत्ति की बनावट माल की ओर झुक रही है और नक़दी की गुंजाइश घट रही है। देयता की ओर दीर्घकालीन उधार का हिस्सा 26.1% से घटकर 18.5% रह गया और अंश पूँजी तथा संचित आय का मिला हिस्सा बढ़ा, यानी कंपनी अपने पैसे पर ज़्यादा निर्भर है। रुपये के बदलाव में जो बात छुपी रहती है, वह प्रतिशत में साफ़ दिखती है।
प्रवृत्ति विश्लेषण: आधार वर्ष और प्रतिशत
प्रवृत्ति विश्लेषण (Trend Analysis) कई वर्षों के वित्तीय आँकड़ों का अध्ययन है। NCERT के अनुसार प्रवृत्ति प्रतिशत वह प्रतिशत संबंध है जिसमें अलग-अलग वर्षों की हर मद आधार वर्ष की उसी मद के सापेक्ष लिखी जाती है। NIOS के अनुसार आधार वर्ष सामान्यतः पहला वर्ष होता है, कुछ मामलों में अंतिम वर्ष भी, और उसका आँकड़ा 100 माना जाता है। सूत्र: प्रवृत्ति प्रतिशत = (किसी वर्ष का आँकड़ा ÷ आधार वर्ष का आँकड़ा) × 100। 100 से ऊपर का आँकड़ा वृद्धि और नीचे का आँकड़ा कमी दिखाता है।
NCERT प्रवृत्ति विश्लेषण का महत्त्व इस तरह बताती है: लंबे समय की तस्वीर कारोबार के स्वभाव में बुनियादी बदलाव का संकेत दे सकती है। किसी अनुपात की प्रवृत्ति देखकर पता लगाया जा सकता है कि वह गिर रहा है, बढ़ रहा है या लगभग स्थिर है, और उसी से अच्छे या ख़राब प्रबंधन का संकेत मिलता है।
प्रवृत्ति विश्लेषण की दो विधियाँ (2021 के प्रश्न का आधार)
पाठ्य-पुस्तकों में विधियों की सूची एक-सी नहीं मिलती। NCERT और NIOS की सामग्री से दो नाम सुरक्षित बनते हैं: NIOS प्रवृत्ति प्रतिशत की रीति स्पष्ट देती है और NCERT अनुपातों की प्रवृत्ति देखने की बात कहती है। पहली, प्रवृत्ति प्रतिशत विधि (सूचकांक विधि): आधार वर्ष = 100 मानकर बाक़ी वर्षों के आँकड़े उसके प्रतिशत में लिखे जाते हैं। दूसरी, प्रवृत्ति अनुपात विधि: किसी अनुपात, जैसे शुद्ध लाभ अनुपात या चालू अनुपात, को कई वर्षों के लिए निकालकर उसकी दिशा देखी जाती है।
विश्लेषण के रूप में एक बात जोड़ी जा सकती है: कई विद्यार्थी आँकड़ों का रेखा-चित्र (ग्राफ़) भी प्रवृत्ति की एक विधि लिख देते हैं। असल में रेखा-चित्र इन्हीं गणनाओं को पढ़ने का एक प्रस्तुति-तरीक़ा है। परीक्षा में पहले दोनों नाम लिखें, और चाहें तो ग्राफ़ को प्रस्तुति के रूप में एक शब्द में जोड़ दें।
पाँच वर्ष का प्रवृत्ति विश्लेषण (कल्पित, 2021-22 = 100)
- राजस्व सूचकांक
- लाभ सूचकांक
| वर्ष | राजस्व (₹) | राजस्व सूचकांक | कर-पश्चात लाभ (₹) | लाभ सूचकांक | शुद्ध लाभ अनुपात |
|---|---|---|---|---|---|
| 2021-22 | 30,00,000 | 100.0 | 4,00,000 | 100.0 | 13.33% |
| 2022-23 | 33,00,000 | 110.0 | 4,40,000 | 110.0 | 13.33% |
| 2023-24 | 36,60,000 | 122.0 | 5,10,000 | 127.5 | 13.93% |
| 2024-25 | 40,00,000 | 133.3 | 6,00,000 | 150.0 | 15.00% |
| 2025-26 | 46,00,000 | 153.3 | 7,05,000 | 176.2 | 15.33% |
