मुख्य सामग्री पर जाएं
पेपर I · इकाई III · भाग ग

तुलनात्मक, सामान्य आकार और प्रवृत्ति विश्लेषण: चरण, सूत्र और कल्पित उदाहरण

तीनों तकनीकों के चरण, आधार का अंतर, कल्पित तुलन-पत्र और पाँच वर्ष के सूचकांक, और 2021 का प्रश्न हल सहित।

  • क्षैतिज
  • ऊर्ध्वाधर
  • आधार वर्ष = 100
  • प्रवृत्ति अनुपात
3 अक्टूबर 2026 को सत्यापित

सिलेबस में

RPSC सिलेबस (09-01-2026), पेपर I, इकाई III, भाग ग: "Financial statement of a company; techniques of analysis of financial statements; cash flow statement; basic knowledge of responsibility and social accounting." इस पृष्ठ पर तीन तकनीकें हैं: तुलनात्मक विवरण, सामान्य आकार विवरण और प्रवृत्ति विश्लेषण।

इस विषय को क्यों पढ़ें

याद रखें

  • 2021 के पेपर I में 2 अंक का प्रश्न आया था: प्रवृत्ति विश्लेषण की किन्हीं दो विधियों के नाम लिखिए। यह प्रश्न नाम और एक पंक्ति में पहचान माँगता है।
  • इसी विषय से 5 अंक का संख्यात्मक प्रश्न बनाना आसान है (तुलनात्मक या सामान्य आकार विवरण तैयार करना), इसलिए गणना की रीति और हर का आधार पक्का करें।
  • तीनों तकनीकों में अंतर पूछा जाए तो आधार चुनना ही मुख्य बात है: पिछला वर्ष (तुलनात्मक), बिक्री या कुल संपत्ति (सामान्य आकार), आधार वर्ष = 100 (प्रवृत्ति)।

बात सीधी भाषा में: तीन तरह से देखना

मान लीजिए किसी ज़िले में बीते पाँच वर्षों के गेहूँ उत्पादन के आँकड़े हैं। आप तीन सवाल पूछ सकते हैं। पिछले साल से इस साल कितना बढ़ा? पड़ोसी ज़िले से तुलना करने पर इस ज़िले की कुल फ़सल में गेहूँ का हिस्सा कितना है? और पाँच साल पहले को सौ मानें तो आज कहाँ हैं? पहला सवाल तुलनात्मक विश्लेषण है, दूसरा सामान्य आकार विश्लेषण और तीसरा प्रवृत्ति विश्लेषण। तीनों वित्तीय विवरणों पर इसी तरह लगते हैं।

NCERT के अनुसार तुलनात्मक विवरण दो या अधिक अवधियों की स्थिति की तुलना का विचार देते हैं और इसे क्षैतिज विश्लेषण कहते हैं। सामान्य आकार विवरण हर मद को साझा आधार का प्रतिशत बनाते हैं और इसे ऊर्ध्वाधर विश्लेषण कहते हैं। प्रवृत्ति विश्लेषण कई वर्षों की श्रृंखला में आधार वर्ष की तुलना में प्रतिशत बदलाव देखता है।

तुलनात्मक विवरण: बनाने के चरण

तुलनात्मक विवरण (Comparative Statement) में लाभ-हानि विवरण या तुलन-पत्र के दो वर्षों के आँकड़े अगल-बगल स्तंभों में रखे जाते हैं और उनका बदलाव दिखाया जाता है। NCERT के अनुसार तीन चरण हैं। पहले, दोनों वर्षों के रुपये के आँकड़े लिखें। दूसरे, पहले वर्ष को दूसरे वर्ष में से घटाकर बदलाव निकालें और वृद्धि (+) या कमी (−) लिखें। तीसरे, प्रतिशत बदलाव निकालें: बदलाव ÷ पहले वर्ष का आँकड़ा × 100। इस तरह निरपेक्ष (रुपये में) और सापेक्ष (प्रतिशत में), दोनों रूपों में बदलाव दिखता है।

एक शर्त NCERT ने साफ़ लिखी है: तुलना तभी सार्थक है जब दोनों वर्षों के विवरण एक-से लेखांकन सिद्धांतों पर बने हों। अंतर हो तो उसे पाद-टिप्पणी में बताना चाहिए। तुलन-पत्र की व्याख्या करते समय NIOS तीन बातें देखने को कहती है: चालू वित्तीय स्थिति और तरलता (दोनों वर्षों की कार्यशील पूँजी), दीर्घकालीन वित्तीय स्थिति, और लाभप्रदता।

तुलनात्मक लाभ-हानि विवरण (कल्पित: सरस्वती मसाले लिमिटेड)