कल्पित आँकड़े। सूचकांक = वर्ष का आँकड़ा ÷ 2021-22 का आँकड़ा × 100; शुद्ध लाभ अनुपात = कर-पश्चात लाभ ÷ राजस्व × 100।
प्रवृत्ति पढ़ते समय सावधानियाँ
प्रवृत्ति प्रतिशत की गणना तब तक सीधी है जब तक आधार वर्ष का आँकड़ा धनात्मक हो। आधार वर्ष में शून्य या घाटा हो तो प्रतिशत निकल ही नहीं सकता या भ्रामक होगा। दूसरी सावधानी आधार वर्ष के चुनाव की है: कोई असामान्य वर्ष, जैसे महामारी का साल, आधार बन जाए तो पूरी श्रृंखला विकृत दिखेगी। तीसरी, महँगाई के कारण रुपये के आँकड़े अलग-अलग वर्षों में बराबर क्रय-शक्ति के नहीं होते; NCERT की सीमाओं में मूल्य-स्तर के बदलाव का उल्लेख है। चौथी, केवल प्रतिशत देखकर निष्कर्ष न निकालें: आधार छोटा हो तो प्रतिशत बड़ा दिखेगा।
तीनों तकनीकों का अंतर
| आधार | तुलनात्मक विवरण | सामान्य आकार विवरण | प्रवृत्ति विश्लेषण |
|---|---|---|---|
| दूसरा नाम | क्षैतिज विश्लेषण | ऊर्ध्वाधर विश्लेषण (घटक प्रतिशत) | प्रवृत्ति प्रतिशत |
| अवधि | सामान्यतः दो वर्ष | एक या दो वर्ष | कई वर्ष (श्रृंखला) |
| तुलना का आधार | पिछला वर्ष | बिक्री या कुल संपत्ति (=100) | आधार वर्ष (=100) |
| क्या दिखाता है | रुपये और प्रतिशत में बदलाव | मदों की बनावट और अनुपात | दीर्घकालीन दिशा |
| सबसे उपयोगी | वर्ष-दर-वर्ष परिवर्तन | अलग आकार की फर्मों की तुलना | लंबी अवधि की दिशा |
NCERT (कक्षा 12, अध्याय 4) और NIOS (पाठ 27) के आधार पर।
प्रवाह: प्रवृत्ति प्रतिशत कैसे निकालें
आधार वर्ष चुनें
सामान्यतः पहला वर्ष
उसे 100 मानें
आँकड़ा धनात्मक हो
हर वर्ष ÷ आधार वर्ष
× 100
दिशा पढ़ें
100 से ऊपर वृद्धि, नीचे कमी
मुख्य तथ्य
- तुलनात्मक विवरण
- क्षैतिज विश्लेषण; बदलाव और प्रतिशत बदलाव (पहला वर्ष आधार)
- सामान्य आकार विवरण
- ऊर्ध्वाधर विश्लेषण; लाभ-हानि में बिक्री, तुलन-पत्र में कुल संपत्ति या देयताएँ = 100
- प्रवृत्ति प्रतिशत
- आधार वर्ष (प्रायः पहला वर्ष) = 100; वर्ष का आँकड़ा ÷ आधार वर्ष × 100
- प्रवृत्ति की दो विधियाँ (परीक्षा के लिए)
- प्रवृत्ति प्रतिशत (सूचकांक) और प्रवृत्ति अनुपात; पुस्तकों में सूची अलग मिल सकती है
- अंतिम जाँच
- 2 अक्टूबर 2026
परीक्षा में आम ग़लतियाँ
याद रखें
- प्रतिशत बदलाव में पहले की जगह दूसरे वर्ष से भाग देना: हर में पहला (आधार) वर्ष आता है।
- आधार वर्ष को 100 की जगह 0 मान लेना: आधार वर्ष का सूचकांक हमेशा 100 होता है।
- तुलन-पत्र के सामान्य आकार में हर मद को बिक्री का प्रतिशत बना देना: तुलन-पत्र में आधार कुल संपत्ति या कुल देयताएँ होती हैं।
- विधियों के नाम पूछे जाने पर सूत्र लिख देना: 2 अंक में दो नाम और एक-एक पंक्ति की पहचान लिखें।
- केवल गणना देकर रुक जाना: एक पंक्ति में व्याख्या, जैसे लाभ राजस्व से तेज़ बढ़ा, ज़रूर जोड़ें।
कार्य-उदाहरण (कल्पित): प्रवृत्ति प्रतिशत और प्रवृत्ति अनुपात