मद2024-25 (₹)2025-26 (₹)बदलाव (₹)प्रतिशत बदलाव
प्रचालन से राजस्व40,00,00046,00,0006,00,00015.00%
अन्य आय1,00,0001,20,00020,00020.00%
कुल राजस्व41,00,00047,20,0006,20,00015.12%
व्यय33,00,00037,80,0004,80,00014.55%
कर-पूर्व लाभ8,00,0009,40,0001,40,00017.50%
कर (25%, कल्पित)2,00,0002,35,00035,00017.50%
कर-पश्चात लाभ6,00,0007,05,0001,05,00017.50%

कल्पित आँकड़े; कर की दर 25% केवल उदाहरण के लिए मानी गई है। हर प्रतिशत = बदलाव ÷ 2024-25 का आँकड़ा × 100।

तुलनात्मक तुलन-पत्र (कल्पित)

मद2024-25 (₹)2025-26 (₹)बदलाव (₹)प्रतिशत बदलाव
अंश पूँजी10,00,00012,00,000+2,00,000+20.00%
संचित आय और अधिशेष4,00,0005,50,000+1,50,000+37.50%
दीर्घकालीन उधार6,00,0005,00,000-1,00,000-16.67%
व्यापारिक देय3,00,0004,50,000+1,50,000+50.00%
कुल देयताएँ23,00,00027,00,000+4,00,000+17.39%
स्थिर संपत्ति12,00,00014,00,000+2,00,000+16.67%
स्टॉक5,00,0006,50,000+1,50,000+30.00%
व्यापारिक प्राप्य4,00,0004,50,000+50,000+12.50%
रोकड़ और रोकड़ तुल्य2,00,0002,00,00000.00%
कुल संपत्ति23,00,00027,00,000+4,00,000+17.39%

कल्पित आँकड़े; दोनों वर्षों में कुल देयताएँ और कुल संपत्ति बराबर हैं।

तुलनात्मक विवरण की व्याख्या: ऊपर के आँकड़ों से

लाभ-हानि विवरण में प्रचालन से राजस्व 15% बढ़ा, पर कर-पूर्व लाभ 17.5% बढ़ा, यानी लाभ राजस्व से तेज़ बढ़ा। कारण यह है कि व्यय केवल 14.5% बढ़े। यह अच्छा संकेत है, पर देखना होगा कि क्या यह सिर्फ़ कुछ ख़र्च टलने की वजह से तो नहीं हुआ।

तुलन-पत्र में अंश पूँजी और संचित अधिशेष बढ़े, दीर्घकालीन उधार ₹1,00,000 घटा, यानी कंपनी ने अपने स्रोतों से ऋण चुकाया। पर स्टॉक 30% बढ़ा जबकि राजस्व केवल 15% बढ़ा: माल बिक्री से तेज़ जमा हो रहा है। व्यापारिक देय भी 50% बढ़े, जिससे चालू अनुपात 3.67:1 से घटकर 2.89:1 रह गया (चालू संपत्ति 11,00,000 से 13,00,000 और चालू देयता 3,00,000 से 4,50,000; कार्यशील पूँजी ₹8,00,000 से ₹8,50,000)। अनुपात अब भी 2:1 की सामान्य कसौटी से ऊपर है, पर दिशा ध्यान देने लायक़ है।

सामान्य आकार विवरण: बनाने के चरण

सामान्य आकार विवरण (Common Size Statement) में एक मद को 100 मानकर बाक़ी सब मदें उसके प्रतिशत में लिखी जाती हैं। NCERT के तीन चरण हैं: पहले, दो अवधियों के रुपये के आँकड़े लिखें; दूसरे, साझा आधार को 100 मानें (लाभ-हानि विवरण में प्रचालन से राजस्व; तुलन-पत्र में कुल संपत्ति या कुल देयताएँ); तीसरे, हर मद का उस आधार से प्रतिशत निकालें। इसे घटक प्रतिशत विवरण भी कहते हैं।

सामान्य आकार विवरण की ख़ास उपयोगिता यह है कि रुपये का आकार हट जाता है। 5 करोड़ और 500 करोड़ की दो कंपनियों की तुलना केवल प्रतिशत से हो सकती है। NCERT के अनुसार इसी कारण यह अंतर-फर्म तुलना और पूरे उद्योग के साथ तुलना में उपयोगी है, और कई वर्षों के सामान्य आकार विवरण बनाने पर प्रतिशतों की बदलती दिशा भी दिखती है।

सामान्य आकार तुलन-पत्र (कुल = 100%)