हल सहित उदाहरणपाँच वर्ष के आँकड़ों से दोनों विधियाँ
दिया है
- यह उदाहरण समझाने के लिए गढ़ा गया है; आँकड़े वास्तविक नहीं हैं।
- राजस्व पाँच वर्षों में ₹30,00,000, ₹33,00,000, ₹36,60,000, ₹40,00,000, ₹46,00,000। कर-पश्चात लाभ ₹4,00,000, ₹4,40,000, ₹5,10,000, ₹6,00,000, ₹7,05,000।
- 1चरण 1: आधार चुनें 2021-22 को आधार वर्ष मानें: राजस्व = 100, लाभ = 100।
- 2चरण 2: राजस्व सूचकांक वर्ष का राजस्व ÷ 30,00,000 × 100: 100.0, 110.0, 122.0, 133.3, 153.3।
- 3चरण 3: लाभ सूचकांक वर्ष का लाभ ÷ 4,00,000 × 100: 100.0, 110.0, 127.5, 150.0, 176.2।
- 4चरण 4: प्रवृत्ति अनुपात शुद्ध लाभ अनुपात = लाभ ÷ राजस्व × 100: 13.33%, 13.33%, 13.93%, 15.00%, 15.33%।
निष्कर्ष: पाँच वर्ष में राजस्व 153.3 तक पहुँचा, पर लाभ 176.2 तक; यानी लाभ राजस्व से तेज़ बढ़ा। प्रवृत्ति अनुपात इसकी पुष्टि करता है: शुद्ध लाभ अनुपात 13.33% से बढ़कर 15.33% हुआ। निष्कर्ष: मार्जिन सुधर रहा है।
केस स्टडी (कल्पित): ज़िला दुग्ध सहकारी समिति की पाँच वर्ष की प्रवृत्ति
उदाहरण (काल्पनिक)जब सूचकांक अलग-अलग दिशा में भागें
यह केस समझाने के लिए गढ़ा गया है; समिति और आँकड़े वास्तविक नहीं हैं। एक कल्पित दुग्ध सहकारी समिति का पहला वर्ष आधार (=100) लेकर बिक्री और ख़र्च के सूचकांक पाँच वर्ष तक निकाले गए।
- बिक्री का सूचकांक
- 100, 120, 135, 150, 160।
- कुल ख़र्च का सूचकांक
- 100, 125, 150, 170, 190।
- अंतर
- पाँचवें वर्ष में ख़र्च का सूचकांक बिक्री से 30 अंक ऊपर है। ख़र्च और बिक्री का अनुपात आधार वर्ष के मुक़ाबले 118.8% हो गया, यानी हर रुपये की बिक्री पर ख़र्च लगभग 19% ज़्यादा।
- निष्कर्ष
- बिक्री बढ़ रही है, पर ख़र्च उससे तेज़। यदि यह प्रवृत्ति चली तो लाभ सिकुड़ेगा। समिति को परिवहन और ठंडा करने की लागत जैसे बड़े ख़र्चों की जाँच करनी चाहिए।
सीख
सूचकांक की दो श्रृंखलाओं को साथ रखने से वह फ़ासला दिखता है जो अकेले रुपये के आँकड़ों में छिप जाता है। उत्तर में हमेशा दिशा, कारण और सुझाव लिखें।
पिछले वर्षों के प्रश्न (हल सहित)
2021RAS मुख्य परीक्षापेपर I2 अंक
Name any two methods of Trend analysis. / प्रवृत्ति विश्लेषण की किन्हीं दो विधियों के नाम लिखिए।
आदर्श उत्तर
प्रवृत्ति प्रतिशत (सूचकांक) विधि: आधार वर्ष = 100। प्रवृत्ति अनुपात विधि: अनुपात की वर्षवार दिशा।
अभ्यास प्रश्न (अपने)
अभ्यास प्रश्नलगभग 15 शब्द
प्रवृत्ति प्रतिशत का सूत्र लिखिए।
आदर्श उत्तर
प्रवृत्ति प्रतिशत = वर्ष का आँकड़ा ÷ आधार वर्ष का आँकड़ा × 100; आधार वर्ष = 100।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
सामान्य आकार विवरण क्या है? इसकी एक उपयोगिता बताइए।
आदर्श उत्तर
सामान्य आकार विवरण में हर मद को साझा आधार का प्रतिशत बनाया जाता है: लाभ-हानि विवरण में बिक्री और तुलन-पत्र में कुल संपत्ति या देयताएँ। उपयोगिता: रुपये का आकार हट जाने से अलग आकार की फर्मों की तुलना और उद्योग से तुलना संभव होती है। इसे ऊर्ध्वाधर विश्लेषण भी कहते हैं।
अभ्यास प्रश्नलगभग 50 शब्द
तुलनात्मक विवरण बनाने के चरण लिखिए।
आदर्श उत्तर
पहले दो वर्षों के आँकड़े साथ-साथ लिखें। फिर दूसरे वर्ष में से पहले को घटाकर बदलाव निकालें और वृद्धि या कमी बताएँ। अंत में प्रतिशत बदलाव = बदलाव ÷ पहला वर्ष × 100 निकालें। शर्त: दोनों वर्षों में लेखांकन सिद्धांत एक-से हों, अंतर हो तो पाद-टिप्पणी में लिखें।
अभ्यास प्रश्नलगभग 100 शब्द
प्रवृत्ति विश्लेषण का अर्थ, विधियाँ और सावधानियाँ बताइए।
आदर्श उत्तर
प्रवृत्ति विश्लेषण कई वर्षों के आँकड़ों से दिशा पहचानता है। विधियाँ: प्रवृत्ति प्रतिशत, जिसमें आधार वर्ष को 100 मानकर अन्य वर्षों का सूचकांक बनता है; और प्रवृत्ति अनुपात, जिसमें किसी अनुपात की कई वर्षों की दिशा देखी जाती है। सावधानियाँ: आधार वर्ष का आँकड़ा धनात्मक हो; असामान्य वर्ष आधार न बने; महँगाई के कारण रुपये की क्रय-शक्ति बदलती है; छोटे आधार पर प्रतिशत बड़ा दिखता है। इसलिए प्रवृत्ति के साथ उसके कारण भी खोजें, आधार वर्ष का चुनाव सोच-समझकर करें, और निष्कर्ष की पुष्टि सामान्य आकार विवरण तथा अनुपात जैसी अन्य तकनीकों से भी कर लें।
उत्तर कैसे लिखें (10 अंक, 100 शब्द)
भूमिका
प्रश्न का नमूना: "तुलनात्मक विवरण, सामान्य आकार विवरण और प्रवृत्ति विश्लेषण की तुलना कीजिए।" तालिका-जैसा ढाँचा रखें।
मुख्य भाग
- तीनों की एक-एक पंक्ति की परिभाषा (30 शब्द)
- आधार का अंतर: पिछला वर्ष, बिक्री या कुल संपत्ति, आधार वर्ष = 100 (30 शब्द)
- उपयोगिता और सीमा (25 शब्द)
- एक संख्यात्मक झलक (15 शब्द)
निष्कर्ष
निष्कर्ष: तीनों पूरक हैं; एक साथ पढ़ने से पूरी तस्वीर बनती है।
अतिरिक्त मूल्य
- क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर शब्द लिखें
- आधार का नाम स्पष्ट लिखें
- एक छोटा संख्यात्मक उदाहरण जोड़ें
त्वरित पुनरावृत्ति
- तुलनात्मक विवरण = क्षैतिज; बदलाव = दूसरा वर्ष − पहला वर्ष
- प्रतिशत बदलाव = बदलाव ÷ पहला वर्ष × 100
- सामान्य आकार = ऊर्ध्वाधर; लाभ-हानि में बिक्री = 100, तुलन-पत्र में कुल संपत्ति या देयताएँ = 100
- सामान्य आकार का लाभ: अलग आकार की फर्मों की तुलना
- प्रवृत्ति प्रतिशत = वर्ष ÷ आधार वर्ष × 100; आधार वर्ष = 100
- प्रवृत्ति की दो विधियाँ: प्रवृत्ति प्रतिशत (सूचकांक) और प्रवृत्ति अनुपात
- आधार वर्ष धनात्मक और सामान्य होना चाहिए
- तुलना की शर्त: एक-से लेखांकन सिद्धांत
- सीमाएँ: मूल्य-स्तर, लेखांकन नीति, अमौद्रिक पक्ष
- पूछा गया: 2021 पेपर I, 2 अंक, प्रवृत्ति की दो विधियाँ
याद रखने योग्य शब्द
- क्षैतिज
- ऊर्ध्वाधर
- आधार वर्ष
- सूचकांक
- प्रवृत्ति अनुपात