कुल का प्रतिशत(कल्पित आँकड़े)
  • 2024-25
  • 2025-26
  • अंश पूँजी43.5%44.4%
  • संचित आय और अधिशेष17.4%20.4%
  • दीर्घकालीन उधार26.1%18.5%
  • व्यापारिक देय13%16.7%
  • स्थिर संपत्ति52.2%51.9%
  • स्टॉक21.7%24.1%
  • व्यापारिक प्राप्य17.4%16.7%
  • रोकड़ और रोकड़ तुल्य8.7%7.4%
मद2024-252025-26
अंश पूँजी43.5%44.4%
संचित आय और अधिशेष17.4%20.4%
दीर्घकालीन उधार26.1%18.5%
व्यापारिक देय13.0%16.7%
स्थिर संपत्ति52.2%51.9%
स्टॉक21.7%24.1%
व्यापारिक प्राप्य17.4%16.7%
रोकड़ और रोकड़ तुल्य8.7%7.4%

ऊपर के कल्पित तुलन-पत्र से; देयताओं का आधार कुल देयताएँ और संपत्तियों का आधार कुल संपत्ति है।

सामान्य आकार विवरण की व्याख्या

संपत्ति में स्टॉक का हिस्सा 21.7% से बढ़कर 24.1% हो गया, जबकि रोकड़ का हिस्सा 8.7% से घटकर 7.4% रह गया। यानी संपत्ति की बनावट माल की ओर झुक रही है और नक़दी की गुंजाइश घट रही है। देयता की ओर दीर्घकालीन उधार का हिस्सा 26.1% से घटकर 18.5% रह गया और अंश पूँजी तथा संचित आय का मिला हिस्सा बढ़ा, यानी कंपनी अपने पैसे पर ज़्यादा निर्भर है। रुपये के बदलाव में जो बात छुपी रहती है, वह प्रतिशत में साफ़ दिखती है।

प्रवृत्ति विश्लेषण: आधार वर्ष और प्रतिशत

प्रवृत्ति विश्लेषण (Trend Analysis) कई वर्षों के वित्तीय आँकड़ों का अध्ययन है। NCERT के अनुसार प्रवृत्ति प्रतिशत वह प्रतिशत संबंध है जिसमें अलग-अलग वर्षों की हर मद आधार वर्ष की उसी मद के सापेक्ष लिखी जाती है। NIOS के अनुसार आधार वर्ष सामान्यतः पहला वर्ष होता है, कुछ मामलों में अंतिम वर्ष भी, और उसका आँकड़ा 100 माना जाता है। सूत्र: प्रवृत्ति प्रतिशत = (किसी वर्ष का आँकड़ा ÷ आधार वर्ष का आँकड़ा) × 100। 100 से ऊपर का आँकड़ा वृद्धि और नीचे का आँकड़ा कमी दिखाता है।

NCERT प्रवृत्ति विश्लेषण का महत्त्व इस तरह बताती है: लंबे समय की तस्वीर कारोबार के स्वभाव में बुनियादी बदलाव का संकेत दे सकती है। किसी अनुपात की प्रवृत्ति देखकर पता लगाया जा सकता है कि वह गिर रहा है, बढ़ रहा है या लगभग स्थिर है, और उसी से अच्छे या ख़राब प्रबंधन का संकेत मिलता है।

प्रवृत्ति विश्लेषण की दो विधियाँ (2021 के प्रश्न का आधार)

पाठ्य-पुस्तकों में विधियों की सूची एक-सी नहीं मिलती। NCERT और NIOS की सामग्री से दो नाम सुरक्षित बनते हैं: NIOS प्रवृत्ति प्रतिशत की रीति स्पष्ट देती है और NCERT अनुपातों की प्रवृत्ति देखने की बात कहती है। पहली, प्रवृत्ति प्रतिशत विधि (सूचकांक विधि): आधार वर्ष = 100 मानकर बाक़ी वर्षों के आँकड़े उसके प्रतिशत में लिखे जाते हैं। दूसरी, प्रवृत्ति अनुपात विधि: किसी अनुपात, जैसे शुद्ध लाभ अनुपात या चालू अनुपात, को कई वर्षों के लिए निकालकर उसकी दिशा देखी जाती है।

विश्लेषण के रूप में एक बात जोड़ी जा सकती है: कई विद्यार्थी आँकड़ों का रेखा-चित्र (ग्राफ़) भी प्रवृत्ति की एक विधि लिख देते हैं। असल में रेखा-चित्र इन्हीं गणनाओं को पढ़ने का एक प्रस्तुति-तरीक़ा है। परीक्षा में पहले दोनों नाम लिखें, और चाहें तो ग्राफ़ को प्रस्तुति के रूप में एक शब्द में जोड़ दें।

पाँच वर्ष का प्रवृत्ति विश्लेषण (कल्पित, 2021-22 = 100)

सूचकांक (2021-22 = 100)(कल्पित आँकड़े)
  • राजस्व सूचकांक
  • लाभ सूचकांक
वर्षराजस्व (₹)राजस्व सूचकांककर-पश्चात लाभ (₹)लाभ सूचकांकशुद्ध लाभ अनुपात
2021-2230,00,000100.04,00,000100.013.33%
2022-2333,00,000110.04,40,000110.013.33%
2023-2436,60,000122.05,10,000127.513.93%
2024-2540,00,000133.36,00,000150.015.00%
2025-2646,00,000153.37,05,000176.215.33%

कल्पित आँकड़े। सूचकांक = वर्ष का आँकड़ा ÷ 2021-22 का आँकड़ा × 100; शुद्ध लाभ अनुपात = कर-पश्चात लाभ ÷ राजस्व × 100।

प्रवृत्ति पढ़ते समय सावधानियाँ

प्रवृत्ति प्रतिशत की गणना तब तक सीधी है जब तक आधार वर्ष का आँकड़ा धनात्मक हो। आधार वर्ष में शून्य या घाटा हो तो प्रतिशत निकल ही नहीं सकता या भ्रामक होगा। दूसरी सावधानी आधार वर्ष के चुनाव की है: कोई असामान्य वर्ष, जैसे महामारी का साल, आधार बन जाए तो पूरी श्रृंखला विकृत दिखेगी। तीसरी, महँगाई के कारण रुपये के आँकड़े अलग-अलग वर्षों में बराबर क्रय-शक्ति के नहीं होते; NCERT की सीमाओं में मूल्य-स्तर के बदलाव का उल्लेख है। चौथी, केवल प्रतिशत देखकर निष्कर्ष न निकालें: आधार छोटा हो तो प्रतिशत बड़ा दिखेगा।

तीनों तकनीकों का अंतर

आधारतुलनात्मक विवरणसामान्य आकार विवरणप्रवृत्ति विश्लेषण
दूसरा नामक्षैतिज विश्लेषणऊर्ध्वाधर विश्लेषण (घटक प्रतिशत)प्रवृत्ति प्रतिशत
अवधिसामान्यतः दो वर्षएक या दो वर्षकई वर्ष (श्रृंखला)
तुलना का आधारपिछला वर्षबिक्री या कुल संपत्ति (=100)आधार वर्ष (=100)
क्या दिखाता हैरुपये और प्रतिशत में बदलावमदों की बनावट और अनुपातदीर्घकालीन दिशा
सबसे उपयोगीवर्ष-दर-वर्ष परिवर्तनअलग आकार की फर्मों की तुलनालंबी अवधि की दिशा

NCERT (कक्षा 12, अध्याय 4) और NIOS (पाठ 27) के आधार पर।

प्रवाह: प्रवृत्ति प्रतिशत कैसे निकालें

  1. आधार वर्ष चुनें

    सामान्यतः पहला वर्ष

  2. उसे 100 मानें

    आँकड़ा धनात्मक हो

  3. हर वर्ष ÷ आधार वर्ष

    × 100

  4. दिशा पढ़ें

    100 से ऊपर वृद्धि, नीचे कमी

चरण NCERT और NIOS के प्रवृत्ति प्रतिशत की रीति से।

मुख्य तथ्य

तुलनात्मक विवरण
क्षैतिज विश्लेषण; बदलाव और प्रतिशत बदलाव (पहला वर्ष आधार)
सामान्य आकार विवरण
ऊर्ध्वाधर विश्लेषण; लाभ-हानि में बिक्री, तुलन-पत्र में कुल संपत्ति या देयताएँ = 100
प्रवृत्ति प्रतिशत
आधार वर्ष (प्रायः पहला वर्ष) = 100; वर्ष का आँकड़ा ÷ आधार वर्ष × 100
प्रवृत्ति की दो विधियाँ (परीक्षा के लिए)
प्रवृत्ति प्रतिशत (सूचकांक) और प्रवृत्ति अनुपात; पुस्तकों में सूची अलग मिल सकती है
अंतिम जाँच
2 अक्टूबर 2026

परीक्षा में आम ग़लतियाँ

याद रखें

  • प्रतिशत बदलाव में पहले की जगह दूसरे वर्ष से भाग देना: हर में पहला (आधार) वर्ष आता है।
  • आधार वर्ष को 100 की जगह 0 मान लेना: आधार वर्ष का सूचकांक हमेशा 100 होता है।
  • तुलन-पत्र के सामान्य आकार में हर मद को बिक्री का प्रतिशत बना देना: तुलन-पत्र में आधार कुल संपत्ति या कुल देयताएँ होती हैं।
  • विधियों के नाम पूछे जाने पर सूत्र लिख देना: 2 अंक में दो नाम और एक-एक पंक्ति की पहचान लिखें।
  • केवल गणना देकर रुक जाना: एक पंक्ति में व्याख्या, जैसे लाभ राजस्व से तेज़ बढ़ा, ज़रूर जोड़ें।